Brahma Purana· Brahma Purāṇa
16
अध्याय 16 / 246

Adhyaya 16

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अध्याय १६

श्लोक 1

भजमानस्य पुत्रो ऽथ रथमुख्यो विदूरथः राजाधिदेवः शूरस् तु विदूरथसुतो ऽभवत्

bhajamānasya putro 'tha rathamukhyo vidūrathaḥ rājādhidevaḥ śūras tu vidūrathasuto 'bhavat

हिन्दी अर्थ

सूर्य कोणादित्यके नामसे विख्यात होकर रहते हैं। उसीमें तिल आदि रखे । उस पात्रको एक दूसरे उनका दर्शन करके मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो पात्रसे ढककर रखे। इसके बाद हृदय आदि जाता है। अङ्गोंके क्रमसे अङ्गन्यास और करन्यास करके मुनियोंने कहा--सुरश्रेष्ठ पूर्वोक्त ओण्ड्र देशमें पूर्ण श्रद्धाके साथ अपने आत्मस्वरूप भगवान्

English

Gandh&rl and Madri were the wives of Kroitr* Gan* dhiii gave birth to Anamitra o( great might.

अध्याय १६

श्लोक 2

राजाधिदेवस्य सुता जज्ञिरे वीर्यवत्तराः दत्तातिदत्तौ बलिनौ शोणाश्वः श्वेतवाहनः

rājādhidevasya sutā jajñire vīryavattarāḥ dattātidattau balinau śoṇāśvaḥ śvetavāhanaḥ

हिन्दी अर्थ

जो सूर्यका क्षेत्र है, जहाँ भगवान् भास्कर निवास सूर्यका ध्यान करे, पूर्वोक्त अष्टदल कमलके करते हैं, उसका वर्णन कोजिये। इस समय हम मध्यभागमें तथा अग्नि, नैऋत्य, वायव्य और ईशान उसे ही सुनना चाहते हैं । कोणोंके दलोंमें एवं पुन: मध्यभागमें क्रमशः प्रभूत, ब्रह्माजी बोले-मुनिवरो! लवणसमुद्रका विमल, सार, आराध्य, परम और सुखरूप सूर्यदेवका

English

Madri gave birth to Yudhijit (known as) Dcvamldlufa. She gave bink to Anamitra who conquered the enemies and who was never ddeated in battlefield.

अध्याय १६

श्लोक 3

शमी च दण्डशर्मा च दन्तशत्रुश् च शत्रुजित् श्रवणा च श्रविष्ठा च स्वसारौ संबभूवतुः

śamī ca daṇḍaśarmā ca dantaśatruś ca śatrujit śravaṇā ca śraviṣṭhā ca svasārau saṃbabhūvatuḥ

हिन्दी अर्थ

उत्तरतट अत्यन्त मनोहर और पवित्र है। वह सब पूजन करे। इसके अनन्तर वहाँ आकाशसे सूर्यदेवका ओर वालुकाराशिसे आच्छादित है। उस आवाहन करके कर्णिकाके ऊपर उनको स्थापना सर्वगुणसम्मन्न प्रदेशमें चम्पा, अशोक, मौलसिरी, करे । तत्पश्चात् हाथोंसे सुमुख-संपुट आदि मुद्राएँ करवीर (कनेर), गुलाब, नागकेसर, ताड, सुपारी, दिखाये। फिर देवताका स्नान आदि कराकर

English

The Jewel exuded molten gold in the abode of

अध्याय १६

श्लोक 4

शमिपुत्रः प्रतिक्षत्रः प्रतिक्षत्रस्य चात्मजः स्वयंभोजः स्वयंभोजाद् भदिकः संबभूव ह

śamiputraḥ pratikṣatraḥ pratikṣatrasya cātmajaḥ svayaṃbhojaḥ svayaṃbhojād bhadikaḥ saṃbabhūva ha

हिन्दी अर्थ

नारियल, कैथ और अन्य नाना प्रकारके वृक्ष एकाग्रचित्त हो इस प्रकार ध्यान करे-भगवान् चारों ओर शोभा पाते हैं। वहाँ भगवान् सूर्यका सूर्य श्वेत कमलके आसनपर तेजोमण्डलमें विराजमान पुण्यक्षेत्र है, जो सम्पूर्ण जगत्में विख्यात है।हैं। उनकी आंखें पीली और शरीरका रंग लाल उसका विस्तार सब ओरसे एक योजनसे अधिक है। उनके दो भुजाएँ हैं। उनका वस्त्र कमलके

English

Lord desired to get the excellent jewel from him.

अध्याय १६

श्लोक 5

तस्य पुत्रा बभूवुर् हि सर्वे भीमपराक्रमाः कृतवर्माग्रजस् तेषां शतधन्वा तु मध्यमः

tasya putrā babhūvur hi sarve bhīmaparākramāḥ kṛtavarmāgrajas teṣāṃ śatadhanvā tu madhyamaḥ

हिन्दी अर्थ

है। वहाँ सहस्र किरणोंसे सुशोभित साक्षात् भगवान् समान लाल है। वे सब प्रकारके शुभ लक्षणोंसे सूर्य निवास करते हैं, वे 'कोणादित्य' के नामसे युक्त और सभी तरहके आभूषणोंसे विभूषित हैं । विख्यात एवं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले हें । उनका रूप सुन्दर है। वे वर देनेवाले, शान्त एवं वहाँ माघमासके शुक्लपक्षकी सप्तमी तिथिको प्रभापुञ्जसे देदीप्यमान हैं। तदनन्तर उदयकालमें

English

The Vrfpb and Andhakas had comt to know that Kfwa had requested for the jewel. Hence they suspected him to be the cause of Prasena's death.

