Agni Purana· Agni Purāṇa
368
अध्याय 368 / 381

Adhyaya 369

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अध्याय ३६८

श्लोक 1

शरीरावयवाः अग्निर् उवाच श्रोत्रं त्वक् चक्षुषी जिह्वा घ्राणं धीः खुञ्च भूतगं ।शब्दस्पर्शरूपरमगन्धाः खादिषु तद्गुणाः

śarīrāvayavāḥ agnir uvāca śrotraṃ tvak cakṣuṣī jihvā ghrāṇaṃ dhīḥ khuñca bhūtagaṃ / śabdasparśarūparamagandhāḥ khādiṣu tadguṇāḥ

हिन्दी अर्थ

पर्यायवाची हैं।) स्त्रीको कमरके पिछले भागको नितम्ब और अगले भागको जघन कहते हैं। “जघन' शब्द नपुंसकलिङ्ग है। नितम्बके ऊपर जो दो गड्रे-से होते हैं, उन्हें कूपक एवं ककुन्दर

English

One who knows the means (of handling an emergent situation ), one who knows the temper (of the horse), one who is pure, one who removes the defects and takes the (good) qualities is always an expert in all acts (engaging the horses).

अध्याय ३६८

श्लोक 2

पायूपस्थौ करौ पादौ वाग्भवेत् कर्मखुन्तथा ।उत्सर्गानन्दकादानगतिवागादि कर्म तत्

pāyūpasthau karau pādau vāgbhavet karmakhuntathā / utsargānandakādānagativāgādi karma tat

हिन्दी अर्थ

कहते हैं। “ककुन्दर' शब्द केवल नपुंसकलिङ्ग है। कटिके मांस-पिण्डका नाम स्फिच् और कटिप्रोथ है। 'स्फिच्' शब्दका प्रयोग स्त्रीलिङ्गमें होता है। नीचे बताये जानेवाले भग और लिङ्ग-दोनोंको उपस्थ कहा जाता है। भग और योनि—ये स्त्री-चिहूके बोधक पर्यायवाची शब्द हैं। शिश्र, मेढ़, मेहन और शेफस्-ये पुरुषचिह्न (लिङ्ग)-के वाचक हैं। पिचण्ड, कुक्षि, जठर,

English

One who has entered the riding ground holding the bridle should ride his steed either from his right or left.

अध्याय ३६८

श्लोक 3

पञ्चकर्मेन्द्रियान्यत्र पञ्चबुद्धीन्द्रियाणि च ।इन्द्रियार्थाश् च पञ्चैव महाभूता मनो ऽधिपाः

pañcakarmendriyānyatra pañcabuddhīndriyāṇi ca / indriyārthāś ca pañcaiva mahābhūtā mano 'dhipāḥ

हिन्दी अर्थ

उदर और तुन्द-ये पेटके अर्थमें आते हैं। कुच और स्तन पर्यायवाची शब्द हैं। कुचोंके अग्रभागका

English

An excellent horse should not be whipped at once after mounting. Whipping causes fright and fear would produce confusion.

अध्याय ३६८

श्लोक 4

आत्माव्यक्तश् चतुर्विंशतत्त्वानि पुरुषः परः ।संयुक्तश् च वियुक्तश् च यथा मत्स्योदके उभे

ātmāvyaktaś caturviṃśatattvāni puruṣaḥ paraḥ / saṃyuktaś ca viyuktaś ca yathā matsyodake ubhe

हिन्दी अर्थ

नाम चूचुक है। नपुंसकलिङ्ग क्रोड तथा भुजान्तर शब्द गोदीके वाचक हैं। स्कन्ध, भुजशिरस् और अंस-ये कंधेके अर्थमें आते हैं। 'अंस' शब्द पुँल्लिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग है। कंधेकी संधियों अर्थात् हँसलीकी हड्डीको जत्रु कहते हैं। पुनर्भव, कररुह, नख और नखर--ये नखोंके नाम हैं। इनमें 'नखर' और 'नख' शब्द स्त्रीलिङ्गके सिवा अन्य दो लिङ्गोंमें प्रयुक्त होते हैं। अँगूठेसे लेकर

English

The rider should conduct (the horse) in a gallop in the morning holding the rein. (He should conduct the horse) slowly in the evening holding the rein but without handling it.

अध्याय ३६८

श्लोक 5

अव्यक्तमास्रितानीह रजःसत्त्वतमांसि च ।आन्तरः पुरुषो जीवः स परं ब्रह्म कारणं

avyaktamāsritānīha rajaḥsattvatamāṃsi ca / āntaraḥ puruṣo jīvaḥ sa paraṃ brahma kāraṇaṃ

हिन्दी अर्थ

तर्जनीतक फैलाये हुए हाथको प्रादेश, आँगूठेसे मध्यमातकको ताल और अनामिकातक फैलाये हुए हाथको गोकर्ण कहते हैं। इसी प्रकार अँगूठेसे कनिष्ठिका अँगुलीतक फैले हुए हाथका

English

(The following are the four political expedients): stroking is said to be conciliation, isolation (from the other steeds is) division, whipping with the whip and other things (is) punishment and biding time (is reckoned as) gift.

