Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
31
अध्याय 31 / 317

Book 1 - Adhyaya 31

32 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ32 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय ३१

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे श्रीधरा (विष्ण्वर्) चनविधिर्नाम त्रिंशो ऽध्यायः श्री गरुडमहापुराणम्- ३१ रुद्र उवाच ।भूय एवं जगन्नाथ पूजां कथय मे प्रभो ।यया तरेयं संसारसागरं ह्यतिदुस्तरम्

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe śrīdharā (viṣṇvar) canavidhirnāma triṃśo 'dhyāyaḥ śrī garuḍamahāpurāṇam- 31 rudra uvāca / bhūya evaṃ jagannātha pūjāṃ kathaya me prabho / yayā tareyaṃ saṃsārasāgaraṃ hyatidustaram

हिन्दी अर्थ

और ' ॐ हां क्ष (त्व) रायै नमः से क्ष (त्व) - ईशानाय सर्वविद्याधिपतये नमः ' से सर्वविद्याधिपति राकी अर्चना करनी चाहिए। ईशानका, ' 3 हां अनन्ताय नागाधिपतये नमः' से हे वृषध्वज ! तत्पुरुषकी चार कलाएं हैं । पहले नागाधिपति अनन्तका, 'ॐ हां ब्रह्मणे ॐ हां तत्पुरुषाय नमः' इस मन्त्रद्वारा तत्पुरुषको सर्वलोकाधिपतये नमः ' से सर्वलोकाधिपति ब्रह्माका

English

O 1 Lord! bearing iaAkha, cakra and gadd 1 Pleaae ex* pound the PancaTattvdrcana (the worship of five principles) of worship by knowing which entirely a man attains the supreme region.

अध्याय ३१

श्लोक 2

हरिरुवाच ।अर्चनं विष्णुदेवस्य वक्ष्यामि वृषभध्वज ।तच्छृणुष्व महाभाग भुक्तिमुक्तिप्रदं शुभम्

hariruvāca / arcanaṃ viṣṇudevasya vakṣyāmi vṛṣabhadhvaja / tacchṛṇuṣva mahābhāga bhuktimuktipradaṃ śubham

हिन्दी अर्थ

पूजा करे। तदनन्तर '3 हां निवृत्यै नमः” से और ' ॐ हां धूलिचण्डेश्वराय नमः ' से धूलिचण्डेश्वरका निवृत्तिकी, ' ॐ हां प्रतिष्ठायै नमः' से प्रतिष्ठाको, आवाहन, स्थापन, संनिधान, संनिरोध तथा सकलीकरण ' ॐ हां विद्यायै नमः” से विद्याकी और ' ॐ हां करना चाहिए। शान्त्यै नमः” से शान्तिकी पूजा करनी चाहिए। तदनन्तर तत्त्व-न्यास करके मुद्रा दिखानी

English

O Sankara of splendid vows! I shall expound the worship of PaficaTaltoas that is auspicious, divine, esoteric and yields all wishes.

अध्याय ३१

श्लोक 3

कृत्वा स्नानं ततः सन्ध्यां ततो यागगृहं व्रजेत् ।प्रक्षाल्य पाणी पादौ च आचम्य च विशेषतः

kṛtvā snānaṃ tataḥ sandhyāṃ tato yāgagṛhaṃ vrajet / prakṣālya pāṇī pādau ca ācamya ca viśeṣataḥ

हिन्दी अर्थ

अघोरकी भैरव-सम्बन्धी छः कलाएँ जाननी चाहिए तथा ध्यान करना चाहिए। इसके बाद पाद्य, चाहिए। इनकी पूजामें पहले '३ हां अघोराय आचमन, अर्घ्य, पुष्प, अभ्यङ्ग, उद्दर्तत और खान नमः ' मन्त्रद्वारा अघोरकी पूजा करनेके पश्चात् ' ॐ तथा सुगन्धानुलेपन, वस्त्र, अलंकार, भोग, अङ्गन्यास, हां उमायै नमः ' से उमाकी, ' ॐ हां क्षमायै नमः ' धूप, दीप, नैवेद्य-अर्पण, करोद्वर्तन, पाद्य, अर्घ्य,

English

O Vr$adhvaja 1 Listen to the mantras expressing these. Orft Am obeisance to Vasudeva; Orh Am obeisance to Sankar- $ana; Orh Am obeisance to Pradyumna; Ofh obeisance to Aniruddba, Orh obeisance to Narayau.

अध्याय ३१

श्लोक 4

मूलमन्त्रं समस्तं तु हस्तयोर्व्यापकं न्यसेत् ।मूलमन्त्रं च देवस्य शृणु रुद्र वदामि ते

mūlamantraṃ samastaṃ tu hastayorvyāpakaṃ nyaset / mūlamantraṃ ca devasya śṛṇu rudra vadāmi te

हिन्दी अर्थ

से क्षमाकी, 'ॐ हां निद्रायै नमः” से निद्राको, आचमन, गन्ध एवं ताम्बूल निवेदन करनेके बाद

English

Krsna, s ion of Vasudeva.