अध्याय १६

श्लोक 6

देवान्तश् च नरान्तश् च भिषग्वैतरणश् च यः सुदान्तश् चातिदान्तश् च निकाश्यः कामदम्भकः

devāntaś ca narāntaś ca bhiṣagvaitaraṇaś ca yaḥ sudāntaś cātidāntaś ca nikāśyaḥ kāmadambhakaḥ

हिन्दी अर्थ

इन्द्रिय-संयमपूर्वक उपवास करे फिर प्रातःकाल स्तिग्ध सिन्दूरके समान अरुण वर्णवाले भगवान् शौच आदिसे निवृत्त एवं विशुद्धचित्त हो सूर्यदेवका सूर्यका दर्शन करके अर्घ्यपात्र ले। उसे सिरके स्मरण करते हुए विधिपूर्वक समुद्रमें स्नान करे। पास लगाये और पृथ्वीपर घुटने टेककर मौन हो

English

Being susoecced thus the righteous Kffa who had not

अध्याय १६

श्लोक 7

देवान्तस्याभवत् पुत्रो विद्वान् कम्बलबर्हिषः असमौजाः सुतस् तस्य नासमौजाश् च ताव् उभौ

devāntasyābhavat putro vidvān kambalabarhiṣaḥ asamaujāḥ sutas tasya nāsamaujāś ca tāv ubhau

हिन्दी अर्थ

जलसे बाहर आकर दो स्वच्छ वस्त्र धारण करे। सूर्यको अर्घ्य दे। जिस पुरुषको दीक्षा नहीं दी फिर आचमन करके पवित्रतापूर्वक सूर्योदयके गयी है, वह भावयुक्त श्रद्धाके साथ सूर्यका नाम समय समुद्रके तटपर पूर्वाभिमुख होकर बैठे। लेकर ही अर्घ्य दे; क्योंकि भगवान् सूर्य भक्तिके लाल चन्दन और जलसे ताँबेके पात्रमें एक अष्टदल द्वारा ही वशमें होते हैं।

English

)>H4«4siU. The details of thb fabulous gem are found in thb and the IbOowing chapter. It b not pomble to identify thb gem with the Kobinoor that adorns the British crown.

अध्याय १६

श्लोक 8

अजातपुत्राय सुतान् प्रददाव् असमौजसे सुदंष्ट्रश् च सुचारुश् च कृष्ण इत्य् अन्धकाः स्मृताः

ajātaputrāya sutān pradadāv asamaujase sudaṃṣṭraś ca sucāruś ca kṛṣṇa ity andhakāḥ smṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

कमलकी आकृति बनाये, जो केसरयुक्त और अग्नि, नैक्रत्य, वायव्य एवं ईशान कोण, मध्यभाग

English

*The lion killed Prasena. The lion was killed by J&m- bavin. O gentle boy, do not cry. This Syamantaka is yours".

अध्याय १६

श्लोक 9

गान्धारी चैव माद्री च क्रोष्टुभार्ये बभूवतुः गान्धारी जनयाम् आस अनमित्रं महाबलम्

gāndhārī caiva mādrī ca kroṣṭubhārye babhūvatuḥ gāndhārī janayām āsa anamitraṃ mahābalam

हिन्दी अर्थ

तथा पूर्व आदि दिशाओंमें क्रमशः हृदय, सिर, शिखा, कवच, नेत्र और अस्त्रको पूजा करे।'

English

Then he fought a hand-to-hand fight with Jambav&n within the cave for twentyone days.

अध्याय १६

श्लोक 10

माद्री युधाजितं पुत्रं ततो वै देवमीधुषम् अनमित्रम् अमित्राणां जेतारम् अपराजितम्

mādrī yudhājitaṃ putraṃ tato vai devamīdhuṣam anamitram amitrāṇāṃ jetāram aparājitam

हिन्दी अर्थ

कर जप, स्तुति, नमस्कार तथा मुद्रा करके देवताका विसर्जन करे। जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, स्त्री

English

After Krfna had entered the cave (and did not come out for long) Balarkma and others returned to Dv&ravatl and an¬ nounced that Kffna was slain.

अध्याय १६

श्लोक 11

अनमित्रसुतो निघ्नो निघ्नतो द्वौ बभूवतुः प्रसेनश् चाथ सत्राजिच् छत्रुसेनाजिताव् उभौ

anamitrasuto nighno nighnato dvau babhūvatuḥ prasenaś cātha satrājic chatrusenājitāv ubhau

हिन्दी अर्थ

दीप, नैवेद्य, साष्टाङ्ग प्रणाम, जय-जयकार तथा स्तोत्रोंद्वारा उनको पूजा करे। इस प्रकार सहस्र किरणोंद्वारा मण्डित जगदीश्वर सूर्यदेवका पूजन करके मनुष्य दस अश्वमेध-यज्ञोंका फल पाता है ।

English

Krya defeated Jambavan of great might and obtained Jambavatl the daughter of the king of bears, acclaimed (by all).

अध्याय १६

श्लोक 12

प्रसेनो द्वारवत्यां तु निवसन् यो महामणिम् दिव्यं स्यमन्तकं नाम स सूर्याद् उपलब्धवान्

praseno dvāravatyāṃ tu nivasan yo mahāmaṇim divyaṃ syamantakaṃ nāma sa sūryād upalabdhavān

हिन्दी अर्थ

इतना ही नहीं, बह सब पापोंसे मुक्त हो दिव्य

English

He took the Syamantaka jewel in order to clear himself (of false accusation). After consoling the king of bears he came out of the cave.

अध्याय १६

श्लोक 13

तस्य सत्राजितः सूर्यः सखा प्राणसमो ऽभवत् स कदाचिन् निशापाये रथेन रथिनां वरः

tasya satrājitaḥ sūryaḥ sakhā prāṇasamo 'bhavat sa kadācin niśāpāye rathena rathināṃ varaḥ

हिन्दी अर्थ

और शूद्र अपनी इन्द्रियोंको वशमें रखते हुए सदा शरीर धारण करता है और अपने आगे-पीछेकी संयमपूर्वक भक्तिभाव और विशुद्ध चित्तसे भगवान् सात-सात पीढ़ियोंका उद्धार करके सूर्यके समान

English

Three of them were well renowned. BhaAgak&ra was- the eldest. Others were the heroic Vatainati and Vasumedha. O excellent brahmins, his three daughters too were famous in the quarters.