अध्याय ३६८

श्लोक 6

स याति परमं स्थानं यो वेत्ति पुरुषं परं ।सप्ताशयाः स्मृता देहे रुधिरस्यैक आशयः

sa yāti paramaṃ sthānaṃ yo vetti puruṣaṃ paraṃ / saptāśayāḥ smṛtā dehe rudhirasyaika āśayaḥ

हिन्दी अर्थ

नाम वितस्ति (बालिस्त या बित्ता) है। इसकी लंबाई बारह अंगुलकी होती है। जब हाथकी सभी अँगुलियाँ फैली हों, तब उसे चपेट, तल और प्रहस्त कहते हैं । मुट्ठी बँधे हुए हाथका नाम रत्नि है। (कोहनीसे लेकर मुट्ठी बँधे हुए हाथतकके मापको भी “रलि' कहते हैं।) कोहनीसे कनिष्ठा अँगुलीतककी लंबाईका नाम अरत्नि है। शङ्खके समान आकारवाली ग्रीवाका

English

The left fore-leg should be tied with the rein to the left hind-leg (of a horse) of mischievous habit. It should be ridden by holding the left rein.

अध्याय ३६८

श्लोक 7

श्लेष्मणश्चामपित्ताभ्यां पक्वाशयस्तु पञ्चमः ।वायुमूत्राशयः सप्तः स्त्रीणां गर्भाशयो ऽष्टमः

śleṣmaṇaścāmapittābhyāṃ pakvāśayastu pañcamaḥ / vāyumūtrāśayaḥ saptaḥ strīṇāṃ garbhāśayo 'ṣṭamaḥ

हिन्दी अर्थ

नाम कम्बुग्रीवा और त्रिरेखा है। गलेकी घाँटीको अवटु, घाटा और कृकाटिका कहते हैं। ओठसे नीचेके हिस्सेका नाम चिबुक है। गण्ड और गल्ल गालके वाचक हैं। गालोंके निचले भागको हनु

English

After having looked at a trusted horse and after having taken a tirm seat on the saddle, ( the horse) should be made to touch his leg with the face by holding (the rein). Such a (posture known as) lokana is beneficial.

अध्याय ३६८

श्लोक 8

पित्तात्पक्वाशयो ऽग्नेः स्याद्योनिर्विकशिता द्युतौ ।पद्मवद्गर्भाशयः स्यात्तत्र घत्ते सरक्तकं

pittātpakvāśayo 'gneḥ syādyonirvikaśitā dyutau / padmavadgarbhāśayaḥ syāttatra ghatte saraktakaṃ

हिन्दी अर्थ

कहते हैं। नेत्रोंके दोनों प्रान्तोंको अपाङ्ग कहा जाता है। उन्हें दिखानेकी चेष्टाको कटाक्ष कहा जाता है। चिकुर, कुन्तल और वाल-ये केशके वाचक हैं। प्रतिकर्म और प्रसाधन शब्द सँवारने और भृङ्गार करनेके अर्थमें आते हैं। आकल्प, वेश और नेपथ्य-ये शब्द प्रत्यक्ष नाटक आदिके खेलमें भिन्न-भिन्न वेष धारण करनेके अर्थमें आते हैं। मस्तकपर धारण किये जानेवाले रत्नका

English

A wise man should know the loss of consciousness and destruction for a horse and the fourth rule, namely, the mofana, is laid down.

अध्याय ३६८

श्लोक 9

शुक्रं स्वशुक्रतश्चाङ्गं कुन्तलान्यत्र कालतः ।न्यस्तं शुक्रमतो योनौ नेति गर्भाशयं मुने

śukraṃ svaśukrataścāṅgaṃ kuntalānyatra kālataḥ / nyastaṃ śukramato yonau neti garbhāśayaṃ mune

हिन्दी अर्थ

नाम चूडामणि और शिरोरत्न है। हारके बीच- बीचमें पिरोये हुए रत्नको तरल कहते हैं।

English

A horse whose leg does not touch the ground in a small circle, that foot should be restrained by means of mofana and vakkana.

अध्याय ३६८

श्लोक 10

ऋतावपि च योनिश्चेद्वातपित्तकफावृता ।भवेत्तदा विकाशित्वं नैव तस्यां प्रजायते

ṛtāvapi ca yoniścedvātapittakaphāvṛtā / bhavettadā vikāśitvaṃ naiva tasyāṃ prajāyate

हिन्दी अर्थ

कर्णिका और तालपत्र-ये कानके आभूषणके नाम हैं। लम्बन और ललन्तिका गलेमें नीचेतक लटकनेवाले हारको कहते हैं। मझीर और नूपुर-ये पैरके आभूषण हैं। किङ्किणी और क्ुद्र्घण्टिका घुँघुरूके नाम हैं। हैर्घ्य, आयाम और आनाह-ये वस्त्र आदिकी लंबाईके बोधक हैं।

English

After striking on the side by kicking (the horse) that has distracted mind while one remain on the seat, the rein is drawn and held by the foot. It is known as grdhya-kanfaka- pOyanam.

