अध्याय ९४
श्लोक 2
शिलाविन्यासविधानं ईश्वर उवाच ईशादिषु चरक्याद्याः(५) पूर्ववत् पूजयेद्वहिः ।आहुतित्रितयं दद्यात् प्रतिदेवमनुक्रमात्
śilāvinyāsavidhānaṃ īśvara uvāca īśādiṣu carakyādyāḥ(5) pūrvavat pūjayedvahiḥ / āhutitritayaṃ dadyāt pratidevamanukramāt
हिन्दी अर्थ
इसके बाद सूर्यदेवको पवित्रक देकर आचमन करे। फिर द्वारपाल आदिको, दिक्पालोंको, कलशको और वर्धनी आदिपर भी पवित्रक अर्पण करे। तदनन्तर भगवान् शिवके समीप अपने आसनपर बैठकर आत्मा, गण, गुरु तथा अग्निको पवित्रक अर्पित करे। उस समय भगवान् शिवसे इस प्रकार प्रार्थना करे-- देव! आप कालस्वरूप हैं। आपने मेरे कार्यके विषयमे
English
(Demonesses) CarakI and others should be worshipped in the angular points of north-east etc. and outside as before. Three oblations should be done to each one of the gods in suc¬ cession.