Agni Purana· Agni Purāṇa
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अध्याय 362 / 381

Adhyaya 363

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पूर्ण अध्याय पाठ29 श्लोक

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अध्याय ३६२

श्लोक 1

नृब्रह्मक्षत्रविट्शूद्रवर्गाः अग्निर् उवाच नृब्रह्मक्षत्रविट्शूद्रवर्गान्वक्ष्ये ऽथ नामतः ।नरः पञ्चजना मर्त्य यद्योषावंला वधूः

nṛbrahmakṣatraviṭśūdravargāḥ agnir uvāca nṛbrahmakṣatraviṭśūdravargānvakṣye 'tha nāmataḥ / naraḥ pañcajanā martya yadyoṣāvaṃlā vadhūḥ

हिन्दी अर्थ

“वाक्य' कहलाते हैं । पूर्वकालमें बीती हुई सच्ची घटनाओंका वर्णन करनेवाले ग्रन्थको ' इतिहास' तथा 'पुरावृत्त' कहते हैं। (सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वन्तर और बंशानुचरित-इन) पाँच लक्षणोंसे

English

One should be made to drink the juice of SrAgavera (ginger) together with honey. It would remedy loss of appetite, difficult breathing and cough. It would also remedy catarrh and excess of phlegm.

अध्याय ३६२

श्लोक 2

कान्तार्थिनी तु या याति सङ्केतं साभिसारिका ।कुलटा पुंश् चल्यसती नग्निका स्त्री च कोटवी

kāntārthinī tu yā yāti saṅketaṃ sābhisārikā / kulaṭā puṃś calyasatī nagnikā strī ca koṭavī

हिन्दी अर्थ

युक्त व्यासादि मुनियोंके ग्रन्थका नाम “पुराण” है। सच्ची घटनाको लेकर लिखी हुई पुस्तक ' आख्यायिका' कहलाती है। कल्पित प्रबन्धको “कथा' कहते हैं। संग्रहके वाचक दो शब्द हैं- समाहार तथा संग्रह । अबूझ पहेलीको 'प्रवह्िका' और 'प्रहेलिका' कहते हैं। पूर्ण करनेके लिये दी हुई संक्षिप्त पदावलीका नाम 'समस्या' और “समासार्था' है। वेदार्थके स्मरणपूर्वक लिखे हुए

English

(The root of) banyan, red earth, (the bark of) lodhra, pomegranate, madhuka and honey should be taken with the scum. It would remove thirst and arrest vomitting.

अध्याय ३६२

श्लोक 3

कात्यायन्यर्धवृद्धा या सैरिन्ध्री परवेश्मगा ।असिक्री स्यादवृद्धा या मलिनी तु रजस्वला

kātyāyanyardhavṛddhā yā sairindhrī paraveśmagā / asikrī syādavṛddhā yā malinī tu rajasvalā

हिन्दी अर्थ

धर्मशास्त्रको 'स्मृति’ और ' धर्मसंहिता’ कहते हैं। आख्या, आह्वा और अभिधान-ये नामके वाचक हैं। ' वार्ता' और ' वृत्तान्त'-दोनों समानार्थक

English

Gudueij vdsaka, lodhra and long pepper together with honey would remedy fever accompanied by thirst, cough and expectoration of phlegm together with blood.

अध्याय ३६२

श्लोक 4

वारस्त्री गणिका वेश्या भ्रातृजायास्तु यातरः ।ननान्दा तु स्वसा पत्युः सपिण्डास्तु सनाभयः

vārastrī gaṇikā veśyā bhrātṛjāyāstu yātaraḥ / nanāndā tu svasā patyuḥ sapiṇḍāstu sanābhayaḥ

हिन्दी अर्थ

शब्द हैं। हूति, आकारणा और आह्वान-ये पुकारनेके अर्थमें आते हैं। वाणीके आरम्भको “उपन्यास' और 'वाङ्मुख' कहते हैं। विवाद और व्यवहार मुकदमेबाजीका नाम है। प्रतिवाक्य और उत्तर-ये दोनों समानार्थक शब्द हैं। उपोद्धात

