Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 242 / 317

Book 2 - Adhyaya 3

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पूर्ण अध्याय पाठ106 श्लोक

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अध्याय २४२

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे उत्तरखण्डे द्वितीयांशे प्रतका(ख)ण्डे श्रीकृष्णगरुडसंवादे और्ध्वदेहिकविधिकर्मविपाकयोर्वर्णनं नाम द्वितीयो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- ३ सूत उवाच ।एवमुत्साहितः पक्षी स्वरूपं निरयस्य तु ।पप्रच्छनरकाण्येवं श्रुत्वा चोत्कूलितान्तरः

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe uttarakhaṇḍe dvitīyāṃśe pratakā(kha)ṇḍe śrīkṛṣṇagaruḍasaṃvāde aurdhvadehikavidhikarmavipākayorvarṇanaṃ nāma dvitīyo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 3 sūta uvāca / evamutsāhitaḥ pakṣī svarūpaṃ nirayasya tu / papracchanarakāṇyevaṃ śrutvā cotkūlitāntaraḥ

हिन्दी अर्थ

नरकलोककी प्राप्ति होती है। प्राप्त करनेमें जो प्राणी सफल हो जाते हैं, सबसे ऊपर भयंकर गर्मीसे संतप्त रौरव वे सुन्दर-सुन्दर गीत गाते, वाद्य बजाते और नामक नरक है। उसके नीचे अत्यन्त दुःखदायी नृत्यादि करते हुए प्रसन्नचित्त गन्धर्वोके साथ, महारौरव है। उस नरकसे नीचे शीतल और उस अच्छे-से-अच्छे हार, नूपुर आदि नाना प्रकारके

English

Thus encouraged, Ganida asked about the descrip¬ tion of Hells, being curious to know about tbeir nature and function.

अध्याय २४२

श्लोक 2

गरुड उवाच ।नरकाणां स्वरूपं मे वद येषु विकर्मिणः ।पात्यन्ते दुः खभूयिष्ठास्तेषां भेदांश्च कीर्तय

garuḍa uvāca / narakāṇāṃ svarūpaṃ me vada yeṣu vikarmiṇaḥ / pātyante duḥ khabhūyiṣṭhāsteṣāṃ bhedāṃśca kīrtaya

हिन्दी अर्थ

नरकके बाद नीचे 'तामस' नरक माना गया है। आभूषणोंसे युक्त, चन्दन आदिकी दिव्य सुगन्ध

English

O Lord, tell me about the nature and division of hells where the evil-doers are thrown mercilessly.

अध्याय २४२

श्लोक 3

श्रीभगवानुवाच ।नरकाणां सहस्राणि वर्तन्ते ह्यरुणानुज ।शक्यं विस्तरतो नैव वक्तुं प्राधान्यतो ब्रुवे

śrībhagavānuvāca / narakāṇāṃ sahasrāṇi vartante hyaruṇānuja / śakyaṃ vistarato naiva vaktuṃ prādhānyato bruve

हिन्दी अर्थ

और पुष्पोंके हारसे सुवासित एवं अलंकृत चमचमाते हुए विमानमें स्वर्गलोकको जाते हैं पुण्य-समाप्तिके पश्चात् जब वे वहाँसे पुनः पृथ्वीपर आते हैं तो राजा अथवा महात्माओंके घरमें जन्म लेकर सदाचारका

English

O younger brother of Aruna, there are thousands of hells. It is not possible to describe all of them in detail. I shall tell you about the principal hells thoroughly.

अध्याय २४२

श्लोक 4

रौरवं नाम नरकं मुख्यं तद्वैनिबोध मे ।रौरवे कूटसाक्षी तु याति यश्चानृती नरः

rauravaṃ nāma narakaṃ mukhyaṃ tadvainibodha me / raurave kūṭasākṣī tu yāti yaścānṛtī naraḥ

हिन्दी अर्थ

पालन करते हैं । समस्त भोगोंको प्राप्त करके पुन: स्वर्गको प्राप्त करते हैं अन्यथा पहलेके समान आरोहिणी-योनिमें जन्म लेकर दुःख भोगते हैं। मृत्युलोकमें जन्म लेनेवाले प्राणीका मरना तो

English

The servants of Yama leave the sinner there in the middle. Burnt by burning fire he runs helter-skelter.

अध्याय २४२

श्लोक 5

योजनानां सहस्रे द्वे रौरवो हि प्रमाणतः ।जानुमात्रप्रमाणं तु तत्र गर्तं सुदुस्तरम्

yojanānāṃ sahasre dve rauravo hi pramāṇataḥ / jānumātrapramāṇaṃ tu tatra gartaṃ sudustaram

हिन्दी अर्थ

निश्चित है। पापियोंका जीव अधोमार्गसे निकलता है। तदनन्तर पृथ्वीतत्त्वमें पृथ्वी, जलतत्त्वमें जल, तेजतत्त्वमें तेज, वायुतत्त्वमें वायु, आकाशतत्त्वमें आकाश तथा सर्वव्यापी मन चन्द्रमें जाकर विलीन

English

There be i$ left along a thousand Yojanas« Then for the purgation of remaining sins he goes to other hells.

अध्याय २४२

श्लोक 6

तत्राङ्गारचयौघेन कृतं तद्धरणीसमम् ।तत्राग्निना सुतीव्रेण तापिताङ्गारभूमिना

tatrāṅgāracayaughena kṛtaṃ taddharaṇīsamam / tatrāgninā sutīvreṇa tāpitāṅgārabhūminā

हिन्दी अर्थ

हो जाता है। है गरुड! शरीरमें काम, क्रोध एवं पञ्चेन्द्रिया हैं । इन सभीको शरीरमें रहनेवाले चोरकी संज्ञा दी गयी है। काम, क्रोध और अहंकार नामक

English

Thus I have told you about the first hell named Raurava. Now, O bird bear about the hell called Mahdraurava.

अध्याय २४२

श्लोक 7

तन्मध्ये पापकर्माणं विमुञ्चन्ति यमानुगाः ।स दह्यमानस्तीव्रेण वह्निना परिधावति

tanmadhye pāpakarmāṇaṃ vimuñcanti yamānugāḥ / sa dahyamānastīvreṇa vahninā paridhāvati

हिन्दी अर्थ

काल है, जो पाप और पुण्यसे जुड़ा रहता है। जिस प्रकार घरके जल जानेपर व्यक्ति अन्य घरकी शरण लेता है, उसी प्रकार पञ्चेन्द्रियोंसे युक्त जीव इन्द्रियाधिष्ठातृ देवताओंके साथ शरीरका परित्याग

English

When heated by it, the earth shines like lightning. It appears extremely fierce to the sinner.

अध्याय २४२

श्लोक 8

पदेपदे च पादो ऽस्य स्फुट्यते शीर्यते पुनः ।अहोरात्रेणोद्धरणं पादन्यासेन गच्छति

padepade ca pādo 'sya sphuṭyate śīryate punaḥ / ahorātreṇoddharaṇaṃ pādanyāsena gacchati

हिन्दी अर्थ

कर नये शरीरमें प्रविष्ट हो जाता है । शरीरमें रक्त- मज्जादि सात धातुओंसे युक्त यह षाट्कौशिक शरीर है। सभी प्राण. अपान आदि पञ्च वायु,

English

The servants of Yama tie hands and feet of the sinner and throw him in this hell where he goes down rolling.

अध्याय २४२

श्लोक 9

एवं सहस्रं विस्तीर्णं योजनानां विमुच्यते ।ततो ऽन्यत्पापशुद्ध्यर्थं तादृङ्निरयमृच्छति

evaṃ sahasraṃ vistīrṇaṃ yojanānāṃ vimucyate / tato 'nyatpāpaśuddhyarthaṃ tādṛṅnirayamṛcchati

हिन्दी अर्थ

मेदा, अस्थि, शुक्र और स्नायु-ये सभी शरीरके साथ ही अग्निमें जलकर भस्म हो जाते हैं।

English

Thus being burnt, he loses his wits and cries rest¬ lessly, *0 father, O father/again and again, but attains no peace.

अध्याय २४२

श्लोक 10

रौरवस्ते समाख्यातः प्रथमो नरको मया ।महारौरवसंज्ञं तु शृणुष्व नरकं खग

rauravaste samākhyātaḥ prathamo narako mayā / mahārauravasaṃjñaṃ tu śṛṇuṣva narakaṃ khaga

हिन्दी अर्थ

हे ताक्ष्य ! प्राणियोंके विनाशको मैंने तुम्हें बता दिया। अब उनके इस शरीरका जन्म पुनः कैसे होता है, उसको मैं तुम्हें बता रहा हूँ ।

English

The persons who have committed sins with bad intentions are thrown into this hell and get release from there only from myriads of years.

अध्याय २४२

श्लोक 11

योजनानां सहस्राणि सन्ति पञ्च समन्ततः ।तत्र ताम्रमयी भूमिरधस्तस्या हुताशनः

yojanānāṃ sahasrāṇi santi pañca samantataḥ / tatra tāmramayī bhūmiradhastasyā hutāśanaḥ

हिन्दी अर्थ

यह शरीर नसोंसे आबद्ध, श्रोत्रादिक इन्द्रियोंसे युक्त और नवद्वारोंसे समन्वित है। यह सांसारिक

English

There in the fierce darkness, the sinners are tied and left, suffering from cold* Meeting each other they clasp lightly.

अध्याय २४२

श्लोक 12

तया तपन्त्या सा सर्वा प्रोद्यद्विद्युत्समप्रभा ।विभाव्यते महारौद्रा पापिनां दर्शनादिषु

tayā tapantyā sā sarvā prodyadvidyutsamaprabhā / vibhāvyate mahāraudrā pāpināṃ darśanādiṣu

हिन्दी अर्थ

विकारसे समन्वित, राग-द्वेषसे परिपूर्ण तथा तृष्णा नामक भयंकर चोरसे युक्त है। यह लोभरूपी जालमें फँसा हुआ और मोहरूपी वस्त्रसे ढका हुआ है। यह मायासे भलीभाँति आबद्ध एवं

English

Shivering with cold their teeth sound loudly. Even there the overpowering trouble of hunger and thirst exists, O Garuda.

