Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 241 / 317

Book 2 - Adhyaya 2

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अध्याय २४१

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे उत्तरखण्डे द्वितीयांशाख्ये धर्मकाण्डे (प्रेतखण्डे) श्रीकृष्णगरुडसंवादे प्रश्रप्रपञ्चो नाम प्रथमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २ श्रीकृष्ण उवाच ।साधु पृष्टं त्वया भद्र मानुषाणां हिताय वै ।शृणुष्वावहितो भूत्वा सर्वमेवौर्ध्वदैहिकम्

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe uttarakhaṇḍe dvitīyāṃśākhye dharmakāṇḍe (pretakhaṇḍe) śrīkṛṣṇagaruḍasaṃvāde praśraprapañco nāma prathamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 2 śrīkṛṣṇa uvāca / sādhu pṛṣṭaṃ tvayā bhadra mānuṣāṇāṃ hitāya vai / śṛṇuṣvāvahito bhūtvā sarvamevaurdhvadaihikam

हिन्दी अर्थ

होते हैं। ये तीनों पदार्थ मरणासन्न व्यक्तिको रहता है। सात्त्विक, राजस और तामस-ये सभी दुर्गतिसे उबार लेते हैं दोनों हाथोंसे कुश उखाड़ना भाव कालके वशमें हैं। प्राणियोंमें वे कालके चाहिए और उसे पृथ्वीपर रखकर जलसे प्रोक्षित अनुसार अपने-अपने प्रभावका विस्तार करते हैं। करना चाहिए तथा मृत्युकालमें मरणासन्नके दोनों है सर्पहन्ता गरुड! सूर्य,चन्द्र, शिव, वायु, इन्द्र,

English

O gentle one, you have put up the right question, that too for the general good of the people. Now hear atten* tively. [ shall tell you about the rite to be performed after death.

अध्याय २४१

श्लोक 2

सम्यग्विभेदरहितं श्रुतिस्मृतिसमुद्धृतम् ।यन्न दृष्टं सुरैः सेन्द्रैर्योगिभिर्योगचिन्तकैः

samyagvibhedarahitaṃ śrutismṛtisamuddhṛtam / yanna dṛṣṭaṃ suraiḥ sendrairyogibhiryogacintakaiḥ

हिन्दी अर्थ

हाथोंमें रखना चाहिए। जिसके हाथोंमें कुशाएँ हैं अग्नि, आकाश, पृथ्वी, मित्र, औषधि, आठौं वसु, और जो कुशसे परिवेष्टित कर दिया जाता है, वह नदी, सागर और भाव-अभाव-ये सभी कालके

English

O Garua of great accomplishment, I shall tell you about this since you are my devotee.

अध्याय २४१

श्लोक 3

गुह्यद्गुह्यतरं तच्च नाख्यातं कस्यचित्क्वचित् ।भक्तस्त्वं हि महाभाग वैनतेयं ब्रवीमि ते

guhyadguhyataraṃ tacca nākhyātaṃ kasyacitkvacit / bhaktastvaṃ hi mahābhāga vainateyaṃ bravīmi te

हिन्दी अर्थ

हैं और मृत्युके उपस्थित होनेपर कालके प्रभावसे सदाचारी और सौम्य हो, वे सब निश्चित ही विनष्ट हो जाते हैं । सुखपूर्वक मरते हैं ।

English

The son can take his father out of hell, if he cannot get him salvation. The son puts hu shoulder to coffin and tht grandson lights the fire.

अध्याय २४१

श्लोक 4

अपुत्रस्य गतिर्नास्तु स्वर्गो नैव च नैव च ।येन केनाप्युपायेन कार्यं जन्म सुतस्य हि

aputrasya gatirnāstu svargo naiva ca naiva ca / yena kenāpyupāyena kāryaṃ janma sutasya hi

हिन्दी अर्थ

हे पक्षिन्! जब मृत्यु आ जाती है तो उसके जो लोग मोह और अज्ञानका उपदेश देते हैं कुछ समय पूर्व हैवयोगसे कोई रोग प्राणीके वे मृत्युके समय महान्धकारमें फँस जाते हैं। जो शरीरमें उत्पन्न हो जाता है । इन्द्रियाँ विकल हो झूठी गवाही देनेवाले, असत्यभाषी, विश्वासघाती जाती हैं और बल, ओज तथा वेग शिथिल हो और वेदनिन्दक हैं, वे मूर्च्छारूपी मृत्युको प्राप्त

English

A woman in her menses shall stay in the hut anc lie on the bed bestrewed with sesame and darbha grass, on the ground. She shall put five gems in the mouth. Thus her foetu* attains growth.

अध्याय २४१

श्लोक 5

तारयेन्नरकात्पुत्त्रो यदि मोक्षो न विद्यते ।स्कन्धः पुत्रेण कर्तव्यो ह्यग्निदाता च पौत्रकः

tārayennarakātputtro yadi mokṣo na vidyate / skandhaḥ putreṇa kartavyo hyagnidātā ca pautrakaḥ

हिन्दी अर्थ

जाता है। है खग! प्राणियोंको करोड़ों बिच्छुओंके करते हैं। उनको ले जानेके लिये लाठी एवं मुद्वरसे एक साथ काटनेका जो अनुभव होता है, उससे युक्त दुर्गन्धसे भरपूर एवं भयभीत करनेवाले दुरात्मा मृत्युजनित पीड़ाका अनुमान करना चाहिए। उसके यमदूत आते हैं। ऐसी भयंकर परिस्थिति देखकर

English

A bunch of darbha for his bed takes him to heaven no doubt. Darbha should be thrown off after the corpse is removed from the place.

अध्याय २४१

श्लोक 6

तिलदर्भैश्च भूम्यां वै कुटी ऋतुमती भवेत् ।पञ्च रत्नानि वक्त्रे तु येन जीवः प्ररोहति

tiladarbhaiśca bhūmyāṃ vai kuṭī ṛtumatī bhavet / pañca ratnāni vaktre tu yena jīvaḥ prarohati

हिन्दी अर्थ

बाद ही चेतनता समाप्त हो जाती है, जड़ता आ जाती है। तदनन्तर यमदूत उसके समीप आकर खड़े हो जाते हैं और उसके प्राणोंको बलात् अपनी ओर खींचना शुरू कर देते हैं। उस समय प्राण

English

A circle should be drawn around the corpse (to fix up the circumference); riddha shall be performed where the feet of the Brahmanas should be washed. All these would not serve the corpse, if the same is not placed on the ground.

अध्याय २४१

श्लोक 7

यदा पुष्पं प्रनष्टं हि क्व तदा गर्भधारणम् ।आदराच्च ततो भूमौ येन गर्भं प्रधार्यते

yadā puṣpaṃ pranaṣṭaṃ hi kva tadā garbhadhāraṇam / ādarācca tato bhūmau yena garbhaṃ pradhāryate

हिन्दी अर्थ

कण्ठमें आ जाते हैं। मृत्युके पूर्व मृतकका रूप बीभत्स हो उठता है। वह फेन उगलने लगता है। उसका मुँह लारसे भर जाता है। उसके बाद शरीरके भीतर विद्यमान रहनेवाला वह अङ्गुष्-

English

Brahma, Vifnu, Rudra, Lakml and Fire stay within the circle. Hence a circle is drawn around the corpse.

अध्याय २४१

श्लोक 8

लेप्या तु गोमयैर्भूमिस्तिलान्दर्भान्विनिः क्षिपेत् ।तस्यामेवातुरो मुक्तः सर्वं दहति किल्बिषम्

lepyā tu gomayairbhūmistilāndarbhānviniḥ kṣipet / tasyāmevāturo muktaḥ sarvaṃ dahati kilbiṣam

हिन्दी अर्थ

परिमाणका पुरुष हाहाकार करता हुआ तथा अपने घरको देखता हुआ यमदूतोंके द्वारा यमलोक ले जाया जाता है।

English

He may not be bom soon but live in the air for some time. He receives no irliddha no libation of water from his relatives.

अध्याय २४१

श्लोक 9

दर्भतूली नयेत्स्वर्गमातुरस्य न संशयः ।दर्भांस्तत्र क्षिपेद्वाथ तूलीगेन्दुकमध्यतः

darbhatūlī nayetsvargamāturasya na saṃśayaḥ / darbhāṃstatra kṣipedvātha tūlīgendukamadhyataḥ

हिन्दी अर्थ

मृत्युके समय शरीरमें प्रवाहित वायु प्रकुपित होकर तीव्र गतिको प्राप्त करता है और उसीकी शक्तिसे अग्नितत्त्व भी प्रकुपित हो उठता है। बिना ईधनके प्रदीप्त ऊष्मा प्राणीके मर्मस्थानोंका भेदन

English

A single grain of sesame offered with the libation of water to the deceased or an article given in charity or a sacrifice held for his welfare becomes fruitful as drona-kalaia does in rewards.

अध्याय २४१

श्लोक 10

सर्वत्र वसुधापूता यत्र लेपो न विद्यते ।यत्र लेपः स्थितस्तत्र पुनर्लेपेन शुध्यति

sarvatra vasudhāpūtā yatra lepo na vidyate / yatra lepaḥ sthitastatra punarlepena śudhyati

हिन्दी अर्थ

करने लगती है, जिसके कारण प्राणीको अत्यन्त कष्टकी अनुभूति होती है। परंतु भक्तजनों एवं भोगमें अनासक्त जनोंकी अधोगतिका निरोध करनेवाला उदान नामक वायु ऊर्ध्वगतिवाला हो

English

Darbhas are bom from my hair and sesame from my perspiration. By performing hiddha one can please deities, asuras and the manes.

