अध्याय ७८
श्लोक 1
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते मध्यभागे तृतीय उपोद्धातपादे भार्गवचरिते एकोनचत्वारिंशत्तमो ऽध्यायः ॥ ३९॥ वसिष्ठ उवाच सुचन्द्रे पतिते राजन् राजेन्द्राणां शिरोमणौ ।तत्पुत्रः पुष्कराक्षस्तु रामं योद्धुमथागतः
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte madhyabhāge tṛtīya upoddhātapāde bhārgavacarite ekonacatvāriṃśattamo 'dhyāyaḥ // 39// vasiṣṭha uvāca sucandre patite rājan rājendrāṇāṃ śiromaṇau / tatputraḥ puṣkarākṣastu rāmaṃ yoddhumathāgataḥ
हिन्दी अर्थ
ये ललिता की सेना को अत्यन्त ही समाकुल कर रहे थे।३६। यद्यपि वे शक्तियों के शस्त्रों के द्वारा जो करोड़ों ही थे बारम्बार काटे भी जा रहे थे तो भी काम कर रहे थे ।४०। वे ऊपर-ऊपर में सपिण्ड प्रविसर्पी बढ़ रहे च। उनमें बहुत से सर्प नष्ट हो जाया करते हैं तथापि वे पुनः समुत्पन्न हो
English
"When the crest-jewel of leading kings, Sucandra fell, his son Puskaraksa came forward to fight with Rama.