Brahma Purana· Brahma Purāṇa
207
अध्याय 207 / 246

Adhyaya 207

43 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ43 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय २०७

श्लोक 1

चक्रे कर्म महच् छौरिर् बिभ्रद् यो मानुषीं तनुम् जिगाय शक्रं शर्वं च सर्वदेवांश् च लीलया

cakre karma mahac chaurir bibhrad yo mānuṣīṃ tanum jigāya śakraṃ śarvaṃ ca sarvadevāṃś ca līlayā

हिन्दी अर्थ

पशु-पक्षी, सर्प, मृग तथा वृक्ष-सब आपसे ही उत्पन्न हुए हैं। इस चराचर जगत्में जो कुछ भी

English

Another mountain which escaped when Indra planned to cut off wings which all mountains are supposed to have previously.

अध्याय २०७

श्लोक 2

यच् चान्यद् अकरोत् कर्म दिव्यचेष्टाविघातकृत् कथ्यतां तन् मुनिश्रेष्ठ परं कौतूहलं हि नः

yac cānyad akarot karma divyaceṣṭāvighātakṛt kathyatāṃ tan muniśreṣṭha paraṃ kautūhalaṃ hi naḥ

हिन्दी अर्थ

आदि तीनों तापोंसे पीडित हो सदा भटकते हुए मुझे कभी शान्ति नहीं मिली। नाथ! मैंने मृगतृष्णासे जलको आशा करके दु:खोंको ही सुख समझकर ग्रहण किया, अत: वे सदा मेरे लिये संतापके ही

English

The sages, the guardians of the quarters and the Adityas 13 accompanied by Maruts 14 constructed the altar for the wedding ceremony of the trident-bearing lord, the chief of Devas.

अध्याय २०७

श्लोक 3

गदतो मे मुनिश्रेष्ठाः श्रूयताम् इदम् आदरात् नरावतारे कृष्णेन दग्धा वाराणसी यथा

gadato me muniśreṣṭhāḥ śrūyatām idam ādarāt narāvatāre kṛṣṇena dagdhā vārāṇasī yathā

हिन्दी अर्थ

कारण हुए। प्रभो! राज्य, पृथ्वी, सेना, कोष,

English

An ancient sage and priest of Iksvaku kings.

अध्याय २०७

श्लोक 4

पौण्ड्रको वासुदेवश् च वासुदेवो ऽभवद् भुवि अवतीर्णस् त्वम् इत्य् उक्तो जनैर् अज्ञानमोहितैः

pauṇḍrako vāsudevaś ca vāsudevo 'bhavad bhuvi avatīrṇas tvam ity ukto janair ajñānamohitaiḥ

हिन्दी अर्थ

यह सब कुछ मैंने सुख-बुद्धिसे ग्रहण किया; परंतु देवेश्वर! परिणाममें ये सब मेरे लिये संतापप्रद ही सिद्ध हुए हैं। नाथ! देवलोकको उत्तम गतिको प्राप्त देवताओंको भी जब मुझसे सहायता लेनेको

English

Another sage said to have been born out of a waterjar and to have drunk up the ocean.

अध्याय २०७

श्लोक 5

स मेने वासुदेवो ऽहम् अवतीर्णो महीतले नष्टस्मृतिस् ततः सर्वं विष्णुचिह्नम् अचीकरत् दूतं च प्रेषयाम् आस स कृष्णाय द्विजोत्तमाः

sa mene vāsudevo 'ham avatīrṇo mahītale naṣṭasmṛtis tataḥ sarvaṃ viṣṇucihnam acīkarat dūtaṃ ca preṣayām āsa sa kṛṣṇāya dvijottamāḥ

हिन्दी अर्थ

इच्छा हुई, तब वहाँ भी नित्य शान्ति कहाँ है। आप सम्पूर्ण जगत्के उद्दम-स्थान हैं। परमेश्वर! आपको आराधना किये बिना सनातन शान्ति कौन पा सकता है जिनका चित्त आपकी मायासे

English

A sage and great story-teller.

अध्याय २०७

श्लोक 6

त्यक्त्वा चक्रादिकं चिह्नं मदीयं नाम मात्मनः वासुदेवात्मकं मूढ मुक्त्वा सर्वम् अशेषतः

tyaktvā cakrādikaṃ cihnaṃ madīyaṃ nāma mātmanaḥ vāsudevātmakaṃ mūḍha muktvā sarvam aśeṣataḥ

हिन्दी अर्थ

मोहित है, वे जन्म-मृत्यु और जरा आदि कष्टोंको भोगकर अन्तमें यमराजका दर्शन करते हैं । तदनन्तर सैकड़ों पाशोंमें आबद्ध हो नरकोंमें अत्यन्त दारुण दुःख भोगते हैं। यह विश्च आपका स्वरूप है।

English

A great architect and artificer of gods.

