अध्याय ३३
श्लोक 1
इति श्रीकूर्मपुराणे षट्साहस्त्र्यां संहितायां पूर्वविभागे द्वात्रिंशो ऽध्यायः सूत उवाच ततः सर्वाणि गुह्यानि तीर्थान्यायतनानि च ।जगाम भगवान् व्यासो जैमिनिप्रमुखैर्वृतः
iti śrīkūrmapurāṇe ṣaṭsāhastryāṃ saṃhitāyāṃ pūrvavibhāge dvātriṃśo 'dhyāyaḥ sūta uvāca tataḥ sarvāṇi guhyāni tīrthānyāyatanāni ca / jagāma bhagavān vyāso jaiminipramukhairvṛtaḥ
हिन्दी अर्थ
तत्र नारायणं देवं विश्वयोनिं सनातनम्। सूतजीने कहा-केतुमालवर्षके पुरुष कृष्णवर्णके होते हैं और सभी पनस (कटहल)-का भोजन करनेवाले होते हैं। वहाँको स्त्रियाँ कमलपत्रके समान वर्णवाली होती हैं। ये सभी दस हजार वर्षतक जीवित रहते हैं।
English
(The flame of Are) had three eyes. It was blue¬ necked and the crest was marked by the moon. It was seated on