अध्याय २४१

श्लोक 11

यातुधानाः पिशाचाश्च राक्षसाः क्रूरकर्मिणः ।अलेपं ह्यातुरं मुक्तं विशन्त्येते वियोनयः

yātudhānāḥ piśācāśca rākṣasāḥ krūrakarmiṇaḥ / alepaṃ hyāturaṃ muktaṃ viśantyete viyonayaḥ

हिन्दी अर्थ

जो लोग झूठ नहीं बोलते, जो प्रीतिका भेदन नहीं करते, आस्तिक और श्रद्धावान् हैं, उन्हें सुखपूर्वक मृत्यु प्राप्त होती है। जो काम, ईर्ष्या और द्वेषके कारण स्वधर्मका परित्याग न करे,

English

The Universe and the creator of the universe live by the ceremonial form. By wearing the secred thread over the right shoulder, one can please the creator, the manes and the deities.

अध्याय २४१

श्लोक 12

नित्यहोमस्तथा श्राद्धं पादशौचं द्विजे तथा ।मण्डलेन विना भूम्यामातुरो मुच्यते न हि

nityahomastathā śrāddhaṃ pādaśaucaṃ dvije tathā / maṇḍalena vinā bhūmyāmāturo mucyate na hi

हिन्दी अर्थ

उस समय वह अपनी रक्षाके लिये अनवरत माता- पिता और पुत्रको यादकर करुण-क्रन्दन करता है। उस क्षण प्रयास करनेपर भी ऐसे जीवके कण्ठसे एक शब्द भी स्पष्ट नहीं निकलता। भयवश

English

A kind of s mystical ditfram.

अध्याय २४१

श्लोक 13

ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च श्रीर्हुताशस्तथैव च ।मण्डले चोपतिष्ठन्ति तस्मात्कुर्वीत मण्डलम्

brahmā viṣṇuśca rudraśca śrīrhutāśastathaiva ca / maṇḍale copatiṣṭhanti tasmātkurvīta maṇḍalam

हिन्दी अर्थ

प्राणीकी आँखें नाचने लगती हैं । उसकी साँस बढ़ जाती है और मुँह सूखने लगता है। उसके बाद वेदनासे आविष्ट होकर वह अपने शरीरका परित्याग करता है और उसके बाद ही वह सबके लिये

English

Form of estistcace.

अध्याय २४१

श्लोक 14

अन्यथा म्रियते वालो वृद्धस्तार्क्ष्ययुवाथवा ।योन्यन्तरं न गच्छेत्स क्रीडते वायुना सह

anyathā mriyate vālo vṛddhastārkṣyayuvāthavā / yonyantaraṃ na gacchetsa krīḍate vāyunā saha

हिन्दी अर्थ

अस्पृश्य एवं घृणायोग्य हो जाता है।

English

These five are the protection boats for the people drowning in the ocean of worldly existence. Visnu, Ekadai, Gita, Tulasi, Brahma, and the Cow—

अध्याय २४१

श्लोक 15

मिश्रितं लोहितामिश्रं तदेवं जन्म जीयते ।तस्यैव वायुभूतस्य न श्राद्धं नोदकक्रिया

miśritaṃ lohitāmiśraṃ tadevaṃ janma jīyate / tasyaiva vāyubhūtasya na śrāddhaṃ nodakakriyā

हिन्दी अर्थ

हे गरुड! इस प्रकार मैंने यथाप्रसंग मृत्युका

English

These are the six steps to salvation in this universal fortress of little use. Sesame and darbhas are sacred and so is Tulasi.

अध्याय २४१

श्लोक 16

मम स्वेदसमुद्भूतास्तिलास्तार्क्ष्य पवित्रकाः ।असुरा दानवा दैत्या विद्रवन्ति तिलैस्तथा

mama svedasamudbhūtāstilāstārkṣya pavitrakāḥ / asurā dānavā daityā vidravanti tilaistathā

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प मरणासन्न व्यक्तिके कल्याणके लिये किये जानेवाले कर्म ४५३

English

These guard the deceased against misfortune. Darbhas should be taken out with hands. The earth should be sprinkled over with water.

अध्याय २४१

श्लोक 17

तिलाः श्वेतास्तिला कृष्णास्तिला गोमूत्रसंन्निभाः ।दहन्तु ते मे पापानि शरीरेण कृतानि वै

tilāḥ śvetāstilā kṛṣṇāstilā gomūtrasaṃnnibhāḥ / dahantu te me pāpāni śarīreṇa kṛtāni vai

हिन्दी अर्थ

स्वरूप सुना दिया । अब आपके उस दूसरे प्रश्नका और ब्राह्मणका धन चुरानेसे मनुष्यको दूसरे जन्ममें उत्तर जो बड़ा ही विचित्र है, उसे सुना रहा हूँ । अरण्य तथा निर्जन देशमें रहनेवाले ब्रह्मराक्षसकी हे पक्षिराज! पूर्वजन्ममें किये गये भाँति-भाँतिके योनि प्राप्त होती है। रत्नकी चोरी करनेवाला भोगोंको भोगता हुआ प्राणी यहाँ भ्रमण करता निकृष्ट योनिमें जन्म लेता है। जो मनुष्य वृक्षके

English

As the hour of death approacheSi darbhas should be placed in the hands of the deceased. He whose body is spread over by darbhas goes toVi8Qu*Ioka> no matter if he is not initiated in the Vedic lore.

अध्याय २४१

श्लोक 18

एक एव तिलो दत्तो हेमद्रोणतिलैः समः ।तर्पणे दानहोमेषु दत्तो भवति चाक्षयः

eka eva tilo datto hemadroṇatilaiḥ samaḥ / tarpaṇe dānahomeṣu datto bhavati cākṣayaḥ

हिन्दी अर्थ

रहता है । देव, असुर और यक्ष आदि योनियाँ भी पत्तोंकी और गन्धकी चोरी करता है, उसे छछुंदरकी प्राणीके लिये सुखप्रदायिनी हैं । मनुष्य, पशु-पक्षी योनिमें जाना पड़ता है । धान्यकी चोरी करनेवाला आदि योनियाँ अत्यन्त दुःखदायिनी हैं । है खगेश्वर! चूहा, यान चुरानेवाला ऊँट तथा फलकी चोरी प्राणीको कर्मका फल तारतम्यसे इन योनियोंमें करनेवाला बंदरकी योनिमें जाता है । बिना मन्त्रोच्वारके

English

Salt has come out from the body of Viu, hence yogins recommend a gift of salt placing the same over other gifts.

अध्याय २४१

श्लोक 19

दर्भा रोमसमुद्भूतास्तिलाः स्वेदेषु नान्यथा ।देवता दानवास्तृप्ताः श्राद्धेन पितरस्तथा

darbhā romasamudbhūtāstilāḥ svedeṣu nānyathā / devatā dānavāstṛptāḥ śrāddhena pitarastathā

हिन्दी अर्थ

प्राप्त होता है। अब मैं इसी प्रसंगमें आपसे भोजन करनेपर कौआ, घरका सामान चुरानेवाला कर्मविपाकका वर्णन भी करूँगा। गिद्ध, मधुको चोरी करनेपर मधुमक्खी, फलकी

English

Just as the wind scatters clouds here and there, just like that Kala> the Destroyer, floats people from one end of the shore to another.

अध्याय २४१

श्लोक 20

प्रयोगविधिना ब्रह्मा विश्वं चाप्युपजीवनाम् ।अपसव्यादितो ब्रह्मा पितरो देवदेवताः

prayogavidhinā brahmā viśvaṃ cāpyupajīvanām / apasavyādito brahmā pitaro devadevatāḥ

हिन्दी अर्थ

हे गरुड! प्राणी अपने सत्कर्म एवं दुष्कर्मके चोरी करनेपर गिद्ध, गायकी चोरी करनेपर गोह फलोंको विविधताका अनुभव करनेके लिये इस और अग्निकी चोरी करनेपर बगुलेकी योनि प्राप्त संसारमें जन्म लेता है । जो महापातकी ब्रह्महत्यादि होती है । स्त्रियोंका वस्त्र चुरानेपर श्वेत कुष्ठ और महापातकजन्य अत्यन्त कष्टकारी रौरवादिरसका अपहरण करनेपर भोजन आदिमें अरुचि हो

English

Whether they be sattvika or rajasa or tamasa—all these bhdvas operate in man due to the influence of Kala.

अध्याय २४१

श्लोक 21

तेन ते पितरस्तृप्ता अपसव्ये कृते सति ।दर्भमूले स्थितो ब्रह्मा मध्ये देवो जनार्दनः

tena te pitarastṛptā apasavye kṛte sati / darbhamūle sthito brahmā madhye devo janārdanaḥ

हिन्दी अर्थ

नरकलोकोंका भोग भोगकर कर्मक्षयके बाद पुनः जाती है। काँसेकी चोरी करनेवाला हंस, दूसरेके इस पृथ्वीपर जिन लक्षणोंसे युक्त होकर जन्म धनका हरण करनेवाला अपस्मार रोगसे ग्रस्त होता लेते हैं, उन लक्षणोंको आप मुझसे सुनें। है तथा गुरुहन्ता क्रूरकर्मा बौना और धर्मपल्रीका

English

Indeed, O Garua, when the hour of death appro¬ aches, then by chance, a certain disease'raises up its head.

अध्याय २४१

श्लोक 22

दर्भाग्रे शङ्करं विद्यात्त्रयो देवाः कुशे स्मृताः ।विप्रा मन्त्राः कशा वह्निस्तुलसी च खगेश्वर

darbhāgre śaṅkaraṃ vidyāttrayo devāḥ kuśe smṛtāḥ / viprā mantrāḥ kaśā vahnistulasī ca khageśvara

हिन्दी अर्थ

हे खगेन्द्र! ब्राह्मणकी हत्या करनेवाले परित्याग करनेवाला शब्दवेधी होता है । देवता और महापातकीको मृग, अश्व, सूकर और ऊँटकी ब्राह्मणके धनका अपहरण करनेवाला, दूसरेका योनि प्राप्त होती है। स्वर्णकी चोरी करनेवाला मांस खानेवाला पाण्डुरोगी होता है। भक्ष्य और कृमि, कीट और पतंग-योनिमें जाता है, गुरुपत्रीके अभक्ष्यका विचार न रखनेवाला अगले जन्ममें

English

The Organs grow weak. Troubles start showing their powers, as if all of a sudden, millions of scorpions have stung the person.

