Linga Purana· Liṅga Purāṇa
34
अध्याय 34 / 108

Book 1 - Adhyaya 34

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अध्याय ३४

श्लोक 1

इति श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे ऋषिवाक्यं नाम त्रयस्त्रिंशो ऽध्यायः एतद्वः सम्प्रवक्ष्यामि कथा सर्वस्वमद्य वै अग्निर्ह्यहं सोमकर्ता सोमश्चाग्निमुपाश्रितः

iti śrīliṅgamahāpurāṇe pūrvabhāge ṛṣivākyaṃ nāma trayastriṃśo 'dhyāyaḥ etadvaḥ sampravakṣyāmi kathā sarvasvamadya vai agnirhyahaṃ somakartā somaścāgnimupāśritaḥ

हिन्दी अर्थ

नन्दीश्वर बोले-- है सनत्कुमार ! इन्द्रका कथन सुनकर मेरे पिता महामुनि शिलादने दोनों हाथ जोड़कर देवेश इन्द्रको प्रणाम करके उनसे पुन: पूछा शिलाद बोले--हे भगवन्! है शक्र! है सर्वज्ञ हे सर्वदेवनमस्कृत! है शचीपते! है जगन्नाथ! हे सहस्राक्ष! है महेश्वर ! भगवान् पद्मयोनिने युगधर्म किस प्रकार कल्पित किये ? आप इस विषयमें सब कुछ मुझ्

English

Obeisance to the overlord of Devas; obeisance to the great lord, obebance to one who shares half of body with hb consort;* obeisance to the initiator of Skhya and Yoga.

अध्याय ३४

श्लोक 2

कृतमेतद्वहत्यग्निर् भूयो लोकसमाश्रयात् असकृत्त्वग्निना दग्धं जगत् स्थावरजङ्गमम्

kṛtametadvahatyagnir bhūyo lokasamāśrayāt asakṛttvagninā dagdhaṃ jagat sthāvarajaṅgamam

हिन्दी अर्थ

शरणागतको बतानेको कृपा करें शिलादका वह वचन सुनकर इन्द्रने जैसा देखा था, उन युगधमाँका विस्तारसे वर्णन करना प्रारम्भ किया

English

Obeisance to one who is black as a cluster of clouds. Obeisance to one wearing elephant's hide. Obeisance to one having deerskin for the upper garment; obeisance to one hav- ing serpent for the sacred thread.

अध्याय ३४

श्लोक 3

भस्मसाद्विहितं सर्वं पवित्रमिदमुत्तमम् भस्मना वीर्यमास्थाय भूतानि परिषिञ्चति

bhasmasādvihitaṃ sarvaṃ pavitramidamuttamam bhasmanā vīryamāsthāya bhūtāni pariṣiñcati

हिन्दी अर्थ

इन्द्र बोले-हे मुने! आदिमें सत्ययुग, फिर त्रेतायुग, द्वापर तथा कलियुग-ये ही चार युग होते हैं; ऐसा आप संक्षेपमें जान लीजिये सत्ययुगको सत्त्वगुणरूप, त्रेतायुगको रजोगुणरूप, द्वापरयुगको रज-तमगुणरूप और कलियुगको तमोगुणरूप जानना चाहिए। इस प्रकार विभिन्न युगोंमें अलग- अलग युग-वृत्ति होती है

English

Obeisance to Siva with wonderful well-arranged car-rings; with well knit garlands and ornaments; to one with the fine lion skin as garb; obeisance to one of extensive reputation.

अध्याय ३४

श्लोक 4

अग्निकार्यं च यः कृत्वा करिष्यति त्रियायुषम् भस्मना मम वीर्येण मुच्यते सर्वकिल्बिषैः

agnikāryaṃ ca yaḥ kṛtvā kariṣyati triyāyuṣam bhasmanā mama vīryeṇa mucyate sarvakilbiṣaiḥ

हिन्दी अर्थ

सत्ययुगमें ध्यान, त्रेतायुगमें यज्ञ, द्वापरमें भजन कलियुगमें विशुद्ध दानको श्रेष्ठ कहा गया है वह सत्ययुग चार हजार दिव्य वर्षोके प्रमाणवाला है। उसकी सन्ध्या चार सौ दिव्य वर्षोकी होती है तथा उसका सन्थ्यांश भी उसी प्रकार चार सौ दिव्य वर्षोंका होता है

English

Then the delighted lord spoke to the sages — '*0 ye of good rites, I am delighted with your penance. Choose your boons."

