Brahma Purana· Brahma Purāṇa
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अध्याय 171 / 246

Adhyaya 171

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अध्याय १७१

श्लोक 1

उर्वशीतीर्थम् आख्यातम् अश्वमेधफलप्रदम् स्नानदानमहादेववासुदेवार्चनादिभिः

urvaśītīrtham ākhyātam aśvamedhaphalapradam snānadānamahādevavāsudevārcanādibhiḥ

हिन्दी अर्थ

नमस्कार करता हूँ। करुणा करनेवाले भगवान् भी जिनके चरण-कमलोंकी पूजा करते हैं, उन

English

The holy centre named Pururavas destroys all sins even on being remembered. Why not on being visited? Those who are conversant with the Vedas know it.

अध्याय १७१

श्लोक 2

महेश्वरो यत्र देवो यत्र शार्ङ्गधरो हरिः प्रमतिर् नाम राजासीत् सार्वभौमः प्रतापवान्

maheśvaro yatra devo yatra śārṅgadharo hariḥ pramatir nāma rājāsīt sārvabhaumaḥ pratāpavān

हिन्दी अर्थ

शिवको प्रणाम करता हुँ तथा संसारको भय देनेवाले भगवान् भूतनाथको सर्वदा नमस्कार

English

King Pururavas went to the abode of Brahma. There, by chance he saw the divine river Sarasvatl laughing by the side of Brahma. On seeing her richly endowed with beauty the king asked UrvaSi:

अध्याय १७१

श्लोक 3

रिपूञ् जित्वा जगामाशु इन्द्रलोकं सुरैर् वृतम् तत्रापश्यत् सुरपतिं मरुद्भिः सह नारद

ripūñ jitvā jagāmāśu indralokaṃ surair vṛtam tatrāpaśyat surapatiṃ marudbhiḥ saha nārada

हिन्दी अर्थ

भगवानूको मैं नमस्कार करता हूँ। जिन्होंने पार्वतीदेवीके मुखसे निकलनेवाले वचनोंपर दृष्टिपात

English

Having conquered his enemies he quickly went to Indra's world, surrounded by gods; there he saw the lord of gods with the Maruts, Narada.

अध्याय १७१

श्लोक 4

जहासेन्द्रं पाशहस्तं प्रमतिः क्षत्रियर्षभः तं हसन्तम् अथालक्ष्य हरिः प्रमतिम् अब्रवीत्

jahāsendraṃ pāśahastaṃ pramatiḥ kṣatriyarṣabhaḥ taṃ hasantam athālakṣya hariḥ pramatim abravīt

हिन्दी अर्थ

करता हूँ। मनोवाञ्छित फलोंके दाता महेश्वरको करनेके लिये मानो तीन नेत्र धारण कर रखे हैं,

English

Pramati, bull among Kshatriyas, laughed at Indra, who was holding dice; seeing him laugh, Hari said to Pramati:

अध्याय १७१

श्लोक 5

देवालये महाबुद्धे मरुद्भिः क्रीडितैर् अलम् दिशो जित्वा दिवं प्राप्तः कुरु क्रीडां मया सह

devālaye mahābuddhe marudbhiḥ krīḍitair alam diśo jitvā divaṃ prāptaḥ kuru krīḍāṃ mayā saha

हिन्दी अर्थ

उन भगवानूको प्रणाम करता हूँ । पञ्चामृत, चन्दन, होकर दाताओंके लिये उत्तम फल देनेवाला हो। उत्तम धूप, दीप, भाँति-भाँतिके विचित्र पुष्प, यह सुनकर शंकरजी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने

English

"In the gods' abode, greatly wise one, enough of the Maruts' games; you have conquered the directions and reached heaven; play with me."

अध्याय १७१

श्लोक 6

सकषायं हरिवचो निशम्य प्रमतिर् नृपः तथेत्य् उवाच देवेन्द्रं निष्कृतिं कां तु मन्यसे तच् छ्रुत्वा प्रमतेर् वाक्यं सुरराण् नृपम् अब्रवीत्

sakaṣāyaṃ harivaco niśamya pramatir nṛpaḥ tathety uvāca devendraṃ niṣkṛtiṃ kāṃ tu manyase tac chrutvā pramater vākyaṃ surarāṇ nṛpam abravīt

हिन्दी अर्थ

भगवान् सोमको मैं नमस्कार करता हूं । किया। सुरश्रेष्ठ भगवान् शिवके अन्तर्धान हो जानेपर

English

Hearing Hari's slightly angry words, King Pramati said "So be it" to Indra: "What wager do you consider?" Hearing Pramati's words, the king of gods said to the king:

अध्याय १७१

श्लोक 7

उर्वश्य् एव पणो ऽस्माकं प्राप्या या निखिलैर् मखैः

urvaśy eva paṇo 'smākaṃ prāpyā yā nikhilair makhaiḥ

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर भगवान् शंकरने प्रकट होकर श्रीराम श्रीराम अपने अनुगामियोंके साथ धीरे-धीरे उस और लक्ष्मणसे कहा--' तुम्हारा कल्याण हो, वर प्रदेशमें गये, जहाँसे गोदावरी नदी प्रकट हुई हैं । माँगो।' तबसे वह तीर्थ श्रीरामतीर्थके नामसे प्रसिद्ध हुआ।

English

"Urvashi alone is our wager, who is to be won by all sacrifices."

