अध्याय २९
श्लोक 1
इति श्रीकूर्मपुराणे षट्साहस्त्र्यां संहितायां पूर्वविभागे अष्टाविंशो ऽध्यायः ऋषय ऊचुः प्राप्य वाराणसीं दिव्यां कृष्णद्वैपायनो मुनिः ।किमकार्षोन्महाबुद्धिः श्रोतुं कौतूहलं हि नः
iti śrīkūrmapurāṇe ṣaṭsāhastryāṃ saṃhitāyāṃ pūrvavibhāge aṣṭāviṃśo 'dhyāyaḥ ṛṣaya ūcuḥ prāpya vārāṇasīṃ divyāṃ kṛṣṇadvaipāyano muniḥ / kimakārṣonmahābuddhiḥ śrotuṃ kautūhalaṃ hi naḥ
हिन्दी अर्थ
त्रिष्टपू-ये (सात) छन्द सूर्यके (सात) अश्व कहे गये हैं। मानसाचलपर पूर्व दिशामें महेन्द्रकी महापुरी है। दक्षिणमें यमकी, पश्चिममें वरुणकी, उत्तरमें सोमकी नगरी है, उनके (भी)नाम सुनो-अमरावती, संयमनी, सुखा तथा विभा--ये क्रमसे इन्द्रादिकी महापुरियाँ हैं। दक्षिण दिशामें स्थित देवोंके भी देव प्रजापति (सूर्य) ज्योतिश्चक्रको ग्रहणकर प्रक्षिप्त बाणके समान भ्रमण करते हैं
English
O lord of men, I shall tell you the Tugadharmas succi¬ nctly, as it is not possible to explain them in detail by me.