अध्याय २४२

श्लोक 13

तस्यां बद्धकराभ्यां च पद्भ्यां चैव यमानुगैः ।मुच्यते पापकृन्मध्ये लुण्ठमानः स गच्छति

tasyāṃ baddhakarābhyāṃ ca padbhyāṃ caiva yamānugaiḥ / mucyate pāpakṛnmadhye luṇṭhamānaḥ sa gacchati

हिन्दी अर्थ

लोभसे अधिष्ठित पुरके समान है । सभी प्राणियोंका शरीर इनसे व्याप्त है। जो लोग अपनी आत्माको नहीं जानते हैं, वे पशुओंके समान हैं।

English

The fierce wind blowing over the blocks of ice pierces the bones. The hungry men consume decayed marrow, blood and bones.

अध्याय २४२

श्लोक 14

काकैर्बकैर्वृकोलूकैर्मशकैर्वृश्चिकैस्तथा ।भक्ष्यमाणैस्तथा रौद्रैर्गतो मार्गे विकृष्यते

kākairbakairvṛkolūkairmaśakairvṛścikaistathā / bhakṣyamāṇaistathā raudrairgato mārge vikṛṣyate

हिन्दी अर्थ

हे गरुड! चौरासी लाख योनियाँ हैं और उद्धिज्ज (पृथ्वीमें अंकुरित होनेवाली वनस्पतियाँ), स्वेदज (पसीनेसे जन्म लेनेवाले जुएँ और लीख आदि कीट), अण्डज (पक्षी) तथा जरायुज (मनुष्य) -

English

Meeting together and clasping each other they wander here and there. The persons who had been hoarding wealth suffer too much in that darkness, O the best of birds.

अध्याय २४२

श्लोक 15

दह्यमानो गतमतिर्भ्रान्तस्तातेति चाकुलः ।वदत्यसकृदुद्वग्नो न शान्तिमधिगच्छति

dahyamāno gatamatirbhrāntastāteti cākulaḥ / vadatyasakṛdudvagno na śāntimadhigacchati

हिन्दी अर्थ

विकार भी उसीमें रहनेवाले चोर हैं। उन सभीका में यह सम्पूर्ण सृष्टि विभक्त है।

English

Those unnen who had caused untold sufferings to men are placed there on the potter's wheeb and rotate incessantly.

अध्याय २४२

श्लोक 16

एवं तस्मान्नरैर्मोक्षस्त्वतिक्रान्तैरवाप्यते ।वर्षायुतायुतैः पापं यैः कृतं दुष्टबुद्धिभिः

evaṃ tasmānnarairmokṣastvatikrāntairavāpyate / varṣāyutāyutaiḥ pāpaṃ yaiḥ kṛtaṃ duṣṭabuddhibhiḥ

हिन्दी अर्थ

नायक मन है। इस शरीरका संहार करनेवाला

English

They remain there for thousands of years tied as they are to ghatijHintro} like the water-pots.

अध्याय २४२

श्लोक 17

तथान्यस्तु ततो नाम सो ऽतिशीतः स्वभावतः ।महारौरववद्दीर्घस्तथान्धतमसा वृतः

tathānyastu tato nāma so 'tiśītaḥ svabhāvataḥ / mahārauravavaddīrghastathāndhatamasā vṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प आसन्नमृत्यु-व्यक्तिके निमित्त किये जानेवाले प्रायश्चित्त ४६३

English

The sinners rotate there vomitting blood again and again. Their intestines come out through mouth and their eyes are suspended by intestines.

अध्याय २४२

श्लोक 18

शीतार्तास्तत्र बध्यन्ते नरास्तमसि दारुणे ।परस्परं समासाद्य परिरभ्याश्रयन्ति ते

śītārtāstatra badhyante narāstamasi dāruṇe / parasparaṃ samāsādya parirabhyāśrayanti te

हिन्दी अर्थ

आसन्नमृत्यु-व्यक्तिके निमित्त किये जानेवाले प्रायश्चित्त, दस दान आदि विविध कर्म, मृत्युके बाद किये जानेवाले कर्म, षट्पिण्डदान, दाह-संस्कारसे पूर्व किये जानेवाले कर्म, दाह-संस्कारके बाद अस्थिसंचयनादि

English

Now hear about another hell named Aaipatravana» where the sinners suffer unbearable miseries.

अध्याय २४२

श्लोक 19

दन्तास्तेषां च भज्यन्ते शीतार्तिपरिकम्पिताः ।क्षुतृषातिबलाः पक्षिन्नथ तत्राप्युपदवाः

dantāsteṣāṃ ca bhajyante śītārtiparikampitāḥ / kṣutṛṣātibalāḥ pakṣinnatha tatrāpyupadavāḥ

हिन्दी अर्थ

कर्म तथा गृहप्रवेशके समयके कर्म, दुर्मृत्युकी गति, नारायण-बलिका

English

Now hear about a more fierce hell called Tapta- kumbha, where all around are kept heated pitchers full of burning fiames.

अध्याय २४२

श्लोक 20

हिमखण्डवहो वायुभिनत्त्यस्थीनि दारुणः ।मज्जासृगस्थिगलितमश्रन्त्यत्र क्षुधान्विताः

himakhaṇḍavaho vāyubhinattyasthīni dāruṇaḥ / majjāsṛgasthigalitamaśrantyatra kṣudhānvitāḥ

हिन्दी अर्थ

तथा पञ्चक-मृत्युके

English

The pitchers are full of burning fire, hot oil and iron filings. Therein are thrown the tinners by the attendants of Yama.

अध्याय २४२

श्लोक 21

आलिङ्ग्यमाना भ्राम्यन्ते परस्परसमागमे ।एवं तत्रापि सुमहान्क्लेशस्तमसि मानवैः

āliṅgyamānā bhrāmyante parasparasamāgame / evaṃ tatrāpi sumahānkleśastamasi mānavaiḥ

हिन्दी अर्थ

श्रीकृष्णने कहा--हे गरुड! जानमें या अनजानमें परिव्याप्त हैं। अत: उस मार्गमें स्थित वैतरणी मनुष्य जो भी पाप करते हैं, उन पापोंकी शुद्धिके नदीको पार करनेके लिये वैतरणी गौका दान लिये उन्हें प्रायश्चित्त करना चाहिए। जो विद्वान् है करना चाहिए। जो गौ सर्वाङ्गमें काली हो, जिसके वह पहले पवित्र करनेवाले भस्म आदि दस स्नान स्तन भी काले हों, उसे वैतरणी गौ माना गया है।

English

They (the attendants ofYama) boil their bodies disintegrating, marrow flowing out, heads, eyes and bones breaking.

अध्याय २४२

श्लोक 22

प्राप्यते शकुनिश्रेष्ठ यो बहूकृतसञ्चयः ।निकृन्तन इति ख्यातस्ततो ऽन्यो नरकोत्तमः

prāpyate śakuniśreṣṭha yo bahūkṛtasañcayaḥ / nikṛntana iti khyātastato 'nyo narakottamaḥ

हिन्दी अर्थ

करे और पापोंके प्रायश्चित्तके रूपमें शास्त्रोक्त तिल, लोहा, स्वर्ण, कपास, लवण, सप्तधान्य, कृच्छादि व्रत अथवा तत्प्रतिनिधिभूत गोदानादि भूमि और गौ--ये पापसे शुद्धिके लिये पवित्रतामें क्रिया करे। यदि मनुष्य उनमें अक्षमताके कारण एकसे बढ़कर एक हें । इन आठ दानोंको महादान सफल न हो रहा हो तो आधा ही सही, यदिकहा जाता है। इनका दान उत्तम प्रकृतिवाले

English

Fierce vultures tear them taking them out and again throwing them in. They boil there dil they are merged into oil.

अध्याय २४२

श्लोक 23

कुलालचक्राणि तत्र भ्राम्यन्त्यविरतं खग ।तेष्वापाष्ये निकृष्यन्ते कालसूत्रेण मानवाः

kulālacakrāṇi tatra bhrāmyantyavirataṃ khaga / teṣvāpāṣye nikṛṣyante kālasūtreṇa mānavāḥ

हिन्दी अर्थ

आधा भी न हो तो उसका ही आधा सही और ब्राह्मणको ही देना चाहिए नहीं तो उस आधेका भी आधा उसे कुछ-न-कुछ तिला लोहं हिरण्यं च कर्पासं लवणं तथा। प्रायश्चित्त अवश्य करना चाहिए तत्पश्चात् यथासामर्थ्यं सप्तधान्यं क्षितिर्गाव एकैकं पावनं स्मृतम्॥ दस प्रकारके दान देनेका विधान है, उसको सुनो। एतान्यष्टौ महादानान्युत्तमाय द्विजातये।

English

When their head, limbs, sinews, flesh, skin and bones are liquefled, then Yama's servants stir them with a ladle.

अध्याय २४२

श्लोक 24

यमानुमाङ्गुलिस्थेन आपादतलमस्तकम् ।न चैषां जीवितभ्रंशो जायते पक्षिसत्तम

yamānumāṅgulisthena āpādatalamastakam / na caiṣāṃ jīvitabhraṃśo jāyate pakṣisattama

हिन्दी अर्थ

गुड, रजत और लवण--ये दस दान हैं- अब पददानका वर्णन सुनो । छत्र, जूता, वस्त्र,

English

The sinners are boiled in oil in Yama*$ abode. Thus I have narrated to you in detail about Tapta*Kumbha, O bird.

अध्याय २४२

श्लोक 25

छिन्नानि तेषां शतशः खण्डान्यैक्यं व्रजन्ति हि ।एवं वर्षसहस्राणि भ्राम्यन्ते पापकर्मिणः

chinnāni teṣāṃ śataśaḥ khaṇḍānyaikyaṃ vrajanti hi / evaṃ varṣasahasrāṇi bhrāmyante pāpakarmiṇaḥ

हिन्दी अर्थ

रजतं लवणं चैव दानानि दश वै विदुः॥ ये आठ प्रकारके पद हैं-- (४।४) छत्रोपानहवस्त्राणि मुद्रिका च कमण्डलुः। यमद्वारपर पहुँचनेके लिये जो मार्ग बताये गये आसनं भाजनं भोज्यं पदं चाष्टविधं स्मृतम्॥ हैं, वे अत्यन्त दुर्गन्धदायक मवादादि तथा रक्तादिसे (४।९)

English

We hear about some other hells also where the sinners fall according to their sins.