अध्याय २०७

श्लोक 7

आत्मनो जीवितार्थं च तथा मे प्रणतिं व्रज

ātmano jīvitārthaṃ ca tathā me praṇatiṃ vraja

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर! मैं अत्यन्त विषयी हूँ और आपकी मायासे मोहित होकर ममताके अगाध गर्त्तमें भटक रहा हूँ। वही मैं आज अपार एवं स्तवन करने योग्य आप परमेश्वरकी शरणमें आया हूँ, जिससे

English

Daughters of Dak$a Prajapati.

अध्याय २०७

श्लोक 8

इत्य् उक्तः स प्रहस्यैव दूतं प्राह जनार्दनः

ity uktaḥ sa prahasyaiva dūtaṃ prāha janārdanaḥ

हिन्दी अर्थ

भिन्न दूसरा कोई परम पद नहीं है। मेरा चित्त सांसारिक भ्रमसे संतप्त है; अतः में निर्वाणस्वरूप आप परमधाम परमात्माको अभिलाषा करता हूँ।

English

Two $ubhas are known, one being Dhruva's mother and the other wife of Angiras.

अध्याय २०७

श्लोक 9

निजचिह्नम् अहं चक्रं समुत्स्रक्ष्ये त्वयीति वै वाच्यश् च पौण्ड्रको गत्वा त्वया दूत वचो मम

nijacihnam ahaṃ cakraṃ samutsrakṣye tvayīti vai vācyaś ca pauṇḍrako gatvā tvayā dūta vaco mama

हिन्दी अर्थ

व्यासजी कहते हैं-परम बुद्धिमान् राजा मुचुकुन्दके इस प्रकार स्तुति करनेपर आदि- अन्तरहित, सर्वभूतेश्वर श्रीहरिने कहा--' नरेश्वर! तुम अपनी इच्छाके अनुसार दिव्य लोकोंमें जाओ

English

Probably Santi or Rjama both also daughters of Dak?a Prajapati.

अध्याय २०७

श्लोक 10

ज्ञातस् त्वद्वाक्यसद्भावो यत् कार्यं तद् विधीयताम् गृहीतचिह्न एवाहम् आगमिष्यामि ते पुरम्

jñātas tvadvākyasadbhāvo yat kāryaṃ tad vidhīyatām gṛhītacihna evāham āgamiṣyāmi te puram

हिन्दी अर्थ

और मेरे प्रसादसे उत्तम ऐश्वर्यसे सम्पन्न होकर वहाँके दिव्य भोग भोगो। तत्पश्चात् इस पृथ्वीपर

English

A group of Vedic gods originally numbering six which later in¬ creased to twelve.

अध्याय २०७

श्लोक 11

उत्स्रक्ष्यामि च ते चक्रं निजचिह्नम् असंशयम् आज्ञापूर्वं च यद् इदम् आगच्छेति त्वयोदितम्

utsrakṣyāmi ca te cakraṃ nijacihnam asaṃśayam ājñāpūrvaṃ ca yad idam āgaccheti tvayoditam

हिन्दी अर्थ

३२२ » संक्षिप्त ब्रहापुराण »

English

Another group of Vedic gods associated with storms, lightning, thunder etc.

अध्याय २०७

श्लोक 12

संपादयिष्ये श्वस् तुभ्यं तद् अप्य् एषो ऽविलम्बितम् शरणं ते समभ्येत्य कर्तास्मि नृपते तथा यथा त्वत्तो भयं भूयो नैव किंचिद् भविष्यति

saṃpādayiṣye śvas tubhyaṃ tad apy eṣo 'vilambitam śaraṇaṃ te samabhyetya kartāsmi nṛpate tathā yathā tvatto bhayaṃ bhūyo naiva kiṃcid bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

श्रेष्ठ कुलमें तुम्हारा जन्म होगा। उस समय तुम्हें भगवान् नर-नारायणके आश्रममें चले गये । श्रीकृष्णने अपने पूर्वजन्मकी स्मृति बनी रहेगी और मेरी भी युक्तिसे शत्रुका वध कराकर मथुरामें आ कृपासे तुम मोक्ष प्राप्त कर लोगे।' यह सुनकर हाथी, घोडे और रथसे सुशोभित उनकी सारी राजाने जगदीश्वर भगवान् श्रीकृष्णको प्रणाम किया सेना अपने अधिकारमें कर ली तथा द्वारकामें ले

English

A Rgvedic deity said to be the ideal artist, divine artisan; men¬ tioned in VigQupuraga as a son of Visvakarma.

