Kurma Purana· Kūrma Purāṇa
49
अध्याय 49 / 95

Book 1 - Adhyaya 49

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अध्याय ४९

श्लोक 1

इति श्रीकूर्मपुराणे षट्साहस्त्र्यां संहितायां पूर्वविभागे अष्टचत्वारिंशो ऽध्यायः ऋषय ऊचुः अतीतानागतानीह यानि मन्वन्तराणि तु ।तानि त्वं कथयास्माकं व्यासांश्च द्वापरे युगे

iti śrīkūrmapurāṇe ṣaṭsāhastryāṃ saṃhitāyāṃ pūrvavibhāge aṣṭacatvāriṃśo 'dhyāyaḥ ṛṣaya ūcuḥ atītānāgatānīha yāni manvantarāṇi tu / tāni tvaṃ kathayāsmākaṃ vyāsāṃśca dvāpare yuge

हिन्दी अर्थ

सूक्तोंमें पुरुषसूक्त, साममन्त्रॉमें ज्येष्ठसाम हूँ। मैं सभी वेदके अर्थको जाननेवाले विद्वानोंमें स्वायम्भुव मनु, देशोंमें ब्रह्मावर्त और क्षेत्रोंमें अविमुक्त (वाराणसी) क्षेत्र हूँ। मैं विद्याओंमें आत्मविद्या, ज्ञानोंमें परम

English

The unsullied form of Siva 370

अध्याय ४९

श्लोक 2

वेदशाखाप्रणयनं देवदेवस्य धीमतः ।तथावतारान् धर्मार्थमीशानस्य कलौ युगे

vedaśākhāpraṇayanaṃ devadevasya dhīmataḥ / tathāvatārān dharmārthamīśānasya kalau yuge

हिन्दी अर्थ

ईश्वरीय ज्ञान, (पञ्च) भूतोंमें आकाश और सत्त्वोंमें मैं (बन्धनकारक) पाशोंमें माया, संहार करनेवालोंमें काल, गतियोंमें मुक्ति और उत्कृष्टोंमें परमेश्वर हूँ। इस संसारमें अन्य जो कुछ भी अधिक तेज और बलसे सम्पन्न सत्त्व पदार्थ हैं, उन सबको मेरे ही

English

The form of the Supreme Brahman Siva —the

अध्याय ४९

श्लोक 3

कियन्तो देवदेवस्य शिष्याः कलियुगेषु वै ।एतत् सर्वं समासेन सूत वक्तुमिहार्हसि

kiyanto devadevasya śiṣyāḥ kaliyugeṣu vai / etat sarvaṃ samāsena sūta vaktumihārhasi

हिन्दी अर्थ

तेजसे सम्पन्न जानना चाहिए। संसारमें रहनेवाले सभी जीवोंको पशु" कहा गया है, मैं देव उनका पति (स्वामी) हूँ, इसलिये विद्दानोंद्वारा 'पशुपति' कहा जाता हूँ। मैं मायारूपी पाशके द्वारा अपनी लीलासे

English

The Path of liberation of the individual soul

अध्याय ४९

श्लोक 4

सूत उवाच मनुः स्वायंभुवः पूर्वं ततः स्वारोचिषो मनुः ।उत्तमस्तामसश्चैव रैवतश्चाक्षुषस्तथा

sūta uvāca manuḥ svāyaṃbhuvaḥ pūrvaṃ tataḥ svārociṣo manuḥ / uttamastāmasaścaiva raivataścākṣuṣastathā

हिन्दी अर्थ

इन पशुओं (जीवों)-को बन्धनमें डालता हूँ। वेदज्ञ लोग मुझे ही पशुओंको मुक्त करनेवाला मोचक कहते हैं। मायाके पाशसे आबद्ध जीवोंको मुक्त करनेवाला मुझ भूतोंके अधिपति अव्यय परमात्माको छोड़कर अन्य कोई नहीं है

English

The Path of Action—Duties of celibate

अध्याय ४९

श्लोक 5

षडेते मनवो ऽतीताः सांप्रतं तु रवेः सुतः ।वैवस्वतो ऽयं यस्यैतत् सप्तमं वर्तते ऽन्तरम्

ṣaḍete manavo 'tītāḥ sāṃprataṃ tu raveḥ sutaḥ / vaivasvato 'yaṃ yasyaitat saptamaṃ vartate 'ntaram

हिन्दी अर्थ

(प्रकृति-महत्-अहंकार आदि) चौबीस तत्त्व, माया, कर्म तथा गुण--ये पशुपतिके पाश और पशुओं (जीवों)- को बन्धनमें डालनेवाले क्लेश हैं। मन, बुद्धि, अहंकार, पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश--ये आठ प्रकृति