अध्याय ३१

श्लोक 5

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीधराय विष्णवे नमः ।अयं मन्त्रः सुरेशस्य विष्णोरीशस्य वाचकः

oṃ śrīṃ hrīṃ śrīdharāya viṣṇave namaḥ / ayaṃ mantraḥ sureśasya viṣṇorīśasya vācakaḥ

हिन्दी अर्थ

गीत, वाद्य, नृत्यसे महेश्वरको संतुष्टकर छत्र आदि समर्पित करे ।

English

BaUrftma, another son of Vasudeva.

अध्याय ३१

श्लोक 6

सर्वव्याधिहरश्चैव सर्वग्रहहरस्तथा ।सर्वपापहरश्चैव बुक्तिमुक्तिप्रदायकः

sarvavyādhiharaścaiva sarvagrahaharastathā / sarvapāpaharaścaiva buktimuktipradāyakaḥ

हिन्दी अर्थ

समर्पित करना चाहिए। मुद्राका प्रदर्शन करके इस प्रकार विविध कामनाओंकी सिद्धिके आवाहित देवके रूपका ध्यान, जप तथा लिये विश्वावसु गन्धर्व तथा देवी कालरात्रि आदिको तादात्म्यभावसे मूलमन्त्रद्वारा जप और पूजाको उपासना करनी चाहिए। (अध्याय ३८-४९)

English

Son of Krios by Rukmiot. father of Aniruddha.

अध्याय ३१

श्लोक 7

अङ्गन्यासं ततः कुय्यान्देभिर्मन्त्रौर्विचक्षणः ।ॐ हां हृदयाय नमः ।ॐ हीं शिरसे स्वाहा ।ॐ हूं शिखायै वषट् ।ॐ हैं कवचाय हुं ।ॐ हौं नेत्रत्रयाय वौषट् ।ॐ हः अस्त्राय फट्

aṅganyāsaṃ tataḥ kuyyāndebhirmantraurvicakṣaṇaḥ / oṃ hāṃ hṛdayāya namaḥ / oṃ hīṃ śirase svāhā / oṃ hūṃ śikhāyai vaṣaṭ / oṃ haiṃ kavacāya huṃ / oṃ hauṃ netratrayāya vauṣaṭ / oṃ haḥ astrāya phaṭ

हिन्दी अर्थ

शिवके पवित्रारोपणकी विधि

English

Son of Pradyumna. Grandson of Krtea.

अध्याय ३१

श्लोक 8

इति मन्त्रः समाख्यातो मया ते प्रभविष्णुना ।न्यासं कृत्वात्मनो मुद्रां दर्शयेद्विजितात्मवान्

iti mantraḥ samākhyāto mayā te prabhaviṣṇunā / nyāsaṃ kṛtvātmano mudrāṃ darśayedvijitātmavān

हिन्दी अर्थ

श्रीहरिने कहा--हे महादेव! अमङ्गलका नाश रुद्रा, अजिता, मनोन्मनी तथा सर्वमुखी । करनेवाले भगवान् शिवके पवित्रारोपणके पूजा- है शिव! ग्रन्थिबन्धनके पश्चात् उस पवित्रकको विधानको कह रहा हूँ। यह पूजा आषाढ, श्रावण, कुंकुम, चन्दन आदि सुगन्धित पदार्थोसे रञ्जित माघ या भाद्रपद मासमें होती है। पवित्रारोपणकी करना चाहिए । उस गन्धानुरञ्जित पवित्रकको देवको

English

A common name for Vifpu. Utenlly it means the ion of ATsrs, the primordial mao.

अध्याय ३१

श्लोक 9

ततो ध्यायेत्परं विष्णु त्दृत्कोटरसमाश्रितम् ।शङ्खचक्रसमायुक्तं कुन्देन्दुधवलं हरिम्

tato dhyāyetparaṃ viṣṇu tdṛtkoṭarasamāśritam / śaṅkhacakrasamāyuktaṃ kundendudhavalaṃ harim

हिन्दी अर्थ

इस पूजामें पवित्रक (जनेऊ) बनानेके लिये सत्ययुग समर्पित कर देना चाहिए। तदनन्तर यथाविधि आदिके भेदसे सूत्र-धारणका नियम है। जैसे सभी क्रियाओंको करके 'हे देवेश! है महेश्वर! सत्ययुगमें सुवर्णके, त्रेतामें रजतके, द्वापरमें ताम्रके आप अपने गणोंके साथ यहाँपर आमन्त्रित हैं। और कलियुगमें कन्याके हाथसे बनाये गये कपासके प्रातःकाल यहींपर आपका पूजन करूँगा अतः

English

Now I shall explain the auspicious worship of PaHca* MtuaSf by what all means it shall be performed and with what all mantras O hkara.

