Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 80 / 317

Book 1 - Adhyaya 81

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अध्याय ८०

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे विद्रुमपरीक्षणं नामाशीतितमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- ८१ (इति रत्नमुक्तादि परीक्षा समाप्ता ) ।(अथ तीर्थक्षेत्रमाहात्म्यमारभ्यते ) ।सूत उवाच ।सर्वतीर्थानि वक्ष्यामि गङ्गा तीर्थोत्तमोत्तमा ।सर्वत्र सुलभा गङ्गात्रिषु स्थानेषु दुर्लभा

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe vidrumaparīkṣaṇaṃ nāmāśītitamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 81 (iti ratnamuktādi parīkṣā samāptā ) / (atha tīrthakṣetramāhātmyamārabhyate ) / sūta uvāca / sarvatīrthāni vakṣyāmi gaṅgā tīrthottamottamā / sarvatra sulabhā gaṅgātriṣu sthāneṣu durlabhā

हिन्दी अर्थ

लुप्तपिण्ड हैं, क्रियालोपसे जिनकी दुर्गति हुई है, जो जन्मान्ध या पंगु हैं, जो विरूप हैं अथवा अल्पगर्भमें ही मृत्युको प्राप्त हुए हैं, जो ज्ञात अथवा अज्ञात हैं, उनके निमित्त मेरे द्वारा दिया

English

§esa (the Serpent king) carried the entrails of the demon Bala and deposited the same in Kerala and other places; there corals of great virtue are produced.

अध्याय ८०

श्लोक 2

गङ्गाद्वारे प्रयागे च गङ्गासागरसङ्गमे ।प्रयागं परमं तीर्थं मृतानां भुक्तिमुक्तिदम्

gaṅgādvāre prayāge ca gaṅgāsāgarasaṅgame / prayāgaṃ paramaṃ tīrthaṃ mṛtānāṃ bhuktimuktidam

हिन्दी अर्थ

गया यह पिण्डदान अक्षय होकर उन्हें प्राप्त हो।

English

A coral of pleasing colour, soft and glossy, possessing deep crimson colour,

अध्याय ८०

श्लोक 3

सेवनात्कृतपिण्डानां पापजित्कामदं नृणाम् ।वाराणसी परं तीर्थं विश्वेशो यत्र केशवः

sevanātkṛtapiṇḍānāṃ pāpajitkāmadaṃ nṛṇām / vārāṇasī paraṃ tīrthaṃ viśveśo yatra keśavaḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मा और ईशान आदि देव! आप सब मेरे इस कार्यमें साक्षी हों। मैंने गयातीर्थमें आ करके पितरोंके उद्धारके लिये यह पिण्डदानादिक कार्य सम्पन्न किया है।

English

Is productive of wealth and food-grain in the world and dispels the fear of poison and sorrow. O Saunaka, know¬ ledge of crystals and corals is necessary for the knowledge of gems.

अध्याय ८०

श्लोक 4

कुरुक्षेत्रं परं तीर्थं दानाद्यैर्भुक्तिमुक्तिदम् ।प्रभासं परं तीर्थं सोमनाथो हि तत्र च

kurukṣetraṃ paraṃ tīrthaṃ dānādyairbhuktimuktidam / prabhāsaṃ paraṃ tīrthaṃ somanātho hi tatra ca

हिन्दी अर्थ

हे देव! भगवान् गदाधर विष्णु! मैं पितृकार्यके लिये इस गयातीर्थमें उपस्थित हुआ हूँ। मेरे द्वारा सम्पन्न किये गये आजके इस पितृकार्यमें आप साक्षी हों। आज मैं (देव-गुरु एवं पितृ) तीनों

English

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अध्याय ८०

श्लोक 5

द्वारका च पुरी रम्या भुक्तिमुक्तिप्रदायिका ।प्राची सरस्वती पुण्या सप्तसारस्वतं परम्

dvārakā ca purī ramyā bhuktimuktipradāyikā / prācī sarasvatī puṇyā saptasārasvataṃ param

हिन्दी अर्थ

ऋणोंसे विमुक्त हो गया हूँ। (अध्याय ८५)

English

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अध्याय ८०

श्लोक 6

केदारं सर्वपापघ्नं स (श) म्भलग्राम उत्तमः ।नरनरायणं तीर्थं मुक्त्यै वदरिकाश्रमः

kedāraṃ sarvapāpaghnaṃ sa (śa) mbhalagrāma uttamaḥ / naranarāyaṇaṃ tīrthaṃ muktyai vadarikāśramaḥ