अध्याय २४२

श्लोक 26

तावद्यावदशेषं च तत्पापं संक्षयं गतम् ।अप्रातष्ठं च नरकं शृणुष्व गदतो मम

tāvadyāvadaśeṣaṃ ca tatpāpaṃ saṃkṣayaṃ gatam / aprātaṣṭhaṃ ca narakaṃ śṛṇuṣva gadato mama

हिन्दी अर्थ

तिलपात्र, घृतपात्र, शय्या, उपस्कर तथा और भी जो कुछ अपनेको इष्ट हो, वह सब देना चाहिए। अश्व, रथ, भैंस, भोजन, वस्त्रका दान ब्राह्मणोंको करना चाहिए । अन्य दान भी अपनी

English

These dark hells are situated in Yama's country. Herein fall the sinners in the order of their sins.

अध्याय २४२

श्लोक 27

तत्रस्थैर्नारकैर्दुः खमसह्यमनुभूयते ।तान्येव तत्र चक्राणि घटीयन्त्राणि चान्यतः

tatrasthairnārakairduḥ khamasahyamanubhūyate / tānyeva tatra cakrāṇi ghaṭīyantrāṇi cānyataḥ

हिन्दी अर्थ

शक्तिके अनुसार देना चाहिए हे पक्षिराज! इस पृथ्वीपर जिसने पापका प्रायश्चित्त कर लिया है, वह दस प्रकारके दान भी दे चुका है, वैतरणी गौ एवं अष्टदान कर चुका है,

English

These hells, Raurava, etc, lie below the earth. Now hear about the sins which drive the sinners to particular hells.

अध्याय २४२

श्लोक 28

दुः खस्य हेतुभूतानि पापकर्मकृतां नृणाम् ।चक्रेष्वारोपिताः केचिद्भाम्यन्ते तत्र मानवाः

duḥ khasya hetubhūtāni pāpakarmakṛtāṃ nṛṇām / cakreṣvāropitāḥ kecidbhāmyante tatra mānavāḥ

हिन्दी अर्थ

तिलसे भरा पूर्ण पात्र, घीसे भरा हुआ पात्र, शय्यादान और विधिवत् पददान करता है तो वह नरकरूपी गर्भमें नहीं आता है अर्थात् उसका पुनर्जन्म नहीं होता--

English

A man who kills a cow, a foetus or indulges in arson, falls in Rodha. A killer of brahmaa falls in Sukara. So also a drunkard, a stealer of gold, a killer of k»triya or vaiiya falls in Tala.

अध्याय २४२

श्लोक 29

यावद्वर्षसहस्राणि न तेषां स्थितिरन्तरा ।घटीयन्त्रेषु बद्वा ये बद्धा तोयवटी यथा

yāvadvarṣasahasrāṇi na teṣāṃ sthitirantarā / ghaṭīyantreṣu badvā ye baddhā toyavaṭī yathā

हिन्दी अर्थ

पण्डित लोग स्वतन्त्र रूपसे भी लवण दान करनेकी इच्छा रखते हैं, क्योंकि यह लवण-रस विष्णुके शरीरसे उत्पन्न हुआ है, इस पृथ्वीपर मरणासन्न प्राणीके प्राण जब न निकल रहे हों तो

English

He who kills a brahmaa or defiles his teacher's bed or has sexual union with his sister falls in Taptakumbha. So also a soldier who speaks lies.

अध्याय २४२

श्लोक 30

भ्राम्यन्ते मानवा रक्तमुद्गिरन्तः पुनः पुनः ।अन्त्रैर्मुखविनिष्क्रान्तैर्नेत्रैरन्त्रावलम्बिभैः

bhrāmyante mānavā raktamudgirantaḥ punaḥ punaḥ / antrairmukhaviniṣkrāntairnetrairantrāvalambibhaiḥ

हिन्दी अर्थ

उस समय लवण-रसका दान उसके हाथसे दिलवाना चाहिए; क्योंकि यह दान उसके लिये स्वर्गलोकके द्वार खोल देता है। मनुष्य स्वयं जो कुछ दान देता है, परलोकमें वह सब उसे प्राप्त होता है। वहाँ

English

In the similar way, he who sells liquor or he who discards a devotee also falls there.

अध्याय २४२

श्लोक 31

दुः खानि प्राप्नुवन्तीह यान्यसह्यानि जन्तुभिः ।असिपत्रवनं नाम नरकं शृणु चापरम्

duḥ khāni prāpnuvantīha yānyasahyāni jantubhiḥ / asipatravanaṃ nāma narakaṃ śṛṇu cāparam

हिन्दी अर्थ

उसके आगे रखा हुआ मिलता है। है पक्षिन्! जिसने यथाविधि अपने पापोंका प्रायश्चित्त कर

English

He who co-habits with his daughter or daughter-in- law, he who sells Veda, or he who blames the Vedas falls into Mahajvftla.

अध्याय २४२

श्लोक 32

योजनानां सहस्रं यो ज्वलत्यग्न्याशृतावनिः ।सप्ततीव्रकराश्चैण्डर्यत्र तीव्र सुदारुणे

yojanānāṃ sahasraṃ yo jvalatyagnyāśṛtāvaniḥ / saptatīvrakarāścaiṇḍaryatra tīvra sudāruṇe

हिन्दी अर्थ

तिलादिक आठ प्रकारके दान देकर प्राणी गन्धर्वलोकमें निवास करता है । यमलोकका मार्ग अत्यधिक भीषण तापसे युक्त है, अत: छत्रदान करना चाहिए। छत्रदान करनेसे मार्गमें सुख प्रदान

English

He who transgresses codes of moral conduct prescrib¬ ed for the conduct of war falb into Vimohana. He who does am undesirable act falls into Kfmibhakt*

अध्याय २४२

श्लोक 33

प्रतपन्ति सदा तत्र प्राणिनो नरकौकसः ।तन्मध्ये चरणं शीतस्निग्धपत्रं विभाष्यते

pratapanti sadā tatra prāṇino narakaukasaḥ / tanmadhye caraṇaṃ śītasnigdhapatraṃ vibhāṣyate

हिन्दी अर्थ

करनेवाली छाया प्राप्त होती है। जो मनुष्य इस जन्ममें पादुकाओंका दान देता है, वह ' असिपत्रवन 'के मार्गको घोड़ेपर सवार होकर सुखपूर्वक पार करता है। भोजन और आसनका दान देनेसे प्राणीको

English

He who drinks wine falb into Vaitaranl. He who calb others by bad names falb into Mutra.

अध्याय २४२

श्लोक 34

पत्राणि यत्र खण्डानि फलानां पक्षिसत्तम ।श्वानश्च तत्र सुबलाश्चरन्त्यामिषभोजनाः

patrāṇi yatra khaṇḍāni phalānāṃ pakṣisattama / śvānaśca tatra subalāścarantyāmiṣabhojanāḥ

हिन्दी अर्थ

परलोकगमनके मार्गमें सुखका उपभोग प्राप्त होता है । जलसे परिपूर्ण कमण्डलुका दान देनेवाला पुरुष सुखपूर्वक परलोकगमन करता है।

English

He who has not lived a pious life falls into Asica- patravana* So also he who b hot-tempered. A deer-hunter falls into Agnijv&Ia where he b eaten by the crows.

अध्याय २४२

श्लोक 35

महावक्त्रा महादंष्ट्रा व्याघ्रा इव महाबलाः ।ततश्च वनमालोक्य शिशिरच्छायमग्रतः

mahāvaktrā mahādaṃṣṭrā vyāghrā iva mahābalāḥ / tataśca vanamālokya śiśiracchāyamagrataḥ

हिन्दी अर्थ

यमराजके दूत महाक्रोधी और महाभयंकर हैं। काले एवं पीले वर्णवाले उन दूतोंको देखनेमात्रसे भय लगने लगता है। उदारतापूर्वक वस्त्र- आभूषणादिका दान करनेसे वे यमदूत प्राणीको

English

The person who breaks bis vow during the course of sacrifice &)ls into Sandvhia. So sJso brahmac&rins who discharge their semen in dream.

अध्याय २४२

श्लोक 36

प्रयान्ति प्राणिनस्तत्र क्षुत्तापपरिपीडिताः ।मातर्भ्रातस्तात इति क्रन्दमानाः सुदुः खिताः

prayānti prāṇinastatra kṣuttāpaparipīḍitāḥ / mātarbhrātastāta iti krandamānāḥ suduḥ khitāḥ

हिन्दी अर्थ

कष्ट नहीं देते हैं। तिलसे भरे हुए पात्रका जो दान ब्राह्मणको दिया जाता है, वह मनुष्यके मन, वाणी और शरीरके द्वारा किये गये त्रिविध पापोंका विनाश कर देता है। मनुष्य घृतपात्रका दान करनेसे

English

Those who perform acts ricdadng the rules of their Varpa and Airamai on account anger or pleasure go to hell.

अध्याय २४२

श्लोक 37

दह्यमानाङ्घ्रियुगला धरणिस्थेन वह्निना ।तेषां गतानां तत्रापि अति शीतिः समीरणः

dahyamānāṅghriyugalā dharaṇisthena vahninā / teṣāṃ gatānāṃ tatrāpi ati śītiḥ samīraṇaḥ

हिन्दी अर्थ

रुद्रलोक प्राप्त करता है । ब्राह्मणको सभी साधनोंसे युक्त शय्याका दान करके मनुष्य स्वर्गलोकमें नाना प्रकारकी अप्सराओंसे युक्त विमानमें चढ़कर साठ हजार वर्षतक अमरावतीमें क्रीडा करके इन्द्रलोकके

English

In tbU way, the helb are situated one below the other. The climax of misery b due to bad acts.

अध्याय २४२

श्लोक 38

प्रवाति तेन पात्यन्ते तेषां खड्गास्तथोपरि ।छिन्नाः पतन्ति ते भूमौ ज्वलत्पावकसंचये

pravāti tena pātyante teṣāṃ khaḍgāstathopari / chinnāḥ patanti te bhūmau jvalatpāvakasaṃcaye

हिन्दी अर्थ

बाद गिरकर पुन: इस पृथ्वीलोकमें आकर राजाका पद प्राप्त करता है। जो मनुष्य काठी आदि उपकरणोंसे सजे-धजे, दोषरहित जवान घोड़ेका दान ब्राह्मणको देता है, उसको स्वर्गकी प्राप्ति

English

The sinners of hell also look up and see the gods above. There are thus hundreds of heUs» O bird.