अध्याय १६

श्लोक 14

तोयकूलम् अपः स्प्रष्टुम् उपस्थातुं ययौ रविम् तस्योपतिष्ठतः सूर्यं विवस्वान् अग्रतः स्थितः

toyakūlam apaḥ spraṣṭum upasthātuṃ yayau ravim tasyopatiṣṭhataḥ sūryaṃ vivasvān agrataḥ sthitaḥ

हिन्दी अर्थ

सूर्यको अर्घ्य देते हैं, वे मनोवाञ्छित भोगोंका उपभोग करके परम गतिको प्राप्त होते हैं । जो मनुष्य तीनों लोकोंको प्रकाशित करनेवाले आकाशविहारी भगवान् सूर्यकी शरण लेते हैं, वे

English

He went to the water's edge to touch water and to worship the Sun; as he worshipped the Sun, Vivasvan stood before him,

अध्याय १६

श्लोक 15

विस्पष्टमूर्तिर् भगवांस् तेजोमण्डलवान् विभुः अथ राजा विवस्वन्तम् उवाच स्थितम् अग्रतः

vispaṣṭamūrtir bhagavāṃs tejomaṇḍalavān vibhuḥ atha rājā vivasvantam uvāca sthitam agrataḥ

हिन्दी अर्थ

सुखके भागी होते हैं। जबतक भगवान् सूर्यको विधिपूर्वक अर्घ्य न दे लिया जाय, तबतक श्रीविष्णु, शङ्कर अथवा इन्द्रका पूजन नहीं करना चाहिए। अतः प्रतिदिन पवित्र हो प्रयत्न करके मनोहर

English

the lord, in clear form, with a circle of brilliance. Then the king spoke to Vivasvan standing before him:

अध्याय १६

श्लोक 16

यथैव व्योम्नि पश्यामि सदा त्वां ज्योतिषां पते तेजोमण्डलिनं देवं तथैव पुरतः स्थितम्

yathaiva vyomni paśyāmi sadā tvāṃ jyotiṣāṃ pate tejomaṇḍalinaṃ devaṃ tathaiva purataḥ sthitam

हिन्दी अर्थ

फूलों और चन्दन आदिके द्वारा सूर्यदेवको अर्घ्य देना चाहिए। इस प्रकार जो सप्तमी तिथिको स्नान करके शुद्ध एवं एकाग्रचित्त हो सूर्यको अर्घ्य देता है, उसे मनोवाञ्छित फल प्राप्त होता है । रोगी

English

"As I always see you in the sky, lord of lights, a god with a circle of splendour, so you stand before me.

अध्याय १६

श्लोक 17

को विशेषो ऽस्ति मे त्वत्तः सख्येनोपगतस्य वै एतच् छ्रुत्वा तु भगवान् मणिरत्नं स्यमन्तकम्

ko viśeṣo 'sti me tvattaḥ sakhyenopagatasya vai etac chrutvā tu bhagavān maṇiratnaṃ syamantakam

हिन्दी अर्थ

पुरुष रोगसे मुक्त हो जाता है, धनकी इच्छा रखनेवालेको धन मिलता है, विद्यार्थीको विद्या प्रात होती है और पुत्रकी कामना रखनेवाला मनुष्य पुत्रवान् होता है।

English

What difference is there between you and me, who have come by friendship?" Hearing this, the revered one

अध्याय १६

श्लोक 18

स्वकण्ठाद् अवमुच्याथ एकान्ते न्यस्तवान् विभुः ततो विग्रहवन्तं तं ददर्श नृपतिस् तदा

svakaṇṭhād avamucyātha ekānte nyastavān vibhuḥ tato vigrahavantaṃ taṃ dadarśa nṛpatis tadā

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार समुद्रमें स्नान करके सूर्यको अर्घ्य दे, उन्हें प्रणाम करे, फिर हाथमें फूल लेकर मौन हो सूर्यके मन्दिरमें जाय। मन्दिरके भीतर प्रवेश करके भगवान् कोणादित्यको तीन बार प्रदक्षिणा

English

took off from his neck the jewel Syamantaka and set it down aside. Then the king saw him in bodily form.

अध्याय १६

श्लोक 19

प्रीतिमान् अथ तं दृष्ट्वा मुहूर्तं कृतवान् कथाम् तम् अभिप्रस्थितं भूयो विवस्वन्तं स सत्रजित्

prītimān atha taṃ dṛṣṭvā muhūrtaṃ kṛtavān kathām tam abhiprasthitaṃ bhūyo vivasvantaṃ sa satrajit

हिन्दी अर्थ

तेजस्वी एवं इच्छानुसार गमन करनेवाले विमानपर बैठकर सूर्यके लोकमें जाता है। उस समय गन्धर्वगण उसका यशोगान करते हैं। वहाँ एक कल्पतक श्रेष्ठ भोगोंका उपभोग करके पुण्य क्षीण

English

Pleased, Satrajit conversed with him for a moment; and as Vivasvan was about to depart again he said:

अध्याय १६

श्लोक 20

लोकान् भासयसे सर्वान् येन त्वं सततं प्रभो तद् एतन् मणिरत्नं मे भगवन् दातुम् अर्हसि

lokān bhāsayase sarvān yena tvaṃ satataṃ prabho tad etan maṇiratnaṃ me bhagavan dātum arhasi

हिन्दी अर्थ

होनेपर वह पुनः इस संसारमें आता और योगियोंके उत्तम कुलमें जन्म ले चारों वेदोंका विद्वान्, स्वधर्मपरायण तथा पवित्र ब्राह्मण होता है। तदनन्तर भगवान् सूर्यसे ही योगको शिक्षा प्राप्त

English

"With which you constantly illumine all the worlds, lord — that jewel you ought to give me, revered one."

