Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
240
अध्याय 240 / 317

Book 2 - Adhyaya 1

70 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ70 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय २४०

श्लोक 1

धर्मन्दृढबद्धमूलो वेदस्कन्धः पुराणशाखाढ्यः ।क्रतुकुसुमो मोक्षफलो मधुसूदनपादपो जयति

dharmandṛḍhabaddhamūlo vedaskandhaḥ purāṇaśākhāḍhyaḥ / kratukusumo mokṣaphalo madhusūdanapādapo jayati

हिन्दी अर्थ

धर्मकाण्ड--प्रेतकल्प हि वैकुण्ठलोकका वर्णन, मरणकालमें और मरणके अनन्तर जीवके कल्याणके लिये विहित विभिन्न कर्तव्योंके बारेमें गरुडजीके

English

In Naimifa forest, the solitary region, the sages 3aunaka and othen asked Suta who was sitting comfortably on his seat after going through bis daily rites.

अध्याय २४०

श्लोक 2

नैमिषे ऽनिमिषक्षेत्रे शौनकाद्या मुनीश्वराः ।कर्मणामन्तरे सूतं स्वासीनमिदमब्रुवन्

naimiṣe 'nimiṣakṣetre śaunakādyā munīśvarāḥ / karmaṇāmantare sūtaṃ svāsīnamidamabruvan

हिन्दी अर्थ

द्वारा किये गये प्रश्‍न, प्रेतकल्पका उपक्रम श्रीगणेशजीको नमस्कार है । ' ३७ ' कारसे युक्त लेकर आगे बढ़ती है, उसी प्रकार शरीरधारी जीव भगवान् वासुदेव हरिको प्रणाम है । एक शरीरके बाद दूसरे शरीरका आश्रय ग्रहण नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्। करता है। दूसरे विद्वानोंका कहना है कि प्राणी

English

O Suta, you possess perfect knowledge (of the Puratic lore) through sage Vyksas favour. Hence, you can clear off our doubts we have in our mind.

अध्याय २४०

श्लोक 3

सूत जानासि सकलं वस्तु व्यासप्रसादतः ।तेन नः सन्दिहानानां सन्देहं छेत्तुमर्हसि

sūta jānāsi sakalaṃ vastu vyāsaprasādataḥ / tena naḥ sandihānānāṃ sandehaṃ chettumarhasi

हिन्दी अर्थ

देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत्॥ मृत्युके पश्चात् यमराजकी यातनाओंका भोग करता भगवान् श्रीनारायण, नरोत्तम नर एवं भगवती है, तदनन्तर उसको दूसरे शरीरको प्राप्ति होती श्रीसरस्वती देवीको नमस्कार करके पुराणका है-इन दोनोंमें क्या सत्य है? यह हमें बतानेकी वाचन करना चाहिए। जिन भगवानूका धर्म ही कृपा करें।

English

Gentlemen, you have put the right question. Now hear. To allay your doubts*

अध्याय २४०

श्लोक 4

यथा तृणजलौकेति न्यायमा श्रित्य कञ्चन ।देहिनो ऽन्यतनुप्राप्तिं केचित्त्वेवं वदन्ति हि

yathā tṛṇajalauketi nyāyamā śritya kañcana / dehino 'nyatanuprāptiṃ kecittvevaṃ vadanti hi

हिन्दी अर्थ

मूल है, वेद जिनका स्कन्ध है, पुराणरूपी शाखासे सूतजीने कहा--हे महाभाग! आप लोगोंने जो समृद्ध हैं, यज्ञ जिनके पुष्प हैं, मोक्ष जिनका अच्छा प्रश्‍न किया है । आप लोगोंको संदेह हो यह फल है--ऐसे भगवान् मधुसूदनरूपी कल्पवृक्षकी असम्भव है। आप लोगोंने तो लोकहितसे प्रेरित जय हो। होकर ही ऐसा प्रश्‍न किया है। है विप्रगणो! मैं

English

I shall take recourse to a dialogue between Krpa and Garu<a. I shall try to remove your doubts thereby.

अध्याय २४०

श्लोक 5

केचित्पुनर्यातनानां यामीनामुपभोगतः ।पश्चाद्देहान्तरप्राप्तिं वदन्ति किमु तत्रसत्

kecitpunaryātanānāṃ yāmīnāmupabhogataḥ / paścāddehāntaraprāptiṃ vadanti kimu tatrasat

हिन्दी अर्थ

देवक्षे्र नैमिषारण्यमें शौनकादिक श्रेष्ठ मुनियोंने आप सबके हृदयमें अवस्थित उस संदेहको भगवान् सुखपूर्वक विराजमान श्रीसूतजी महाराजसे कहा- श्रीकृष्ण और गरुडके बीच हुए संवादके द्वारा दूर हे श्रीसूतजी! आप श्रीवेदव्यासजीकी कृपासे करूँगा। सर्वप्रथम मैं उन भगवान् श्रीकृष्णको सब कुछ जानते हैं। अतः आप हम सभीके नमस्कार करता हूँ, जिनका आश्रय लेकर मनुष्य

English

Obeisance to sage Knoa. They who take recourse to him can easily cross the ocean of the world as it were a small river.

अध्याय २४०

श्लोक 6

सूत उवाच ।साधु पृष्टं महाभागाः शृणुध्वं भवतां पुनः ।सन्देहो नोपपद्येत लोकार्थं किल पृच्छताम्

sūta uvāca / sādhu pṛṣṭaṃ mahābhāgāḥ śṛṇudhvaṃ bhavatāṃ punaḥ / sandeho nopapadyeta lokārthaṃ kila pṛcchatām

हिन्दी अर्थ

संदेहका निवारण करें कुछ लोगोंका कहना है कि इस भवसागरको एक क्षुद्र नदीकी भाँति अनायास जिस प्रकार कोई जोंक तिनकेसे तिनकेका सहारा ही पार कर जाते हैं।

English

Once upon a time, Garuda desired to go round the world. He started on journey, wandered all over, muttering the tht name Hari.

अध्याय २४०

श्लोक 7

तदहं कृष्णगरुडसंवादद्वारकं द्विजाः ।अपाकरिष्ये सन्देहं भवतां भावितात्मनाम्

tadahaṃ kṛṣṇagaruḍasaṃvādadvārakaṃ dvijāḥ / apākariṣye sandehaṃ bhavatāṃ bhāvitātmanām

हिन्दी अर्थ

हे मुनियो ! एक बार विनतापुत्र गरुडके हृदयमें थे। उनके सिरपर मुकुट, कानोंमें कुण्डल और इस ब्रह्माण्डके सभी लोकोंको देखनेकी इच्छा हुई वक्षःस्थल श्रीसे सुशोभित था। वे पीताम्बरसे अतः हरिनामका उच्चारण करते हुए उन्होंने सभी विभूषित थे। उनकी चार भुजाएँ थीं । प्रसन्नमुद्रामे लोकोंका भ्रमण किया। पाताल, पृथ्वीलोक तथा हँसता हुआ उनका मुख था। बहुमूल्य आसनपर

English

He wandered over the earth, in hell and heaven but could not get peace. He returned to Vaikuijha, more distressed by the sight of peoples sorrows.

अध्याय २४०

श्लोक 8

नमः कृष्णाय मुनये य एनं समुपाश्रिताः ।अञ्जस्तरन्ति संसारसागरं कुनदीमिव

namaḥ kṛṣṇāya munaye ya enaṃ samupāśritāḥ / añjastaranti saṃsārasāgaraṃ kunadīmiva

हिन्दी अर्थ

स्वर्गलोकका भ्रमण करते हुए वे पृथ्वीलोकके विराजमान वे हरि उस समय अपनी अन्यान्य

English

Neither M&ya nor destruction nor the evils like anger, attachment etc. exist there.