अध्याय ३६८

श्लोक 11

बुक्कात्पुक्कसकप्लीहकृतकोष्ठाङ्गहृद्व्रणाः ।तण्डकश् च महाभाग निबद्धान्याशये मतः

bukkātpukkasakaplīhakṛtakoṣṭhāṅgahṛdvraṇāḥ / taṇḍakaś ca mahābhāga nibaddhānyāśaye mataḥ

हिन्दी अर्थ

अर्ज) के अर्थमें आते हैं। पुराने वस्त्रको पटच्चर

English

If a horse stands on the feet and hurts the rear legs, it is known as khalikdra (hurting).

अध्याय ३६८

श्लोक 12

रसस्य पच्यमानस्य साराद्भवति देहिनां ।प्लीहा यकृच्च धर्मज्ञ रक्तफेणाच्च पुक्कसः

rasasya pacyamānasya sārādbhavati dehināṃ / plīhā yakṛcca dharmajña raktapheṇācca pukkasaḥ

हिन्दी अर्थ

कहते हैं। संख्यान और उत्तरीय-ये चादर या दुपट्टेके अर्थमें आते हैं। फूल आदिसे बालोंका शृङ्गार करने या कपोल आदिपर पत्रभङ्ग आदि बनानेको रचना और परिस्पन्द कहते हैं। प्रत्येक उपचारकी पूर्णताका नाम आभोग है। ढक्कनदार पेटीको समुद्गक और सम्पुटक कहते हैं। प्रतिग्राह और पतद्ग्रह-ये पीकदानके नाम हैं

English

The trot, the gallop or the canter.

अध्याय ३६८

श्लोक 13

रक्तं पित्तञ्च भवति तथा तण्डकसंज्ञकः ।मेदोरक्तप्रसाराच्च वुक्कायाः सम्भवः स्मृतः

raktaṃ pittañca bhavati tathā taṇḍakasaṃjñakaḥ / medoraktaprasārācca vukkāyāḥ sambhavaḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें 'कोशगत मनुष्य-वर्गका वर्णन” नामक तीन सौ चौसठवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

It would be ucchvasana (exhalation), if the horse is hurt and taken through a quadrangle by means of a different bridle by cheering.

अध्याय ३६८

श्लोक 14

रक्तमांसप्रसाराच्च भवन्त्यन्त्राणि देहिनां ।सार्धत्रिव्यामसंख्यानि तानि नॄणां विनिर्दिशेत्

raktamāṃsaprasārācca bhavantyantrāṇi dehināṃ / sārdhatrivyāmasaṃkhyāni tāni nṝṇāṃ vinirdiśet

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं-वंश, अन्ववाय, गोत्र, कुल, अभिजन और अन्वय-ये वंशके नाम हैं। कहते हैं। जिसने यज्ञमें व्रतकी दीक्षा ग्रहण की हो, वह आदेष्टा, यष्टा और यजमान कहलाता है। समझ-बूझकर आरम्भ करनेका नाम उपक्रम है। एक गुरुके यहाँ साथ-साथ विद्या पढ्नेवाले

English

After restraining by any one of the three (ways) in order, it should be controlled by taking to the courses such as the circles and the like in order.

अध्याय ३६८

श्लोक 15

त्रिव्यामानि तथा स्त्रीणां प्राहुर्वेदविदो जनः ।रक्तवायुसमायोगात् कामेयस्योद्भवः स्मृतः

trivyāmāni tathā strīṇāṃ prāhurvedavido janaḥ / raktavāyusamāyogāt kāmeyasyodbhavaḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

छात्र परस्पर सतीर्थ्य और एकगुरु कहलाते हैं।

English

Knowers of the Veda say that women have three "vyamas" (spans) too; from the union of blood and wind arises the womb.

अध्याय ३६८

श्लोक 16

कफप्रसाराद्भवति हृदयं पद्मसन्निभं ।अधोमुखं तच्छूषिरं यत्र जीवो व्यवस्थितः

kaphaprasārādbhavati hṛdayaṃ padmasannibhaṃ / adhomukhaṃ tacchūṣiraṃ yatra jīvo vyavasthitaḥ

हिन्दी अर्थ

यज्ञके सदस्योंके नाम हैं। ऋत्विक् और याजक-- ये यज्ञ करानेवाले ऋत्विजोंके वाचक हैं। यजुर्वेदके ज्ञाता ऋत्विजूको अध्वर्यु, सामवेदके जाननेवालेको उद्गाता और ऋग्वेदके ज्ञाताको होता कहते हैं। चषाल और यूपकटक-ये यज्ञीय स्तम्भपर लगाये जानेवाले काठके छल्लेके नाम हैं। स्थण्डिल और चत्वर-ये दोनों शब्द समान लिङ्ग और समान अर्थके बोधक हैं।

English

From the spreading of phlegm the heart arises, like a lotus, facing downward and hollow, where the soul is established.