अध्याय १७१

श्लोक 8

एतच् छ्रुत्वेन्द्रवचनं प्रमतिः प्राह गर्वितः उर्वशीं निष्कृतिं मन्ये त्वं राजन् किं नु मन्यसे

etac chrutvendravacanaṃ pramatiḥ prāha garvitaḥ urvaśīṃ niṣkṛtiṃ manye tvaṃ rājan kiṃ nu manyase

हिन्दी अर्थ

श्रीराम बोले-सुरश्रेष्ठ! महेश्वर! जो लोग जहाँ लक्ष्मणने स्नान और शंकरका पूजन किया, इस स्तोत्रके द्वारा भक्तिपूर्वक आपकी स्तुति करें, वह लक्ष्मणतीर्थके नामसे प्रसिद्ध हुआ और जहाँ उनके सम्पूर्ण कार्य सिद्ध हो जायँ। शम्भो! सीताने स्नानादि किया, वह सौतातीर्थके नामसे जिनके पितर नरकके समुद्रमें डूबे हों, उनके वे कहलाया। सीतातीर्थ नाना प्रकारकी समस्त

English

Hearing Indra's words, the proud Pramati said, "I regard Urvashi as the wager; what do you think, king?"

अध्याय १७१

श्लोक 9

यद् ब्रवीषि सुरेशान तन् मन्ये ऽहं शतक्रतो प्राहेन्द्रं प्रमतिस् तद्वन् निष्कृत्यै दक्षिणं करम् सवर्म सशरं धर्म्यं देहि दीव्यामहे वयम्

yad bravīṣi sureśāna tan manye 'haṃ śatakrato prāhendraṃ pramatis tadvan niṣkṛtyai dakṣiṇaṃ karam savarma saśaraṃ dharmyaṃ dehi dīvyāmahe vayam

हिन्दी अर्थ

पितर यहाँ पिण्ड आदि देनेसे पवित्र हो स्वर्गलोकमें पापराशिको निर्मूल करनेमें समर्थ है। जिसके चले जायेँ। जन्मभरके कमाये हुए मानसिक, चरणोंसे त्रिभुवनपावनी गङ्गा प्रकट हुईं, उन्होंने वाचिक और शारीरिक पाप यहाँ स्नान करनेमात्रसे ही जहाँ स्नान किया, उस तीर्थकी विशिष्टताके तत्काल नष्ट हो जायें। जो लोग यहाँ याचकोंको विषयमें क्या कहा जा सकता है । अत: श्रीरामतीर्थके

English

"What you say, lord of gods, Shatakratu, I accept." Pramati said to Indra likewise: "For my wager, my right hand, with armour and arrows, lawful, give; we shall play."

अध्याय १७१

श्लोक 10

ताव् एवं संविदं कृत्वा देवनायोपतस्थतुः प्रमतिर् जितवांस् तत्र उर्वशीं दैवतस्त्रियम् तां जित्वा प्रमतिः प्राह संरम्भात् तं शतक्रतुम्

tāv evaṃ saṃvidaṃ kṛtvā devanāyopatasthatuḥ pramatir jitavāṃs tatra urvaśīṃ daivatastriyam tāṃ jitvā pramatiḥ prāha saṃrambhāt taṃ śatakratum

हिन्दी अर्थ

भक्तिपूर्वक थोड़ा भी दान दें, वह सब अक्षय समान कहीं कोई भी तीर्थ नहीं है।

English

Having made this agreement, the two sat down to play; Pramati won there Urvashi, the goddess; having won her, Pramati in his fury said to Shatakratu:

अध्याय १७१

श्लोक 11

निष्कृत्यै पुनर् अन्यन् मे पश्चाद् दीव्ये त्वया विभो

niṣkṛtyai punar anyan me paścād dīvye tvayā vibho

हिन्दी अर्थ

पुत्रतीर्थकी महिमा

English

"Another wager for me, lord, afterwards in the game with you:

अध्याय १७१

श्लोक 12

देवयोग्यम् अथो वज्रं जैत्रं सरथम् उत्तमम् दीव्ये ऽहं तेन नृपते करेणाप्य् अविचारयन्

devayogyam atho vajraṃ jaitraṃ saratham uttamam dīvye 'haṃ tena nṛpate kareṇāpy avicārayan

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी कहते हैं गौतमी-तटपर जो विख्यात और अभ्युदय देखकर मैं दुबली होती जा रही पत्रतीर्थ है, वह पुण्यतीर्थ कहलाता है। उसकी हूँ। सम्भव है, जीवित न रह सकूँ। अदितिके महिमाके श्रबणमात्रसे मनुष्य सम्पूर्ण अभिलषित महान् एऐश्वर्यपर दृष्टि डालते ही मैं अवर्णनीय वस्तुओंको प्राप्त कर लेता है। नारद! मैं उसके दुरवस्थाका अनुभव करने लगती हूँ। दावानलमें

English

the thunderbolt fit for gods, the victorious, with its excellent chariot; with that I shall play, king, with my hand, without hesitation."