English

The Usages ofSistas. Good Conduct 395

अध्याय ४९

श्लोक 6

स्वायंभुवं तु कथितं कल्पादावन्तरं मया ।अत ऊर्ध्वं निबोधध्वं मनोः स्वारोचिषस्य तु

svāyaṃbhuvaṃ tu kathitaṃ kalpādāvantaraṃ mayā / ata ūrdhvaṃ nibodhadhvaṃ manoḥ svārociṣasya tu

हिन्दी अर्थ

हैं और दूसरे सभी पदार्थ विकार या विकृति हैं। कान, त्वचा, नेत्र, जीभ तथा पाँचवीं नासिका, गुदा, जननेन्द्रिय, हाथ, पैर तथा दसवीं इन्द्रिय वाणी और शब्द, स्पर्श, रूप, रस तथा गन्ध-ये तेईस तत्त्व प्राकृत अर्थात् प्रकृतिसे उत्पन्न होनेवाले हैं॥ २१--२४॥

English

Duties of Brahmacarins 400

अध्याय ४९

श्लोक 7

पारावताश्च तुषिता देवाः स्वारोचिषे ऽन्तरे ।विपश्चिन्नाम देवेन्द्रो बभूवासुरसूदनः

pārāvatāśca tuṣitā devāḥ svārociṣe 'ntare / vipaścinnāma devendro babhūvāsurasūdanaḥ

हिन्दी अर्थ

चौबीसवाँ तत्त्व अव्यक्त किंवा प्रधान है, वह गुणोंसे लक्षित होनेवाला आदि, मध्य तथा अन्तसे रहित और जगतका परम कारण है। सत्त्व, रज और तम-- ये तीन गुण कहे गये हैं। इन तीनों गुणोंको साम्यावस्थाको

English

The Duties of the Householder 410

अध्याय ४९

श्लोक 8

ऊर्जस्तम्भस्तथा प्राणो दान्तो ऽथ वृषभस्तथा ।तिमिरश्चार्वरीवांश्च सप्त सप्तर्षयो ऽभवन्

ūrjastambhastathā prāṇo dānto 'tha vṛṣabhastathā / timiraścārvarīvāṃśca sapta saptarṣayo 'bhavan

हिन्दी अर्थ

अव्यक्त प्रकृति जानना चाहिए १-यहाँ मृत्युसे यमराज या धर्मराजको समझना चाहिए, जो प्राणिमात्रकी अन्तिम गतिके कारण एवं निर्णायक हैं।

English

The Duties of the Householder. Rules of

अध्याय ४९

श्लोक 9

चैत्रकिंपुरुषाद्याश्च सुताः स्वारोचिषस्य तु ।द्वितीयमतदाख्यातमन्तरं शृणु चोत्तरम्

caitrakiṃpuruṣādyāśca sutāḥ svārociṣasya tu / dvitīyamatadākhyātamantaraṃ śṛṇu cottaram

हिन्दी अर्थ

२-अज्ञानसे आवृत होनेके कारण जीव पशु हैं।

English

Decision about Acceptable and Prohibited Food 424

अध्याय ४९

श्लोक 10

तृतीये ऽप्यन्तरे विप्रा उत्तमो नाम वै मनुः ।सुशान्तिस्तत्र देवेन्द्रो बभूवामित्रकर्षणः

tṛtīye 'pyantare viprā uttamo nāma vai manuḥ / suśāntistatra devendro babhūvāmitrakarṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

२८० कूर्मपुराण सत्त्वं ज्ञानं तमोऽज्ञानं रजो मिश्रमुदाहतम्। सत्त्वगुणको ज्ञानस्वरूप, तमोगुणको आज्ञानस्वरूप

English

Daily Duties of a Householder 430

अध्याय ४९

श्लोक 11

सुधामानस्तथा सत्याः शिवाश्चाथ प्रतर्दनाः ।वशवर्तिनश्च पञ्चैते गणा द्वादशकाः स्मृताः

sudhāmānastathā satyāḥ śivāścātha pratardanāḥ / vaśavartinaśca pañcaite gaṇā dvādaśakāḥ smṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

गुणानां बुब्द्रिवैषम्याद् वैषम्यं कवयो विदुः॥ २७॥ और रजोगुणको मिश्ररूप अर्थात् ज्ञान और अज्ञान दोनोंका मिश्रित रूप कहा गया है। बुद्धिकी विषमतासे गुणोंका भी वैषम्य होता है, ऐसा विद्वान् लोग कहते हैं

English

Daily Duties of a Householder: Mode of

अध्याय ४९

श्लोक 12

रजोर्ध्वश्चोर्ध्वबाहुश्च सबलश्चानयस्तथा ।सुतपाः शुक्र इत्येते सप्त सप्तर्षयो ऽभवन्

rajordhvaścordhvabāhuśca sabalaścānayastathā / sutapāḥ śukra ityete sapta saptarṣayo 'bhavan

