Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
64
अध्याय 64 / 317

Book 1 - Adhyaya 65

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अध्याय ६४

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे ज्योतिः शास्त्रे सामुद्रिके स्त्रीलक्षणनिरूपणं नाम चतुः षष्टितमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- ६५ हरिरुवाच ।समुद्रोक्तं प्रवक्ष्यामि नरस्त्रीलक्षणं शुभम् ।येन विज्ञातमात्रेण अतीतानागताप्रमा

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe jyotiḥ śāstre sāmudrike strīlakṣaṇanirūpaṇaṃ nāma catuḥ ṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 65 hariruvāca / samudroktaṃ pravakṣyāmi narastrīlakṣaṇaṃ śubham / yena vijñātamātreṇa atītānāgatāpramā

हिन्दी अर्थ

शुक्ति (सीप)-में प्रादुर्भूत मुक्ताएँ ही अधिक उपलब्ध हैं ।

English

Vindhya and Pariyatra** arc the seven Kulaparvatns. The sacred rivers arc Veda-smrtiS Narmadk'* Varada'Surasa'* Siva/

अध्याय ६४

श्लोक 2

अस्वेदिनौ मृदुतलौ कमलोदरसन्निभौ ।श्लेष्टाङ्गुली ताम्रनखौ पादाविष्णौ शिरोज्झितौ

asvedinau mṛdutalau kamalodarasannibhau / śleṣṭāṅgulī tāmranakhau pādāviṣṇau śirojjhitau

हिन्दी अर्थ

प्रायः बाँस, हाथी, मत्स्य, शङ्ख एवं वराहसे

English

Tapp', Payo?nP'*» Sarayu'* Kaveri*» Gomati* Godavari**, Bhimarathl, Krinavarxa**, MahanadI,**.

अध्याय ६४

श्लोक 3

कूर्मोन्नतौ गूढगुल्फौ सुपार्ष्णो नृपतेः स्मृतौ ।शू(सर्) पाकारौ विरूक्षौ च वक्रौ पादौ शिरालकौ

kūrmonnatau gūḍhagulphau supārṣṇo nṛpateḥ smṛtau / śū(sar) pākārau virūkṣau ca vakrau pādau śirālakau

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न मुक्ताएँ प्रभाविहीन होती हैं; फिर भी

English

Modem Borneo.

अध्याय ६४

श्लोक 4

संशुष्कौ पाण्डुरनखौ निः स्वस्य विरलाङ्गुली ।मार्गायोत्कण्टकौ पादौ कषायसदृशौ तथा

saṃśuṣkau pāṇḍuranakhau niḥ svasya viralāṅgulī / mārgāyotkaṇṭakau pādau kaṣāyasadṛśau tathā

हिन्दी अर्थ

मुक्ताशास्त्री कहते हैं कि इन मुक्ताओंमें मात्र माङ्गलिक होनेसे वे प्रशस्त मानी जाती हैं।

English

Represent! Greeks snd other European!.

अध्याय ६४

श्लोक 5

विच्छित्तिदौ च वंशस्य ब्रह्मन्घौ शङ्कु (पक्र) सन्निभौ ।अगम्यागमने प्रीतौ जङ्घा विरलरोमिका

vicchittidau ca vaṃśasya brahmanghau śaṅku (pakra) sannibhau / agamyāgamane prītau jaṅghā viralaromikā

हिन्दी अर्थ

एक ही ऐसी मुक्ता होती है, जिसको रल्रपदपर

English

Modem Andhrai, perbapj here they represent the Drsvidiani.

अध्याय ६४

श्लोक 6

मृदुरोमा समा जङ्घा तथा करिकरप्रभा ।ऊरवो जानवस्तुल्या नृपस्योपचिताः स्मृताः

mṛduromā samā jaṅghā tathā karikaraprabhā / ūravo jānavastulyā nṛpasyopacitāḥ smṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

रत्ननिर्णायक विद्वानोंने मुक्ताओंके जिन आठ

English

The mbsbiunts of Central and $uu(h*Western Asia.

अध्याय ६४

श्लोक 7

निः स्वस्य सृगालजङ्घा रौमैकैकं चकूपके ।नृपाणां श्रोत्रियाणां च द्वेद्वे श्रिये च धीमताम्

niḥ svasya sṛgālajaṅghā raumaikaikaṃ cakūpake / nṛpāṇāṃ śrotriyāṇāṃ ca dvedve śriye ca dhīmatām

हिन्दी अर्थ

कुरुविन्द-माणिक्य अथवा कुरुबिल्व नामका रत्रविशेष।

English

Modern Mahendra mountain in eastern coast of India and allied mountain!.

अध्याय ६४

श्लोक 8

त्र्याद्यैर्निः स्वा मानवाः स्युर्दुः स्वभाजश्च निन्दिताः ।केशाश्च वै कुञ्चिताश्च प्रवासे म्रियते नरः

tryādyairniḥ svā mānavāḥ syurduḥ svabhājaśca ninditāḥ / keśāśca vai kuñcitāśca pravāse mriyate naraḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकारोंका वर्णन किया है, उनमें शङ्खसे उत्पन्न और हाथीसे प्राप्त होनेवाली मुक्ताको अधम कहा है

English

Modern Nilgiri Hilb in the South India.

अध्याय ६४

श्लोक 9

निर्मांसजानुः सौभाग्यमल्पैर्निम्नै रतिः स्त्रियाः ।विकटैश्च दरिद्राः स्युः समांसै राज्यमेव च

nirmāṃsajānuḥ saubhāgyamalpairnimnai ratiḥ striyāḥ / vikaṭaiśca daridrāḥ syuḥ samāṃsai rājyameva ca

हिन्दी अर्थ

शङ्कसे उत्पन्न मुक्ता, अपने मूल कारणके मध्यभागमें अवस्थित वर्णके समान वर्णवाली तथा परिमाणमें बृहल्लोल फलके सदृश होती है। जो मुक्ता हाथीके कुम्भस्थलसे निकलती है, वह

English

The Western Ghats on the western seacoasi of India.

अध्याय ६४

श्लोक 10

महद्भिरायुराख्यातं ह्यल्पलिङ्गो धनी नरः ।अपत्यरहितश्चैव स्थूललिङ्गो घनोज्झितः

mahadbhirāyurākhyātaṃ hyalpaliṅgo dhanī naraḥ / apatyarahitaścaiva sthūlaliṅgo ghanojjhitaḥ

हिन्दी अर्थ

पीतवर्णवाली एवं प्रभाविहीन होती है । जो शङ्खोद्धव मुक्ताएँ हैं, वे शारङ्गधनुषके तुल्य वर्णको प्राप्त पीतशङ्कोंके श्रेष्ठ गोत्रमें ही उत्पन्न होती हैं। जो गजमुक्ताएँ हैं, उनका भी जन्म विशुद्ध वंशवाले

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 11

मेढे वामनते चैव सुतार्थरहितो भवेत् ।वक्रे ऽन्यथा पुत्रवान्त्स्याद्दारिद्रयं विनतेत्वधः

meḍhe vāmanate caiva sutārtharahito bhavet / vakre 'nyathā putravāntsyāddāridrayaṃ vinatetvadhaḥ

हिन्दी अर्थ

मदमत्त गजराजोंमें होता है, उन्हें मौक्तिकप्रभव अर्थात् गजमुक्ता नामसे अभिहित किया गया है। इनसे प्राप्त मुक्ता पूर्णतया पीतवर्णसे युक्त एवं प्रभाविहीन होती है।

English

It i! situated on the bank of NarmadA, according to MaJlinitha (Raghuvaihia, 5.44). Most probably it represents the modem Satpura* mountain Jo Central India.

अध्याय ६४

श्लोक 12

अल्पे त्वतनयो लिङ्गेशिराले ऽथ सुखी नरः ।स्थूलग्रन्थियुते लिङ्गे भवेत्पुत्रादिसंयुतः

alpe tvatanayo liṅgeśirāle 'tha sukhī naraḥ / sthūlagranthiyute liṅge bhavetputrādisaṃyutaḥ

हिन्दी अर्थ

मत्स्यसे उत्पन्न मुक्ता पाठीन मत्स्यके पीठके समान वर्णवाली, अत्यन्त सुन्दर, वृत्ताकार, लघु एवं अत्यधिक सूक्ष्म होती है। यह जलचर प्राणियोंके मुखोंमें प्राप्त होती है, उनमें भी जो

English

The modem Vindhya«raoges.

अध्याय ६४

श्लोक 13

कोशगूढे दीर्घैर्भुग्नैश्च धनवर्जितः ।बलवान्युद्धशीलश्च लघुशेक्तः स एव च

kośagūḍhe dīrghairbhugnaiśca dhanavarjitaḥ / balavānyuddhaśīlaśca laghuśektaḥ sa eva ca

हिन्दी अर्थ

मत्स्य अथाह समुद्रको जलराशिमें विचरण करते हैं, वे इसके जनक होते हैं।

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 14

दुर्बलस्त्वेकवृषणो विषमाभ्याञ्चलः स्त्रियाम् ।समाभ्यां क्षितिपः प्रोक्तः प्रलम्बेन शताब्दवान्

durbalastvekavṛṣaṇo viṣamābhyāñcalaḥ striyām / samābhyāṃ kṣitipaḥ proktaḥ pralambena śatābdavān

हिन्दी अर्थ

वराहके दाँतसे उत्पन्न मुक्ता उसके ही दन्ताङ्कुरोंके सदृश वर्णवाली होती है, किंतु ऐसी मुक्ता प्रदान करनेवाले विशिष्ट वराहराज कहीं किसी विशेष भूप्रदेशमें ही पाये जाते हैं ।

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 15

उद्वृं (द्ध) ताभ्यां च बह्वायू रूक्षैर्मणिभिरीश्वरः ।पाण्डरैर्मणिभिर्निः स्वा मलिनैः सुखभागिनः

udvṛṃ (ddha) tābhyāṃ ca bahvāyū rūkṣairmaṇibhirīśvaraḥ / pāṇḍarairmaṇibhirniḥ svā malinaiḥ sukhabhāginaḥ

हिन्दी अर्थ

बाँसके पर्वोसे उत्पन्न मुक्ताएँ वर्षोपल (ओले) - के समान समुञ्चल वर्णकी सुन्दर शोभासे सुशोभित रहती हैं। ऐसी मुक्ताओंके जनक बाँसोंके वंश दिव्यजनोंके लिये उपभोग्य विशेष स्थानमें अङ्कुरित

English

Modem NarmadS.

