Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
28
अध्याय 28 / 90

Adhyaya 28

36 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ36 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय २८

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे पितापुत्रसंवादे आत्मविवेको नाम सप्तविंशो ऽध्यायः अष्टाविंशो ऽध्यायः जड उवाच तन्मातुर्वचनं श्रुत्वा सो ऽलर्को मातरं पुनः ।पप्रच्छ वर्णधर्मांश्च धर्मा ये चाश्रमेषु च

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe pitāputrasaṃvāde ātmaviveko nāma saptaviṃśo 'dhyāyaḥ aṣṭāviṃśo 'dhyāyaḥ jaḍa uvāca tanmāturvacanaṃ śrutvā so 'larko mātaraṃ punaḥ / papraccha varṇadharmāṃśca dharmā ye cāśrameṣu ca

हिन्दी अर्थ

वरूथिनी बोली--ब्रह्मन! मैं अप्सरा हूँ। मेरा नाम वरूथिनी है। मैं इस रमणीय पर्वतपर ही सदा विचरण करती हूँ। आज आपके दर्शनसे कामदेवके वशीभूत हो गयी हूँ। बताइये, मैं आपकी किस आज्ञाका पालन करूँ। इस समय सर्वथा आपके अधीन हूँ।

English

not get, if such I might have, in another body wherein I should possess a constant and perfect good-disposition and should bo raised and depressed through inequalities? Moreover a man of self-denial is perceived by his difference from otherfi. And so docs bodily pleasure or pain generate a good disposition in one who looks upon the subtle third por- tion Avhich exists merely a moment? Since pain dwells in

अध्याय २८

श्लोक 2

अलर्क उवाच कथितो ऽयं महाभागे ! राज्यतन्त्राश्रितस्त्वया ।धर्मं तमहमिच्छामि श्रोतुं वर्णाश्रमात्मकम्

alarka uvāca kathito 'yaṃ mahābhāge ! rājyatantrāśritastvayā / dharmaṃ tamahamicchāmi śrotuṃ varṇāśramātmakam

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणने कहा--कल्याणी! मैं जिस उपायसे अपने घरपर जा सकूँ और मेरे समस्त नित्यकर्मोकी हानि न हो, वही मुझे बतलाओ। भद्रे! नित्य-नैमिजत्तिक कर्मोंका छूटना ब्राह्मणके लिये बहुत बड़ी हानि है; अतः इससे बचनेके लिये तुम हिमालयसे मेरा उद्धार करो। ब्राह्मणोंका परदेशमें रहना कदापि उचित नहीं है। देश देखनेकी उत्कण्ठाने ही मुझसे

English

king. Then he cleverly made repeated visits to the king KaiSi, who had numerous armies and chariots, as his protectc in order to regain his kingdom.

अध्याय २८

श्लोक 3

मदालसोवाच दानमध्ययनं यज्ञो ब्राह्मणस्य त्रिधा मतः ।नान्यश्चतुर्थो धर्मो ऽस्ति धर्मस्तस्यापदं विना

madālasovāca dānamadhyayanaṃ yajño brāhmaṇasya tridhā mataḥ / nānyaścaturtho dharmo 'sti dharmastasyāpadaṃ vinā

हिन्दी अर्थ

यह अपराध कराया है। श्रेष्ठ ब्राह्मण अपने घरमें मौजूद रहे, तभी उसके समस्त कर्मोंकी सिद्धि होती है और जो इस प्रकार प्रवास करता है, उसके नित्य-नैमित्तिक कर्मोंकी हानि ही होती है; अतः यशस्विनी! अब अधिक कहनेकी आवश्यकता नहीं है। तुम ऐसी चेष्टा करो, जिससे मैं सूर्यास्तके पहले ही अपने घरपर पहुँच जाऊँ।

English

That king collected together his army against Alarka, ai despatched a messenger to demand that the kingdom should 1

अध्याय २८

श्लोक 4

याजनाध्यापने शुद्धे तथा पूतप्रतिग्रहः ।एषा सम्यक् समाख्यता त्रिविधा चास्य जीविका

yājanādhyāpane śuddhe tathā pūtapratigrahaḥ / eṣā samyak samākhyatā trividhā cāsya jīvikā