अध्याय १६

श्लोक 21

ततः स्यमन्तकमणिं दत्तवान् भास्करस् तदा स तम् आबध्य नगरीं प्रविवेश महीपतिः

tataḥ syamantakamaṇiṃ dattavān bhāskaras tadā sa tam ābadhya nagarīṃ praviveśa mahīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

करके मोक्ष पा लेता है। चैत्रमासके शुक्लपक्षमें भगवान् कोणादित्यकी यात्रा होती है। यह यात्रा दमनभञ्जिकाके नामसे विख्यात है। जो मनुष्य यह यात्रा करता है, उसे भी पूर्वोक्त फलकी प्राप्ति

English

Then the Sun gave the Syamantaka jewel; tying it on, that king entered the city.

अध्याय १६

श्लोक 22

तं जनाः पर्यधावन्त सूर्यो ऽयं गच्छतीति ह स्वां पुरीं स विसिष्माय राजा त्व् अन्तःपुरं तथा

taṃ janāḥ paryadhāvanta sūryo 'yaṃ gacchatīti ha svāṃ purīṃ sa visiṣmāya rājā tv antaḥpuraṃ tathā

हिन्दी अर्थ

होती है। भगवान् सूर्यके शयन और जागरणके समय, संक्रान्तिके दिन, विषुव योगमें, उत्तरायण या दक्षिणायन आरम्भ होनेपर, रविवारको, सप्तमी तिथिको अथवा पर्वके समय जो जितेन्द्रिय पुरुष

English

People ran after him, saying "The Sun is coming!" He entered his own city and the inner apartments amazed.

अध्याय १६

श्लोक 23

तं प्रसेनजितं दिव्यं मणिरत्नं स्यमन्तकम् ददौ भ्रात्रे नरपतिः प्रेम्णा सत्राजिद् उत्तमम्

taṃ prasenajitaṃ divyaṃ maṇiratnaṃ syamantakam dadau bhrātre narapatiḥ premṇā satrājid uttamam

हिन्दी अर्थ

वहाँको श्रद्धापूर्वक यात्रा करते हैं, वे सूर्यकी ही भाँति तेजस्वी विमानके द्वारा उनके लोकमें जाते हैं। वहाँ (पूर्वोक्त क्षेत्रमें) समुद्रके तटपर रामेश्वर नामसे विख्यात भगवान् महादेवजी विराजमान हैं,

English

The king Satrajit lovingly gave that divine, excellent jewel Syamantaka to his brother Prasenajit.

अध्याय १६

श्लोक 24

स मणिः स्यन्दते रुक्मं वृष्ण्यन्धकनिवेशने कालवर्षी च पर्जन्यो न च व्याधिभयं ह्य् अभूत्

sa maṇiḥ syandate rukmaṃ vṛṣṇyandhakaniveśane kālavarṣī ca parjanyo na ca vyādhibhayaṃ hy abhūt

हिन्दी अर्थ

करे और अत्यन्त भक्तिके साथ गन्ध, पुष्प, धूप, जो समस्त अभिलक्षित फलोंके देनेवाले हैं। जो

English

The jewel yields gold in the Vrishni-Andhaka dwellings, rain comes in due season, and there was no fear of disease.

अध्याय १६

श्लोक 25

लिप्सां चक्रे प्रसेनस्य मणिरत्ने स्यमन्तके गोविन्दो न च तं लेभे शक्तो ऽपि न जहार सः

lipsāṃ cakre prasenasya maṇiratne syamantake govindo na ca taṃ lebhe śakto 'pi na jahāra saḥ

हिन्दी अर्थ

१. पूजनके वाक्य इस प्रकार हैं-' हां हृदयाय नमः,

English

Govinda desired the Syamantaka jewel for Prasena; though able, he did not obtain it nor take it.

अध्याय १६

श्लोक 26

कदाचिन् मृगयां यातः प्रसेनस् तेन भूषितः स्यमन्तककृते सिंहाद् वधं प्राप वनेचरात्

kadācin mṛgayāṃ yātaḥ prasenas tena bhūṣitaḥ syamantakakṛte siṃhād vadhaṃ prāpa vanecarāt

हिन्दी अर्थ

अग्निकोणे। हीं शिरसे नमः, नैत्र्त्ये । हं शिखायै नमः, '

English

Once Prasena, adorned with it, went hunting and, for the sake of the Syamantaka, met his death from a forest-roving lion.

अध्याय १६

श्लोक 27

अथ सिंहं प्रधावन्तम् ऋक्षराजो महाबलः निहत्य मणिरत्नं तद् आदाय प्राविशद् गुहाम्

atha siṃhaṃ pradhāvantam ṛkṣarājo mahābalaḥ nihatya maṇiratnaṃ tad ādāya prāviśad guhām

हिन्दी अर्थ

वायव्ये। हैं कवचाय नमः, ऐशाने । हौं नेत्रत्रयाय नमः, मध्यभागे। हः अस्त्राय नमः, चतुर्दिक्षु ' इति।

English

Then the mighty bear-king killed the charging lion, took that jewel and entered a cave.

अध्याय १६

श्लोक 28

ततो वृष्ण्यन्धकाः कृष्णं प्रसेनवधकारणात् प्रार्थनां तां मणेर् बद्ध्वा सर्व एव शशङ्किरे

tato vṛṣṇyandhakāḥ kṛṣṇaṃ prasenavadhakāraṇāt prārthanāṃ tāṃ maṇer baddhvā sarva eva śaśaṅkire

हिन्दी अर्थ

भुक्त्वाभिमतान् कामान् प््राप्रुवन्ति परां गतिम्॥

English

Then the Vrishnis and Andhakas, because of Prasena's death and Krishna's earlier request for the jewel, all suspected Krishna.

अध्याय १६

श्लोक 29

स शङ्क्यमानो धर्मात्मा अकारी तस्य कर्मणः आहरिष्ये मणिम् इति प्रतिज्ञाय वनं ययौ

sa śaṅkyamāno dharmātmā akārī tasya karmaṇaḥ āhariṣye maṇim iti pratijñāya vanaṃ yayau

हिन्दी अर्थ

भगवान् सूर्यकी महिमा ६७

English

Suspected, the righteous one resolved to clear himself of that deed and went to the forest, vowing, "I shall bring the jewel."

