अध्याय ३०
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे मदालसोपदेशो नामोनत्रिंशो ऽध्यायः त्रिंशो ऽध्यायः मदालसोवाच नित्यं नैमित्तकञ्चैव नित्यनैमित्तिकं तथा ।गृहस्थस्य तु यत् कर्म तन्निशामय पुत्रक !
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe madālasopadeśo nāmonatriṃśo 'dhyāyaḥ triṃśo 'dhyāyaḥ madālasovāca nityaṃ naimittakañcaiva nityanaimittikaṃ tathā / gṛhasthasya tu yat karma tanniśāmaya putraka !
हिन्दी अर्थ
त्याग नहीं करती। मकर नामकी तीसरी निधि तमोगुणी होती है। उसकी दृष्टि पड़नेपर सुशील मनुष्य भी प्रायः तमोगुणी बन जाता है। वह बाण, खड्ग, ऋष्टि, धनुष, ढाल तथा दंशन करनेवाली वस्तुओंका संग्रह करता, राजाओंके साथ मैत्री जोड़ता, शौर्यसे जीविका चलानेवाले क्षत्रियों तथा उनके प्रेमियोंको धन देता है। अस्त्र-शस्त्रोंके सिवा और किसी
English
^oi'lalpe read lampe j so a MS. in the Sanskrit College.