Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
53
अध्याय 53 / 317

Book 1 - Adhyaya 53

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अध्याय ५३

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे प्रायश्चित्तनिरूपणं नाम द्विपञ्चाशत्तमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- ५३ सूत उवाच ।एवं ब्रह्माब्रवीच्छ्रुत्वा हरेरष्टनिधींस्तथा ।तत्र पद्ममहापद्मौ तथा मकरकच्छपौ

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe prāyaścittanirūpaṇaṃ nāma dvipañcāśattamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 53 sūta uvāca / evaṃ brahmābravīcchrutvā hareraṣṭanidhīṃstathā / tatra padmamahāpadmau tathā makarakacchapau

हिन्दी अर्थ

मांसरहित, अत्यन्त कृश जानुयुगलवाला मनुष्य जिसके मस्तकपर त्रिशूल अथवा फरसेके रोगी होता है। समान उदरभागसे सुशोभित मनुष्य समान चिह्न दिखायी देता है, वह धन-पुत्रादिसे अतिशय भोगसे समृद्ध और कुम्भके सदृश उन्नत परिपूर्ण होकर सौ वर्षतक जीवित रहता है। या सर्पके समान उदरभागवाले लोग अत्यन्त दरिद्र है सुत्र! तर्जनी और मध्यमा अंगुलीके मध्यभागतक

English

The Brahma bath means sprinkling the body with drops of water through the holy Kuia grass simultaiicuusly chanting the holy mantras and rubbing the body. The Agna bath means purifying the body by smearing the divine ashes fn>m head to foot.

अध्याय ५३

श्लोक 2

मुकुन्दकु(न) न्दौ नीलश्च शङ्खश्चैवापरो निधिः ।सत्यामृद्धौ भवन्त्येते स्वरूपं कथयाम्यहम्

mukundaku(na) ndau nīlaśca śaṅkhaścaivāparo nidhiḥ / satyāmṛddhau bhavantyete svarūpaṃ kathayāmyaham

हिन्दी अर्थ

आयुरेखाके पहुँचनेपर मनुष्य शतायु होता है । अंगुष्ठके वर्ष होती है।

English

Plunging into water (of tank rivers etc.) is called Vdrma bath. The Ymgika bath is the meditation on the Atman by Yogic means and mental dedication.

अध्याय ५३

श्लोक 3

पद्मेन लक्षितश्चैव सात्त्विको जायते नरः ।दाक्षिण्यसारः पुरुषः सुवर्णादिकसंग्रहम्

padmena lakṣitaścaiva sāttviko jāyate naraḥ / dākṣiṇyasāraḥ puruṣaḥ suvarṇādikasaṃgraham

हिन्दी अर्थ

मूलभागसे निकलनेवाली प्रथम रेखा ज्ञानरेखा है। है रुद्र! जिसके हाथमें यह आयुरेखा स्पष्ट मध्यमा अंगुलीके मूलसे जो रेखा जाती है, वह दिखायी देती है उसकी आयु सौ वर्ष अवश्य होती आयुरेखा है। यह रेखा कनिष्ठा अंगुलीके मूलसे है, इसमें संदेह नहीं। जो रेखा कनिष्ठा अंगुलीके निकलकर मध्यमाके मूल भागको पार करती है। मूलसे होकर मध्यमा अंगुलीके मूलतक विस्तारको

English

) Apdmirgey 4) 5) Karavira} He shall face

अध्याय ५३

श्लोक 4

रुप्यादि कुर्याद्दद्यात्तु यतिदैवादियज्वनाम् ।महापद्माङ्कितो दद्याद्धनाद्यं धार्मिकाय च

rupyādi kuryāddadyāttu yatidaivādiyajvanām / mahāpadmāṅkito dadyāddhanādyaṃ dhārmikāya ca

हिन्दी अर्थ

यदि यह रेखा विच्छिन्न या किसी अन्य रेखासे प्राप्त करती है, वह रेखा मनुष्यको साठ वर्ष आयु विभक्त नहीं होती है तो ऐसे व्यक्तिकी आयु सौ प्रदान करनेमें सक्षम होती है। (अध्याय ६३)

English

After chewing, the cleansing twig shall he washed and thrown carefully in a clean place. After duly finishing the Acamana (the ritualistic drinking of water) and bnth Tarpafta (offering of water chanting Vedic shall be performed

