अध्याय २९
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे पुत्रानुशासने मदालसावाक्यं नामाष्टाविंशो ऽध्यायः #१ ऊनत्रिंशो ऽध्यायः अलर्क उवाच यत् कार्यं पुरुषाणाञ्च गार्हस्थ्यमनुवर्तताम् ।बन्धश्च स्यादकरणे क्रियाया यस्य चोच्छ्रितिः
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe putrānuśāsane madālasāvākyaṃ nāmāṣṭāviṃśo 'dhyāyaḥ #1 ūnatriṃśo 'dhyāyaḥ alarka uvāca yat kāryaṃ puruṣāṇāñca gārhasthyamanuvartatām / bandhaśca syādakaraṇe kriyāyā yasya cocchritiḥ
हिन्दी अर्थ
दहेजके रूपमें मेरे पिताको दिया था। मैंने बाल्यावस्थामें अपने पितासे ही इसकी शिक्षा पायी थी। यह सम्पूर्ण अस्त्रोंका हृदय है, जो समस्त शत्रुओंका संहार करनेवाला है। आप इसे शीघ्र ही ग्रहण करें और ब्राह्मणके शापसे प्रेरित होकर आये हुए इस दुरात्माको मार
English
Then the king prostrating himself before the magnanimous t Buddhi. t For man4alu read