अध्याय ६४

श्लोक 16

सशब्दनिः शब्दमूत्राः स्युदंरिद्राश्च मानवाः ।एकद्वित्रिचतुः पञ्चषड्भिर्धाराभिरेव च

saśabdaniḥ śabdamūtrāḥ syudaṃridrāśca mānavāḥ / ekadvitricatuḥ pañcaṣaḍbhirdhārābhireva ca

हिन्दी अर्थ

होते हैं। वे सार्वजनिक स्थानोंमें नहीं पाये जाते।

English

Modem Wardha river in Vidarbha.

अध्याय ६४

श्लोक 17

दक्षिणावर्तचलितमूत्रा भिश्च नृपाः स्मृताः ।विकीर्णमूत्रा निः स्वाश्च प्रधानसुखदायिकाः

dakṣiṇāvartacalitamūtrā bhiśca nṛpāḥ smṛtāḥ / vikīrṇamūtrā niḥ svāśca pradhānasukhadāyikāḥ

हिन्दी अर्थ

सर्पमुक्ता मत्स्यमुक्ताके सदृश विशुद्ध तथा वृत्ताकार होती है । स्थान-विशेषके कारण उसकी

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 18

एकधाराश्च वनिताः स्निग्धैर्मणिभिरुन्नतैः ।समैः स्त्रीरत्नधनिनो मध्ये निम्नैश्च कन्यकाः

ekadhārāśca vanitāḥ snigdhairmaṇibhirunnataiḥ / samaiḥ strīratnadhanino madhye nimnaiśca kanyakāḥ

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त स्वच्छ होती है। सर्पोके सिरसे प्राप्त होनेवाली इस मुक्ताको अर्जित करनेवाले मनुष्य अतिशय प्रभासम्पन्न, राज्यलक्ष्मीसे युक्त तथा दुःसाध्य महान् ऐश्वर्यसम्पन्न, तेजस्वी एवं पुण्यवान् होते हैं।

English

Modem SivanAtha river in Cbhaitisgarh in Madhya Pradesh.

अध्याय ६४

श्लोक 19

शुष्कैर्निश्वा विशुष्कैश्च दुर्भगाः परिकीर्तिताः ।पुष्पगन्धे नृपाः शुक्रे मधुगन्धे धनं बहुः

śuṣkairniśvā viśuṣkaiśca durbhagāḥ parikīrtitāḥ / puṣpagandhe nṛpāḥ śukre madhugandhe dhanaṃ bahuḥ

हिन्दी अर्थ

रलोंके गुण एवं अवगुणोंको जाननेकी इच्छासे यदि रत्न-विधियों में पूर्ण अधिकार रखनेवाले विद्वानोंके द्वारा शुभ मुहूर्त्तमें प्रयत्नपूर्वक समस्त रक्षाविधिसे सम्पन्न भवनके ऊपर उस मुक्ताको स्थापित करा

English

Modem TAptl ri'cr in Central India. It falls in the Arabian Sea.

अध्याय ६४

श्लोक 20

पुत्राः शुक्रे मत्स्यगन्धे तनुशुक्रे च कन्यकाः ।महाभोगी मांसगन्धे यज्वा स्यान्मदगन्धिनि

putrāḥ śukre matsyagandhe tanuśukre ca kanyakāḥ / mahābhogī māṃsagandhe yajvā syānmadagandhini

हिन्दी अर्थ

दिया जाय तो उस समय आकाशे देव-दुन्दुभियोंकी ध्वनि परिव्याप्त हो उठती है । इन्द्र्धनुषकी टंकार, विद्युल्लताओंके संघर्षण एवं सघन पयोधरोंकी पारस्परिक टकराहटसे अन्तरिक्ष आच्छादित हो

English

Not identi fiable.

अध्याय ६४

श्लोक 21

दरिद्रः क्षारगन्धे च दीर्घायुः शीघ्रमैथुनी ।अशीघ्रमैथुन्यल्पायुः स्थूलस्फिक् स्याद्धनोज्झितः

daridraḥ kṣāragandhe ca dīrghāyuḥ śīghramaithunī / aśīghramaithunyalpāyuḥ sthūlasphik syāddhanojjhitaḥ

हिन्दी अर्थ

जिसके कोशागारमें यह सर्पमुक्ता रहती है, उसको मृत्यु सर्प, राक्षस, व्याधि या अन्य आभिचारिक दोषके कारण नहीं होती।

English

Modem Sarayfl in Uttara Pradesh.

अध्याय ६४

श्लोक 22

मांसलस्फिक् सुखी स्याच्च सिंहस्फिक् भूपतिः स्मृतः ।भवेत्सिंहकटी राजा निः स्वः कपिकटिर्नरः

māṃsalasphik sukhī syācca siṃhasphik bhūpatiḥ smṛtaḥ / bhavetsiṃhakaṭī rājā niḥ svaḥ kapikaṭirnaraḥ

हिन्दी अर्थ

मेघसे उत्पन्न होनेवाली मुक्ता पृथ्वीतक आ ही नहीं पाती देवगण आकाशमें ही उसका हरण कर लेते हैं। उस मेघमुक्ताके तेजकी दिव्य कान्तिसे अनावृत समस्त दिशाएँ आलोकित हो उठती हैं।

English

Modon KAveri.

अध्याय ६४

श्लोक 23

सर्पोदरा दरिद्राः स्युः पिठरैश्च घटैः समैः ।धनिनो विपुलैः पार्श्वैर्निः स्वा रक्तैश्च निम्नगैः

sarpodarā daridrāḥ syuḥ piṭharaiśca ghaṭaiḥ samaiḥ / dhanino vipulaiḥ pārśvairniḥ svā raktaiśca nimnagaiḥ

हिन्दी अर्थ

सूर्यके समान देदीप्यमान उसका परिमण्डल देखनेमें कष्टसाध्य होता है। अग्नि, चन्द्र, नक्षत्र तथा ताराओंके तेजको तिरस्कृत करके जैसे सूर्यके कारण दिन प्रतिभासित होता है, उसी प्रकार गहन

English

Modern Gomati in Uttara Pradrsh.

अध्याय ६४

श्लोक 24

समकक्षाश्च भोगाढ्या निम्नकक्षा धनोज्झिताः ।नृपाश्चोन्नतकक्षाः स्युर्जिह्ना विषमकक्षकाः

samakakṣāśca bhogāḍhyā nimnakakṣā dhanojjhitāḥ / nṛpāśconnatakakṣāḥ syurjihnā viṣamakakṣakāḥ

हिन्दी अर्थ

अन्धकारसे भरी हुई रात्रियोंमें भी उस मेघमुक्ताका तेज दिनकी प्रभाके समान ही प्रभाको विकीर्ण करता है। विचित्र रत्रकान्तिको प्राप्त सुन्दर आभूषणको प्रशस्त बनानेके लिये जलराशिवाले चारों समुद्रोंसे

English

Modem GodAvarl.

अध्याय ६४

श्लोक 25

मत्स्योदरा बहुधना नाभिभिः सुखिनः स्मृताः ।विस्तीर्णाभिर्बहुलाभिर्निम्नाभिः क्लेशभागिनः

matsyodarā bahudhanā nābhibhiḥ sukhinaḥ smṛtāḥ / vistīrṇābhirbahulābhirnimnābhiḥ kleśabhāginaḥ

हिन्दी अर्थ

इस मुक्ताका जन्म हुआ है। मेरा पूर्ण विश्वास है कि इसका कोई मूल्य निर्धारित नहीं किया जा सकता। यह जिसके पास रहती है, वह राजा होता है।

English

Modem BhimA.

अध्याय ६४

श्लोक 26

बलिमध्यगता नाभिः शूलबाधां करोति हि ।वामावर्तश्च साध्यं वै मेधां दक्षिणतस्तथा

balimadhyagatā nābhiḥ śūlabādhāṃ karoti hi / vāmāvartaśca sādhyaṃ vai medhāṃ dakṣiṇatastathā

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त उज्वल शोभा होती है। इसकी कान्ति उसके राज्यकी सम्पूर्ण भूमि सोनेसे परिपूर्ण होती शाणपर चढ़ायी गयी तलवारकी धारके समान है। कदाचित् शुभ तथा महान् कर्मविपाकसे यदि

English

Modem MahAnadl in Central Eastern India.

अध्याय ६४

श्लोक 27

पार्श्वायता चिरायुर्दा तूपविष्टा धनेश्वरम् ।अधो गवाढ्यं कुर्याच्च नृपत्वं पद्मकर्णिका

pārśvāyatā cirāyurdā tūpaviṣṭā dhaneśvaram / adho gavāḍhyaṃ kuryācca nṛpatvaṃ padmakarṇikā

हिन्दी अर्थ

कोई दरिद्र भी इस मेघमुक्ताको प्राप्त कर लेता तो उस व्यक्तिके पास जबतक यह रहती है, तबतक वह शत्रुओंसे रहित सम्पूर्ण पृथिवीका उपभोग करता है।

English

KetumalaS Tamraparn!*, Candrabh&gi» Saraftvatl> sikulylit Kaveiij Mattaganga, PayasvinI*.

अध्याय ६४

श्लोक 28

एकबलिः शतायुः स्याच्छ्रीभोगी द्विवलिः स्मृतः ।त्रिवलिः क्ष्माप आचार्य ऋजुभिर्वालिभिः सुखी

ekabaliḥ śatāyuḥ syācchrībhogī dvivaliḥ smṛtaḥ / trivaliḥ kṣmāpa ācārya ṛjubhirvālibhiḥ sukhī

हिन्दी अर्थ

यह मेघमणि मात्र राजाके लिये ही शुभप्रद है, ऐसा नहीं है, अपितु प्रजाओंके भाग्यसे भी इसका जन्म होता है। यह अपने चारों ओर सहस्र योजनपर्यन्त क्षेत्रमै अनर्थोंको आने नहीं देती।

English

The races that inhabit the central states are — Paftcilas*, Kurus'®, Matsyas", Yaudheyas'*, Pafaccaras'*, Kuntis', and Surasenas'.

अध्याय ६४

श्लोक 29

अगम्यागामी जिह्मबलिर्भूपाः पार्श्वैश्च मांसलैः ।मृदुभिः सुसमैश्चैव दक्षिणावर्तरोमभिः

agamyāgāmī jihmabalirbhūpāḥ pārśvaiśca māṃsalaiḥ / mṛdubhiḥ susamaiścaiva dakṣiṇāvartaromabhiḥ

हिन्दी अर्थ

हैत्यराज बलासुरके मुखसे विशीर्ण हुई दन्तपंक्ति आकाशमें फैली हुई नक्षत्रमालाके समान प्रतीत होती थी। विचित्र वर्णोमें भी अपना विशुद्ध स्थान रखनेवाली वह दन्तावलि आकाशसे उस समुद्रकी

English

Modem Tambervari In South India.