अध्याय २४२

श्लोक 39

लेलिह्यमाने चान्यत्र तप्ताशेषमहीतले ।सारमेयाश्च ते शीघ्रं शातयन्ति शरीरतः

lelihyamāne cānyatra taptāśeṣamahītale / sārameyāśca te śīghraṃ śātayanti śarīrataḥ

हिन्दी अर्थ

लिया है, वही पुरुष है। वही अपने पापोंको होती है। है खगेश! दानमें दिये गये इस घोडेके भस्मसात् करके स्वर्गलोकमें सुखपूर्वक निवास शरीरमें जितने रोम होते हैं, उतने वर्ष (कालतक)

English

If born as a human being he becomes hunch*backed or a dwarf or a cindkla in wretched yonis.

अध्याय २४२

श्लोक 40

तेषां खण्डान्यनेकानि रुदतामतिभीषणे ।असिपत्रवनं तात मयैतत्परिकीर्तितम्

teṣāṃ khaṇḍānyanekāni rudatāmatibhīṣaṇe / asipatravanaṃ tāta mayaitatparikīrtitam

हिन्दी अर्थ

स्वर्गके लोकोंका भोग दानदाताको प्राप्त होता है ।

English

Then some time he steps into the yont of Sfidra or VaUya or Ksatriya or Brlthmana or a deity.

अध्याय २४२

श्लोक 41

अतः परं भीमतरं तप्तकुंभं निबोध मे ।समन्ततस्तप्तकुम्भा वह्निज्वालासमन्विताः

ataḥ paraṃ bhīmataraṃ taptakuṃbhaṃ nibodha me / samantatastaptakumbhā vahnijvālāsamanvitāḥ

हिन्दी अर्थ

हे खगराज! गौका दूध अमृत है । इसलिये जो प्राणी ब्राह्मणको सभी उपकरणोंसे युक्त चार घोड़ोंवाले मनुष्य दूध देनेवाली गौका दान देता है, वह रथका दान दे करके राजसूय यज्ञका फल प्राप्त अमृतत्वको प्राप्त करता है। पहले कहे गये करता है। यदि कोई व्यक्ति सुपात्र ब्राह्मणको

English

Thus I have told you how a sinner falls into hell. Now I shall tell you how and where the virtuous go after death.

अध्याय २४२

श्लोक 42

ज्वलदग्निचयास्तप्ततैलायश्चूर्णपूरिताः ।एषु दुष्कृतकर्माणो याम्यैः क्षिप्ता ह्यधोमुखाः

jvaladagnicayāstaptatailāyaścūrṇapūritāḥ / eṣu duṣkṛtakarmāṇo yāmyaiḥ kṣiptā hyadhomukhāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प आसन्नमृत्यु-व्यक्तिके निमित्त किये जानेवाले प्रायश्चित्त ४६५

English

The virtuous obtain good yonis as directed by Yama. Immediately after the soul leaves the body, the Gandharvas come singing and dancing, adorned with garlands and anklets.

अध्याय २४२

श्लोक 43

क्वाथ्यन्ते विस्फुटद्गात्रा गलन्मज्जाजलान्विताः ।स्फुटत्कपालेनत्रास्थिच्छिद्यमाना विभीषणैः

kvāthyante visphuṭadgātrā galanmajjājalānvitāḥ / sphuṭatkapālenatrāsthicchidyamānā vibhīṣaṇaiḥ

हिन्दी अर्थ

दुग्धवती, नवीन मेघके समान वर्णवाली, सुन्दर आसन्नमरणो मर्त्यश्चेत्तीर्थ प्रतिनीयते। जघन-प्रदेशसे युक्त और मनमोहक तिलकसे समन्वित तीर्थप्राप्तौ भवेन्मुक्तिग्रियते यदि मार्गगः। भेंसका दान देता है तो वह परलोकमें जाकर पदे पदे क्रतुसमं भवेत्तस्य न संशयः॥ अभ्युदयको प्राप्त करता है, इसमें कोई संदेह नहीं है (४1३८)

English

And then appear splendid aerial cars decorated widi sweet smelling garlands (which take the virtuous souls to heaven).

अध्याय २४२

श्लोक 44

गृध्रैरुत्पाट्य मुच्यन्ते पुनस्तेष्वेव वेगितैः ।पुनश्चिमचिमायन्ते तैलनैक्यं व्रजन्ति च

gṛdhrairutpāṭya mucyante punasteṣveva vegitaiḥ / punaścimacimāyante tailanaikyaṃ vrajanti ca

हिन्दी अर्थ

तालपत्रसे बने हुए पंखेका दान करनेसे मनुष्यको है द्विज! मृत्युके निकट आ जानेपर जो मनुष्य परलोकगमनके मार्गमें वायुका सुख प्राप्त होता है । विधिवत् उपवास करता है, वह भी मृत्युके पश्चात् वस्त्र-दान करनेसे व्यक्ति परलोकमें शोभासम्पन्न पुनः इस संसारमें नहीं लौटता है। शरीर और उस लोकके वैभवसे सम्पन्न हो जाता है खगेश! मृत्युके संनिकट होनेपर कौन-सा

English

Earth mingles with earth, water with water, fire with fire, air with air.

अध्याय २४२

श्लोक 45

द्रवीभूतैः शिरोगात्रैः स्नायुमांसत्वगास्थिभिः ।ततो याम्यैर्नरैराशु दर्व्याघट्टनघट्टिताः

dravībhūtaiḥ śirogātraiḥ snāyumāṃsatvagāsthibhiḥ / tato yāmyairnarairāśu darvyāghaṭṭanaghaṭṭitāḥ

हिन्दी अर्थ

है। जो प्राणी ब्राह्मणको रस, अन्न तथा अन्य दान करना चाहिए। इस प्रश्नका उत्तर मैंने बता सामग्रियोंसे युक्त घरका दान देता है, उसके वंशका दिया है। मृत्यु और दाहके बीच मनुष्यके क्या कभी विनाश नहीं होता है और वह स्वयं स्वर्गका कर्तव्य हैं ? इस प्रश्नका उत्तर अब तुम सुनो। सुख प्राप्त करता है। है खगेन्द्र! इन बताये गये व्यक्तिको मरा हुआ जानकर उसके पुत्रादिक

English

Sky mingles with sky, pervading all around. In the body there exist love, anger and five organs*

अध्याय २४२

श्लोक 46

कृतावर्ते महातैले क्वाथ्यन्ते पापकर्मिणः ।एष ते विस्तरेणोक्तस्तप्तकुम्भो मया खग

kṛtāvarte mahātaile kvāthyante pāpakarmiṇaḥ / eṣa te vistareṇoktastaptakumbho mayā khaga

हिन्दी अर्थ

सभी प्रकारके दानोंमें प्राणीकी श्रद्धा तथा अश्रद्धासे परिजनोंको चाहिए कि वे सभी शवको शुद्ध आयी हुई दानको अधिकता और कमीके कारण जलसे स्नान कराकर नवीन सस्त्रसे आच्छादित उसके फलमें श्रेष्ठता और लघुता आती है। करें । तदनन्तर उसके शरीरमें चन्दन आदि सुगन्धित इस लोकमें जिस व्यक्तिने जल एवं रसका पदार्थोका अनुलेप भी करें। उसके बाद जहाँ मृत्यु

English

O Garua, there abide thieves in the body in the form of lovei anger and pride. Mind is the leader T>f all these.

अध्याय २४२

श्लोक 47

आदिमो रौरवः प्रोक्तो महारौरवको ऽपरः ।अतिशीतस्तृतीयस्तु चतुर्थो हि निकृन्तनः

ādimo rauravaḥ prokto mahārauravako 'paraḥ / atiśītastṛtīyastu caturtho hi nikṛntanaḥ

हिन्दी अर्थ

दान किया है, वह आपद्कालमें आह्वादका अनुभव हुई है, उसी स्थानपर एकोद्दिष्ट श्राद्ध" करना करता है। जिस मनुष्यने श्रद्धापूर्वक इस संसारमें चाहिए। दाहकर्मके पूर्व शवको दाहके योग्य अन्न-दान दिया है, बह परलोकमें अन्न-भक्षणके बनानेके लिये ऊपर बताये गये कर्म अनिवार्य हैं। बिना भी वही तृप्ति प्राप्त करता है, जो उत्तमोत्तम इस एकोद्दिष्ट श्राद्धमें आसन तथा प्रोक्षण क्रिया

English

These qualities inhere in the bodies of all creatures. Those who do not realize their self are nothing more than beasts.

अध्याय २४२

श्लोक 48

अप्रतिष्ठः पञ्चमः स्यादसिपत्रवनो ऽपरः ।सप्तमस्तप्तकुम्भस्तु सप्तैते नरका मताः

apratiṣṭhaḥ pañcamaḥ syādasipatravano 'paraḥ / saptamastaptakumbhastu saptaite narakā matāḥ

हिन्दी अर्थ

अन्नके भक्षणसे प्राप्त होती है। मृत्युके संनिकट होनी चाहिए, किंतु आवाहन, अर्चन, पात्रालम्भन आ जानेपर यदि मनुष्य यथाविधि संन्यासाश्रमको और अवगाहन-ये चार क्रियाएँ नहीं करनी ग्रहण कर लेता है तो वह पुनः इस संसारमें नहीं चाहिए। उस समय पिण्डदान अनिवार्य है, आता, अपितु उसको मोक्ष प्राप्त हो जाता है। अन्नदानका संकल्प भी हो सकता है। रेखाकरण,

English

Thus I have told you about the fourfold body. Formerly, eightyfour yonis were created [for the jiva to pass through].