अध्याय १६

श्लोक 30

यत्र प्रसेनो मृगयां व्यचरत् तत्र चाप्य् अथ प्रसेनस्य पदं गृह्य पुरुषैर् आप्तकारिभिः

yatra praseno mṛgayāṃ vyacarat tatra cāpy atha prasenasya padaṃ gṛhya puruṣair āptakāribhiḥ

हिन्दी अर्थ

समुद्रमें स्नान करके वहाँ श्रीरामेश्वरका दर्शन उनकी पूजा करते हैं, वे महात्मा पुरुष राजसूय करते और गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तथा अश्वमेध-यज्ञोंका फल पाते और परम नमस्कार, स्तोत्र, गीत और मनोहर वाद्योद्वारा सिद्धिको प्राप्त होते हैं।

English

Where Prasena had hunted, he followed Prasena's tracks with trustworthy men.

अध्याय १६

श्लोक 31

ऋक्षवन्तं गिरिवरं विन्ध्यं च गिरिम् उत्तमम् अन्वेषयन् परिश्रान्तः स ददर्श महामनाः

ṛkṣavantaṃ girivaraṃ vindhyaṃ ca girim uttamam anveṣayan pariśrāntaḥ sa dadarśa mahāmanāḥ

हिन्दी अर्थ

भगवान् सूर्यकी महिमा मुनियोंने कहा-- सुरत्रेष्ठ! आपने भोग और ब्राह्मणको दान दिया जाता हे, उसे देवता, मनुष्य मोक्ष प्रदान करनेवाले भगवान् भास्करोंके उत्तम और पितर--सभी ग्रहण करते हें । पत्र, पुष्प, क्षेत्रका जो वर्णन किया है, वह सब हमलोगोंने फल और जल--जो कुछ भी भक्तिपूर्वक अर्पण

English

Searching the best mountain Riksha-vat and the excellent Vindhya, the great-minded one, wearied, saw

अध्याय १६

श्लोक 32

साश्वं हतं प्रसेनं तु नाविन्दत च तन्मणिम् अथ सिंहः प्रसेनस्य शरीरस्याविदूरतः

sāśvaṃ hataṃ prasenaṃ tu nāvindata ca tanmaṇim atha siṃhaḥ prasenasya śarīrasyāvidūrataḥ

हिन्दी अर्थ

सुना। अब यह बताइये कि उनकी भक्ति कैसे किया जाता है, उसे देवता ग्रहण करते हें; परंतु की जाती है और वे किस प्रकार प्रसन्न होते हैं ? वे नास्तिकोंकी दी हुई वस्तु नहीं स्वीकार करते ।

English

Prasena slain with his horse, but did not find the jewel; and the lion not far from Prasena's body,

अध्याय १६

श्लोक 33

ऋक्षेण निहतो दृष्टः पदैर् ऋक्षस् तु सूचितः पदैस् तैर् अन्वियायाथ गुहाम् ऋक्षस्य माधवः

ṛkṣeṇa nihato dṛṣṭaḥ padair ṛkṣas tu sūcitaḥ padais tair anviyāyātha guhām ṛkṣasya mādhavaḥ

हिन्दी अर्थ

इस समय यही सब सुननेकी हमारी इच्छा है ।

English

killed by a bear, shown by the bear's footprints. Following those tracks Madhava went to the bear's cave.

अध्याय १६

श्लोक 34

स हि ऋक्षबिले वाणीं शुश्राव प्रमदेरिताम् धात्र्या कुमारम् आदाय सुतं जाम्बवतो द्विजाः

sa hi ṛkṣabile vāṇīṃ śuśrāva pramaderitām dhātryā kumāram ādāya sutaṃ jāmbavato dvijāḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी बोले--मनके द्वारा इष्टदेवके प्रति जो भावना होती है, उसे ही भक्ति और श्रद्धा कहते हैं। जो इष्टदेवकी कथा सुनता, उनके भक्तोंकी पूजा करता तथा अग्निको उपासनामें संलग्न रहता

English

In the bear's den he heard words of a nurse, Brahmins, who with the child, Jambavan's son, was playing with the jewel and saying "Don't cry":

अध्याय १६

श्लोक 35

क्रीडयन्त्या च मणिना मा रोदीर् इत्य् अथेरिताम्

krīḍayantyā ca maṇinā mā rodīr ity atheritām

हिन्दी अर्थ

है बह सनातन भक्त है। जो इष्टदेवका चिन्तन करता, उन्हींमें मन लगाता, उन्हींको पूजामें रत रहता तथा उन्हींके लिये कर्म करता है, वह निश्चय ही सनातन भक्त है। जो इष्टदेवके लिये

English

she was soothing him, saying "Don't cry."

अध्याय १६

श्लोक 36

सिंहः प्रसेनम् अवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः सुकुमारक मा रोदीस् तव ह्य् एष स्यमन्तकः

siṃhaḥ prasenam avadhīt siṃho jāmbavatā hataḥ sukumāraka mā rodīs tava hy eṣa syamantakaḥ

हिन्दी अर्थ

किये जानेवाले कर्मोका अनुमोदन करता, उनके भक्तोंमें दोष नहीं देखता, अन्य देवताको निन्दा नहीं करता, सूर्यके व्रत रखता तथा चलते, फिरते,

English

"The lion killed Prasena; the lion was killed by Jambavan. Little child, do not cry: this Syamantaka is yours."

अध्याय १६

श्लोक 37

व्यक्तितस् तस्य शब्दस्य तूर्णम् एव बिलं ययौ प्रविश्य तत्र भगवांस् तद् ऋक्षबिलम् अञ्जसा

vyaktitas tasya śabdasya tūrṇam eva bilaṃ yayau praviśya tatra bhagavāṃs tad ṛkṣabilam añjasā

हिन्दी अर्थ

समय भगवान् भास्करका स्मरण करता है, वह

English

At the clear sound he went quickly to the cave; the lord entering that bear's cave easily,

अध्याय १६

श्लोक 38

स्थापयित्वा बिलद्वारे यदूंल् लाङ्गलिना सह शार्ङ्गधन्वा बिलस्थं तु जाम्बवन्तं ददर्श सः

sthāpayitvā biladvāre yadūṃl lāṅgalinā saha śārṅgadhanvā bilasthaṃ tu jāmbavantaṃ dadarśa saḥ

हिन्दी अर्थ

नियम और आचारके साथ भावशुद्धिका भी उपयोग करना चाहिए। हृदयके भावको शुद्ध रखते हुए जो कुछ किया जाता है, वह सब सफल होता है। भगवान् सूर्यके स्तवन, जप, उपहार-समर्पण,

English

left the Yadavas with Langali (Balarama) at the cave's mouth. The bow-wielder saw Jambavan inside the cave.