अध्याय ३४

श्लोक 5

भासत इत्येव यद्भस्म शुभं भावयते च यत् भक्षणात् सर्वपापानां भस्मेति परिकीर्तितम्

bhāsata ityeva yadbhasma śubhaṃ bhāvayate ca yat bhakṣaṇāt sarvapāpānāṃ bhasmeti parikīrtitam

हिन्दी अर्थ

हे शिलाद! है सुव्रत! इस सत्ययुगमें प्रजाओंकी आयु चार हजार मनुष्य वर्षके बराबर जानिये सत्ययुग तथा इसके सन्ध्यांश बीत जानेपर समग्र युग-धर्मका एक चरण घट जाता है। पुनः उत्तम त्रेतायुग प्रवृत्त होता है, जो तीन हजार दिव्य वर्षोका होता है। सत्ययुगके आधे प्रमाणके बराबर द्वापरको जानिये तथा

English

All those sages bowed to the lord. TTicn Bhrgu Angiras, Vasitha, Vivamitra, Gautama, Atri, SukcfiSa, Pula- stya, Pulaha, Kratu, Maiici, Kayapa, Kanva and Samvarta of great penance, spoke to the lord after paying due homage: ''We wish to know the mystic secret behind the smearing of ashes, nudity, indirectness (in worship) contrariety in the natural order,*®® the propriety of service or otherwise." On hearing their words the great lord looked at the excellent sages and said smilingly.

अध्याय ३४

श्लोक 6

ऊष्मपाः पितरो ज्ञेया देवा वै सोमसंभवाः अग्नीषोमात्मकं सर्वं जगत्स्थावरजङ्गमम्

ūṣmapāḥ pitaro jñeyā devā vai somasaṃbhavāḥ agnīṣomātmakaṃ sarvaṃ jagatsthāvarajaṅgamam

हिन्दी अर्थ

उसके (द्वापरके) आधेके बराबर कलियुगका प्रमाण अध्याय ३९ सत्ययुग, त्रेतायुग तथा द्वापरयुगका वर्णन""व्रिविध पुराणोंके अनुक्रमका वर्णन

English

See note 27.

अध्याय ३४

श्लोक 7

अहमग्निर्महातेजाः सोमश्चैषा महांबिका अहमग्निश् च सोमश् च प्रकृत्या पुरुषः स्वयम्

ahamagnirmahātejāḥ somaścaiṣā mahāṃbikā ahamagniś ca somaś ca prakṛtyā puruṣaḥ svayam

हिन्दी अर्थ

पपप प्रप्रापामाप्रापापापाफफफफफफफ पापापरापापफाफाफफफफफफफफ RNs यया फ फ फ फ फफ फ फ़ फ़ फ़ फ़ फ फ फ फर फ़ फ़ फ़ फ़ फ फर फ़ फ फा फ़ क़ फ प फ़ फ छ फ क मा फा मा फी EEE आद्ये कृतयुगे धर्मश्चतुष्पादः सनातनः। त्रेतायुगे त्रिपादस्तु द्विपादो द्वापरे स्थितः

English

VSmMvam'---»avyimS ST. the left-hand ritual

अध्याय ३४

श्लोक 8

तस्माद्भस्म महाभागा मद्वीर्यमिति चोच्यते स्ववीर्यं वपुषा चैव धारयामीति वै स्थितिः

tasmādbhasma mahābhāgā madvīryamiti cocyate svavīryaṃ vapuṣā caiva dhārayāmīti vai sthitiḥ

हिन्दी अर्थ

पर्वतोदधिवासिन्यो ह्यनिकेताश्रयास्तु ताः। विशोकाः सत्त्वबहुला एकान्तबहुलास्तथा ता वै निष्कामचारिण्यो नित्यं मुदितमानसाः। अप्रवृत्तिः कृतयुगे कर्मणोः शुभपापयोः

English

I shall recount to you the whole story in a nutshell. I am Agni (Fire god) the creator of Soma and I am Soma that resorts to Agni.

