अध्याय ४४
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे अरिष्टकथनं नाम त्रिचत्वारिंशो ऽध्यायः चतुश्चत्वारिंशो ऽध्यायः सुबाहुरुवाच यदर्थं नृपशार्दूल ! त्वामहं शरणं गतः ।तन्मया सकलं प्राप्तं यास्यामि त्वं सुखी भव
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe ariṣṭakathanaṃ nāma tricatvāriṃśo 'dhyāyaḥ catuścatvāriṃśo 'dhyāyaḥ subāhuruvāca yadarthaṃ nṛpaśārdūla ! tvāmahaṃ śaraṇaṃ gataḥ / tanmayā sakalaṃ prāptaṃ yāsyāmi tvaṃ sukhī bhava
हिन्दी अर्थ
हमलोगोंकी रक्षा करें ।। २४ ।। चण्डिके! पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशामें आप हमारी रक्षा करें तथा ईश्वरि! अपने त्रिशूलको घुमाकर आप उत्तर दिशामें भी हमारी रक्षा करें २५ ।। तीनों लोकोंमें आपके जो परम सुन्दर एवं अत्यन्त भयड्कर रूप विचरते रहते हैं, उनके द्वारा भी आप हमारी तथा इस भूलोककी रक्षा करें ।। २६ ।। अम्बिके! आपके कर-
English
Hoar from me of the four forests and lakes which exist on