अध्याय ३६८

श्लोक 17

चैतन्यानुगता भावःसर्वे तत्र व्यवस्थिताः ।तस्य वामे तथा प्लीहा दक्षिणे च तथा यकृत्

caitanyānugatā bhāvaḥsarve tatra vyavasthitāḥ / tasya vāme tathā plīhā dakṣiṇe ca tathā yakṛt

हिन्दी अर्थ

खौलाये हुए दूधमें दही मिला देनेसे जो हवनके योग्य वस्तु तैयार होती है, उसे आमिक्षा कहते हैं। दही मिलाये हुए घीका नाम पृषदाज्य

English

All states of being, following consciousness, are established there. On its left is the spleen, and on its right the liver.

अध्याय ३६८

श्लोक 18

दक्षिणे च तथा क्लोम पद्मस्यैवं प्रकीर्तितं ।श्रोतांसि यानि देहे ऽस्मिन् कफरक्तवहानि च

dakṣiṇe ca tathā kloma padmasyaivaṃ prakīrtitaṃ / śrotāṃsi yāni dehe 'smin kapharaktavahāni ca

हिन्दी अर्थ

है। परमान्न और पायस-ये खीरके वाचक हैं। जो पशु यज्ञमें अभिमन्त्रित करके मारा गया हो, उसको उपाकृत कहते हैं। परम्पराक, शमन और प्रोक्षण-ये शब्द यज्ञीय पशुका वध करनेके अर्थमें आते हैं । पूजा, नमस्या, अपचिति,

English

On the right is the lung, so the lotus (heart) is described. The channels in this body that carry phlegm and blood...

अध्याय ३६८

श्लोक 19

तेषां भूतानुमानाच्च भवतीन्द्रियसम्भवः ।नेत्रयोर्मण्डलं शुक्लं कफाद्भवति पैतृकं

teṣāṃ bhūtānumānācca bhavatīndriyasambhavaḥ / netrayormaṇḍalaṃ śuklaṃ kaphādbhavati paitṛkaṃ

हिन्दी अर्थ

शब्द हैं। वरिवस्या, शुश्रूषा, परिचर्या और उपासना-ये सेवाके नाम हैं। नियम और व्रत- ये एक-दूसरेके पर्यायवाची शब्द हैं। इनमें 'व्रत' शब्द पुँल्लिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग दोनोंमें

English

...from inferring their elements, the senses arise. The white circle of the eyes is born of phlegm and comes from the father.

अध्याय ३६८

श्लोक 20

कृष्णञ्च मण्डलं वातात्तथा मवति मातृकं ।पित्तात्त्वङ्मण्डलं ज्ञेयं मातापितृसमुद्भवं

kṛṣṇañca maṇḍalaṃ vātāttathā mavati mātṛkaṃ / pittāttvaṅmaṇḍalaṃ jñeyaṃ mātāpitṛsamudbhavaṃ

हिन्दी अर्थ

प्रयुक्त होता है। उपवास आदिके रूपमें किये जानेवाले व्रतका नाम पुण्यक है। जिसका प्रथम या प्रधानरूपसे विधान किया गया हो, उसे 'मुख्यकल्प' कहते हैं और उसकी अपेक्षा अधम या अप्रधानरूपसे जिसको विधि हो, उसका नाम अनुकल्प है। कल्पके अर्थमें विधि और क्रम-इन शब्दोंका प्रयोग समझना चाहिए। वस्तुका पृथक्-पृथक् ज्ञान (अथवा जड़-चेतन

English

The dark circle comes from wind and comes from the mother; the circle of skin, it should be known, comes from mother and father together.

अध्याय ३६८

श्लोक 21

मांसासृक्कफजा जिह्वा मेदो ऽसृक्कफमांसजौ ।वृषाणौ दश प्राणस्य ज्ञेयान्यायतनानि तु

māṃsāsṛkkaphajā jihvā medo 'sṛkkaphamāṃsajau / vṛṣāṇau daśa prāṇasya jñeyānyāyatanāni tu

हिन्दी अर्थ

या द्रष्टा-दृश्यके पार्थक्यका निश्चय) विवेक कहलाता है। (श्रावणीपूर्णिमा आदिके दिन)

English

The tongue is born of flesh, blood and phlegm; fat is born of blood, phlegm and flesh; the testicles are known; these are the ten seats of life.

