Agni Purana· Agni Purāṇa
376
अध्याय 376 / 381

Adhyaya 377

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पूर्ण अध्याय पाठ22 श्लोक

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अध्याय ३७६

श्लोक 1

ब्रह्मज्ञानं अग्निर् उवाच अहं ब्रह्म परं ज्योतिः पृथिव्यवनलोज्झितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्वाय्वाकाशविवर्जितं

brahmajñānaṃ agnir uvāca ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ pṛthivyavanalojjhitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotirvāyvākāśavivarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

प्राप्ति होती है। जो ज्ञान-वैराग्यसे सम्पन्न, श्रद्धालु, क्षमाशील, विष्णुभक्त तथा ध्यानमें सदा उत्साह है। “व्यक्त और अव्यक्त, जो कुछ प्रतीत होता है, सब परम ब्रह्म परमात्माका ही स्वरूप है -- इस प्रकार विष्णुका चिन्तन करना “ध्यान! कहलाता है। सर्वज्ञ परमात्मा श्रीहरिको सम्पूर्ण

English

Could not be traced.

अध्याय ३७६

श्लोक 2

अहं ब्रह्म परं ज्योतिरादिकार्यविवर्जितम् ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्विराडात्मविवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotirādikāryavivarjitam / ahaṃ brahma paraṃ jyotirvirāḍātmavivarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

कलाओंसे युक्त तथा निष्कल जानना चाहिए। अणिमादि ऐश्वर्योको प्राप्ति तथा मोक्ष-ये ध्यानके प्रयोजन हैं। भगवान् विष्णु ही कर्मोके फलकी प्राप्ति करानेवाले हैं, अतः उन परमेश्वरका ध्यान

English

VS. 16.6a; TS.4.5. 1. 2a.

अध्याय ३७६

श्लोक 3

अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्जाग्रत्स्थानविवर्जितम् ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्विश्वभावविवर्जितम्

ahaṃ brahma paraṃ jyotirjāgratsthānavivarjitam / ahaṃ brahma paraṃ jyotirviśvabhāvavivarjitam

हिन्दी अर्थ

करना चाहिए। वे ही ध्येय हैं। चलते-फिरते, खड़े होते, सोते-जागते, आँख खोलते और अवस्थामें भी निरन्तर परमेश्वरका ध्यान करना चाहिए

English

The hymns beginning with namasU rudra maiaiavf. VS. 16.1a; TS. 4.5.1.1a.

अध्याय ३७६

श्लोक 4

अहं ब्रह्म परं ज्योतिराकाराक्षरवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्वाक्पाण्यङ्घ्रिविवर्जितम्

ahaṃ brahma paraṃ jyotirākārākṣaravarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotirvākpāṇyaṅghrivivarjitam

हिन्दी अर्थ

अपने देहरूपी मन्दिरके भीतर मनमें स्थित हृदयकमलरूपी पीठके मध्यभागमें भगवान् केशवकी स्थापना करके ध्यानयोगके द्वारा उनका पूजन करे । ध्यानयज्ञ श्रेष्ठ, शुद्ध और सब दोषोंसे रहित

English

For the two (hymns beginning with) manoy Uma is the single deity and Rudra for rudr&ica. Ekarudra is the deity for the first anuvaka (name of a section of the •collection of hymns ).

अध्याय ३७६

श्लोक 5

अहं ब्रह्म परं ज्योतिः पायूपस्थविवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः श्रोत्रत्वक्चक्षुरुज्झितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ pāyūpasthavivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ śrotratvakcakṣurujjhitaṃ

हिन्दी अर्थ

है। उसके द्वारा भगवानका यजन करके मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सकता है। बाह्यशुद्धिसे युक्त यज्ञोंद्वारा भी इस फलकी प्राप्ति नहीं हो सकती। हिंसा आदि दोषोंसे मुक्त होनेके कारण ध्यान अन्तःकरणको शुद्धिका प्रमुख साधन और चित्तको वशमें करनेवाला है। इसलिये ध्यानयज्ञ सबसे श्रेष्ठ और मोक्षरूपी फल प्रदान करनेवाला है; अतः अशुद्ध एवं अनित्य बाह्य साधन यज्ञ आदि

English

Could not be traced.