अध्याय ३४

श्लोक 9

तदाप्रभृति लोकेषु रक्षार्थमशुभेषु च भस्मना क्रियते रक्षा सूतिकानां गृहेषु च

tadāprabhṛti lokeṣu rakṣārthamaśubheṣu ca bhasmanā kriyate rakṣā sūtikānāṃ gṛheṣu ca

हिन्दी अर्थ

वर्णाश्रमव्यवस्था च तदासीन्न च सङ्करः। रसोल्लासः कालयोगात् त्रेताख्ये नश्यते द्विज सकृदेव तया वृष्ट्या संयुक्ते पृथिवीतले

English

Agni carries what is consigned to it by way of Homa. Since it rests in the world, the universe consisting of the mobile and immobile beings is often burned by it.

अध्याय ३४

श्लोक 10

भस्मस्नानविशुद्धात्मा जितक्रोधो जितेन्द्रियः मत्समीपं समागम्य न भूयो विनिवर्तते

bhasmasnānaviśuddhātmā jitakrodho jitendriyaḥ matsamīpaṃ samāgamya na bhūyo vinivartate

हिन्दी अर्थ

कहा जाता है। है मुने! उसी तरह त्रेतायुगकी सन्ध्या तीन सौ दिव्य वर्ष, द्वापरकी सन्ध्या दो सौ दिव्य वर्ष तथा कलियुगकी सन्ध्या एक सौ दिव्य वर्षकी होती है। सभीका सन्ध्यांश भी सन्ध्याकालके समान ही जानना चाहिए। प्रत्येक कल्पमें आनेवाले युगोंमें यही स्थिति होती है॥ १०--१२॥

English

Everything reduced to ashes becomes excellent and sacred. With ashes Soma attains power and rejuvenates living beings.

अध्याय ३४

श्लोक 11

व्रतं पाशुपतं योगं कापिलं चैव निर्मितम् पूर्वं पाशुपतं ह्येतन् निर्मितं तदनुत्तमम्

vrataṃ pāśupataṃ yogaṃ kāpilaṃ caiva nirmitam pūrvaṃ pāśupataṃ hyetan nirmitaṃ tadanuttamam

हिन्दी अर्थ

सनातन धर्म आरम्भके सत्ययुगमें चार चरणोंवाला, त्रेतामें तीन चरणोंवाला, द्वापरमें दो चरणोंवाला तथा कलियुगमें मात्र एक चरणवाला होकर अधिष्ठित रहता सत्ययुगमें स्त्री-पुरुषके संयोगसे उत्पत्ति होती है तथा उनकी वृत्ति मधुर रसोंसे सम्पन्न होती है। उस युगमें समस्त प्रजाएँ सभी प्रकारके आनन्दों एवं भोगोंसे पूर्ण तृप्त रहती हैं। उनमें अधमता तथा उत्तमताका कोई

English

He who performs the rite of oblation into the firc** as also the rite of 'Tryayusa'*®' is liberated from sins due to the virtue of ashes which constitute power.

अध्याय ३४

श्लोक 12

शेषाश्चाश्रमिणः सर्वे पश्चात्सृष्टाः स्वयंभुवा सृष्टिरेषा मया सृष्टा लज्जामोहभयात्मिका

śeṣāścāśramiṇaḥ sarve paścātsṛṣṭāḥ svayaṃbhuvā sṛṣṭireṣā mayā sṛṣṭā lajjāmohabhayātmikā

हिन्दी अर्थ

भेद नहीं रहता है और सभी प्रजाएँ शुभ लक्षणोंसे सम्पन्न रहती हैं उस सत्ययुगमें वे प्रजाएँ समान आयु, सुख तथा रूपवाली होती हैं उनमें परस्पर द्वेष, हुनद्व एवं अवसाद नहीं रहता है, अपितु वे एक-दूसरेसे प्रेम करती हैं

English

The word Bhasman is derived from *bhas' to shine,

अध्याय ३४

श्लोक 13

नग्ना एव हि जायन्ते देवता मुनयस् तथा ये चान्ये मानवा लोके सर्वे जायन्त्यवाससः

nagnā eva hi jāyante devatā munayas tathā ye cānye mānavā loke sarve jāyantyavāsasaḥ