अध्याय १६

श्लोक 39

युयुधे वासुदेवस् तु बिले जाम्बवता सह बाहुभ्याम् एव गोविन्दो दिवसान् एकविंशतिम्

yuyudhe vāsudevas tu bile jāmbavatā saha bāhubhyām eva govindo divasān ekaviṃśatim

हिन्दी अर्थ

पूजन, उपवास (व्रत) और भजनसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। जो पृथ्वीपर मस्तक रखकर भगवान् सूर्यको नमस्कार करता है, वह तत्काल सब पापोंसे छूट जाता है, इसमें तनिक

English

Vasudeva fought with Jambavan in the cave with arms alone for twenty-one days.

अध्याय १६

श्लोक 40

प्रविष्टे ऽथ बिले कृष्णे बलदेवपुरःसराः पुरीं द्वारवतीम् एत्य हतं कृष्णं न्यवेदयन्

praviṣṭe 'tha bile kṛṣṇe baladevapuraḥsarāḥ purīṃ dvāravatīm etya hataṃ kṛṣṇaṃ nyavedayan

हिन्दी अर्थ

भी संदेह नहीं है । जो मनुष्य भक्तिपूर्वक सूर्यदेवकी प्रदक्षिणा करता है, उसके द्वारा सातों द्वीपोंसहित पृथ्वीकी परिक्रमा हो जाती है। जो सूर्यदेवको अपने हृदयमें धारण करके केवल आकाशको

English

When Krishna had entered the cave, those led by Baladeva went to Dvaravati and reported Krishna dead.

अध्याय १६

श्लोक 41

वासुदेवो ऽपि निर्जित्य जाम्बवन्तं महाबलम् लेभे जाम्बवतीं कन्याम् ऋक्षराजस्य संमताम्

vāsudevo 'pi nirjitya jāmbavantaṃ mahābalam lebhe jāmbavatīṃ kanyām ṛkṣarājasya saṃmatām

हिन्दी अर्थ

प्रदक्षिणा करता है, उसके द्वारा निश्चय ही सम्पूर्ण

English

Vasudeva, having conquered the mighty Jambavan, obtained the bear-king's approved daughter Jambavati,

अध्याय १६

श्लोक 42

मणिं स्यमन्तकं चैव जग्राहात्मविशुद्धये अनुनीयर्क्षराजं तु निर्ययौ च ततो बिलात्

maṇiṃ syamantakaṃ caiva jagrāhātmaviśuddhaye anunīyarkṣarājaṃ tu niryayau ca tato bilāt

हिन्दी अर्थ

मनुष्य अधिक भक्त माना गया है। विज्ञ पुरुषको सप्तमीको एक समय भोजन करके नियम और सदा ऐसी ही भक्ति करनी चाहिए। भक्ति, समाधि, व्रतका पालन करते हुए सूर्यदेवका भक्तिपूर्वक स्तुति और मनसे जो नियम किया जाता और जो पूजन करता है, उसे अश्वमेध-यज्ञका फल मिलता

English

and took the Syamantaka jewel for his own clearing. Appeasing the bear-king, he came out of the cave.

अध्याय १६

श्लोक 43

उपायाद् द्वारकां कृष्णः स विनीतैः पुरःसरैः एवं स मणिम् आहृत्य विशोध्यात्मानम् अच्युतः

upāyād dvārakāṃ kṛṣṇaḥ sa vinītaiḥ puraḥsaraiḥ evaṃ sa maṇim āhṛtya viśodhyātmānam acyutaḥ

हिन्दी अर्थ

स्तुतिजप्योपहारेण पूजयापि विवस्वतः। उपवासेन भक्त्या वै सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥ प्रणिधाय शिरो भूम्यां नमस्कारं करोति यः।तत्क्षणात्सर्वपापेभ्यो मुच्यते नात्र संशयः॥

English

Krishna came to Dvaraka with modest followers in front. Thus Achyuta, having brought the jewel and cleared himself,

अध्याय १६

श्लोक 44

ददौ सत्राजिते तं वै सर्वसात्वतसंसदि एवं मिथ्याभिशस्तेन कृष्णेनामित्रघातिना

dadau satrājite taṃ vai sarvasātvatasaṃsadi evaṃ mithyābhiśastena kṛṣṇenāmitraghātinā

हिन्दी अर्थ

सूर्य मनसि यः कृत्वा कुर्याद् व्योमप्रदक्षिणाम्। प्रदक्षिणीकृतास्तेन सर्वे देवा भवन्ति हि॥

English

gave it to Satrajit in the assembly of all the Satvatas. Thus Krishna, falsely accused, destroyer of foes,

अध्याय १६

श्लोक 45

आत्मा विशोधितः पापाद् विनिर्जित्य स्यमन्तकम् सत्राजितो दश त्व् आसन् भार्यास् तासां शतं सुताः

ātmā viśodhitaḥ pāpād vinirjitya syamantakam satrājito daśa tv āsan bhāryās tāsāṃ śataṃ sutāḥ

हिन्दी अर्थ

है। जो षष्ठी अथवा सप्तमीको दिन-रात उपवास करके भगवान् भास्करका पूजन करता है, वह परम गतिको प्राप्त होता है।

English

was cleansed of the sin, having won back the Syamantaka. Satrajit had ten wives, and a hundred sons by them.