हिन्दी अर्थ

मुझे छोड़कर अपने घर चले जायाँ। ब्राह्मणकुमार! यहाँसे अधिक रमणीय स्वर्ग भी नहीं है। इसीलिये हमलोग स्वर्गलोक छोड़कर यहीं रहा करती हैं। आपने मेरे मनको हर लिया है। मैं कामदेवके वशभमें हूँ; आपको सुन्दर हार, वस्त्र, आभूषण, भक्ष्य-भोज्य तथा अड्गराग आदि

English

gived up to Subahu. Alarka refused, cognizant of his o? justice, to give up the kingdom then in obedience to that coi mand, and returned answer to the messenger of the king

अध्याय २८

श्लोक 5

दानमध्ययनं यज्ञः क्षत्रियस्याप्ययं त्रिधा ।धर्मः प्रोक्तः क्षिते रक्षा शस्त्राजीवञ्च जीविका

dānamadhyayanaṃ yajñaḥ kṣatriyasyāpyayaṃ tridhā / dharmaḥ proktaḥ kṣite rakṣā śastrājīvañca jīvikā

हिन्दी अर्थ

सभी भोग-सामग्री दूँगी। आप यहीं रहिये। यहाँ रहनेसे आपके शरीरमें कभी बुढ़ापा नहीं आयेगा; क्योंकि यह देवताओंकी भूमि है। यह यौवनकी पुष्टि करनेवाली है।

English

Ka4i; — " Let my elder brother come to me with affection ai ask for the kingdom for himself. I will not yield np tl

अध्याय २८

श्लोक 6

दानमध्ययनं यज्ञो वैश्यस्यापि त्रिधैव सः ।वाणिज्यं पाशुपाल्यञ्च कृषिश्चैवास्य जीविका

dānamadhyayanaṃ yajño vaiśyasyāpi tridhaiva saḥ / vāṇijyaṃ pāśupālyañca kṛṣiścaivāsya jīvikā

हिन्दी अर्थ

यों कहकर वह कमलनयनी अप्सरा बावली-सी हो गयी और “मुझपर कृपा कीजिये! ऐसा मधुर वाणीमें कहती हुई सहसा अनुरागपर्वूक उनका आलिड्रनन करने लगी।

English

smallest bit of territory through fear on an attack." Evi wise Subahu made no request then. Supplication is not tl duty of kshatriyas, for he was mighty in valour.

अध्याय २८

श्लोक 7

दानं यज्ञो ऽथ शुश्रूषा द्विजातीनां त्रिधा मया ।व्याख्यातः शूद्रधर्मो ऽपि जीविका कारुकर्म च

dānaṃ yajño 'tha śuśrūṣā dvijātīnāṃ tridhā mayā / vyākhyātaḥ śūdradharmo 'pi jīvikā kārukarma ca

हिन्दी अर्थ

तब ब्राह्मणने कहा--अरी ओ दुष्टे! मेरे शरीरका स्पर्श न कर। जो तेरे ही जैसा हो, वैसे किसी अन्य पुरुषके पास चली जा। मैं तो किसी और भावसे प्रार्थना करता हूँ और तू और ही भावसे मेरे पास आती है। गार्हपत्य आदि तीनों अग्नियाँ ही मेरे आराध्य देव हैं। अग्निशाला ही मेरे लिये रमणीय स्थान है तथा कुशासनसे सुशोभित वेदी ही मेरी प्रिया है।

English

Then the king of Kasi accompanied by all his anr

अध्याय २८

श्लोक 8

तद्वद् द्विजातिशुश्रूषा पोषणं क्रयविक्रयौ ।वर्णधर्मास्त्विमे प्रोक्ताः श्रूयन्तां चाश्रमाश्रयाः

tadvad dvijātiśuśrūṣā poṣaṇaṃ krayavikrayau / varṇadharmāstvime proktāḥ śrūyantāṃ cāśramāśrayāḥ

हिन्दी अर्थ

वरूथिनी! यदि ब्राह्मण भोगके लिये चेष्टा करे तो उसकी वह चेष्टा अच्छी नहीं मानी जाती। परन्तु यदि वह नित्य-नैमित्तिक कर्मोंके पालनके लिये चेष्टा करता है तो वह इहलोकमें क्लेशयुक्त जान पड़नेपर भी परलोकमें उत्तम फल देनेवाली होती है।

