अध्याय ३५६
श्लोक 1
तिङ्विभक्तिसिद्धरूपं कुमार उवाच तिङ्विभक्तिं प्रवक्ष्यामि तथादेशं समासतः ।तिङ्स्त्रिष्वपि वर्तन्ते भावे कर्मणि कर्तरि
tiṅvibhaktisiddharūpaṃ kumāra uvāca tiṅvibhaktiṃ pravakṣyāmi tathādeśaṃ samāsataḥ / tiṅstriṣvapi vartante bhāve karmaṇi kartari
हिन्दी अर्थ
कुमार स्कन्ध कहते हैं- कात्यायन! अब तद्धित' इस प्रकार है-' अंस' शब्दसे “लच्' प्रत्यय त्रिविध 'तद्धित'का वर्णन करूँगा। “तद्धित 'के होनेपर ' अंसलः ' बनता है; इसका अर्थ है-- तीन भेद हैं-सामान्यावृत्ति तद्धित, अव्यय बलवान्। 'वत्स' शब्दसे 'लच्' प्रत्यय होनेपर तद्धित तथा भाववाचक तद्धित। 'सामान्यावृत्ति “वत्सलः ' रूप होता है, इसका अर्थ स्नेहवान् है। पाणिनि-व्याकरणके अनुसार ' वत्सांसाभ्यां कामबले।' (५। २ । ९८) --इस सूत्रसे क्रमशः “कामवान्? और ' बलवान्'के अर्थमें 'वत्स' और ' अंस' शब्दोंसे “लच्' प्रत्यय होता है। सूत्रमें 'काम' तथा 'बल' शब्द अर्श आद्यजन्य माने गये हैं। “काम' शब्द यहाँ 'स््रेह' का
English
Sudhanva, Sudhanu, Pariksit and Arimejaya (were the sons) of Kuru. Suhotra was from Sudhanva. Cyavana was born from Suhotra.