अध्याय ११६
श्लोक 1
ततस् तेषूपविष्टेषु सदस्यैः सह शौनकः ।उक्तो ऽयं हरिवंशस् ते पर्वाणि निखिलानि च यथा पुरोक्तानि तथा व्यासशिष्येण धीमता
tatas teṣūpaviṣṭeṣu sadasyaiḥ saha śaunakaḥ | ukto 'yaṃ harivaṃśas te parvāṇi nikhilāni ca yathā puroktāni tathā vyāsaśiṣyeṇa dhīmatā
हिन्दी अर्थ
है, इसलिये अवध्य है। भगवान् शड्डूरने हम दोनोंको वर दिया है और वे ही हमारे अस्त्रोंके भी दाता हैं। संग्राममें जाते समय दो महाभूत हम दोनोंकी रक्षा करते हैं। हमलोग उस ग्वालेकों जीतकर अपने पितासे राजसूय यज्ञ करायेंगे॥ ८-९॥ तुमने जिन सहायकोंके नाम बताये हैं, वे सब-के-सब युद्धमें अत्यन्त ही कायर हैं। मैं रणभूमिमें सेनासहित उन सबको मारकर फिर केशवको पराजित करूँगा'॥ १०॥ “इस समय धनुष- बाण धारण करनेवाली विशाल सेनाका संग्रह करना है। वह प्रास, मुसल, कवच आदिसे सम्पन्न होगी। उसमें सहस्तरों रथ होंगे, जिनमें रथी वीर आरूढ़ रहेंगे। वह सेना गदा और परिघ आदि अस्त्रोंसे भरी-पूरी होगी, उसके पास बहुत-से ईंधन होंगे तथा वह प्रचुर बल एवं साधनसे सम्पन्न होगी। ऐसी भयड्ूर वाहिनी युद्धके लिये कूँच करे। सेनानायकगण चारों ओरसे इसकी देख-रेख करें, तू अवध्य रहकर ही चला जा। तुझे यहाँ
English
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