English

marched to attack the country of king Alarka. And fortliwii forming a close union with the contiguous Icings he attack with some of their many vassals, and reduced him

अध्याय २८

श्लोक 9

स्ववर्णधर्मात् संसिद्धिं नरः प्राप्नोति न च्युतः ।प्रयाति नरकं प्रेत्य प्रतिषिद्धनिषेवणात्

svavarṇadharmāt saṃsiddhiṃ naraḥ prāpnoti na cyutaḥ / prayāti narakaṃ pretya pratiṣiddhaniṣevaṇāt

हिन्दी अर्थ

वरूथिनी बोली--ब्रह्मन! मैं वेदनासे मर रही हूँ। मेरी रक्षा करनेसे आपको परलोकमें पुण्यका ही फल मिलेगा और दूसरे जन्ममें भी अनेकानेक भोग प्राप्त होंगे। इस प्रकार मेरा मनोरथ पूर्ण करनेसे लोक-परलोक दोनों ही सधते हैं, दोनों ही आपको लाभ पहुँचानेमें सहायक होते हैं। यदि आप मेरी प्रार्थना ठुकरा देंगे तो मेरी मृत्यु होगी और आपको भी पाप

English

king. Then he cleverly made repeated visits to the king KaiSi, who had numerous armies and chariots, as his protectc in order to regain his kingdom.

अध्याय २८

श्लोक 10

यावत्तु नोपनयनं क्रियते वै द्विजन्मनः ।कामचेष्टोक्तिभक्ष्यश्च तावद् भवति पुत्रक

yāvattu nopanayanaṃ kriyate vai dvijanmanaḥ / kāmaceṣṭoktibhakṣyaśca tāvad bhavati putraka

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणगने कहा--वरूथिनी! मेरे गुरुजनोंने उपदेश दिया है कि परायी स्त्रीकी अभिलाषा कदापि न करे; अतः मैं तुझे नहीं चाहता। भले ही तू बिलखाया करे अथवा सूखकर दुबली हो जाय।

English

That king collected together his army against Alarka, ai despatched a messenger to demand that the kingdom should 1

अध्याय २८

श्लोक 11

कृतोपनयनः सम्यग् ब्रह्मचारी गुरुर्गृहे ।वसेत्तत्र च धर्मो ऽस्य कथ्यते तं निबोध मे

kṛtopanayanaḥ samyag brahmacārī gururgṛhe / vasettatra ca dharmo 'sya kathyate taṃ nibodha me

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी कहते हैं--यों कहकर उन महाभाग ब्राह्मणने पवित्र हो जलका आचमन किया और गार्हपत्य-अग्निको प्रणाम करके मन-ही-मन कहा--'भगवन् अग्निदेव!! आप ही सब कर्मोकी सिद्धिके कारण हैं। आपसे ही आहवनीय और दक्षिणाग्निका प्रादुर्भाव हुआ है। आपको तृप्त करनेसे देवता वृष्टि करते और अन्न आदिकी

English

gived up to Subahu. Alarka refused, cognizant of his o? justice, to give up the kingdom then in obedience to that coi mand, and returned answer to the messenger of the king

अध्याय २८

श्लोक 12

स्वाध्यायो ऽथाग्रिशुश्रूषा स्नानं भिक्षाटनं तथा ।गुरोर्निवेद्य तच्चान्नमनुज्ञातेन सर्वदा

svādhyāyo 'thāgriśuśrūṣā snānaṃ bhikṣāṭanaṃ tathā / gurornivedya taccānnamanujñātena sarvadā

हिन्दी अर्थ

वृद्धिमें कारण बनते हैं। अन्नसे ही सम्पूर्ण जगत्का जीवन-निर्वाह होता है और किसीसे नहीं। इस प्रकार आपसे ही जगतकी रक्षा होती है। इस सत्यके प्रभावसे मैं सूर्यास्त होनेके पहले ही अपने घर पहुँच जाऊँ। यदि कभी ठीक समयपर मैंने वैदिक कर्मका परित्याग न किया हो तो इस सत्यके प्रभावसे मैं आज घर पहुँचकर डूबनेसे पहले ही सूर्यको देखूँ। यदि