हिन्दी अर्थ

गयाके तीर्थोकी महिमा तथा आदिगदाधरका माहात्म्य

English

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अध्याय ८०

श्लोक 7

श्वेतद्वीपं पुरी माया नैमिषं पुष्करं परम् ।अयोध्या चार्घ्यतीर्थं तु चित्रकूटं च गोमती

śvetadvīpaṃ purī māyā naimiṣaṃ puṣkaraṃ param / ayodhyā cārghyatīrthaṃ tu citrakūṭaṃ ca gomatī

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजीने कहा--इस गयाक्षेत्रमें जो विख्यात श्राद्धादिकर ब्रह्मलोक प्राप्त करते हैं।

English

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अध्याय ८०

श्लोक 8

वैनायकं महीतीर्थं रामगिर्याश्रमं परम् ।काञ्चीपुरी तुङ्गभद्रा श्रीशैलं सेतुबन्धनम्

vaināyakaṃ mahītīrthaṃ rāmagiryāśramaṃ param / kāñcīpurī tuṅgabhadrā śrīśailaṃ setubandhanam

हिन्दी अर्थ

प्रेतशिला है, वह प्रभास, प्रेतकुण्ड एवं गयासुरशीर्ष

English

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अध्याय ८०

श्लोक 9

रामेश्वरं परं तीर्थं कार्तिकेयं तथोत्तमम् ।भृगुतुङ्गं कामतीर्थं तीर्थं चामरकण्टकम्

rāmeśvaraṃ paraṃ tīrthaṃ kārtikeyaṃ tathottamam / bhṛgutuṅgaṃ kāmatīrthaṃ tīrthaṃ cāmarakaṇṭakam

हिन्दी अर्थ

गयासुरके मुण्डके पृष्ठभागमें जो शिला स्थित

English

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अध्याय ८०

श्लोक 10

उज्जयिन्यां महाकालः कुब्जके श्रीधरो हरिः ।कुब्जाम्रकं महातीर्थं कालसर्पिश्च कामदम्

ujjayinyāṃ mahākālaḥ kubjake śrīdharo hariḥ / kubjāmrakaṃ mahātīrthaṃ kālasarpiśca kāmadam

हिन्दी अर्थ

नामक तीर्थामें तीन प्रकारसे अवस्थित है । सर्वदेवमयी है, उसका नाम 'मुण्डपृष्ठगिरि' है, इसी कारण यह इस शिलाको धर्मदेवताके द्वारा ऐश्वर्यके लिये पर्वत सर्वदेवमय है । इसके पाददेशमें ब्रह्मसरोवरादि धारण किया गया है। अपने मित्रादिक बन्धु- अनेक तीर्थ हैं। उन तीर्थॉमें एक अरविन्दवन बान्धवोंमें जिन लोगोंको प्रेतयोनि प्राप्त हो गयी नामक तीर्थ है। उस वनसे सुशोभित होनेके कारण

English

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अध्याय ८०

श्लोक 11

महा केशी च कावेरी चन्द्रभागा विपाशया ।एकाम्रं च तथा तीर्थं ब्रह्मेशं देवकोटकम्

mahā keśī ca kāverī candrabhāgā vipāśayā / ekāmraṃ ca tathā tīrthaṃ brahmeśaṃ devakoṭakam

हिन्दी अर्थ

है, उनका उद्धार करनेके लिये यह प्रेतशिला शुभ उसके पर्वतीय प्रान्त- भागको ' अरविन्दगिरि' कहते है। अतएव मुनिजन, नृपगण तथा राजपत्न्यादि इस हैं। बहाँपर क्रौञ्च पक्षियोंक चरण-चिहू विद्यमान प्रेतशिलापर आ करके अपने पितृजनोंके लिये रहते हैं। इसलिये वह पर्वतीय भाग “क्रौद्धपाद ' के

English

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अध्याय ८०

श्लोक 12

मथुरा च पुरी रम्या शोणश्चैव महानदः ।जम्बूसरो महातीर्थं तानि तीर्थानि विद्धि च

mathurā ca purī ramyā śoṇaścaiva mahānadaḥ / jambūsaro mahātīrthaṃ tāni tīrthāni viddhi ca

हिन्दी अर्थ

नामसे प्रसिद्ध है। श्राद्धादि करनेसे वह तीर्थ कुलीन मनुष्य सत्त्वसम्पन्न होकर युद्धभूमिमें शत्रुओंको

English

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अध्याय ८०

श्लोक 13

सूर्यः शिवो गणो देवी हरिर्यत्र च तिष्ठति ।एतेषु च यथान्येषु स्नानं दानं जपस्तपः

sūryaḥ śivo gaṇo devī hariryatra ca tiṣṭhati / eteṣu ca yathānyeṣu snānaṃ dānaṃ japastapaḥ