हिन्दी अर्थ

धर्माधर्माविति प्रोक्तौ पाशौ द्वौ बन्धसंज्ञितो । बन्ध नामवाले दो पाशोंको धर्म और अधर्प कहा मय्यर्पितानि कर्माणि निबन्धाय विमुक्तये॥ २८॥ गया है। मुझे अर्पित किये गये कर्म बन्धनसे युक्तिके लिये होते हैं। आत्माका बन्धन करनेवाले अविद्या,

English

Procedure of Performance of Sraddha 447

अध्याय ४९

श्लोक 13

तामसस्यान्तरे देवाः सुरा वाहरयस्तथा ।सत्याश्च सुधियश्चैव सप्तविंशतिका गणाः

tāmasasyāntare devāḥ surā vāharayastathā / satyāśca sudhiyaścaiva saptaviṃśatikā gaṇāḥ

हिन्दी अर्थ

क्लेशाख्यानचलान् प्राहुः पाशानात्मनिबन्धनान्॥ २९॥ पाँच अचल (दीर्घकालतक स्थायी-सा रहनेवाले) तत्त्वोंको पाश कहा गया है। मायाको इन (गांचों)

English

Rules governing Sraddha 453

अध्याय ४९

श्लोक 14

शिबिरिन्द्रस्तथैवासीच्छतयज्ञोपलक्षणः ।बभूव शङ्करे भक्तो महादेवार्चने रतः

śibirindrastathaivāsīcchatayajñopalakṣaṇaḥ / babhūva śaṅkare bhakto mahādevārcane rataḥ

हिन्दी अर्थ

एतेषामेव पाशानां माया कारणमुच्यते। पाशोंका कारण कहा जाता है। अव्यक्त मूलप्रकृतिरूप मूलप्रकृतिरव्यक्ता सा शक्तिर्मयि तिष्ठति॥ ३०॥ शक्ति मुझमें प्रतिष्ठित रहती है

English

Rules for performance ofSraddha 460

अध्याय ४९

श्लोक 15

ज्योतिर्धर्मा पृथुः काव्यश्चैत्रोग्निर्वनकस्तथा ।पीवरस्त्वृषयो ह्येते सप्त तत्रापि चान्तरे

jyotirdharmā pṛthuḥ kāvyaścaitrognirvanakastathā / pīvarastvṛṣayo hyete sapta tatrāpi cāntare

हिन्दी अर्थ

स एव मूलप्रकृतिः प्रधानं पुरुषोऽपि च। यह मूल प्रकृति, प्रधान, पुरुष, महत्, अहंकार आदि

English

Rules regarding Impurities caused by Birth or

अध्याय ४९

श्लोक 16

पञ्चमे चापि विप्रेन्द्रा रैवतो नाम नामतः ।मनुर्वसुश्च तत्रेन्द्रो बभूवासुरमर्दनः

pañcame cāpi viprendrā raivato nāma nāmataḥ / manurvasuśca tatrendro babhūvāsuramardanaḥ

हिन्दी अर्थ

विकारा महदादीनि देवदेवः सनातनः॥ ३१॥ विकारयुक्त तत्त्व-ये सब देवाधिदेव सनातनके ही रूप स एव बन्धः स च बन्धकर्ता हैं। यही (सनातन पुरुष) बन्धन है, यही बन्धनमें डालनेवाला स एव पाशः पशवः स एव। है। यही पाश और यही पशु है। यही सब कुछ जानता

English

The Duties of Agni-hotrin 482

अध्याय ४९

श्लोक 17

अमिताभा भूतरया वैकुण्ठाः स्वच्छमेधसः ।एते देवगणास्तत्र चतुर्दश चतुर्दश

amitābhā bhūtarayā vaikuṇṭhāḥ svacchamedhasaḥ / ete devagaṇāstatra caturdaśa caturdaśa

हिन्दी अर्थ

स वेद सर्व न च तस्य वेत्ता है, परंतु इसे जाननेवाला कोई नहीं है। इसे ही आदि

English

The Means of Livelihood of a Brahmana

अध्याय ४९

श्लोक 18

हिरण्यरोमा वेदश्रीरूर्ध्वबाहुस्तथैव च ।वेदबाहुः सुधामा च पर्जन्यश्च महामुनिः ।एते सप्तर्षयो विप्रास्तत्रासन् रैवते ऽन्तरे

hiraṇyaromā vedaśrīrūrdhvabāhustathaiva ca / vedabāhuḥ sudhāmā ca parjanyaśca mahāmuniḥ / ete saptarṣayo viprāstatrāsan raivate 'ntare