English

Likewise the juice of the Juice of mixed

अध्याय ३६२

श्लोक 5

समानोदर्यसोदर्यसगर्भसहजास्समाः ।सगोत्रबान्धवज्ञातिबन्धुस्वस्वजनाः समाः

samānodaryasodaryasagarbhasahajāssamāḥ / sagotrabāndhavajñātibandhusvasvajanāḥ samāḥ

हिन्दी अर्थ

कलङ्क लगानेको मिथ्याभिशंसन और अभिशाप कहते हैं। यश और कीर्ति-ये सुयशके नाम हैं। प्रश्न, पृच्छा और अनुयोग--इनका पूछनेके अर्थमें प्रयोग होता है। एक ही शब्दके दो-तीन बार

English

(The pulse called) mar fira removes all kinds of pain. (The washings) of rice would remove excess of bile. jYirgundiy iilrivdy ielu and ahkola would remove poisons.

अध्याय ३६२

श्लोक 6

दम्पती जम्पती भार्यापती जायापती च तौ ।गर्भाशयो जरायुः स्यादुल्वञ्च कललो ऽस्त्रियां

dampatī jampatī bhāryāpatī jāyāpatī ca tau / garbhāśayo jarāyuḥ syādulvañca kalalo 'striyāṃ

हिन्दी अर्थ

उच्चारण करनेको 'आम्रेडित' कहते हैं। परायी निन्दाके अर्थमें कुत्सा, निन्दा और गर्हण शब्दका प्रयोग होता है। साधारण बातचीतको आभाषण और आलाप कहते हैं। पागलोंकी तरह कहे हुए असम्बद्ध या निरर्थक वचनका नाम प्रलाप है। बारंबार किये जानेवाले वार्तालापको अनुलाप कहते हैं। शोकयुक्त उद्गारका नाम विलाप और परिदेवन है । परस्पर विरुद्ध बातचीतको विप्रलाप

English

Asafoetida, natrum and vyoia (dry ginger) and pepper (each weighing) two palas, an ddhaka (a measure) of ghee soaked in four parts of cow's urine would remedy'insanity.

अध्याय ३६२

श्लोक 7

गर्भो भ्रुण इमौ तुल्यौ क्लीवं शण्डो नपुंसकम् ।स्यादुत्तानशया डिम्भा बालो माणवकः स्मृतः

garbho bhruṇa imau tulyau klīvaṃ śaṇḍo napuṃsakam / syāduttānaśayā ḍimbhā bālo māṇavakaḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

और विरोधोक्ति कहते हैं। दो व्यक्तियोंके पारस्परिक वार्तालापका नाम संलाप है। सुप्रलाप और सुवचन-ये उत्तम वाणीके वाचक हैं। सत्यको छिपानेके लिये जिस वाणीका प्रयोग

English

ahkha flower, vacd and kuffha soaked in the juice of brdhmi destroys long-standing epilepsy and insanity. It is also excellent for improving memory.

अध्याय ३६२

श्लोक 8

पिचिण्डिलो वृहत्कुक्षिरवभ्रटो नतनासिके ।विकलाङ्गस्तु पोगण्ड आरोग्यं स्यादनामयम्

piciṇḍilo vṛhatkukṣiravabhraṭo natanāsike / vikalāṅgastu pogaṇḍa ārogyaṃ syādanāmayam

हिन्दी अर्थ

किया जाता है, उसे अपलाप तथा निहव कहते हैं। अमङ्गलमयी वाणीका नाम उशती है । हृदयमें बैठनेवाली युक्तियुक्त बातको संगत और हृदयंगम कहते हैं। अत्यन्त मधुर वाणीमें जो सान्त्वना दी जाती है, उसे सान्त्व कहते हैं। जिन बातोंका परस्पर कोई सम्बन्ध न हो, वे अबद्ध और निरर्थक कहलाती हैं। निष्ठुर और परुष शब्द कठोर वाणीके तथा अश्लील और ग्राम्य शब्द

English

The ghee made up of the five products got from a cow has also similar effects. The same with mustard is a

अध्याय ३६२

श्लोक 9

स्यादेडे वधिरः कुब्जे गडुलः कुकरे कुनिः ।क्षयः शोषश् च यक्ष्मा च प्रतिश्यायुस्तु पीनसः

syādeḍe vadhiraḥ kubje gaḍulaḥ kukare kuniḥ / kṣayaḥ śoṣaś ca yakṣmā ca pratiśyāyustu pīnasaḥ

हिन्दी अर्थ

गंदी बातोंके बोधक हैं । प्रिय लगनेवाली वाणीको सूनृत कहते हैं । सत्य, तथ्य, ऋत और सम्यक् -- ये यथार्थ वचनका बोध करानेवाले हैं। नाद,

English

A decoction prepared from snake-gourd, amrlay bhSni- mbdy vdsdy ariffaka, parpafa and bark of khadira would appease the fever due to tumour.

