अध्याय ३२९
श्लोक 1
छन्दोजातिनिरूपणम् अग्निर् उवाच चतुःशतमुत्कृतिः स्यादुकृतेश् चतुरस्त्यजेत् ।अभिसंव्या प्रत्यकृतिस्तानि छन्दांशि वै पृथक्
chandojātinirūpaṇam agnir uvāca catuḥśatamutkṛtiḥ syādukṛteś caturastyajet / abhisaṃvyā pratyakṛtistāni chandāṃśi vai pṛthak
हिन्दी अर्थ
वीथी, प्रहसन, डिम और ईहामृग। अग्निपुराणमें ये दस भेद तो मिलते ही हैं, सत्रह भेद और उपलब्ध होते हैं। इन्हींमें 'विलासिका' नामक एक भेद और जोड़कर विश्वनाथने सब भेदोंकी सम्मिलित संख्या अट्राईस कर दी है। उन्होंने प्रथम दस भेदोंको 'रूपक' और शेष अठारह भेदोंको “उपरूपक' बताया है। अग्निपुराणोक्त 'कर्णा' नामक भेद 'साहित्यदर्पण'में “प्रकरणी 'के नामसे और ' भाणी' नामक भेद “संलापक' नामसे लिखा गया है।
English
One who offers a droa (a measure) of barley soaked in