अध्याय १७१

श्लोक 13

स गृहीत्वा तदा पाशान् अन्यांश् च मणिभूषितान् जितम् इत्य् अब्रवीच् छक्रं प्रमतिः प्रहसंस् तदा

sa gṛhītvā tadā pāśān anyāṃś ca maṇibhūṣitān jitam ity abravīc chakraṃ pramatiḥ prahasaṃs tadā

हिन्दी अर्थ

स्वरूपका वर्णन करता हूँ, सावधान होकर सुनो। प्रवेश कर जाना भी सुखद है, किंतु स्वप्रमें भी जब दिति एवं दनुके पुत्र हैत्य और दानवोंका सौतकी समृद्धि नहीं देखी जाती।

English

Taking the dice and other jewel-adorned things, Pramati said, laughing, to Shakra, "I have won."

अध्याय १७१

श्लोक 14

एतस्मिन्न् अन्तरे प्रायाद् अक्षज्ञस् तत्र नारद विश्वावसुर् इति ख्यातो गन्धर्वाणां महेश्वरः

etasminn antare prāyād akṣajñas tatra nārada viśvāvasur iti khyāto gandharvāṇāṃ maheśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

वियोगके दुःखसे मनमें स्पर्धा लेकर अपनी बहन कश्यपजीको संतुष्ट करो। यदि स्वामी संतुष्ट हो दनुके पास आयी और इस प्रकार कहने लगी-- गये तो तुम सम्पूर्ण अभीष्ट वस्तुओंको प्राप्त कर ' भद्रे! हम दोनोंके ही पुत्र क्षीण होते जा रहे हैं। लोगी। हम संसारमें कौन ऐसा गुरुतर कार्य करें, जिससे “बहुत अच्छा' कहकर दितिने सब प्रकारसे

English

In the meantime a master of dice came there, Narada: the lord of Gandharvas, famed as Vishvavasu.

अध्याय १७१

श्लोक 15

गन्धर्वविद्यया राजंस् तया दीव्यामहे त्वया तथेत्य् उक्त्वा स नृपतिर् जितम् इत्य् अब्रवीत् तदा

gandharvavidyayā rājaṃs tayā dīvyāmahe tvayā tathety uktvā sa nṛpatir jitam ity abravīt tadā

हिन्दी अर्थ

हमारा यह संकट दूर हो। देखो, अदितिका वंश कश्यपजीको संतुष्ट किया। तब प्रजापति भगवान् कितना संगठित और उत्तम है। उसका कभी क्षय कश्यपने दितिसे कहा- सुव्रते ! तुम्हें क्या दूँ? तुम नहीं होता। वह उत्तम राज्य, सुयश और विजय- कोई अभीष्ट वर माँगो।' यह सुनकर दितिने लक्ष्मीसे सुशोभित है । अदितिकी संतानोंका वैभव स्वामीसे कहा--' नाथ! मुझे ऐसा पुत्र दीजिये, जो

English

"With Gandharva knowledge, king, I shall play with you." Saying "So be it," the king then said, "I have won."

अध्याय १७१

श्लोक 16

तौ जित्वा नृपतिर् मौर्ख्याद् देवेन्द्रं प्राह कश्मलम्

tau jitvā nṛpatir maurkhyād devendraṃ prāha kaśmalam

हिन्दी अर्थ

पुत्रतीर्थकी महिमा २१५

English

Having defeated them, the king in folly spoke abusively to Devendra:

अध्याय १७१

श्लोक 17

रणे वा देवने वापि न त्वं जेता कथंचन महेन्द्र सततं तस्माद् अस्मदाराधको भव वद केन प्रकारेण जाता देवेन्द्रता तव

raṇe vā devane vāpi na tvaṃ jetā kathaṃcana mahendra satataṃ tasmād asmadārādhako bhava vada kena prakāreṇa jātā devendratā tava

हिन्दी अर्थ

अनेक गुणोंसे सम्पन्न, विश्वविजयी और जगद्वन्द्य समक्ष प्रतिज्ञा की-- मैं इन नियमोंका ठीक- हो तथा जिसके जन्म लेनेसे मैं संसारमें वीरजननी ठीक पालन करूँगी।' फिर कश्यपजी देवताओंके कहला सकूँ ।' कश्यपजीने कहा-- देवि! मैं तुम्हें यहाँ चले गये। इधर दितिका पुण्यजनित बलवान् एक श्रेष्ठ व्रतका उपदेश करता हुँ, जो बारह गर्भ दिनोंदिन बढ़ने लगा। इन सब बातोंको मय

English

"Neither in battle nor in play can you ever defeat me, Mahendra; therefore be my attendant. Tell me by what means your lordship over the gods came about."