अध्याय ३६२

श्लोक 10

स्त्री क्षुत्क्षुतं क्षयं पुंसि कासस्तु क्षवथुः पुमान् ।शोथस्तु श्वयथुः शोफः पादस्फोटो विपादिका

strī kṣutkṣutaṃ kṣayaṃ puṃsi kāsastu kṣavathuḥ pumān / śothastu śvayathuḥ śophaḥ pādasphoṭo vipādikā

हिन्दी अर्थ

विराव-ये अव्यक्त शब्दके वाचक हैं। कपड़ों और पत्तोंसे जो आवाज होती है, उसे मर्मर कहते हैं। आभूषणोंकी ध्वनिका नाम शिञ्जित है। वीणाके स्वरको निक्कण और क्काण कहते हैं तथा पक्षियोंके कलरवका नाम वाशित है। एक

English

"Kshut" (hunger) feminine; "kshuta" and "kshaya" masculine; "kasa" (cough), "kshavathu" (sneezing); "shotha", "shvayathu", "shopha" (swelling); "padasphota" and "vipadika" (cracked feet).

अध्याय ३६२

श्लोक 11

किलासं सिध्नकच्छान्तु पाम पामा विचर्चिका ।कोठो मण्डलकं कुष्ठं श्वित्रे द्रुर् नामकार्शसी

kilāsaṃ sidhnakacchāntu pāma pāmā vicarcikā / koṭho maṇḍalakaṃ kuṣṭhaṃ śvitre drur nāmakārśasī

हिन्दी अर्थ

समूहकी आवाजको कोलाहल और कलकल कहते हैं। गीत और गान-ये दोनों समान अर्थके बोधक हैं। प्रतिश्रुत् और प्रतिध्वान-ये प्रतिध्वनिके वाचक हैं। इनमें पहला स्त्रीलिङ्ग

English

"Kilasa", "sidhma", "kachchhu", "pama", "vicharchika" (skin diseases); "kotha", "mandalaka", "kushtha" (leprosy), "shvitra", "dru"; and "arshas" (piles).

अध्याय ३६२

श्लोक 12

अनाहस्तु विबन्धः स्याद्ग्रहणी रुक्प्रवाहिका ।वीजवीर्येन्द्रयं शुक्रं पललं क्रव्यमामिषं

anāhastu vibandhaḥ syādgrahaṇī rukpravāhikā / vījavīryendrayaṃ śukraṃ palalaṃ kravyamāmiṣaṃ

हिन्दी अर्थ

(और दूसरा नपुंसकलिङ्ग) है। वीणाके कण्ठसे निषाद आदि स्वर प्रकट होते हैं मधुर एवं अस्फुट ध्वनिको 'कल' कहते हैं और सूक्ष्म कलका नाम काकली है। गम्भीर स्वरको 'मन्द्र' तथा बहुत ऊँची आवाजको 'तार' कहते हैं। कल, मन्द्र और तार-इन तीनों

English

"Anaha" and "vibandha" (constipation); "grahani" (dysentery), "pravahika" (diarrhoea); "shukra" is semen, the vital seed; "palala" is flesh, "kravya" and "amisha" raw meat.

अध्याय ३६२

श्लोक 13

वुक्काग्रमांसं हृदयं हन्मेदस्तु वपा वसा ।पश्चाद्ग्रीवा शिरा मन्या नाडी तु धमनिः शिरा

vukkāgramāṃsaṃ hṛdayaṃ hanmedastu vapā vasā / paścādgrīvā śirā manyā nāḍī tu dhamaniḥ śirā

हिन्दी अर्थ

शब्दोंका तीनों ही लिङ्गोंमें प्रयोग होता है। गाने और बजानेकी मिली हुई लयको एकताल कहते हैं। बीणाके तीन नाम हैं-वीणा, वल्लकी और विपञ्ची। सात तारोंसे बजनेवाली वीणाका (जिसे

English

"Hridaya" (heart), "hanu" (jaw); "meda", "vapa", "vasa" (fat); "paschadgriva" (nape), "shira" (vein), "manya"; "nadi" and "dhamani" (vessel, artery).