अध्याय २४१

श्लोक 23

नैते निर्माल्यतां यान्ति क्रियमाणाः पुनः पुनः ।तुलसी ब्राह्मणा गावो विष्णुरेकादशी खग

naite nirmālyatāṃ yānti kriyamāṇāḥ punaḥ punaḥ / tulasī brāhmaṇā gāvo viṣṇurekādaśī khaga

हिन्दी अर्थ

साथ सहवास करनेवालेका जन्म क्रमशः-तृण, गण्डमाला नामक महारोगसे पीडित होता है। जो लता और गुल्म-योनिमें होता है । ब्रह्मघाती क्षयरोगका दूसरेकी धरोहरका अपहरण करता है, वह काना रोगी, मद्यपी विकृतदन्त, स्वर्णचोर कुनखी और होता है। जो स्त्रीक बलपर इस संसारमें जीवन- गुरुपल्लीगामी चर्मरोगी होता है। जो मनुष्य जिस यापन करता है, वह दूसरे जन्ममें लँगड़ा होता है ।

English

O bird, then the person begins to feel the peng of death. At the very hour his consciousness is replaced by un¬ consciousness.

अध्याय २४१

श्लोक 24

पञ्च प्रवहणान्ये भवाब्धौ मज्जतां नृणाम् ।विष्णुरेकादशी गीता तुलसी विप्रधेनवः

pañca pravahaṇānye bhavābdhau majjatāṃ nṛṇām / viṣṇurekādaśī gītā tulasī vipradhenavaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकारके महापातकियोंका साथ करता है, उसे भी जो मनुष्य पतिपरायणा अपनी पत्नीका परित्याग उसी प्रकारका रोग होता है। प्राणी एक वर्षपर्यन्त करता है, वह दूसरे जन्ममें दुर्भाग्यशाली होता है। पतित व्यक्तिका साथ करनेसे स्वयं पतित हो जाता अकेला मिष्टान्न खानेवाला वातगुल्मका रोगी होता है। परस्पर वार्तालाप करने तथा स्पर्श, निःश्वास, है। कोई व्यक्ति यदि किसी व्राह्मणपत्रीके साथ

English

The Udana-wind moves upward. It stops the down¬ ward movement of the deceased who in his life-time had full devotion for the lord but no desire in return.

अध्याय २४१

श्लोक 25

असारे दुर्गसंसारे षट्पदी मुक्तिदायिनी ।तिलाः पवित्रमतुलं दर्भाश्चापि तुलस्यथ

asāre durgasaṃsāre ṣaṭpadī muktidāyinī / tilāḥ pavitramatulaṃ darbhāścāpi tulasyatha

हिन्दी अर्थ

सहयान, सहभोज, सहआसन, याजन, अध्यापन सहवास करे तो श्र॒गाल, शय्याका हरण करनेवाला तथा योनि-सम्बन्धसे मनुष्योंके शरीरमें पाप संक्रमित दरिद्र, वस्त्रका हरण करनेवाला पतंग होता है। हो जाते हैं । दूसरेकी स्त्रीक साथ सहवास करने मात्सर्य-दोषसे युक्त होनेपर प्राणी जन्मान्ध, दीपक

English

He who has never spoken fabehood, nor has any partiality in devotion but believes in God, obtains death peacefully.

अध्याय २४१

श्लोक 26

निवारयन्ति चैतानि दुर्गतिं यान्तमातुरम् ।हस्ताभ्यामुद्धरेद्दर्भांस्तोयेन प्रोक्षयेद्भुवि

nivārayanti caitāni durgatiṃ yāntamāturam / hastābhyāmuddhareddarbhāṃstoyena prokṣayedbhuvi

हिन्दी अर्थ

संलापस्पर्शनिः श्वाससहयानाशनासनात्। याजनाध्यापनाद्यौनात् पापं संक्रमते नृणाम्॥ (२।६५)

English

He who does not stray fromDharma, due to pleasure, wrath or envy but does what he says and is gentle obtains death peacefully.

अध्याय २४१

श्लोक 27

मृत्युकाले क्षिपेद्दर्भान्करयोरातुरस्य च ।दर्भैस्तु क्षिप्यते यो ऽसौ दर्भैस्तु परिवेष्टितः

mṛtyukāle kṣipeddarbhānkarayorāturasya ca / darbhaistu kṣipyate yo 'sau darbhaistu pariveṣṭitaḥ

हिन्दी अर्थ

किये हुए अशुभ कर्माका फल

English

He cfies for his father, mother and sons. His indis* tinct voice, spoken with effort, appears to be single-lettered.

अध्याय २४१

श्लोक 28

विष्णुलोके स वै याति मन्त्रहीनो ऽपि मानवः ।तूलीं कृत्वा कृतौ पादौ संस्थितौ क्षितिपृष्ठतः

viṣṇuloke sa vai yāti mantrahīno 'pi mānavaḥ / tūlīṃ kṛtvā kṛtau pādau saṃsthitau kṣitipṛṣṭhataḥ

हिन्दी अर्थ

मरणासन्न व्यक्तिके कल्याणके लिये किये जानेवाले कर्म

English

Due to terrible suffering his looks waver and his mouth gets dry due to hard breath. Then wrapped up in suffering, the Jiva departs from the body.

अध्याय २४१

श्लोक 29

प्रायाश्चित्तं विशुद्धाग्नौ संसारे ऽसारसागरे ।गोमयेनोपलिम्पेत्तु दर्भास्तरणसंस्थिते

prāyāścittaṃ viśuddhāgnau saṃsāre 'sārasāgare / gomayenopalimpettu darbhāstaraṇasaṃsthite

हिन्दी अर्थ

चुरानेवाला कपाली होता है । मित्रकी हत्या करनेवाला हैं, उन्हें सियारकी योनि प्राप्त होती है। झूठी

English

Since that very moment the body becomes untouch¬ able and despicable.

अध्याय २४१

श्लोक 30

यने दत्तेन दानेन सर्वं पापं व्यपोहति ।लवणं तद्रसं दिव्यं सर्वकामप्रदं नृणाम्

yane dattena dānena sarvaṃ pāpaṃ vyapohati / lavaṇaṃ tadrasaṃ divyaṃ sarvakāmapradaṃ nṛṇām

हिन्दी अर्थ

उल्लू होता है। पिता आदि श्रेष्ठ जनोंकी निन्दा करनेसे प्राणी क्षयका रोगी होता है। असत्यवादी हकला कर बोलनेवाला और झूठी गवाही देनेवाला जलोदर-रोगसे पीडित रहता है।

English

Now I shall answer your query about the peculiari¬ ties of form the body takes in different births.

अध्याय २४१

श्लोक 31

यस्मादन्नरसाः सर्वे नोत्कटा लवणं विना ।पितॄणां च प्रियं भव्यं तस्मात्स्वर्गप्रदं भवेत्

yasmādannarasāḥ sarve notkaṭā lavaṇaṃ vinā / pitṝṇāṃ ca priyaṃ bhavyaṃ tasmātsvargapradaṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

विवाहमें विघ्न पैदा करनेवाला पापी मच्छरकी योनिमें जाता है । यदि कदाचित् उसे पुनः मनुष्यको योनि प्राप्त भी होती है तो उसका ओठ कटा होता है। जो मनुष्य चतुष्पथपर मल-मूत्रका परित्याग

English

Now, I shall tell you about the results of actions which a person obtains, so that the strangeness involved is explained clearly.

अध्याय २४१

श्लोक 32

विष्णुदेहसमुद्भूतो यतो ऽयं लवणो रसः ।एतत्सलवणं दानं तेन शंसन्ति योगिनः

viṣṇudehasamudbhūto yato 'yaṃ lavaṇo rasaḥ / etatsalavaṇaṃ dānaṃ tena śaṃsanti yoginaḥ

हिन्दी अर्थ

करता है, वह वृषल ( अपशूद्र) होता है । कन्याको दूषित करनेवाले प्राणीको मूत्रकृच्छु और नपुंसकताका विकार होता है। जो वेद बेचनेका अधर्म करता है, वह व्याघ्र होता है। अयाज्यका यज्ञ करानेवालेको

English

When the sinners have exhausted the fruits of their actions in dreadful hells, they are born on the earth.

अध्याय २४१

श्लोक 33

ब्राह्मणक्षत्त्रियविशां स्त्रीणां शूद्रजनस्य च ।आतुरस्य यदा प्राणा न यान्ति वसुधातले

brāhmaṇakṣattriyaviśāṃ strīṇāṃ śūdrajanasya ca / āturasya yadā prāṇā na yānti vasudhātale

हिन्दी अर्थ

सुअरको योनि प्राप्त होती है। अभक्ष्य-भक्षण करनेवाला व्यक्ति बिलौटा और वनोंको जलानेवाला खद्योत (जुगनू) होता है। बासी एवं निषिद्ध भोजन करनेवालेको कृमि तथा मात्सर्य-दोषसे युक्त प्राणीको

English

Now, hear about their characteristics. The killer of a brahmana attains the form of a deer, horse, pig or camel.