अध्याय १६

श्लोक 46

ख्यातिमन्तस् त्रयस् तेषां भगंकारस् तु पूर्वजः वीरो वातपतिश् चैव वसुमेधस् तथैव च

khyātimantas trayas teṣāṃ bhagaṃkāras tu pūrvajaḥ vīro vātapatiś caiva vasumedhas tathaiva ca

हिन्दी अर्थ

जब शुक्लपक्षकी सप्तमीको रविवार हो, उस दिन विजयासप्तमी होती है। उसमें दिया हुआ दान महान् फल देनेवाला है । विजयासप्तमीको किया हुआ खान, दान, तप, होम और उपवास--

English

Three of them were famous: Bhagamkara the eldest, the hero Vatapati and Vasumedha;

अध्याय १६

श्लोक 47

कुमार्यश् चापि तिस्रो वै दिक्षु ख्याता द्विजोत्तमाः सत्यभामोत्तमा तासां व्रतिनी च दृढव्रता

kumāryaś cāpi tisro vai dikṣu khyātā dvijottamāḥ satyabhāmottamā tāsāṃ vratinī ca dṛḍhavratā

हिन्दी अर्थ

सब कुछ बड़े-बड़े पातकोंका नाश करनेवाला है। जो मनुष्य रविवारके दिन श्राद्ध करते और महातेजस्वी सूर्यका यजन करते हैं, उन्हें अभीष्ट फलको प्राप्ति होती है। जिनके समस्त धार्मिक

English

and three daughters, famed in all directions, best of Brahmins: Satyabhama the best of them, Vratini and Dridhavrata,

अध्याय १६

श्लोक 48

तथा प्रस्वापिनी चैव भार्यां कृष्णाय तां ददौ सभाक्षो भङ्गकारिस् तु नावेयश् च नरोत्तमौ

tathā prasvāpinī caiva bhāryāṃ kṛṣṇāya tāṃ dadau sabhākṣo bhaṅgakāris tu nāveyaś ca narottamau

हिन्दी अर्थ

कार्य सदा भगवान् सूर्यके उद्देश्यसे होते हैं, उनके कुलमें कोई दरिद्र अथवा रोगी नहीं होता। जो सफेद, लाल अथवा पीली मिट्टीसे भगवान् सूर्यके मन्दिरको लीपता है, उसे मनोवाञ्छित फलकी

English

and Prasvapini; he gave her as wife to Krishna. Sabhaksha, Bhangakara and Naveya were excellent men,

अध्याय १६

श्लोक 49

जज्ञाते गुणसंपन्नौ विश्रुतौ रूपसंपदा माद्र्याः पुत्रो ऽथ जज्ञे ऽथ वृष्णिपुत्रो युधाजितः

jajñāte guṇasaṃpannau viśrutau rūpasaṃpadā mādryāḥ putro 'tha jajñe 'tha vṛṣṇiputro yudhājitaḥ

हिन्दी अर्थ

प्राप्ति होती है। जो निराहार रहकर भाँति-भाँतिके सुगन्धित पुष्पोंद्वार सूर्यदेवका पूजन करता है, उसे अभीष्ट फलकी प्राप्ति होती है। जो घी अथवा तिलके तेलसे दीपक जलाकर भगवान् सूर्यको

English

born endowed with virtue and famed for beauty. Then Madri's son was born, and Vrishni's son Yudhajit.

अध्याय १६

श्लोक 50

जज्ञाते तनयौ वृष्णेः श्वफल्कश् चित्रकस् तथा श्वफल्कः काशिराजस्य सुतां भार्याम् अविन्दत

jajñāte tanayau vṛṣṇeḥ śvaphalkaś citrakas tathā śvaphalkaḥ kāśirājasya sutāṃ bhāryām avindata

हिन्दी अर्थ

पूजा करता है, वह कभी अंधा नहीं होता। दीप- दान करनेवाला मनुष्य सदा ज्ञानके प्रकाशसे प्रकाशित

English

Vrishni had two sons, Shvaphalka and Chitraka. Shvaphalka found a Kashi king's daughter as wife,

अध्याय १६

श्लोक 51

गान्दिनीं नाम तस्याश् च गाः सदा प्रददौ पिता तस्यां जज्ञे महाबाहुः श्रुतवान् अतिथिप्रियः

gāndinīṃ nāma tasyāś ca gāḥ sadā pradadau pitā tasyāṃ jajñe mahābāhuḥ śrutavān atithipriyaḥ

हिन्दी अर्थ

एक ही वर्षमें सिद्धि प्राप्त होती है। सूर्यके उदयसे लेकर अस्ततक उनकी ओर मुँह करके खड़ा हो किसी मन्त्र अथवा स्तोत्रका जप करना आदित्यव्रत कहलाता है। यह बड़े-बड़े पातकोंका नाश करनेवाला

English

named Gandini, to whom her father always gave cows; on her was born the mighty-armed Shrutavan, fond of guests,

अध्याय १६

श्लोक 52

अक्रूरो ऽथ महाभागो जज्ञे विपुलदक्षिणः उपमद्गुस् तथा मद्गुर् मुदरश् चारिमर्दनः

akrūro 'tha mahābhāgo jajñe vipuladakṣiṇaḥ upamadgus tathā madgur mudaraś cārimardanaḥ

हिन्दी अर्थ

है। सूर्योदयके समय श्रद्धापूर्वक अर्घ्य देकर सब कुछ साङ्गोपाङ्ग दान करे। इससे सब पापोंसे छुटकारा मिल जाता है।' अग्नि, जल, आकाश, पवित्र भूमि, प्रतिमा तथा पिण्डी (प्रतिमाको वेदी)-

English

and the fortunate Akrura, giver of ample fees; Upamadgu, Madgu, Mudara and Arimardana,

अध्याय १६

श्लोक 53

आरिक्षेपस् तथोपेक्षः शत्रुहा चारिमेजयः धर्मभृच् चापि धर्मा च गृध्रभोजान्धकस् तथा

ārikṣepas tathopekṣaḥ śatruhā cārimejayaḥ dharmabhṛc cāpi dharmā ca gṛdhrabhojāndhakas tathā