हिन्दी अर्थ

तमाहुरग्र्यं पुरुषं पुराणम्॥ ३२॥ पुराणपुरुष कहा जाता है महेश्वरका अद्वितीय परमेश्वरके रूपमें निरूपण, सांख्य-सिद्धान्तसे तत्त्वोंका सृष्टिक्रम, महेश्वरके छः अङ्ग, महेश्वरके स्वरूपके ज्ञानसे परमपदकी प्राप्ति

English

Rules of offering religious gifts 487

अध्याय ४९

श्लोक 19

स्वारोचिषश्चोत्तमश्च तामसो रैवतस्तथा ।प्रियव्रतान्वया ह्येते चत्वारो मनवः स्मृताः

svārociṣaścottamaśca tāmaso raivatastathā / priyavratānvayā hyete catvāro manavaḥ smṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

अन्यद् गुह्यतमं ज्ञानं वक्ष्ये ब्राह्मणपुंगवाः । ज्ञानको बताता हुँ, जिससे यह प्राणी घोर संसार-सागरको येनासौ तरते जन्तुर्घोरे संसारसागरम्॥ ९॥ पार कर लेता है

English

Duties in Vanaprastha (Hermit's) Stage 495

अध्याय ४९

श्लोक 20

षष्ठे मन्वन्तरे चासीच्चाक्षुषस्तु मनुर्द्विजाः ।मनोजवस्तथैवेन्द्रो देवानपि निबोधतः

ṣaṣṭhe manvantare cāsīccākṣuṣastu manurdvijāḥ / manojavastathaivendro devānapi nibodhataḥ

हिन्दी अर्थ

अहं ब्रह्ममयः शान्तः शाश्वतो निर्मलोऽव्ययः। मैं ब्रह्ममय, शान्त, शाश्वत, निर्मल, अव्यय, एकाकी, एकाकी भगवानुक्तः केवलः परमेश्वरः॥ २॥ अद्वितीय परमेश्वर तथा भगवान् कहलाता हूँ। महद्रह्य

English

Duties of Yatis (recluses) 500

अध्याय ४९

श्लोक 21

आद्याः प्रसूता भाव्याश्च पृथुगाश्च दिवौकसः ।महानुभावा लेख्याश्च पञ्चैते ह्यष्टका गणाः

ādyāḥ prasūtā bhāvyāśca pṛthugāśca divaukasaḥ / mahānubhāvā lekhyāśca pañcaite hyaṣṭakā gaṇāḥ

हिन्दी अर्थ

मम योनिर्महद् ब्रह्म तत्र गर्भ दधाम्यहम्। मेरी योनिरूप है, मैं उसमें मूल माया नामक गर्भ धारण

English

Duties of an Ascetic 504

अध्याय ४९

श्लोक 22

सुमेधा विरजाश्चैव हविष्मानुत्तमो मधुः ।अतिनामा सहिष्णुश्च सप्तासन्नृषयः शुभाः

sumedhā virajāścaiva haviṣmānuttamo madhuḥ / atināmā sahiṣṇuśca saptāsannṛṣayaḥ śubhāḥ

हिन्दी अर्थ

। मायाभिधानं तु ततो जातमिदं जगत् करता हूँ और उससे यह संसार उत्पन्न हुआ है। मूलं मायाभिधानं तु द ण्य (उसीसे) प्रधान, पुरुष, आत्मा, महत्तत्त्व, भूतादि प्रधानं पुरुषो ह्यात्मा महान् भूतादिरिव च । (तामस अहंकार), तन्मात्राएँ, पञ्चमहाभूत तथा इन्द्रिय

English

Rules of Expiation 509

अध्याय ४९

श्लोक 23

विवस्वतः सुतो विप्राः श्राद्धदेवो महाद्युतिः ।मनुः स वर्तते धीमान् सांप्रतं सप्तमे ऽन्तरे

vivasvataḥ suto viprāḥ śrāddhadevo mahādyutiḥ / manuḥ sa vartate dhīmān sāṃprataṃ saptame 'ntare

हिन्दी अर्थ

+ यहाँ बन्धन आदिको सनातनपुरुषमें कल्पितमात्र बताकर अद्हैतभावकी प्रतिष्ठा की गयी है।

English

Importance of Kapala-mocana Tirtha 512

अध्याय ४९

श्लोक 24

आदित्या वसवो रुद्रा देवास्तत्र मरुद्गणाः ।पुरन्दरस्तथैवेन्द्रो बभूव परवीरहा

ādityā vasavo rudrā devāstatra marudgaṇāḥ / purandarastathaivendro babhūva paravīrahā