अध्याय २४२

श्लोक 49

श्रूयन्तेन्यान्यपि तथा नरकाणि नराधमाः ।कर्मणां तारतम्येन तेषुतेषु पतन्ति हि

śrūyantenyānyapi tathā narakāṇi narādhamāḥ / karmaṇāṃ tāratamyena teṣuteṣu patanti hi

हिन्दी अर्थ

यदि मृत्युके समीप पहुँचे हुए मनुष्यको लोग प्रत्यवनेजन नहीं होता और दिये गये पदार्थके किसी पवित्र तीर्थमें ले जाते हैं और उसकी मृत्यु अक्षय्यकी कामना करनी चाहिए। अक्षय्योदक उसी तीर्थमें हो जाती है तो उसको मुक्ति प्राप्त दान देना चाहिए। स्वधावाचन, आशीर्वाद और होती है तथा यदि प्राणी मार्गके बीच ही मर जाता तिलक--ये तीन नहीं होने चाहिए। उड़दसे

English

While narrating about the hell I told you about all these—that are born from the earth, from the sweat, from the eggs and from the embryo.

अध्याय २४२

श्लोक 50

तथा हि नरको रोधः शूकरस्ताल एव च ।तप्तकुम्भो महाज्वालः शबलो ऽथ विमोहनः

tathā hi narako rodhaḥ śūkarastāla eva ca / taptakumbho mahājvālaḥ śabalo 'tha vimohanaḥ

हिन्दी अर्थ

है तो भी मुक्ति प्राप्त करता ही है, साथ ही उसको परिपूर्ण घट और लोहेकी दक्षिणा ब्राह्मणको तीर्थतक ले जानेवाले लोग पग-पगपर यज्ञ करनेके प्रदान करनेका विधान है । तत्पश्चात् पिण्ड हिलाना समान फल प्राप्त करते हैं-- चाहिए। किंतु उस समय आच्छादन, विसर्जन

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 51

क्रिमिश्च क्रिमभक्षश्च लालाभक्षो विषञ्जनः ।अधः शिराः पूयवहो रुधिरान्धश्च विड्रभुजः

krimiśca krimabhakṣaśca lālābhakṣo viṣañjanaḥ / adhaḥ śirāḥ pūyavaho rudhirāndhaśca viḍrabhujaḥ

हिन्दी अर्थ

यहाँ एकोद्दिष्टका तात्पर्य मरणस्थानपर यथाविधान एक पिण्डके दानसे है।

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 52

तथा वैतरणी सू (मू) मसिपत्रवनं तथा ।अग्निज्वालो महाघोरः सन्दंशो वाप्यभोजनः

tathā vaitaraṇī sū (mū) masipatravanaṃ tathā / agnijvālo mahāghoraḥ sandaṃśo vāpyabhojanaḥ

हिन्दी अर्थ

तथा स्वस्तिवाचन-ये तीन वर्जित हैं। है खगेश! मरणस्थान, द्वार, चत्वर, बिश्रामस्थान, काष्ठ-चयन और अस्थि-संचयन--ये छः पिण्डदानके स्थान हैं। प्राणीकी मृत्यु जिस स्थानपर होती है, वहाँपर

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 53

तमश्च कालसूत्रं च लोहश्चाप्यभिदस्तथा ।अप्रतिष्ठो ऽप्यवीचिश्च नरका एवमादयः

tamaśca kālasūtraṃ ca lohaścāpyabhidastathā / apratiṣṭho 'pyavīciśca narakā evamādayaḥ

हिन्दी अर्थ

दिये जानेवाले पिण्डका नाम 'शव' है, उससे भूमिदेवताकी तुष्टि होती है। द्वापर जो पिण्ड दिया जाता है उसे “पान्थ' नामक पिण्ड कहते हैं । इस कर्मको करनेसे वास्तुदेवताको प्रसन्नता होती

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 54

तामसा नरकाः सर्वे यमस्य विषये स्थिताः ।येषु दुष्कृतकर्माणः पतन्ति हि पृथक्पृथक्

tāmasā narakāḥ sarve yamasya viṣaye sthitāḥ / yeṣu duṣkṛtakarmāṇaḥ patanti hi pṛthakpṛthak

हिन्दी अर्थ

है। चत्वर अर्थात् चौराहेपर ' खेचर' नामक पिण्डका दान करनेपर भूतादिक, गगनचारी देवतागण प्रसन्न होते हैं। शवके विश्राम भूमिमें ' भूत-संज्ञक' पिण्डका दान करनेसे दसों दिशाओंको संतुष्टि प्राप्त होती है।

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 55

भूमेरधस्तात्ते सर्वे रौरवाद्याः प्रकीर्तिताः ।रोघो गोघ्नो भ्रूणहा च अग्निदाता नरः पतेत्

bhūmeradhastātte sarve rauravādyāḥ prakīrtitāḥ / rogho goghno bhrūṇahā ca agnidātā naraḥ patet

हिन्दी अर्थ

चितामें 'साधक' नामका और अस्थि-संचयनमें 'प्रेत-संज्ञक' पिण्ड दिया जाता है।

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 56

सूकरे ब्रह्महा मज्जेत्सुरापः स्वर्णतस्करः ।ताले पतेत्क्षत्त्रहन्ता हत्वा वैश्यं च दुर्गतिः

sūkare brahmahā majjetsurāpaḥ svarṇataskaraḥ / tāle patetkṣattrahantā hatvā vaiśyaṃ ca durgatiḥ

हिन्दी अर्थ

शवयात्राके समय पुत्रादिक परिजन तिल, कुश, घृत और ईधन लेकर “यमगाथा' अथवा वेदके “यमसूक्त' का पाठ करते हुए श्मशानभूमिकी ओर जाते हैं। प्रतिदिन गौ, अश्व, पुरुष और बैल आदि

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 57

ब्रह्महत्यां च यः कुर्याद्यश्च स्याद्गुरुतल्पगः ।स्वसृगामी तप्तकुम्भी तथा राजभटो ऽनृती

brahmahatyāṃ ca yaḥ kuryādyaśca syādgurutalpagaḥ / svasṛgāmī taptakumbhī tathā rājabhaṭo 'nṛtī

हिन्दी अर्थ

चराचर प्राणियोंको अपनी ओर खींचते हुए यम संतुष्ट नहीं होते हैं, जिस प्रकार कि मद्य पीनेवाला संतुष्ट नहीं होतां ।

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 58

तप्तलोहैश्च विक्रेता तथा बन्धनरक्षिता ।माध्वी विक्रयकर्तां च यस्तु भक्तं परित्यजेत्

taptalohaiśca vikretā tathā bandhanarakṣitā / mādhvī vikrayakartāṃ ca yastu bhaktaṃ parityajet

हिन्दी अर्थ

ॐ अपेतेति०' इस यम॑सूक्तका अथवा “यमगाथा 'का पाठ शवयात्राके मार्गमें करना चाहिए। सभी बन्धु-बान्धवोंको दक्षिण दिशामें स्थित श्मशानको वनभूमिमें शवको ले जाना चाहिए। हे

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 59

महाज्वाली दुहितरं स्नुषां गच्छति यस्तु वै ।वेदो विक्रीयते यैश्च वेदं दूषयते तु यः

mahājvālī duhitaraṃ snuṣāṃ gacchati yastu vai / vedo vikrīyate yaiśca vedaṃ dūṣayate tu yaḥ

हिन्दी अर्थ

पक्षिन्! पूर्वोक्त विधिसे मार्गमें दो श्राद्ध करना चाहिए उसके बाद श्मशानभूमिमें पहुँचकर धीरेसे

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 60

गुरुं चैवावमन्यन्ते वाक्शरैस्ताडयन्ति च ।अगम्यागामी च नरो नरकं शबलं व्रजेत्

guruṃ caivāvamanyante vākśaraistāḍayanti ca / agamyāgāmī ca naro narakaṃ śabalaṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

और घृत आदि ले जाना चाहिए। शूद्रोंके द्वारा श्मशानमें पहुँचायी गयी वस्तुओंसे वहाँ किया गया सम्पूर्ण कर्म निष्फल हो जाता है । वहाँपर सभी कर्म अपसव्य और दक्षिणाभिमुख होकर करना

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 61

विमोहे पतते शूरे मर्यादां यो भिनत्ति वै ।दुरिष्टं कुरुते यस्तु कृमिभक्षं प्रपद्यते

vimohe patate śūre maryādāṃ yo bhinatti vai / duriṣṭaṃ kurute yastu kṛmibhakṣaṃ prapadyate

हिन्दी अर्थ

चाहिए । है पक्षिराज! शास्त्रसम्मत विधिके अनुसार एक वेदीका निर्माण करना चाहिए । तदनन्तर प्रेतवस्त्र अर्थात् कफनको दो भागोंमें फाड़ कर उसके आधे भागसे उस शवको ढक दे और दूसरे भागको

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 62

देवब्राह्मणविद्वेष्टा लालाभक्षे पतत्यपि ।कुण्डकर्ता कुलालश्च न्यासहर्ता चिकित्सकः

devabrāhmaṇavidveṣṭā lālābhakṣe patatyapi / kuṇḍakartā kulālaśca nyāsahartā cikitsakaḥ

हिन्दी अर्थ

श्मशानमें निवास करनेवाले प्राणीके लिये भूमिपर ही छोड़ दे। उसके बाद पूर्वोक्त विधिके अनुसार मरे हुए व्यक्तिके हाथमें पिण्डदान करे। तदनन्तर शवके सम्पूर्ण शरीरमें घृतका लेप करना चाहिए।

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 63

आरामेष्वग्निदाता च एते यान्ति विषञ्जने ।असत्प्रतिग्रही यस्तु तथैवायाज्ययाजकः

ārāmeṣvagnidātā ca ete yānti viṣañjane / asatpratigrahī yastu tathaivāyājyayājakaḥ

हिन्दी अर्थ

हे खगेश! प्राणीकी मृत्यु और दाह-संस्कारके बीच पिण्डदानकी जो विधि है, अब उसे सुनो।

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 64

न क्षत्त्रैर्जोवते यस्तु नरो गच्छेदधोमुखम् ।क्षीरं सुरां च मासं लाक्षां गन्धं रसं तिलान्

na kṣattrairjovate yastu naro gacchedadhomukham / kṣīraṃ surāṃ ca māsaṃ lākṣāṃ gandhaṃ rasaṃ tilān