English

Ka4i; — " Let my elder brother come to me with affection ai ask for the kingdom for himself. I will not yield np tl

अध्याय २८

श्लोक 13

गुरोः कर्मणि सोद्योगः सम्यक् प्रीत्युपपादनम् ।तेनाहूतः पठेच्चैव तत्परो नान्यमानसः

guroḥ karmaṇi sodyogaḥ samyak prītyupapādanam / tenāhūtaḥ paṭheccaiva tatparo nānyamānasaḥ

हिन्दी अर्थ

कभी मेरे मनमें पराये धन तथा परायी स्त्रीकी अभिलाषा न हुई तो मेरा यह मनोरथ सिद्ध

English

smallest bit of territory through fear on an attack." Evi wise Subahu made no request then. Supplication is not tl duty of kshatriyas, for he was mighty in valour.

अध्याय २८

श्लोक 14

एकं द्वौ सकलान् वापि वेदान् प्राप्य गुरोर्मुखात् ।अनुज्ञातो ऽथ वन्दित्वा दक्षिणां गुरवे ततः

ekaṃ dvau sakalān vāpi vedān prāpya gurormukhāt / anujñāto 'tha vanditvā dakṣiṇāṃ gurave tataḥ

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणकुमारके ऐसा कहनेपर उनके शरीरमें गार्हपत्य-अग्निने प्रवेश किया; फिर तो वे ज्वालाओंके बीचमें प्रकट हुए मूर्तिमान् अग्निदेवकी भाँति उस प्रदेशको प्रकाशित करने लगे। उधर उन तेजस्वी ब्राह्मणके प्रति उनकी ओर देखती हुई देवाड़नाका अनुराग और भी बढ़ गया। अग्निदेवके प्रवेश करनेपर वे ब्राह्मणकुमार जैसे आये थे, उसी प्रकार तुरंत वहाँसे

English

Then the king of Kasi accompanied by all his anr

अध्याय २८

श्लोक 15

गार्हस्थ्याश्रमकामस्तु गृहस्थाश्रममावसेत् ।वानप्रस्थाश्रमं वापि चतुर्थं चेच्छयात्मनः

gārhasthyāśramakāmastu gṛhasthāśramamāvaset / vānaprasthāśramaṃ vāpi caturthaṃ cecchayātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

चल दिये और एक ही क्षणमें घर पहुँचकर उन्होंने शास्त्रोक्त विधिसे सब कर्मोका अनुष्ठान पूरा किया। उनके चले जानेके बाद उस सर्वाड्रसुन्दरी अप्सराने लंबी-लंबी साँसें लेकर शेष दिन और रात्रि व्यतीत की। उसका हृदय ब्राह्मणके प्रति पूर्णरूपसे आसक्त हो गया था। वह बारंबार आहें भरती, हाहाकार करती, रोती और अपनेको मन्दभागिनी मानकर धिक्कारती

English

marched to attack the country of king Alarka. And fortliwii forming a close union with the contiguous Icings he attack with some of their many vassals, and reduced him

अध्याय २८

श्लोक 16

तत्रैव वा गुरोर्गेहे द्विजो निष्ठामवाप्नुयात् ।गुरोरभावे तत्पुत्रे तच्छिष्ये तत्सुतं विना

tatraiva vā gurorgehe dvijo niṣṭhāmavāpnuyāt / gurorabhāve tatputre tacchiṣye tatsutaṃ vinā

हिन्दी अर्थ

थी। उस समय उसका मन आहार, विहार, सुरम्य वन तथा रमणीय कन्दराओंमें भी सुख

English

subjection. And without harassing Alarka’s neighbouiii kings by molesting their realms, he thus subjugated both tl

अध्याय २८

श्लोक 17

शुश्रूषुर्निरभिमानो ब्रह्मचार्याश्रमं वसेत् ।उपावृत्तस्ततस्तस्मात् गृहस्थाश्रमकाम्यया

śuśrūṣurnirabhimāno brahmacāryāśramaṃ vaset / upāvṛttastatastasmāt gṛhasthāśramakāmyayā

हिन्दी अर्थ

मुने! कलि नामका एक गन्धर्व था, जो पहलेसे ही वरूथिनीमें आसक्त हो रहा था; किन्तु उस अप्सराने उसको फटकार दिया था। उस दिन उसने वरूथिनीको विरहिणीकी अवस्थामें देखा तो मन-ही-मन विचार किया--'क्या कारण है, जो आज वरूथिनी इस पर्वतपर लंबी साँसें खींचती हुई म्लान-मुखसे विचर रही है? इसका रहस्य जाननेके लिये

English

governors of the fortresses and the forest tribes. Ho i ducod into submission some kings by bribes, and some 1 creating dissension, and others who were well-affected towim Alarka by conciliation.