अध्याय १७१

श्लोक 18

तथा प्राहोर्वशीं गर्वाद् गच्छ कर्मकरी भव उर्वशी प्राह देवेषु यथा वर्ते तथा त्वयि वर्तेय सर्वभावेन न मां धिक्कर्तुम् अर्हसि

tathā prāhorvaśīṃ garvād gaccha karmakarī bhava urvaśī prāha deveṣu yathā varte tathā tvayi varteya sarvabhāvena na māṃ dhikkartum arhasi

हिन्दी अर्थ

वर्षांतक पालन करनेके बाद फल देता है। उसके नामक हैत्य अपनी मायाके बलसे जानता था। बाद आकर तुम्हारे मनके अनुकूल गर्भका आधान उसको इन्द्रसे मित्रता थी। दोनोंमें बड़ा प्रेम था।

English

Then in pride he said to Urvashi, "Go, be a servant." Urvashi said: "As I behave among the gods, so I shall behave toward you; you ought not to scorn me."

अध्याय १७१

श्लोक 19

ततस् तां प्रमतिः प्राह त्वादृश्यः सन्ति चारिकाः त्वं किं विलज्जसे भद्रे गच्छ कर्मकरी भव

tatas tāṃ pramatiḥ prāha tvādṛśyaḥ santi cārikāḥ tvaṃ kiṃ vilajjase bhadre gaccha karmakarī bhava

हिन्दी अर्थ

करूँगा, क्योंकि व्रत आदिके द्वारा निष्पाप हो जानेपर ही सम्पूर्ण मनोरथ सिद्ध होते हैं।'

English

Pramati then said to her, "There are maidservants like you; why are you ashamed, fair one? Go, be a servant."

अध्याय १७१

श्लोक 20

एतच् छ्रुत्वा नृपेणोक्तं गन्धर्वाधिपतिस् तदा चित्रसेन इति ख्यातः सुतो विश्वावसोर् बली

etac chrutvā nṛpeṇoktaṃ gandharvādhipatis tadā citrasena iti khyātaḥ suto viśvāvasor balī

हिन्दी अर्थ

उसने इन्द्रके पास एकान्तमें जाकर विनयपूर्वक कहा-'दिति और दनुने विशेष अभिप्रायसे

English

Hearing the king's words, the lord of Gandharvas, famed as Chitrasena, mighty son of Vishvavasu, said:

अध्याय १७१

श्लोक 21

दीव्ये ऽहं वै त्वया राजन् सर्वेणानेन भूपते राज्येन जीवितेनापि मदीयेन तवापि च

dīvye 'haṃ vai tvayā rājan sarveṇānena bhūpate rājyena jīvitenāpi madīyena tavāpi ca

हिन्दी अर्थ

पतिका यह वचन सुनकर दितिको बड़ी प्रसन्नता कश्यपजीको संतुष्ट किया है। दितिका गर्भ दिनोंदिन हुई। उसने कश्यपजीको नमस्कार करके उनके बढ़ता है, उसमें नाना प्रकारकी शक्तियाँ हैं ।'

English

"I shall play with you, king, for all of this, king, the kingdom, my life, and yours too."

अध्याय १७१

श्लोक 22

तथेत्य् उक्त्वा पुनर् उभौ चित्रसेननृपोत्तमौ दीव्येताम् अभिसंरब्धौ चित्रसेनो ऽजयत् तदा

tathety uktvā punar ubhau citrasenanṛpottamau dīvyetām abhisaṃrabdhau citraseno 'jayat tadā

हिन्दी अर्थ

बताये हुए ब्रतका विधिपूर्वक पालन किया। जो लोग तीर्थाकी सेवा, सुपात्रोंको दान तथा व्रतका पालन आदि नहीं करते, वे अपनी अभीष्ट वस्तुओंको कैसे प्राप्त कर सकते हैं। दितिका व्रत पूरा होनेपर

English

Saying "So be it," the two best of kings, Chitrasena and Pramati, played again, enraged; Chitrasena won then.

अध्याय १७१

श्लोक 23

गान्धर्वैस् तं महापाशैर् बबन्ध नृपतिं तदा चित्रसेनो ऽजयत् सर्वम् उर्वशीमुख्यतः पणैः

gāndharvais taṃ mahāpāśair babandha nṛpatiṃ tadā citraseno 'jayat sarvam urvaśīmukhyataḥ paṇaiḥ

हिन्दी अर्थ

कश्यपजीने गर्भाधान किया और एकान्तमें अपनी प्रिय पल्ली दितिसे कहा-- शुचिस्मिते! तपस्वी मुनि भी विहित कर्मको अवहेलना करनेसे मनोवाञ्छित पदार्थ नहीं पा सकते। अत: तुम्हें

English

Then with great Gandharva nooses he bound the king; Chitrasena won everything, with Urvashi foremost among the stakes,

अध्याय १७१

श्लोक 24

राज्यं कोशं बलं चैव यद् अन्यद् वसु किंचन चित्रसेनस्य तज् जातं यद् आसीत् प्रमतेर् धनम्

rājyaṃ kośaṃ balaṃ caiva yad anyad vasu kiṃcana citrasenasya taj jātaṃ yad āsīt pramater dhanam

हिन्दी अर्थ

कोई निन्दित कर्म नहीं करना चाहिए। दोनों संध्याओंके समय सोना, कहीं जाना अथवा बाल खोले रहना निषिद्ध है। संध्याकाल भूतोंसे व्याप्त रहता है। अतः उस समय छींकना, जँभाई लेना

English

the kingdom, treasury, army, and whatever other wealth there was; Pramati's wealth became Chitrasena's.