अध्याय ३६२

श्लोक 14

तिलकं क्तोम मस्तिष्कं द्रूषिका नेत्रयोर्मलम् ।अन्त्रं पुरी तद्गुल्मस्तु प्लीहा पुंस्य् अथ वस्नसा

tilakaṃ ktoma mastiṣkaṃ drūṣikā netrayormalam / antraṃ purī tadgulmastu plīhā puṃsy atha vasnasā

हिन्दी अर्थ

हिंदीमें सतार या सितार कहते हैं) परिवादिनी नाम है। (बाजोंके चार भेद हैं-तत, आनद्ध, सुषिर और घन। इनमें) वीणा आदि बाजेको तत, ढोल और मृदङ्ग आदिको आनद्ध, बाँसुरी आदिको सुषिर और काँसकी झाँझ आदिको घन कहते हैं। इन चारों प्रकारके बाजोंका नाम वाद्य, वादित्र और आतोद्य है। ढोलके दो नाम हैं- मृदङ्ग और मुरज। उसके तीन भेद हैं-अङ्कच,

English

"Tilaka" (mole), "mastishka" (brain), "drushika" (the secretion of the eyes); "antra" (intestine), "puri"; "gulma" (spleen-mass), "pliha" (spleen, masculine); "vasnasa".

अध्याय ३६२

श्लोक 15

स्नायुः स्त्रियां कालखण्डयकृती तु समे इमे ।स्यात् कर्पूरः कपालो ऽस्त्री कीकसङ्कुल्यमस्थि च

snāyuḥ striyāṃ kālakhaṇḍayakṛtī tu same ime / syāt karpūraḥ kapālo 'strī kīkasaṅkulyamasthi ca

हिन्दी अर्थ

आलिङ्गय और ऊर्ध्व । सुयशका ढिंढोरा पीटनेके लिये जो डंका होता है, उसे यशःपटह और ढक्का कहते हैं। भेरीके अर्थमें आनक और दुन्दुभि शब्दोंका प्रयोग होता है। आनक और

English

"Snayu" (sinew, feminine); "kalakhanda", "yakrit" (liver) are alike; "karpura" and "kapala" (skull, neuter); "kikasa" and "sankulya" are bones.

अध्याय ३६२

श्लोक 16

स्याच्छरीरास्थ्नि कङ्कालः पृष्ठास्थ्नि तु कशेरुका ।शिरो ऽस्थनि करोटिः स्त्री पार्श्वास्थनि तु पर्शुका

syāccharīrāsthni kaṅkālaḥ pṛṣṭhāsthni tu kaśerukā / śiro 'sthani karoṭiḥ strī pārśvāsthani tu parśukā

हिन्दी अर्थ

पटह-ये दोनों पर्यायवाची शब्द हैं। झर्झरी (झाँझ) और डिण्डिम (ढिंढोरा) आदि बाजोंके भेद हैं। मर्दल और पणव-ये दोनों समानार्थक हैं (इन्हें भी एक प्रकारका बाजा ही समझना चाहिए)। जिससे गाने-बजानेकी क्रिया और कालका विवेक हो, उस गतिका नाम “ताल' है। गीत और वाद्य आदिका समान अवस्थामें होना “लय' कहलाता है। ताण्डव, नास्य, लास्य और

English

"Kankala" is the bones of the body; "kaseruka" the bones of the back; "karoti" the skull-bones (feminine); "parshuka" the rib bones.