अध्याय २०७

श्लोक 13

इत्य् उक्ते ऽपगते दूते संस्मृत्याभ्यागतं हरिः गरुत्मन्तं समारुह्य त्वरितं तत्पुरं ययौ

ity ukte 'pagate dūte saṃsmṛtyābhyāgataṃ hariḥ garutmantaṃ samāruhya tvaritaṃ tatpuraṃ yayau

हिन्दी अर्थ

और गुफासे निकलकर देखा तो सब मनुष्य जाकर राजा उग्रसेनको समर्पित कर दी। अब छोटे-छोटे दिखायी दिये। तब कलियुग आया सम्पूर्ण यादव शत्रुओंके आक्रमणको आशङ्कासे जान वे तपस्या करनेके लिये गन्धमादन पर्वतपर निर्भय हो गये।

English

When this was said, the messenger gone, Hari, remembering, mounted Garuda and quickly went to that city.

अध्याय २०७

श्लोक 14

तस्यापि केशवोद्योगं श्रुत्वा काशिपतिस् तदा सर्वसैन्यपरीवारपार्ष्णिग्राहम् उपाययौ

tasyāpi keśavodyogaṃ śrutvā kāśipatis tadā sarvasainyaparīvārapārṣṇigrāham upāyayau

हिन्दी अर्थ

बलरामजीको व्रजयात्रा, श्रीकृष्णद्वारा रुक्मिणीका हरण तथा प्रद्युन्नके द्वारा शम्बरासुरका वध

English

Hearing of Keshava's undertaking, the lord of Kashi then came with the whole army as rear-guard.

अध्याय २०७

श्लोक 15

ततो बलेन महता काशिराजबलेन च पौण्ड्रको वासुदेवो ऽसौ केशवाभिमुखं ययौ

tato balena mahatā kāśirājabalena ca pauṇḍrako vāsudevo 'sau keśavābhimukhaṃ yayau

हिन्दी अर्थ

व्यासजी कहते हैं- तदनन्तर बलदेवजी अपने पिता, माता, भ्राता, पति और बन्धु-बान्धव- बन्धु-बान्धवोंके दर्शनके लिये उत्कण्ठित हो किसको नहीं छोड़ दिया। फिर भी वे कृतज्ञ न नन्दगाँवमें आये। उस समय सम्पूर्ण गोप और हो सके तथापि बलरामजी! क्या श्रीकृष्ण कभी गोपियाँ उनसे पूर्ववत् मिलीं । बलरामजीने सबको यहाँ आनेके विषयमे भी आपसे बात करते हैं?

English

Then Paundraka Vasudeva went toward Keshava with a great force and the Kashi king's force.

अध्याय २०७

श्लोक 16

तं ददर्श हरिर् दूराद् उदारस्यन्दने स्थितम् चक्रशङ्खगदापाणिं पाणिना विधृताम्बुजम्

taṃ dadarśa harir dūrād udārasyandane sthitam cakraśaṅkhagadāpāṇiṃ pāṇinā vidhṛtāmbujam

हिन्दी अर्थ

आदर देते हुए सबके साथ प्रेमपूर्वक वार्तालाप दामोदर श्रीकुष्णका मन तो नगरको स्त्रियोमें किया। किन्हींने उनको हृदयसे लगाया। कुछ आसक्त हो गया है। हमपर अब उनका प्रेम नहीं लोगोंका उन्होंने गाढ आलिङ्गन किया तथा कुछ रहा। अतः अब हमारे लिये उनका दर्शन दुर्लभ गोप-गोपियोंके साथ बैठकर उन्होंने हास्य-विनोद ही जान पड़ता है।'

English

Hari saw him from afar standing in an excellent chariot, with discus, conch and mace in hand, holding a lotus in his hand,

अध्याय २०७

श्लोक 17

स्रग्धरं धृतशार्ङ्गं च सुपर्णरचनाध्वजम् वक्षस्थलकृतं चास्य श्रीवत्सं ददृशे हरिः

sragdharaṃ dhṛtaśārṅgaṃ ca suparṇaracanādhvajam vakṣasthalakṛtaṃ cāsya śrīvatsaṃ dadṛśe hariḥ

हिन्दी अर्थ

किया। वहाँ गोपोंने बलरामजीसे अनेकों प्रिय भगवान् श्रीकृष्णने गोपियोंका चित्त आकृष्ट लगनेवाली बातें कहीं । कुछ गोपियाँ उन्हें देखकर कर लिया था। वे बलभद्रजीको भी “हे कृष्ण! प्रेमानन्दमें निमग्न हो गयीं तथा कुछ दूसरी गोपियोंने है दामोदर!' कहकर पुकारने और जोर-जोरसे ईर्ष्यापूर्वक पूछा-- चञ्चल प्रेमरसके आस्वादनमें हसने लगीं। तब बलरामजीने श्रीकृष्णके सौम्य,