अध्याय ६४

श्लोक 30

विपरीतैः परप्रेष्या निर्द्रव्याः सुखवर्जिताः ।अनुद्धतैश्चूचुकैश्च भवन्ति सुभगा नराः

viparītaiḥ parapreṣyā nirdravyāḥ sukhavarjitāḥ / anuddhataiścūcukaiśca bhavanti subhagā narāḥ

हिन्दी अर्थ

जलराशिमें गिरी, जो पूर्णिमाके चन्द्रकी समस्त षोडशकलाओंको तिरस्कृत करनेमें समर्थ महागुणसम्पन्न मणिरल्रका निधान है । समुद्रके जलमें उसे शुक्तिमें स्थान प्राप्त हुआ। अत: वह सामुद्रिक

English

Modem Chenab in the Punjab.

अध्याय ६४

श्लोक 31

निर्धना विषमैर्देर्घैः पीतोपचितकैर्नृपाः ।समोन्नतं च हृदयमकम्पं मांसलं पृथु

nirdhanā viṣamairderghaiḥ pītopacitakairnṛpāḥ / samonnataṃ ca hṛdayamakampaṃ māṃsalaṃ pṛthu

हिन्दी अर्थ

मुक्ताका प्राचीन बीज बन गया, जिससे अन्य मुक्ताओंका उद्भव हुआ। समुद्रके जिस जल- प्रदेशमें सुन्दर रत्न मुक्तामणिके बीज गिरे, उसी प्रदेशमें वे बीज फैलकर शुक्तियोंमें स्थित होनेके

English

Modern Rsikulyfi in Ons$a.

अध्याय ६४

श्लोक 32

नृपाणामधमानां च खररोमशिरालकम् ।अर्थवान्समवक्षाः स्यात्पीनैर्वक्षोभिरूर्जितः

nṛpāṇāmadhamānāṃ ca khararomaśirālakam / arthavānsamavakṣāḥ syātpīnairvakṣobhirūrjitaḥ

हिन्दी अर्थ

कारण मुक्तामणि (मोती) हो गये। अतएव सिंहल, परलोक, सौराष्ट्र, ताम्रपर्ण, पारशव, कुबेर, पाण्ड्य, हाटक और हेमक--ये मुक्ताओंके खजाने हैं।

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 33

वक्षोभिर्विषमैर्निः स्वः शस्त्रेणनिधनास्तथा ।विषमैर्जत्रुभिर्निः स्वा अस्थिनद्धैश्च मानवाः

vakṣobhirviṣamairniḥ svaḥ śastreṇanidhanāstathā / viṣamairjatrubhirniḥ svā asthinaddhaiśca mānavāḥ

हिन्दी अर्थ

वर्धन, पारसीक, पाताल, लोकान्तर तथा सिंहलादिको शुक्ति-मुक्ताएँ प्रमाण, स्थान, गुण और कान्तिकी दृष्टिसे अन्य क्षेत्रोमें प्राप्त होनेवाली मुक्ताओंको तुलनामें अत्यधिक हीन वर्णकी नहीं

English

Modern Payasvini, a tributary o( the Yamunl.

अध्याय ६४

श्लोक 34

उन्नतैर्भोगिनो निम्नैर्निः स्वाः पीनैर्धनान्विताः ।निः स्वश्चिपिटकण्ठः स्याच्छिराशुष्कगलः सुखी

unnatairbhogino nimnairniḥ svāḥ pīnairdhanānvitāḥ / niḥ svaścipiṭakaṇṭhaḥ syācchirāśuṣkagalaḥ sukhī

हिन्दी अर्थ

होती हैं। अतः विद्वान् व्यक्तिको उनके मूल उत्पत्ति-स्थानको लेकर चिन्तन नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके रूप एवं प्रमाणपर ही विशेष ध्यान देनेकी आवश्यकता होती है। इस प्रकारकी मुक्तासे

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 35

शूरः स्यान्महिषग्रीवः शास्त्रात्तो मृगकण्ठकः ।कम्बुग्रीवश्च नृपतिर्लम्बकण्ठो ऽतिभक्षकः

śūraḥ syānmahiṣagrīvaḥ śāstrātto mṛgakaṇṭhakaḥ / kambugrīvaśca nṛpatirlambakaṇṭho 'tibhakṣakaḥ

हिन्दी अर्थ

मुक्ताके विविध भेद, लक्षण और परीक्षण-विधि

English

Modem Sutlaj in the Panjab.

अध्याय ६४

श्लोक 36

अरोमशा भुग्नपृष्ठं शुभं चाशुभमन्यथा ।कक्षाश्वत्थदला श्रेष्ठा सुगन्धिर्मृगरोमिका

aromaśā bhugnapṛṣṭhaṃ śubhaṃ cāśubhamanyathā / kakṣāśvatthadalā śreṣṭhā sugandhirmṛgaromikā

हिन्दी अर्थ

शुक्तिसे उत्पन्न एक मुक्ताफलका मूल्य एक हजार तीन सौ पाँच मुद्रा होता है। आधे तोले भारवाली मुक्ताका मूल्य उक्त मूल्यकी अपेक्षा २/५ भाग कम होता है। जिस मुक्ताका भार तीन

English

PfiftcSlas were the people who inhatated a region which roughly corresponds to the modem Rohtlkhanda*division of Uttara Pradesh and also the region south of it. Later on, the legion north of the GafigS was called North PSfiefila and its capital was Ahicchatra. The one to the South of the GaAgS was South Paficiia and iu capital was Kampilya.

अध्याय ६४

श्लोक 37

अन्यथा त्वर्थहीनानां दारिद्रयस्य च कारणम् ।संमासौ चैव भुग्नाल्पौ श्लिष्टौ च विपुलौ शुभौ

anyathā tvarthahīnānāṃ dāridrayasya ca kāraṇam / saṃmāsau caiva bhugnālpau śliṣṭau ca vipulau śubhau

हिन्दी अर्थ

माशा अधिक हो, उसका मूल्य दो हजार मुद्रा

English

The Kunis inhabited roughly the region around Delhi on the west of the Yamuna, generally covered by the modem province of Haryana. Their two capitals Hastinipura and Indraprastba are well known.

अध्याय ६४

श्लोक 38

आजानुलम्बितौ बाहू वृत्तौ पीनौ नृपेश्वरे ।निः स्वानां रोमशौ ह्रस्वौ श्रेष्ठौ करिकर प्रभौ

ājānulambitau bāhū vṛttau pīnau nṛpeśvare / niḥ svānāṃ romaśau hrasvau śreṣṭhau karikara prabhau

हिन्दी अर्थ

ढाई माशा परिमाणवाली मुक्ताका मूल्य तेरह सौ मुद्रा होता है। जो मुक्ता दो माशा परिमाणकी होती है, उसका मूल्य आठ सौ मुद्रा है। जिसका परिमाण आधा माशा है, उसका मूल्य तीन सौ

English

The people who inhabited the modern territory around Alwar Jaipur and Bharatpur.

अध्याय ६४

श्लोक 39

हस्ताङ्गुलय एव स्युवायुद्वारयुताः शुभाः ।मेधाविनां च सूक्ष्माः स्युर्भृत्यानां चिपिटाः स्मृताः

hastāṅgulaya eva syuvāyudvārayutāḥ śubhāḥ / medhāvināṃ ca sūkṣmāḥ syurbhṛtyānāṃ cipiṭāḥ smṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

बीस मुद्रा है। जो मुक्ता भारमें छः गुंजाके बराबर है, पण्डितोंने उसका मूल्य दो सौ मुद्रा स्वीकार किया है। जिसका परिमाण तीन गुंजा है, वह एक सौ मुद्राकी होती है। जो मुक्ता उक्त परिमाणमें

English

Not idenUfiable.

अध्याय ६४

श्लोक 40

स्थूलाङ्गुलीभिर्निः स्वाः स्युर्नताः स्युः सुकृशैस्तदा ।कपितुल्यकराः निः स्वा व्याघ्रतुल्यकरैर्बलम्

sthūlāṅgulībhirniḥ svāḥ syurnatāḥ syuḥ sukṛśaistadā / kapitulyakarāḥ niḥ svā vyāghratulyakarairbalam

हिन्दी अर्थ

सोलहवाँ भाग है, विद्वानोंने उसको दार्विका कहा है। उसका मूल्य एक सौ दस मुद्रा होता है।

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 41

पितृवित्तविनाशश्च निम्नात्करतलान्नराः ।मणिबन्धैर्निगूढैश्च सुश्लिष्टैः शुभगन्धिभिः

pitṛvittavināśaśca nimnātkaratalānnarāḥ / maṇibandhairnigūḍhaiśca suśliṣṭaiḥ śubhagandhibhiḥ

हिन्दी अर्थ

जिस मुक्ताका कथित परिमाणकी तुलनामें भार १/२० भाग होता है, उसको विद्वानोंने भवककी संज्ञा प्रदान की है। यदि वह मुक्ता गुणहीन न हो तो उसका मूल्य सत्तानबे मुद्रा होता है। जो मुक्ता

English

Perhaps the people who inhabited the territory north of Gambala.

अध्याय ६४

श्लोक 42

नृपा हीनाः करच्छैदैः सशब्दैर्धनवर्जिताः ।संवृतैश्चैव निम्नैश्च धनिनः परिकीर्तिताः

nṛpā hīnāḥ karacchaidaiḥ saśabdairdhanavarjitāḥ / saṃvṛtaiścaiva nimnaiśca dhaninaḥ parikīrtitāḥ

हिन्दी अर्थ

उक्त स्वाभाविक परिमाणमें १/३० भागकी होती है, उसको शिक्य कहा जाता है। उसका मूल्य चालीस मुद्रा होता है। जिसका परिमाण कहे गये परिमाणकी अपेक्षा १/४०वाँ अंश हो तो उसका

English

The people who lived in the region around Mathura.