अध्याय ३६८

श्लोक 22

मूर्धा हृन्नाभिकण्ठाश् च जिह्वा शुक्रञ्च शोणितं ।गुदं वस्तिश् च गुल्फञ्च कण्डुराः शोडशेरिताः

mūrdhā hṛnnābhikaṇṭhāś ca jihvā śukrañca śoṇitaṃ / gudaṃ vastiś ca gulphañca kaṇḍurāḥ śoḍaśeritāḥ

हिन्दी अर्थ

संस्कारपूर्वक वेदका स्वाध्याय आरम्भ करना उपकरण या उपाकर्म कहलाता है । भिक्षु, परिव्राट्, कर्मन्दी, पाराशरी तथा मस्करी--संन्यासीके पर्यायवाची शब्द हैं। जिनकी वाणी सदा सत्य होती है, वे ऋषि और सत्यवचा कहलाते हैं।

English

The head, heart, navel, throat, tongue, semen, blood, anus, bladder and ankle — sixteen are named.

अध्याय ३६८

श्लोक 23

द्वे करे द्वे च चरणे चतस्रः पृष्ठतो गले ।देहे पादादिशीर्षान्ते जालानि चैव षोडश

dve kare dve ca caraṇe catasraḥ pṛṣṭhato gale / dehe pādādiśīrṣānte jālāni caiva ṣoḍaśa

हिन्दी अर्थ

जिसने वेदाध्ययन और ब्रह्मचर्यके व्रतको विधिवत्

English

Two hands, two feet, and four at the back of the neck: in the body, from foot to head, there are sixteen nets (tendon-networks).

अध्याय ३६८

श्लोक 24

मांसस्नायुशिरास्थिन्यः चत्वारश् च पृथक् पृथक् ।मणिबन्धनगुल्फेषु निबद्धानि परस्परं

māṃsasnāyuśirāsthinyaḥ catvāraś ca pṛthak pṛthak / maṇibandhanagulpheṣu nibaddhāni parasparaṃ

हिन्दी अर्थ

समाप्त कर लिया है, किंतु अभी दूसरे आश्रमको कर ली है, वे “यती' और “यति' कहलाते हैं। शरीर-साध्य नित्यकर्मका नाम यम है तथा जो कर्म अनित्य एवं कभी-कभी आवश्यकतानुसार किये जानेयोग्य होता है, वह (जप, उपवास

English

Of flesh, sinew, vessel and bone there are four each, separately, fastened together at the wrists and ankles.

अध्याय ३६८

श्लोक 25

षट्कूर्चानि स्मृतानीह हस्तयोः पादयोः पृथक् ।ग्रीवायाञ्च तथा मेढ्रे कथितानि मनीषिभिः

ṣaṭkūrcāni smṛtānīha hastayoḥ pādayoḥ pṛthak / grīvāyāñca tathā meḍhre kathitāni manīṣibhiḥ

हिन्दी अर्थ

आदि) नियम कहलाता है। ब्रह्मभूय, ब्रह्मत्व और ब्रह्मसायुज्य-ये ब्रह्मभावको प्राप्तिके नाम

English

Six "kurcas" (bundles) are mentioned here: in the two hands, the two feet separately, in the neck and in the organ of generation, as the wise have said.

अध्याय ३६८

श्लोक 26

पृष्ठवंशस्योपगताश् चतस्रो मांसरज्जवः ।नवत्यश् च तथा पेश्यस्तासां बन्धनकारिकाः

pṛṣṭhavaṃśasyopagatāś catasro māṃsarajjavaḥ / navatyaś ca tathā peśyastāsāṃ bandhanakārikāḥ

हिन्दी अर्थ

स्वीकार नहीं किया है, उसको स्नातक कहते हैं । हैं॥ १--११॥ इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें 'कोशगत ब्रह्मवर्गका वर्णन” नामक तीन सौ पैँसठवाँ अध्याय पूरा हुआ अग्निदेव कहते हैं मूर्धाभिषिक्त, राजन्य बाहुज, क्षत्रिय और विराट्-ये क्षत्रियके वाचक हैं। जिस राजाके सामने सभी सामन्त-नरेश मस्तक झुकाते हैं, उसे अधीश्वर कहते हैं।

English

Four cords of flesh run along the spine; and ninety muscles are the binders of them.

अध्याय ३६८

श्लोक 27

सीरण्यश् च तथा सप्त पञ्च मूर्धानमाश्रिताः ।एकैका मेढ्रजिह्वास्ता अस्थि षष्टिशतत्रयं

sīraṇyaś ca tathā sapta pañca mūrdhānamāśritāḥ / ekaikā meḍhrajihvāstā asthi ṣaṣṭiśatatrayaṃ

हिन्दी अर्थ

जिसका समुद्रपर्यन्त समूची भूमिपर अधिकार हो, उस सम्राट्का नाम चक्रवर्ती और सार्वभौम है तथा दूसरे राजाओंको (जो छोटे-छोटे मण्डलोंके शासक हैं, उन्हें) मण्डलेश्वर कहते हैं। मन्त्रीके

English

Seven sutures and five lie about the head; one each belongs to the organ and the tongue; the bones number three hundred and sixty.