English

wearing a garland, holding a Sharnga bow, with a banner bearing a Suparna design; Hari saw the Shrivatsa made on his chest,

अध्याय २०७

श्लोक 18

किरीटकुण्डलधरं पीतवासःसमन्वितम् दृष्ट्वा तं भावगम्भीरं जहास मधुसूदनः

kirīṭakuṇḍaladharaṃ pītavāsaḥsamanvitam dṛṣṭvā taṃ bhāvagambhīraṃ jahāsa madhusūdanaḥ

हिन्दी अर्थ

व्यग्र रहनेवाले नागरी स्त्रियोंके प्रियतम श्रीकृष्ण मधुर, प्रेमगर्भित, अभिमानशून्य और अत्यन्त मनोहर तो सुखसे हैं न? क्षणिक अनुराग दिखानेवाले संदेश सुनाकर गोपियोंको सान्त्वना दी। फिर श्यामसुन्दर क्या कभी हमारी चेष्टाओंका उपहास गोपोंके साथ प्रेमपूर्वक हास-परिहासयुक्त मनोहर करते हुए नगरकी महिलाओंके सौभाग्यका मान बातें कीं और पहलेकी ही भाँति वे उनके साथ

English

wearing crown and earrings, in yellow garments. Seeing him, deep in feeling, Madhusudana laughed.

अध्याय २०७

श्लोक 19

युयुधे च बलेनास्य हस्त्यश्वबलिना द्विजाः निस्त्रिंशर्ष्टिगदाशूलशक्तिकार्मुकशालिना

yuyudhe ca balenāsya hastyaśvabalinā dvijāḥ nistriṃśarṣṭigadāśūlaśaktikārmukaśālinā

हिन्दी अर्थ

नहीं बढ़ाते? क्या श्रीकृष्ण कभी हमारे गीतोंका व्रजभूमिमें विचरण करने लगे। दो महीने वहाँ अनुसरण करनेवाले मधुर स्वरका स्मरण करते रहकर वे पुन: द्वारकाको चले गये। उनका विवाह हैं ? क्या वे एक बार भी अपनी माताको देखनेके राजा रेवतकी कन्या रेवतीसे हुआ। उसके गर्भसे लिये यहाँ आयेंगे? अथवा उनकी बात करनेसे बलरामजीने निशठ और उल्मुक नामक दो पुत्र

English

He fought with his army of elephants and horses, Brahmins, with swords, rishti lances, maces, spears, shaktis and bows.

अध्याय २०७

श्लोक 20

क्षणेन शार्ङ्गनिर्मुक्तैः शरैर् अग्निविदारणैः गदाचक्रातिपातैश् च सूदयाम् आस तद्बलम्

kṣaṇena śārṅganirmuktaiḥ śarair agnividāraṇaiḥ gadācakrātipātaiś ca sūdayām āsa tadbalam

हिन्दी अर्थ

हमें क्या लाभ। कोई दूसरी बात करो। यदि उत्पन्न किये। हमारे बिना उनका काम चल सकता है तो उनके विदर्भ देशमें कुण्डिनपुर नामक एक नगर है, बिना हमारा भी चल जायगा। हमने उनके लिये वहाँ राजा भीष्मक राज्य करते थे। उनके पुत्रका

English

In a moment, by arrows loosed from the Sharnga bow, fire-splitting, and by falls of mace and discus, he destroyed his force.

अध्याय २०७

श्लोक 21

काशिराजबलं चैव क्षयं नीत्वा जनार्दनः उवाच पौण्ड्रकं मूढम् आत्मचिह्नोपलक्षणम्

kāśirājabalaṃ caiva kṣayaṃ nītvā janārdanaḥ uvāca pauṇḍrakaṃ mūḍham ātmacihnopalakṣaṇam

हिन्दी अर्थ

बलरामजीकी व्रजयात्रा, श्रीकृष्णद्वारा रुक्मिणीका हरण तथा शम्बरासुरका वध

English

Having brought the Kashi king's force too to destruction, Janardana said to the foolish Paundraka, marked with his own emblems:

अध्याय २०७

श्लोक 22

पौण्ड्रकोक्तं त्वया यत् तद् दूतवक्त्रेण मां प्रति समुत्सृजेति चिह्नानि तत् ते संपादयाम्य् अहम्

pauṇḍrakoktaṃ tvayā yat tad dūtavaktreṇa māṃ prati samutsṛjeti cihnāni tat te saṃpādayāmy aham

हिन्दी अर्थ

नाम रुक्मी और कन्याका नाम रुक्मिणी था। की, किंतु बलराम आदि यादव वीरोंने सामना

English

"What was said by you, Paundraka, to me by the messenger's mouth, 'Give up the emblems' — I shall accomplish that for you.