अध्याय ६४

श्लोक 43

प्रोत्तानक रदातारो विषमैर्विषमा नराः ।करैः करतलैश्चैव लाक्षाभैरीश्वरास्तलैः

prottānaka radātāro viṣamairviṣamā narāḥ / karaiḥ karatalaiścaiva lākṣābhairīśvarāstalaiḥ

हिन्दी अर्थ

मूल्य तीस मुद्रा है। जो मुक्ता १/५०वाँ अंश परिमित होती है, उसे सोम कहा जाता है। उसका मूल्य बीस मुद्रा है जो मुद्रा १/६० अंशके बराबर होती है, उसको निकरशीर्ष कहा जाता है। वह

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 44

परदाररताः पीतैरूक्षैर्निः स्वा नरा मताः ।तुषतुल्यनखाः क्लीबाः कुटिलैः स्फुटितैर्नराः

paradāraratāḥ pītairūkṣairniḥ svā narā matāḥ / tuṣatulyanakhāḥ klībāḥ kuṭilaiḥ sphuṭitairnarāḥ

हिन्दी अर्थ

चौदह मुद्रा मूल्यकी होती है। १/८० तथा १/९० अंश परिमित मुक्ताको कूप्य नामसे अभिहित

English

The people inhabiting the region around KSA, modern Virfipasi.

अध्याय ६४

श्लोक 45

निः स्वाश्च कुनखैस्तद्वद्विवर्णैः परतर्ककाः ।ताम्रैर्भूपा धनाढ्याश्च अङ्गुष्ठैः सयवैस्तथा

niḥ svāśca kunakhaistadvadvivarṇaiḥ paratarkakāḥ / tāmrairbhūpā dhanāḍhyāśca aṅguṣṭhaiḥ sayavaistathā

हिन्दी अर्थ

सम्बन्धित गुण-अवगुणको कोई व्यवस्था उपलब्ध किया गया है। उनका मूल्य क्रमशः ग्यारह और नहीं है। ये सर्वत्र सब प्रकारकी आकृतियोंमें पायी नौ मुद्रा है।

English

Modem Nortli Bihar.

अध्याय ६४

श्लोक 46

अङ्गुष्ठमूलजैः पुत्री स्याद्दीर्घाङ्गुलिपर्वकः ।दीर्घायुः सुभगश्चैव निर्धनो विरलाङ्गुलिः

aṅguṣṭhamūlajaiḥ putrī syāddīrghāṅguliparvakaḥ / dīrghāyuḥ subhagaścaiva nirdhano viralāṅguliḥ

हिन्दी अर्थ

विशुद्धताके लिये मुक्ताओंको अन्नपात्र (अर्थात् सिंहल-देशके कुशलजन ऐसा ही (शोधनादि अन्न रखनेवाले मटके)-में भरे हुए जम्बीर-रसमें कार्य) करते हैं।

English

The people living around Ayodbyi.

अध्याय ६४

श्लोक 47

घनाङ्गुलिश्च सधनस्तिस्रो रेखाश्चयस्य वै ।नृपतेः करतलगा मणिबन्धात्समुत्थिताः

ghanāṅguliśca sadhanastisro rekhāścayasya vai / nṛpateḥ karatalagā maṇibandhātsamutthitāḥ

हिन्दी अर्थ

डालकर पकाना चाहिए। तत्पश्चात् उनकी मूल आकृतियोंको घिसकर चिक्कण एवं समुज्ज्वल आकार प्रदान करके उनमें यथाशीघ्र छेद भी कर

English

People living in the South-East are Kalingas, Vangas*, Punijras*, Ahgas*, Vaidarbhas Mulakas®, and those who stay in the Vindhya ranges.

अध्याय ६४

श्लोक 48

युगमीनाङ्कितनरो भवेत्सत्रप्रदो नरः ।वज्राकाराश्च धनिनां मत्स्यपुच्छनिभा बुधे

yugamīnāṅkitanaro bhavetsatraprado naraḥ / vajrākārāśca dhanināṃ matsyapucchanibhā budhe

हिन्दी अर्थ

सर्वप्रथम पूर्णतया आर्द्र मिट्टीसे लिप्त मत्स्य पुटपाक और फिर बिडाल पुटपाकमें मुक्ताओंका पाचन करे। उसके बाद उन्हें चिकना और उज्ज्वल बनानेके लिये उसमेंसे निकालकर दूध अथवा जल

English

The people Uvii in DakfiPtha are those of Pulinda,AmakaS and Jimuta*, Naya®, rasjraregions as well as Karna{as» Kambojas and Ghitas.'

अध्याय ६४

श्लोक 49

शङ्खातपत्रशिविकागजपद्मोपमा नृपे ।कुम्भाङ्कुशपताकाभा मृणालाभा निधीश्वरे

śaṅkhātapatraśivikāgajapadmopamā nṛpe / kumbhāṅkuśapatākābhā mṛṇālābhā nidhīśvare

हिन्दी अर्थ

या सुधारसमें पकाया जाता है। तदनन्तर स्वच्छ वस्त्रसे धिस-धिसकर उन्हें उज्वल और चमकदार रूप प्रदान किया जाता है। ऐसा करनेसे वह मौक्तिक अत्यधिक गुणवान् तथा कान्तिसे युक्त हो

English

The people in the South-West are Ambas(has»'* Dravidas* Lafas, Kambojas*, Strimukhas, Sakas and the people of Anarta*®.

अध्याय ६४

श्लोक 50

दामाभाश्च गवाढ्यानां स्वस्तिकाभा नृपेश्वरे ।चक्रासितोमरधनुः कुन्ताभा नृपतेः करे

dāmābhāśca gavāḍhyānāṃ svastikābhā nṛpeśvare / cakrāsitomaradhanuḥ kuntābhā nṛpateḥ kare

हिन्दी अर्थ

यदि किसी मुक्ताके कृत्रिम होनेका संदेह हो तो उसको लवणमिश्रित उष्ण, स्नेह द्रव्यमें एक रात रखकर सूखे चस्त्रमें वेष्टित करके यथायोग्य धान्यके साथ उसका मर्दन करे । ऐसा करनेसे यदि

English

The people in the West arc Sirirajyas- (governed by women) Saindhavast, Mlccchas**, Atheists**, Yavanas* Mathuras** and Naidhas.**

अध्याय ६४

श्लोक 51

अलूखलाभा यज्ञाढ्या वेदीभा चाग्निहोत्रिणि ।वापीदेवकुल्याभास्त्रिकोणाभाश्चधार्मिके

alūkhalābhā yajñāḍhyā vedībhā cāgnihotriṇi / vāpīdevakulyābhāstrikoṇābhāścadhārmike

हिन्दी अर्थ

उसमें विवर्ण भाव नहीं आता है तो उसको स्वाभाविक मुक्ता ही मानना चाहिए।

English

Modem Orissa.

अध्याय ६४

श्लोक 52

अङ्गुष्ठमूलगा रेखाः पुत्राः सूक्ष्माश्च दारिकाः ।प्रदेशिनीगता रेखा कनिष्ठामूलगामिनी

aṅguṣṭhamūlagā rekhāḥ putrāḥ sūkṣmāśca dārikāḥ / pradeśinīgatā rekhā kaniṣṭhāmūlagāminī

हिन्दी अर्थ

निर्मल एवं तेजसम्पन्न, सुन्दर एवं वृत्ताकार मुक्ता गुणसम्पन्न मानी गयी है। प्रमाणमें बड़ी-बड़ी, सुन्दर, रश्मि-कान्तिसे परिपूर्ण, श्वेत, सुवृत्ताकार, समान एवं सूक्ष्म छिद्रसे युक्त जो मुक्ता होती है, वह

English

Modem Bengal.

अध्याय ६४

श्लोक 53

शतायुषं च कुरुते छिन्नया तरुतो भयम् ।निः स्वाश्च बहुरेखाः स्युनिर्द्रव्याश्चिबुकैः कृशैः

śatāyuṣaṃ ca kurute chinnayā taruto bhayam / niḥ svāśca bahurekhāḥ syunirdravyāścibukaiḥ kṛśaiḥ

हिन्दी अर्थ

क्रय न करनेवाले व्यक्तिको भी आनन्दित करती

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 54

मांसलैश्च धनोपेता आरक्तैरधरैर्नृपाः ।बिम्बोपमैश्च स्फुटितैरोष्ठैरूक्षैश्चकण्डितैः

māṃsalaiśca dhanopetā āraktairadharairnṛpāḥ / bimbopamaiśca sphuṭitairoṣṭhairūkṣaiścakaṇḍitaiḥ

हिन्दी अर्थ

जाता है। महाप्रभावशाली, सिद्ध एवं संतप्तजनोंके है। अतः ऐसी मुक्ताको प्रशस्त मानना चाहिए।

English

Modern North Bengal.

अध्याय ६४

श्लोक 55

विषमैर्धनहीनाश्च दन्ताः स्निग्धा घनाः शुभाः ।तीक्ष्णा दन्ताः समाः श्रेष्ठा जिह्वा रक्ता समा शुभा

viṣamairdhanahīnāśca dantāḥ snigdhā ghanāḥ śubhāḥ / tīkṣṇā dantāḥ samāḥ śreṣṭhā jihvā raktā samā śubhā

हिन्दी अर्थ

हितमें लगे रहनेवाले, दयावान् आचार्य व्याडिने ऐसा ही कहा है।

English

Modern Vidarbha (Berar).

अध्याय ६४

श्लोक 56

श्लक्ष्णा दीर्घा च विज्ञेया तालू श्वेते धनक्षये ।कृष्णे च परुषो वक्रं समं सौम्यं च संवृतम्

ślakṣṇā dīrghā ca vijñeyā tālū śvete dhanakṣaye / kṛṣṇe ca paruṣo vakraṃ samaṃ saumyaṃ ca saṃvṛtam

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार यह स्पष्ट है कि रल्रशास्त्रीय परीक्षा- विधिके अनुसार जिस मुक्तामें सभी गुणोंका उदय

English

Not identj fUblr.

अध्याय ६४

श्लोक 57

भूपानाममलं श्लक्ष्णं विपरीतं च दुः खिनाम् ।महा दुः खं दुर्भगाणां स्त्रीमुखं पुत्रमाप्नुयात्

bhūpānāmamalaṃ ślakṣṇaṃ viparītaṃ ca duḥ khinām / mahā duḥ khaṃ durbhagāṇāṃ strīmukhaṃ putramāpnuyāt

हिन्दी अर्थ

रसविशेषमें शोधित वही मुक्ता शरीरका अलङ्कार हो गया है, यदि वह मुक्ता किसी पुरुषका योग

English

Modern Chhatisgarh m Madhya Pradesh.