हिन्दी अर्थ

विश्रामस्थान तथा काष्ठसंचयनस्थानमें प्रदत्त पाँच पिण्डोंका दान करनेसे शवमें की आहुति (अग्निदाह)- की योग्यता आ जाती है, अथवा किसी प्रकारके प्रतिबन्धके कारण उपर्युक्त पिण्ड नहीं दिये गये तो

English

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अध्याय २४२

श्लोक 65

एवमादीनि विक्रीणन् घोरे पूयवहे पतेत् ।यः कुक्कुटान्निबध्नाति मार्जारान् सूकरांश्च तान् ।पक्षिणश्च मृगांश्छा गान्सो ऽप्येवं नरकं व्रजेत्

evamādīni vikrīṇan ghore pūyavahe patet / yaḥ kukkuṭānnibadhnāti mārjārān sūkarāṃśca tān / pakṣiṇaśca mṛgāṃśchā gānso 'pyevaṃ narakaṃ vrajet

हिन्दी अर्थ

शव राक्षसोंके भक्षण योग्य हो जाता है। अतः स्वच्छ भूमिपर बनी हुई वेदीको भलीभाँति मार्जन, उपलेपनके द्वारा शुद्ध कर उसके ऊपर यथाविधि अग्निको स्थापित करना चाहिए। तदनन्तर पुष्प-

English

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अध्याय २४२

श्लोक 66

आजाविको माहिषिकस्तथा चक्री ध्वजी च यः ।रङ्गोपजीविको विप्रः शाकुनिर्ग्रामयाजकः

ājāviko māhiṣikastathā cakrī dhvajī ca yaḥ / raṅgopajīviko vipraḥ śākunirgrāmayājakaḥ

हिन्दी अर्थ

अक्षत आदिसे क्रव्याद नामवाले अग्निदेवकी विधिवत् पूजा करके दाह करे । दाहकार्यमें चाण्डालके घरकी अग्नि, चिताकी अग्निऔर पापीके घरकी अग्निका प्रयोग नहीं करना चाहिए और निम्नलिखित मंत्रसे

English

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अध्याय २४२

श्लोक 67

अगारदाही गरदः कुण्डाशी सोमविक्रयी ।सुरापो मांसभक्षी च तथा च पशुघातकः

agāradāhī garadaḥ kuṇḍāśī somavikrayī / surāpo māṃsabhakṣī ca tathā ca paśughātakaḥ

हिन्दी अर्थ

शवको पृथ्वीपर उतारते हुए दक्षिण दिशाको ओर अग्निको प्रार्थना करनी चाहिए सिर स्थापित कर चिताभूमिमें पूर्वोक्त विधिके त्वं भूतकृज्जगद्योनिस्त्वं लोकपरिपालकः॥

English

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अध्याय २४२

श्लोक 68

रुधिरान्धे पतन्त्येते पतन्त्येते एवमाहुर्मनीषिणः ।उपविष्टन्त्वेकपङ्क्त्यां विषं सम्भोजयन्ति ये

rudhirāndhe patantyete patantyete evamāhurmanīṣiṇaḥ / upaviṣṭantvekapaṅktyāṃ viṣaṃ sambhojayanti ye

हिन्दी अर्थ

अनुसार श्राद्ध करना चाहिए। शव-दाहकी क्रियाके लिये पुत्रादिक परिजनोंको स्वयं तृण, काष्ठ, तिल

English

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अध्याय २४२

श्लोक 69

पतन्ति निरये घोरे विड्भुजे नात्र संशयः ।मधुग्राहो वैतरणीमाक्रोशी मूत्रसंज्ञके

patanti niraye ghore viḍbhuje nātra saṃśayaḥ / madhugrāho vaitaraṇīmākrośī mūtrasaṃjñake

हिन्दी अर्थ

-अहरहर्नीयमानो गामश्रं पुरुष वृषम्। वैवस्वतो न तृप्येत सुरया त्विव दुर्मतिः ॥ (४1५३) इसीका नाम यमगाथा है।

English

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अध्याय २४२

श्लोक 70

असिपत्रवने ऽसौची क्रोधनश्च एतेदपि ।अग्निज्वालां मृगव्याधो भोज्यते यत्र वायसैः

asipatravane 'saucī krodhanaśca etedapi / agnijvālāṃ mṛgavyādho bhojyate yatra vāyasaiḥ

हिन्दी अर्थ

२-यजु०अ० ३५ “यमसूक्त' कहलाता है।

English

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अध्याय २४२

श्लोक 71

इज्यायां व्रतलोपाच्च सन्दंशे नरके पतेत् ।स्कन्दन्ते यदि वा स्वप्ने यतिनो ब्रह्मचारिणः

ijyāyāṃ vratalopācca sandaṃśe narake patet / skandante yadi vā svapne yatino brahmacāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प आसन्नमृत्यु-व्यक्तिके निमित्त किये जानेवाले प्रायश्चित्त ४६७

English

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अध्याय २४२

श्लोक 72

पुत्रैरध्यापिता ये च पुत्रैराज्ञापिताश्च ये ।ते सर्वे नरकं यान्ति निरयं चाप्यभोजनम्

putrairadhyāpitā ye ca putrairājñāpitāśca ye / te sarve narakaṃ yānti nirayaṃ cāpyabhojanam

हिन्दी अर्थ

“हे देव! आप भूतकृत् हैं। है देव! आप इस जलमें मौन धारणपूर्वक प्रवेश करें और यथाधिकार संसारके योनिस्वरूप और सभीके पालनहार हैं। एक वस्त्र होकर अपनी शिखा खोलकर तथा इसलिये आप इस शवका अपनेमें उपसंहार करके अपसव्य होकर स्नान करें। यह स्नान दक्षिणाभिमुख अमृतस्वरूप स्वर्गमें ले जाइये'। होकर ' अपनः शोशुंचदघम्' इस वेदमन्त्रका उच्चारण

English

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अध्याय २४२

श्लोक 73

वर्णाश्रमविरुद्धानि क्रोधहर्षसमन्विताः ।कर्माणि ये तु कुर्वन्ति सर्वे निरयवासिनः

varṇāśramaviruddhāni krodhaharṣasamanvitāḥ / karmāṇi ye tu kurvanti sarve nirayavāsinaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार क्रव्याद देवकी विधिवत् पूजा कर करते हुए करना चाहिए। उस समय स्नान करनेवाले शवको चिताकी अग्निमें जलानेका उपक्रम करना लोगोंको जलका आलोडन नहीं करना चाहिए। चाहिए। जब शवके शरीरका आधा भाग उस तत्पश्चात् किनारे आ करके अपनी शिखाको बाँध अग्निमें जल जाय तो उस समय क्रिया करनेवाले ले और सीधे कुशको दक्षिणाग्र करके दोनों

English

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अध्याय २४२

श्लोक 74

उपरिष्टात्स्थितो घोर उष्णात्मा रौरवो महान् ।सुदारुणः सुशीतात्मा तस्या धस्तामसः स्मृतः

upariṣṭātsthito ghora uṣṇātmā rauravo mahān / sudāruṇaḥ suśītātmā tasyā dhastāmasaḥ smṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

व्यक्तिको निम्नलिखित मन्त्रका उच्चारण करना हाथोमें रखकर अञ्जलिसे तिलयुक्त जल लेकर चाहिए-- पितृतीर्थसे दक्षिण दिशामें एक बार, तीन बार

English

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अध्याय २४२

श्लोक 75

एवमादिक्रमेणैव सर्वे ऽधो ऽधः परिस्थिताः ।दुः खोत्कर्षश्च सर्वेषु कर्मस्वपि निमित्ततः

evamādikrameṇaiva sarve 'dho 'dhaḥ paristhitāḥ / duḥ khotkarṣaśca sarveṣu karmasvapi nimittataḥ

हिन्दी अर्थ

'असौ स्वर्गाय लोकाय ०॥ करे। इस समय तिलाझ्जलि देनेवाले परिजनोंको (४।६६-६७) कहना चाहिए कि ' है अमुक गोत्रमें उत्पन्न अमुक अर्थात् है देव! आप इसीसे उत्पन्न हुए हैं । यह नामवाले प्रेत! तुम मेरे द्वारा दिये जा रहे इस शरीरी पुनः आपसे उत्पन्न हो। अमुक नामवाला तिलोदकसे संतृप्त हो। मैं तुम्हें तिलाञ्जलि दे रहा

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

अध्याय २४२

श्लोक 76

सुखोत्कर्षश्च सर्वत्र धर्मस्येहनिमिततः ।पश्यन्तिनरकान्देवा ह्यधोवक्त्रान्सुदारुणान्

sukhotkarṣaśca sarvatra dharmasyehanimitataḥ / paśyantinarakāndevā hyadhovaktrānsudāruṇān

हिन्दी अर्थ

यह प्राणी स्वर्गलोकको प्राप्त करे-एऐसा कहकर हूँ, अतः इसको ग्रहण करनेके लिये तुम यहाँपर तिलमिश्रित आज्याहुति चितामें जल रहे शवके उपस्थित होऔँ ।' ऊपर छोड़े। उसके बाद भावविहृल होकर उस है कश्यपपुत्र गरुड! तत्पश्चात् जलसे निकलकर आत्मीयजनके लिये रोना चाहिए। इस कृत्यको वस्त्र पहनकर स्नान-वस्त्रको एक बार निचोड्कर

English

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अध्याय २४२

श्लोक 77

नारकाश्चापि ते देवान्सर्वान्पश्यन्ति ऊर्ध्वगान् ।एतान्यान्यानि शतशो नरकाणि वियद्गते

nārakāścāpi te devānsarvānpaśyanti ūrdhvagān / etānyānyāni śataśo narakāṇi viyadgate

हिन्दी अर्थ

करनेसे उस मृतकको अत्यधिक सुख प्राप्त पवित्र भूमिपर बैठ जायँँ। शवदाह तथा तिलाञ्जलि होता है। देकर मनुष्यको अश्रुपात नहीं करना चाहिए, दाह-क्रिया करनेके पश्चात् अस्थि-संचयन क्योंकि उस समय रोते हुए अपने बन्धु-बान्धवोंके क्रिया करनी चाहिए । है खगराज! दाहकी पीड़ाकी द्वारा आँख और मुँहसे गिराये आँसू एवं कफको