अध्याय १७१

श्लोक 25

तस्य पुत्रो बाल एव पुरोधसम् उवाच ह वैश्वामित्रं महाप्राज्ञं मधुच्छन्दसम् ओजसा

tasya putro bāla eva purodhasam uvāca ha vaiśvāmitraṃ mahāprājñaṃ madhucchandasam ojasā

हिन्दी अर्थ

तथा भोजन करना भी मना है। ये सब कार्य सदा ओटमें ही करने चाहिए। विशेषत: हँसना तो दूसरोंके सामने हो ही नहीं। संध्याकालमें कभी कमरेके भीतर न रहे। प्रिये! मूसल, ऊखल, सूप,

English

His young son said vigorously to the priest, the greatly wise Madhuchchhandas, son of Vishvamitra:

अध्याय १७१

श्लोक 26

किं मे पित्रा कृतं पापं क्व वा बद्धो महामतिः कथम् एष्यति स्वं स्थानं कथं पाशैर् विमोक्ष्यते

kiṃ me pitrā kṛtaṃ pāpaṃ kva vā baddho mahāmatiḥ katham eṣyati svaṃ sthānaṃ kathaṃ pāśair vimokṣyate

हिन्दी अर्थ

पीढ़ा और ढक्कन आदिको दिन या रातमें कभी न लॉघना। उत्तरकी ओर सिरहाना करके तथा संध्याकालमें कभी न सोना। झूठ न बोलना। दूसरोंके घर न जाना। पतिके सिवा और किसी

English

"What sin was done by my father, and where is the greatly intelligent one bound? How will he return to his place and be freed from the nooses?"

अध्याय १७१

श्लोक 27

सुमतेर् वचनं श्रुत्वा ध्यात्वा स मुनिसत्तमः मधुच्छन्दा जगादेदं प्रमतेर् वर्तनं तदा

sumater vacanaṃ śrutvā dhyātvā sa munisattamaḥ madhucchandā jagādedaṃ pramater vartanaṃ tadā

हिन्दी अर्थ

इन नियमोंका पालन करती रहोगी तो तुम्हारा पुत्र

English

Hearing Sumati's words, the best of sages meditated, and Madhuchchhandas then told of Pramati's conduct:

अध्याय १७१

श्लोक 28

देवलोके तव पिता बद्ध आस्ते महामते कैतवैर् बहुदोषैश् च भ्रष्टराज्यो बभूव ह

devaloke tava pitā baddha āste mahāmate kaitavair bahudoṣaiś ca bhraṣṭarājyo babhūva ha

हिन्दी अर्थ

नारदजीने पूछा-- देवेश्वर! महाबली मय नामक हैत्य तो नमुचिका प्रिय भ्राता है और नमुचि इन्द्रके हाथसे मारा गया था। फिर उसको अपने भाईके शत्रुसे मित्रता कैसे हुई ?

English

"Your father is bound in the world of the gods, great-minded one; through the many faults of gamblers he lost his kingdom.

अध्याय १७१

श्लोक 29

यो याति कैतवसभां स चापि क्लेशभाग् भवेत् द्यूतमद्यामिषादीनि व्यसनानि नृपात्मज

yo yāti kaitavasabhāṃ sa cāpi kleśabhāg bhavet dyūtamadyāmiṣādīni vyasanāni nṛpātmaja

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी बोले-पूर्वकालमें नमुचि हैत्योंका राजा था, उसका इन्द्रके साथ बड़ा भयंकर वैर हुआ। एक समयको बात है- इन्द्र युद्ध छोड़कर कहीं जा रहे थे। यह देखकर हैत्यराज नमुचि भी

English

Whoever goes to a gambling hall is a sharer in trouble. Gambling, drink, meat and the like are vices, prince,

अध्याय १७१

श्लोक 30

पापिनाम् एव जायन्ते सदा पापात्मकानि हि एकैकम् अप्य् अनर्थाय पापाय नरकाय च

pāpinām eva jāyante sadā pāpātmakāni hi ekaikam apy anarthāya pāpāya narakāya ca

हिन्दी अर्थ

उनके पीछे लग गया। उसे आगे देख इन्द्र भयसे व्याकुल हो गये और ऐरावत हाथीको छोड़कर समुद्रके फेनमें घुस गये। फिर वज्रमें फेन लपेटकर उस फेनसे ही इन्द्रने अपने शत्रुका संहार कर

English

which always arise among sinners as sinful in nature; each one alone leads to misfortune, sin and hell.

