अध्याय २८
श्लोक 1
भजमानस्य पुत्रो ऽथ रथमुख्यो विदूरथः राजाधिदेवः शूरस् तु विदूरथसुतो ऽभवत्
bhajamānasya putro 'tha rathamukhyo vidūrathaḥ rājādhidevaḥ śūras tu vidūrathasuto 'bhavat
हिन्दी अर्थ
विद्यानां ब्रह्मविद्या त्वमोड्लरो5थ वषट् तथा तुम्हारे केश बिखरे हुए हैं। तुम्हीं प्राणियोंकी मृत्यु हो। मधुसे युक्त तथा मांससे रहित बलि तुम्हें प्रिय है। तुम्हीं लक्ष्मी हो तथा तुम्हीं दानवोंका वध करनेके लिये अलक्ष्मी बन जाती हो ॥ १२॥ तुम्हीं सावित्री, देवमाता अदिति तथा समस्त भूतोंकी जननी हो। कन्याओंका ब्रह्मचर्य तुम्हीं हो और विवाहिता युवतियोंका सौभाग्य भी तुम्हीं हो॥१३॥ तुम्हीं यज्ञोंकी अन्तर्वेदी तथा ऋत्विजोंकी दक्षिणा हो। किसानोंकी सीता (हल जोतनेसे उभरी हुई रेखा) तथा समस्त प्राणियोंको धारण करनेवाली धरणी भी तुम्हीं हो॥ १४॥ नौका या जहाजसे यात्रा करनेवाले व्यापारियोंको प्राप्त होनेवाली सिद्धि भी तुम्हीं हो। तुम्हीं समुद्रकी तट-भूमि, यक्षोंकी प्रथम यक्षी
English
Saying 'may it be so' and saluting that foremost of Munis Hiranyakasipu, the king of Dānavas, was pleased and returned to the celestial region