अध्याय ५३

श्लोक 5

नीधी पद्ममहापद्मौ सात्त्विकौ पुरुषौ स्मृती ।मकरेणाङ्कितः खड्गबाणकुन्तादिसंग्रही

nīdhī padmamahāpadmau sāttvikau puruṣau smṛtī / makareṇāṅkitaḥ khaḍgabāṇakuntādisaṃgrahī

हिन्दी अर्थ

स्त्रियोंके शुभाशुभ लक्षण

English

Msdhuca indies CVDBf

अध्याय ५३

श्लोक 6

दद्याच्छ्रुताय मैत्रीं च याति नित्यं च राजभिः ।द्रव्यार्थं शत्रुणा नाशं संग्रामे चापि संव्रजेत्

dadyācchrutāya maitrīṃ ca yāti nityaṃ ca rājabhiḥ / dravyārthaṃ śatruṇā nāśaṃ saṃgrāme cāpi saṃvrajet

हिन्दी अर्थ

श्रीहरिने कहा--जिस कन्याके केश घुँघराले, चक्रके चिह्न विद्यमान रहते हैं, वह पुत्रसे सम्पन्न मुख मण्डलाकार अर्थात् गोल एवं नाभि दक्षिणावर्त होती है और राजाको पतिके रूपमें वरण होती है, बह कुलकी वृद्धि करनेवाली होती है। करती है। जो स्वर्णसदृश आभावाली होती है, जिसके हाथ जिस स्त्रीके दोनों पार्थ और स्तन-प्रदेश

English

Jasminum grsndtflorum GVDB,

अध्याय ५३

श्लोक 7

मकरः कच्छपश्चैव तामसौ तु निधी स्मृतौ ।कच्छपी विश्वसेन्नैव न भुङ्केन (ना) ददाति च

makaraḥ kacchapaścaiva tāmasau tu nidhī smṛtau / kacchapī viśvasennaiva na bhuṅkena (nā) dadāti ca

हिन्दी अर्थ

लाल कमलके समान सुन्दर होते हैं, वह हजारों रोमसमन्वित होते हैं तथा अधरोष्ठ-भाग ऊँचा उठा स्त्रियोंमें अद्वितीय तथा पतिव्रता होती है। हुआ होता है, वह निश्चित ही शीघ्र पतिका नाश

English

Achyrandthet aspera GVDB,

अध्याय ५३

श्लोक 8

निधानमुर्व्यां कुरुते निधिः सोप्येकपूरुषः ।राजसेनमुकुन्देन लक्षिता राज्यसंग्रही

nidhānamurvyāṃ kurute nidhiḥ sopyekapūruṣaḥ / rājasenamukundena lakṣitā rājyasaṃgrahī

हिन्दी अर्थ

जो कन्या वक्र केशोंवाली और गोल नेत्रवाली करनेवाली होती है। जिसके हाथमें प्राकार और होती है, वह निश्चित ही दुःख भोगनेवाली होती तोरणकी रेखाएँ दिखायी देती हैं, वह दासकुलमें है तथा उसका पति शीघ्र ही मर जाता है। भी उत्पन्न होकर रानीके पदको प्राप्त करती है।

English

AegU mannelos GVDB,

अध्याय ५३

श्लोक 9

भुक्तभोगो गायनेभ्यो दद्याद्वेश्यादिकासु च ।रजस्तमोमयो नन्दी आधारः स्यात्कुलस्य च

bhuktabhogo gāyanebhyo dadyādveśyādikāsu ca / rajastamomayo nandī ādhāraḥ syātkulasya ca

हिन्दी अर्थ

पूर्णचन्द्रके सदृश मुखमण्डलसे सुशोभित, जिस कन्याकी नाभि ऊपरकी ओर उठी हुई, बालसूर्यके समान लाल-लाल कान्तिवाली, विशाल मण्डलाकार एवं कपिलवर्णकी रोमावलियांसे नेत्रोंसे युक्त, बिम्बाफलकी भाँति ओष्ठवाली कन्या आवृत्त रहती है, वह कन्या राजकुलमें उत्पन्न चिरकालतक सुखका उपभोग करती है हस्ततलमें होकर दासीकी वृत्तिसे जीवनयापन करती है।

English

AegU mannelos GVDB, p. 274.