हिन्दी अर्थ

सत्ययुगमें वे प्रजाएँ घरका आश्रय न लेकर पर्वतों तथा समुद्रोंके सान्निध्यमें निवास करती हैं। सभी लोग शोकरहित, पराक्रमसम्पन्न एवं एकान्तप्रिय होते हैं कृतयुगमें वे प्रजाएँ निष्काम कर्मोमें प्रवृत्त रहनेवाली तथा सदा प्रसन्न मनवाली होती हैं । वे कर्मोके पाप और पुण्यकी भावनासे रहित होती हैं। उस समय वर्णाश्रम- व्यवस्था रहती है, किंतु वर्णसंकर दोष विद्यमान नहीं

English

The Pitrs drink fire; Devas drink Soma. The entire universe of the mobile and immobile beings is of the nature of Agni and Soma.

अध्याय ३४

श्लोक 14

इन्द्रियैरजितैर्नग्नो दुकूलेनापि संवृतः तैरेव संवृतैर्गुप्तो न वस्त्रं कारणं स्मृतम्

indriyairajitairnagno dukūlenāpi saṃvṛtaḥ taireva saṃvṛtairgupto na vastraṃ kāraṇaṃ smṛtam

हिन्दी अर्थ

हे द्विज! कालयोगसे त्रेतायुगमें रसोंका प्रादुर्भाव समाप्त होने लगता है। उस युगमें सिद्धिके नष्ट हो जानेपर अन्य सिद्धि उत्पन्न होती है॥ १९ /२॥ जलकी अल्पता हो जानेपर भगवान् मेघात्मा गर्जनयुक्त मेघोंके माध्यमसे जल बरसाते हैं और एक बारमें ही उस वृष्टिसे पृथ्वीतलके संयुक्त हो जानेपर वृक्ष उत्पन्न हो जाते हैं; इस प्रकार वे वृक्ष ही प्रजाओंके

English

I am Agni of great splendour. This great Uma is Soma. I am Agni and Soma together. I am Purusa as well as Prakrti.

अध्याय ३४

श्लोक 15

क्षमा धृतिरहिंसा च वैराग्यं चैव सर्वशः तुल्यौ मानावमानौ च तदावरणमुत्तमम्

kṣamā dhṛtirahiṃsā ca vairāgyaṃ caiva sarvaśaḥ tulyau mānāvamānau ca tadāvaraṇamuttamam

हिन्दी अर्थ

श्रीलिडुमहापुराण फ़ फ़ फफफ क़ फफफ फक फफफ फफफ फरक फ क फ फफ कफ फफ फफ फफ फ फ फ फ़ 2५०१५१२१०१. का मालामा” फफफ

English

Hence, O blessed ones! the ashes constitute my virility. I hold my virility by my physical body. This is the fact,

अध्याय ३४

श्लोक 16

भस्मस्नानेन दिग्धाङ्गो ध्यायते मनसा भवम् यद्यकार्यसहस्राणि कृत्वा यः स्नाति भस्मना

bhasmasnānena digdhāṅgo dhyāyate manasā bhavam yadyakāryasahasrāṇi kṛtvā yaḥ snāti bhasmanā

हिन्दी अर्थ

वर्तयन्ति स्म तेभ्यस्तास्त्रेतायुगमुखे प्रजाः। गृहरूप बन जाते हैं। उन प्रजाओंकी कृ तथा उपभोग उन्हीं वृक्षोंपर आश्रित रहता है ह ततः कालेन महता तासामेव विपर्ययात्॥ प्रकार त्रेतायुगके आरम्भमें प्रजाएँ जीवनयापन-

English

Ever since then, protection is afforded by the ashes. At times of inauspicious events and even in lying-in chambers it is resorted to for securing protection.