अध्याय २८

श्लोक 18

ततो ऽसमानर्षिकुलां तुल्यां भार्यामरोगिणीम् ।उद्वहेन्न्यायतो ऽव्यङ्गां गृहस्थाश्रमकारणात्

tato 'samānarṣikulāṃ tulyāṃ bhāryāmarogiṇīm / udvahennyāyato 'vyaṅgāṃ gṛhasthāśramakāraṇāt

हिन्दी अर्थ

कलिने उत्कण्ठापूर्वक बहुत देरतक ध्यान किया और समाधिके प्रभावसे उसने सब बातोंको

English

Then the king with his small army, harassed by the adve sary’s host, found his treasury depleted extremely by the f

अध्याय २८

श्लोक 19

स्वकर्मणा धनं लब्ध्वा पितृदेवातिथींस्तथा ।सम्यक् सम्प्रीणयन् भक्त्या पोषयेच्चाश्रितांस्तथा

svakarmaṇā dhanaṃ labdhvā pitṛdevātithīṃstathā / samyak samprīṇayan bhaktyā poṣayeccāśritāṃstathā

हिन्दी अर्थ

भलीभाँति जान लिया। इसके बाद सोचा, “अब समय बितानेकी आवश्यकता नहीं। यह वरूथिनी एक मनुष्यपर आसक्त हुई है। उसका रूप धारण कर लेनेपर यह निश्चय ही मेरे साथ रमण करेगी, अतः इसी उपायको कार्यमें लाऊँगा।'

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 20

भृत्यात्मजान् जामयो ऽथ दीनान्धपतितानपि ।यथाशक्त्यान्नदानेन वयांसि पशवस्तथा

bhṛtyātmajān jāmayo 'tha dīnāndhapatitānapi / yathāśaktyānnadānena vayāṃsi paśavastathā

हिन्दी अर्थ

ऐसा निश्चय करके गन्धर्वने अपने प्रभावसे ब्राह्मणका रूप धारण किया और जहाँ वरूथिनी बैठी थी, उधर ही विचरण करने लगा। उसे देखकर उस सुन्दरीके नेत्र प्रसन्नतासे खिल उठे। वह पास आकर बारंबार कहने लगी--“ब्रह्मन! प्रसन्न होइये, प्रसन्न होइये। आपके त्याग देनेपर मैं अपने प्राणोंका परित्याग कर दूँगी, इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है।

English

and perplexity of mind. After suffering the keenest pain, 1 then bethought him of the ring, about which his mother M

अध्याय २८

श्लोक 21

एष धर्मो गृहस्थस्य ऋतावभिगमस्तथा ।पञ्चयज्ञविधानन्तु यथाशक्त्या न हापयेत्

eṣa dharmo gṛhasthasya ṛtāvabhigamastathā / pañcayajñavidhānantu yathāśaktyā na hāpayet

हिन्दी अर्थ

यदि ऐसा हुआ तो आपको अत्यन्त कष्टदायक पाप लगेगा और आपकी सम्पूर्ण क्रियाएँ भी नष्ट हो जायँगी। यदि आपने मुझे अपनाया तो मेरी जीवनरक्षासे होनेवाला धर्म आपको

English

dalasd had formerly spoken to him. Then bathing and pui fying himself, he addressed the brahmans, and drawing o

अध्याय २८

श्लोक 22

पितृदेवातिथिज्ञातिभुक्तशेषं स्वयं नरः ।भुञ्जीत च समं भृत्यैर्यथाविभवमादृतः

pitṛdevātithijñātibhuktaśeṣaṃ svayaṃ naraḥ / bhuñjīta ca samaṃ bhṛtyairyathāvibhavamādṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