अध्याय ३७६

श्लोक 6

अहं ब्रह्म परं ज्योतीरसरूपविवर्जितम् ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः सर्वगन्धविवर्जितम्

ahaṃ brahma paraṃ jyotīrasarūpavivarjitam / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ sarvagandhavivarjitam

हिन्दी अर्थ

कर्मोका त्याग करके योगका ही विशेषरूपसे अभ्यास करे। पहले विकारयुक्त, अव्यक्त तथा भोग्य-भोगसे युक्त तीनों गुणोंका क्रमशः अपने हृदयमें ध्यान करे। तमोगुणको रजोगुणसे आच्छादित

English

Cf. RV. 10.57 3a.

अध्याय ३७६

श्लोक 7

अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्जिह्वाघ्राणविवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः स्पर्शशब्दविवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotirjihvāghrāṇavivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ sparśaśabdavivarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

करके रजोगुणको सत्त्वगुणसे आच्छादित करे। इसके बाद पहले कृष्ण, फिर रक्त, तत्पश्चात् श्वेतवर्णवाले तीनों मण्डलोंका क्रमशः ध्यान करे। इस प्रकार जो गुणोंका ध्यान बताया गया, वह “अशुद्ध ध्येय’ है। उसका त्याग करके 'शुद्ध ध्येय” का चिन्तन करे। पुरुष (आत्मा) सत्त्वोपाधिक गुणोंसे अतीत चौबीस तत्त्वोसे परे पचीसवाँ तत्त्व है, यह “शुद्ध ध्येय' है। पुरुषके ऊपर उन्हींकी

English

Gould not be traced.

अध्याय ३७६

श्लोक 8

अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्मनोबुद्धिविवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिश्चित्ताहङ्कारवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotirmanobuddhivivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiścittāhaṅkāravarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

नाभिसे प्रकट हुआ एक दिव्य कमल स्थित है, जो प्रभुका ऐश्वर्य ही जान पड़ता है। उसका विस्तार बारह अंगुल है। वह शुद्ध, विकसित तथा श्वेत वर्णका है। उसका मृणाल आठ

English

I am Brahman, the supreme light, free of mind and intellect; I am Brahman, the supreme light, free of thought and ego.

अध्याय ३७६

श्लोक 9

अहं ब्रह्म परं ज्योतिः प्राणापानविवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्व्यानोदानविवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ prāṇāpānavivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotirvyānodānavivarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

अंगुलका है। उस कमलके आठ पत्तोंको अणिमा आदि आठ ऐश्वर्य जानना चाहिए। उसकी कर्णिकाका केसर 'ज्ञान' तथा नाल “उत्तम वैराग्य’ है। 'विष्णु-धर्म' ही उसकी जड़ है। इस प्रकार कमलका चिन्तन करे। धर्म, ज्ञान,

English

I am Brahman, the supreme light, free of prana and apana; I am Brahman, the supreme light, free of vyana and udana.

अध्याय ३७६

श्लोक 10

अहं ब्रह्म परं ज्योतिः समानपरिवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्जरामरणवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ samānaparivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotirjarāmaraṇavarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

फापाकाफाफ मी पापी फक फक का क्र

English

I am Brahman, the supreme light, free of samana; I am Brahman, the supreme light, free of old age and death.

अध्याय ३७६

श्लोक 11

अहं ब्रह्म परं ज्योतिः शोकमोहविवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः क्षुत्पिपासाविवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ śokamohavivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ kṣutpipāsāvivarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

कमलको, जो भगवानूका आसन है, जानकर मनुष्य अपने सब दुःखोसे छुटकारा पा जाता है। उस कमलकर्णिकाके मध्यभागमें ओङ्कारमय ईश्वरका ध्यान करे। उनकी आकृति शुद्ध दीपशिखाके समान देदीप्यमान एवं अँगूठेके बराबर है। वे अत्यन्त निर्मल हैं। कदम्बपुष्पके समान उनका गोलाकार स्वरूप ताराकी भाँति स्थित है। अथवा कमलके ऊपर प्रकृति और पुरुषसे भी अतीत

English

I am Brahman, the supreme light, free of grief and delusion; I am Brahman, the supreme light, free of hunger and thirst.