अध्याय ३६२

श्लोक 17

अङ्गं प्रतीको ऽवयवः शरीरं वर्ष्म विग्रहः ।कटो ना श्रोणिफलकं कटिः श्रोणिः ककुद्मती

aṅgaṃ pratīko 'vayavaḥ śarīraṃ varṣma vigrahaḥ / kaṭo nā śroṇiphalakaṃ kaṭiḥ śroṇiḥ kakudmatī

हिन्दी अर्थ

नर्तन-ये सब “नृत्य'के वाचक हैं। नृत्य, गान और वाद्य-इन तीनोंको 'तौर्यत्रिक' एवं “नाट्य ' कहते हैं। नाटकमें राजाको भट्टारक और देव कहा जाता है तथा उनके साथ जिसका अभिषेक

English

"Anga", "pratika", "avayava" (limb); "sharira", "varshma", "vigraha" (body); "kata" (masculine), "shronifalaka", "kati", "shroni" (hip, waist).

अध्याय ३६२

श्लोक 18

पश्चान्नितम्बः स्त्रीकट्याः क्लीवे तु जघनं पुरः ।कूपकौ तु नितम्बस्थौ द्वयहीने ककुन्दरे

paścānnitambaḥ strīkaṭyāḥ klīve tu jaghanaṃ puraḥ / kūpakau tu nitambasthau dvayahīne kakundare

हिन्दी अर्थ

हुआ हो, उस महारानीको देवी कहते हैं । शृङ्गार, वीर, करुण, अद्भुत, हास्य, भयानक, बीभत्स तथा रौद्रये आठ रस हैं। इनमें शृङ्गार-रसके तीन नाम हैं-शृङ्गार, शुचि और उज्चल। वीर- रसके दो नाम हैं-उत्साहवर्धन और वीर। करुणका बोध करानेवाले सात शब्द हैं- कारुण्य, करुणा, घृणा, कृपा, दया, अनुकम्पा

English

"Nitamba" is the hinder part of a woman's waist; "jaghana" (neuter) the front; "kupaka" lies on the buttocks; "kakundara" is the dimple.

अध्याय ३६२

श्लोक 19

स्त्रियां स्फिचौ कटिप्रोथावुपस्थो वक्ष्यमाणयोः ।भगं योनिर्द्वयोः शिश्नो मेढ्रो मेहनशेफसी

striyāṃ sphicau kaṭiprothāvupastho vakṣyamāṇayoḥ / bhagaṃ yonirdvayoḥ śiśno meḍhro mehanaśephasī

हिन्दी अर्थ

हास्यरसके तथा बीभत्स और विकृत शब्द बीभत्स-रसके वाचक हैं। ये दोनों शब्द तीनों लिङ्गोमें प्रयुक्त होते हैं। अद्भुतका बोध करानेवाले चार शब्द हैं-विस्मय, अद्भुत, आश्चर्य और

English

"Sphich" (the two buttocks); "kati-protha"; "upastha"; "bhaga" and "yoni" (female organ); "shishna", "medhra", "mehana", "shepha" (male organ).

अध्याय ३६२

श्लोक 20

पिचिण्डकुक्षी जठरोदरं तुन्दं कुचौ स्तनौ ।चूचुकन्तु कुचाग्रं स्यान्न ना क्रोडं भुजान्तरम्

piciṇḍakukṣī jaṭharodaraṃ tundaṃ kucau stanau / cūcukantu kucāgraṃ syānna nā kroḍaṃ bhujāntaram

हिन्दी अर्थ

भयंकर और प्रतिभय-ये भयानक अर्थका बोध करानेवाले हैं। रौद्रका पर्याय है-उग्र। ये अद्भुत आदि चौदह शब्द तीनों लिङ्गोंमें प्रयुक्त होते है। भयके वाचक हैं। रति आदि मानसिक विकारोंको भाव कहते हैं। भावको व्यक्त करनेवाले रोमाञ्च आदि कार्योका नाम अनुभाव है। गर्व, अभिमान और अहंकार-ये घमंडके नाम हैं। 'मेरे समान

English

"Pichanda", "kukshi", "jathara", "udara", "tunda" (belly); "kucha", "stana" (breasts); "chuchuka" is the nipple; "kroda" is the chest between the arms.