अध्याय ३१

श्लोक 10

श्रीवत्सकौस्तुभयुतं वनमालासमन्वितम् ।रत्नहारकिरीटेन संयुक्तं परमेश्वरम्

śrīvatsakaustubhayutaṃ vanamālāsamanvitam / ratnahārakirīṭena saṃyuktaṃ parameśvaram

हिन्दी अर्थ

सूत्र (सूत)-को ग्रहण करना चाहिए। सूत्रको आप यहाँपर उपस्थित रहें ।'--इस प्रकार देवताको लेकर पहले उसे तिगुना करके पुनः उसका तिगुना निमन्त्रित करे और गीत-वाद्यादिके द्वारा रात्रि- करना चाहिए। इस प्रकार नवगुणित सूत्रसे पवित्रकका जागरण करे। प्रातः उन आमन्त्रित पवित्रकोंको निर्माण करके वामदेवमन्त्रसे उसमें ग्रन्थि देनी भगवान् महेश्वरके पास स्थापित करके चतुर्दशी

English

By unhardening the Sdmans let him prepare an egg and breaking it meditate on the supreme god in the egg.

अध्याय ३१

श्लोक 11

अहं विष्णुरिति ध्यात्वा कृत्वा वै शोधनादिकम् ।यं क्षैं रमिति बीजैश्च कठिनी कृत्य नामभिः

ahaṃ viṣṇuriti dhyātvā kṛtvā vai śodhanādikam / yaṃ kṣaiṃ ramiti bījaiśca kaṭhinī kṛtya nāmabhiḥ

हिन्दी अर्थ

चाहिए। तदनन्तर है शिव! सद्योजातमन्त्रसे उसका तिथिमें स्नान करे और सबसे पहले सूर्य तथा प्रक्षालन करके अघोरमन्त्रसे उसका शोधन करना रुद्रको पूजा करे, तदनन्तर ललाटस्थ विश्वरूपका चाहिए । तत्पुरुषमन्त्रसे उसमें बन्धन तथा ईशानमन्त्रसे ध्यानकर अपने आत्मस्वरूपको पूजा करे। तन्तुदेवताओंको सुगन्धित धूप दिखाना चाहिए। तत्पश्चात् अस्त्रमन्त्रसे प्रोक्षित और हृदयमन्त्रके

English

Thereafter Pradyumna, Aniniddba and Srimdn (pro3perou8)Naraya9ashaU be meditated upon. Then he should tUnk of the gods Indra and others springing from that Lord of lords.

अध्याय ३१

श्लोक 12

अण्डमुत्पाद्य च ततः प्रणवेनैव भेदयेत् ।तत्र पूर्वोक्तरूपं तु भावयित्वा वृषध्वज

aṇḍamutpādya ca tataḥ praṇavenaiva bhedayet / tatra pūrvoktarūpaṃ tu bhāvayitvā vṛṣadhvaja

हिन्दी अर्थ

तन्तुओंमें क्रमशः ॐकार, चन्द्र, अग्नि, ब्रह्मा, द्वारा अर्पित तथा संहितामन्त्रोसे धूपित पवित्रकोंको नाग, शिखिध्वज, सूर्य, विष्णु और शिवका वास भगवानको समर्पित करना चाहिए। सबसे पहले है--ये नौ तन्तुके देवता हैं । है रुद्र! उस पवित्रकमें शिवतत्त्व और विद्यातत्त्वकी पूजा करके आत्मतत्त्व एक सौ आठ या पचास अथवा पच्चीस तन्तु होने और देवतत्त्वका पूजन इन निर्धारित मन्त्रोंसे करे-

English

Then Nydsa shall be performed on both the hands. The pervading Aiigata shall be with the root mantra and AAgamontras.

अध्याय ३१

श्लोक 13

आत्मपूजां ततः कुर्याद्रन्धपुष्पादिभिः शुभैः ।आवाह्य पूजयेत्सर्वा देवता आसनस्य याः

ātmapūjāṃ tataḥ kuryādrandhapuṣpādibhiḥ śubhaiḥ / āvāhya pūjayetsarvā devatā āsanasya yāḥ

हिन्दी अर्थ

चाहिए। ये क्रमशः उत्तम, मध्यम तथा कनिष्ठ हैं।। 'ॐ हौं हौं शिवतत्त्वाय नमः, 3 हीं ( हीः ) पवित्रकमें दस ग्रन्थिका मान है। अतएव प्रत्येक विद्यातत्त्वाय नमः, ३» हां ( हौः ) आत्मतत्त्वाय चार अंगुल या दो अंगुल अथवा एक अंगुलका नमः, ॐ हां हीं हूं क्षौं सर्वतत्त्वाय नमः ।' अन्तर देकर एक-एक ग्रन्थिका बन्धन देना चाहिए। भगवान् महेश्वरको पवित्रक विधिपूर्वक

English

Mahadeva of good vows I listen to those mantras. Oth Am obeisance to the heart. Orh Im obeisance to the head. Oth Cm obeisance to the tuft. Orh Aim obeisance to the Kavaca. Orh Aum obeisance to the three eyes. Om Ah phat to the Astra.