अध्याय २४०

श्लोक 9

एकदा वैनतेयस्य लोकानां लोकनस्पृहा ।बभूव सो ऽथ बभ्राम तेषु नाम हरेर्गृणन्

ekadā vainateyasya lokānāṃ lokanaspṛhā / babhūva so 'tha babhrāma teṣu nāma harergṛṇan

हिन्दी अर्थ

दुःखसे अत्यन्त दुःखत एवं अशान्तचित्त होकर पुनः वैकुण्ठलोक वापस आ गये। वैकुण्ठलोकमें न रजोगुणकी प्रवृत्ति है, न तमोगुणको ही प्रवृत्ति है, मृत्युलोकके समान

English

There dwell glorious Vi$nu*8 gads dark and fair, bright, lotus*eyed, worshipped by deities and demons, clad in tawny robes and adorned with ornaments, bedecked with gar* lands of gold coins set up with jewels.

अध्याय २४०

श्लोक 10

स पातालं भुवं स्वर्गं भ्रान्त्वालब्धशमाशयः ।लोकदुः खेनातिदुः खी पुनर्वैकुण्ठमागमत्

sa pātālaṃ bhuvaṃ svargaṃ bhrāntvālabdhaśamāśayaḥ / lokaduḥ khenātiduḥ khī punarvaikuṇṭhamāgamat

हिन्दी अर्थ

रजोगुण तथा तमोगुणसे मिश्रित सत्त्वगुणकी भी प्रवृत्ति वहाँ नहीं है । वहाँ केवल शुद्ध सत्त्वगुण ही अवस्थित रहता है। वहाँ माया भी नहीं है, वहाँ किसीका विनाश नहीं होता। वहाँ राग-द्वेष आदि

English

Possessed of four arms and tufVsof hair, wearing ear* rings and garland, they shone by the rows of resplendent aerial cars.

अध्याय २४०

श्लोक 11

न रजो न तमश्चैव सत्त्वं ताभ्यां च मिश्रितम् ।यत्र प्रवर्तते नैव सत्त्वमेव प्रवर्तते

na rajo na tamaścaiva sattvaṃ tābhyāṃ ca miśritam / yatra pravartate naiva sattvameva pravartate

हिन्दी अर्थ

षडङ्विकार भी नहीं हैं। वहाँ देव और असुर- वर्गद्वारा पूजित श्यामवर्णकी सुन्दर कान्तिसे सुशोभित

English

There Lakmi gladly adorns Lord Vipus feet by offering many precious gems. Herself surrounded by the rows of beautiful damsels and friendly associates she sits in a moving swing and praises Hari.

अध्याय २४०

श्लोक 12

न यत्र माया नाशश्च न चै रागादयो मलाः ।श्यामावदाताः सुरुचः शतपत्रविलोचनाः

na yatra māyā nāśaśca na cai rāgādayo malāḥ / śyāmāvadātāḥ surucaḥ śatapatravilocanāḥ

हिन्दी अर्थ

शक्तियोंसे आवृत थे। प्रकृति, पुरुष, महत्, अहंकार,

English

The first evolver, originator, or source of the material world, the

अध्याय २४०

श्लोक 13

सुरासुरार्चिता यत्र गणा विष्णोः सुपेशसः ।पिशङ्गवस्त्राभारणा मणियुङ्निष्कभूषिताः

surāsurārcitā yatra gaṇā viṣṇoḥ supeśasaḥ / piśaṅgavastrābhāraṇā maṇiyuṅniṣkabhūṣitāḥ

हिन्दी अर्थ

पंचतन्मात्राओंसे निर्मित शरीरवाले अपने ही स्वरूपमें रमण करते हुए उन भगवान् हरिका दर्शन करनेसे विनतासुत गरुडका अन्तःकरण आनन्दविभोर हो उठा। उनका शरीर रोमाञ्चित हो गया। उनके

English

The great principle, the intellect. The second of the twenty five elements or Uutim rectnised by the Sdikfyds.

अध्याय २४०

श्लोक 14

चतुर्भुजाः कुण्डलिनो मौलिनो मालिनस्तथा ।भ्राजिष्णुभिर्विमानानां पङ्किभिर्ये महात्मनाम्

caturbhujāḥ kuṇḍalino maulino mālinastathā / bhrājiṣṇubhirvimānānāṃ paṅkibhirye mahātmanām

हिन्दी अर्थ

नेत्रॉसे प्रेमाश्रुओंकी धारा बहने लगी । आनन्दमग्न होकर उन्होंने प्रभुको प्रणाम किया। प्रणाम करते हुए अपने वाहन गरुडको देखकर भगवान् विष्णुने कहा-हे पक्षिन्! आपने इतने दिनोंमें इस जगत्को

English

In 5iatih'8-philosophy, the third of the eight producers or elements of creation, i.e., cooedt or conceptioa of individuality. In F#dMa*phi1osophy egotaim ii considered to be spiritual ignoeaDce.

अध्याय २४०

श्लोक 15

द्योतन्ते द्योतमानानां प्रमदानां च पङ्क्तिभिः ।श्रीर्यत्र नानाविभवैर्हरेः पादौ मुदार्चति

dyotante dyotamānānāṃ pramadānāṃ ca paṅktibhiḥ / śrīryatra nānāvibhavairhareḥ pādau mudārcati

हिन्दी अर्थ

रहते हैं, जिनके शरीर पीतवसन और मनोहारी गरुडने कहा--भगवन्! आपकी कृपासे मैंने आभूषणोंसे विभूषित हैं और मणियुक्त स्वर्णके समस्त त्रिलोकीका परिभ्रमण किया है। उनमें स्थित अलङ्करणोंसे सुशोभित हैं। भगवानूके वे सभी जगत्के सभी स्थावर और जङ्गम प्राणियोंको भी पार्षद चार-चार भुजाओंसे युक्त हैं। उनके कानोंमें देखा। है प्रभो! यमलोकको छोड़कर पृथ्वीलोकसे

English

Vi| 9 u spoke to Garua who had cume to see him

अध्याय २४०

श्लोक 16

हरिं गायति दोलास्थं गीयमानालिभिः स्वयम् ।ददर्श श्रीहरिं तत्र श्रीपतिं सात्वतां पतिम्

hariṃ gāyati dolāsthaṃ gīyamānālibhiḥ svayam / dadarśa śrīhariṃ tatra śrīpatiṃ sātvatāṃ patim

हिन्दी अर्थ

कुण्डल और सिरपर मुकुट है। उनका वक्षःस्थल सत्यलोकतक सब कुछ मेरै द्वारा देखा जा चुका है। सुन्दर पुष्पोंकी मालासे सुशोभित है। मनको सभी लोकोंकी अपेक्षा भूर्लोक प्राणियोंसे अधिक मोहित करनेवाली अप्सराओंसे युक्त, महात्माओंके परिपूर्ण है। सभी योनियोंमें मानवयोनि ही भोग और चमकते हुए विमानोंकी पंक्तिकी कान्तिसे वे सभी मोक्षका शुभ आश्रय है। अत: सुकृतियोंके लिये ऐसा

English

My Lord by your grace, I have visited the three worlds and seen all beings — the movable and the immov¬ able.

अध्याय २४०

श्लोक 17

जगत्पतिं यज्ञपतिं पार्षदैः परिषेवितम् ।सुनन्दनन्दप्रबलार्हणमुख्यैर्निरन्तरम्

jagatpatiṃ yajñapatiṃ pārṣadaiḥ pariṣevitam / sunandanandaprabalārhaṇamukhyairnirantaram

हिन्दी अर्थ

सदा भास्वरित होते रहते हैं। वहाँ नाना प्रकारके लोक न तो अभीतक बना है और न भविष्यमें बनेगा । वैभवोंसे समन्वित लक्ष्मी प्रसन्नतापूर्वक भगवान् देवता लोग भी इस लोककी प्रशंसामें गीत गाते हुए श्रीहरिके चरणोंकी पूजा करती रहती हैं। कहते हैं-'जो लोग पवित्र भारतकी भूमिमें जन्म गरुडजीने वहाँ देखा कि श्रीहरि झूलेपर विराजमान लेकर निवास करते हैं, वे धन्य हैं। देवता लोग भी

English

From bhuloka to satyaloka, I have visited all regions, except the region of Yama, O tny lord.