अध्याय २४१

श्लोक 34

लवणं तु तदा देयं द्वारस्योद्वाटनं दिवः ।अन्यच्च शृणु पक्षीन्द्र मृत्यो रूपं प्रपञ्चतः

lavaṇaṃ tu tadā deyaṃ dvārasyodvāṭanaṃ divaḥ / anyacca śṛṇu pakṣīndra mṛtyo rūpaṃ prapañcataḥ

हिन्दी अर्थ

भ्रमरको योनि मिलती है। घर आदिमें आग लगानेवाला कोढ़ी और अदत्तका आदान करनेसे मनुष्य बैल होता है। गायोंकी चोरी करनेपर सर्प तथा अन्नकी चोरी करनेपर प्राणीको अजीर्ण रोग

English

The stealer of gold becomes a worm or a germ or a fly. He who lies on the bed of a teacher becomes grass, plant or vine.

अध्याय २४१

श्लोक 35

यस्य कालेन नो यायाद्वियोगः प्राणदेहयोः ।प्राणिनश्च स्वसमये मृत्युरत्यन्तविस्मृतिः

yasya kālena no yāyādviyogaḥ prāṇadehayoḥ / prāṇinaśca svasamaye mṛtyuratyantavismṛtiḥ

हिन्दी अर्थ

होता है। जलकी चोरी करनेपर मछली, दूधकी चोरी करनेसे बलाकिका और ब्राह्मणको दानमें बासी भोजन देनेसे कुबड़ेकी योनि प्राप्त होती है। हे पक्षिन्! जो मनुष्य फल चुराता है, उसकी संतति

English

The stayer of a brahmaM suffers from consumption. A drunkard possesses brown teeth. A gold stealer has bad nails. The defiler of the teacher's bed possesses bad skin.

अध्याय २४१

श्लोक 36

यथा वायुर्जलधरान्विकर्षति यतस्ततः ।तद्वज्जलदवत्तार्क्ष्य कालस्यैव वशानुगाः

yathā vāyurjaladharānvikarṣati yatastataḥ / tadvajjaladavattārkṣya kālasyaiva vaśānugāḥ

हिन्दी अर्थ

मर जाती है। बिना किसीको दिये अकेले भोजन करनेवाला व्यक्ति दूसरे जन्ममें संतानहीन होता है । संन्यासाश्रमका परित्याग करनेवाला (आरूढ़पतित) पिशाच होता है। जलकी चोरी करनेसे चातक

English

That very thing becomes his mark with which he was associated in the previous birth. If he moves with (he wretched people he himself becomes wretched within a year.

अध्याय २४१

श्लोक 37

सात्त्विका राजसाश्चैव तामसा ये च केचन ।भावाः कालात्मकाः सर्वे प्रवर्तन्ते हि जन्तुषु

sāttvikā rājasāścaiva tāmasā ye ca kecana / bhāvāḥ kālātmakāḥ sarve pravartante hi jantuṣu

हिन्दी अर्थ

और पुस्तककी चोरी करनेसे प्राणी जन्मान्ध होता है। ब्राह्मणोंको देनेकी प्रतिज्ञा करके जो नहीं देते

English

The sins of the people spread by talk, touch, brea* thing, going together, eatii togetheri sitting together, worship¬ ping together, by teaching and sex usd union.

अध्याय २४१

श्लोक 38

आदित्यश्चन्द्रमाः शम्भुरापो वायुः शतक्रतुः ।अग्निः खं पृथिवी मित्र ओषध्यो वसवस्तथा

ādityaścandramāḥ śambhurāpo vāyuḥ śatakratuḥ / agniḥ khaṃ pṛthivī mitra oṣadhyo vasavastathā

हिन्दी अर्थ

निन्दा करनेवाले लोगोंको कछुएकी योनिमें जाना पड़ता है। फल बेचनेवाला दूसरे जन्ममें भाग्यहीन होता है। जो ब्राह्मण शूद्रकन्यासे विवाह कर लेता है, वह भेडियेकी योनि प्राप्त करता है। अग्निको

English

After having sexual intercourse with the wives of other men or after killing a brahmana, one becomes a brahma* rakasa, in a lonely place.

अध्याय २४१

श्लोक 39

सरितः सागराश्चैव भावाभावौ च सर्पहन् ।सर्वे कालेन सृज्यन्ते संक्षिप्यन्ते यथा पुनः

saritaḥ sāgarāścaiva bhāvābhāvau ca sarpahan / sarve kālena sṛjyante saṃkṣipyante yathā punaḥ

हिन्दी अर्थ

पैरसे स्पर्श करनेपर प्राणी बिलौटा और जीवोंका मांस खानेपर रोगी होता है। जो मनुष्य जलके स्रोतको विनष्ट करते हैं, वे मछली होते हैं। जो लोग भगवान् हरिकी कथा और साधुजनोंकी

English

The thief of corn becomes a rat; that of vehicle, a camel and that of fruit a monkey. He who takes meals un* invited becomes a crow. He who steals utensils becomes a vulture.

अध्याय २४१

श्लोक 40

कालेन संह्रियन्ते च नृनं मृत्यावुपस्थिते ।दैवयोगात्त्दा व्याधिः कश्चिदुत्पद्यते खग

kālena saṃhriyante ca nṛnaṃ mṛtyāvupasthite / daivayogāttdā vyādhiḥ kaścidutpadyate khaga

हिन्दी अर्थ

प्रशस्ति नहीं सुनते, उन मनुष्योंको कर्णमूल रोग होता है। जो व्यक्ति परायेके मुँहमें स्थित अन्नका अपहरण करता है, वह मन्दबुद्धि होता है। जो देवपूजनमें प्रयुक्त होनेवाले पात्रादिक

English

The stealer of fruit becomes a honey-bee; that of a cow, a vulture; that of a woman*s clothes, a white leper and that of juice, possesses no taste at all.

अध्याय २४१

श्लोक 41

वैकल्यमिन्द्रियाणां च बलौ जोरंहसां भवेत् ।युगपद्वश्चिककोटिशूकदंशो भवेद्यदि

vaikalyamindriyāṇāṃ ca balau joraṃhasāṃ bhavet / yugapadvaścikakoṭiśūkadaṃśo bhavedyadi

हिन्दी अर्थ

उपकरणोंका अपहारक है, उसे गण्डमाला-रोग होता है दम्भके वशीभूत होकर जो प्राणी धर्माचरण करता है, उसको गजचर्मका रोग होता है। विश्वासघाती मनुष्यके शरीरमें शिरोऽर्ति-रोग होता है। शिवके

English

The stealer of bronze becomes a swan; so also the stealer of other's possessions. The slayer of his teacher becomes epileptic and the performer of cruel deeds becomes a dwarf.

अध्याय २४१

श्लोक 42

तदानुमीयते तेन पीडा मृत्युभवा खग ।ततः क्षणेन चैतन्ये विकले जडतां गते

tadānumīyate tena pīḍā mṛtyubhavā khaga / tataḥ kṣaṇena caitanye vikale jaḍatāṃ gate

हिन्दी अर्थ

धन और निर्माल्यका सेवन करनेवाला व्यक्ति शिश्नपीड़ासे ग्रसित रहता है। स्त्रियाँ पापकी भागिनी होती हैं और इन्हें उन्हीं जन्तुओंकी भार्या होना पड़ता है। उक्त कर्मोके कुफलसे प्राप्त नरकका

English

He who discards progeny and wife encounters ill- luck. He who eats sweets only becomes rheumatic. He who has sexual union with a brahmana's wife becomes a jackal.

अध्याय २४१

श्लोक 43

प्रिचाल्यन्ते ततः प्राणा याम्यैर्निकटवर्तिभिः ।बीभत्सं तु तदा रूपं प्राणैः कण्ठगतैर्भवेत्

pricālyante tataḥ prāṇā yāmyairnikaṭavartibhiḥ / bībhatsaṃ tu tadā rūpaṃ prāṇaiḥ kaṇṭhagatairbhavet

हिन्दी अर्थ

भोग करनेके बाद मनुष्य इन्हीं सब योनियोंमें प्रविष्ट होता है, ऐसा निश्चय समझना चाहिए। हे खगपते! जिस प्रकार इस संसारमें नाना भाँतिके द्रव्य विद्यमान हैं, उसी प्रकार प्राणियोंकी

English

A stealer of bed becomes kpaakaS and that of clothes becomes a moth. He who envies is bom blind. He who steals a lamp becomes a beggar.

अध्याय २४१

श्लोक 44

फेमुद्गिरते सो ऽथ मुखं लालाकुलं भवेत् ।अङ्गुष्ठमात्रपुरुषो हाहा कुर्वंस्ततस्तनोः

phemudgirate so 'tha mukhaṃ lālākulaṃ bhavet / aṅguṣṭhamātrapuruṣo hāhā kurvaṃstatastanoḥ

हिन्दी अर्थ

विभिन्न जातियाँ भी हैं। वे सभी अपने-अपने विभिन्न कर्मोके प्रतिफल-रूपमें सुख-दुःख एवं नाना योनियोंका भोग करते हैं । तात्पर्य यही है कि प्राणीको शुभ कर्म करनेसे शुभ फलकी प्राप्ति और

English

He who kills a friend becomes an owl. He who abuses the ancestors suffers from consumption. He who speaks lies cannot spesJt properly. He who gives false witness suffers from dropsy.

अध्याय २४१

श्लोक 45

तदैव नीयते द्वतैर्याम्यैर्वोक्षन्स्वकं गृहम् ।भूय एव हिते तात मृत्युकालदशामिमाम्

tadaiva nīyate dvatairyāmyairvokṣansvakaṃ gṛham / bhūya eva hite tāta mṛtyukāladaśāmimām

हिन्दी अर्थ

अशुभ कर्म करनेसे अशुभ फलकी प्राप्ति होती है।

English

He who spoils a young girl becomes a eunuch. He who sells the Vedas becomes a leopard. He who performs a sacrifice but not in the prescribed manner becomes a pig.