English

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अध्याय २४२

श्लोक 78

दिनेदिने तु नरके पच्यते दह्यतेन्यतः ।शीर्यते भिद्यते ऽन्यत्र चूर्यते क्लिद्यतेन्यतः

dinedine tu narake pacyate dahyatenyataḥ / śīryate bhidyate 'nyatra cūryate klidyatenyataḥ

हिन्दी अर्थ

शान्तिके लिये प्रेत-पिण्ड भी प्रदान करे । तत्पश्चात् मरा हुआ व्यक्ति विवश होकर पान करता है। बहाँपर गये हुए सभी लोग चिताकी प्रदक्षिणा कर अतः रोना नहीं चाहिए, अपितु यथाशक्ति क्रिया कनिष्ठादि क्रमसे सूक्त जपते हुए स्नानके लिये करनी चाहिए। तदनन्तर कोई पुराणज्ञ संसारकी जलाशय आदिपर जायँ। वहाँ पहुँचकर अपने अनित्यताको बताता हुआ मृतकके परिजनोंको इस

English

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अध्याय २४२

श्लोक 79

क्वथ्यते दीप्यते ऽन्यत्र तथा वातहतो ऽन्यतः ।एकं दिनं वर्षशतप्रमाणं नरके भवेत्

kvathyate dīpyate 'nyatra tathā vātahato 'nyataḥ / ekaṃ dinaṃ varṣaśatapramāṇaṃ narake bhavet

हिन्दी अर्थ

वस्त्रोंका प्रक्षालनकर पुनः उन्हें ही पहनकर मृत प्रकारका उपदेश देकर शोकनिवारण करनेका व्यक्तिका ध्यान करते हुए उसे जल-दान देनेकी प्रयत्न करे-'मनुष्यका यह शरीर केलेके वृक्षके प्रतिज्ञा करें और मृत व्यक्तिने प्रेतरूपमें जल-दान समान बड़ा ही सारहीन एवं जलके बुद्बुदेके देनेकी आज्ञा दी है-एऐसी भावना करते हुए पुनः समान क्षणभंगुर है। इसमें जो सारतत्त्वको खोजता

English

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अध्याय २४२

श्लोक 80

ततः सर्वेषु निस्तीर्णः पापी तिर्यक्त्वमश्नते ।कृमिकीटपतङ्गेषु स्थावरैकशफेषु च

tataḥ sarveṣu nistīrṇaḥ pāpī tiryaktvamaśnate / kṛmikīṭapataṅgeṣu sthāvaraikaśapheṣu ca

हिन्दी अर्थ

३-तिलोदककी अझ्जलि इस प्रकार कहकर देनी चाहिए--' अद्येहामुक गोत्रामुकप्रेतचितादाहजनिततापतृषोपशमाय एष

English

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अध्याय २४२

श्लोक 81

गत्वा वनगजाढ्येषु गोष्वषु तथैव च ।खरो ऽश्वो ऽश्वतरो गौरः शरभश्चमरी तथा

gatvā vanagajāḍhyeṣu goṣvaṣu tathaiva ca / kharo 'śvo 'śvataro gauraḥ śarabhaścamarī tathā

हिन्दी अर्थ

है, वह महामूर्ख है। यदि पृथ्वी, जल, अग्नि, करती है । अप्सराएँ उसका सम्मान करती हैं तथा

English

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अध्याय २४२

श्लोक 82

एते चैकशफाः षट् च शृणु पञ्चनखानतः ।अन्यासु बहुपापासु दुः खदासु च यो निषु

ete caikaśaphāḥ ṣaṭ ca śṛṇu pañcanakhānataḥ / anyāsu bahupāpāsu duḥ khadāsu ca yo niṣu

हिन्दी अर्थ

आकाश और वायुतत्त्व--इन पाँच तत्त्वोंसे बना हुआ यह शरीर पुनः अपने किये हुए कर्मोके अनुसार उन्हीं पञ्चतत्त्वोंमें जाकर विलीन हो जाता है तो उसके लिये रोना क्या? जब पृथ्वी, समुद्र

English

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अध्याय २४२

श्लोक 83

मानुष्यं प्राप्यते कुब्जो कुत्सितो वामनो ऽपि वा ।चण्डालपुक्कसाद्यासु नरयोनिषु जायते

mānuṣyaṃ prāpyate kubjo kutsito vāmano 'pi vā / caṇḍālapukkasādyāsu narayoniṣu jāyate

हिन्दी अर्थ

तथा देवलोक विनष्ट हो जाते हैं तो फेनके समान प्रसिद्ध यह मर्त्यलोक नष्ट नहीं होगा?” इस उपदेशको सुनकर वे सभी परिवारके सदस्य अपने घरको जायँ। पहलेसे घरके द्वारपर रखी हुई

English

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अध्याय २४२

श्लोक 84

मुहुर्गर्भे वसन्त्येव म्रियन्ते च मुहुर्मुहुः ।अवशिष्टेन पापेन पुण्येन च समन्वितः

muhurgarbhe vasantyeva mriyante ca muhurmuhuḥ / avaśiṣṭena pāpena puṇyena ca samanvitaḥ

हिन्दी अर्थ

नीमको पत्तियोंको चबाकर आचमन करें । तदनन्तर

English

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अध्याय २४२

श्लोक 85

ततश्चारोहिणीं योनिं शूद्रवैश्यनृपादिकम् ।विप्रदेवेन्द्रतां चापि कदाचिदधिरोहति

tataścārohiṇīṃ yoniṃ śūdravaiśyanṛpādikam / vipradevendratāṃ cāpi kadācidadhirohati

हिन्दी अर्थ

वृषभ तथा अन्य माङ्गलिक वस्तुओंका हाथसे स्पर्श करके पैरसे पत्थरका भी स्पर्श करें और धीरे-धीरे घरमें प्रवेश करें। जो व्यक्ति विद्वान् है, वह अपने अग्निहोत्री

English

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अध्याय २४२

श्लोक 86

एवं तु पापकर्माणो निरयेषु पतन्त्यधः ।यथा पुण्यकृतो यान्ति तन्मे निगदतः शृणु

evaṃ tu pāpakarmāṇo nirayeṣu patantyadhaḥ / yathā puṇyakṛto yānti tanme nigadataḥ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

परिजनकी मृत्यु होनेपर उसका दाह-संस्कार श्रौतकी अग्निके द्वारा ही यथाविधि करे। दो वर्षसे कम आयुवाले छोटे बालककी मृत्यु होनेपर उसको श्मशानभूमिमें गड्डा खोदकर मिट्टीसे ढक देना

English

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अध्याय २४२

श्लोक 87

ते यमेन विनिर्दिष्टां योनिं पुण्यगतिं नराः ।प्रगीतगन्धर्वगणा नृत्योत्सवसमाकुलाः

te yamena vinirdiṣṭāṃ yoniṃ puṇyagatiṃ narāḥ / pragītagandharvagaṇā nṛtyotsavasamākulāḥ

हिन्दी अर्थ

चाहिए। उसके लिये उदक-क्रियाका विधान नहीं हैं। जो स्त्री पतिव्रता है, यदि वह मरे हुए पतिका अनुगमन करना चाहती है तो धर्मविहित नियमोंके अनुसार पतिको प्रणाम करके चितामें प्रवेश करे।

English

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अध्याय २४२

श्लोक 88

हारनूपुरमाधुर्यैः शोभितान्यमलानि तु ।प्रयान्त्याशु विमानानि दिव्यगन्धस्रगुज्ज्वलाः

hāranūpuramādhuryaiḥ śobhitānyamalāni tu / prayāntyāśu vimānāni divyagandhasragujjvalāḥ

हिन्दी अर्थ

जो स्त्री जीवनके व्यामोहसे चितापर चढ़कर पुन: बाहर आ जाती है, उसे 'प्राजापत्यव्रत' करना

English

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अध्याय २४२

श्लोक 89

तस्माच्च प्रच्युता राज्ञामन्येषां च महात्मनाम् ।जायन्ते नीरुजां गेहे स द्वृत्तिपीरपालकाः

tasmācca pracyutā rājñāmanyeṣāṃ ca mahātmanām / jāyante nīrujāṃ gehe sa dvṛttipīrapālakāḥ

हिन्दी अर्थ

मनुष्यके शरीरमें साढ़े तीन करोड़ रोएँ होते हैं, जो स्त्री पतिका अनुगमन करती है, उतने कालतक वह स्वर्गमें वास करती है। जिस प्रकार

English

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अध्याय २४२

श्लोक 90

भोगान्सम्प्राप्नुवन्त्युग्रांस्ततो यान्त्यूर्ध्वमन्यथा ।अवरोहिणीं सम्प्राप्य पूर्ववद्यन्ति मानवाः

bhogānsamprāpnuvantyugrāṃstato yāntyūrdhvamanyathā / avarohiṇīṃ samprāpya pūrvavadyanti mānavāḥ

हिन्दी अर्थ

वह पतिव्रता नारी तबतक पतिके साथ सुखोपभोग करती है, जबतक चौदह इन्द्रोंकी अवधि पूर्ण नहीं हो जाती है। यदि पति ब्रह्महत्यारा, कृतघ्न या

English

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अध्याय २४२

श्लोक 91

जातस्य मृत्युलोके वै प्राणिनो मरणं ध्रुवम् ।पापिष्ठानामदोमार्गाज्जीवो निष्क्रमते ध्रुवम्

jātasya mṛtyuloke vai prāṇino maraṇaṃ dhruvam / pāpiṣṭhānāmadomārgājjīvo niṣkramate dhruvam

हिन्दी अर्थ

पतिके साथ सती होकर उसे पवित्र कर देती है। पतिके मर जानेपर जो स्त्री उसीके साथ अगिनमें अपने शरीरको भेंट कर देती है, वह अरुन्धतीके समान आचरण करती हुई स्वर्गलोकमें जाकर

English

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अध्याय २४२

श्लोक 92

पृथिव्यां लीयते पृथ्वी आपश्चैव तथाप्सु च ।तेजस्तेजसि लीयते समीरे च समीरणः

pṛthivyāṃ līyate pṛthvī āpaścaiva tathāpsu ca / tejastejasi līyate samīre ca samīraṇaḥ