अध्याय ३६२

श्लोक 21

स्कन्धो भुजशिरो ऽंशो ऽस्त्री सन्धी तस्यैव जत्रुणी ।पुनर्भवः कररुहो नखो ऽस्त्री नखरो ऽस्त्रियां

skandho bhujaśiro 'ṃśo 'strī sandhī tasyaiva jatruṇī / punarbhavaḥ kararuho nakho 'strī nakharo 'striyāṃ

हिन्दी अर्थ

दूसरा कोई नहीं है' ऐसी भावनाको मान और चित्तसमुन्नति कहते हैं । अनादर, परिभव, परिभाव और तिरस्क्रिया-ये अपमानके वाचक हैं । व्रीडा, लज्जा, त्रपा और ही-ये लाजका बोध करानेवाले

English

"Skandha" (shoulder), "bhujashiras", "amsha"; "sandhi" (joint) and "jatru" (collar-bone); "kararuha" and "nakha", "nakhara" (nails).

अध्याय ३६२

श्लोक 22

प्रदेशतालगोकर्णास्तर्जन्यादियुते तते ।अङ्गुष्ठे सकनिष्ठे स्याद्वितस्तिर्द्वादशाङ्गुलः

pradeśatālagokarṇāstarjanyādiyute tate / aṅguṣṭhe sakaniṣṭhe syādvitastirdvādaśāṅgulaḥ

हिन्दी अर्थ

हैं। दूसरेके धनको लेनेकी इच्छाका नाम अभिध्यान है। कौतूहल, कौतुक, कुतुक और कुतूहल--ये चार कौतुकके पर्याय हैं। विलास, विव्वोक,

English

"Pradesha, tala, gokarna" — measures of the spread hand with the forefinger and the others; with thumb and little finger extended, "vitasti" is twelve finger-breadths.

अध्याय ३६२

श्लोक 23

पाणौ च पेटप्रतलप्रहस्ता विस्तृताङ्गुलौ ।बद्धमुष्टिकरो रत्निररत्निः स कनिष्ठवान्

pāṇau ca peṭapratalaprahastā vistṛtāṅgulau / baddhamuṣṭikaro ratniraratniḥ sa kaniṣṭhavān

हिन्दी अर्थ

और भावसे प्रकट होनेवाली स्त्रियोंकी चेष्टाएँ 'हाव' कहलाती हैं। द्रव, केलि, परिहास,

English

"Peta", "pratala", "prahasta" are the open palm with fingers spread; "ratni" is the fist closed, "aratni" the one with little finger extended (cubit-measures).

अध्याय ३६२

श्लोक 24

कम्बुग्रीवा त्रिरेखा सावटुर्घाटा कृकाटिका ।अधः स्याच्चिवुकञ्चौष्ठादथ गण्डौ गलो हनुः

kambugrīvā trirekhā sāvaṭurghāṭā kṛkāṭikā / adhaḥ syāccivukañcauṣṭhādatha gaṇḍau galo hanuḥ

हिन्दी अर्थ

हँसी-परिहासके वाचक हैं। दूसरोंपर आक्षेप करते हुए जो उनकी हँसी उडायी जाती है, उसका नाम “आच्छुरितक' है। मन्द मुस्कानको “स्मित' कहते हैं॥ ७०--८५॥ नीचेके लोकका नाम अधोभुवन और पाताल है। छिद्र, श्वभ्र, वपा और सुषि-ये छिद्रके वाचक हैं। पृथ्वीके भीतर जो छेद (खंदक आदि) होता है, उसे गर्त और अवट कहते हैं।

English

"Kambugriva" (neck with three folds); "avatu", "ghata", "krikatika" (nape); "chibuka" is the chin below the lip; "ganda" (cheek), "gala" (throat), "hanu" (jaw).

अध्याय ३६२

श्लोक 25

अपाङ्गौ नेत्रयोरन्तौ कटाक्षो ऽपाङ्गदर्शने ।चिकुरः कुन्तलो बालः प्रतिकर्म प्रसाधनम्

apāṅgau netrayorantau kaṭākṣo 'pāṅgadarśane / cikuraḥ kuntalo bālaḥ pratikarma prasādhanam

हिन्दी अर्थ

तमिस्र, तिमिर और तम--ये अन्धकारके वाचक हैं। सर्प, पृदाकु, भुजग, दन्दशूक और बिलेशय-- ये साँपोंके नाम हैं। विष, क्ष्वेड और गरल-- ये जहरका बोध करानेवाले हैं। निरयू और

English

"Apanga" is the outer corner of the eyes; "kataksha" a sidelong glance; "chikura", "kuntala", "bala" (hair); "pratikarma", "prasadhana" (toilette).