कलि बोला--सुन्दरी! क्‍या करूँ, एक ओर तो मेरी धार्मिक क्रिया नष्ट हो रही है और दूसरी ओर तुम प्राण देनेकी बात कहती हो। इससे मैं संकटमें पड़ गया हूँ। अच्छा, इस समय मैं तुमसे जैसा कहूँ, वैसा ही करनेके लिये तुम तैयार रहो तो तुम्हारे साथ मेरा समागम हो सकता है, अन्यथा नहीं।

English

the ring saw the motto thereof in clear characters. The pronounced what his mother had written thereon, whilo tl hair of his body was visibly standing erect, and his eyes we

अध्याय २८

श्लोक 23

एष तूद्देशतः प्रोक्तो गृहस्थस्याश्रमो मया ।वानप्रस्थस्य धर्मं ते कथयाम्यवधार्यताम्

eṣa tūddeśataḥ prokto gṛhasthasyāśramo mayā / vānaprasthasya dharmaṃ te kathayāmyavadhāryatām

हिन्दी अर्थ

वरूथिनीने कहा--ब्रह्मन! प्रसन्न होइये; आप जो कहेंगे, वही करूँगी। इस समय आपकी प्रत्येक आज्ञाका पालन करना मेरा कर्तव्य है।

English

expanded with joy ‘ Association must be shunned by evei soul; if to shun it be impossible, it should be formed witti t

अध्याय २८

श्लोक 24

अपत्यसन्ततिं दृष्ट्वा प्राज्ञो चानतिम् ।वानप्रस्थाश्रमं गच्छेदात्मनः शुद्धिकारणात्

apatyasantatiṃ dṛṣṭvā prājño cānatim / vānaprasthāśramaṃ gacchedātmanaḥ śuddhikāraṇāt

हिन्दी अर्थ

कलि बोला--सुन्दरी! सम्भोगके समय तुम आँखें बंद किये रहो, मेरी ओर दृष्टि न डालो तो मेरे साथ तुम्हारा संसर्ग हो सकता है।

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 25

तत्रारण्योपभोगश्च तपोभिश्चानुकर्षणम् ।भूमौ शय्या ब्रह्मचर्यं पितृदेवातिथिक्रिया

tatrāraṇyopabhogaśca tapobhiścānukarṣaṇam / bhūmau śayyā brahmacaryaṃ pitṛdevātithikriyā

हिन्दी अर्थ

वरूथिनीने कहा--ऐसा ही होगा। आपका कल्याण हो। आप जैसा चाहते हैं, वैसा ही हो। मुझे इस समय सब प्रकारसे आपकी आज्ञाके अधीन रहना है।

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 26

होमस्त्रिषवणस्त्रानं जटावल्कलधारणम् ।योगाभ्यासः सदा चैव वन्यस्नेहनिषेवणम्

homastriṣavaṇastrānaṃ jaṭāvalkaladhāraṇam / yogābhyāsaḥ sadā caiva vanyasnehaniṣevaṇam

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी कहते हैं--तदनन्तर वह गन्धर्व वरूथिनीके साथ पुष्पित काननोंसे सुशोभित पर्वतके मनोरम शिखरोंपर, सुन्दर सरोवरोंमें, रमणीय कन्दराओंमें, नदियोंके किनारे तथा अन्य मनोरम प्रदेशोंमें आनन्दपूर्वक विहार करने लगा। सम्भोगके समय वरूथिनी अपनी आँखें बंद कर लेती और ब्राह्मणके तेजस्वी स्वरूपका चिन्तन किया करती

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 27

इत्येष पापशुद्ध्यर्थमात्मनश्चोपकारकः ।वानप्रस्थाश्रमस्तस्माद् भिक्षोस्तु चरमो ऽपरः

ityeṣa pāpaśuddhyarthamātmanaścopakārakaḥ / vānaprasthāśramastasmād bhikṣostu caramo 'paraḥ

