अध्याय ५४
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणेठमन्वन्तरकथनंऽ नाम त्रिपञ्चाशो ऽध्यायः चतुःपञ्चाशो ऽध्यायः- ५४ क्रौष्टुकिरुवाच कतिद्वीपाः समुद्रा वा पर्वता वा कति द्विज ।कियन्ति चैव वर्षाणि तेषां नद्यश्च का मुने
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇeṭhamanvantarakathanaṃ' nāma tripañcāśo 'dhyāyaḥ catuḥpañcāśo 'dhyāyaḥ- 54 krauṣṭukiruvāca katidvīpāḥ samudrā vā parvatā vā kati dvija / kiyanti caiva varṣāṇi teṣāṃ nadyaśca kā mune
हिन्दी अर्थ
इस जलसे तृप्त हों, जो चाहनेवाले पुरुषोंको इच्छानुसार भोग प्रदान करते हैं, देवत्व, इन्द्रत्व तथा उससे ऊँचे पदकी प्राप्ति कराते हैं; इतना ही नहीं, जो पुत्र, पशु, धन, बल और गृह भी देते हैं। जो पितर चन्द्रमाकी किरणोंमें सूर्यके मण्डलमें तथा श्वेत विमानोंमें सदा निवास करते हैं, वे मेरे दिये हुए अन्न, जल
English
Thig