अध्याय १७१

श्लोक 31

यानासनाभिलापाद्यैः कृतैः कैतववर्तिभिः कुलीनाः कलुषीभूताः किं पुनः कितवो जनः

yānāsanābhilāpādyaiḥ kṛtaiḥ kaitavavartibhiḥ kulīnāḥ kaluṣībhūtāḥ kiṃ punaḥ kitavo janaḥ

हिन्दी अर्थ

डाला। जब नमुचिको मृत्यु हो गयी तब उसके छोटे भाई मयने अपने बड़े भाईके घातकका विनाश करनेके लिये बडी भारी तपस्या को। उसने अनेक प्रकारको माया प्राप्त की, जो देवताओंके

English

Even the well-born become defiled by riding, sitting and talking with those who practise gambling; what then of the gambler himself?

अध्याय १७१

श्लोक 32

कितवस्य तु या जाया तप्यते नित्यम् एव सा स चापि कितवः पापो योषितं वीक्ष्य तप्यते

kitavasya tu yā jāyā tapyate nityam eva sā sa cāpi kitavaḥ pāpo yoṣitaṃ vīkṣya tapyate

हिन्दी अर्थ

लिये अत्यन्त भयंकर थी। उसने सम्पूर्ण लोकोंको शरण देनेवाले भगवान् विष्णुसे भी वर प्राप्त किया। मय दानी और प्रियभाषी था। उसने इन्द्रको जीतनेके लिये अग्नि और ब्राह्मणोंका पूजन आरम्भ किया

English

The wife of a gambler is always tormented, and the sinful gambler himself is tormented on seeing a woman.

अध्याय १७१

श्लोक 33

तां दृष्ट्वा विगतानन्दो नित्यं वदति पापकृत् अहो संसारचक्रे ऽस्मिन् मया तुल्यो न पातकी

tāṃ dṛṣṭvā vigatānando nityaṃ vadati pāpakṛt aho saṃsāracakre 'smin mayā tulyo na pātakī

हिन्दी अर्थ

वह याचकोंको मुँहमाँगी वस्तुएँ देने लगा। वन्दीजन सदा उसको स्तुति करते थे। इन्द्रने वायुसे अपने

English

Seeing her, joyless, the sinner always says, 'Ah, in this wheel of worldly existence there is no sinner like me.'

अध्याय १७१

श्लोक 34

न किंचिद् अपि यस्यास्ते लोके विषयजं सुखम् लोकद्वये ऽपि न सुखी कितवः कोपि दृश्यते

na kiṃcid api yasyāste loke viṣayajaṃ sukham lokadvaye 'pi na sukhī kitavaḥ kopi dṛśyate

हिन्दी अर्थ

त्रिभुबनके ऐश्वर्यका भागी होगा।' दितिने स्वामीके मायावी शत्रु मयको गति-त्रिधि जान ली। तब वे

English

He has no pleasure born of objects in the world; no gambler is seen happy in either world.

अध्याय १७१

श्लोक 35

विभाति च तथा नित्यं लज्जया दग्धमानसः गतधर्मो निरानन्दो ग्रस्तगर्वस् तथाटति

vibhāti ca tathā nityaṃ lajjayā dagdhamānasaḥ gatadharmo nirānando grastagarvas tathāṭati

हिन्दी अर्थ

२१६ » संक्षिप्त ब्रहापुराण »

English

He always looks as if his mind were burnt by shame; without dharma, joyless, swallowed by pride, he wanders.

अध्याय १७१

श्लोक 36

अकैतवी च या वृत्तिः सा प्रशस्ता द्विजन्मनाम् कृषिगोरक्ष्यवाणिज्यम् अपि कुर्यान् न कैतवम्

akaitavī ca yā vṛttiḥ sā praśastā dvijanmanām kṛṣigorakṣyavāṇijyam api kuryān na kaitavam

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणका वेष बनाकर उसके पास गये और जानती थीं। उनके गर्भमें जो मुनिका अमोघ तेज बोले--' हैत्यराज! मैं याचक हुँ, मुझे मनोवाञ्छित था, वह किसीके लिये भी दुर्धर्ष था । इन्द्र गर्भके वर दीजिये। मैंने सुना है--आप दाताओंके सिरमौर भीतर प्रवेश करनेकी इच्छासे अवसरको प्रतीक्षा हैं। अतः आपके पास आया हूँ।' मयने उन्हें करते हुए बहुत समयतक वहाँ रहे। एक दिन

English

A livelihood without gambling is praised for the twice-born: agriculture, cattle-keeping, trade; but he should not gamble.