हिन्दी अर्थ

थी। तत्पश्चात् समयानुसार ब्राह्मणके स्वरूपका ध्यान करते-करते उस अप्सराने गन्धर्वके वीर्यसे गर्भ धारण किया। वरूथिनीको गर्भिणी जानकर ब्राह्मणरूपधारी गन्धर्वने उसे आश्वासन दिया और प्रेमपूर्वक उससे विदा ले वह अपने घर चला गया। गर्भकी अवधि पूर्ण होनेपर प्रज्वलित अग्निकी भाँति तेजस्वी बालकका जन्म हुआ, मानो सूर्य अपनी किरणोंसे

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 28

चतुर्थस्य स्वरूपं तु श्रुयतामाश्रमस्य मे ।यः स्वधर्मो ऽस्य धर्मज्ञैः प्रोक्तस्तात ! महात्मभिः

caturthasya svarūpaṃ tu śruyatāmāśramasya me / yaḥ svadharmo 'sya dharmajñaiḥ proktastāta ! mahātmabhiḥ

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण दिशाओंको प्रकाशित कर रहा हो। वह बालक भगवान् भास्करकी भाँति स्वरोचिष् (अपनी किरणों)-से सुशोभित हो रहा था; इसलिये वह स्वरोचिष् नामसे ही विख्यात हुआ। वह महान् सौभाग्यशाली शिशु अपनी अवस्था और सदगुणोंके साथ-ही-साथ प्रतिदिन उसी

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 29

सर्वसङ्गपरित्यागो ब्रह्मचर्यमकोपिता ।यतेन्द्रियत्वमावासे नैकस्मिन् वसतिश्चिरम्

sarvasaṅgaparityāgo brahmacaryamakopitā / yatendriyatvamāvāse naikasmin vasatiściram

हिन्दी अर्थ

प्रकार बढ़ने लगा, जैसे चन्द्रमा अपनी कलाओंके साथ शुक्ल पक्षमें दिनोंदिन बढ़ता रहता है। महाभाग स्वरोचिषने क्रमशः वेद, धनुर्वेद तथा अन्यान्य विद्याओंको ग्रहण किया। धीरे- धीरे उसकी तरुण अवस्था आ गयी। एक दिन वह मन्दराचल पर्वतपर विचर रहा था। इतनेमें ही उसकी दृष्टि एक सुन्दरी कन्यापर पड़ी, जो भयसे व्याकुल हो रही थी। कन्याने

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 30

अनारम्भस्तथाहारो भैक्षान्नेनैककालिना ।आत्मज्ञानावबोधेच्छा तथा चात्मावलोकनम्

anārambhastathāhāro bhaikṣānnenaikakālinā / ātmajñānāvabodhecchā tathā cātmāvalokanam

हिन्दी अर्थ

भी उसे देखा और घबराकर कहा--'मेरी रक्षा करो, रक्षा करो।” उसके नेत्र भयसे कातर हो रहे थे। स्वरोचिष्ने आश्वासन देते हुए कहा--'डरो मत; बताओ, क्या बात है?” वीरोचित वाणीमें उसके इस प्रकार पूछनेपर उस कन्याने बारंबार लंबी साँसें खींचते हुए अपना सारा

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 31

चतुर्थे त्वाश्रमे धर्मो मयायं ते निवेदितः ।सामान्यमन्यवर्णानामाश्रमाणाञ्च मे शृणु

caturthe tvāśrame dharmo mayāyaṃ te niveditaḥ / sāmānyamanyavarṇānāmāśramāṇāñca me śṛṇu

हिन्दी अर्थ

ता पी १5 प ्श हैँ, हट अ्-- २. शक ही अ है पा

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 32

सत्यं शौचमहिंसा च अनसूया तथा क्षमा ।आनृशंस्यमकार्पण्यं सन्तोषश्चाष्टमो गुणः

satyaṃ śaucamahiṃsā ca anasūyā tathā kṣamā / ānṛśaṃsyamakārpaṇyaṃ santoṣaścāṣṭamo guṇaḥ

हिन्दी अर्थ

कन्या बोली--वीरवर! मैं इन्दीवराक्ष नामक विद्याधरकी पुत्री हूँ। मेरा नाम मनोरमा है। मरुधथन्वाकी पुत्री मेरी माता हैं। मन्दार विद्याधरकी कन्या विभावरी मेरी एक सखी है और पार मुनिकी पुत्री कलावती मेरी दूसरी सखी है। एक दिन मैं उन दोनोंके साथ परम उत्तम कैलास पर्वतके तटपर गयी। वहाँ मुझे एक मुनि दिखायी दिये, जिनका शरीर