हिन्दी अर्थ

ततोऽण्डमभवद्धैमं सूर्यकोटिसमप्रभम्। तस्मिन् जज्ञे महाब्रह्मा मच्छक्त्या चोपबंहितः स धीरः सर्वलोकेषु न मोहमधिगच्छति

English

Expiatory rites 522

अध्याय ४९

श्लोक 25

वसिष्ठः कश्यपश्चात्रिर्जमदग्निश्च गौतमः ।विश्वामित्रो भरद्वाजः सप्त सप्तर्षयो ऽभवन्

vasiṣṭhaḥ kaśyapaścātrirjamadagniśca gautamaḥ / viśvāmitro bharadvājaḥ sapta saptarṣayo 'bhavan

हिन्दी अर्थ

ओङ्कारमूर्तिर्भगवानहं ब्रह्मा प्रजापतिः

English

Expiatory rites (continued) 524

अध्याय ४९

श्लोक 26

विष्णुशक्तिरनौपम्या सत्त्वोद्रिक्ता स्थिता स्थितौ ।तदंशभूता राजानः सर्वे च त्रिदिवौकसः

viṣṇuśaktiranaupamyā sattvodriktā sthitā sthitau / tadaṃśabhūtā rājānaḥ sarve ca tridivaukasaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रधानविनियोगज्ञः परं ब्रह्माधिगच्छति १२॥ बू सप्त तत्त्वात्मकानि।

English

Expiatory rites (continued) 529

अध्याय ४९

श्लोक 27

स्वायंभुवे ऽन्तरे पूर्वमाकूत्यां मानसः सुतः ।रुचेः प्रजापतेर्यज्ञस्तदंशेनाभवद् द्विजाः

svāyaṃbhuve 'ntare pūrvamākūtyāṃ mānasaḥ sutaḥ / ruceḥ prajāpateryajñastadaṃśenābhavad dvijāḥ

हिन्दी अर्थ

वेदेषूक्ता कारणं ब्रह्मयोनिः।

English

Greatness of Gaya and other sacred places 544

अध्याय ४९

श्लोक 28

ततः पुनरसौ देवः प्राप्ते स्वारोचिषे ऽन्तरे ।तुषितायां समुत्पन्नस्तुषितैः सह दैवतैः

tataḥ punarasau devaḥ prāpte svārociṣe 'ntare / tuṣitāyāṃ samutpannastuṣitaiḥ saha daivataiḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मा योगी परमात्मा महीयान् व्योमव्यापी वेदवेद्यः पुराणः। एको रुद्रो मृत्युरव्यक्तमेकं बीजं विश्वं देव एकः स एव तदनन्तर करोडौं सूर्यके समान प्रकाशमान हिरण्मय अण्ड उत्पन्न हुआ। उस अण्डमें मेरी शक्तिसे उपबृंहित महाब्रह्मा उत्पन्न हुए। अन्य भी जो बहुतसे प्राणी हैं, वे सभी मेरे ही स्वरूप हैं। मेरी मायासे मोहित होनेके

English

Glory of Sacred Places; the death of Kali 551

अध्याय ४९

श्लोक 29

औत्तमे ऽप्यन्तरे विष्णुः सत्यैः सह सुरोत्तमैः ।सत्यायामभवत् सत्यः सत्यरूपो जनार्दनः

auttame 'pyantare viṣṇuḥ satyaiḥ saha surottamaiḥ / satyāyāmabhavat satyaḥ satyarūpo janārdanaḥ

हिन्दी अर्थ

कारण वे पितामह-स्वरूपको नहीं देख पाते। सभी योनियोंमें जो मूर्तियाँ उत्पन्न होती हैं, उनकी योनि परा माया है और मुझे ही पितृस्वरूप विद्वान् लोग जानते हैं। इस प्रकार जो मुझे ही बीजरूप पितृस्वरूप

English

Glory of Mahalaya and other holy centres 555

अध्याय ४९

श्लोक 30

तामसस्यान्तरे चैव संप्राप्ते पुनरेव हि ।हर्यायां हरिभिर्देवैर्हरिरेवाभवद्धरिः

tāmasasyāntare caiva saṃprāpte punareva hi / haryāyāṃ haribhirdevairharirevābhavaddhariḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु जानता है, वह सभी लोकोंमें धीर होता है और मोहको प्राप्त नहीं होता ॥ ५--८ ॥ मैं ही सभी विद्याओंका स्वामी, प्राणियोंका परम ईश्वर, ओङ्कारमूर्ति, प्रजापति भगवान् ब्रह्मा हूँ । जो पुरुष विनष्ट होनेवाले सभी (चराचर) भूतोंमें परमेश्वरको नाशरहित और समभावसे देखता है, बही यथार्थ देखता

