अध्याय २१४
श्लोक 1
इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे स्नानविधिविवरणं नाम चतुर्दशोत्तरद्विशततमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २१५ ब्रह्मोवाच ।तर्पणं सम्प्रवक्ष्यामि देवादिपितृतुष्टिदम्
iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe snānavidhivivaraṇaṃ nāma caturdaśottaradviśatatamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 215 brahmovāca / tarpaṇaṃ sampravakṣyāmi devādipitṛtuṣṭidam
हिन्दी अर्थ
बार, बायें हाथमें दस बार तथा दोनों हाथोंमें सात बार, पैरोंमें पाँच बार और दायें हाथमें दस बार मिट्टीका लेप करके उन्हें जलसे स्वच्छ करे । प्रथम बार उपयोगमें लायी जानेवाली मिट्टीकी मात्रा आधा पसर होनी चाहिए। दूसरे और तीसरे बार जो मिट्टी उपयोगमें आती है उसकी मात्रा आधे पसरको आधी हो जाती है। जो मनुष्य अस्वस्थताके कारण विष्ठा और मूत्रका परित्याग बैठकर नहीं
English
Masuri, Vidali, Saspa ) Ipomca Tarpethuro. Kantakakhya, Mafaas- )