हिन्दी अर्थ

पितरोंको ब्रह्मलोक प्रदान करता है।

English

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अध्याय ८०

श्लोक 14

पूजा श्राद्धं पिण्डदानं सर्वं भवति चाक्षयम् ।शालग्रामं सर्वदं स्यात्तीर्थं पशुपतेः परम्

pūjā śrāddhaṃ piṇḍadānaṃ sarvaṃ bhavati cākṣayam / śālagrāmaṃ sarvadaṃ syāttīrthaṃ paśupateḥ param

हिन्दी अर्थ

आदिकालसे ही यहाँपर आदिदेव भगवान् गदाधर विष्णु अव्यक्तरूपमें शिलारूपसे स्थित हैं । इसलिये यह शिला देवमयी कही गयी है। यह शिला गयासुरके सिरको आच्छादित करके वर्तमान

English

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अध्याय ८०

श्लोक 15

कोकामुखं च वाराहं भा (भु) ण्डीरं स्वामिसंज्ञकम् ।लो (मो) हदण्डे महाविष्णुर्मन्दारे मधुसूदनः

kokāmukhaṃ ca vārāhaṃ bhā (bhu) ṇḍīraṃ svāmisaṃjñakam / lo (mo) hadaṇḍe mahāviṣṇurmandāre madhusūdanaḥ

हिन्दी अर्थ

समयमें भी अपने गुरुत्व भावके कारण चारों ओरसे अवस्थित है । कालान्तरमें महारुद्रादि देवोंके साथ आदि-अन्तसे रहित हरि आदि गदाधरके रूपमें व्यक्त होकर यहाँ स्थित हो गये हैं।

English

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अध्याय ८०

श्लोक 16

कामरूपं महातीर्थं कामाख्या (क्षा) यत्र तिष्ठति ।पुण्ड्रवर्धनकं तीर्थं कार्तिकेयश्च यत्र च

kāmarūpaṃ mahātīrthaṃ kāmākhyā (kṣā) yatra tiṣṭhati / puṇḍravardhanakaṃ tīrthaṃ kārtikeyaśca yatra ca

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार पूर्वकालमें धर्म-संरक्षण एवं अधर्म- विनाशके निमित्त हैत्यों और राक्षसोंका संहार करनेके लिये मत्स्यावतार हुआ। जैसे कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, दाशरथी राम, कृष्ण और बुद्ध हुए।

English

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अध्याय ८०

श्लोक 17

विरजस्तु महातीर्थं तीर्थं श्रीपुरुषोत्तमम् ।महेन्द्रपर्वतस्तीर्थं कावेरी च नदी परा

virajastu mahātīrthaṃ tīrthaṃ śrīpuruṣottamam / mahendraparvatastīrthaṃ kāverī ca nadī parā

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर कल्कि अवतार भी हुआ। उसी प्रकार यहाँपर व्यक्ताव्यक्त भगवान् आदि गदाधर प्रकट हुए।

English

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अध्याय ८०

श्लोक 18

गोदावरी महातीर्थं पयोष्णी वरदा नदी ।विन्ध्यः पापहरं तीर्थं नर्मदाभेद उत्तमः

godāvarī mahātīrthaṃ payoṣṇī varadā nadī / vindhyaḥ pāpaharaṃ tīrthaṃ narmadābheda uttamaḥ

हिन्दी अर्थ

आदिकालमें इसी पवित्र तीर्थपर ब्रह्मादि देवोंने आदिदेव भगवान् गदाधर विष्णुकी पूजा की थी। इसलिये यहाँपर अर्घ्य, पाद्य, पुष्पादिक उपहारोंसे उन भगवान् गदाधरको पूजा करनी चाहिए। जो

English

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अध्याय ८०

श्लोक 19

गोकर्णं परमं तीर्थं तीर्थं माहिष्मती पुरी ।कालञ्जरं महीतीर्थं शुक्लतीर्थमनुत्तमम्

gokarṇaṃ paramaṃ tīrthaṃ tīrthaṃ māhiṣmatī purī / kālañjaraṃ mahītīrthaṃ śuklatīrthamanuttamam

हिन्दी अर्थ

मनुष्य इस तीर्थमें जाकर अन्य देवताओंके साथ इन आदिदेव भगवान् गदाधरको अर्घ्य-पात्र, पाद्य, गन्ध, पुष्प, धूप, सुन्दर नैवेद्य, विविध प्रकारके पुष्पोंसे बनी हुई मालाएँ, वस्त्र, मुकुट, घण्टा,