अध्याय ६४

श्लोक 58

आढ्यानां वर्तुलं वक्रं निर्द्रव्याणां च दीर्घकम् ।भीरुवक्रः पापकर्मा धूर्तानां चतुरश्रकम्

āḍhyānāṃ vartulaṃ vakraṃ nirdravyāṇāṃ ca dīrghakam / bhīruvakraḥ pāpakarmā dhūrtānāṃ caturaśrakam

हिन्दी अर्थ

होती है-जो श्वेत काँचके समान हो, स्वर्णजटित (संयोग) प्राप्त कर लेती है तो बह अपने स्वामीको हो तथा रत्नशास्त्रके अनुसार सुपरीक्षित होनेके किसी भी प्रकारके एक भी अनर्थोत्पादक दोषके कारण (तार) कष्टका निवारण करनेवाली हो। सम्पर्कमें नहीं आने देती। (अध्याय ६९)

English

The region around modem Aurangabad*Hyd<jrabad.

अध्याय ६४

श्लोक 59

निम्नं वक्रमपुत्राणां कृपणानां च ह्रस्वकम् ।सम्पूर्णं भोगिनां कान्तं श्मश्रु स्निग्धं शुभं मृदु

nimnaṃ vakramaputrāṇāṃ kṛpaṇānāṃ ca hrasvakam / sampūrṇaṃ bhogināṃ kāntaṃ śmaśru snigdhaṃ śubhaṃ mṛdu

हिन्दी अर्थ

पद्मरागके विविध लक्षण एवं उसकी परीक्षा-विधि

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 60

संहतं चास्फुटिताग्रं रक्तश्मश्रुश्च चौरकः ।रक्ताल्पपरुषश्मश्रुकर्णाः स्युः पापमृत्यवः

saṃhataṃ cāsphuṭitāgraṃ raktaśmaśruśca caurakaḥ / raktālpaparuṣaśmaśrukarṇāḥ syuḥ pāpamṛtyavaḥ

हिन्दी अर्थ

सूतजीने कहा-- भगवान् भास्कर जब महामहिम रक्तको लंका देशकी एक श्रेष्ठ नदीके जलमें छोड़ हैत्यराज बलासुरके उस श्रेष्ठ रनबीजरूप शरीरके दिया, जो उस देशकी सुन्दर रमणियोंके कान्तिमय रक्तको लेकर स्वच्छ नीले आकाश-मार्गसे देवलोकको नितम्बोंकी प्रतिच्छायासे झिलमिलाते हुए अगाधजलसे जा रहे थे; उसी समय निरन्तर देवोंपर विजय प्राप्त परिपूर्ण तथा सुपारीकी वृक्ष-पंक्तियोंसे आच्छादित

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 61

निर्मांसैश्चिपिटैर्भोगाः कृपणा ह्रस्वकर्णकाः ।शङ्कुकर्णाश्च राजानो रोमकर्णा गतायुषः

nirmāṃsaiścipiṭairbhogāḥ kṛpaṇā hrasvakarṇakāḥ / śaṅkukarṇāśca rājāno romakarṇā gatāyuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

करनेसे अहँकारमें भरे हुए लंकाधिपति रावणने अपने दोनों तटोंसे सुशोभित हो रही थी। गङ्गाके आकर बलात् उनको शब्रुके समान आधे मार्गमें ही समान पवित्र एवं उत्तम फलोंको प्रदान करनेमें रोक लिया। भयवश सूर्यने बलासुरके रत्रबीजरूपी। सक्षम उस नदीका नाम रोक लिया। भयवश सूर्यने बलासुरके रन्नबीजरूपी' सक्षम उस नदीका नाम रावणगङ्गा प्रसिद्ध हो गया। डत मुक्ताका क्रय-(मुक्ता विक्रय) केसे रुपये मिलते हैं, उससे आनन्दानुभूति होती है। क्रय किये बिना

English

Modem Mysore.

अध्याय ६४

श्लोक 62

बृहत्कर्णाश्च धनिनोराजानः परिकीर्तिताः ।कर्णैः स्निग्धावनद्धैश्च व्यालम्बैर्मांसलैर्नृपाः

bṛhatkarṇāśca dhaninorājānaḥ parikīrtitāḥ / karṇaiḥ snigdhāvanaddhaiśca vyālambairmāṃsalairnṛpāḥ

हिन्दी अर्थ

भी आपनी उत्तमताके कारण यथाविधि यदि मुक्ता धारण की जाय तो वह स्वयं विविध ऐश्वर्य देती ही है। इसलिये न आनन्दानुभूति दोनों दशा (क्रय करने, न करने)-में समान है ।

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 63

भोगी वै निम्नगण्डः स्यान्मत्री सम्पूर्णगण्डकः ।शुकनासः सुखी स्याच्च शुष्कनासो ऽतिजीवनः

bhogī vai nimnagaṇḍaḥ syānmatrī sampūrṇagaṇḍakaḥ / śukanāsaḥ sukhī syācca śuṣkanāso 'tijīvanaḥ

हिन्दी अर्थ

बलासुरके रत्नबीजरूपी रक्तके गिरनेसे उस नदीके तटपर उसी समयसे रात्रिमें रत्राशियाँ स्वयं आकर एकत्र होने लगीं। अतएव नदीका अन्तः भाग एवं बाह्यभाग सैकड़ों स्वर्ण-बाणोंके समान अपनी

English

The people inhabiting the sea-coast.

अध्याय ६४

श्लोक 64

छिन्नाग्रकूपनासः स्यादगम्यागमने रतः ।दीर्घनासे च सौभाग्यं चौरश्चाकुञ्चितेन्द्रियः

chinnāgrakūpanāsaḥ syādagamyāgamane rataḥ / dīrghanāse ca saubhāgyaṃ cauraścākuñcitendriyaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभाको बिखेरनेमें समर्थ रत्नोंसे प्रतिभासित होने लगा। उस रावणगङ्गाके दोनों तट सहैव रत्रोंकी उज्ज्वल प्रभासे सुशोभित रहते हैं। उसके जलमें

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 65

मृत्युश्चिपिटनासे स्याद्धीनो भाग्यवतां भवेत् ।स्वल्पच्छिद्रौ सुपुटौ च अवक्रौ च नृपेश्वरे

mṛtyuścipiṭanāse syāddhīno bhāgyavatāṃ bhavet / svalpacchidrau supuṭau ca avakrau ca nṛpeśvare

हिन्दी अर्थ

(र्रविशेष) तथा स्फटिक रत्रोंके प्रधान गुणोंको धारण करते हैं। उनका स्वरूप बन्धूकपुष्प, गुञ्ाफल, वीरबहूटी कीट तथा जवाकुसुम और अष्टक (कुंकुम)-के वर्णोकी कान्तियोंसे सुशोभित रहता

English

In modern days, the people believed to be of non-Aryan origin inhabiting the South India are called Dravidas. The specific reference is perhaps to Ibe modern Tamilnadu.

अध्याय ६४

श्लोक 66

क्रूरे दक्षिणवक्रा स्याद्वलिनां च क्षुतं सकृत् ।स्याद्विनिष्पिण्डितं ह्रादि सानुनादं च जीवकृत्

krūre dakṣiṇavakrā syādvalināṃ ca kṣutaṃ sakṛt / syādviniṣpiṇḍitaṃ hrādi sānunādaṃ ca jīvakṛt

हिन्दी अर्थ

है। कुछ पद्मराग दाडिम-बीजकी आभासे सम्पन्न तथा कुछ किंशुक (पलाश) -पुष्पके समान रक्तवर्णकी कान्तिसे युक्त रहते हैं। सिन्दूर, रक्तकमल, नीलोत्पल, कुंकुम और लाक्षारसके समान रंगवाले भी पद्मराग

English

Modem Khandesh area of MaharaUra.

अध्याय ६४

श्लोक 67

वक्रान्तैः पद्मपत्राभैर्लोचनैः सुखभागिनः ।मार्जारलोचनैः पाप्मा दुरात्मा मधुपिङ्गलैः

vakrāntaiḥ padmapatrābhairlocanaiḥ sukhabhāginaḥ / mārjāralocanaiḥ pāpmā durātmā madhupiṅgalaiḥ

हिन्दी अर्थ

होते हैं । गहरा वर्ण होनेपर भी उन पद्मरागरल्रंमें स्फुरित शोभासम्पन्न कान्तियाँ सुन्दर आभाको फैलाती रहती हैं।

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 68

क्रूराः केकरनेत्राश्च हरिताक्षाः सकल्मषाः ।जिह्यैश्च लोचनैः शूराः सेनान्यो गजलोचनाः

krūrāḥ kekaranetrāśca haritākṣāḥ sakalmaṣāḥ / jihyaiśca locanaiḥ śūrāḥ senānyo gajalocanāḥ

हिन्दी अर्थ

स्फटिकसे उद्भूत पद्मराग सूर्यको किरणोंसे सम्पृक्त होकर अपनी रश्मियोंके द्वारा दूर रहते हुए भी पार्श्वभागोंको अनुरञ्जित करते हैं। कुछ रल कुसुम्भवर्ण एवं नीलवर्णको मिश्रित आभासे सम्पन्न

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 69

गम्भीराक्षा ईश्वराः स्युर्मन्त्रिणः स्थूलचक्षुषः ।नीलोत्प लाक्षा विद्वांसः सौभाग्यं श्यामचक्षुषाम्

gambhīrākṣā īśvarāḥ syurmantriṇaḥ sthūlacakṣuṣaḥ / nīlotpa lākṣā vidvāṃsaḥ saubhāgyaṃ śyāmacakṣuṣām

हिन्दी अर्थ

रहते हैं तो कुछ रलरोंका वर्ण नये विकसित कमलके सदृश शोभाको धारण करता है। कुछ रत्न भल्लान्तक तथा कण्टकारी-पुष्पके समान कान्ति प्राप्त करनेवाले हैं और कुछ रत्न हिंगुल अर्थात्

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 70

स्यात्कृष्णतारकाक्षाणामक्ष्णामुत्पाटनं किल ।मण्डलाक्षाश्च पापाः स्युर्निः स्वाः स्युर्देनलोचनाः

syātkṛṣṇatārakākṣāṇāmakṣṇāmutpāṭanaṃ kila / maṇḍalākṣāśca pāpāḥ syurniḥ svāḥ syurdenalocanāḥ

हिन्दी अर्थ

हींग-वृक्षके पुष्पोंकी शोभासे सुशोभित रहते हैं। कतिपय रल्रोंका वर्ण चकोर, पुंस्कोकिल तथा सारस पक्षियोंके नेत्रोंके समान होता है। कुछ रत्न कुमुद-पुष्पके सदृश होते हैं । प्रायः गुण-प्रभाव,

English

Modem Eastern Gujrata.

अध्याय ६४

श्लोक 71

दृक् स्निग्धा विपुला भोगे अल्पायुरधिकोन्नता ।विशालोन्नता सुखिनी दरिद्रा विषमभ्रुवः

dṛk snigdhā vipulā bhoge alpāyuradhikonnatā / viśālonnatā sukhinī daridrā viṣamabhruvaḥ

हिन्दी अर्थ

शारीरिक काठिन्य एवं गुरुत्वमें स्फटिकोद्धूत

English

Not identifiable.