अध्याय ३६८

श्लोक 28

सूक्ष्मैः सह चतुःषष्ठिर्दशना विंशतिर्नखाः ।पाणिपादशलाकाश् च तासां स्थानचतुष्टयं

sūkṣmaiḥ saha catuḥṣaṣṭhirdaśanā viṃśatirnakhāḥ / pāṇipādaśalākāś ca tāsāṃ sthānacatuṣṭayaṃ

हिन्दी अर्थ

तीन नाम हैं-मन्त्री, धीसचिव और अमात्य। महामात्र और प्रधान-ये सामान्य मन्त्रियोंके वाचक हैं। व्यवहारके द्रष्टा अर्थात् मामले- मुकदमेमें फैसला देनेवालेको प्राइविवाक और अक्षदर्शक कहते हैं। सुवर्णकी रक्षा जिसके अधिकारमें हो वह भौरिक और कनकाध्यक्ष कहलाता है। अध्यक्ष और अधिकृत-ये अधिकारीके वाचक हैं। इन दोनोंका समान

English

With the small ones, sixty-four teeth (bones) and twenty nails; the rods of the hands and feet; four places belong to them.

अध्याय ३६८

श्लोक 29

षष्ट्यङ्गुलीनां द्वे पार्ष्ण्योर्गुल्फेषु च चतुष्टयं ।चत्वार्यरत्न्योरस्थीनि जङ्घयोस्तद्वदेव तु

ṣaṣṭyaṅgulīnāṃ dve pārṣṇyorgulpheṣu ca catuṣṭayaṃ / catvāryaratnyorasthīni jaṅghayostadvadeva tu

हिन्दी अर्थ

लिङ्ग है। जिसे अन्तःपुरकी रक्षाका अधिकार

English

Sixty finger bones; two in the heels and four in the ankles; four in each forearm, and likewise in the shanks.

अध्याय ३६८

श्लोक 30

द्वे द्वे जानुकपोलोरुफलकांशसमुद्भवं ।अक्षस्थानांशकश्रोणिफलके चैवमादिशेत्

dve dve jānukapoloruphalakāṃśasamudbhavaṃ / akṣasthānāṃśakaśroṇiphalake caivamādiśet

हिन्दी अर्थ

सौंपा गया हो, उसका नाम अन्तर्वशिक' है। सौविदल्ल, कञ्चुकी, स्थापत्य और सौविद-ये रनिवासकी रक्षामें नियुक्त सिपाहियोंके नाम हैं। अन्तःपुरमें रहनेवाले नपुंसकोंको षण्ड और वर्षवर कहते हैं। सेवक, अर्थी और अनुजीवी ये सेवा करनेवालेके अर्थमें आते हैं। अपने राज्यकी सीमापर रहनेवाला राजा शत्रु होता है और शत्रुको राज्य-सीमापर रहनेवाला नरेश

English

Two each in the knees, cheek, thigh, and shoulder-blade; so one should describe the eye-socket, shoulder, hip and pelvis bones.

अध्याय ३६८

श्लोक 31

भगास्तोकं तथा पृष्ठे चत्वारिंशच्च पञ्च च ।ग्रीवायाञ्च तथास्थीनि जत्रुकञ्च तथा हमुः

bhagāstokaṃ tathā pṛṣṭhe catvāriṃśacca pañca ca / grīvāyāñca tathāsthīni jatrukañca tathā hamuḥ

हिन्दी अर्थ

अपना मित्र होता है। शत्रु और मित्र दोनोंकी राज्यसीमाओंके बाद जिसका राज्य हो, वह (न शत्रु, न मित्र) उदासीनः होता है। विजिगीषु राजाके पृष्ठभागमें रहनेवाले राजाको पार्ष्णिग्राह

English

Pelvis-bones a few, and in the back forty-five; in the neck are the bones, and the collar-bone and the jaw.

अध्याय ३६८

श्लोक 32

तन्मूलं द्वेललाटाक्षिगण्डनासाङ्घ्य्रवस्थिताः ।पर्शुकास्तालुकैः सार्धमर्वुदैश् च द्विसप्ततिः

tanmūlaṃ dvelalāṭākṣigaṇḍanāsāṅghyravasthitāḥ / parśukāstālukaiḥ sārdhamarvudaiś ca dvisaptatiḥ

हिन्दी अर्थ

कहते हैं। चर, स्पश और प्रणिधि-ये गुप्तचरके नाम हैं। भविष्यकालको आयति कहते हैं। तत्काल और तदात्व ये वर्तमान कालके वाचक हैं। भावी कर्मफलको उदर्क कहते हैं। आग लगने या पानीकी बाढ़ आदिके कारण होनेवाले

English

Its root two; the forehead, eyes, cheeks, nose and chin are set; ribs with palate-bones and the small joints make seventy-two.