अध्याय ३४

श्लोक 17

तत्सर्वं दहते भस्म यथाग्निस्तेजसा वनम् तस्माद् यत्नपरो भूत्वा त्रिकालमपि यः सदा

tatsarvaṃ dahate bhasma yathāgnistejasā vanam tasmād yatnaparo bhūtvā trikālamapi yaḥ sadā

हिन्दी अर्थ

सभी व्यवहार उन्हीं वृक्षोंप आश्रित होकर करती हैं ॥ २०-२२ /२॥ तत्पश्चात् अधिक समय बीतनेपर उनके बुद्धि विपर्ययसे उन प्रजाओंमें अकस्मात् राग तथा लोभसे युक्त भाव उत्पन्न हो जाते हैं॥ २३/२ ॥

English

One whose soul is purified by applying ashes over the body, one who has conquered anger and the sense-organs, never returns after coming near me.

अध्याय ३४

श्लोक 18

भस्मना कुरुते स्नानं गाणपत्यं स गच्छति समाहृत्य क्रतून् सर्वान् गृहीत्वा व्रतमुत्तमम्

bhasmanā kurute snānaṃ gāṇapatyaṃ sa gacchati samāhṛtya kratūn sarvān gṛhītvā vratamuttamam

हिन्दी अर्थ

उन प्रजाओंमें उस समय उत्पन्न उस विपर्ययके कारण उनके गृहसंज्ञक सभी वृक्ष नष्ट हो जाते हैं ॥ २४/२ ॥ तब उन वृक्षोंके नष्ट हो जानेपर मैथुनसे उत्पन वे प्रजाएँ भ्रमित हो जाती हैं। इसके बाद सत्यका चिन्तन करनेवाले वे प्रजागण उस सिद्धिका फिरसे ध्यान करते हैं ॥ २५ /२॥

English

Persons occupying different stages of life have been created by Brahma afterwards. This creation involving bash- fulness, delusion and fear has been evolved by me.

अध्याय ३४

श्लोक 19

ध्यायन्ति ये महादेवं लीलासद्भावभाविताः उत्तरेणार्यपन्थानं ते ऽमृतत्वमवाप्नुयुः

dhyāyanti ye mahādevaṃ līlāsadbhāvabhāvitāḥ uttareṇāryapanthānaṃ te 'mṛtatvamavāpnuyuḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार ध्यानके फलस्वरूप उनके गृहसंज्ञक वे वृक्ष फिरसे उत्पन्न हो जाते हैं । वे वृक्ष प्रजाओंके लिये वस्त्र, भूषण तथा नानाविध फल उत्पन्न करते हैं ॥ २६/२॥ उनके लिये उन वृक्षोंके पत्ते-पत्तेमें गन्ध-वर्ण- रससे युक्त, शक्तिवर्धक तथा अमाक्षिक (मक्षिकारहित)मधु पैदा होता है॥ २७/२॥

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 20

दक्षिणेन च पन्थानं ये श्मशानानि भेजिरे अणिमा गरिमा चैव लघिमा प्राप्तिरेव च

dakṣiṇena ca panthānaṃ ye śmaśānāni bhejire aṇimā garimā caiva laghimā prāptireva ca

हिन्दी अर्थ

उसी मधुसे प्रजाएँ सुखपूर्वक सदा जीवनयापन करती हैं और वे उसी सिद्धिसे सन्तापरहित होकर सर्वदा हृष्ट-पुष्ट रहती हैं ॥ २८९/२॥ तत्पश्चात् कालान्तरमें वे प्रजाएँ पुनः लोभके वशीभूत होकर बलपूर्वक उन वृक्षों अथवा माक्षिक मधुका हरण करती हैं॥ २९/२ ॥

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 21

इच्छा कामावसायित्वं तथा प्राकाम्यमेव च ईक्षणेन च पन्थानं ये श्मशानानि भेजिरे अणिमा गरिमा चैव लघिमा प्राप्तिरेव च

icchā kāmāvasāyitvaṃ tathā prākāmyameva ca īkṣaṇena ca panthānaṃ ye śmaśānāni bhejire aṇimā garimā caiva laghimā prāptireva ca

हिन्दी अर्थ

लोभमें पड़कर उनके द्वारा किये गये इस अनाचारपूर्ण कृत्यसे मधुके साथ-साथ कहीं-कहीं वे कल्पवृक्ष भी नष्ट हो जाते हैं॥ ३०/२ ॥ आची पुन: उस त्रेतामें कालयोगसे अवशिष्ट आवर्तन हो जानेसे हुनर उत्पन्न होने लगते हैं ॥ ३१ /२॥