अध्याय २४०

श्लोक 18

भृत्यप्रसादसुमुखमायतारुणलोचनम् ।किरीटिनं कुण्डलिनं श्रिया वक्षसि लक्षितम्

bhṛtyaprasādasumukhamāyatāruṇalocanam / kirīṭinaṃ kuṇḍalinaṃ śriyā vakṣasi lakṣitam

हिन्दी अर्थ

हैं। सखियोंद्वारा स्तुत्य लक्ष्मीजी झूलेमें स्थित स्वर्ग एवं अपवर्गरूप फलकी प्राप्तिके लिये पुनः भगवान्की स्तुति कर रही हैं। अपने लाल-लाल भारतभूमिमें मनुष्यरूपमें जन्म लेते हैँ'-- बड़े-बड़े नेत्रोंसे युक्त प्रसन्नमुख देवोंके अधिपति, गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ये भारतभूमिभागे। श्रीपति, जगत्पति और यज्ञपति भगवान् श्रीहरि स्वर्गापवर्गस्य फलार्जनाय भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात्॥

English

A region better than thb for those who perform good actions has neither been before nor will there ever be.

अध्याय २४०

श्लोक 19

पीतांशुकं चतुर्बाहुं प्रसन्नहसिताननम् ।अभ्यर्हणासनासीनं ताभिः शक्तिभिरावृतम्

pītāṃśukaṃ caturbāhuṃ prasannahasitānanam / abhyarhaṇāsanāsīnaṃ tābhiḥ śaktibhirāvṛtam

हिन्दी अर्थ

अपने नन्द, सुनन्द आदि प्रधान पार्षदोंको देख रहे (१।२७)

English

It seems that the gods sing songs to this purport. Those who live in this part of the world called Bhala are in fact blessed. In order to enjoy the fruits of heaven and salvation they are born as human beings, casting off their deity-hood.

अध्याय २४०

श्लोक 20

प्रधानपुरुषाभ्यां च महता चाहमा तथा ।एकादशोन्द्रियैश्चैव पञ्चभूतैस्तथैव च

pradhānapuruṣābhyāṃ ca mahatā cāhamā tathā / ekādaśondriyaiścaiva pañcabhūtaistathaiva ca

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प वैकुण्ठलोकका वर्णन एवं प्रेतकल्पका उपक्रम ४४७

English

Why do the sons and grandsons walk ahead? Why are the gifts given, including the gift of a cow, O Keiava?

अध्याय २४०

श्लोक 21

स्वरूपेरममाणं तमीश्वरं विनतासुतः ।तद्दर्शनाह्लादयुतस्वान्तो हृष्यत्तनूरुहः

svarūperamamāṇaṃ tamīśvaraṃ vinatāsutaḥ / taddarśanāhlādayutasvānto hṛṣyattanūruhaḥ

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो! आप यह बतानेकी कृपा करें कि जाता है? स्त्रियाँ उस मरे हुए व्यक्तिके लिये क्यों मृत्युको प्राप्त हुआ प्रेत किस कारण पृथ्वीपर विलाप करती हैं ? शवके उत्तर दिशामें ' यमसूक्त 'का डाल दिया जाता है ? पाठ क्यों किया जाता है? मरे हुए व्यक्तिको । या य्य पीनेके लिये जल एक ही वस्त्र धारण करके क्यों

English

Hindu mythology accepts fourteen or worlds. Seven higher regions rising from the earth one above the other are. bhirMa, bhtwarUka, tvarUka, maharUks, UipMtd and or brdhitiaUkt; and seven

अध्याय २४०

श्लोक 22

लोचनाभ्यामश्रु मुञ्चन्प्रेममग्नो ननाम ह ।नमागतं नतं स्वीय वाहनं विष्णुरब्रवीत् ।भूमिः का लङ्घिता पक्षिंस्त्वयेयन्तमनेहसम्

locanābhyāmaśru muñcanpremamagno nanāma ha / namāgataṃ nataṃ svīya vāhanaṃ viṣṇurabravīt / bhūmiḥ kā laṅghitā pakṣiṃstvayeyantamanehasam

हिन्दी अर्थ

दिया जाता है? उस समय सूर्य-बिम्ब-निरीक्षण, पत्थरपर स्थापित यव, सरसों, दूर्वा और नीमकी पत्तियोंका स्पर्श करनेका विधान क्यों है? उस

English

How doos he take shelter in the body being carried? Why does the son carry the corpse on his shoulders and the grandson lights the lire?

अध्याय २४०

श्लोक 23

गरुड उवाच ।तव प्रसादाद्वैकुण्ठ त्रैलोक्यं सचराचरम्

garuḍa uvāca / tava prasādādvaikuṇṭha trailokyaṃ sacarācaram

हिन्दी अर्थ

वस्त्र क्यों धारण करते हैं? शवका दाह-संस्कार 'करनेके पश्चात् उस व्यक्तिको अपने परिजनोंके साथ बैठकर भोजनादि क्यों नहीं करना चाहिए? मरे हुए व्यक्तिके पुत्र दस दिनके पूर्व किसलिये

English

Why barley mustarded, durva, the two stones, the leaves of margosa? Why do men and women wear one lower and one upper garment.

अध्याय २४०

श्लोक 24

मया विलोकितं सर्वं जगत्स्थावरजङ्गमम् ।भूर्लोकात्सत्यपर्यन्तं पुरं याम्यं विना प्रभो

mayā vilokitaṃ sarvaṃ jagatsthāvarajaṅgamam / bhūrlokātsatyaparyantaṃ puraṃ yāmyaṃ vinā prabho

हिन्दी अर्थ

पिण्डोंका दान देते हैं? चबूतरे (वेदी)-पर पके हुए मिट्टीके पात्रमें दूध क्यों रखा जाता है ? रस्सीसे मरे हुए प्राणीके नीचे लोग कुश किसलिये बिछा बँधे हुए तीन काष्ठ (तिगोड़िया)-के ऊपर रात्रिमें देते हैं? उसके दोनों पैर दक्षिण दिशाकी ओर गाँवके चौराहेपर एकान्तमें वर्षपर्यन्त प्रतिदिन दीपक

English

Why should the meals, etc. be not taken alongwith other persons after returning home? Why do the sons give nine pipas

अध्याय २४०

श्लोक 25

भूर्लोकः सर्वलोकानां प्रचुरः सर्वजन्तुषु ।मानुष्यं सर्वभूतानां भुक्तिमुक्त्यालयं शुभम्

bhūrlokaḥ sarvalokānāṃ pracuraḥ sarvajantuṣu / mānuṣyaṃ sarvabhūtānāṃ bhuktimuktyālayaṃ śubham

हिन्दी अर्थ

क्यों कर दिये जाते हैं मरनेके समय मनुष्यके क्यों दिया जाता है? शवका दाह-संस्कार तथा आगे पुत्र-पौत्रादि क्यों खड़े रहते हैं है केशव! अन्य लोगोंके साथ जल-तर्पणकी क्रिया क्यों की मृत्युके समय विविध वस्तुओंका दान एवं गोदान जाती है? है भगवन्! मृत्युके बाद प्राणी आतिवाहिक किसलिये दिया जाता है? बन्धु-बान्धव, मित्र शरीरमें चला जाता है, उसके लिये नौ पिण्ड देने

English

Why should the nine piidds be offered? How is the gift to be given to the manes? Why is the call for the bearers of the corpse?