अध्याय ३७६

श्लोक 12

अहं ब्रह्म परं ज्योतिः शब्दोद्भूतादिवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्हिरण्यगर्भवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ śabdodbhūtādivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotirhiraṇyagarbhavarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर विराजमान हैं, ऐसा ध्यान करे तथा परम अक्षर ओंकारका निरन्तर जप करता रहे। साधकको अपने मनको स्थिर करनेके लिये पहले स्थूलका ध्यान करना चाहिए। फिर क्रमशः मनके स्थिर

English

I am Brahman, the supreme light, free of sound and the elements that arise; I am Brahman, the supreme light, free of Hiranyagarbha.

अध्याय ३७६

श्लोक 13

अहं ब्रह्म परं ज्योतिः स्वप्नावस्थाविवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिस्तैजसादिविवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ svapnāvasthāvivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotistaijasādivivarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

हो जानेपर उसे सूक्ष्म तत्त्वके चिन्तनमें लगाना चाहिए॥ १२-२६ ३ ॥ (अब कमल आदिका ध्यान दूसरे प्रकारसे बतलाया जाता है-) नाभि-मूलमें स्थित जो कमलकी नाल है, उसका विस्तार दस अंगुल है। नालके ऊपर अष्टदल कमल है, जो बारह अंगुल

English

I am Brahman, the supreme light, free of the dream state; I am Brahman, the supreme light, free of Taijasa and the like.

अध्याय ३७६

श्लोक 14

अहं ब्रह्म परं ज्योतिरपकारादिवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः सभाज्ञानविवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotirapakārādivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ sabhājñānavivarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

विस्तृत है। उसकी कर्णिकाके केसरमें सूर्य, सोम तथा अग्नि-तीन देवताओंका मण्डल है । अग्नि- मण्डलके भीतर शङ्क, चक्र, गदा एवं पद्म करनेवाले चतुर्भुज विष्णु अथवा आठ भुजाओंसे

English

I am Brahman, the supreme light, free of harm and the like; I am Brahman, the supreme light, free of knowledge of the assembly.

अध्याय ३७६

श्लोक 15

अहं ब्रह्म परं ज्योतिरध्याहृतविवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः सत्त्वादिगुणवर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotiradhyāhṛtavivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ sattvādiguṇavarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

युक्त भगवान् श्रीहरि विराजमान हैं। अष्टभुज भगवान्के हाथोंमें शङ्कु-चक्रादिके अतिरिक्त

English

I am Brahman, the supreme light, free of superimposition; I am Brahman, the supreme light, free of sattva and the other qualities.

अध्याय ३७६

श्लोक 16

अहं ब्रह्म परं ज्योतिः सदसद्भाववर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः सर्वावयववर्जितं

ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ sadasadbhāvavarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ sarvāvayavavarjitaṃ

हिन्दी अर्थ

पाते हैं। उनके श्रीविग्रहका वर्ण श्वेत एवं सुवर्णके समान उद्दीपत है। वक्ष:स्थलमें श्रीवत्सका चिह्न और कौस्तुभमणि शोभा पा रहे हैं। गलेमें बनमाला और सोनेका हार है। कानोंमें मकराकार कुण्डल

English

I am Brahman, the supreme light, free of being and non-being; I am Brahman, the supreme light, free of all parts.

अध्याय ३७६

श्लोक 17

अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्भेदाभेदविवर्जितं ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः सुषुप्तिस्थानवर्जितम्

ahaṃ brahma paraṃ jyotirbhedābhedavivarjitaṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ suṣuptisthānavarjitam

हिन्दी अर्थ

जगमगा रहे हैं। मस्तकपर रत्नमय उज्वल किरीट सुशोभित हैं। श्रीअङ्गोंपर पीताम्बर शोभा पाता है। वे सब प्रकारके आभूषणोंसे अलंकृत हैं। उनका आकार बहुत बड़ा अथवा एक बित्तेका है। जैसी इच्छा हो, वैसी ही छोटी या बड़ी आकृतिका ध्यान करना चाहिए। ध्यानके समय ऐसी भावना करे कि 'मैं ज्योतिर्मय ब्रह्म हूँ-मैं ही नित्यमुक्त प्रणवरूप वासुदेवसंज्ञक

English

I am Brahman, the supreme light, free of difference and non-difference; I am Brahman, the supreme light, free of the state of deep sleep.

