अध्याय २५
श्लोक 1
इति श्रीकूर्मपूराणे षट्साहस्त्र्यां संहितायां पूर्वविभागे चतुर्विशो ऽध्यायः सूत उवाच प्रविश्य मेरुशिखरं कैलासं कनकप्रभम् ।रराम भगवान् सोमः केशवेन महेश्वरः
iti śrīkūrmapūrāṇe ṣaṭsāhastryāṃ saṃhitāyāṃ pūrvavibhāge caturviśo 'dhyāyaḥ sūta uvāca praviśya meruśikharaṃ kailāsaṃ kanakaprabham / rarāma bhagavān somaḥ keśavena maheśvaraḥ
हिन्दी अर्थ
रुद्ररूप, ज्ञानसे अतीत आप परमेश्वरको नमस्कार करता हूँ, क्योंकि आपसे भिन्न अन्य कुछ है ही नहीं ॥ ३७--४० ॥ महेशवरका रूप किसी भी आलोक (प्रकाश)-से आलोकित (प्रकाशित) नहीं होता, अपितु स्वयं प्रकाशमान है और उसीके
English
Nimi and Krkana were the most well-known and the most important among them. Bhojas and Vaimatrkas were born in the family of Mahabhoja.