हिन्दी अर्थ

सम्मान प्राप्त करती है।

English

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अध्याय २४२

श्लोक 93

आकाशे च तथाकाशं सर्वव्यापि निशाकरे ।तत्र कामस्तथा क्रोधः काये पञ्चेन्द्रियाणि च

ākāśe ca tathākāśaṃ sarvavyāpi niśākare / tatra kāmastathā krodhaḥ kāye pañcendriyāṇi ca

हिन्दी अर्थ

पतिको मृत्यु होनेपर जबतक स्त्री अपनेको चिताको भेंट नहीं चढ़ा देती है, तबतक वह स्त्रीके शरीरसे किसी प्रकार मुक्त नहीं हो सकती है। जो स्त्री अपने पतिके साथ सती हो जाती है, वह

English

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अध्याय २४२

श्लोक 94

एते तार्क्ष्य समाख्याता देहे तिष्ठन्ति तस्कराः ।कामः क्रोधो ह्यहङ्कारो मनस्तत्रैव नायकः

ete tārkṣya samākhyātā dehe tiṣṭhanti taskarāḥ / kāmaḥ krodho hyahaṅkāro manastatraiva nāyakaḥ

हिन्दी अर्थ

पितूकुल, मातूकुल और पतिकुल--इन तीनों कुलोंको पवित्र कर देती है । जो स्त्री पतिके दु:खमें दु:खी, सुखमें सुखी, विदेशगमनमें मलिनवसना, कृशकाय तथा मृत्यु होनेपर चितामें उसीके साथ जलकर

English

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अध्याय २४२

श्लोक 95

संहारश्चैव कालो ऽसौ पुण्यपापेन संयुतः ।पञ्चेन्द्रियसमायुक्तः सकलैर्विबुधैः सह

saṃhāraścaiva kālo 'sau puṇyapāpena saṃyutaḥ / pañcendriyasamāyuktaḥ sakalairvibudhaiḥ saha

हिन्दी अर्थ

मृत्युका संवरण करती है, उस स्त्रीको पतिव्रता मानना चाहिए। पातिव्रतधर्मका पालन करनेवाली स्त्री पतिकी मृत्यु हो जानेपर पृथक् चितामें समारूढ होकर परलोकगमनके योग्य नहीं होती।

English

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अध्याय २४२

श्लोक 96

प्रविशेत्स नवे देहे पृहे दरधे गुही यथा ।शरीरे ये समासीनाः सर्वे वै सप्त धातवः

praviśetsa nave dehe pṛhe daradhe guhī yathā / śarīre ye samāsīnāḥ sarve vai sapta dhātavaḥ

हिन्दी अर्थ

क्षत्रियादि सभी सवर्णा स्त्रियोंको अपने पतिके साथ ही चितामें आरोहणकर परलोकसुख प्राप्त करना चाहिए। ब्राह्मणवर्णकी स्त्रीसे लेकर चाण्डालवर्णको स्त्रीके लिये पतिके साथ चितामें

English

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अध्याय २४२

श्लोक 97

षाट्कौशिको ह्ययं कायः सर्वे वाताश्च देहिनाम् ।मूत्रं पुरीषं तद्योगाद्ये चान्ये व्याधयस्तथा

ṣāṭkauśiko hyayaṃ kāyaḥ sarve vātāśca dehinām / mūtraṃ purīṣaṃ tadyogādye cānye vyādhayastathā

हिन्दी अर्थ

जलकर सती होनेका विधान एक समान ही है। पतिको मृत्युके समय जो स्त्रियाँ गर्भसे रहित हैं और जिनके छोटे-छोरे बच्चे नहीं हैं, उन सभीको

English

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अध्याय २४२

श्लोक 98

पित्तं श्लेष्मा तथा मज्जा मांसं वै मेद एव च ।अस्थि शुक्रं तथा स्नायुर्देहेन सह दह्यति

pittaṃ śleṣmā tathā majjā māṃsaṃ vai meda eva ca / asthi śukraṃ tathā snāyurdehena saha dahyati

हिन्दी अर्थ

सर्पको पकड़्नेवाला सपेरा बिलसे सर्पको बलात् सतीधर्मका पालन करना चाहिए

English

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अध्याय २४२

श्लोक 99

एष ते कथितस्तार्क्ष्य विनासः सर्वदेहिनम् ।कथयामि पुनस्तेषां शरीरं च यथा भवेत्

eṣa te kathitastārkṣya vināsaḥ sarvadehinam / kathayāmi punasteṣāṃ śarīraṃ ca yathā bhavet

हिन्दी अर्थ

बाहर निकाल लेता है, उसी प्रकार पतिका अनुगमन करनेवाली सती नारी अपने पतिका उद्धार कर उसके साथ स्वर्गमें सुखपूर्वक निवास

English

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अध्याय २४२

श्लोक 100

एकस्तम्बंस्नायुबद्धं स्थूणात्रयविभूषणम् ।इन्द्रियैश्च समायुक्तं नवद्वारं शरीरकम्

ekastambaṃsnāyubaddhaṃ sthūṇātrayavibhūṣaṇam / indriyaiśca samāyuktaṃ navadvāraṃ śarīrakam

हिन्दी अर्थ

हे पक्षिन्! मनुष्यके दाह-संस्कारकी जो विधि है, उसको सामान्य रूपसे मैंने तुम्हें सुना दिया है।

English

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अध्याय २४२

श्लोक 101

विषयैश्च समाक्रान्तं कामक्रोधसमाकुलम् ।रागद्वेषसमाकीर्णं तृष्णादुर्गमतस्करम्

viṣayaiśca samākrāntaṃ kāmakrodhasamākulam / rāgadveṣasamākīrṇaṃ tṛṣṇādurgamataskaram

हिन्दी अर्थ

प्रेतकल्प आसन्नमृत्यु-व्यक्तिके निमित्त किये जानेवाले प्रायश्चित्त ४६९

English

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अध्याय २४२

श्लोक 102

लोभजालपरिच्छिन्नं मोहवस्त्रेण वेष्टितम् ।सुबद्धं मायया चैतल्लोभेनाधिष्ठितं पुरम्

lobhajālaparicchinnaṃ mohavastreṇa veṣṭitam / subaddhaṃ māyayā caitallobhenādhiṣṭhitaṃ puram

हिन्दी अर्थ

इसपर गरुडने कहा--हे संसारके स्वामिन्! पुनः प्रेतत्वको प्राप्त होते हैं। ऐसे व्यक्तिका दाह, यदि प्रवासकालमें पतिकी मृत्यु हो जाती है और उदकक्रिया और मरणनिमित्तक अन्य कृत्य तथा उसकी अस्थियाँ भी स्त्रीको नहीं प्राप्त होती हैं तो और्ध्वहैहिक कर्म नहीं करना चाहिए। इस प्रकारसे उसका दाह किस प्रकारसे करना चाहिए, यह अपमृत्यु होनेपर पिण्डदानका कर्म भी वर्जित है।

English

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अध्याय २४२

श्लोक 103

एतद्गुणसमाकीर्णं शरीरं सर्वदेहिनाम् ।आत्मानं ये न जानन्ति ते नराः पशवः स्मृताः

etadguṇasamākīrṇaṃ śarīraṃ sarvadehinām / ātmānaṃ ye na jānanti te narāḥ paśavaḥ smṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

बतानेकी कृपा करें। यदि प्रमादवश कोई पिण्डदान करता है तो वह उसे

English

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अध्याय २४२

श्लोक 104

एवमेव समाख्यातं शरीरं ते चतुर्विधम् ।चतुरशीतिलक्षाणि निर्मिता योनयः पुरा

evameva samākhyātaṃ śarīraṃ te caturvidham / caturaśītilakṣāṇi nirmitā yonayaḥ purā

हिन्दी अर्थ

श्रीकृष्णने कहा--हे गरुड! यदि प्रवासी प्राप्त नहीं होता और अन्तरिक्षमें विनष्ट हो जाता है। पतिकी अस्थियाँ नहीं प्राप्त होती हैं तो मैं उसकी अत: लोकगर्हासे डरकर उसके शुभेच्छु पुत्र-पौत्र भी सद्रतिका विधान तुम्हें सुनाता हूँ। उस परम और सगोत्री जनोंको मृतकके लिये नारायणबलि' गोपनीय तत्त्वको तुम सुनो। जो प्राणी भूखसे करनी चाहिए। ऐसा करनेपर ही उन्हें शुचिता प्राप्त

English

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अध्याय २४२

श्लोक 105

उद्भिज्जाः स्वेदजाश्चैव अण्डजाश्च जरायुजाः ।एतत्ते सर्वमाख्यातं निरयस्य प्रपञ्चतः

udbhijjāḥ svedajāścaiva aṇḍajāśca jarāyujāḥ / etatte sarvamākhyātaṃ nirayasya prapañcataḥ

हिन्दी अर्थ

पीड़ित होनेके कारण मृत्युको प्राप्त होते हैं, जो होती है अन्यथा नहीं; यह यमराजका वचन है। व्याघ्रादि हिंसक प्राणियोंके द्वारा मारे जाते हैं, नारायणबलि किये जानेपर और्ध्वहैहिक कर्मकी जिनकी मृत्यु गलेमें फाँसीका फन्दा लगानेसे हो योग्यता आ जाती है। अपमृत्यु होनेपर ऐसे प्राणीका जाती है, शरीरकी क्षीणताके कारण जिनकी मृत्यु शुद्धिकरण इसी कर्म (नारायणबलि)-से सम्भव है

English

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अध्याय २४२

श्लोक 106

अथयामि क्रमप्राप्तं प्रष्टु वा वर्तते स्पृहा

athayāmi kramaprāptaṃ praṣṭu vā vartate spṛhā

हिन्दी अर्थ

होती है, जो हाथीके द्वारा मारे जाते हैं, जो विष, अन्यथा नहीं । अग्नि, बैल और ब्राह्मण-शापसे मृत्युको प्राप्त नारायणबलि सम्यक् रूपसे तीर्थमें करना चाहिए। होते हैं, जिनकी मृत्यु हैजासे होती है, जो ब्राह्मणोंके द्वारा भगवान् कृष्णके समक्ष नारायणबलि आत्मघाती हैं, जो गिरकर या रस्सी आदिके द्वारा करानेसे मनुष्य पवित्र हो जाता है। पुराण, वेदके

English

I shall tell you more as and when necessary or do you possess a desire to ask more?

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 242
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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