English

The Description of Daruvana 562

अध्याय ४९

श्लोक 31

रैवते ऽप्यन्तरे चैव संभूत्यां मानसो ऽभवत् ।संभूतो मानसैः सार्धं देवैः सह महाद्युतिः

raivate 'pyantare caiva saṃbhūtyāṃ mānaso 'bhavat / saṃbhūto mānasaiḥ sārdhaṃ devaiḥ saha mahādyutiḥ

हिन्दी अर्थ

है। जो पुरुष सबमें समभावसे स्थित परमेश्वरको समानरूपसे देखता है, वह स्वयंद्वारा स्वयंको नष्ट नहीं करता; इस कारण वह परम गति प्राप्त करता है। सात सूक्ष्म तत्त्वों एवं छः अआङ्गोंवाले महेशवरको जानकर

English

The Entry into the forest of Devadaru 570

अध्याय ४९

श्लोक 32

चाक्षुषे ऽप्यन्तरे चैव वैकुण्ठः पुरुषोत्तमः ।विकुण्ठायामसौ जज्ञे वैकुण्ठैर्दैवतैः सह

cākṣuṣe 'pyantare caiva vaikuṇṭhaḥ puruṣottamaḥ / vikuṇṭhāyāmasau jajñe vaikuṇṭhairdaivataiḥ saha

हिन्दी अर्थ

प्रधान तथा विनियोगको जाननेवाला परम ब्रह्मको प्राप्त करता है अलुप्त-शक्ति तथा अनन्तशक्ति-ये विभु महेश्वरके छः अङ्ग कहे गये हैं। पाँच तन्मात्राएँ (शब्द, स्पर्श, रूप,

English

The Glory of Narmada 577

अध्याय ४९

श्लोक 33

मन्वन्तरे ऽत्र संप्राप्ते तथा वैवस्वते ऽन्तरे ।वामनः कश्यपाद् विष्णुरदित्यां संबभूव ह

manvantare 'tra saṃprāpte tathā vaivasvate 'ntare / vāmanaḥ kaśyapād viṣṇuradityāṃ saṃbabhūva ha

हिन्दी अर्थ

तत्त्व कहे गये हैं। जो हेतुरूपा प्रकृति है, वह प्रधान है और उससे होनेवाले बन्धनको ही विनियोग कहा जाता है। प्रकृतिमें लीन रहनेवाली जो शक्ति है, उसे वेदोंमें ब्रह्मयोनि और कारणरूप कहा गया है।

English

Glory of different sacred places on the Narmada

अध्याय ४९

श्लोक 34

त्रिभिः क्रमैरिमांल्लोकाञ्जित्वा येन महात्मना ।पुरन्दराय त्रैलोक्यं दत्तं निहतकण्टकम्

tribhiḥ kramairimāṃllokāñjitvā yena mahātmanā / purandarāya trailokyaṃ dattaṃ nihatakaṇṭakam

हिन्दी अर्थ

अद्वितीय, परमेष्ठी, परात्पर, सत्यरूप महेश्वर उसके पुरुष हैं॥ १३--१५॥ वे ही अद्वितीय देव ब्रह्मा, योगी, परमात्मा, महीयान्, व्योमव्यापी, वेदोंद्वारा ज्ञात होने योग्य, पुराण,

English

Greatness of holy centres on the Narmada

अध्याय ४९

श्लोक 35

इत्येतास्तनवस्तस्य सप्त मन्वन्तरेषु वै ।सप्त चैवाभवन् विप्रा याभिः संरक्षिताः प्रजाः

ityetāstanavastasya sapta manvantareṣu vai / sapta caivābhavan viprā yābhiḥ saṃrakṣitāḥ prajāḥ

हिन्दी अर्थ

त्वेकात्मानं केचिदन्यत्तथाहुः!

English

Greatness of Naimisaranya and Japyesvara 596

अध्याय ४९

श्लोक 36

यस्माद् विष्टमिदं कृत्स्नं वामनेन महात्मना ।तस्मात् स वै स्मृतो विष्णुर्विशेर्धातोः प्रवेशनात्

yasmād viṣṭamidaṃ kṛtsnaṃ vāmanena mahātmanā / tasmāt sa vai smṛto viṣṇurviśerdhātoḥ praveśanāt

हिन्दी अर्थ

महादेवः प्रोच्यते वेदविद्भिः प्रभुं पुराणं पुरुषं विश्वरूपम्।

English

Description of sacred places (continued) 599

अध्याय ४९

श्लोक 37

एष सर्वं सृजत्यादौ पाति हन्ति च केशवः ।भूतान्तरात्मा भगवान् नारायण इति श्रुतिः

eṣa sarvaṃ sṛjatyādau pāti hanti ca keśavaḥ / bhūtāntarātmā bhagavān nārāyaṇa iti śrutiḥ