अध्याय ३१

श्लोक 14

मन्त्रैरेभिर्महादेव तन्मन्त्रं शृणु शङ्कर ।विष्णवासनदेवता आगच्छत

mantrairebhirmahādeva tanmantraṃ śṛṇu śaṅkara / viṣṇavāsanadevatā āgacchata

हिन्दी अर्थ

हे सदाशिव! उन ग्रन्थियोंके नाम इस प्रकार हैं- निवेदितकर स्वयं भी धारण करना चाहिए।

English

Orh obeisance to with all his followen; Orh

अध्याय ३१

श्लोक 15

ॐ समस्तपरिवारायाच्युताय नमः ।ॐ धात्रे नमः ।ॐ विधात्रे नमः ।ॐ गङ्गायै नमः ।ॐ यमुनायै नमः ।ॐ शङ्खनिधये नमः ।ॐ पद्मनिधये नमः ।ॐ चण्डाय नमः ।ॐ प्रचण्डाय नमः ।ॐ द्वारश्रियै नमः ।ॐ आधारशक्त्यै नमः ।ॐ कूर्ंमाय नमः ।ॐ अनन्ताय नमः ।ॐ श्रियै नमः ।ॐ धर्ंमाय नमः ।ॐ ज्ञानाय नमः ।ॐ वैराग्याय नमः ।ॐ ऐश्वर्याय नमः ।ॐ अधर्ंमाय नमः ।ॐ अज्ञानाय नमः ।ॐ अवैराग्याय नमः ।ॐ अनैश्वर्याय नमः ।ॐसं सत्त्वाय नमः ।ॐ रं रजसे नमः ।ॐ तं तमसे नमः ।ॐ कं कन्दाय नमः ।ॐ नं नालाय नमः ।ॐ लां पद्माय नमः ।ॐ अं अर्कमण्डलाय नमः ।ॐ स्ॐ सोममण्डलाय नमः ।ॐ वं वह्निमण्डलाय नमः ।ॐ विमलायै नमः ।ॐ उत्कर्षिण्यै नमः ।ॐ ज्ञानायै नमः ।ॐ क्रियायै नमः ।ॐ योगायै नमः ।ॐ प्रह्व्यै नमः ।ॐ सत्यायै नमः ।ॐ ईशानायै नमः ।ॐ अनुग्रहायै नमः

oṃ samastaparivārāyācyutāya namaḥ / oṃ dhātre namaḥ / oṃ vidhātre namaḥ / oṃ gaṅgāyai namaḥ / oṃ yamunāyai namaḥ / oṃ śaṅkhanidhaye namaḥ / oṃ padmanidhaye namaḥ / oṃ caṇḍāya namaḥ / oṃ pracaṇḍāya namaḥ / oṃ dvāraśriyai namaḥ / oṃ ādhāraśaktyai namaḥ / oṃ kūrṃmāya namaḥ / oṃ anantāya namaḥ / oṃ śriyai namaḥ / oṃ dharṃmāya namaḥ / oṃ jñānāya namaḥ / oṃ vairāgyāya namaḥ / oṃ aiśvaryāya namaḥ / oṃ adharṃmāya namaḥ / oṃ ajñānāya namaḥ / oṃ avairāgyāya namaḥ / oṃ anaiśvaryāya namaḥ / oṃsaṃ sattvāya namaḥ / oṃ raṃ rajase namaḥ / oṃ taṃ tamase namaḥ / oṃ kaṃ kandāya namaḥ / oṃ naṃ nālāya namaḥ / oṃ lāṃ padmāya namaḥ / oṃ aṃ arkamaṇḍalāya namaḥ / oṃ soṃ somamaṇḍalāya namaḥ / oṃ vaṃ vahnimaṇḍalāya namaḥ / oṃ vimalāyai namaḥ / oṃ utkarṣiṇyai namaḥ / oṃ jñānāyai namaḥ / oṃ kriyāyai namaḥ / oṃ yogāyai namaḥ / oṃ prahvyai namaḥ / oṃ satyāyai namaḥ / oṃ īśānāyai namaḥ / oṃ anugrahāyai namaḥ

हिन्दी अर्थ

काण्ड विष्णुके पवित्रारोपणकी विधि ६७

English

LiceraUy it meanswith Lakiml'.

अध्याय ३१

श्लोक 16

गन्धपुष्पादिभिस्त्वेतैर्मन्त्रैरेतास्तु पूजयेत् ।पूजयित्वा ततो विष्णुं सृष्टिसंहारकारिणम्

gandhapuṣpādibhistvetairmantrairetāstu pūjayet / pūjayitvā tato viṣṇuṃ sṛṣṭisaṃhārakāriṇam

हिन्दी अर्थ

विष्णुके पवित्रारोपणकी विधि

English

ViiQu or Krfpa.

अध्याय ३१

श्लोक 17

आवाह्य मण्डले रुद्र पूजयेत्प रमेश्वरम् ।अनेन विधिना रुद्र सर्वपापहरं परम्

āvāhya maṇḍale rudra pūjayetpa rameśvaram / anena vidhinā rudra sarvapāpaharaṃ param

हिन्दी अर्थ

श्रीहरिने कहा--हे वृषभध्वज ! अब मैं आपसे वर्णोके लिये प्रशस्त है। विष्णुके पवित्रारोपणका वर्णन करूँगा, जो भोग ३2कार, शिव, चन्द्रमा, अग्नि, ब्रह्मा, शेष, तथा मोक्ष दोनोंको देनेवाला है। प्राचीन समयमें सूर्य, गणेश और विष्णु-इन नौ देवताओंका इस हो रहे देवासुर-संग्राममें अपनी विजय न होते पवित्रकके तन्तुओंमें निवास है।

English

The tortoise incamatioo of Vifnu.