अध्याय १७१

श्लोक 37

यस् तु कैतववृत्त्या हि धनम् आहर्तुम् इच्छति धर्मार्थकामाभिजनैः स विमुच्येत पौरुषात्

yas tu kaitavavṛttyā hi dhanam āhartum icchati dharmārthakāmābhijanaiḥ sa vimucyeta pauruṣāt

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मण जानकर कहा-- दिया हुआ ही समझो । दिति संध्याकालमें उत्तरको ओर सिरहाना करके सामने याचकको पाकर दाता यह विचार नहीं सो रही । इन्द्रने मनमें कहा--' यही अच्छा अवसर करते कि थोड़ा दूँ या अधिक ।' उसके यों कहनेपर है।' यों कहकर वे वज्र हाथमें ले दितिके उदरमें इन्द्र बोले-- मैं तुम्हारे साथ मित्रता चाहता हूँ।' प्रवेश कर गये। गर्भमै जो बालक था, वह आयुध

English

One who wishes to take wealth by gambling is deprived of dharma, wealth, desire and good birth, of manliness itself.

अध्याय १७१

श्लोक 38

वेदे ऽपि दूषितं कर्म तव पित्रा तदादृतम् तस्मात् किं कुर्महे वत्स यद् उक्तं ते विधीयते

vede 'pi dūṣitaṃ karma tava pitrā tadādṛtam tasmāt kiṃ kurmahe vatsa yad uktaṃ te vidhīyate

हिन्दी अर्थ

यह सुनकर मय हैत्यने कहा--'विप्रवर! ऐसे लिये मारनेकी इच्छासे आये हुए इन्द्रको देखकर वरसे क्या लाभ। आपके साथ मेरा वैर तो है भी भयभीत न हुआ और बोला--' वज्रधारी इन्द्र! नहीं ।' तब इन्द्रने अपने वास्तविक रूपको प्रकट मैं तुम्हारा भाई हूँ। तुम मेरी रक्षा क्‍यों नहीं किया । इन्द्रको पहचानकर मयके मनमें बड़ा विस्मय करते ? क्या मुझे मारना चाहते हो? युद्धके बिना

English

Even in the Veda the act is condemned, which your father then took up. So what can we do, child? What has been told to you is to be done.

अध्याय १७१

श्लोक 39

विधातृविहितं मार्गं को नु वात्येति पण्डितः

vidhātṛvihitaṃ mārgaṃ ko nu vātyeti paṇḍitaḥ

हिन्दी अर्थ

हुआ। 'सखे! यह क्या बात है? तुम तो वज्रधारी अन्य अवसरपर किसीको मारनेसे बढ़कर दूसरा हो। तुम्हारे योग्य यह कार्य नहीं है।' इन्द्रने कोई पातक नहीं है । मैं गर्भसे निकल, तब मुझसे हँसकर मयको हृदयसे लगाया और कहा-- विद्वान् युद्ध कर लेना। यहाँ आकर इस प्रकार मारना पुरुष किसी भी उपायसे अपने अभीष्ट कार्यको तुम्हारे लिये उचित नहीं होगा। बड़े लोग

English

What wise man transgresses the path ordained by the Creator?"

अध्याय १७१

श्लोक 40

एतत् पुरोधसो वाक्यं श्रुत्वा सुमतिर् अब्रवीत्

etat purodhaso vākyaṃ śrutvā sumatir abravīt

हिन्दी अर्थ

सिद्धि करते हैं।' तबसे मयके साथ इन्द्रकी गहरी विपत्तिमें पड़नेपर भी कुमार्गपर पैर नहीं रखते। मैत्री हो गयी। मय सदाके लिये इन्द्रका हितैषी मैंने न तो अभी विद्या पढ़ी है, न शस्त्र चलाना हो गया। उसने इन्द्रभवनमें जाकर सब बातें बतायीं, सीखा है और न आयुधोंका ही संग्रह किया है। साथ ही इन्द्रको माया भी प्रदान को। इन्द्रने तुम विद्वान् हो। तुम्हारे हाथमें वज्र शोभा पा रहा

English

Hearing the priest's words, Sumati said:

अध्याय १७१

श्लोक 41

किं कृत्वा प्रमतिस् तातः पुना राज्यम् अवाप्नुयात्

kiṃ kṛtvā pramatis tātaḥ punā rājyam avāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

प्रसन्न होकर पूछा-'मय! बताओ, अब मुझे है। क्या मुझे मारते समय तुम्हें लज्जा नहीं क्या करना चाहिए ?' आती ? कुलीन पुरुष कभी भी कुत्सित कर्म नहीं

English

"Doing what will my father Pramati regain the kingdom?"