English

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अध्याय ८०

श्लोक 20

कृते शौचे मुक्तिदं च शार्ङ्गधारी तदन्तिके ।विरजं सर्वदं तीर्थं स्वर्णाक्षं तीर्थमुत्तमम्

kṛte śauce muktidaṃ ca śārṅgadhārī tadantike / virajaṃ sarvadaṃ tīrthaṃ svarṇākṣaṃ tīrthamuttamam

हिन्दी अर्थ

चामर, दर्पण, अलंकार, पिण्ड, अन्न तथा अन्यान्य वस्तुओंको प्रदान करता है, वह जबतक इस पृथिवीपर जीवित रहता है, तबतक धन, धान्य,

English

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अध्याय ८०

श्लोक 21

नन्दितीर्थं मुक्तिदं च कोटितीर्थफलप्रदम् ।नासिक्यं च महातीर्थं गोवर्धनमतः परम्

nanditīrthaṃ muktidaṃ ca koṭitīrthaphalapradam / nāsikyaṃ ca mahātīrthaṃ govardhanamataḥ param

हिन्दी अर्थ

श्रेय, विद्या, अर्थ एवं अभीष्ट कामनाओंको प्राप्त करता है। भार्याको प्राप्तकर (अन्तमें) स्वर्गका निवासी बन जाता है । तदनन्तर वह पुनः पृथिवीपर जन्म लेकर राज्यसुख प्राप्त करता है। वह श्रेष्ठ

English

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अध्याय ८०

श्लोक 22

कृष्णवेणी भीमरथी गण्डकी या त्विरावती ।तीर्थं बिन्दुसरः पुण्यं विष्णुपादोदकं परम्

kṛṣṇaveṇī bhīmarathī gaṇḍakī yā tvirāvatī / tīrthaṃ bindusaraḥ puṇyaṃ viṣṇupādodakaṃ param

हिन्दी अर्थ

पराजित करनेमें समर्थ रहते हुए वध और बन्धनसे विमुक्त होकर मृत्युके पश्चात् मोक्ष प्राप्त करता है। जो इस गयातीर्थमें अपने पितृजनोंके लिये श्राद्ध तथा पिण्डदानादिक क्रियाओंको सम्पन्न

English

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अध्याय ८०

श्लोक 23

ब्रह्मध्यानं परं तीर्थं तीर्थमिन्द्रियनिग्रहः ।दमस्तीर्थं तु परमं भवशुद्धिः परं तथा

brahmadhyānaṃ paraṃ tīrthaṃ tīrthamindriyanigrahaḥ / damastīrthaṃ tu paramaṃ bhavaśuddhiḥ paraṃ tathā

हिन्दी अर्थ

करनेवाले हैं, वे उन पितृगणोंके साथ स्वयं भी ब्रह्मलोकगामी होते हैं । जो व्यक्ति पुरुषोत्तमक्षेत्रमें जाकर भगवान् जगन्नाथ, सुभद्रा एवं बलभद्रकी पूजा करते हैं, वे

English

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अध्याय ८०

श्लोक 24

ज्ञानह्रदे ध्यानजले रागद्वेषमलापहे ।यः स्नाति मानसे तीर्थे स याति परमां गतिम्

jñānahrade dhyānajale rāgadveṣamalāpahe / yaḥ snāti mānase tīrthe sa yāti paramāṃ gatim

हिन्दी अर्थ

लोग ज्ञान, लक्ष्मी तथा पुत्रादिकोंको प्राप्तकर अन्त समयमें भगवान् पुरुषोत्तम विष्णुके सांनिध्यमें चले जाते हैं। जो मनुष्य वहाँ स्थित भगवान् पुरुषोत्तम जगन्नाथ, सूर्यदेव और गणनायक विध्नेश्वरके समक्ष

English

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अध्याय ८०

श्लोक 25

इदं तीर्थमिदं नेति ये नरा भेददर्शिनः ।तेषां विधीयते तीर्थगमनं तत्फलं च यत्

idaṃ tīrthamidaṃ neti ye narā bhedadarśinaḥ / teṣāṃ vidhīyate tīrthagamanaṃ tatphalaṃ ca yat

हिन्दी अर्थ

पितरोंके लिये पिण्डदानादिक कार्य करते हैं,उन लोगोंको वह सम्पूर्ण कृत्य ब्रह्मलोक प्रदान करता है। इस क्षेत्रमें विद्यमान कपर्दी भगवान् शिव और गणेशको नमस्कार करके मनुष्य समस्त विघ्नोंसे

