अध्याय ३७
श्लोक 1
इति श्रीलिङ्गमहापुराणे पूर्वभागे क्षुपदधीचिसंवादो नाम षट्त्रिंशो ऽध्यायः भवान्कथमनुप्राप्तो महादेवमुमापतिम् श्रोतुमिच्छामि तत्सर्वं वक्तुमर्हसि मे प्रभो
iti śrīliṅgamahāpurāṇe pūrvabhāge kṣupadadhīcisaṃvādo nāma ṣaṭtriṃśo 'dhyāyaḥ bhavānkathamanuprāpto mahādevamumāpatim śrotumicchāmi tatsarvaṃ vaktumarhasi me prabho
हिन्दी अर्थ
हो गया। है द्विज! अव्यक्त भी अपने गुणोंके साथ महेश्वरमें समाहित हो गया। इसके अनन्तर उन्हीं परम पुरुष शिवसे पूर्वकी भाँति सृष्टि होने लगी॥ १--५ /२॥ एतदनन्तर पद्मयोनि ब्रह्माजीने अपने मनसे मानस पुत्रॉंका सृजन किया। इस लोकमें जब प्रजाओंकी वृद्धि न हो सकी, तब प्रजा-वृद्धिके लिये स्वयं भगवान् ब्रह्मा अपने मानस पुत्रोंक साथ महेश्वरके निमित्त कठोर तप
English
How did you attain Mahadeva the lord of Uma? O holy lord, it behoves you to narrate everything. I wish to hear.