अध्याय ३६८

श्लोक 33

द्वेशङ्खके कपालानि चत्वार्येव शिरस् तथा ।उरः सप्तदशास्थीनि सन्धीनां द्वे शते दश

dveśaṅkhake kapālāni catvāryeva śiras tathā / uraḥ saptadaśāsthīni sandhīnāṃ dve śate daśa

हिन्दी अर्थ

१. ' अन्तर्वशिक 'के स्थानमें ' अन्तर्वेश्मिक' नाम भी प्रयुक्त होता है। २. रामोक्त नीतिके उपदेशानुसार विजिगीषुके सम्मुखवर्ती पाँच राज्य क्रमशः शत्रु, मित्र, अरिमित्र, मित्रमित्र तथा अरिमित्र-मित्र होते हैं; आगे भी ऐसा ही क्रम है। दोनों पार्श्वगत राज्योंमें क्रमशः मध्यम तथा उदासीन होते हैं ।

English

Two in the temples; the skull has four plates; the chest seventeen bones; the joints number two hundred and ten.

अध्याय ३६८

श्लोक 34

अष्टषष्टिस्तु शाखासु षष्टिश् चैकविवर्जिता ।अन्तरा वै त्र्यशीतिश् च स्नायोर् नवशतानि च

aṣṭaṣaṣṭistu śākhāsu ṣaṣṭiś caikavivarjitā / antarā vai tryaśītiś ca snāyor navaśatāni ca

हिन्दी अर्थ

भयको अदृष्टभय कहते हैं। अपने या शत्रुके राज्यमें रहनेवाले सैनिकों या चोरों आदिके कारण जो संकट उपस्थित होता है, उसका नाम दृष्टभय है। भरे हुए घड़ेको भद्रकुम्भ और पूर्णकुम्भ कहते हैं। सोनेके गड़ए या झारीका नाम भृङ्गार और कनकालुका है। मतवाले हाथीको प्रभिन्न, गर्जित और मत्त कहते हैं। हाथीकी सूँड्से निकलनेवाले जलकणको वमथु

English

In the limbs sixty-eight, and fifty-nine; within, eighty-three; and nine hundred sinews.

अध्याय ३६८

श्लोक 35

त्रिंशाधिके द्वे शते तु अन्तराधौ तु सप्ततिः ।ऊर्ध्वगाः षट्शतान्येव शाखास्तु कथितानि तु

triṃśādhike dve śate tu antarādhau tu saptatiḥ / ūrdhvagāḥ ṣaṭśatānyeva śākhāstu kathitāni tu

हिन्दी अर्थ

और करशीकर कहते हैं। सृणि और ह ला ये दो हाथीको हाँकनेके काममें लाये

English

Two hundred and thirty... in the inner region seventy; the upward ones are six hundred; the branches are thus described.

अध्याय ३६८

श्लोक 36

पञ्चपेशीशतान्येव(१) चत्वारिंशत्तथोर्ध्वगाः ।चतुःशतन्तु शाखासु अन्तराधौ च षष्टिका

pañcapeśīśatānyeva(1) catvāriṃśattathordhvagāḥ / catuḥśatantu śākhāsu antarādhau ca ṣaṣṭikā

हिन्दी अर्थ

लोहेके काँटेका बोध कराते हैं। इनमें सृणि तो है। परिस्तोम और कुथ हाथीकी गद्दी और झूलके वाचक हैं। स्त्रियोंके बैठनेयोग्य पर्देवाली गाडीको कर्णीरथ और प्रवहण कहते हैं। दोला और प्रेङ्खा--ये झूला अथवा डोलीके नाम हैं।

English

Five hundred muscles; forty going upward; four hundred in the limbs and sixty within.

अध्याय ३६८

श्लोक 37

स्त्रीणाम् चैकाधिका वै स्याद्विंशतिश् चतुरुत्तरा ।स्तनयोर्दश योनौ च त्रयोदश तथाशये

strīṇām caikādhikā vai syādviṃśatiś caturuttarā / stanayordaśa yonau ca trayodaśa tathāśaye

हिन्दी अर्थ

इनका स्त्रीलिङ्गमें प्रयोग होता है। आधोरण, हस्तिपक, हस्त्यारोह और निषादी ये हाथीवानके अर्थमें आते हैं। लड़नेवाले सिपाहियोंको भट और योद्धा कहते हैं। कञ्ुक और वारण-ये

English

In women there are twenty more, then four; ten in the breasts, thirteen in the womb and the receptacle.

अध्याय ३६८

श्लोक 38

गर्भस्य च चतस्रः स्युः शिराणाञ्च शरीरिणां ।त्रिंशच्छतसहस्राणि तथान्यानि नवैव तु

garbhasya ca catasraḥ syuḥ śirāṇāñca śarīriṇāṃ / triṃśacchatasahasrāṇi tathānyāni navaiva tu

हिन्दी अर्थ

कवच (बख्तर)-के नाम हैं। इनका प्रयोग स्त्रीलिङ्गके सिवा अन्य लिङ्गोंमें होता है। टोपके नाम हैं। तनुत्र, वर्म और दंशन-ये भी कवचके अर्थमें आते हैं। आमुक्त, प्रतिमुक्त, पिनद्ध और अपिनद्ध-ये पहने हुए कवचके वाचक हैं। सेनाकी मोर्चाबंदीका नाम व्यूह और

English

And four for the embryo; of the vessels of embodied beings there are thirty hundred-thousands and nine others.