अध्याय २४१

श्लोक 46

अष्मा प्रकुपितः काये तीव्रवायुसमीरितः ।भिनत्ति मर्मस्थानानि दीप्यमानो निरिन्धनः

aṣmā prakupitaḥ kāye tīvravāyusamīritaḥ / bhinatti marmasthānāni dīpyamāno nirindhanaḥ

हिन्दी अर्थ

यदि कोई व्यक्ति किसी वस्तुको देना नहीं चाहे तब भी उसको उससे ले लेनेवाला अदत्तादान कहा जाता है।

English

A Bauddbs or Jain mmdiesat*

अध्याय २४१

श्लोक 47

उदानो नाम पवनस्ततश्चोर्ध्वं प्रवर्तते ।भक्तानामबुभुक्षाणामधोगतिनिरोधकृत्

udāno nāma pavanastataścordhvaṃ pravartate / bhaktānāmabubhukṣāṇāmadhogatinirodhakṛt

हिन्दी अर्थ

नरकोंका स्वरूप, नरकोंमें प्राप्त होनेवाली विविध यातनाएँ तथा नरकमें गिरानेवाले कर्म एवं जीवको शुभाशुभ गति श्रीसूतजीने कहा--पूछे गये अपने प्रश्नोंका वहाँकी भूमि भी तप्ताङ्गार-जैसी है। उसमें यमके सम्यक् उत्तर सुनकर पक्षिराज गरुड अतिशय दूत पापियोंको डाल देते हैं। उस जलती हुई अग्निसे

English

He who eats here and there becomes a cat. He who sets fire to a forest becomes a glow-worm. He who eats the stale food becomes a worm. He who envies others becomes a bee.

अध्याय २४१

श्लोक 48

यैर्नानृतानि चोक्तानि प्रीतिभेदः कृतो न च ।आस्तिकः श्रद्दधानश्च स सुखं मृत्युमृच्छति

yairnānṛtāni coktāni prītibhedaḥ kṛto na ca / āstikaḥ śraddadhānaśca sa sukhaṃ mṛtyumṛcchati

हिन्दी अर्थ

आह्वादित हो भगवान् विष्णुसे नरकोंके स्वरूपको संतप्त होकर पापी उसीमें इधर-उधर भागता है। जाननेकी इच्छा प्रकट की। उसके पैरमें छाले पड़ जाते हैं, जो फूटकर बहने लगते गरुडने कहा--हे उपेन्द्र! आप मुझे उन हैं। रात-दिन वह पापी वहाँ पैर उठा-उठाकर चलता नरकोंका स्वरूप और भेद बतायें, जिनमें जाकर है। इस प्रकार वह जब हजार योजन उस नरकका

English

He who sets fire becomes a leper. He who does not give gifts becomes a bull. A stealer of cows becomes a serpent; that of food suffers from dyspepsia.

अध्याय २४१

श्लोक 49

यो न कामान्न संरंभान्न द्वेषाद्धर्ममुत्सृजेत् ।यथोक्तकारी सौम्यश्च स सुखं मृत्युमृच्छति

yo na kāmānna saṃraṃbhānna dveṣāddharmamutsṛjet / yathoktakārī saumyaśca sa sukhaṃ mṛtyumṛcchati

हिन्दी अर्थ

पापीजन अत्यधिक दुःख भोगते हैं। विस्तार पार कर लेता है, तब उसे पापकी शुद्धिके श्रीभगवानूने कहा--हे अरुणके छोटे भाई लिये उसी प्रकारके दूसरे नरकमें भेजा जाता है। गरुड! नरक तो हजारोंकी संख्यामें हैं। सभीको है पक्षिन्! इस प्रकार मैंने तुम्हें रौरव नामक प्रथम विस्तृत रूपमें बताना सम्भव नहीं है। अतः मैं नरककी बात बता दी। अब तुम 'महारौरव' नामक

English

A stealer of water becomes a fish, that of milk a crane. He who gives stale food to a brahmana becomes hunch-backed.

अध्याय २४१

श्लोक 50

मोहज्ञानप्रदातारः प्राप्नुवन्ति महत्तमः ।कूटसाक्षी मृषावादी ये च विश्वासघातकाः

mohajñānapradātāraḥ prāpnuvanti mahattamaḥ / kūṭasākṣī mṛṣāvādī ye ca viśvāsaghātakāḥ

हिन्दी अर्थ

मुख्य-मुख्य नरकोंको बता रहा हूँ। नरककी बात सुनो। यह नरक पाँच हजार योजनमें हे पक्षिराज! तुम मुझसे यह जान लो कि रौरव' फैला हुआ है। बहाँकी भूमि ताँबेके समान वर्णवाली नामक नरक अन्य सभीकी अपेक्षा प्रधान है। झूठी है। उसके नीचे अग्नि जलती रहती है। वह भूमि विद्युत् गवाही देनेवाला और झूठ बोलनेवाला व्यक्ति रौरव प्रभाके समान कान्तिमान् है। देखनेमें वह पापीजनोंको

English

If he steals fruits> his progeny dies, O bird. If he eats alone without giving a morsel of it to anyone else, he be¬ comes issueless.

अध्याय २४१

श्लोक 51

ते मोहं मृत्युमृच्छन्ति तथा ये वेदनिन्दकाः ।विभीषकाः पूतिगन्धा यष्टिमुद्गरपाणयः

te mohaṃ mṛtyumṛcchanti tathā ye vedanindakāḥ / vibhīṣakāḥ pūtigandhā yaṣṭimudgarapāṇayaḥ

हिन्दी अर्थ

नरकमें जाता है। इसका विस्तार दो हजार योजन है। महाभयंकर प्रतीत होती है। यमदूत पापी व्यक्तिके जाँघभरकी गहराईमें वहाँ दुस्तर गड्डा है। दहकते हुए हाथ-पैर बाँधकर उसे उसीमें लुढ़का देते हैं और अंगारोंसे भरा हुआ वह गड्डा पृथ्वीकै समान बराबर वह लुढ़कता हुआ उसमें चलता है। मार्गमें कौआ

English

If he does not opt for Sannyasa he becomes an evil spirit in the desert. A stealer of water becomes a Cdlakai that of book is born blind.

अध्याय २४१

श्लोक 52

आगच्छन्ति दुरात्मानो यमस्य पुरुषास्तदा ।प्राप्ते त्वीदृक्पथे घोरे जायते तस्य वेपथुः

āgacchanti durātmāno yamasya puruṣāstadā / prāpte tvīdṛkpathe ghore jāyate tasya vepathuḥ

हिन्दी अर्थ

(समतल भूमि-जैसा) दीखता है। तीव्र अग्निसे

English

He who promises but does not give it to the brdhma becomes a jackal. He who earns the blame of the people be¬ comes a tortoise.

अध्याय २४१

श्लोक 53

क्रन्दत्यविरतं सो ऽपि पितृमातृसुतानपि ।सास्य वागस्फुटा यत्नेनैकवर्णा विभासते

krandatyavirataṃ so 'pi pitṛmātṛsutānapi / sāsya vāgasphuṭā yatnenaikavarṇā vibhāsate

हिन्दी अर्थ

जीव-जन्तु क्रोधातुर होकर उसे खानेके लिये तत्पर रहते हैं। वह उस जलती हुई भूमि एवं भयंकर जीव-जन्तुओंके आक्रमणसे इतना संतप्त हो जाता है कि उसकी बुद्धि ही भ्रष्ट हो जाती है। वह

English

A seller of fruits meets with bad luck. He who marries a Sudra woman, becomes a wolf. He who touches (ire with foot becomes a cat. He who eats another's meat suffers from diseases.

अध्याय २४१

श्लोक 54

दृष्टिर्वै भ्राम्यते त्रासाच्छ्वासाच्छुष्यति चाननम् ।स ततो वेदनाविष्टस्तच्छरीरं विमुञ्चति

dṛṣṭirvai bhrāmyate trāsācchvāsācchuṣyati cānanam / sa tato vedanāviṣṭastaccharīraṃ vimuñcati

हिन्दी अर्थ

घबड़ाकर चिल्लाने लगता है तथा बार-बार उस कष्टसे बेचैन हो उठता है। उसको वहाँ कहींपर भी शान्ति नहीं प्राप्त होती है। इस प्रकार उस नरकलोकके कष्टको भोगते हुए पापीके जब हजारों वर्ष बीत

English

He who breaks a water-reservoir becomes a fish. He who hears neither Hari's tale, nor the praise of the good suffen from ear disease.

अध्याय २४१

श्लोक 55

अस्पृश्यं कुत्सनीयं च तत्क्षणादेव जायते ।उक्तं मृत्योः स्वरूपं तु प्रसङ्गादन्यदप्यथ

aspṛśyaṃ kutsanīyaṃ ca tatkṣaṇādeva jāyate / uktaṃ mṛtyoḥ svarūpaṃ tu prasaṅgādanyadapyatha

हिन्दी अर्थ

जाते हैं, तब कहीं जाकर मुक्ति प्राप्त होती है। इसके बाद जो नरक है उसका नाम ' अतिशीत' है। वह स्वभावतः अत्यन्त शीतल है। महारौरव नरकके समान ही उसका भी विस्तार बहुत लंबा है।

English

A treacherous fellow suffers from head-ache. He who b against $iva suffers from the disease of genital organ.

अध्याय २४१

श्लोक 56

वैचित्र्यस्योत्तरं प्रश्रे द्वितीयस्य वदामि ते ।कर्मणां प्राक्तनानां तु तदसत्त्वेनं भदेतः

vaicitryasyottaraṃ praśre dvitīyasya vadāmi te / karmaṇāṃ prāktanānāṃ tu tadasattvenaṃ bhadetaḥ

हिन्दी अर्थ

वह गहन अन्धकारसे व्याप्त रहता है। असह्य कष्ट देनेवाले यमदूतोंके द्वारा पापीजन लाकर यहाँ बाँध दिये जाते हैं। अत: वे एक-दूसरेका आलिंगन करके वहाँकी भयंकर ठंडकसे बचनेका प्रयास करते हैं।

English

And the women too who commit these sins suffer in the similar way or they become wives of penons suffering in the aforesaid manner.

