Kaushitaki Upanishad· Kauṣītakyupaniṣad
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अध्याय 3 / 4

Chapter 3 — Indra's Teaching to Pratardana

तृतीय अध्याय — इन्द्र-प्रतर्दन संवाद

2 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय ३

श्लोक 8

अहं प्राणः प्रज्ञात्मा तं मामायुरमृतमित्युपास्स्व ।आयुः प्राणः प्राणो ह्यायुः

ahaṃ prāṇaḥ prajñātmā taṃ māmāyuramṛtamityupāssva | āyuḥ prāṇaḥ prāṇo hyāyuḥ

हिन्दी अर्थ

मैं प्राण हूँ — प्रज्ञात्मा (चेतन आत्मा)। मुझे आयु और अमृत के रूप में उपासना करो। आयु ही प्राण है और प्राण ही आयु है।

English

I am prana — the conscious Self. Worship me as life, as immortality. Life is prana; prana is life.

अध्याय ३

श्लोक 9

प्राणो वै सत्यं तस्मात् प्राणं वदन्ति सत्यं हि वै प्राणः ।प्राणो हि वै सर्वं ज्योतिः प्राणो हि वै सर्वं वीर्यम्

prāṇo vai satyaṃ tasmāt prāṇaṃ vadanti satyaṃ hi vai prāṇaḥ | prāṇo hi vai sarvaṃ jyotiḥ prāṇo hi vai sarvaṃ vīryam

हिन्दी अर्थ

प्राण ही सत्य है; इसीलिए प्राण को सत्य कहते हैं, क्योंकि प्राण वास्तव में सत्य है। प्राण ही सब प्रकाश है; प्राण ही सब वीर्य है।

English

Prana is indeed truth; therefore they call prana truth, for prana is truly truth. Prana is indeed all light; prana is indeed all power.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/ · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Kaushitaki Upanishad — Chapter 3
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.