अध्याय २४०

श्लोक 26

अतः सुकृतिनां लोको न भूतो न भविष्यति

ataḥ sukṛtināṃ loko na bhūto na bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

और शत्रु आदि सभी मिलकर क्यों क्षमा-याचना चाहिए, इसका क्या प्रयोजन है किस विधानसे करते हैं ? किससे प्रेरित होकर लोग मृत्युकालमें पितरोंको पिण्ड प्रदान करना चाहिए और उस तिल, लोहा, स्वर्ण, कपास, नमक, सप्तधान्ये, पिण्डको स्वीकार करनेके लिये उनका आवाहन भूमि और गौका दान देते हैं प्राणी कैसे मरता कैसे किया जाय?

English

Bslli of rke offered to the Manci at obsequial ceremonies.

अध्याय २४०

श्लोक 27

गायन्ति देवाः किल गीतकानि धन्यास्तु ये भारतभूमिभागे ।स्वर्गापवर्गस्य फलार्जनाय भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात्

gāyanti devāḥ kila gītakāni dhanyāstu ye bhāratabhūmibhāge / svargāpavargasya phalārjanāya bhavanti bhūyaḥ puruṣāḥ suratvāt

हिन्दी अर्थ

है और मरनेके बाद कहाँ जाता है? उस समय वह है देव! यदि ये सभी कार्य मरनेके तुरंत बाद आतिवाहिक शरीर (निराधार-रूपमें आत्माको सम्पन्न हो जाते हैं तो फिर बादमें पिण्डदान क्यों वहन करनेवाले शरीर)-को कैसे प्राप्त करता है ? किया जाता है? पूर्व किये गये पिण्डदानके बाद अग्नि देनेवाले पुत्र और पौत्र उसे कन्थेपर क्यों ले पुनः पिण्डदान या अन्य क्रियाओंको करनेकी क्या

English

A quadranguisr place or courtyard: a place where many roads

अध्याय २४०

श्लोक 28

प्रेतः कौक्षिप्यते कस्मात्पञ्चरत्नं मुखे कथम् ।अधस्ताच्चालिता दर्भाः पादौ याम्यां व्यवस्थितौ

pretaḥ kaukṣipyate kasmātpañcaratnaṃ mukhe katham / adhastāccālitā darbhāḥ pādau yāmyāṃ vyavasthitau

हिन्दी अर्थ

जाते हैं ? शवमें घृतका लेप क्यों किया जाता है ? आवश्यकता है? दाह-संस्कारके बाद अस्थि- उस समय एक आहुति देनेकी परम्परा कहाँसे संचयन और घट फोड्नेका विधान क्यों है? दूसरे चली है? शवको भूमिस्पर्श किसलिये करवाया दिन और चौथे दिन साग्निक द्विजके स्नानका

English

From where do the five organs of action the five organs of perception and the five vital airs go away and how?

अध्याय २४०

श्लोक 29

किमर्थं पुत्रपौत्राश्च तस्य तिष्ठन्ति चाग्रतः ।किमर्थं दीयते दानं गोदानमपि केशव

kimarthaṃ putrapautrāśca tasya tiṣṭhanti cāgrataḥ / kimarthaṃ dīyate dānaṃ godānamapi keśava

हिन्दी अर्थ

१-सोना, चाँदी, मोती, लाजावर्त (लाजवर्द) तथा मूँगा--ये पाँच पञ्चरत्न कहलाते हैं। २-जौ, धान, तिल, कँगनी, मुँग, चना तथा साँवा-ये सप्तधान्य कहलाते हैं।

English

From where do the five thieves of the body—greed affection, desire, love and pride go away, O Jankrdana?

अध्याय २४०

श्लोक 30

बन्धुमित्राण्यमित्राश्च क्षमापयन्ति तत्कथम् ।तिलालोहं हिरण्यं च कर्पासं लवणं तथा

bandhumitrāṇyamitrāśca kṣamāpayanti tatkatham / tilālohaṃ hiraṇyaṃ ca karpāsaṃ lavaṇaṃ tathā

हिन्दी अर्थ

विधान क्यों है ? दसवें दिन सभी परिजनोंके साथ कृपा करें। शुद्धिके लिये स्नान क्यों किया जाता है? दसवें है हरे! मूर्च्छासे अथवा पतनसे जिनकी मृत्यु दिन तेल एवं उबटनका प्रयोग क्यों किया जाता होती है, उनके लिये क्या होना चाहिए । जो पतित है। उस तेल और उबटनका प्रयोग भी एक मनुष्य जलाये गये अथवा नहीं जलाये गये तथा इस

English

Whatever little action has been done, whether good or bad or whatever gifts have been tendered which procure merit where do these go away after the body has decayed?

अध्याय २४०

श्लोक 31

सप्तधान्यं क्षितिर्गावो दीयन्ते केनहेतुना ।कथं हि म्रियते जन्तुर्मृतो वै कुत्र गच्छति

saptadhānyaṃ kṣitirgāvo dīyante kenahetunā / kathaṃ hi mriyate janturmṛto vai kutra gacchati

हिन्दी अर्थ

विशाल जलाशयके तटपर होना अपेक्षित हे, पृथ्वीपर जो अन्य प्राणी हैं, उनके मरनेपर अन्तमें इसका क्या कारण है? दसवें दिन पिण्डदान क्यों क्या होना चाहिए। जो मनुष्य पापी, दुराचारी करना चाहिए ? एकादशाहके दिन वृषोत्सर्ग आदिके अथवा हतबुद्धि हैं, मरनेके बाद वे किस स्थितिको सहित पिण्डदान करनेका क्या प्रयोजन है? पात्र, प्राप्त करते हैं ? जो पुरुष आत्मघाती, ब्रह्महत्यारा,

English

O lord, you tell me all this, for I am terribly afraid of the sinner. Hear something more, O soul of the universe. While wandering with curiosity, I saw the entire world.

अध्याय २४०

श्लोक 32

अतिवाहशरीरं च कथं हि श्रयते तदा ।शवं स्कन्धे वहेत्पुत्रो अग्निदाता च पौत्रकः

ativāhaśarīraṃ ca kathaṃ hi śrayate tadā / śavaṃ skandhe vahetputro agnidātā ca pautrakaḥ

हिन्दी अर्थ

पादुका, छत्र, वस्त्र तथा अंगूठी आदि वस्तुओंका स्वर्णादिकी चोरी करनेवाला, मित्रादिके साथ दान क्यों दिया जाता है? तेरहवें दिन पददान क्यों विश्वासघात करनेवाला है, उस महापातकीका क्या दिया जाता है। वर्षपर्यन्त सोलह श्राद्ध क्यों किये होता है? है माधव! जो शूद्र कपिला गौका दूध जाते हैं तथा तीन सौ साठ सान्नोदक घट क्यों दिये पीता है अथवा प्रणव महामन्त्रका जप करता है या

English

Funeral rites performed in honour of the departed spin ta of desd reUtivn.