अध्याय २४१

श्लोक 57

भवेद्भोगस्य वैचित्र्यं भ्राम्यतां प्राणिनामिह ।देवत्वमसुरत्वं च यक्षत्वादिसुखप्रदम्

bhavedbhogasya vaicitryaṃ bhrāmyatāṃ prāṇināmiha / devatvamasuratvaṃ ca yakṣatvādisukhapradam

हिन्दी अर्थ

उनके दाँतोंमें कटकटाहट होने लगती है। है पक्षिराज! उनका शरीर वहाँकी उस ठंडकसे काँपने लगता है।

English

After their present life they reach hell. Knofw that I have told you all thb in short, O bird! Just as there are many kinds of disease so also there are many kinds of man.

अध्याय २४१

श्लोक 58

मानुषत्वं पशुत्वं च पक्षित्वाद्यतिदुः खदम् ।कर्मणां तारतम्येन भवतीह खगेश्वर

mānuṣatvaṃ paśutvaṃ ca pakṣitvādyatiduḥ khadam / karmaṇāṃ tāratamyena bhavatīha khageśvara

हिन्दी अर्थ

प्राणी भूखसे त्रस्त होकर मज्जा, रक्त और गल रही हड्डियोंको खाते हैं। परस्पर भेंट होनेपर वे सभी पापी एक-दूसरेका आलिंगन कर भ्रमण करते रहते हैं। इस प्रकार उस तमसावृत नरकमें

English

faflammstion of the glsodt the neck.

अध्याय २४१

श्लोक 59

अत्र ते कीर्तयिष्यामि विपाकं कर्मणामहम् ।वैचित्र्यस्य स्पुटत्वाययैर्जोवः संसरत्ययम्

atra te kīrtayiṣyāmi vipākaṃ karmaṇāmaham / vaicitryasya spuṭatvāyayairjovaḥ saṃsaratyayam

हिन्दी अर्थ

मनुष्यको बहुत-से कष्ट झेलने पड़ते हैं।

English

In this way, due to the variety of their actions, men attain happinea or grief. Thus, I have told you about the icrangenett of human nature. Good actions give good results and bad actions give bad results.

अध्याय २४१

श्लोक 60

महापातकजान्घोरान्नरकान्प्राप्य दारुणान् ।कर्मक्षयात्प्रजायन्ते महापातकिनः क्षितौ

mahāpātakajānghorānnarakānprāpya dāruṇān / karmakṣayātprajāyante mahāpātakinaḥ kṣitau

हिन्दी अर्थ

हे पक्षिश्रेष्ठ! जो व्यक्ति अन्यान्य असंख्य पाप करता है, वह इस नरकके अतिरिक्त ' निकृन्तन'

English

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अध्याय २४१

श्लोक 61

जायन्ते लक्षणैर्यैस्तुतानि मे शृणु सत्तम ।मृगाश्वसूकरोष्ट्राणां ब्रह्महा योनिमृच्छति

jāyante lakṣaṇairyaistutāni me śṛṇu sattama / mṛgāśvasūkaroṣṭrāṇāṃ brahmahā yonimṛcchati

हिन्दी अर्थ

वहाँ भूख-प्यास बहुत अधिक लगती है। इसके नामसे प्रसिद्ध दूसरे नरकमें जाता है। है खगेन्द्र! अतिरिक्त भी अनेक कष्टोंका सामना उन्हें वहाँ करना वहाँ अनवरत कुम्भकारके चक्रके समान चक्र पड़ता है। वहाँ हिमखण्डका वहन करनेवाली वायु चलते रहते हैं, जिनके ऊपर पापीजनोंको खड़ा चलती है, जो शरीरकी हड्डियोंको तोड़ देती है। वहाँके करके यमके अनुचरोंके द्वारा अँगुलिमें स्थित

English

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अध्याय २४१

श्लोक 62

कृमिकीटपतङ्गत्वं स्वर्णहारी समाप्नुयात् ।तृणगुल्मतात्वं च क्रमशो गुरुतल्पगः

kṛmikīṭapataṅgatvaṃ svarṇahārī samāpnuyāt / tṛṇagulmatātvaṃ ca kramaśo gurutalpagaḥ

हिन्दी अर्थ

कालसूत्रसे उनके शरीरको पैरसे लेकर शिरोभागतक छेदा जाता है। फिर भी उनका प्राणान्त नहीं होता। इसमें शरीरके सैकड़ों भाग टूट-टूट कर छिन्न- भिन्न हो जाते हैं और पुनः इकट्ठे हो जाते हैं। इस

English

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अध्याय २४१

श्लोक 63

ब्रह्महा क्षयरोगी स्यात्सुरापः श्यावदन्तकः ।हेमहारी तु कुनखी दुश्चर्मा गुरुतल्पगः

brahmahā kṣayarogī syātsurāpaḥ śyāvadantakaḥ / hemahārī tu kunakhī duścarmā gurutalpagaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकार यमदूत पापकर्मियोंको वहाँ हजारों वर्षतक चक्कर लगवाते रहते हैं। जब सभी पापोंका विनाश हो जाता है, तब कहीं जाकर उन्हें उस नरकसे मुक्ति प्राप्त होती है।

English

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अध्याय २४१

श्लोक 64

यो येन संवसत्येषां स तल्लिङ्गो ऽभिजायते ।संवत्सरेण पतति पतितेन सहाचरन्

yo yena saṃvasatyeṣāṃ sa talliṅgo 'bhijāyate / saṃvatsareṇa patati patitena sahācaran

हिन्दी अर्थ

' अप्रतिष्ठ' नामका एक अन्य नरक है। वहाँ जानेवाले प्राणी असह्य दुःखका भोग भोगते हैं। वहाँ पापकर्मियोंके दुःखके हेतुभूत चक्र और रहट

English

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अध्याय २४१

श्लोक 65

संलापस्पर्शनिः श्वाससहयानाशनासनात् ।याजनाध्यापनाद्यौनात्पापं संक्रमते नृणाम्

saṃlāpasparśaniḥ śvāsasahayānāśanāsanāt / yājanādhyāpanādyaunātpāpaṃ saṃkramate nṛṇām

हिन्दी अर्थ

लगे रहते हैं। जबतक हजारों वर्ष पूरे नहीं हो देखकर भूख-प्याससे पीडित प्राणी दुःखी होकर जाते, तबतक वह रुकता नहीं। जो लोग उस करुण क्रन्दन करते हुए वहाँ जाते हैं । तापसे तपती

English

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अध्याय २४१

श्लोक 66

गत्वा दारान्परेषाञ्च ब्रह्मस्वमपहृत्य च ।अरण्ये निर्जने देशे जायते ब्रह्मराक्षसः

gatvā dārānpareṣāñca brahmasvamapahṛtya ca / araṇye nirjane deśe jāyate brahmarākṣasaḥ

हिन्दी अर्थ

चक्रपर बाँधे जाते हैं, वे जलके घटकी भाँति उसपर डट ज्र । ळर

English

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अध्याय २४१

श्लोक 67

हीनजातौ प्रजायेत रत्नानामपहारकः ।पत्रं च शाखिनो हृत्वा गन्धांश्छुच्छुन्दरी पुमान्

hīnajātau prajāyeta ratnānāmapahārakaḥ / patraṃ ca śākhino hṛtvā gandhāṃśchucchundarī pumān

हिन्दी अर्थ

घूमते रहते हैं । पुनः रक्तका वमन करते पापियोंके दोनों पैर जल आँतें मुखकी ओरसे बाहर आ जाती हैं और नेत्र जाते हैं, अत्यन्त शीतल वायु बहने लगती है, आँतोंमें घुस जाते हैं। प्राणियोंको वहाँ जो दुःख जिसके कारण उन पापियोंके ऊपर तलवारके प्राप्त होते हैं, वे बड़े ही कष्टकारी हैं। समान तीक्ष्ण धारवाले पत्ते गिरते हैं। जलते हुए

English

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अध्याय २४१

श्लोक 68

मूषको धान्यहारी स्याद्यानमुष्ट्रः फलं कपिः ।निर्मन्त्रभोजनात्काको गृध्रो हृत्वा ह्युपस्करम्

mūṣako dhānyahārī syādyānamuṣṭraḥ phalaṃ kapiḥ / nirmantrabhojanātkāko gṛdhro hṛtvā hyupaskaram

हिन्दी अर्थ

हे गरुड! अब ' असिपत्रवन' नामक दूसरे अग्नि-समूहसे युक्त भूमिमें पापीजन छिन्न-भिन्न नरकके विषयमें सुनो। यह नरक एक हजार होकर गिरते हैं। उसी समय वहाँके रहनेवाले योजनमें फैला हुआ है। इसकी सम्पूर्ण भूमि कुत्तोंका आक्रमण भी उन पापियोंपर होने लगता अग्निसे व्याप्त होनेके कारण अहर्निश जलती है। शीघ्र ही वे कुत्ते रोते हुए उन पापियोंके

English

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अध्याय २४१

श्लोक 69

मधुदंशः फलं गृध्रो गां गोधाग्निं बकस्तथा ।स्याच्छ्वेतकुष्ठी स्त्रीवस्त्र ह्यरुची रसहारकः

madhudaṃśaḥ phalaṃ gṛdhro gāṃ godhāgniṃ bakastathā / syācchvetakuṣṭhī strīvastra hyarucī rasahārakaḥ