अध्याय १७१

श्लोक 42

पुनर् ध्यात्वा मधुच्छन्दाः सुमतिं चेदम् अब्रवीत्

punar dhyātvā madhucchandāḥ sumatiṃ cedam abravīt

हिन्दी अर्थ

मयने कहा-अगस्त्यके आश्रमपर जाओ। करते। मुझे मारनेसे तुम्हें क्या मिलेगा, यश वहीं गर्भवती दिति रहती है। उसको सेवा करते अथवा पुण्य? गर्भमें आये हुए प्राणी इच्छानुसार हुए आश्रममें कुछ दिन निवास करो; फिर मारे जा सकते हैं, किंतु इसमें कौन-सा पुरुषार्थ अवसर देखकर वज्र हाथमें लिये दितिके गर्भमें है। भाई! यदि तुम्हें युद्धसे प्रेम है और मुझसे ही

English

Again meditating, Madhuchchhandas said to Sumati:

अध्याय १७१

श्लोक 43

गौतमीं याहि वत्स त्वं तत्र पूजय शंकरम् अदितिं वरुणं विष्णुं ततः पाशाद् विमोक्ष्यते

gautamīṃ yāhi vatsa tvaṃ tatra pūjaya śaṃkaram aditiṃ varuṇaṃ viṣṇuṃ tataḥ pāśād vimokṣyate

हिन्दी अर्थ

प्रवेश कर जाओ और वञ्रसे उस बढ़ते हुए गर्भके भिड्ना चाहते हो तो निःसंदेह चले आओ।' यों टुकड़रे-टुकड़े कर डालो। इससे तुम्हारे उसकहकर वह बालक भी इन्द्रको ओर मुक्का शत्रुका अस्तित्व ही मिट जायगा। तानकर खड़ा हो गया और बोला-- इन्द्र! मुझे

English

"Go to the Gautami, child; there worship Shankara, Aditi, Varuna and Vishnu; then he will be freed from the noose."

अध्याय १७१

श्लोक 44

तथेत्य् उक्त्वा जगामाशु गङ्गां नत्वा जनार्दनम् पूजयाम् आस शंभुं च तपस् तेपे यतव्रतः

tathety uktvā jagāmāśu gaṅgāṃ natvā janārdanam pūjayām āsa śaṃbhuṃ ca tapas tepe yatavrataḥ

हिन्दी अर्थ

इन्द्रने “बहुत अच्छा” कहकर मयको प्रशंसा मारनेसे तुम बालघाती, ब्रह्मघाती तथा विश्वासघाती को और विनीतकी भाँति माता दितिके पास कहलाओगे। यही तुम्हें फल मिलेगा। फिर गये। वहाँ जाकर हैत्यमाताकी सेवा-शुश्रूषामें लग किसलिये मुझे मारनेको उद्यत हुए हो। सम्पूर्ण गये। उनके मनमें क्या है, इस बातको दिति नहीं चराचर जगत् जिसकी आज्ञाके अधीन चल रहा

English

Saying "So be it," he quickly went, bowed to the Ganga and Janardana, worshipped Shambhu too and practised austerity with firm vows.

अध्याय १७१

श्लोक 45

सहस्रम् एकं वर्षाणां बद्धं पितरम् आत्मनः मोचयाम् आस देवेभ्यः पुना राज्यम् अवाप सः

sahasram ekaṃ varṣāṇāṃ baddhaṃ pitaram ātmanaḥ mocayām āsa devebhyaḥ punā rājyam avāpa saḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्रतीर्थकी महिमा »

English

For a thousand years, he freed his bound father from the gods, and he regained the kingdom.

अध्याय १७१

श्लोक 46

शिवेशाभ्यां मुक्तपाशो राज्यं प्राप सुतात् स्वकात् अवाप्य विद्यां गान्धर्वीं प्रियश् चासीच् छतक्रतोः

śiveśābhyāṃ muktapāśo rājyaṃ prāpa sutāt svakāt avāpya vidyāṃ gāndharvīṃ priyaś cāsīc chatakratoḥ

हिन्दी अर्थ

हो, वह मुझ-जैसे बालकको हत्या करे-- इसमें दितिको जगाया। वे गर्भकी वेदनासे पीडित थीं।

English

Freed from the noose by Shiva and Vishnu, he got the kingdom back from his own son; he obtained Gandharva knowledge and was dear to Shatakratu.

अध्याय १७१

श्लोक 47

शांभवं वैष्णवं चैव उर्वशीतीर्थम् एव च ततःप्रभृति तत् तीर्थं कैतवं चेति विश्रुतम्

śāṃbhavaṃ vaiṣṇavaṃ caiva urvaśītīrtham eva ca tataḥprabhṛti tat tīrthaṃ kaitavaṃ ceti viśrutam

हिन्दी अर्थ

कौन-सा यश और क्या पुरुषार्थ है ?'

English

Shambhava, Vaishnava and also Urvashi-tirtha: from then on that holy place is famed as Kaitava.

अध्याय १७१

श्लोक 48

शिवविष्णुसरिन्मातुप्रसादाद् आप्यते न किम् तत्र स्नानं च दानं च बहुपुण्यफलप्रदम् पापपाशविमोक्षं तु सर्वदुर्गतिनाशनम्

śivaviṣṇusarinmātuprasādād āpyate na kim tatra snānaṃ ca dānaṃ ca bahupuṇyaphalapradam pāpapāśavimokṣaṃ tu sarvadurgatināśanam

हिन्दी अर्थ

उस समय अगस्त्यने अत्यन्त कुपित होकर

English

What is not obtained by the grace of Shiva, Vishnu and the mother river? Bathing and giving there give much merit, release from the noose of sin and destroy all misfortune.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 171
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.