हिन्दी अर्थ

उन्हें ही कोई एक और कोई अनेक कहते हैं।

English

Description of four types of Dissolution 602

अध्याय ४९

श्लोक 38

एकांशेन जगत् सर्वं व्याप्य नारायणः स्थितः ।चतुर्धा संस्थितो व्यापी सगुणो निर्गुणो ऽपि च

ekāṃśena jagat sarvaṃ vyāpya nārāyaṇaḥ sthitaḥ / caturdhā saṃsthito vyāpī saguṇo nirguṇo 'pi ca

हिन्दी अर्थ

दूसरे कुछ लोग उन्हें ही अद्वितीय आत्मा कहते हैं! वेदज्ञ लोग उन्हें अणुसे अणुतर और महानूसे भी महत्तर महादेव कहते हैं। हृदयरूप गुहामें स्थित, परात्पर, पुराणपुरुष, विश्वरूप, हिरण्मय और बुद्धिमानोंको परमगति प्रभुको जो इस प्रकार जानता है, वह बुद्धिमान् पुरुष बुद्धिको पार कर जाता है अर्थात् परमपद प्राप्त

English

Description of four types of Dissolution 602

अध्याय ४९

श्लोक 39

एका भगवतो मूर्तिर्ज्ञानरूपा शिवामला ।वासुदेवाभिधाना सा गुणातीता सुनिष्कला

ekā bhagavato mūrtirjñānarūpā śivāmalā / vāsudevābhidhānā sā guṇātītā suniṣkalā

हिन्दी अर्थ

स बुद्धिमान् बुद्द्रिमतीत्य तिष्ठति॥ १८॥ करता है

English

Description of four types of Dissolution 602

अध्याय ४९

श्लोक 40

द्वितीया कालसंज्ञान्या तामसी शेषसंज्ञिता ।निहन्ति सकलं चान्ते वैष्णवी परमा तनुः

dvitīyā kālasaṃjñānyā tāmasī śeṣasaṃjñitā / nihanti sakalaṃ cānte vaiṣṇavī paramā tanuḥ

हिन्दी अर्थ

महादेवके विश्वरूपत्वका वर्णन तथा ईश्वर-सम्बन्धी ज्ञानका प्रतिपादन तन्नो बद महादेव विश्वरूपः कथं भवान्

English

Description of four types of Dissolution 602

अध्याय ४९

श्लोक 41

सत्त्वोद्रिक्ता तथैवान्या प्रद्युम्नेति च संज्ञिता ।जगत् स्थापयते सर्वं स विष्णुः प्रकृतिर्ध्रुवा

sattvodriktā tathaivānyā pradyumneti ca saṃjñitā / jagat sthāpayate sarvaṃ sa viṣṇuḥ prakṛtirdhruvā

हिन्दी अर्थ

अव्यक्तं कारणं प्राहुरानन्दं ज्योतिरक्षरम्। अहमेव परं ब्रह्म मत्तो ह्यान्यन्न विद्यते

English

Description of four types of Dissolution 602

अध्याय ४९

श्लोक 42

चतुर्थो वासुदेवस्य मूर्तिर्ब्राह्मीति संज्ञिता ।राजसी चानिरुद्धाख्या प्रद्युम्नः सृष्टिकारिका

caturtho vāsudevasya mūrtirbrāhmīti saṃjñitā / rājasī cāniruddhākhyā pradyumnaḥ sṛṣṭikārikā

हिन्दी अर्थ

तस्मान्मे विश्वरूपत्वं निश्चितं ब्रह्मवादिभिः । एकत्वे च पृथक्त्वे च प्रोक्तमेतन्निदर्शनम् अहँ तत् परमं ब्रह्म परमात्मा सनातनः । अकारणं द्विजाः प्रोक्तो न दोषो ह्यात्मनस्तथा

English

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अध्याय ४९

श्लोक 43

यः स्वपित्यखिलं भूत्वा प्रद्युम्नेन सह प्रभुः ।नारायणाख्यो ब्रह्मासौ प्रिजासर्गं करोति सः

yaḥ svapityakhilaṃ bhūtvā pradyumnena saha prabhuḥ / nārāyaṇākhyo brahmāsau prijāsargaṃ karoti saḥ

हिन्दी अर्थ

ऋषियोंने पूछा- महादेव! आप परमेश्वर निष्कल, निर्मल, नित्य तथा निष्क्रिय होनेपर भी विश्वरूप कैसे हैं, इसे हम लोगोंको बतलायें