अध्याय ३१

श्लोक 18

यथात्मनि तथा देवे न्यासं कुर्वीत चादितः ।मुद्रां प्रदर्शयेत्पश्चादर्घ्यादीनर्पयेत्ततः

yathātmani tathā deve nyāsaṃ kurvīta cāditaḥ / mudrāṃ pradarśayetpaścādarghyādīnarpayettataḥ

हिन्दी अर्थ

देखकर ब्रह्मादि देवगण विष्णुकी शरणमें गये। ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र-ये पवित्रकके तीन उन सबकी प्रार्थना सुन करके विष्णुने विजय- सूत्रोंके देवता हैं, जो उनमें अधिष्ठित रहते हैं। इन प्राप्तिके लिये उन्हें अपने गलेका हार, पवित्र सूत्रोंको सुवर्ण, रजत, ताम्र, बाँस या मिट्टीके बने नामक ग्रैवैयक तथा एक ध्वज प्रदान किया और हुए पात्रमें रखना चाहिए। एक सौ आठ तन्तुओंका

English

O Rudra, I have succinctly expounded the Mantras. The wonhip has to be performed in such zones (mystic diagrams) as &>astika etc.

अध्याय ३१

श्लोक 19

स्नानां कुर्यात्ततो वस्त्रं दद्यादाचमनं ततः ।गन्धपुष्पं तथा धूपं दीपं दद्याच्चरुं ततः

snānāṃ kuryāttato vastraṃ dadyādācamanaṃ tataḥ / gandhapuṣpaṃ tathā dhūpaṃ dīpaṃ dadyāccaruṃ tataḥ

हिन्दी अर्थ

कहा कि इन्हें देखते ही दानव नष्ट हो जायंगे। सूत्र उत्तम, चौवन तन्तुओंका सूत्र मध्यम तथा तभीसे उन पवित्रकोंकी पूजा आरम्भ हुई। सत्ताईस तन्तुओंका पवित्रक कनिष्ठ होता है।

English

After performing Ahganydsa all Mudrds shall bo shown. The Atman and Vdsudeva the great lord shall be meditated upon.

अध्याय ३१

श्लोक 20

प्रदक्षिणं ततो जप्यं ततस्तस्मिन्सर्पयेत् ।अङ्गादीनां स्वमन्त्रैश्च पूजां कुर्वीत साधकः

pradakṣiṇaṃ tato japyaṃ tatastasminsarpayet / aṅgādīnāṃ svamantraiśca pūjāṃ kurvīta sādhakaḥ

हिन्दी अर्थ

हे हर! प्रतिपदासे लेकर पौर्णमासीतक जिस इन पवित्रकोंके प्रत्येक ग्रन्थि-पर्वोको कुंकुम,

English

The devotee shall then worship the seat after duly invoking it. O Vrfadhvaja, the worship of Dhdtf and Vidhdtr shall be performed at the doorway.

अध्याय ३१

श्लोक 21

देवस्य मूलमन्त्रेणेत्येवं विद्धि वृषध्वज ।मन्त्राञ्छृणु त्रिनेत्र त्वं कथ्यमानान्मयाधुना

devasya mūlamantreṇetyevaṃ viddhi vṛṣadhvaja / mantrāñchṛṇu trinetra tvaṃ kathyamānānmayādhunā

हिन्दी अर्थ

ही उस तिथिमें उन देवताओंका पवित्रारोपण उन्हें शास्त्रसम्मत पात्रमें रखकर अधिवासित करे । करना चाहिए। है शिव! शुक्ल-पक्ष हो अथवा पवित्रकको पृथक्-पृथक् अभिमन्त्रित करके कृष्णपक्ष, द्वादशी तिथिमें विष्णुके लिये पवित्रारोपणका उसका सम्यक् दर्शन तथा पुनः पूजन करना विधान है । व्यतीपातयोग, उत्तरायण, दक्षिणायन, चाहिए और यत्रपूर्वक उसका वस्त्राच्छादन करके

English

O Sankara, in front of Vdsudeva the devotee shall worship Garuta and in the middle (all his paraphernalia) from Sahkka to Padma shall be worshipped.

