अध्याय ३४
श्लोक 1
इति श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे ऋषिवाक्यं नाम त्रयस्त्रिंशो ऽध्यायः एतद्वः सम्प्रवक्ष्यामि कथा सर्वस्वमद्य वै अग्निर्ह्यहं सोमकर्ता सोमश्चाग्निमुपाश्रितः
iti śrīliṅgamahāpurāṇe pūrvabhāge ṛṣivākyaṃ nāma trayastriṃśo 'dhyāyaḥ etadvaḥ sampravakṣyāmi kathā sarvasvamadya vai agnirhyahaṃ somakartā somaścāgnimupāśritaḥ
हिन्दी अर्थ
नन्दीश्वर बोले-- है सनत्कुमार ! इन्द्रका कथन सुनकर मेरे पिता महामुनि शिलादने दोनों हाथ जोड़कर देवेश इन्द्रको प्रणाम करके उनसे पुन: पूछा शिलाद बोले--हे भगवन्! है शक्र! है सर्वज्ञ हे सर्वदेवनमस्कृत! है शचीपते! है जगन्नाथ! हे सहस्राक्ष! है महेश्वर ! भगवान् पद्मयोनिने युगधर्म किस प्रकार कल्पित किये ? आप इस विषयमें सब कुछ मुझ्
English
Obeisance to the overlord of Devas; obeisance to the great lord, obebance to one who shares half of body with hb consort;* obeisance to the initiator of Skhya and Yoga.