अध्याय ३७६

श्लोक 18

अहं ब्रह्म परं ज्योतिः प्राज्ञभावविवर्जितम् ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्मकारादिविवर्जितम्

ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ prājñabhāvavivarjitam / ahaṃ brahma paraṃ jyotirmakārādivivarjitam

हिन्दी अर्थ

परमात्मा हूँ।' ध्यानसे थक जानेपर मन्त्रका जप करे और जपसे थकनेपर ध्यान करे। इस प्रकार जो जप और ध्यान आदिमें लगा रहता है, उसके ऊपर भगवान् विष्णु शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं।

English

I am Brahman, the supreme light, free of the condition of Prajna; I am Brahman, the supreme light, free of "m" and the like.

अध्याय ३७६

श्लोक 19

अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्मानमेयविवर्जितम् ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिर्मितिमाहृविवर्जितम्

ahaṃ brahma paraṃ jyotirmānameyavivarjitam / ahaṃ brahma paraṃ jyotirmitimāhṛvivarjitam

हिन्दी अर्थ

दूसरे-दूसरे यज्ञ जपयज्ञकी सोलहवीं कलाके बराबर भी नहीं हो सकते। जप करनेवाले पुरुषके पास आधि, व्याधि और ग्रह नहीँ फटकने पाते। जप करनेसे भोग, मोक्ष तथा मृत्यु- विजयरूप फलकी प्राप्ति होती है॥ २७--३५॥

English

I am Brahman, the supreme light, free of the measurer and the measured; I am Brahman, the supreme light, free of measure and its source.

अध्याय ३७६

श्लोक 20

अहं ब्रह्म परं ज्योतिः साक्षित्वादिविवर्जितम् ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः कार्यकारणवर्जितम्

ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ sākṣitvādivivarjitam / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ kāryakāraṇavarjitam

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें 'ध्याननिरूपण' नामक तीन सौ चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ

English

I am Brahman, the supreme light, free of witness-hood and the like; I am Brahman, the supreme light, free of cause and effect.

अध्याय ३७६

श्लोक 21

देहेन्द्रियमनोबुद्धिप्राणाहङ्कारवर्जितं ।जाग्रत् सप्नसुषुप्त्यादिमुक्तं ब्रह्म तुरीयकं

dehendriyamanobuddhiprāṇāhaṅkāravarjitaṃ / jāgrat sapnasuṣuptyādimuktaṃ brahma turīyakaṃ

हिन्दी अर्थ

अग्निदेव कहते हैं-मुने! ध्येय वस्तुमें जो और “अमूर्त' धारणा कहते हैं। इस धारणासे मनकी स्थिति होती है, उसे ' धारणा' कहते हैं। भगवान्की प्राप्ति होती है। जो बाहरका लक्ष्य है, ध्यानकी ही भाँति उसके भी दो भेद हैं- उससे मन जबतक विचलित नहीं होता, तबतक “साकार' और 'निराकार'। भगवान्के ध्यानमें किसी भी प्रदेशमें मनकी स्थितिको ' धारणा' जो मनको लगाया जाता है, उसे क्रमशः 'मूर्त' कहते हैं। देहके भीतर नियत समयतक जो

English

Brahman, the fourth state (turiya), is free of body, senses, mind, intellect, prana and ego, released from waking, dream, deep sleep and the rest.

अध्याय ३७६

श्लोक 22

नित्यशुद्धबुद्धमुक्तं सत्यमानन्दमद्वयम् ।ब्रह्माहमस्म्यहं ब्रह्म सविज्ञानं विमुक्त ॐ ।अहं ब्रह्म परं ज्योतिः समाधिर्मोक्षदः परः

nityaśuddhabuddhamuktaṃ satyamānandamadvayam / brahmāhamasmyahaṃ brahma savijñānaṃ vimukta oṃ / ahaṃ brahma paraṃ jyotiḥ samādhirmokṣadaḥ paraḥ

हिन्दी अर्थ

मनको रोक रखा जाता है और वह अपने लक्ष्यसे विचलित नहीं होता, यही अवस्था “धारणा' कहलाती है। बारह आयामकी ' धारणा' होती है, बारह ' धारणा'का ' ध्यान' होता है तथा

English

Eternal, pure, awake, free, truth, bliss, without a second: I am Brahman, with knowledge, liberated, Om. I am Brahman, the supreme light; samadhi is the supreme giver of liberation.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_agnipurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Agni Purana — Chapter 376
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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