अध्याय ३१

श्लोक 22

ॐ हां हृदयाय नमः ।ॐ हीं शिरसे नमः ।ॐ हूं शिखायै नमः ।ॐ हैं कवचाय नमः ।ॐ हौं नेत्रत्रयाय नमः ।ॐ हः अस्त्राय नमः ।ॐ श्रियै नमः ।ॐ शङ्काय नमः ।ॐ पद्माय नमः ।ॐ चक्राय नमः ।ॐ गदायैनमः ।ॐ श्रीवत्साय नमः ।ॐ कौस्तुभाय नमः ।ॐ वनमालायै नमः ।ॐ पीताम्बराय नमः ।ॐ खड्गाय नमः ।ॐ मुसलाय नमः ।ॐ पाशाय नमः ।ॐ अङ्कुशाय नमः ।शार्ङ्गाय नमः ।ॐ शराय नमः ।ॐ ब्रह्मणे नमः ।ॐ नारादाय नमः ।ॐ पूर्वसिद्धेभ्यो नमः ।ॐ भागवतेभ्यो नमः ।ॐ गुरुभ्यो नमः ।ॐ परमगुरुभ्यो नमः ।ॐ इन्द्राय सुराधिपतये सवाहनपरिवाराय नमः ।ॐ अग्नये तेजो ऽधिपतये सवाहनपरिवाराय नमः ।ॐ यमाय प्रेताधिपतये सवाहनपरिवाराय नमः ।ॐ निरृतये रक्षो ऽधिपतये सवाहनपरिवाराय नमः ।ॐ वरुणाय जलाधिपतये सवादनपरिवाराय नमः ।ॐ वायवे प्राणाधिपतये सवाहनपरिवाराय नमः ।ॐ सोमाय नक्षत्राधिपतये सवाहनपरिवाराय नमः ।ॐ ईशानाय विद्याधिपतये सवाहनपरिवाराय नमः ।ॐ अनन्ताय नागाधिपतये सवाहनपरिवाराय नमः ।ॐ ब्रह्मणे लोकाधिपतये सवाहनपरिवाराय नमः ।ॐ वज्राय हुं फट् नमः ।ॐ शक्त्यै हुं फट् नमः ।ॐ दण्डाय हुं फट् नमः ।ॐ खड्गाय हुं फट् नमः ।ॐ पाशाय हुं फट् नमः ।ॐ ध्वजाय हुं फट् नमः ।ॐ गदायै हुं फट् नमः ।ॐ त्रिशूलाय हुं फट् नमः ।ॐ चक्राय हुं फट् नमः ।ॐ पद्माय हुं फट् नमः ।ॐ वैं विष्वक्सेनाय नमः

oṃ hāṃ hṛdayāya namaḥ / oṃ hīṃ śirase namaḥ / oṃ hūṃ śikhāyai namaḥ / oṃ haiṃ kavacāya namaḥ / oṃ hauṃ netratrayāya namaḥ / oṃ haḥ astrāya namaḥ / oṃ śriyai namaḥ / oṃ śaṅkāya namaḥ / oṃ padmāya namaḥ / oṃ cakrāya namaḥ / oṃ gadāyainamaḥ / oṃ śrīvatsāya namaḥ / oṃ kaustubhāya namaḥ / oṃ vanamālāyai namaḥ / oṃ pītāmbarāya namaḥ / oṃ khaḍgāya namaḥ / oṃ musalāya namaḥ / oṃ pāśāya namaḥ / oṃ aṅkuśāya namaḥ / śārṅgāya namaḥ / oṃ śarāya namaḥ / oṃ brahmaṇe namaḥ / oṃ nārādāya namaḥ / oṃ pūrvasiddhebhyo namaḥ / oṃ bhāgavatebhyo namaḥ / oṃ gurubhyo namaḥ / oṃ paramagurubhyo namaḥ / oṃ indrāya surādhipataye savāhanaparivārāya namaḥ / oṃ agnaye tejo 'dhipataye savāhanaparivārāya namaḥ / oṃ yamāya pretādhipataye savāhanaparivārāya namaḥ / oṃ nirṛtaye rakṣo 'dhipataye savāhanaparivārāya namaḥ / oṃ varuṇāya jalādhipataye savādanaparivārāya namaḥ / oṃ vāyave prāṇādhipataye savāhanaparivārāya namaḥ / oṃ somāya nakṣatrādhipataye savāhanaparivārāya namaḥ / oṃ īśānāya vidyādhipataye savāhanaparivārāya namaḥ / oṃ anantāya nāgādhipataye savāhanaparivārāya namaḥ / oṃ brahmaṇe lokādhipataye savāhanaparivārāya namaḥ / oṃ vajrāya huṃ phaṭ namaḥ / oṃ śaktyai huṃ phaṭ namaḥ / oṃ daṇḍāya huṃ phaṭ namaḥ / oṃ khaḍgāya huṃ phaṭ namaḥ / oṃ pāśāya huṃ phaṭ namaḥ / oṃ dhvajāya huṃ phaṭ namaḥ / oṃ gadāyai huṃ phaṭ namaḥ / oṃ triśūlāya huṃ phaṭ namaḥ / oṃ cakrāya huṃ phaṭ namaḥ / oṃ padmāya huṃ phaṭ namaḥ / oṃ vaiṃ viṣvaksenāya namaḥ

हिन्दी अर्थ

चन्द्र तथा सूर्यग्रहण, विवाहादि मङ्गल एवं वृद्धि- उसे मण्डलस्थ देवप्रतिमाके समक्ष यत्रपूर्वक स्थापित कार्यों तथा गुरुजनके आगमन इत्यादि अवसरोंपर कर देना चाहिए । यह पूजा करनी चाहिए। पवित्रके उद्देश्यसे भी ब्रह्मादि अन्य देवोंको स्थापना करके कलशकी नित्य पूजन हो सकता है; किंतु वर्षाकालमें इसका पूजा करे । मण्डलका निर्माण करके नैवेद्य समर्पित

English

From east onwards (in the four quarters) Dkarma, JHdna, Vairdgya and AUuarya shall be worshipped and in the four corner quarters beginning with south*east Adkarma and the three others shall be worshipped.