अध्याय ६४

श्लोक 72

घनदीर्घासुसक्तभ्रूर्बालेन्दून्नतसुभ्रुवः ।आढ्यो निः स्वश्च खण्डभ्रृर्मध्ये च विनतभ्रुवः

ghanadīrghāsusaktabhrūrbālendūnnatasubhruvaḥ / āḍhyo niḥ svaśca khaṇḍabhrṛrmadhye ca vinatabhruvaḥ

हिन्दी अर्थ

पद्मरागके विविध लक्षण एवं उसकी परीक्षा-विधि

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 73

स्त्रीषु गम्यासु सक्ताः स्युः सुतार्थे परिवर्जिताः ।अन्नतैर्विपुलैः शङ्खैर्ललाटैर्विषमैस्तथा

strīṣu gamyāsu saktāḥ syuḥ sutārthe parivarjitāḥ / annatairvipulaiḥ śaṅkhairlalāṭairviṣamaistathā

हिन्दी अर्थ

'पद्मरागमणियाँ समान होती हैँ।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 74

निर्धना धनवन्तश्च अर्धेन्दुसदृशैर्नराः ।आचार्याः शुक्तिविशालैः शिरालैः पापकारिणः

nirdhanā dhanavantaśca ardhendusadṛśairnarāḥ / ācāryāḥ śuktiviśālaiḥ śirālaiḥ pāpakāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

सौगन्धिक मणियोंसे प्रादुर्भूत पद्मरागमणिका वर्ण नीले और लाल कमलके समान होता है। कुरुविन्दकसे उत्पन्न पद्मरागमणियोंमें वैसी आभा नहीं होती है, जैसी आभा स्फटिकसे उद्भूत

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 75

अन्नताभैः शिराभिश्च स्वस्तिकाभिर्धनेश्वराः ।निम्नैर्ललाटैर्बन्धार्हाः क्रूरकर्मरतास्तथा

annatābhaiḥ śirābhiśca svastikābhirdhaneśvarāḥ / nimnairlalāṭairbandhārhāḥ krūrakarmaratāstathā

हिन्दी अर्थ

पद्मराग मणियोंमें रहती है। अधिकांश मणियोंमें प्रभा अन्तर्निहित होती है। फिर भी वे अपनी समस्त पुञ्जीभूत रश्‍्मि-प्रभाओंसे लोगोंपर अपना अत्यधिक प्रभाव डालती हैं।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 76

संवृतैश्च ललाटैश्च कृपणा उन्नतैर्नृपाः ।अनश्रु स्निग्धरुदितमदीनं शुभदं नृणाम्

saṃvṛtaiśca lalāṭaiśca kṛpaṇā unnatairnṛpāḥ / anaśru snigdharuditamadīnaṃ śubhadaṃ nṛṇām

हिन्दी अर्थ

उस रावणगङ्गामें जो भी कुरुविन्दक रत्न पाये जाते हैं, वे सभी सघन, रक्ताभवर्ण तथा स्फटिक प्रभावाले होते हैं। उन रलोंकी वर्ण-समानताको प्राप्त करनेवाले अन्य रत्न आन्ध्रादिक किसी दूसरे

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 77

प्रचुराश्रुदीनं रूक्षं च रुदितं च सुखावहम् ।अकम्पं हसितं श्रेष्ठं मीलिताक्षमघावहम्

pracurāśrudīnaṃ rūkṣaṃ ca ruditaṃ ca sukhāvaham / akampaṃ hasitaṃ śreṣṭhaṃ mīlitākṣamaghāvaham

हिन्दी अर्थ

देशमें दुर्लभ हैं। उन स्थानोंमें जो भी कुरुविन्दक रत्न प्राप्त होते हैं, उनका मूल्य इस रावणगङ्गा नदीसे प्राप्त रत्नोंकी अपेक्षा बहुत ही कम होता है। उसी प्रकार यहाँपर उत्पन्न स्फटिकमणियोंसे प्रादुर्भूत

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 78

असकृद्धसितं दुष्टं सोन्मादस्य ह्यनेकधा ।ललाटोपसृतास्तिस्रो रेखाः स्युः शतवर्षिणाम्

asakṛddhasitaṃ duṣṭaṃ sonmādasya hyanekadhā / lalāṭopasṛtāstisro rekhāḥ syuḥ śatavarṣiṇām

हिन्दी अर्थ

पद्मरागकी समानतामें तुम्बुरु देशसे प्राप्त होनेवाली मणियोंका भी मूल्य कम ही माना गया है।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 79

नृपत्वं स्याच्चतसृभिरायुः पञ्चनवत्यथ ।अरेखेणायुर्नवतिर्विच्छिन्नाभिश्च पुंश्ललाः

nṛpatvaṃ syāccatasṛbhirāyuḥ pañcanavatyatha / arekheṇāyurnavatirvicchinnābhiśca puṃślalāḥ

हिन्दी अर्थ

पारदर्शिता, तेजस्विता एवं महत्ता श्रेष्ठ मणियोंका गुण है। जिन मणियोंमें करकराहट, छिद्र, मल, प्रभाहीनता, परुषता तथा वर्णविहीनता होती है, वे सभी जातीय गुणोंके रहनेपर प्रशस्त नहीं मानी जातीं।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 80

केशान्तोपगताभिश्च अशीत्यायुर्नरो भवेत् ।पञ्चभिः सप्तभिः षड्भिः पञ्चाशद्वहुभिस्तथा

keśāntopagatābhiśca aśītyāyurnaro bhavet / pañcabhiḥ saptabhiḥ ṣaḍbhiḥ pañcāśadvahubhistathā

हिन्दी अर्थ

यदि अज्ञानतावश कोई मनुष्य ऐसी दोषयुक्त मणियोंको धारण कर लेता है तो उनके कुप्रभावसे

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 81

चत्वारिंशच्च वक्राभिस्त्रिंशद्भ्रूलग्नगामिभिः ।विंशतिर्वामवक्रा भिरायुः क्षुद्राभिरल्पकम्

catvāriṃśacca vakrābhistriṃśadbhrūlagnagāmibhiḥ / viṃśatirvāmavakrā bhirāyuḥ kṣudrābhiralpakam

हिन्दी अर्थ

आपदाएँ उसको घेर लेती हैं।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 82

छत्राकारैः शिरोभिस्तु नृपा निम्नशिरा धनी ।चिपिटैश्च पितुर्मृत्युर्गवाद्याः परिमण्डलैः

chatrākāraiḥ śirobhistu nṛpā nimnaśirā dhanī / cipiṭaiśca piturmṛtyurgavādyāḥ parimaṇḍalaiḥ

हिन्दी अर्थ

पूर्वकथित श्रेष्ठ मणियोंकी तुलनामें अत्यधिक सौन्दर्य-सम्पन्न एवं उनके प्रतिरूप होनेपर भी पाँच

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 83

घटमूर्धा पापरुचिर्धनाद्यैः परिवर्जितः ।कृष्णैराकुञ्चितैः केशैः स्निग्धैरेकैकसम्भवैः

ghaṭamūrdhā pāparucirdhanādyaiḥ parivarjitaḥ / kṛṣṇairākuñcitaiḥ keśaiḥ snigdhairekaikasambhavaiḥ

हिन्दी अर्थ

जातियोंकी मणियोंको विजातीय माना गया है

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 84

अभिन्नाग्रैश्च मृदुभिर्न चातिबहुभिर्नृपाः ।बहुमूलैश्च विषमैः स्थूलाग्रैः कपिलैस्तथा

abhinnāgraiśca mṛdubhirna cātibahubhirnṛpāḥ / bahumūlaiśca viṣamaiḥ sthūlāgraiḥ kapilaistathā

हिन्दी अर्थ

जिनका परीक्षण विद्वान् पुरुषको प्रयत्नपूर्वक करना चाहिए। कलशपुर, सिंहल, तुम्बुरु, मुक्तपाणि तथा .

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 85

निः स्वाश्चैवातिकुचिलैर्घनैरसित (धिक) मूर्धजैः ।यद्यद्गात्रं महारूक्षं शिरालं मांसवर्जितम्

niḥ svāścaivātikucilairghanairasita (dhika) mūrdhajaiḥ / yadyadgātraṃ mahārūkṣaṃ śirālaṃ māṃsavarjitam

हिन्दी अर्थ

श्रीपूर्णकमें उत्पन्न पद्मरागका रावणगङ्गासे प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 86

तत्तत्स्या दशुभं सर्वं ततो ऽन्यथा ।विपुलस्त्रिषु गम्भीरो दीर्घः सूक्ष्मश्च पञ्चसु

tattatsyā daśubhaṃ sarvaṃ tato 'nyathā / vipulastriṣu gambhīro dīrghaḥ sūkṣmaśca pañcasu

हिन्दी अर्थ

शुभप्रद पद्मरागमणियोंसे सादृश्य होनेपर भी वे विजातीय ही माने गये हैं।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 87

षडुन्नतश्चतुर्ह्रस्वो रक्तः सप्तस्वसौ नृपः ।नाभिः स्वरश्च ससत्त्वं च त्रयं गम्भीरमीरितम्

ṣaḍunnataścaturhrasvo raktaḥ saptasvasau nṛpaḥ / nābhiḥ svaraśca sasattvaṃ ca trayaṃ gambhīramīritam

हिन्दी अर्थ

तुष-सदृश (मलिन वर्णका) होनेसे कलशपुर, अल्प ताम्रवर्णके कारण तुम्बुरु देश, कृष्णवर्णके रहनेसे सिंहल, नीलवर्णके होनेसे मुक्त तथा कान्तिविहीन होनेसे श्रीपूर्णककी मणियोंमें (रावणगङ्गाकी मणियोंकी

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 88

पुंसः स्यादतिविस्तीर्णं ललाटं वदनं ह्युरः ।चक्षुः कक्षा नासिका च षट् स्युर् नृपकृकाटिकाः

puṃsaḥ syādativistīrṇaṃ lalāṭaṃ vadanaṃ hyuraḥ / cakṣuḥ kakṣā nāsikā ca ṣaṭ syur nṛpakṛkāṭikāḥ

हिन्दी अर्थ

अपेक्षा) विजातीय रूप होनेसे ही भेद स्पष्ट होता है ।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 89