अध्याय २४०

श्लोक 33

आज्येनाभ्यञ्जनं कस्मात्कुत एकाहुतिक्रिया ।वसुन्धरा किमर्थं च कुतः स्त्रीशब्दकीर्तनम्

ājyenābhyañjanaṃ kasmātkuta ekāhutikriyā / vasundharā kimarthaṃ ca kutaḥ strīśabdakīrtanam

हिन्दी अर्थ

जाते हैं। प्रेततृप्तिके लिये प्रतिदिन अन्नसे भरे हुए ब्रह्मसूत्र अर्थात् यज्ञोपबीतको धारण करता है तो एक घटका दान क्यों करना चाहिए। मृत्युके बाद उसकी क्या गति होती है ? है संसारके हे प्रभो! मनुष्य अनित्य है और समय आनेपर स्वामी! जब कोई शूद्र किसी ब्राह्मणीको पत्नी बना ही वह मरता है, किंतु मैं उस छिद्रको नहीं देख लेता है तो उस पापीसे मैं भी डरता हूँ। आप बतायें

English

The performance of a particular StAddka in honour of the deceaied*s

अध्याय २४०

श्लोक 34

यमसूक्तं किमर्थं च उदीच्या दिशमाहरेत् ।पानीयमेकवस्त्रेण सूर्यबिम्बनिरीक्षणम्

yamasūktaṃ kimarthaṃ ca udīcyā diśamāharet / pānīyamekavastreṇa sūryabimbanirīkṣaṇam

हिन्दी अर्थ

पाता हूँ, जिससे जीव निकल जाता है? प्राणीके कि उस पापीकी क्या दशा होती है? साथ ही उस शरीरमें स्थित किस छिद्रसे पृथ्वी, जल, मन, तेज, पापकर्मके फलको बतानेकी भी कृपा करें। वायु और आकाश निकल जाते हैं? है जनार्दन! है विश्वात्मन्! आप मेरी दूसरी बातपर भी इसी शरीरमें स्थित जो पाँच कर्मेन्द्रियाँ और पाँच ध्यान दें। मैं कौतूहलवश वेगपूर्वक लोकोंको

English

I had the fear of losing my desired object in helL There is no other place safer than your feet, O Lord.

अध्याय २४०

श्लोक 35

यवसर्षपदूर्वास्तु पाषाणे निम्बपत्रकम् ।वस्त्रं नरश्च नारी च विदध्यादधरोत्तरम्

yavasarṣapadūrvāstu pāṣāṇe nimbapatrakam / vastraṃ naraśca nārī ca vidadhyādadharottaram

हिन्दी अर्थ

ज्ञानेन्द्रियाँ तथा पाँच वायु हैं, वे कहाँसे निकल देखता हुआ सम्पूर्ण जगत्में जा चुका हूँ, उसमें जाते हैं। लोभ, मोह, तृष्णा, काम और अहंकाररूपी रहनेवाले लोगोंको मैंने देखा है कि वे सभी दु:खमें जो पाँच चोर शरीरमें छिपे रहते हैं, वे कहाँसे ही डूब रहे हैं। उनके अत्यन्त कष्टोंको देखकर निकल जाते हैं। मेरा अन्तःकरण पीड़ासे भर गया है। स्वर्गमें

English

Time has consumed the unreality as it has consumed the dream-world. Still, I saw a number of people suffering from sorrows in the land of Bharata.

अध्याय २४०

श्लोक 36

अन्नाद्यं गृहमागत्य न भोक्तव्यं जनैः सह ।नवकांश्चैव पिण्डांश्च किमर्थं ददते सुताः

annādyaṃ gṛhamāgatya na bhoktavyaṃ janaiḥ saha / navakāṃścaiva piṇḍāṃśca kimarthaṃ dadate sutāḥ

हिन्दी अर्थ

हे माधव! प्राणी अपने जीवनकालमें पुण्य हैत्योंकी शत्रुतासे भय है। पृथ्वीलोकमें मृत्यु और अथवा पाप जो कुछ भी कर्म करता है, नाना रोगादिसे तथा अभीष्ट वस्तुओंके वियोगसे लोग प्रकारके दान देता है, वे सब शरीरके नष्ट हो दुःखित हैं। पाताललोकमें रहनेवाले प्राणियोंको जानेपर उसके साथ कैसे चले जाते हैं। वर्षके मेरे भयसे दुःख बना रहता है। है ईश्वर! आपके

English

After seeing the strangeness of their faults in the face of death. I have come to you with a mind to ask what is death? Why is this strangeness?

अध्याय २४०

श्लोक 37

किमर्थं चत्वरे दुग्धं यात्रे पक्वे च मृन्मये ।काष्ठत्रयं गणाबद्धं कृत्वा रात्रौ चतुष्पथे

kimarthaṃ catvare dugdhaṃ yātre pakve ca mṛnmaye / kāṣṭhatrayaṃ gaṇābaddhaṃ kṛtvā rātrau catuṣpathe

हिन्दी अर्थ

समाप्त हो जानेपर भी मरे हुए प्राणीके लिये इस वैष्णव पद (वैकुण्ठ)-के अतिरिक्त अन्यत्र सपिण्डीकरण क्यों होता है? उस प्रेतकृत्यमें किसी भी लोकमें ऐसी निर्भयता नहीं दिखायी (सपिण्डन) प्रेतपिण्डका मिलन किसके साथ देती। कालके वशीभूत इस जगतूकी स्थिति स्वप्नकी 'किस विधिसे होना चाहिए, इसे आप बतानेकी मायाके समान असत्य है। उसमें भी इस भारतवर्षमें

English

Formerly, I had heard from the sages in general; now I ask you specifically on these points, O lord.

अध्याय २४०

श्लोक 38

निशायां दीयते दीपो यावदब्दं दिनेदिन ।दाहोदकं किमर्थं च किमर्थं च जनैः सह

niśāyāṃ dīyate dīpo yāvadabdaṃ dinedina / dāhodakaṃ kimarthaṃ ca kimarthaṃ ca janaiḥ saha

हिन्दी अर्थ

मरणासन्न व्यक्तिके कल्याणके लिये किये जानेवाले कर्म ४४९

English

O Viu, what shall a dying man do? What shall he give in charity? After death, what is the method of cremation?

अध्याय २४०

श्लोक 39

भगवन्नाति वाहश्च नव पिण्डाः प्रदापयेत् ।कथं देयं पितृभ्यश्च वाहस्यावाहनं कथम्

bhagavannāti vāhaśca nava piṇḍāḥ pradāpayet / kathaṃ deyaṃ pitṛbhyaśca vāhasyāvāhanaṃ katham

हिन्दी अर्थ

रहनेवाले लोग बहुत-से दुःखोंको भोग रहे हैं । मैने आपसे पूछ रहा हूँ ।

English

Does he languish or obtain another body? When he lives in Yama's city, what are the rites to be performed by bis descendants in the year of his death?

अध्याय २४०

श्लोक 40

इदञ्चेत्क्रियते देव कस्मात्पिण्डं प्रदापयेत् ।किं तत्प्रदीयते तस्य पिण्डदानाद्यनन्तरम्

idañcetkriyate deva kasmātpiṇḍaṃ pradāpayet / kiṃ tatpradīyate tasya piṇḍadānādyanantaram

हिन्दी अर्थ

वहाँ देखा है कि उस देशके मनुष्य राग-द्वेष तथा मोह आदिमें आकण्ठ डूबे हुए हैं । उस देशमें कुछ लोग अन्धे हैं, कुछ टेढ़ी दृष्टिवाले हैं, कुछ दुष्ट वाणीवाले हैं, कुछ लूले हैं, कुछ लँगड़े हैं, कुछ

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 41

अस्थिसञ्चयनं चैव घटस्फोटं तथैव च ।द्वितीये ऽह्नि कुतः स्नानं चतुर्थे साग्निके द्विजे

asthisañcayanaṃ caiva ghaṭasphoṭaṃ tathaiva ca / dvitīye 'hni kutaḥ snānaṃ caturthe sāgnike dvije

हिन्दी अर्थ

काने हैं, कुछ बहरे हैं, कुछ गूँगे हैं, कुछ कोढ़ी हैं, कुछ लोमश (अधिक रोमवाले) हैं, कुछ नाना रोगसे घिरे हैं और कुछ आकाश-कुसुमकी तरह नितान्त मिथ्या अभिमानसे चूर हैं। उनके विचित्र