अध्याय २०७

श्लोक 23

चक्रम् एतत् समुत्सृष्टं गदेयं ते विसर्जिता गरुत्मान् एष निर्दिष्टः समारोहतु ते ध्वजम्

cakram etat samutsṛṣṭaṃ gadeyaṃ te visarjitā garutmān eṣa nirdiṣṭaḥ samārohatu te dhvajam

हिन्दी अर्थ

श्रीकृष्ण रुक्मिणीको प्राप्त करना चाहते थे और मनोहर मुसकानवाली रुक्मिणी भी श्रीकृष्णचन्द्रको पतिरूपमें पानेकी अभिलाषा रखती थी। उन्होंने कुण्डिननरेशसे रुक्मिणीके लिये प्रार्थना भी की,

English

This discus is released; this mace of yours is let go; this Garuda is pointed out, let him mount your banner."

अध्याय २०७

श्लोक 24

इत्य् उच्चार्य विमुक्तेन चक्रेणासौ विदारितः पोथितो गदया भग्नो गरुत्मांश् च गरुत्मता

ity uccārya vimuktena cakreṇāsau vidāritaḥ pothito gadayā bhagno garutmāṃś ca garutmatā

हिन्दी अर्थ

किंतु रुक्मीने द्वेषवश श्रीकृष्णकी प्रार्थना ठुकरा दी । जरासंधकी प्रेरणासे परम पराक्रमी राजा भीष्मकने रुक्मीके साथ मिलकर शिशुपालको अपनी कन्या देनेका निश्चय किया । शिशुपालका विवाह सम्पन्न

English

Saying so, he was split by the discus released, crushed by the mace, and Garuda (the banner bird) broken by Garuda.

अध्याय २०७

श्लोक 25

ततो हाहाकृते लोके काशीनाम् अधिपस् तदा युयुधे वासुदेवेन मित्रस्यापचितौ स्थितः

tato hāhākṛte loke kāśīnām adhipas tadā yuyudhe vāsudevena mitrasyāpacitau sthitaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेके लिये जरासंध आदि सभी प्रमुख राजा उसे साथ ले कुण्डिनपुरमें गये। श्रीकृष्ण भी बलभद्र आदि यादवोंके साथ चैद्यनरेशका विवाह देखनेके लिये वहाँ उपस्थित हुए

English

Then, while the world cried alarm, the lord of the Kashis fought Vasudeva, standing for his friend's honour.

अध्याय २०७

श्लोक 26

ततः शार्ङ्गविनिर्मुक्तैश् छित्त्वा तस्य शरैः शिरः काशिपुर्यां स चिक्षेप कुर्वंल् लोकस्य विस्मयम्

tataḥ śārṅgavinirmuktaiś chittvā tasya śaraiḥ śiraḥ kāśipuryāṃ sa cikṣepa kurvaṃl lokasya vismayam

हिन्दी अर्थ

विवाह होनेमें एक ही दिनकी देर थी, इसी समय श्रीहरिने बलभद्र आदि बन्धुजनोंपर शत्रुओंके रोकनेका भार रखकर राजकुमारी रुक्मिणीको हर लिया । इससे पौण्ड्रक, दन्तवक्त्र, विदूरथ, शिशुपाल,

English

Then with arrows loosed from Sharnga he cut off his head and threw it into Kashi city, causing wonder in the world.

अध्याय २०७

श्लोक 27

हत्वा तु पौण्ड्रकं शौरिः काशिराजं च सानुगम् रेमे द्वारवतीं प्राप्तो ऽमरः स्वर्गगतो यथा

hatvā tu pauṇḍrakaṃ śauriḥ kāśirājaṃ ca sānugam reme dvāravatīṃ prāpto 'maraḥ svargagato yathā

हिन्दी अर्थ

जरासंध और शाल्व आदि राजा बहुत कुपित हुए । उन्होंने श्रीकृष्णको मार डालनेकी भारी चेष्टा

English

Having slain Paundraka and the Kashi king with followers, Shauri reached Dvaravati and played like an immortal gone to heaven.

अध्याय २०७

श्लोक 28

तच्छिरः पतितं तत्र दृष्ट्वा काशिपतेः पुरे जनः किम् एतद् इत्य् आह केनेत्य् अत्यन्तविस्मितः

tacchiraḥ patitaṃ tatra dṛṣṭvā kāśipateḥ pure janaḥ kim etad ity āha kenety atyantavismitaḥ

हिन्दी अर्थ

करके उन सबको परास्त कर दिया । तब रुक्मीने यह प्रतिज्ञा करके कि 'मैं श्रीकृष्णको युद्धमें मारे बिना कुण्डिनपुरमें प्रवेश नहीं करूँगा, ' श्रीकृष्णका

English

Seeing that head fallen in the city of the Kashi king, the people, greatly amazed, asked, "What is this? By whom?"

