अध्याय ४७
श्लोक 1
इति श्रीकूर्मपुराणे षट्साहस्त्र्यां संहितायां पूर्वविभागे षट्चत्वारिशो ऽध्यायः सूत उवाच जम्बूद्वीपस्य विस्ताराद् द्विगुणेन समन्ततः ।संवेष्टयित्वा क्षारोदं प्लक्षद्वीपो व्यवस्थितः
iti śrīkūrmapurāṇe ṣaṭsāhastryāṃ saṃhitāyāṃ pūrvavibhāge ṣaṭcatvāriśo 'dhyāyaḥ sūta uvāca jambūdvīpasya vistārād dviguṇena samantataḥ / saṃveṣṭayitvā kṣārodaṃ plakṣadvīpo vyavasthitaḥ
हिन्दी अर्थ
स्तुति करते हैं। दोषरहित ऋषिगण आपको नमस्कार करते हैं तथा शान्त-चित्त, सत्यसंध ब्रह्मनिष्ठ यतिजन आप सर्वश्रेष्ठमें प्रवेश करते हैं बहुत शाखाओंवाला एक अनन्त वेद आपके अद्वितीय एवं एकरूपका बोध कराता है। जो लोग जानने योग्य आपकी शरण ग्रहण करते हैं, उन्हींको शाश्वत शान्ति प्राप्त होती है, अन्य किसीको नहीं। आप
English
With their Atman (individual soul) fixed on the Cosmic soul, they meditate on the lord Isana stationed on the peak of the mountain but pervading the universe.