अध्याय ५३

श्लोक 10

स्तुतः प्रीतो भवति वै बहुभार्या भवन्ति च ।पूर्वमित्रेषु शैथिल्यं प्रीतिमन्यैः करोति च

stutaḥ prīto bhavati vai bahubhāryā bhavanti ca / pūrvamitreṣu śaithilyaṃ prītimanyaiḥ karoti ca

हिन्दी अर्थ

बहुत-सी रेखाओंके होनेपर कष्ट तथा अल्परेखाओंके जिस स्त्रीक चलनेपर दोनों पैरकी अनामिका होनेपर वह धनहीनताका दुःख भोगती है। हाथमें तथा अंगुष्ठ पृथिवीतलका स्पर्श नहीं करते हैं, वह रक्तवर्णकी रेखाओंके होनेसे वह सुखी जीवन व्यतीत शीघ्र ही पतिका नाश करती है तथा स्वयं स्वेच्छाचार- करती है, किंतु कृष्णवर्णकी रेखाओंके होनेपर वह पूर्वक जीवन बितानेवाली होती है। जिस स्त्रीके

English

AegU mannelos GVDB, p. 274.

अध्याय ५३

श्लोक 11

नीलन चाङ्कितः सत्त्वतेजसा संयुतो भवेत् ।वस्त्रधान्यादिसंग्राही तडागादि करोति च

nīlana cāṅkitaḥ sattvatejasā saṃyuto bhavet / vastradhānyādisaṃgrāhī taḍāgādi karoti ca

हिन्दी अर्थ

दास्यवृत्तिवाली दूतीका जीवन व्यतीत करती है। चलनेसे पृथिवीमें कम्पन हो उठता है, वह शीघ्र ही

English

AegU mannelos GVDB, p. 274.

अध्याय ५३

श्लोक 12

त्रिपू(पौ) रुषो निधिश्चैव आम्रारामादि कारयेत् ।एकस्य स्यान्निधिः शङ्खः स्वयं भुङ्क्ते धनादि(न्त)कम्

tripū(pau) ruṣo nidhiścaiva āmrārāmādi kārayet / ekasya syānnidhiḥ śaṅkhaḥ svayaṃ bhuṅkte dhanādi(nta)kam

हिन्दी अर्थ

अच्छी स्त्री वह है, जो पतिके कार्यामें मन्त्रीके पतिका नाश करके स्वेच्छाचारिणी बन जाती है। समान परामर्श देनेवाली होती है। सहयोगमें सुन्दर मनोहारी नेत्रोंके होनेसे स्त्री सौभाग्यशालिनी, मित्रके समान बर्ताव करती है। स्नेहके व्यवहारमें उज्वल चमकते हुए दाँतोके होनेपर उत्तम भोजन प्राप्त भार्या अथवा माता तथा शयनकालमें वेश्याके करनेवाली, शरीरकी त्वचा सुन्दर एवं कोमल होनेसे

English

AegU mannelos GVDB, p. 274.

अध्याय ५३

श्लोक 13

कदन्नभुक्परिजनो न च शोभनवस्त्रधृक् ।स्वपोषणपरः शङ्खी दद्यात्परनरे वृथा

kadannabhukparijano na ca śobhanavastradhṛk / svapoṣaṇaparaḥ śaṅkhī dadyātparanare vṛthā

हिन्दी अर्थ

समान सुख प्रदान करती है। उत्तम प्रकारकी शय्या तथा कोमल स्निग्ध चरणोंके

English

AegU mannelos GVDB, p. 274.

अध्याय ५३

श्लोक 14

मिश्रावलोकनान्मिश्रस्वभावफलदायिनः ।निधीनां रूपमुक्तं तु हरिणापि हरादिके ।हरिर्भुवनकोशादि यथोवाच तथा वदे

miśrāvalokanānmiśrasvabhāvaphaladāyinaḥ / nidhīnāṃ rūpamuktaṃ tu hariṇāpi harādike / harirbhuvanakośādi yathovāca tathā vade

हिन्दी अर्थ

जिस कन्याके हाथमें अंकुश, कुण्डल और होनेपर वह श्रेष्ठ वाहनका सुख प्राप्त करती है।

English

AegU mannelos GVDB, p. 274.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 53
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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