अध्याय २०७

श्लोक 29

ज्ञात्वा तं वासुदेवेन हतं तस्य सुतस् ततः पुरोहितेन सहितस् तोषयाम् आस शंकरम्

jñātvā taṃ vāsudevena hataṃ tasya sutas tataḥ purohitena sahitas toṣayām āsa śaṃkaram

हिन्दी अर्थ

पैदल और रथोंसे युक्त रुक्मीकी चतुरङ्गिणी सेनाका वध करके उसे लीलापूर्वक जीत लिया और पृथ्वीपर गिरा दिया। इस प्रकार रुक्मीको जीतकर मधुसूदनने रुक्मिणीके साथ विधिपूर्वक विवाह

English

Knowing that he had been killed by Vasudeva, his son, with the priest, then propitiated Shankara.

अध्याय २०७

श्लोक 30

अविमुक्ते महाक्षेत्रे तोषितस् तेन शंकरः वरं वृणीष्वेति तदा तं प्रोवाच नृपात्मजम्

avimukte mahākṣetre toṣitas tena śaṃkaraḥ varaṃ vṛṇīṣveti tadā taṃ provāca nṛpātmajam

हिन्दी अर्थ

किया रुक्मिणीके गर्भसे बलवान् प्रद्युम्नका जन्म हुआ, जो कामदेवके अंश थे, जिन्हें जन्मके समय

English

In the great field Avimukta, Shankara, pleased by him, said to the prince, "Choose a boon."

अध्याय २०७

श्लोक 31

स वव्रे भगवन् कृत्या पितुर् हन्तुर् वधाय मे समुत्तिष्ठतु कृष्णस्य त्वत्प्रसादान् महेश्वर

sa vavre bhagavan kṛtyā pitur hantur vadhāya me samuttiṣṭhatu kṛṣṇasya tvatprasādān maheśvara

हिन्दी अर्थ

होनेपर शम्बरासुरका वध किया था।

English

He chose: "Revered one, for my father's killer's death, let a Kritya (fierce spirit) rise against Krishna by your grace, Maheshvara."

अध्याय २०७

श्लोक 32

एवं भविष्यतीत्य् उक्ते दक्षिणाग्नेर् अनन्तरम् महाकृत्या समुत्तस्थौ तस्यैवाग्निनिवेशनात्

evaṃ bhaviṣyatīty ukte dakṣiṇāgner anantaram mahākṛtyā samuttasthau tasyaivāgniniveśanāt

हिन्दी अर्थ

मुनियोंने पूछा--मुने! शम्बरासुरने वीरवर प्रद्यु्नका अपहरण कैसे किया और महापराक्रमी शम्बर प्रद्युप्रके हाथसे किस प्रकार मारा गया?

English

Told "So it will be," right after the southern fire a great Kritya rose from that very fire-pit.

अध्याय २०७

श्लोक 33

ततो ज्वालाकरालास्या ज्वलत्केशकलापिका कृष्ण कृष्णेति कुपिता कृत्वा द्वारवतीं ययौ

tato jvālākarālāsyā jvalatkeśakalāpikā kṛṣṇa kṛṣṇeti kupitā kṛtvā dvāravatīṃ yayau

हिन्दी अर्थ

व्यासजी बोले--ब्राह्मणो ! शम्बरासुर कालके समान विकराल था। उसे यह बात मालूम हो गयी थी कि श्रीकृष्णका पुत्र प्रद्युम्न मेरा वध करेगा; अतः उसने जन्मके छठे दिन ही प्रद्युम्नको

English

Then, with face fearsome with flames, flaming locks, angry, crying "Krishna, Krishna," she went to Dvaravati.

अध्याय २०७

श्लोक 34

ताम् अवेक्ष्य जनः सर्वो रौद्रां विकृतलोचनाम् ययौ शरण्यं जगतां शरणं मधुसूदनम्

tām avekṣya janaḥ sarvo raudrāṃ vikṛtalocanām yayau śaraṇyaṃ jagatāṃ śaraṇaṃ madhusūdanam

हिन्दी अर्थ

सूतिकागृहसे हर लिया और उन्हें ले जाकर समुद्रमें फेंक दिया। वहाँ उस बालकको एक मत्स्यने निगल लिया, किंतु उसकी जठराग्निसे तप्त होनेपर भी बालकको मृत्यु न हो सको। तदनन्तर मछेरोंने

English

Seeing her terrible, with distorted eyes, all the people went to the refuge of the world, Madhusudana.