अध्याय ३१

श्लोक 23

एभिमन्त्रैर्महादेव पूज्या अङ्गादयो नरैः ।पूजयित्वा महात्मानं विष्णुं ब्रह्मस्वरूपिणम्

ebhimantrairmahādeva pūjyā aṅgādayo naraiḥ / pūjayitvā mahātmānaṃ viṣṇuṃ brahmasvarūpiṇam

हिन्दी अर्थ

पूजन आवश्यक है। करे। पवित्रकको पुनः अधिवासिर्ते करके तीन

English

In the pericarp Vasudeva the great Lord shall be worshipped. Pdhcajanya and others are to be worshipped as fixed jn the north-east, etc. O Sankara! the aktis of the god of gods are to be worshipped in the east. Indra and other guardians of quarters are to be worshipped fixed in their respective stations.

अध्याय ३१

श्लोक 24

स्तुवीत चानया स्तुत्या परमात्मानमव्ययम् ।विष्णवे देवदेवाय नमो वै प्रभविष्णवे

stuvīta cānayā stutyā paramātmānamavyayam / viṣṇave devadevāya namo vai prabhaviṣṇave

हिन्दी अर्थ

हे रुद्र! इन पवित्रकोंका निर्माण वर्णानुसारया नौ बार सूत्र घुमाकर वेदीको वेष्टित करे। होना चाहिए, जैसे--ब्राह्मणोंका पवित्रक कौशेयं, तदनन्तर अपनेको तथा कलश, घी, अग्निकुण्ड, कपास, क्षौम अथवा कुशसूत्रसे निर्मित होनाविमान, मण्डप और गृहको सूत्रसे वेष्टित करके चाहिए । क्षत्रियोंका पवित्रक कौशेयसूत्रसे, वैश्योंका एक सूत्र देवताके मस्तकपर अर्पित करे।

English

After invoking the Lord in the Mtnala and per*

अध्याय ३१

श्लोक 25

विष्णवे वासुदेवाय नमः स्थितिकराय च ।ग्रसिष्णवे नमश्चैव नमः प्रलयशायिने

viṣṇave vāsudevāya namaḥ sthitikarāya ca / grasiṣṇave namaścaiva namaḥ pralayaśāyine

हिन्दी अर्थ

क्षौमसूत्र तथा वल्कलसूत्रसे और शूद्रोंका सनसे इस प्रकार सम्पूर्ण सामग्री निवेदितकर महेश्वर बना हुआ पवित्रक प्रशस्त माना गया है। कपास विष्णुकी पूजा करके इस मन्त्रका पाठ करना या पद्मज (कमल)-से निर्मित पवित्रक समस्त चाहिए

English

Bathing garment offering, Acamana, JamaskHra (bowing down), circular peregrin ad onfall these shall be offered at the foot. Then the Japa shall be dedicated. Obeisance unto Pradyumna the first deity; obei¬ sance to Aniruddha; obeisance to Narayapa the lord of men.

अध्याय ३१

श्लोक 26

देवानां प्रभवे चैव यज्ञानां प्रभवे नमः ।मुनीनां प्रभवे नित्यं यक्षाणां प्रभविष्णवे

devānāṃ prabhave caiva yajñānāṃ prabhave namaḥ / munīnāṃ prabhave nityaṃ yakṣāṇāṃ prabhaviṣṇave

हिन्दी अर्थ

१-कौशेय विशेष कीड़ेके कोशसे बननेवाला वस्त्र (रेशमी वस्त्र) ।

English

Obeisance, obeisance, unto the primordial Being, worthy of respect of men, of being glorified, of being honoured; the giver of boons and devoid of beginning and death.

अध्याय ३१

श्लोक 27

जिष्णवे सर्वदेवानां सर्वगाय महात्मने ।ब्रह्मेन्द्ररुद्रवन्द्याय सर्वेशाय नमोनमः

jiṣṇave sarvadevānāṃ sarvagāya mahātmane / brahmendrarudravandyāya sarveśāya namonamaḥ

हिन्दी अर्थ

२-क्षौम-तीसी, केलेकी छाल या अन्य लताविशेषसे बने वस्त्र।

English

Obeisance unto Him the creator and destroyer, the lord of Brahma; obeisance unto Him who can be known through Vedas and who holds Saha and Cakra. Obeisance unto the Lord of gods who destroys the

अध्याय ३१

श्लोक 28

सर्वलोकहितार्थाय लोकाध्यक्षाय वै नमः ।सर्वगोप्त्रे सर्वकर्त्रे सर्वदुष्टविनाशिने

sarvalokahitārthāya lokādhyakṣāya vai namaḥ / sarvagoptre sarvakartre sarvaduṣṭavināśine

हिन्दी अर्थ

३-वल्कल भोजपत्र नामके वृक्षविशेष अथवा अन्य मुलायम छालवाले वृक्षकी छालसे बना वस्त्र (वल्कल वस्त्र) । ४-अधिवासन -संस्कारविशेष ।

English

Obeisance unto Him of diverse forms, the holy of holies, having the three Gunas obeisance, obeisance. Obeisance to Him who awards salvation and who manifests Himself as Brahma, Vifpu and Isvara. Obeisance, obeisance.