हिन्दी अर्थ

रहती है। इस भयंकर नरकमें सात-सात सूर्य शरीरके मांसको खण्ड-खण्ड करके खा जाते हैं। अपनी सहस्र-सहस्र रश्मियोंके साथ सहैव तपते है तात! असिपत्रवन नामक नरकके विषयको रहते हैं, जिनके संतापसे वहाँके पापी हर मैंने बता दिया। अब तुम महाभयानक ' तप्तकुम्भ' क्षण जलते ही रहते हैं । इसी नरकके मध्य एक नामवाले नरकका वर्णन मुझसे सुनो--इस नरकमें

English

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अध्याय २४१

श्लोक 70

कांस्यहारी तु हंसः स्यात्परस्वस्य च हारकः ।अपस्मारी गुरोर्हन्ता क्रूरकृद्वामनो भवेत्

kāṃsyahārī tu haṃsaḥ syātparasvasya ca hārakaḥ / apasmārī gurorhantā krūrakṛdvāmano bhavet

हिन्दी अर्थ

चौथाई भागमें ' शीतस्निग्धपत्र' नामका वन है। है चारों ओर फैले हुए अत्यन्त गरम-गरम घड़े हैं। पक्षिश्रेष्ठ। उसमें वृक्षोंसे टूटकर गिरे फल और उनके चारों ओर अग्नि प्रज्वलित रहती है, वे पत्तोंके ढेर लगे रहते हैं। मांसाहारी बलवान् कुत्ते उबलते हुए तेल और लौहके चूर्णसे भरे रहते हैं। उसमें विचरण करते रहते हैं। वे बड़े-बड़े मुखवाले, पापियोंको ले जाकर उन्हींमे औंधे मुख डाल दिया

English

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अध्याय २४१

श्लोक 71

धर्मपत्नीं त्यजञ्छब्दवेधी प्राणी भवेत्क्षितौ ।देवविप्रस्वापहारी पाण्डुरः परमांसभुक्

dharmapatnīṃ tyajañchabdavedhī prāṇī bhavetkṣitau / devaviprasvāpahārī pāṇḍuraḥ paramāṃsabhuk

हिन्दी अर्थ

बड़े-बड़े दाँतोंवाले तथा व्याप्रकी तरह महाबलवान् जाता है। गलती हुई मज्जारूपी जलसे युक्त उसीमें हैं। अत्यन्त शीत एवं छायासे व्याप्त उस नरकको फूटते हुए अज्जोंवाले पापी काढाके समान बना

English

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अध्याय २४१

श्लोक 72

भक्ष्याभक्ष्यो गण्डमाली महारोगी प्रजायते ।न्यासापहारी काणः स्यास्त्रीजीवः खञ्जको भवेत्

bhakṣyābhakṣyo gaṇḍamālī mahārogī prajāyate / nyāsāpahārī kāṇaḥ syāstrījīvaḥ khañjako bhavet

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प नरकोंका स्वरूप ४५९

English

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अध्याय २४१

श्लोक 73

कौमारदारत्यागी च दुर्भगो ऽथै कमिष्टभुक् ।वातगुल्मी विप्रयोषिद्गामी वा जम्बुको भवेत्

kaumāradāratyāgī ca durbhago 'thai kamiṣṭabhuk / vātagulmī viprayoṣidgāmī vā jambuko bhavet

हिन्दी अर्थ

दिये जाते हैं । तदनन्तर भयंकर यमदूत नुकीले अग्निज्वाल, महाघोर, संदंश, अभोजन, तमस्,

English

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अध्याय २४१

श्लोक 74

शय्याहर्ता क्षपणकः पतङ्गो वस्त्रहारकः ।मात्सर्यादपि जात्यन्धो कपाली दीपहारकः

śayyāhartā kṣapaṇakaḥ pataṅgo vastrahārakaḥ / mātsaryādapi jātyandho kapālī dīpahārakaḥ

हिन्दी अर्थ

OR ( छि कालसूत्र, लौहतापी, अभिद, अप्रतिष्ठ तथा अवीचि आदि --ये सभी नरक यमके राज्यमें स्थित हैं। 'पापीजन पृथक्-पृथक् रूपसे उनमें जाकर गिरते हैं। रौरव आदि सभी नरकोंकी अवस्थिति इस

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अध्याय २४१

श्लोक 75

कौशिको मित्रहन्ता च क्षयी पित्रादिनिन्दकः ।स्खलद्वागनृतवादी कूटसाक्षी जलोदरी

kauśiko mitrahantā ca kṣayī pitrādinindakaḥ / skhaladvāganṛtavādī kūṭasākṣī jalodarī

हिन्दी अर्थ

पृथ्वीलोकसे नीचे मानी गयी है। जो मनुष्य गौकी हत्या, भ्रूणहत्या और आग लगानेका दुष्कर्म करता है, वह 'रोध' नामक नरकमें गिरता है। जो ब्रह्मघाती, मद्यपी तथा सोनेकी चोरी करता है, वह

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अध्याय २४१

श्लोक 76

मशकः सो ऽथ चछिन्नोष्ठो विवाहे विघ्नकृद्भवेत् ।स्याद्वाथ वृषलः सो ऽयं चत्वरे वै विण्मूत्रकृत्

maśakaḥ so 'tha cachinnoṣṭho vivāhe vighnakṛdbhavet / syādvātha vṛṣalaḥ so 'yaṃ catvare vai viṇmūtrakṛt

हिन्दी अर्थ

“सूकर' नामके नरकमें गिरता है। क्षत्रिय और वैश्यकी हत्या करनेवाला “ताल” नामक नरकमें

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अध्याय २४१

श्लोक 77

मूत्रकृच्छ्री दूषकस्तु कन्यायाः क्लीबतामियात् ।द्वीपी स्याद्वेदविक्रेता वराहो ऽयाज्ययाजकः

mūtrakṛcchrī dūṣakastu kanyāyāḥ klībatāmiyāt / dvīpī syādvedavikretā varāho 'yājyayājakaḥ

हिन्दी अर्थ

SEOs / gh / ॥. जो मनुष्य ब्रह्महत्या एवं गुरुपत्री तथा हथियारोंसे उन पापियोंकी खोपड़ी, आँखों तथा बहनके साथ सहवास करनेकी दुश्वेष्टा करता हड्डियोंको छेद-छेदकर नष्ट करते हैं। गिद्ध बडी है, वह 'तप्तकुम्भ' नामक नरकमें जाता है। तेजीसे वहाँ आकर उनपर झपट्टा मारते हैं। उन जो असत्य-सम्भाषण करनेवाले राजपुरुष हैं,

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अध्याय २४१

श्लोक 78

यतस्ततो ऽश्रन्मार्जारो खद्योतो वहदाहकः ।कृमिः पर्युषितादः स्यान्मत्सरी भ्रमरो भवेत्

yatastato 'śranmārjāro khadyoto vahadāhakaḥ / kṛmiḥ paryuṣitādaḥ syānmatsarī bhramaro bhavet

हिन्दी अर्थ

उबलते हुए पापियोंको अपनी चोंचसे खींचते हैं उनको भी उक्त नरककी ही प्राप्ति होती है। जो और फिर उसीमें छोड़ देते हैं। उसके बाद यमदूत प्राणी निषिद्ध पदार्थांका विक्रेता, मदिराका व्यापारी उन पापियोंके सिर, स्नायु, द्रवीभूत मांस, त्वचा है तथा स्वामिभक्त सेवकका परित्याग करता है, आदिको जल्दी-जल्दी करछुलसे उसी तेलमें घुमाते वह 'तप्तलौह' नामक नरकको प्राप्त करता है ।

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अध्याय २४१

श्लोक 79

अग्न्युत्सादी तु कुष्ठी स्याददत्ताऽदानतो वृषः ।सर्पो गोहारको ऽन्नस्य हारकः स्यादजीर्णवान्

agnyutsādī tu kuṣṭhī syādadattā'dānato vṛṣaḥ / sarpo gohārako 'nnasya hārakaḥ syādajīrṇavān

हिन्दी अर्थ

हुए उन महापापियोंको काढ़ा बना डालते हैं। जो व्यक्ति कन्या या पुत्रवधूके साथ सहवास

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अध्याय २४१

श्लोक 80

जलहारी तु मत्स्यः स्यात्क्षीरहारी बलाकिका ।अन्नं पर्युषितं विप्रे प्रददत्कुब्जतां व्रजेत्

jalahārī tu matsyaḥ syātkṣīrahārī balākikā / annaṃ paryuṣitaṃ vipre pradadatkubjatāṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

हे पक्षिन्! यह तप्तकुम्भ-जैसा है, इस बातको करनेवाला है, जो वेद-विक्रेता और वेदनिन्दक विस्तारपूर्वक मैंने तुम्हें बता दिया। सबसे पहले है, वह अन्तमें “महाज्वाल' नामक नरकका नरकको रौरव और दूसरे उसके बादवालेको वासी होता है। जो गुरुका अपमान करता है, महारौरव नरक कहा जाता है। तीसरे नरकका नाम शब्दबाणसे उनपर प्रहार करता है तथा अगम्या

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अध्याय २४१

श्लोक 81

फलानि हरते यस्तु सन्ततिर्म्रियते खग ।अदत्त्वा भक्ष्यमश्राति ह्यनपत्यो भवेन्नरः

phalāni harate yastu santatirmriyate khaga / adattvā bhakṣyamaśrāti hyanapatyo bhavennaraḥ

हिन्दी अर्थ

अतिशीत एवं चौथेका नाम निकृन्तन है। पाँचवाँ स्त्रीक साथ मैथुन करता है, वह 'शबल' नामक नरक अप्रतिष्ठ, छठा असिपत्रवन एवं सातवाँ नरकमें जाता है। तप्तकुम्भ है। इस प्रकार ये सात प्रधान नरक हैं। शौर्य-प्रदर्शनमें जो वीर मर्यादाका परित्याग अन्य भी बहुत-से नरक सुने जाते हैं, जिनमें पापी करता है, वह “विमोहन' नामक नरकमें गिरता है।