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 42

दशमे किं मलस्नानं कार्यं सर्वजनैः सह ।कस्मात्तैलोद्वर्तनं च स्कन्धवाहगृहं नयेत्

daśame kiṃ malasnānaṃ kāryaṃ sarvajanaiḥ saha / kasmāttailodvartanaṃ ca skandhavāhagṛhaṃ nayet

हिन्दी अर्थ

दोषोंको देखकर तथा उनकी मृत्युको देखकर मेरे मनमें जिज्ञासा उत्पन्न हो गयी है कि यह मृत्यु क्या है? इस भारतवर्षमें यह कैसी विचित्रता है? ऋषियोंसे मैंने पहले ही इस विषयमे सामान्यतः

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 43

तैलोद्वर्तनकं चापि दधुः स्थूलजलाशये ।दशमे ऽहनि यत्पिण्डं तद्दद्या दामिषेण तु

tailodvartanakaṃ cāpi dadhuḥ sthūlajalāśaye / daśame 'hani yatpiṇḍaṃ taddadyā dāmiṣeṇa tu

हिन्दी अर्थ

यह सुन रखा है कि जिसकी विधिपूर्वक वार्षिक क्रियाएँ नहीं होती हैं, उसकी दुर्गति होती है। फिर

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 44

पिणाञ्चैकादशे कस्माद्वृषोत्सर्गादिपूर्वकम् ।भाजनोपानहौ च्छत्रं वासांसि त्वङ्गुलीयकम्

piṇāñcaikādaśe kasmādvṛṣotsargādipūrvakam / bhājanopānahau cchatraṃ vāsāṃsi tvaṅgulīyakam

हिन्दी अर्थ

भी है प्रभो! इसकी विशेष जानकारीके लिये मैं कृपा करें।

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 45

त्रयोदशे ऽह्नि देयं स्यात्पददानं किमर्थकम् ।श्राद्धानि षोडशैतानि अब्दं यावत्कुतो घटः

trayodaśe 'hni deyaṃ syātpadadānaṃ kimarthakam / śrāddhāni ṣoḍaśaitāni abdaṃ yāvatkuto ghaṭaḥ

हिन्दी अर्थ

हे उपेन्द्र! मनुष्यकी मृत्युके समय उसके कल्याणके लिये क्या करना चाहिए ? कैसा दान देना चाहिए । मृत्यु और श्मशान-भूमितक पहुँचनेके बीच कौन-सी विधि अपेक्षित है। चितामें शवको

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 46

अन्नाद्येनोदकेनैव षष्ट्याधिकशतत्रयम् ।दिनेदिने च दातव्यं घटान्नं प्रेततृप्तये

annādyenodakenaiva ṣaṣṭyādhikaśatatrayam / dinedine ca dātavyaṃ ghaṭānnaṃ pretatṛptaye

हिन्दी अर्थ

जलानेको क्या विधि है ? तत्काल अथवा विलम्बसे उस जीवको कैसे दूसरी देह प्राप्त होती है, यमलोक (संयमनी नगरी)-को जानेवालेके लिये वर्षपर्यन्त कौन-सी क्रियाएँ करनी चाहिए। दुर्बुद्धि

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 47

प्राप्ते काले वै म्रियते अनित्या मानवाः प्रभो

prāpte kāle vai mriyate anityā mānavāḥ prabho

हिन्दी अर्थ

अर्थात् दुराचारी व्यक्तिकी मृत्यु होनेपर उसका प्रायश्चित्त क्या है? पञ्चक आदिमें मृत्यु होनेपर पञ्चकशान्तिके लिये क्या करना चाहिए। है देव! आप मेरे ऊपर प्रसन्न हों। आप मेरे इस सम्पूर्ण

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 48

छिद्रं तु नैव पश्यामि कुतो जीवः स निर्गतः ।कुतो गच्छन्ति भूतानि पृथिव्यापो मनस्तथा ।तेजो वदस्व मे नाथ वायुराकाशमेव च

chidraṃ tu naiva paśyāmi kuto jīvaḥ sa nirgataḥ / kuto gacchanti bhūtāni pṛthivyāpo manastathā / tejo vadasva me nātha vāyurākāśameva ca

हिन्दी अर्थ

भ्रमको विनष्ट करनेमें समर्थ हैं। मैंने आपसे यह सब लोकमङ्गलको कामनासे पूछा है, मुझे बतानेकी

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 49

कुतः कर्मेन्द्रियाणीह पञ्चबुद्धीन्द्रियाणि च ।वायवश्चैव पञ्चैते कथं गच्छन्ति चात्ययम्

kutaḥ karmendriyāṇīha pañcabuddhīndriyāṇi ca / vāyavaścaiva pañcaite kathaṃ gacchanti cātyayam

हिन्दी अर्थ

मरणासन्न व्यक्तिके कल्याणके लिये किये जानेवाले कर्म, मृत्युसे पूर्वको स्थिति तथा कर्मविपाकका वर्णन श्रीकृष्णने कहा--हे भद्र! आपने मनुष्योंके शास्त्रानुसार यथायोग्य उपायसे पुत्र उत्पन्न करना

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 50

लोभमोहादयः पञ्च शरीरे चैव तस्कराः ।तृष्णा कामो ह्यहङ्कारः कुतो यान्ति जनार्दना

lobhamohādayaḥ pañca śarīre caiva taskarāḥ / tṛṣṇā kāmo hyahaṅkāraḥ kuto yānti janārdanā

हिन्दी अर्थ

हितमें बहुत ही अच्छी बात पूछी है। सावधान ही चाहिए। यदि मनुष्यको मोक्ष नहीं मिलता है होकर इस समस्त ऑऔर्ध्वहैहिक क्रियाको भलीभाँति तो पुत्र नरकसे उसका उद्धार कर देता है । पुत्र और

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 51

पुण्यं वाप्यथवापुण्यं यत्किञ्चित्सुकृतं तथा ।नष्टे देहे कुतो यान्ति दानानि विविधानि च

puṇyaṃ vāpyathavāpuṇyaṃ yatkiñcitsukṛtaṃ tathā / naṣṭe dehe kuto yānti dānāni vividhāni ca

हिन्दी अर्थ

हे गरुड! जो सम्यक् रूपसे भेदरहित है, जिसका वर्णन श्रुतियों और स्मृतियोंमें हुआ है, जिसको इन्द्रादि देवता, योगीजन और योगमार्गका

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 52

सपिण्डनं किमर्थं च पूर्णे संवत्सरे ऽपि वा ।प्रेतस्य मेलनं केषां किंविधं तत्र कारयेत्

sapiṇḍanaṃ kimarthaṃ ca pūrṇe saṃvatsare 'pi vā / pretasya melanaṃ keṣāṃ kiṃvidhaṃ tatra kārayet

हिन्दी अर्थ

पौत्रको मरे हुए प्राणीको कन्धा देना चाहिए तथा उसका यथाविधान अग्निदाह करना चाहिए । शवके नीचे पृथ्वीपर तिलके सहित कुश बिछानेसे शवकी आधारभूत भूमि उस ऋतुमती नारीके समान हो

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 53

मूर्छनात्पननाद्वापि विपत्तिर्यदि जायते ।ये दग्धा ये त्वदग्धाश्च पतिता ये नरा भुवि

mūrchanātpananādvāpi vipattiryadi jāyate / ye dagdhā ye tvadagdhāśca patitā ye narā bhuvi

हिन्दी अर्थ

चिन्तन करनेवाले विद्वान् नहीँ देख सके हैं, जो जाती है, जो प्रसवकी योग्यता रखती है। मृतकके गुह्यातिगुह्य है, ऐसे उस प्रधान तत्त्वको जिसे मैंने मुखमें पञ्चरत्र डालना बीजवपनके समान है, अभीतक किसी अन्यसे नहीं कहा है, तुम मेरे जिससे आगे जीवकी शुभगतिका निश्चय होता है। भक्त हो, इसलिये मैं तुम्हें बता रहा हूँ। जैसे पुष्प (ऋतुकालमें स्त्रियोंका रजोदर्शन) न