अध्याय २०७

श्लोक 35

काशिराजसुतेनेयम् आराध्य वृषभध्वजम् उत्पादिता महाकृत्या वधाय तव चक्रिणः जहि कृत्याम् इमाम् उग्रां वह्निज्वालाजटाकुलाम्

kāśirājasuteneyam ārādhya vṛṣabhadhvajam utpāditā mahākṛtyā vadhāya tava cakriṇaḥ jahi kṛtyām imām ugrāṃ vahnijvālājaṭākulām

हिन्दी अर्थ

अन्य मछलियोंके साथ उस मत्स्यको भी मारा और असुरोंमें श्रेष्ठ शम्बरासुरको भेंट कर दिया। उसके घरमें मायावती नामकी एक युवती गुहस्वामिनी थी। वह सुन्दरी रसोइयोंका आधिपत्य करती

English

"This great Kritya was produced by the Kashi king's son, who worshipped the bull-bannered Lord, to kill you, discus-bearer. Kill this fierce Kritya, her matted locks entangled with flames of fire."

अध्याय २०७

श्लोक 36

चक्रम् उत्सृष्टम् अक्षेषु क्रीडासक्तेन लीलया तद् अग्निमालाजटिलं ज्वालोद्गारातिभीषणम्

cakram utsṛṣṭam akṣeṣu krīḍāsaktena līlayā tad agnimālājaṭilaṃ jvālodgārātibhīṣaṇam

हिन्दी अर्थ

थी। जब मछलीका पेट चीरा गया, तब उसमें

English

The discus, set down while in sport he was engrossed in dice, matted with garlands of fire, terrible with the vomit of flames,

अध्याय २०७

श्लोक 37

कृत्याम् अनुजगामाशु विष्णुचक्रं सुदर्शनम् ततः सा चक्रविध्वस्ता कृत्या माहेश्वरी तदा

kṛtyām anujagāmāśu viṣṇucakraṃ sudarśanam tataḥ sā cakravidhvastā kṛtyā māheśvarī tadā

हिन्दी अर्थ

जले हुए कामरूपी वृक्षका प्रथम अङ्कुर था। “यह कौन है ? किस प्रकार मछलीके पेटमें आ गया ?' इस प्रकार कौतूहलमें पड़ी हुई उस कृशाङ्गी

English

Vishnu's discus Sudarshana followed the Kritya at once. Then that Kritya, Maheshvari, struck by the discus,

अध्याय २०७

श्लोक 38

जगाम वेगिनी वेगात् तद् अप्य् अनुजगाम ताम् कृत्या वाराणसीम् एव प्रविवेश त्वरान्विता

jagāma veginī vegāt tad apy anujagāma tām kṛtyā vārāṇasīm eva praviveśa tvarānvitā

हिन्दी अर्थ

तरुणीसे नारदजीने कहा-- यह सम्पूर्ण जगतूकी मायावतीसहित प्रद्युम्रको देखकर श्रीकृष्णकी रानियाँ सृष्टि, पालन और संहार करनेवाले भगवान् श्रीकृष्णका प्रसन्न हो अनेक प्रकारके संकल्प करने लगीं। पुत्र है। इसे शम्बरासुरने सौरीसे चुराकर समुद्रमें रुक्मिणीकी दृष्टि प्रद्युम्रकी ओरसे हटती ही नहीं फेंक दिया और वहाँ मत्स्यने निगल लिया था। थी। वे स्नेहमें भरकर कहने लगी-- यह अवश्य

English

went swiftly in haste; and the discus followed her; the Kritya, in haste, entered Varanasi itself,

अध्याय २०७

श्लोक 39

विष्णुचक्रप्रतिहतप्रभावा मुनिसत्तमाः ततः काशिबलं भूरि प्रमथानां तथा बलम्

viṣṇucakrapratihataprabhāvā munisattamāḥ tataḥ kāśibalaṃ bhūri pramathānāṃ tathā balam

हिन्दी अर्थ

वही यह बालक है, जो आज तुम्हारे हाथ आ ही किसी बड़भागिनीका पुत्र है। अभी इसको गया। सुन्दरी! यह मनुष्योंमें रत्न है। तुम पूर्ण युवावस्थाका आरम्भ हो रहा है। यदि मेरा पुत्र विश्वासके साथ इसका पालन करो।' प्रद्युम्न जीवित होता तो उसकी भी यही अवस्था देवर्षि नारदके यों कहनेपर मायावतीने उस होती। बेटा! तुमने अपने जन्मसे किङ

English

her power struck by Vishnu's discus, best of sages. Then the great force of Kashi and the force of Pramathas,