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 22

इन्द्रादयस् तथा देवाः कामिकव्रतमास्थिताः ऐश्वर्यं परमं प्राप्य सर्वे प्रथिततेजसः

indrādayas tathā devāḥ kāmikavratamāsthitāḥ aiśvaryaṃ paramaṃ prāpya sarve prathitatejasaḥ

हिन्दी अर्थ

पुनः तीव्र शीत, वर्षा तथा आतपसे प्रजाएँ अत्यन्त दुःखित हो जाती हैं और इन द्वन्द्दोंसे पीड़ित प्रजी अपने आवरणका उपाय करने लगती हैं॥ ३२ /२॥ रागलोभात्मको भावस्तदा ह्याकस्मिको5भवत्। विपर्ययेण तासां तु तेन तत्कालभाविना

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 23

व्यपगतमदमोहमुक्तरागस् तमोरजोदोषविवर्जितस्वभावः परिभवमिदमुत्तमं विदित्वा पशुपतियोगपरो भवेत्सदैव

vyapagatamadamohamuktarāgas tamorajodoṣavivarjitasvabhāvaḥ paribhavamidamuttamaṃ viditvā paśupatiyogaparo bhavetsadaiva

हिन्दी अर्थ

अमाक्षिकं महावीर्यं पुटके पुटके मधु। तेन ता वर्तयन्ति स्म सुखमायुः सहैव हि ततः कालान्तरेणैव पुनलोभावृतास्तु ता:

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 24

इमं पाशुपतं ध्यायन् सर्वपापप्रणाशनम् यः पठेच्च शुचिर्भूत्वा श्रद्दधानो जितेन्द्रियः

imaṃ pāśupataṃ dhyāyan sarvapāpapraṇāśanam yaḥ paṭhecca śucirbhūtvā śraddadhāno jitendriyaḥ

हिन्दी अर्थ

तस्यामेवाल्पशिष्टायां सिद्धां कालवशात्तदा कृतद्व्द्रप्रतीघाताः केतनानि गिरौ ततः

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 25

सर्वपापविशुद्धात्मा रुद्रलोकं स गच्छति ते सर्वे मुनयः श्रुत्वा वसिष्ठाद्या द्विजोत्तमाः

sarvapāpaviśuddhātmā rudralokaṃ sa gacchati te sarve munayaḥ śrutvā vasiṣṭhādyā dvijottamāḥ

हिन्दी अर्थ

अध्याय ३९ सत्ययुग, त्रेतायुग तथा द्वापरयुगका वर्णन""विविध पुराणोंके अनुक्रमका वर्णन १७३ पूर्व निकामचारास्ता हानिकेता अथावसन्। यथायोगं यथाप्रीति निकेतेष्ववसन् पुनः

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 26

भस्मपाण्डुरदिग्धाङ्गा बभूवुर्विगतस्पृहाः रुद्रलोकाय कल्पान्ते संस्थिताः शिवतेजसा

bhasmapāṇḍuradigdhāṅgā babhūvurvigataspṛhāḥ rudralokāya kalpānte saṃsthitāḥ śivatejasā

हिन्दी अर्थ

इन्द्"ोंसे निरन्तर प्रतिहत प्रजाएँ पर्वतोंपर घर बनाने हैं। इसलिये पूर्वमें स्वेच्छाचारितापूर्ण वे प्रजाएँ, जो बिना घरके रहती थीं, पुनः अपने अनुकूल तथा सुविधाजनक घरोंमें रहने लगती हैं मधुके साथ उन कल्पवृक्षोंके भी नष्ट हो जानेपर पुनः उन इन्हरोंके प्रति उपघात करती हुई वे प्रजाएँ जीविकोपार्जनका उपाय सोचने लगती हैं

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 27

तस्मान्न निन्द्याः पूज्याश्च विकृता मलिना अपि रूपान्विताश् च विप्रेन्द्राः सदा योगीन्द्रशङ्कया

tasmānna nindyāḥ pūjyāśca vikṛtā malinā api rūpānvitāś ca viprendrāḥ sadā yogīndraśaṅkayā