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 54

यानि चान्यानि भूतानि तेषामन्ते भवेच्च किम् ।पापिनो ये दुराचारा ये चान्ये गतबुद्धयः

yāni cānyāni bhūtāni teṣāmante bhavecca kim / pāpino ye durācārā ye cānye gatabuddhayaḥ

हिन्दी अर्थ

हे वैनतेय! इस संसारमें पुत्रहीन व्यक्तिकी गति होनेपर गर्भधारण सम्भव नहीं है, वैसे ही शवभूमि . जर नहीं है, उसको स्वर्ग प्राप्त नहीं होता है । अतः भी तिल-कुश आदिके बिना जीवकी शुभ योनिमें . र

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 55

आत्मघाती ब्रह्महा च स्तेयी विश्वासघातकः ।कपिलायाः पिबेच्छूद्रो यः पठेदिदमक्षरम्

ātmaghātī brahmahā ca steyī viśvāsaghātakaḥ / kapilāyāḥ pibecchūdro yaḥ paṭhedidamakṣaram

हिन्दी अर्थ

कारण नहीं बन पाती । इसीलिये श्रद्धापूर्वक तिल, प्राण-त्याग करनेपर वह चाहे बालक हो, चाहे वृद्ध कुश, पञ्चरल आदिका यथाविधान विनियोग हो और चाहे जवान हो, उसको अन्य योनि नहीं आवश्यक है। प्राप्त होती है । है तार्क्र्य। उसकी जीवात्मा वायुके गोबरसे भूमिको सबसे पहले लीपना चाहिए, साथ भटकती रहती है। उस प्रकारकी वायुभूत

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 56

धारयेद्ब्रह्मसूत्रं वा का गतिस्तस्य माधव ।शूद्रस्य ब्राह्मणी भार्या संगृहीता यदा भवेत्

dhārayedbrahmasūtraṃ vā kā gatistasya mādhava / śūdrasya brāhmaṇī bhāryā saṃgṛhītā yadā bhavet

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर उसके ऊपर तिल और कुश बिछाना जीवात्माके लिये न तो श्राद्धका विधान है और न चाहिए। उसके बाद आतुर व्यक्तिको भूमिपरतो जलतर्पणकी क्रिया ही बतायी गयी है। कुशासनके ऊपर सुला देना चाहिए। ऐसा करनेसे है गरुड! तिल मेरे पसीनेसे उत्पन्न हुए हैं। वह प्राणी अपने समस्त पापोंको जला कर पापमुक्त अत: तिल बहुत ही पवित्र हैं। तिलका प्रयोग

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 57

भीतो ऽहं पापिनस्तस्मात्तन्मे वद जगत्प्रभो ।अन्यच्च शृणु विश्वात्मन्मया कौतुकिना रयात्

bhīto 'haṃ pāpinastasmāttanme vada jagatprabho / anyacca śṛṇu viśvātmanmayā kautukinā rayāt

हिन्दी अर्थ

हो जाता है। शवके नीचे निछाये गये कुशसमूह करनेपर असुर, दानव और हैत्य भाग जाते हैं। निश्चित ही मृत्युग्रस्त प्राणीको स्वर्ग ले जाते हैं, तिल श्वेत, कृष्ण और गोमूत्रवर्णके समान होते हैं। इसमें संशय नहीं है । जहाँ पृथ्वीपर मल-मूत्रादिका ' वे मेरे शरीरके द्वारा किये गये समस्त पापोंको नष्ट लेप (सम्बन्ध) नहीं है वहाँ वह सदा पवित्र है करें।' ऐसी भावना करनी चाहिए। एक ही

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 58

लोकांल्लोकयता लोके जगाहे विश्वमण्डलम् ।तत्राजनि जनान्दृष्ट्वा दुः खेष्वेव निमज्जतः

lokāṃllokayatā loke jagāhe viśvamaṇḍalam / tatrājani janāndṛṣṭvā duḥ kheṣveva nimajjataḥ

हिन्दी अर्थ

और जहाँ (मल-मूत्रादिका) लेप (सम्बन्ध) है, तिलका दान स्वर्णके बत्तीस सेर तिलके दानके वहाँ (मल-मूत्रादिका अपसारण करके) गोमयसे समान है। तर्पण, दान एवं होममें दिया गया लेप करनेपर वह शुद्ध होती है। गोबरसे बिना तिलका दान अक्षय होता है। कुश मेरे शरीरके लिपी हुई भूमिपर सुलाये गये मरणासन्न व्यक्तिमें रोमोंसे उत्पन्न हुए हैं और तिलकी उत्पत्ति मेरे

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 59

स्वान्ते मे दुर्धरा पीडा तत्पीडातो गरीयसी ।त्रिदिवे दितिजातेभ्यो भूमौ मृत्युरुगादिभिः

svānte me durdharā pīḍā tatpīḍāto garīyasī / tridive ditijātebhyo bhūmau mṛtyurugādibhiḥ

हिन्दी अर्थ

यक्ष, पिशाच एवं राक्षस-कोटिके क्रूरकर्मी दुष्ट पसीनेसे हुई है। इसीलिये देवताओंकी तृप्तिके लोग प्रविष्ट हो जाते हैं। मरणासन्नकी मुक्तिके लिये मुख्यरूपसे कुशकी और पितरोंकी तृप्तिके लिये उसे जलसे बनाये गये मण्डलवाली भूमिपर लिये तिलकी आवश्यकता होती है। देवताओं ही सुलाना चाहिए, क्योंकि नित्य-होम, श्राद्ध, और पितरोंकी तृप्ति विश्वके लिये उपजीव्य

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 60

इष्टवस्तुवियो गैश्च पाताले मामकं भयम् ।एवं न निर्भयं स्थानमन्यदीश भवत्पदात्

iṣṭavastuviyo gaiśca pātāle māmakaṃ bhayam / evaṃ na nirbhayaṃ sthānamanyadīśa bhavatpadāt

हिन्दी अर्थ

मण्डलीकरण मुक्तिके हेतु माने गये हैं। बिना अत: अपसव्य आदि श्राद्धकी जो विधियाँ बतायी लिपी-पुती मण्डलहीन भूमिपर मरणासन्न व्यक्तिको गयी हैं, उन्हीं विधियोंके अनुसार मनुष्यको ब्रह्मा, नहीं सुलाना चाहिए। भूमिपर बनाये गये ऐसे देवदेवेश्वर तथा पितृजनोंको संतृप्त करना चाहिए। मण्डल में ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, लक्ष्मी तथा अग्नि अपसव्य आदि होकर तिलका उपयोग करनेसे

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 61

असत्यं स्वप्नमायावत्कालेन कवलीकृतम् ।तत्रापि भारते वर्षे बहुदुः खस्य भागिनः

asatyaṃ svapnamāyāvatkālena kavalīkṛtam / tatrāpi bhārate varṣe bahuduḥ khasya bhāginaḥ

हिन्दी अर्थ

आदि देवता विराजमान हो जाते हैं, अत: मण्डलका ब्रह्मा, पितर और देवेश्वर तृप्त होते हैं। अपसव्य निर्माण अवश्य करना चाहिए। मण्डलविहीन भूमिपर होकर कर्म करनेसे पितरोंकी संतृप्ति होती हैं । १-यहाँ मण्डलका तात्पर्य है--जलसे प्रोक्षणके बाद जलसे गोलाकार रेखा बना देना और चौक आदि पूरना। २-मम स्वेदसमुद्भूतास्तिलास्ताक्ष्य पवित्रका:। असुरा दानवा हैत्या विद्रवन्ति तिलैस्तथा॥