उन्नतानि च ह्रस्वनि जङ्घा ग्रीवा च लिङ्गकम् ।पृष्ठं चत्वारि रक्तानि करताल्वधरा नखाः

unnatāni ca hrasvani jaṅghā grīvā ca liṅgakam / pṛṣṭhaṃ catvāri raktāni karatālvadharā nakhāḥ

हिन्दी अर्थ

जो पद्मराग ताम्रिका (गुञ्जा)-के वर्णको धारण करता है, तुष (बहेड़ा)-के समान मध्यमें पूर्णतासे युक्त (गोलाकार) होता है तथा स्नेहसे प्रदिग्ध (स्वभावतः स्नेहिल) होता है और अत्यन्त घिसनेके

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 90

नेत्रान्तपादजिह्वौष्ठाः पञ्च सूक्ष्माणि सन्ति वै ।दशनाङ्गुलिपर्वाणि नखकेशत्वचः शुभाः

netrāntapādajihvauṣṭhāḥ pañca sūkṣmāṇi santi vai / daśanāṅguliparvāṇi nakhakeśatvacaḥ śubhāḥ

हिन्दी अर्थ

कारण कान्तिविहीन हो जाता है, मस्तक-संघर्षण अथवा हाथोंकी अँगुलियोंके स्पर्शसे जिसके पार्श्वभाग काले हो जाते हैं, हाथमें लेकर बार-बार ऊपरकी

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 91

दीर्घाः स्तनान्तरं बाहुदन्तलोचननासिकाः ।नराणां लक्षणं प्रोक्तं वदामि स्त्रीषु लक्षणम्

dīrghāḥ stanāntaraṃ bāhudantalocananāsikāḥ / narāṇāṃ lakṣaṇaṃ proktaṃ vadāmi strīṣu lakṣaṇam

हिन्दी अर्थ

वर्णको धारण करती है, वह सभी गुणोंसे युक्त होती है। समान प्रमाण, समान जाति अथवा गुरुत्व धर्मसे दो वस्तुओंमें तुलना होती है । अत: विशेष रल्राकरसे प्राप्त रल्रोंकी स्वजातिका निर्धारण गुरुत्व

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 92

राज्ञ्याः स्निग्धौ समौ पादौ तलौ ताम्रौ नखौ तथा ।श्लिष्टाङ्गुली चोन्नताग्रौ तां पाप्य नृपतिर्भवेत्

rājñyāḥ snigdhau samau pādau talau tāmrau nakhau tathā / śliṣṭāṅgulī connatāgrau tāṃ pāpya nṛpatirbhavet

हिन्दी अर्थ

और गुण-धर्मके अनुसार विद्वान् व्यक्तिको करना चाहिए। यदि उनमें संदेह उत्पन्न हो जाय तो उनको शाणपर चढ़ाकर खरादना चाहिए। वञ्र या कुरुविन्दक रत्नको छोड़कर अन्य किसी भी रत्रके

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 93

निगूढगुल्फोपचितौ पद्मकान्तितलौ शुभौ ।अस्वेदिनौ मृदुतलौ मत्स्याङ्कुशघ्वजाञ्चितौ

nigūḍhagulphopacitau padmakāntitalau śubhau / asvedinau mṛdutalau matsyāṅkuśaghvajāñcitau

हिन्दी अर्थ

जातिविशेषमें उत्पन्न सभी मणियाँ विजातीय नहीं होती हैं। उनका वर्ण समान होता है, फिर भी उनके पृथक्करणके लिये उनमें विभिन्न भेद बताये गये हैं। गुणयुक्त मणिके साथ गुणरहित मणिको

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 94

वज्राब्जहलचिह्नौ च दास्याः पादौ ततो ऽन्यथा ।जङ्घे च रोमरहिते सुवृत्ते विशिरे शुभे

vajrābjahalacihnau ca dāsyāḥ pādau tato 'nyathā / jaṅghe ca romarahite suvṛtte viśire śubhe

हिन्दी अर्थ

धारण नहीं करना चाहिए। विद्वान् पुरुषको कोस्तुभ- मणिके साथ विजातीय मणिको धारण नहीं करना चाहिए; क्योंकि अनेक गुणोंसे सम्पन्न मणियोंको एक ही विजातीय मणि नष्ट करनेमें समर्थ होती है।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 95

अनुल्बणं सन्धिदेशं समं जानुद्वयं शुभम् ।ऊरू करिकराकारावरोमौ च समौ शुभौ

anulbaṇaṃ sandhideśaṃ samaṃ jānudvayaṃ śubham / ūrū karikarākārāvaromau ca samau śubhau

हिन्दी अर्थ

शत्रुओंके बीच निवास करने तथा प्रमाद- वृत्तिमें आसक्त रहनेपर भी विशुद्ध महागुणसम्पन्न पद्मरागमणिका स्वामी होनेसे किसी भी व्यक्तिको आपदाएँ स्पर्शतक नहीं कर सकतीं । जो गुणोंसे

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 96

अश्वत्थपत्रसदृशं विपुलं गुह्यमुत्तमम् ।श्रोणीललाटकं स्त्रीणामूरु कूर्मोन्नतं शुभम्

aśvatthapatrasadṛśaṃ vipulaṃ guhyamuttamam / śroṇīlalāṭakaṃ strīṇāmūru kūrmonnataṃ śubham

हिन्दी अर्थ

परिपूर्ण तेजस्वी सुन्दर वर्णवाले पद्मरागमणिको धारण करता है, उसके समीपमें उपस्थित होकर दोष-संसर्गजनित उपद्रव कोई कष्ट देनेमें अपनेको सक्षम नहीं कर पाते हैं।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 97

गूढो मणिश्च शुभदो नितम्बश्च गुरुः शुभः ।विस्तीर्णमांसोपचिता गम्भीरा विपुला शुभा

gūḍho maṇiśca śubhado nitambaśca guruḥ śubhaḥ / vistīrṇamāṃsopacitā gambhīrā vipulā śubhā

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार तण्डुल-परिमाणके अनुसार हीरेका मूल्य निर्धारित होता है, उसी प्रकार महागुणसम्पन्न पद्मरागमणिके मूल्यका निर्धारण उड्दके परिमाणका आकलन करके करना चाहिए।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 98

नाभिः प्रदक्षिणावर्ता मध्यं त्रिबलिशोभितम् ।अरोमशौ स्तनौ पीनौ घनावविषमौ शुभौ

nābhiḥ pradakṣiṇāvartā madhyaṃ tribaliśobhitam / aromaśau stanau pīnau ghanāvaviṣamau śubhau

हिन्दी अर्थ

जो मणि या रत्न उत्तम वर्ण एवं श्रेष्ठ कान्तियोंसे सम्पन्न रहते हैं, उन्हींको प्रशस्त माना जाता है । यदि उनमें तनिक भी दोषके कारण भ्रष्टता आ जाती है

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 99

कठिनौ रोमशा शस्ता मृदुग्रीवा च कम्बुभा ।आरक्तावधरौ श्रेष्ठौ मांसलं वर्तुलं मुखम्

kaṭhinau romaśā śastā mṛdugrīvā ca kambubhā / āraktāvadharau śreṣṭhau māṃsalaṃ vartulaṃ mukham

हिन्दी अर्थ

द्वारा पद्मराग एवं इन्द्रनीलमणिमें चिहू-विशेष टंकित तो उनका मूल्य घट जाता है। (अध्याय ७०) मरकतमणिंका लक्षण तथा उसकी परीक्षा-विधि

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 100

कुन्दपुष्पसमा दन्ता भाषितं कोकिलासमम् ।दाक्षिण्ययुक्तमशठं हंसशब्दसुखावहम्

kundapuṣpasamā dantā bhāṣitaṃ kokilāsamam / dākṣiṇyayuktamaśaṭhaṃ haṃsaśabdasukhāvaham

हिन्दी अर्थ

सूतजीने कहा--नागराज वासुकि उस सिरपर अवस्थित मणिकी प्रभासे देदीप्यमान होनेके असुरपति बलासुरके पित्तको लेकर अत्यन्त वेगसे कारण आकाशरूपी समुद्रपर बने हुए एक अद्वितीय मानो आकाशमार्गको दो भागोंमें विभक्त करते हुए रजतसेतुके समान सुशोभित हो रहे थे। उसी समय

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 101

नासा समा समपुटा स्त्रीणां तु रुचिरा शुभा ।नीलोत्पलनिभं चक्षुर्नासालग्नं न लम्बकम्

nāsā samā samapuṭā strīṇāṃ tu rucirā śubhā / nīlotpalanibhaṃ cakṣurnāsālagnaṃ na lambakam

हिन्दी अर्थ

करते हुए पक्षिराज गरुडने सर्पदेव वासुकिपर प्रहार करनेका प्रयत्न किया ।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 102

न पृथू बालेन्दुनिभे भ्रुवौ चाथ ललाटकम् ।शुभमर्धेन्दुसंस्थानमतुङ्गं स्यादलोमशम्

na pṛthū bālendunibhe bhruvau cātha lalāṭakam / śubhamardhendusaṃsthānamatuṅgaṃ syādalomaśam

हिन्दी अर्थ

पित्तको मधुर-सुस्वादु जलसे परिपूर्ण सरिता एवं वृक्षोंसे सुशोभित तथा पुष्पोंकी नवकलिकाओंकी सान्द्र गन्धसे सुवासित तुरुष्कदेशकी एक श्रेष्ठ माणिक्योंसे परिपूर्ण पर्वतको उपत्यकामें छोड़

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 103

सुमांसलं कर्णयुग्मं समं मृदु समाहितम् ।स्निग्धा नीलाश्च मृदवो मूर्धजाः कुञ्चिताः कचाः

sumāṃsalaṃ karṇayugmaṃ samaṃ mṛdu samāhitam / snigdhā nīlāśca mṛdavo mūrdhajāḥ kuñcitāḥ kacāḥ

हिन्दी अर्थ

दिया। वह पित्त उस पर्वतसे निकलनेवाले जल- प्रपातके समान ही था। अतः उसीकी जलधाराके साथ बहता हुआ वह पित्त भगवती महालक्ष्मीके समीपमें स्थित उनके श्रेष्ठ भवन अर्थात् समुद्रको

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 104

स्त्रीणां समं शिरः श्रेष्ठं पादे पाणितले ऽथ वा ।वाजिकुञ्जरश्रीवृक्षयूपेषुयवतोमरैः

strīṇāṃ samaṃ śiraḥ śreṣṭhaṃ pāde pāṇitale 'tha vā / vājikuñjaraśrīvṛkṣayūpeṣuyavatomaraiḥ

हिन्दी अर्थ

प्राप्त करके उसको तटवरती भूमिके समीप मरकतमणियोंका खजाना बन गया।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 105