हिन्दी अर्थ

वे प्रजाएँ पुनः जब विवादसे व्याकुल तथा भूख एवं प्याससे पीड़ित हो जाती हैं, तब त्रेतायुगमें उनमें सिद्धिका प्रादुर्भाव पुनः होता है उनके लिये कृषि-कार्यको पूर्णत: सिद्ध करनेवाली दूसरी अन्य वृष्टि होती है । वृष्टिजनित वे जल आदि नदियोंके रूपमें परिवर्तित हो जाते हें

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 28

बहुना किं प्रलापेन भवभक्ता द्विजोत्तमाः संपूज्याः सर्वयत्नेन शिववन्नात्र संशयः

bahunā kiṃ pralāpena bhavabhaktā dvijottamāḥ saṃpūjyāḥ sarvayatnena śivavannātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

सतत वृष्टि होनेसे नदियाँ तथा जलके अन्य उद्गमस्थान हो गये। इस प्रकार दूसरे वृष्टि-सर्जनमें नदियोंका प्रादुर्भाव हो गया इस प्रकार पृथ्वीतलपर जो जल-बिन्दु गिरे; उन जलों तथा भूमिके संयोगसे अल्प-कृष्ट एवं बिना बोये चौदह प्रकारकी वन्य तथा ग्राम्य (वन एवं ग्रामीण क्षेत्रोमें उगनेवाली) औषधियाँ उत्पन्न हो गयीं। ऋतुसम्बन्धी

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 29

मलिनाश्चैव विप्रेन्द्रा भवभक्ता दृढव्रताः दधीचस्तु यथा देवदेवं जित्वा व्यवस्थितः

malināścaiva viprendrā bhavabhaktā dṛḍhavratāḥ dadhīcastu yathā devadevaṃ jitvā vyavasthitaḥ

हिन्दी अर्थ

विभिन्न पुष्प, फल, वृक्ष एवं पौधे उग गये। इस प्रकार ये विभिन्न जातिके वृक्ष तथा औषध उत्पन्न हो गये और उस त्रेतायुगमें प्रजाएँ उन्हीं औषधियोंसे ही अपना जीवन-निर्वाह करने लगीं॥ २९--४१॥ इसके बाद उन प्रजाओंमें हर प्रकारसे राग तथा लोभका उदय हुआ और त्रेतायुगके प्रभावसे होनेवाली अवश्यम्भाविताके कारण वे प्रजाएँ नदीक्षेत्रों तथा पर्वतोंका अतिक्रमण करने लगीं और वृक्ष, गुल्मों एवं

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 30

नारायणं तथा लोके रुद्रभक्त्या न संशयः तस्मात्सर्वप्रयत्नेन भस्मदिग्धतनूरुहाः

nārāyaṇaṃ tathā loke rudrabhaktyā na saṃśayaḥ tasmātsarvaprayatnena bhasmadigdhatanūruhāḥ

हिन्दी अर्थ

औषधियोंका बलपूर्वक पुनः हरण करने लगीं। उनके इस विपरीत आचरणसे चौदहों प्रकारकी औषधियाँ अब वे औषधियाँ पृथ्वीमें समा गयीं-ऐसा मानकर भगवान् विष्णुने राजा पृथुके रूपमें होकर सभी प्राणियोंके कल्याणार्थ पृथ्वीरूप गायका दोहन किया। उसी समयसे हलके फालसे जुती हुई भूमिमें यहाँ-वहाँ

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

अध्याय ३४

श्लोक 31

जटिनो मुण्डिनश्चैव नग्ना नानाप्रकारिणः संपूज्याः शिववन्नित्यं मनसा कर्मणा गिरा

jaṭino muṇḍinaścaiva nagnā nānāprakāriṇaḥ saṃpūjyāḥ śivavannityaṃ manasā karmaṇā girā

हिन्दी अर्थ

वार्तायाः साधिकाप्यन्या वृष्टिस्तासां निकामतः। तासां वृष्ट्युदकादीनि ह्यभवन्निम्नगानि तु ये पुनस्तदपां स्तोकाः पतिताः पृथिवीतले। अपां भूमेश्च संयोगादोषध्यस्तास्तदाभवन्

English

Devas and sages are verily born nude. The other human beings are also born nude.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_liGgapurANa1-108.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Linga Purana — Chapter 34
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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