अध्याय ३७९
श्लोक 1
गीतासारः अग्निर् उवाच गीतासारं प्रवक्ष्यामि सर्वगीतोत्तमोत्तमं ।कृष्णो ऽर्जुनाय यमाह पुरा वै भुक्तिमुक्तिदं(२)
gītāsāraḥ agnir uvāca gītāsāraṃ pravakṣyāmi sarvagītottamottamaṃ / kṛṣṇo 'rjunāya yamāha purā vai bhuktimuktidaṃ(2)
हिन्दी अर्थ
था। वे साक्षात् ब्रह्मस्वरूप थे, तो भी लोकमें जडवत् (ज्ञानशून्य मूककी भाँति) व्यवहार करते थे। उन्हें हष्ट-पुष्ट देखकर सौवीर-नरेशके सेवकने बेगारमें लगानेके योग्य समझा (और राजाकी पालको ढोनेमें नियुक्त कर दिया)। सेवकके कहनेसे वे सौवीरराजकी पालकी ढोने लगे। यद्यपि वे ज्ञानी थे, तथापि बेगारमें पकड़ जानेपर अपने प्रारब्धभोगका क्षय करनेके लिये राजाका
English
Dh&triy vUvasitd, kffa, musta, khatjSra, mdgadhi and pivar a (?) would destroy hiccup. The three should be licked with honey.