English

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अध्याय ८०

श्लोक 26

सर्वं ब्रह्मेतियो ऽवेति नातीर्थं तस्य किञ्चन ।एतेषु स्नानदानानि श्राद्धं पिण्डमथाक्षयम्

sarvaṃ brahmetiyo 'veti nātīrthaṃ tasya kiñcana / eteṣu snānadānāni śrāddhaṃ piṇḍamathākṣayam

हिन्दी अर्थ

मुक्त हो जाता है। यहाँपर विराजमान भगवान् कार्तिकेयका पूजनकर ब्रह्मलोक प्राप्त करता है। द्वादशादित्य सूर्यदेवकी सम्यक् अर्चनासे पुरुष सर्वरोग-विमुक्त हो जाता है। भगवान् वैश्वानर

English

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अध्याय ८०

श्लोक 27

सर्वा नद्यः सर्वशैलाः तीर्थं देवादिसेवितम् ।श्रीरङ्गं च हरेस्तीर्थं तापी श्रेष्ठा महानदी

sarvā nadyaḥ sarvaśailāḥ tīrthaṃ devādisevitam / śrīraṅgaṃ ca harestīrthaṃ tāpī śreṣṭhā mahānadī

हिन्दी अर्थ

अग्निदेवकी विधिवत् पूजा करके पुरुष उत्तम कान्ति प्राप्त करता है। रेवन्त देवकी पूजा करके मनुष्य उत्तम जातिके अश्वोंको प्राप्त करता है। देवराज इन्द्रको भलीभाँति पूजा करके महान् ऐश्वर्य

English

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अध्याय ८०

श्लोक 28

सप्तगोदावरं तीर्थं तीर्थं कोणगिरिः परम् ।महालक्ष्मीर्यत्र देवी प्रणीता परमा नदी

saptagodāvaraṃ tīrthaṃ tīrthaṃ koṇagiriḥ param / mahālakṣmīryatra devī praṇītā paramā nadī

हिन्दी अर्थ

एवं गौरीदेवीकी पूजा करके सौभाग्यकी प्राप्ति करनी चाहिए । मनुष्य सरस्वतीदेवीकी पूजा करके विद्या, लक्ष्मीको पूजा करके सम्पत्ति तथा गरुडकी पूजा करके विघ्नोंके समूहोंसे विमुक्त हो जाता है।

English

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अध्याय ८०

श्लोक 29

सह्याद्रौ देवदेवेश एकवीरः सुरेश्वरी ।गङ्गाद्वारे कुशावर्ते विन्ध्यके नीलपर्वते

sahyādrau devadeveśa ekavīraḥ sureśvarī / gaṅgādvāre kuśāvarte vindhyake nīlaparvate

हिन्दी अर्थ

कषेत्रपालदेवकी पूजा करके व्यक्ति ग्रहोंके समूहसे निर्मुक्त हो जाता है । मुण्डपृष्ठकी पूजा करके अपनी सम्पूर्ण अभिलाषाओंकी पूर्ति करनी चाहिए।

English

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अध्याय ८०

श्लोक 30

स्नात्वा कनखले तीर्थे स भवेन्न पुनर्भवे ।सू उवाच ।एतान्यन्यानि तीर्थानि स्नानाद्यैः सर्वदानि हि

snātvā kanakhale tīrthe sa bhavenna punarbhave / sū uvāca / etānyanyāni tīrthāni snānādyaiḥ sarvadāni hi

हिन्दी अर्थ

वधबन्धविनिर्मुक्तश्चान्ते मोक्षमवाप्नुयात् । श्राद्धपिण्डादिकर्तारः पितृभिर्त्रह्मलोकगा: ॥ (८६। १८)

English

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अध्याय ८०

श्लोक 31

श्रुत्वाब्रवीद्धरेर्ब्रह्मा व्यासं दक्षादिसंयुतम् ।एतान्युक्त्वा च तीर्थानि पुन स्तीर्थोत्तमोत्तमम् ।गयाख्यं प्राह सर्वेषामक्षयं ब्रह्मलोकदम्

śrutvābravīddharerbrahmā vyāsaṃ dakṣādisaṃyutam / etānyuktvā ca tīrthāni puna stīrthottamottamam / gayākhyaṃ prāha sarveṣāmakṣayaṃ brahmalokadam

हिन्दी अर्थ

अष्टनागदेवकी पूजा करके प्राणी सर्पदंशसे मुक्त हो जाता है। ब्रह्माकी पूजा करके ब्रह्मलोकका पुण्य अर्जित करना चाहिए

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 80
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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