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 62

जना दृष्टा मया रागद्वेषमोहादिविप्लुताः ।केचिदन्धाः केकराक्षास्खलद्वाचस्तु पङ्गवः

janā dṛṣṭā mayā rāgadveṣamohādiviplutāḥ / kecidandhāḥ kekarākṣāskhaladvācastu paṅgavaḥ

हिन्दी अर्थ

तिला: श्वेतास्तिला कृष्णास्तिला गोमूत्रसंनिभाः । दहन्तु ते मे पापानि शरीरेण कृतानि वै॥

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 63

खञ्जाः काणाश्च बधिरा मूकाः कुष्ठाश्च लोमशाः ।नानारोगपरीताश्च खपुष्पाच्चाभिमानिनः

khañjāḥ kāṇāśca badhirā mūkāḥ kuṣṭhāśca lomaśāḥ / nānārogaparītāśca khapuṣpāccābhimāninaḥ

हिन्दी अर्थ

दर्भा रोमसमुद्ूतास्तिलाः स्वेदेषु नान्यथा । देवता दानवास्तृप्ताः श्राद्धेन पितरस्तथा ॥ प्रयोगविधिना ब्रह्मा विश्वं चाप्युपजीवनात्। अपसव्यादितो ब्रह्मा पितरो देवदेवताः ॥

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 64

तेषां दोषस्य वैचित्र्यं मृत्योर्गोचरतामपि ।दृष्ट्वा प्रसुमनाः प्राप्तः को मृत्युश्चित्रता कथम्

teṣāṃ doṣasya vaicitryaṃ mṛtyorgocaratāmapi / dṛṣṭvā prasumanāḥ prāptaḥ ko mṛtyuścitratā katham

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प मरणासन्न व्यक्तिके कल्याणके लिये किये जानेवाले कर्म ४५९

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 65

मृतिर्यस्य विधानेन मरणादप्यनन्तरम् ।विधिनाब्दक्रिया यस्य न स दुर्गतिमाप्नुयात्

mṛtiryasya vidhānena maraṇādapyanantaram / vidhinābdakriyā yasya na sa durgatimāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

कुशके मूलभागमें ब्रह्मा, मध्यभागमें विष्णु पायी हों, तब) भी विष्णुलोकको प्राप्त करता है । तथा अग्रभागमें शिवको जानना चाहिए; ये तीनों इस असार संसारसागरमें भूमिको गोबरसे लीपकर देव कुशमें प्रतिष्ठित माने गये हैं। है पक्षिराज! उसपर मृत मनुष्यको सुलानेसे और कुशासनपर ब्राह्मण, मन्त्र, कुश, अग्नि और तुलसी--ये बार- स्थित करनेसे तथा विशुद्ध अग्निमें दाह करनेसे

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 66

ऋषिभ्यस्तु मया पूर्वमिति सामान्यतः श्रुतम् ।ज्ञानाय तद्द्विशेषस्य पृच्छामीदमिति प्रभो

ṛṣibhyastu mayā pūrvamiti sāmānyataḥ śrutam / jñānāya taddviśeṣasya pṛcchāmīdamiti prabho

हिन्दी अर्थ

बार समर्पित होनेपर भी पर्युषित नहीं माने जाते, उसके समस्त पापोंका नाश हो जाता है । कभी निर्माल्य अर्थात् बासी नहीं होते। इनका लवण और उसका रस दिव्य (उत्तम लोकका पूजामें बारम्बार प्रयोग किया जा सकता है । है खगेन्द्र ! प्रापक) है, वह प्राणियोंकी समस्त कामनाओंको तुलसी, ब्राह्मण, गौ, विष्णु तथा एकादशीब्रत--ये सिद्ध करनेवाला है। लवणके बिना अन्न-रस

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 67

म्रियमाणस्य किं कृत्यं किं दानं वासवानुज ।वाहमृत्योरन्तराले को विधिर्दहनस्य च

mriyamāṇasya kiṃ kṛtyaṃ kiṃ dānaṃ vāsavānuja / vāhamṛtyorantarāle ko vidhirdahanasya ca

हिन्दी अर्थ

पाँचों संसारसागरमें डूबते हुए लोगोंको नौकाके उत्कट अर्थात् न अभिव्यक्त होते हैं और न सुस्वादु समान पार कराते हैं। है पक्षिश्रेष्ठ! विष्णु, एकादशीव्रत, होते हैं । इसीलिये लवण-रस पितरोंको प्रिय होता गीता, तुलसी, ब्राह्मण और गौ-ये छः इस है और स्वर्गको प्रदान करनेवाला है । यह लवण- असार-संसारमें लोगोंको मुक्ति प्रदान करनेके रस भगवान् विष्णुके शरीरसे उत्पन्न हुआ है। इस

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 68

सद्यो विलम्बतो वा किं देहमन्यं प्रपद्यते ।संयमन्यां क्रम्यमाणमावर्षं का मृतिक्रिया

sadyo vilambato vā kiṃ dehamanyaṃ prapadyate / saṃyamanyāṃ kramyamāṇamāvarṣaṃ kā mṛtikriyā

हिन्दी अर्थ

साधन हैं, यह षट्पदी कहलाती है-- बातको जाननेवाले योगीजन, लवणके साथ दान दर्भमूले स्थितो ब्रह्मा मध्ये देवो जनार्दन:॥ करनेको कहते हैं। इस पृथ्वीपर यदि ब्राह्मण, दर्भाग्रे शंकरं विद्यात् त्रयो देवाः कुशे स्मृताः। क्षत्रिय, वैश्य, स्त्री तथा शूद्र वर्णके आतुर व्यक्तिके विप्रा मन्त्राः कुशा वह्निस्तुलसी च खगेश्वर॥ प्राण न निकलते हों तो उसके लिये स्वर्गका द्वार

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 69

प्रायश्चित्तं दुर्मतेः किं पञ्चकादिमृतस्य च ।प्रसादं कुरु मे मोहं छेत्तुमर्हस्यशेषतः

prāyaścittaṃ durmateḥ kiṃ pañcakādimṛtasya ca / prasādaṃ kuru me mohaṃ chettumarhasyaśeṣataḥ

हिन्दी अर्थ

नैते निर्माल्यतां यान्ति क्रियमाणाः पुनः पुनः। खोलनेके लिये लवणका दान देना चाहिए। तुलसी ब्राह्मणा गावो विष्णुरेकादशी खग॥ है पक्षीन्द्र! अब मृत्युके स्वरूपको विस्तारपूर्वक पञ्च प्रवहणान्येव भवाब्धौ मज्जतां नृणाम्। सुनें। मृत्यु ही काल है, उसका समय आ जानेपर विष्णुरेकादशी गीता तुलसी विप्रधेनबः॥ जीवात्मासे प्राण और देहका वियोग हो जाता है।

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

अध्याय २४०

श्लोक 70

सर्वमन्तेमया पृष्टं ब्रूहि लोकहिताय वै

sarvamantemayā pṛṣṭaṃ brūhi lokahitāya vai

हिन्दी अर्थ

असारे दुर्गसंसारे षट्पदी मुक्तिदायिनी। मृत्यु अपने समयपर आती है। मृत्युकष्टके प्रभावसे (२। २१-२५) प्राणी अपने किये कर्माको एकदम भूल जाता है। जैसे तिलकी पवित्रता अतुलनीय होती है, है गरुड! जिस प्रकार वायु मेघमण्डलोंको इधर- उसी प्रकार कुश और तुलसी भी अत्यन्त पवित्र उधर खींचता है, उसी प्रकार प्राणी कालके वशमें

English

Used figuratively to denote nnythiog impossible.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 240
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.