ध्वजचामरमालाभिः शैलकुण्डलवेदिभिः ।शङ्खातपत्रपद्मैश्च मत्स्यस्वस्तिकसद्रथैः

dhvajacāmaramālābhiḥ śailakuṇḍalavedibhiḥ / śaṅkhātapatrapadmaiśca matsyasvastikasadrathaiḥ

हिन्दी अर्थ

'फणिराज वासुकिने जिस समय उस पित्तका परित्याग किया था, उसी समय गरुडने गिरते हुए उस पित्तका कुछ अंश ग्रहण (पान)-कर लिया। जिससे वे मूच्छित हो गये और सहसा उन्होंने

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 106

लक्षणैरङ्कुशाद्यैश्च स्त्रियः स्यू राजवल्लभाः ।निगूढमणिबन्धौ च पद्मगर्भोपमौ करौ

lakṣaṇairaṅkuśādyaiśca striyaḥ syū rājavallabhāḥ / nigūḍhamaṇibandhau ca padmagarbhopamau karau

हिन्दी अर्थ

अपने दोनों नासाछिद्रोंसे उस पित्तको बाहर कर

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 107

न निम्नं नोन्नतं स्त्रीणां भवेत्करतलं शुभम् ।रेखान्वितं त्वविधवां कुर्यात्संभोगिनीं स्त्रियम् ।रेखा या मणिबन्धोत्था गता मध्याङ्गुलिं करे

na nimnaṃ nonnataṃ strīṇāṃ bhavetkaratalaṃ śubham / rekhānvitaṃ tvavidhavāṃ kuryātsaṃbhoginīṃ striyam / rekhā yā maṇibandhotthā gatā madhyāṅguliṃ kare

हिन्दी अर्थ

मणियाँ कोमल शुकपक्षीके कण्ठ, शिरीषपुष्प, खद्योतके पृष्ठप्रदेश, हरित तृणक्षेत्र, शैवाल,

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 108

गता पाणितले या च योर्ध्वपादतले स्थिता ।स्त्रीणां पुंसां तथा सा स्याद्राज्याय च सुखाय च

gatā pāṇitale yā ca yordhvapādatale sthitā / strīṇāṃ puṃsāṃ tathā sā syādrājyāya ca sukhāya ca

हिन्दी अर्थ

सर्पभक्षिणी मयूरी तथा हरितपत्रकी कान्तिसे सुशोभित होकर लोगोंको कल्याण देनेवाली होती हैं।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 109

कनिष्ठिकामूलभवा रेखा कुर्याच्छतायुषम् ।प्रदेशिनीमध्यमाभ्यामन्तरालगता सती

kaniṣṭhikāmūlabhavā rekhā kuryācchatāyuṣam / pradeśinīmadhyamābhyāmantarālagatā satī

हिन्दी अर्थ

वहाँपर नागभक्षी गरुडके द्वारा पान किया गया जो हैत्याधिपति बलासुरका पित्त गिरा था, वह स्थान मरकतमणियोंका आकर अर्थात् खजाना बन गया। वह देश सामान्य जनोंके लिये दुर्लभ

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 110

ऊना ऊनायुषं कुर्याद्रेखाश्चाङ्गुष्ठमूलगाः ।बृहत्यः पुत्रास्तन्व्यस्तु प्रमदाः परिकीर्तिताः

ūnā ūnāyuṣaṃ kuryādrekhāścāṅguṣṭhamūlagāḥ / bṛhatyaḥ putrāstanvyastu pramadāḥ parikīrtitāḥ

हिन्दी अर्थ

और गुणयुक्त हो गया। उस मरकतमणियोंके देशमें जो कुछ भी उत्पन्न होता है, वह सब विष- व्याधियोंको शान्त करनेवाला कहा गया है। सभी

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 111

स्वल्पायुषो बहु (लघु) च्छिन्ना दीर्घाछिन्ना महायुषम् ।शुभं तु लक्षणं स्त्रीणां प्रोक्तं त्वशुभमन्यथा

svalpāyuṣo bahu (laghu) cchinnā dīrghāchinnā mahāyuṣam / śubhaṃ tu lakṣaṇaṃ strīṇāṃ proktaṃ tvaśubhamanyathā

हिन्दी अर्थ

उपचारमें सफलता नहीं प्राप्त हो सकती है, उस

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 112

कनिष्ठिकानामिका वा यस्या न स्पृशते महीम् ।अङ्गुष्ठं वा गतातीत्य तर्जनी कुलटा च सा

kaniṣṭhikānāmikā vā yasyā na spṛśate mahīm / aṅguṣṭhaṃ vā gatātītya tarjanī kulaṭā ca sā

हिन्दी अर्थ

मरकतमणिका लक्षण तथा उसकी परीक्षा-वरिधि

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 113

ऊर्ध्वं द्वाभ्यां पिण्डिकाभ्यां जङ्घे चातिशिरालके ।रोमशेचातिमांसे च कुम्भाकारं तथोदरम्

ūrdhvaṃ dvābhyāṃ piṇḍikābhyāṃ jaṅghe cātiśirālake / romaśecātimāṃse ca kumbhākāraṃ tathodaram

हिन्दी अर्थ

प्रभावको वहाँपर उत्पन्न वस्तुओंसे शान्त किया जा

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 114

वामावर्तं निम्नमल्पं दुः खितानां च गुह्यकम् ।ग्रीवया ह्रस्वया निः स्वा दीर्घया च कुलक्षयः

vāmāvartaṃ nimnamalpaṃ duḥ khitānāṃ ca guhyakam / grīvayā hrasvayā niḥ svā dīrghayā ca kulakṣayaḥ

हिन्दी अर्थ

वहाँ जो मरकतमणियाँ उत्पन्न होती हैं, वे अन्यान्य देशोंकी मणियोंसे उत्तम कही गयी हैं। जो मणि अत्यन्त हरितवर्णवाली, कोमल कान्तिवाली, जटिल, मध्यभागमें सुवर्ण-चूर्णसे परिपूर्ण-सी दिखायी

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 115

पृथुलया प्रचण्डाश्च स्त्रियः स्युर्नात्र संशयः ।केकरे पिङ्गले नेत्रे श्यामे लोलेक्षणा सती

pṛthulayā pracaṇḍāśca striyaḥ syurnātra saṃśayaḥ / kekare piṅgale netre śyāme lolekṣaṇā satī

हिन्दी अर्थ

देती है, जो अपने स्थानविशेषके गुणोंसे समन्वित, समान कान्तिवाली, उत्तम तथा सूर्यकी किरणोंके स्पर्शसे अपनी प्रभाके द्वारा सभी स्थानोंको आलोकित करती है, हरितभावको छोड़कर जिसके मध्यभागमें

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 116

स्मिते कूपे गण्डयोश्च सा ध्रुवं व्यभिचारिणी ।प्रलम्बिनी ललाटे तु देवरं हन्ति चाङ्गना

smite kūpe gaṇḍayośca sā dhruvaṃ vyabhicāriṇī / pralambinī lalāṭe tu devaraṃ hanti cāṅganā

हिन्दी अर्थ

एक समुञ्चल कान्ति विद्यमान रहती है और जो अपनी नवनवोदित प्रभाराशिसे नवीन निकले हुए हरित तृणकी कान्तिको तिरस्कृत करती है तथा जो देखनेमात्रसे ही लोगोंके मनको अत्यधिक

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 117

उदरे श्वशुरं हन्ति पतिं हन्ति स्फिचोर्द्वयोः ।या तु रोमोत्तरौष्ठी स्यान्न शुभा भर्तुरेव हि

udare śvaśuraṃ hanti patiṃ hanti sphicordvayoḥ / yā tu romottarauṣṭhī syānna śubhā bhartureva hi

हिन्दी अर्थ

आह्वादित करनेमें समर्थ होती है, वह मरकतमणि बहुत गुणवती मानी जाती है। ऐसा रल्रविद्या- विशारद विद्वज्जनोंका विचार है।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 118

स्तनौ सरोमावशुभौ कर्णौ च विषमौ तथा ।कराला विषमा दन्ताः क्लेशाय च भवन्ति ते

stanau saromāvaśubhau karṇau ca viṣamau tathā / karālā viṣamā dantāḥ kleśāya ca bhavanti te

हिन्दी अर्थ

वर्णकी अत्यधिक व्यापकताके कारण जिस मरकतमणिके अन्तर्भागकी निर्मल स्वच्छ किरणें परिधानके रूपमें परिलक्षित होती हैं, जिसकी उज्ज्वल कान्ति घनीभूत, स्निग्ध, विशुद्ध, कोमल,

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 119

चौर्याय कृष्णमांसाश्च दीर्घा भुर्तुश्च मृत्यवे ।क्रव्यादरूपैर्हस्तैश्च वृककाकादिसन्निभैः

cauryāya kṛṣṇamāṃsāśca dīrghā bhurtuśca mṛtyave / kravyādarūpairhastaiśca vṛkakākādisannibhaiḥ

हिन्दी अर्थ

मयूरकण्ठकी आभाके समान शोभाको प्राप्त करती है तथा अपने वर्णकी उज्वल कान्तिकी सान्द्रतासे एकाकार होकर सुशोभित रहती है। ऐसी मरकतमणि भी उसी गुणसम्पन्न मणिकी संज्ञाको प्राप्त करती

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 120

शिरालैर्विषमैः शुष्कैर्वित्तहीना भवन्ति हि ।समुन्नतोत्तरेष्ठी या कलहे रूक्षभाषिणी

śirālairviṣamaiḥ śuṣkairvittahīnā bhavanti hi / samunnatottareṣṭhī yā kalahe rūkṣabhāṣiṇī

हिन्दी अर्थ

है, जिसका उल्लेख पहले किया जा चुका है।

English

Modem Sindh.

अध्याय ६४

श्लोक 121

स्त्रीषु दोषा विरूपासु पत्राकारो गुणास्ततः ।नरस्त्रीलक्षणं प्रोक्तं वक्ष्ये तज्ज्ञानदायकम्

strīṣu doṣā virūpāsu patrākāro guṇāstataḥ / narastrīlakṣaṇaṃ proktaṃ vakṣye tajjñānadāyakam

हिन्दी अर्थ

रूक्ष, कड़े पत्थरके समान एवं खुरदुरी तथा शिलाजीतके समान दग्ध होती है, ऐसी मरकतमणि गुणरहित होती है। जो मरकतमणि सन्धि-प्रदेशमें शुष्क हो तथा उससे अन्य रत्नका प्रादुर्भाव होता

English

Modem Sindh.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 64
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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