अध्याय ३१

श्लोक 29

वरप्रदाय शान्ताय वरेण्याय नमोनमः ।शरण्याय सुरूपाय धर्मकामार्थदायिने

varapradāya śāntāya vareṇyāya namonamaḥ / śaraṇyāya surūpāya dharmakāmārthadāyine

हिन्दी अर्थ

आवाहितोऽसि देवेश पूजार्थं परमेश्वर ॥ धर्मकामार्थसिदध्यर्थ स्वकण्ठे धारयाम्यहम्।

English

O Lord of the Universe, save me deeply immersed in the ocean of worldly existence of terrific nature. Other than you there is no better saviour. 1 have sought refuge under you the omnipresent: release me from darkness by giving me the lamp of knowledge.

अध्याय ३१

श्लोक 30

स्तुत्वा ध्यायेत्स्वहृदये ब्रह्मरूपिणमव्ययम् ।एलं तु पूजयेद्विष्णुं मूलमन्त्रेण शङ्कर

stutvā dhyāyetsvahṛdaye brahmarūpiṇamavyayam / elaṃ tu pūjayedviṣṇuṃ mūlamantreṇa śaṅkara

हिन्दी अर्थ

(४३।२८-२९) है देव! यह विष्णु-तेजःस्वरूप, सर्वपाप- हे परमेश्वर! देवदेवेश्वर! आप यहाँपर पूजाके लिये विनाशक पवित्रक है। मैं धर्म, काम तथा अर्थ- आवाहित हैं। इस समस्त सामग्रीसे प्रभातकालमें मैं इस त्रिवर्गको सिद्धिके लिये इसे अपने कण्ठमें आपका पूजन करूँगा। आपकी संनिधि यहाँ बनी रहे। धारण करता हूँ । अनन्तर इस प्रकार प्रार्थना करे-

English

O Nllalohita (Siva) I for the destruction of all pain, the lord of gods shall be praised by means of this hymn and similar hymns from the Vedas.

अध्याय ३१

श्लोक 31

मूलमन्त्रं जपेद्वापि यः स याति नरो हरिम् ।एतत्ते कथितं रुद्र विष्णोरर्चनमुत्तमम्

mūlamantraṃ japedvāpi yaḥ sa yāti naro harim / etatte kathitaṃ rudra viṣṇorarcanamuttamam

हिन्दी अर्थ

एक रात्रि या तीन रात्रितक पवित्रकको बनमाला यथा देव कौस्तुभं सततं हृदि। अधिवासितकर स्वयं रात्रिमें जागरण करके प्रातःकाल तद्वत् पवित्रं तन्तूनां मालां त्वं हृदये धर॥ भगवान् केशवका पूजन करे और निर्मित पवित्रकोंको (४३। ४१) उन देवको अर्पित करे। पवित्रकको धूपसे धूपित है देव! आपके हृदयपर जिस प्रकार वनमाला

English

The devotee shall meditate within his heart on VifOti accompanied by the Five Taftvas. Then the Visarjana shall be performed. Thus I have ex*pounded the worship. By recitittg this, O Sankara, the hymn shall award him all desires. He shall be having the satisfaction of having done'his duty.

अध्याय ३१

श्लोक 32

रहस्यं परमं गुह्यं भुक्तिमुक्तिप्रदं परम् ।एतद्यश्च पठेद्विद्वान्विष्णुभक्तः पुमान्हर ।शृणुयाच्छ्रावयेद्वापि विष्णुलोकं स गच्छति

rahasyaṃ paramaṃ guhyaṃ bhuktimuktipradaṃ param / etadyaśca paṭhedvidvānviṣṇubhaktaḥ pumānhara / śṛṇuyācchrāvayedvāpi viṣṇulokaṃ sa gacchati

हिन्दी अर्थ

करके मन्त्रके द्वारा अभिमन्त्रित भी करना चाहिए। और कौस्तुभ विराजते हैं, उसी प्रकार तन्तुओंकी बनी गायत्री-मन्त्रसे पूजित इस पवित्रके द्वारा देव- हुई यह माला और पवित्रक आप अपने हृदयपर पूजन करके उसे मन्त्र पढ़कर देवताके समक्ष धारण करें। स्थापित कर दे इस प्रकार प्रार्थना करके ब्राह्मणोंको भोजन

English

He who reads this worship entitled PaiUaiattDl cofutj he who hears thb and he who repeats this shall attain the region of ViQu.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 31
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.