English

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अध्याय ४९

श्लोक 44

या सा नारायणतनुः प्रद्युम्नाख्या मुनीश्वराः ।तया संमोहयेद् विश्वं सदेवासुरमानुषम्

yā sā nārāyaṇatanuḥ pradyumnākhyā munīśvarāḥ / tayā saṃmohayed viśvaṃ sadevāsuramānuṣam

हिन्दी अर्थ

ईश्वर बोले--द्विजो! मैं विश्व नहीं हूँ और मुझसे अतिरिक्त विश्व भी नहीं है। यह सब मायाके निमित्तसे है और वह माया भी आत्माको आश्रित कर रहती है। आदि और अन्तसे रहित शक्तिरूप माया अव्यक्त (परमात्मा)-के आश्रित है, उसी (माया)-के कारण अव्यक्तसे यह प्रपञ्चरूप संसार उत्पन्न हुआ है। (मुझ) अव्यक्तको कारण कहा जाता है। मैं ही आनन्दस्वरूप, प्रकाशरूप, अक्षर परम ब्रह्म हूँ। मुझसे अतिरिक्त और

English

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अध्याय ४९

श्लोक 45

सैव सर्वजगत्सूतिः प्रकृतिः परिकीर्तिता ।वासुदेवो ह्यनन्तात्मा केवलो निर्गुणो हरिः

saiva sarvajagatsūtiḥ prakṛtiḥ parikīrtitā / vāsudevo hyanantātmā kevalo nirguṇo hariḥ

हिन्दी अर्थ

कुछ भी नहीं है। इसी कारण ब्रह्मवादियोंने मेरा विश्वरूपत्व निश्चित किया है। एक रूप तथा भिन्नरूपके

English

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अध्याय ४९

श्लोक 46

प्रधानं पुरुषः कालस्तत्त्वत्रयमनुत्तमम् ।वासुदेवात्मकं नित्यमेतद् विज्ञाय मुच्यते

pradhānaṃ puruṣaḥ kālastattvatrayamanuttamam / vāsudevātmakaṃ nityametad vijñāya mucyate

हिन्दी अर्थ

मैं कारणरहित, सनातन, परम ब्रह्म परमात्मा हूँ, अत: मुझमें कोई दोष नहीं है। तात्पर्य यह है कि जगतूमें विषमता, क्रूरता आदि दोषोंका असाधारण कारण मनुष्यकृत कर्म है, ईश्वर नहीं। ईश्वर तो सामान्य कारण है, अतः वह दोषरहित है॥ २--६॥

English

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अध्याय ४९

श्लोक 47

एकं चेदं चतुष्पादं चतुर्धा पुनरच्युतः ।बिभेद वासुदेवो ऽसौ प्रद्युम्नो हरिरव्ययः

ekaṃ cedaṃ catuṣpādaṃ caturdhā punaracyutaḥ / bibheda vāsudevo 'sau pradyumno hariravyayaḥ

हिन्दी अर्थ

+ विवर्त विश्वकी दृष्टिसे महादेव अनेक रूप हैं तथा परमार्थत: एक होनेसे एक रूप हैं।

English

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अध्याय ४९

श्लोक 48

कृष्णद्वैपायनो व्यासो विष्णुर्नारायणः स्वयम् ।अपान्तरतमाः पूर्वं स्वेच्छया ह्यभवद्धरिः

kṛṣṇadvaipāyano vyāso viṣṇurnārāyaṇaḥ svayam / apāntaratamāḥ pūrvaṃ svecchayā hyabhavaddhariḥ

हिन्दी अर्थ

तस्मिन् दिवि स्थितं नित्यमव्यक्तं भाति केवलम् तदेव च जगत् कृत्स्नं तद् विज्ञाय विमुच्यते

English

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अध्याय ४९

श्लोक 49

अनाद्यन्तं परं ब्रह्म न देवा नर्षयो विदुः ।एको ऽयं वेद भगवान् व्यासो नारायणः प्रभुः

anādyantaṃ paraṃ brahma na devā narṣayo viduḥ / eko 'yaṃ veda bhagavān vyāso nārāyaṇaḥ prabhuḥ

हिन्दी अर्थ

आनन्दं ब्रह्मणो विद्वान् बिभेति न कुतश्चन

English

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अध्याय ४९

श्लोक 50

इत्येतद् विष्णुमाहात्म्यमुक्तं वो मुनिपुङ्गवाः ।एतत् सत्यं पुनः सत्यमेवं ज्ञात्वा न मुह्यति

ityetad viṣṇumāhātmyamuktaṃ vo munipuṅgavāḥ / etat satyaṃ punaḥ satyamevaṃ jñātvā na muhyati

हिन्दी अर्थ

नित्यानन्दी भवति ब्रह्मभूतः तदेवात्मानं मन्यमानोऽथ विद्वा-

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_kUrmapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Kurma Purana — Chapter 49
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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