अध्याय ३१
श्लोक 111
कृत्वात्मानं महाबाहुश् चतुर्धा प्रभुर् ईश्वरः लोके राम इति ख्यातस् तेजसा भास्करोपमः
kṛtvātmānaṃ mahābāhuś caturdhā prabhur īśvaraḥ loke rāma iti khyātas tejasā bhāskaropamaḥ
हिन्दी अर्थ
करूँगा॥ ५॥ तुमलोग प्रचण्ड वायुके साथ विचरते हुए जब घोर वर्षा करोगे, तब उससे आहत एवं पीड़ित हुई देंगी'॥ ६॥ श्रीकृष्णद्वारा अपने उत्सव एवं शासनका जलधरोंको इस प्रकार अपनी आज्ञा सुना दी॥७॥ तब वे घोर गर्जना करनेवाले पर्वताकार भयंकर काले मेघ आकाशमें सब ओर छा गये ॥ ८ ॥ उस समय इन्द्रधनुषसे विभूषित हो बिजली गिराते हुए उन मेघोंने आकाशको अन्धकारपूर्ण कर दिया॥ ९॥ कुछ मेघ दूसरे हाथियोंसे सटकर चलते हुए हाथियोंके समान प्रतीत होते थे। दूसरे मगरोंके समान प्रकाशित होते थे तथा अन्य बड़े-बड़े बादल आकाशमें नागोंके समान विचरने लगे
English
¹⁸³ The art of music. This was the special gift of the Gandharvas.