अध्याय ३६८

श्लोक 39

षट्पञ्चाशत्सहस्राणि रसन्देहे वहन्ति ताः ।केदार इव कुल्याश् च क्लेदलेपादिकञ्च यत्

ṣaṭpañcāśatsahasrāṇi rasandehe vahanti tāḥ / kedāra iva kulyāś ca kledalepādikañca yat

हिन्दी अर्थ

बल-विन्यास है। चक्र और अनीक-ये नपुंसकलिङ्ग शब्द सेनाके वाचक हैं। जिस

English

Fifty-six thousand carry the fluid in the body, like channels in a field; and what is moisture, ointments and the like...

अध्याय ३६८

श्लोक 40

द्वासप्ततिस् तथा कोट्यो व्योम्नामिह महामुने ।मज्जाया मेदसश् चैव वसायाश् च तथा द्विज

dvāsaptatis tathā koṭyo vyomnāmiha mahāmune / majjāyā medasaś caiva vasāyāś ca tathā dvija

हिन्दी अर्थ

सेनामें एक हाथी, एक रथ, तीन घोड़े और पाँच पैदल हों, उसे पत्ति कहते हैं। पत्तिके समस्त अङ्गोंको लगातार सात बार तीन गुना करते जायँ तो उत्तरोत्तर उसके ये नाम होंगे-सेनामुख, हाथी आदि सभी अङ्गाँसे युक्त दस अनीकिनी सेनाको अक्षौहिणी कहते हैं। धनुष, कोदण्ड और इष्वास-ये धनुषके नाम हैं। धनुषके दोनों कोणोंको कोटि और अटनी कहते हैं। उसके

English

Seventy-two crores of openings here, O great sage; of marrow, fat, and also of serum...

अध्याय ३६८

श्लोक 41

मूत्रस्य चैव पित्तस्य श्लेष्मणः शकृतस् तथा ।१ पञ्चपेशीशतान्यत्रेति ख॥ , ञ॥ च :प् ३०९ रक्तस्य सरसस्यात्र क्रमशो ऽञ्जलयो मताः

mūtrasya caiva pittasya śleṣmaṇaḥ śakṛtas tathā / 1 pañcapeśīśatānyatreti kha.. , ña.. ca :p 309 raktasya sarasasyātra kramaśo 'ñjalayo matāḥ

हिन्दी अर्थ

मध्य भागका नाम नस्तक (या लस्तक) है। प्रत्यञ्चाको मौवी, ज्या, शिञ्जिनी और गुण कहते हैं। पृषत्क, बाण, विशिख, अजिह्मग, खग और आशुग-ये वाचक पर्याय शब्द हैं

English

...of urine, bile, phlegm, faeces, blood and lymph, the quantities are held in order to be handfuls ("anjali").

अध्याय ३६८

श्लोक 42

अर्धार्धाभ्यधिकाः सर्वाः पूर्वपूर्वाञ्जलेर्मताः ।अर्धाञ्जलिश् च शुक्रस्य तदर्धञ्च ततौजसः

ardhārdhābhyadhikāḥ sarvāḥ pūrvapūrvāñjalermatāḥ / ardhāñjaliś ca śukrasya tadardhañca tataujasaḥ

हिन्दी अर्थ

ये तरकसके नाम हैं। इनमें इषुधि शब्द पुँल्लिङ्ग और स्त्रीलिङ्ग दोनों लिङ्गोंमें आता है। असि, ऋष्टि, निस्त्रिंश, करवाल और कृपाण--ये तलवारके वाचक हैं। तलवारकी मुष्टिको सरु कहते हैं। ईली और करपालिका (करवालिका) --ये गुप्तीके नाम हैं। कुठार और सुधिति (या स्वधिति) -ये कुल्हाड़ीके अर्थमें आते हैं। इनमें कुठार शब्दका प्रयोग पुँल्लिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग -दोनोंमें होता

English

Each is taken as half again more than the preceding handful; half a handful of semen, and half of that of ojas.

अध्याय ३६८

श्लोक 43

रजसस्तु तथा स्त्रीणाञ्चतस्रः कथिता बुधैः ।शरीरं मलदोषादि पिण्डं ज्ञात्वात्मनि त्यजेत्(१)

rajasastu tathā strīṇāñcatasraḥ kathitā budhaiḥ / śarīraṃ maladoṣādi piṇḍaṃ jñātvātmani tyajet(1)

हिन्दी अर्थ

है। छुरीको क्षुरिका और असिपुत्रिका कहते हैं। प्रास और कुन्त भालेके नाम हैं। सर्वला और तोमर गँड़ासेके अर्थमें आते हैं। तोमर शब्द पुँल्लिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग -दोनोंमें प्रयुक्त होता

English

And the wise have said four for the menses of women. Knowing the body as a lump of impurities and faults, one should relinquish it in the Self.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 368
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.