अध्याय ३६२

श्लोक 26

आकाल्पवेशौ नेपथ्यं प्रत्यक्षं खेलयोगजम् ।चूडामणिः शिरोरत्नं तरलो हारमध्यगः

ākālpaveśau nepathyaṃ pratyakṣaṃ khelayogajam / cūḍāmaṇiḥ śiroratnaṃ taralo hāramadhyagaḥ

हिन्दी अर्थ

दुर्गति-ये नरकके नाम हैं। इनमें दुर्गति शब्द स्त्रीलिङ्ग है। पयस्, कीलाल, अमृत, उदक, भुवन और वन-ये जलके पर्याय हैं। भङ्ग, तरंग, ऊर्मि, कल्लोल और उल्लोल-ये लहरके नाम हैं। पृषत्, बिन्दु और पृषत-ये जलको बूँदोंके नाम हैं। कूल, रोध और तीर-ये तटके वाचक हैं। जलसे तुरंतके बाहर हुए किनारेको “पुलिन' कहते हैं। जम्बाल, पङ्क और कर्दम

English

"Akalpa", "veSha", "nepathya" (dress, costume); "pratyaksha"; "chudamani" is the crest-jewel; "tarala" is the central gem of a necklace.

अध्याय ३६२

श्लोक 27

कर्णिका तालपत्रं स्याल्लम्बनं स्याल्ललन्तिका ।मञ्जीरो नूपुरं पादे किङ्किणी क्षुद्रघण्टिका

karṇikā tālapatraṃ syāllambanaṃ syāllalantikā / mañjīro nūpuraṃ pāde kiṅkiṇī kṣudraghaṇṭikā

हिन्दी अर्थ

ये कीचड़के नाम हैं। तालाब या नदी आदिके भर जानेपर जो अधिक जल बहने लगता है, उसे “जलोच्छास' और परीवाह' कहते हैं । सूखी हुई नदी आदिके भीतर जो गहरे गड्ेमें बचा हुआ

English

"Karnika", "talapatra" (ear ornaments); "lambana", "lalantika" (pendants); "manjira", "nupura" (anklet, on the foot); "kinkini" is a small bell.

अध्याय ३६२

श्लोक 28

दैर्घ्यमायाम आरोहः परिणाहो विशालता ।पटच्चरं जीर्णवस्त्रं संव्यानञ्चोत्तरीयकम्

dairghyamāyāma ārohaḥ pariṇāho viśālatā / paṭaccaraṃ jīrṇavastraṃ saṃvyānañcottarīyakam

हिन्दी अर्थ

जल रहता है, उसका नाम 'कूपक' और “विदारक' है। नदी पार करनेके लिये जो उतराई या खेवा दिया जाता है, उसे आतर एवं तरपण्य कहते हैं। काठकी बनी हुई बाल्टी या जल रखनेके पात्रका नाम द्रोणी है (इससे नावका पानी बाहर निकालते हैं) । मैले जलको 'कलुष' और 'आविल', साफ पानीको 'अच्छ' और “प्रसन्न' तथा गहरे जलको ' गम्भीर' और ' अगाध'

English

"Dairghya", "ayama" (length); "aroha" (height), "parinaha" (girth), "vishalata" (breadth); "patachchara" is worn-out cloth; "samvyana", "uttariya" (upper garment).

अध्याय ३६२

श्लोक 29

रचना स्यात् परिस्पन्द आभोगः परिपूर्णता ।समुद्गकः सम्पुटकः प्रतिग्राहः पतद्ग्रहः

racanā syāt parispanda ābhogaḥ paripūrṇatā / samudgakaḥ sampuṭakaḥ pratigrāhaḥ patadgrahaḥ

हिन्दी अर्थ

कहते हैं। दाश और कैवर्त-ये मल्लाहके नाम हैं। शम्बूक और जलशुक्ति-ये सीपके वाचक हैं। सौगन्धिक और कह्लार ये श्वेत कमलके वाचक हैं। नील कमलको इन्दीवर कहते हैं। उत्पल

English

"Rachana" (arrangement), "parispanda", "abhoga", "paripurnata" (fullness); "samudgaka", "sampuṭaka" (casket); "pratigraha", "patadgraha" (spittoon).

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 362
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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