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 33

एते संक्षेपतः प्रोक्ता धर्मा वर्णाश्रमेषु ते ।एतेषु च स्वधर्मेषु स्वेषु तिष्ठेत् समन्ततः

ete saṃkṣepataḥ proktā dharmā varṇāśrameṣu te / eteṣu ca svadharmeṣu sveṣu tiṣṭhet samantataḥ

हिन्दी अर्थ

तपस्याके कारण अत्यन्त दुर्बल हो रहा था। भूखसे उनका कण्ठ सूख गया था। शरीरमें कान्तिका अभाव था और आँखोंकी पुतली भीतर धँसी हुई थी। यह देखकर मैंने उनका उपहास किया। इससे कुपित होकर उन्होंने मुझे शाप देते हुए कहा--“ओ नीच! अरी दुष्ट तपस्विनी! तूने मेरी हँसी उड़ायी है, इसलिये शीघ्र ही एक राक्षस तुझपर आक्रमण करेगा।'

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 34

यश्चोल्लङ्घ्य स्वकं धर्मं स्ववर्णाश्रमसंज्ञितम् ।नरो ऽन्यथा प्रवर्तेत स दण्ड्यो भूभृतो भवेत्

yaścollaṅghya svakaṃ dharmaṃ svavarṇāśramasaṃjñitam / naro 'nyathā pravarteta sa daṇḍyo bhūbhṛto bhavet

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार शाप देनेपर मेरी सखियोंने मुनिको बहुत फटकारा और कहा--तुम्हारी ब्राह्मणताको धिक्‍कार है। तुममें क्षमा न होनेके कारण तुम्हारी की हुई सारी तपस्या व्यर्थ है। जान पड़ता है, तुम क्रोधसे ही अत्यन्त दुर्बल हो रहे हो, तपस्यासे नहीं। ब्राह्मणका स्वभाव तो क्षमाशील होता है। क्रोधको काबूमें रखना ही तपस्या है।'

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 35

ये च स्वधर्मसन्त्यागात् पापं कुर्वन्ति मानवाः ।उपेक्षतस्तान् नृपतेरिष्टापूर्तं प्रणश्यति

ye ca svadharmasantyāgāt pāpaṃ kurvanti mānavāḥ / upekṣatastān nṛpateriṣṭāpūrtaṃ praṇaśyati

हिन्दी अर्थ

सखियोंकी ये बातें सुनकर उन अमिततेजस्वी साधुने उन दोनोंको भी शाप दे दिया --'एकके सब अड़्ोंमें कोढ़ हो जायगी और दूसरी क्षयरोगसे ग्रस्त होगी।' मुनिकी बात सच हुई, मेरी सखियोंको तत्काल वैसा ही रोग हो गया। इसी प्रकार मेरे पीछे-पीछे एक महान् राक्षस दौड़ा चला आ रहा है। वह पास ही तो गरज रहा है, क्या आपको उसकी

English

good, for association with the good is a panacea. Love

अध्याय २८

श्लोक 36

तस्माद्राज्ञा प्रयत्नेन सर्वे वर्णाः स्वधर्मतः ।प्रवर्तन्तो ऽन्यथा दण्ड्याः स्थाप्याश्चैव स्वकर्मसु

tasmādrājñā prayatnena sarve varṇāḥ svadharmataḥ / pravartanto 'nyathā daṇḍyāḥ sthāpyāścaiva svakarmasu

हिन्दी अर्थ

भयंकर आवाज नहीं सुनायी देती। आज तीसरा दिन बीत रहा है, किन्तु वह मेरा पीछा नहीं छोड़ता। महामते! मैं सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रोंका हृदय (रहस्य) जानती हूँ और वह सब आपको दिये देती हूँ। आप इस राक्षससे मेरी रक्षा कीजिये। पिनाकधारी रुद्रने पहले यह रहस्य स्वायम्भुव मनुको दिया था। मनुने वसिष्ठजीको, वसिष्ठजीने मेरे नानाको और नानाने

English

good, for association with the good is a panacea. Love

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 28
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.