अध्याय २४१
श्लोक 1
इति श्रीगारुडे महापुराणे उत्तरखण्डे द्वितीयांशाख्ये धर्मकाण्डे (प्रेतखण्डे) श्रीकृष्णगरुडसंवादे प्रश्रप्रपञ्चो नाम प्रथमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- २ श्रीकृष्ण उवाच ।साधु पृष्टं त्वया भद्र मानुषाणां हिताय वै ।शृणुष्वावहितो भूत्वा सर्वमेवौर्ध्वदैहिकम्
iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe uttarakhaṇḍe dvitīyāṃśākhye dharmakāṇḍe (pretakhaṇḍe) śrīkṛṣṇagaruḍasaṃvāde praśraprapañco nāma prathamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 2 śrīkṛṣṇa uvāca / sādhu pṛṣṭaṃ tvayā bhadra mānuṣāṇāṃ hitāya vai / śṛṇuṣvāvahito bhūtvā sarvamevaurdhvadaihikam
हिन्दी अर्थ
होते हैं। ये तीनों पदार्थ मरणासन्न व्यक्तिको रहता है। सात्त्विक, राजस और तामस-ये सभी दुर्गतिसे उबार लेते हैं दोनों हाथोंसे कुश उखाड़ना भाव कालके वशमें हैं। प्राणियोंमें वे कालके चाहिए और उसे पृथ्वीपर रखकर जलसे प्रोक्षित अनुसार अपने-अपने प्रभावका विस्तार करते हैं। करना चाहिए तथा मृत्युकालमें मरणासन्नके दोनों है सर्पहन्ता गरुड! सूर्य,चन्द्र, शिव, वायु, इन्द्र,
English
O gentle one, you have put up the right question, that too for the general good of the people. Now hear atten* tively. [ shall tell you about the rite to be performed after death.