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अध्याय २४१

श्लोक 82

प्रवज्यागमनाद्राजन् भवेन्मरुपिशाचकः ।चातको जलहर्ता स्याज्जन्मान्धः पुंस्तकं हरन्

pravajyāgamanādrājan bhavenmarupiśācakaḥ / cātako jalahartā syājjanmāndhaḥ puṃstakaṃ haran

हिन्दी अर्थ

अपने कर्मोके अनुसार जाते हैं। यथा-रोध, जो दूसरेका अनिष्ट करता है, उसे “कृमिभक्ष' सूकर, ताल, तप्तकुम्भ, महाज्चाल, शबल, विमोहन, नामक नरककी प्राप्ति होती है। देवता और कृमि, कृमिभक्ष, लालाभक्ष, विषञ्जन, अधःशिर, ब्राह्मणसे द्वेष रखनेवाला प्राणी 'लालाभक्ष' नरकमें पूयवह, रुधिरान्ध, विड्भुज,वैतरणी, असिपत्रवन, जाता है। जो परायी धरोहरका अपहर्ता है तथा जो

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अध्याय २४१

श्लोक 83

प्रतिश्रुत्य द्विजेभ्योर्ऽथमददज्जम्बुको भवेत् ।परिवादादिजातीनां लभते काच्छपीं तनुम्

pratiśrutya dvijebhyor'thamadadajjambuko bhavet / parivādādijātīnāṃ labhate kācchapīṃ tanum

हिन्दी अर्थ

टो??? 0 पान... पर्मकाण्ड- धर्मकाण्ड--

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अध्याय २४१

श्लोक 84

दुर्भगः फलविक्रेता वृकश्च वृषलीपतिः ।मार्जारो ऽग्निं पदा स्पृष्ट्वा रोगवान्परमांसभुक्

durbhagaḥ phalavikretā vṛkaśca vṛṣalīpatiḥ / mārjāro 'gniṃ padā spṛṣṭvā rogavānparamāṃsabhuk

हिन्दी अर्थ

सन्दंश, तप्तसूर्मि, वैतरणी, अन्धकूप, प्राणरोध और वज्रकण्टक-शाल्मली नरक

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अध्याय २४१

श्लोक 85

जलप्रस्त्रवणं यस्तु भिन्द्यान्मत्स्यो भवेन्नरः ।हरेः कथां न शृण्वन्ति ये न साधुजनस्तवम्

jalaprastravaṇaṃ yastu bhindyānmatsyo bhavennaraḥ / hareḥ kathāṃ na śṛṇvanti ye na sādhujanastavam

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प नरकोंका स्वरूप ४६१

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अध्याय २४१

श्लोक 86

तान्नरान्कर्णमूलो ऽयं व्याप्नुयान्नेतराञ्जनान् ।परस्याननसंस्थं यो ग्रासं हरि मन्दधीः

tānnarānkarṇamūlo 'yaṃ vyāpnuyānnetarāñjanān / parasyānanasaṃsthaṃ yo grāsaṃ hari mandadhīḥ

हिन्दी अर्थ

बाग-बगीचोंमें आग लगाता है, उसे “विषज्ञन' इसी प्रकार बताये गये क्रमसे अन्य नरक भी नीचे नामक नरककी प्राप्ति होती है । जो मनुष्य असत्- ही हें । पात्रसे दान लेता है तथा असत् प्रतिग्रह लेनेवाला, इन नरकलोकोंके अतिरिक्त भी सैकड़ों अयाज्ययाजक और जो नक्षत्रसे जीविकोपार्जन नरक हैं, जिनमें पहुँचकर पापी प्रतिदिन पकता

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अध्याय २४१

श्लोक 87

देवोपकरणान्येनं गण्डमालिनमीहते ।दम्भेनाचरते धर्मं गजचर्मा भवेत्तु सः

devopakaraṇānyenaṃ gaṇḍamālinamīhate / dambhenācarate dharmaṃ gajacarmā bhavettu saḥ

हिन्दी अर्थ

करता है, वह मनुष्य ' अध:शिर' नरकमें जाता है है, जलता है, गलता है, विदीर्ण होता है, चूर्ण जो मदिरा, मांस आदि पदार्थोका विक्रेता है, वह किया जाता है, गीला होता है, क्वाथ बनाया “पूयवह' नामक घोर नरकमें गिरता है। जो जाता है, जलाया जाता है और कहीं वायुसे कुक्कुट, बिल्ली, सुअर, पक्षी, मृग, भेंड़को प्रताडित किया जाता है--ऐसे नरकोंमें एक दिन

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अध्याय २४१

श्लोक 88

शिरो ऽर्तिप्रमुखा रोगा यान्ति विश्वासघातकम् ।लिङ्गपीडी शिवस्वं च शिवनिर्माल्यमेव च

śiro 'rtipramukhā rogā yānti viśvāsaghātakam / liṅgapīḍī śivasvaṃ ca śivanirmālyameva ca

हिन्दी अर्थ

बाँधता है, वह भी उसी प्रकारके नरकमें जाता है। सौ वर्षके समान होता है। सभी नरकोंसे भोग जो गृहदाही है, जो विषदाता है, जो कुण्डाशी है, भोगनेके बाद पापी तिर्यक्-योनिमें जाता है। जो सोमविक्रेता है, जो मद्यपी है, जो मांसभोजी तत्पश्चात् उसको कृमि, कीट, पतंग, स्थावर तथा है तथा जो पशुहन्ता है, वह व्यक्ति 'रुधिरान्ध' एक खुरवाले गधेकी योनि प्राप्त होती है।

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अध्याय २४१

श्लोक 89

स्त्रियो ऽप्यनेन मार्गेण हृत्वा दोषमवाप्नुयुः ।एतेषामेव जन्तूनां भार्यात्वमुपजायते

striyo 'pyanena mārgeṇa hṛtvā doṣamavāpnuyuḥ / eteṣāmeva jantūnāṃ bhāryātvamupajāyate

हिन्दी अर्थ

नामक नरकमें जाता है, ऐसा विद्वानोंका अभिमत तदनन्तर मनुष्य जंगली हाथी आदिकी योनियोंमें है। एक ही पंक्तिमें बैठे हुए किसी प्राणीको धोखा जाकर गौकी योनिमें पहुँचता है। है गरुड! गधा, देकर जो लोग विष खिला देते हैं, उन सभीको घोड़ा, खच्चर, गौर मृग, शरभ और चमरी-ये 'विड्भुज' नामक घोर नरक प्राप्त होता है। मधु छः योनियाँ एक खुरवाली होती हैं। इनके

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अध्याय २४१

श्लोक 90

भोगान्ते नरकस्यैतत्सर्वमित्यवधारय ।खघ प्रदर्श्यमेतत्तु मयोक्तं ते समासतः ।द्रव्यप्रकारा हि यथा तथैव प्राणिजातयः

bhogānte narakasyaitatsarvamityavadhāraya / khagha pradarśyametattu mayoktaṃ te samāsataḥ / dravyaprakārā hi yathā tathaiva prāṇijātayaḥ

हिन्दी अर्थ

निकालनेवाला मनुष्य 'वैतरणी' और क्रोधी अतिरिक्त बहुत-सी पापाचार-योनियाँ भी हैं, “मूत्रसंज्ञक' नामक नरकमें जाता है । अपवित्र और जिनमें जीवात्माको कष्ट भोगना पड़ता है। उन क्रोधी व्यक्ति ' असिपत्रवन' नामक नरकमें जाता सभी योनियोंको पाकर प्राणी मनुष्य-योनिमें है। मृगोंका शिकार करनेवाला व्याध ' अग्निज्चाल' आता है और कुबड़ा, कुत्सित, वामन, चाण्डाल

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अध्याय २४१

श्लोक 91

एवं विचित्रैर्निजकर्मभिर्नृणां सुखस्य दुः खस्य च जन्मनामपि ।वैचित्र्यमुक्तं शुभकर्मतः शुभं तथाशुभाच्चाशुभमीरयन्ति

evaṃ vicitrairnijakarmabhirnṛṇāṃ sukhasya duḥ khasya ca janmanāmapi / vaicitryamuktaṃ śubhakarmataḥ śubhaṃ tathāśubhāccāśubhamīrayanti

हिन्दी अर्थ

नामक नरकमें जाता है, जहाँ उसके शरीरको और पुल्कश आदि नर-योनियोंमें जाता है। नोच-नोचकर कौवे खाते हैं। अवशिष्ट पाप-पुण्यसे समन्वित जीव बार-बार यज्ञकर्ममें दीक्षित होनेपर जो व्रतका पालन गर्भमें जाता है और मृत्युको प्राप्त होता है। उन नहीं करता, उसे उस पापसे 'संदंश' नरकमें जाना सभी पापोंके समाप्त हो जानेके बाद प्राणीको

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अध्याय २४१

श्लोक 92

एतत्ते सर्वंमाख्यातं यत्पृष्टो ऽहमिह त्वया

etatte sarvaṃmākhyātaṃ yatpṛṣṭo 'hamiha tvayā

हिन्दी अर्थ

पड़ता है। यदि स्वप्नमें भी संन्यासी या ब्रह्मचारी शूद्र, वैश्य तथा क्षत्रिय आदिकी आरोहिणी-योनि स्खलित हो जाते हैं तो वे 'अभोजन' नामक प्राप्त होती है। कभी-कभी वह सत्कर्मसे ब्राह्मण, नरकमें जाते हैं। जो लोग क्रोध और हर्षसे भरकर देव और इन्द्रत्वके पदपर भी पहुँच जाता है। वर्णाश्रम-धर्मके विरुद्ध कर्म करते हैं, उन सबको है गरुड! यमद्वारा निर्दिष्ट योनिमें पुण्यगति

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 241
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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