अध्याय २०७

श्लोक 40

समस्तशस्त्रास्त्रयुतं चक्रस्याभिमुखं ययौ शस्त्रास्त्रमोक्षबहुलं दग्ध्वा तद् बलम् ओजसा

samastaśastrāstrayutaṃ cakrasyābhimukhaṃ yayau śastrāstramokṣabahulaṃ dagdhvā tad balam ojasā

हिन्दी अर्थ

बालकका पालन किया। उसका अत्यन्त सुन्दर सौभाग्यशालिनी जननीको शोभा बढायी है? अथक रूप देखकर वह मोहित थी और बचपनसे ही तुम्हारे प्रति मेरे हृदयमें जैसा स्नेह उमड़ रहा है. अत्यन्त अनुरागपूर्वक उसकी सेवा करने लगी । उसके अनुसार मैं यह स्पष्टरूपसे कह सकती हूँ जिस समय वह बालक युवावस्थाकी संधिसे कि तुम श्रीहरिके पुत्र हो।'

English

equipped with all weapons and missiles, went to face the discus; having burned that force, abundant in discharge of weapons, with its brilliance,

अध्याय २०७

श्लोक 41

कृत्वाक्षेमाम् अशेषां तां पुरीं वाराणसीं ययौ प्रभूतभृत्यपौरां तां साश्वमातङ्गमानवाम्

kṛtvākṣemām aśeṣāṃ tāṃ purīṃ vārāṇasīṃ yayau prabhūtabhṛtyapaurāṃ tāṃ sāśvamātaṅgamānavām

हिन्दी अर्थ

सुशोभित हुआ, उस समय वह गजगामिनी बाला। इसी समय श्रीकृष्णके साथ नारदजी वहाँ प्रद्युप्रके प्रति कामनायुक्त भाव प्रकट करने लगी। आये। उन्होंने अन्तःपुरमें रहनेवाली रुक्मिणी देवीर मायावतीने महात्मा प्रद्युम्रको सारी माया सिखा प्रसन्नतापूर्वक कहा-- सुभ्रू! यह तुम्हारा पुत्र प्रद्युम्र दी। उसका मन उन्हींमें रमता था और उसके नेत्र है। इस समय शम्बरासुरको मारकर यहाँ आया

English

the discus made the whole city of Varanasi unsafe, with abundant servants and citizens, with horses, elephants and people,

अध्याय २०७

श्लोक 42

अशेषदुर्गकोष्ठां तां दुर्निरीक्ष्यां सुरैर् अपि ज्वालापरिवृताशेषगृहप्राकारतोरणाम्

aśeṣadurgakoṣṭhāṃ tāṃ durnirīkṣyāṃ surair api jvālāparivṛtāśeṣagṛhaprākāratoraṇām

हिन्दी अर्थ

सदा उन्हींको निहारते रहते थे। मायावतीको अपने है। कुछ वर्ष पहले शम्बरासुरने ही तुम्हारे पुत्रक प्रति आसक्त होते देख कमलनयन प्रद्ुम्रने कहा-- सूतिकागृहसे हर लिया था। यह तुम्हारे पुत्रको “तू मातृभावका परित्याग करके यह विपरीत भावना सती भार्या मायावती है। यह शम्बरासुरकी पत्नी कैसे करती है ?' मायावतीने कहा--' तुम मेरे नहीं है। इसका कारण सुनो। जब शंकरजीक

English

with all citadels and storehouses, unlookable even by the gods, its houses, walls and gates all enclosed by flames,

अध्याय २०७

श्लोक 43

ददाह तां पुरीं चक्रं सकलाम् एव सत्वरम् अक्षीणामर्षम् अत्यल्पसाध्यसाधननिस्पृहम् तच् चक्रं प्रस्फुरद्दीप्ति विष्णोर् अभ्याययौ करम्

dadāha tāṃ purīṃ cakraṃ sakalām eva satvaram akṣīṇāmarṣam atyalpasādhyasādhananispṛham tac cakraṃ prasphuraddīpti viṣṇor abhyāyayau karam

हिन्दी अर्थ

नहीं, भगवान् श्रीकृष्णके पुत्र हो। तुम्हें कालरूपी कोपसे कामदेवका नाश हो गया, तब उनके शम्बरने चुराकर समुद्रमें फेंक दिया था। तुम मुझे पुनर्जन्मकी प्रतीक्षा करती हुई रतिने अपने मायामय मछलीके पेटसे प्राप्त हुए हो । प्रिय ! तुम्हारी पुत्रवत्सला रूपसे शम्बरासुरको मोहित किया। देवि! तुम्हारे माता आज भी तुम्हारे लिये रोती है।' पुत्ररूपमें ये कामदेव ही अवतीर्ण हुए हैं और यह

English

the discus burned that entire city quickly; its anger unabated, indifferent to whatever little means could achieve, that discus, flashing, returned to Vishnu's hand.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 207
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.