हिन्दी अर्थ

में यत्पूर्वक सूर्यदेवको अर्घ्य देना चाहिए। उत्तरायण अथवा दक्षिणायनमें सूर्यदेवका विशेषरूपसे पूजन करके मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। इस प्रकार जो मानव प्रत्येक वेलामें अथवा कुवेलामें

English

Arikshepa, Upeksha, Shatruha, Arimejaya, Dharmabhrit and Dharma, Gridhrabhoja and Andhaka,

अध्याय १६

श्लोक 54

आवाहप्रतिवाहौ च सुन्दरी च वराङ्गना विश्रुताश्वस्य महिषी कन्या चास्य वसुंधरा

āvāhaprativāhau ca sundarī ca varāṅganā viśrutāśvasya mahiṣī kanyā cāsya vasuṃdharā

हिन्दी अर्थ

भी भक्तिपूर्वक श्रीसूर्यदेवका पूजन करता है, वह उन्हींके लोकमें प्रतिष्ठित होता है। जो तीर्थोमें पवित्र हो भगवान् सूर्यको स्त्रान करानेके लिये एकाग्रतापूर्वक जल भरकर लाता है, वह परम

English

Avaha, Prativaha, and the excellent woman Sundari; the queen of Vishrutashva and her daughter Vasundhara,

अध्याय १६

श्लोक 55

रूपयौवनसंपन्ना सर्वसत्त्वमनोहरा अक्रूरेणोग्रसेनायां सुतौ वै कुलनन्दनौ

rūpayauvanasaṃpannā sarvasattvamanoharā akrūreṇograsenāyāṃ sutau vai kulanandanau

हिन्दी अर्थ

गतिको प्राप्त होता है । छत्र, ध्वजा, चँदोवा, पताका और चँवर आदि वस्तुएँ सूर्यदेवको श्रद्धापूर्वक समर्पित करके मनुष्य अभीष्ट गतिको प्राप्त होता है। मनुष्य जो-जो पदार्थ भगवान् सूर्यको भक्तिपूर्वक

English

endowed with beauty and youth, charming to all beings. Akrura, on Ugrasena's daughter, had two sons, delights of the family:

अध्याय १६

श्लोक 56

वसुदेवश् चोपदेवश् च जज्ञाते देववर्चसौ चित्रकस्याभवन् पुत्राः पृथुर् विपृथुर् एव च

vasudevaś copadevaś ca jajñāte devavarcasau citrakasyābhavan putrāḥ pṛthur vipṛthur eva ca

हिन्दी अर्थ

अर्पित करता है, उसे वे लाखगुना करके उस

English

Vasudeva and Upadeva, born radiant as gods. Chitraka's sons were Prithu and Viprithu,

अध्याय १६

श्लोक 57

अश्वग्रीवो ऽश्वबाहुश् च सुपार्श्वकगवेषणौ अरिष्टनेमिश् च सुता धर्मो धर्मभृद् एव च

aśvagrīvo 'śvabāhuś ca supārśvakagaveṣaṇau ariṣṭanemiś ca sutā dharmo dharmabhṛd eva ca

हिन्दी अर्थ

रहता है। जो सदा देव-मन्दिरों, चौराहों और पुरुषको देते हें । भगवान् सूर्यकी कृपासे मानसिक, सड्कोंपर दीप-दान करता है, वह रूपवान् तथा वाचिक तथा शारीरिक समस्त पाप नष्ट हो जाते सौभाग्यशाली होता है। दीपकी शिखा सदा ऊपरकी हैं। सूर्यदेवके एक दिनके पूजनसे भी जो फल ही ओर उठती है, उसकी गति कभी नीचेकी प्राप्त होता है, बह शास्त्रोक्त दक्षिणासे युक्त सैकड़ों

English

Ashvagriva, Ashvabahu, Suparshvaka and Gaveshana, Arishtanemi; and his sons Dharma and Dharmabhrit,

अध्याय १६

श्लोक 58

सुबाहुर् बहुबाहुश् च श्रविष्ठाश्रवणे स्त्रियौ इमां मिथ्याभिशस्तिं यः कृष्णस्य समुदाहृताम्

subāhur bahubāhuś ca śraviṣṭhāśravaṇe striyau imāṃ mithyābhiśastiṃ yaḥ kṛṣṇasya samudāhṛtām

हिन्दी अर्थ

ओर नहीं होती। इसी प्रकार दीप-दान करनेवाला यज्ञोंके अनुष्ठानसे भी नहीं मिलता। पुरुष भी दिव्य तेजसे प्रकाशित होता है। वह मुनियोंने कहा जगत्पते! भगवान् सूर्यका कभी तिर्यग्योनिमें नहीं पड़ता। जलते हुए दीपकको यह अद्भुत माहात्म्य हमने सुन लिया। अब पुनः न कभी चुराये, न नष्ट करे। दीपहर्ता मनुष्य हम जो कुछ पूछते हैं, उसे बतलाइये। गृहस्थ,

English

Subahu, Bahubahu, and the two women Shravishtha and Shravana. He who knows this false accusation of Krishna as it has been told

अध्याय १६

श्लोक 59

वेद मिथ्याभिशापास् तं न स्पृशन्ति कदाचन

veda mithyābhiśāpās taṃ na spṛśanti kadācana

हिन्दी अर्थ

बन्धन, नाश, क्रोध एवं तमोमय नरकको प्राप्त ब्रह्मचारी, वानप्रस्थ और संन्यासी-जो भी मोक्ष होता है। उदयकालमें प्रतिदिन सूर्यको अर्घ्य देनेसे प्राप्त करना चाहे, उसे किस देवताका पूजन करना १. अर्घ्येण सहितं चैव सर्व साङ्गं प्रदापयेत्। उदये श्रद्धया युक्तः सर्वपापैः प्रमुच्यते॥ (२९। ४६) २. अग्नौ तोयेऽन्तरिक्षे च शुचौ भूम्यां तथैव च। प्रतिमायां तथा पिण्ड्यां देवमर्घ्य प्रयतः ॥ (२९। ४८)

English

is never touched by false accusations.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 16
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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