अध्याय ५५
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे भुवनकोशठजम्बूद्वीपवर्णनंऽ नाम चतुः पञ्चाशो ऽध्याय पञ्चपञ्चाशो ऽध्यायः- ५५ मार्कण्डेय उवाच शैलेषु मन्दाराद्येषु चतुर्ष्वपि द्विजोत्तम ।वाननि यानि चत्वारि सरांसि च निबोध मे
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe bhuvanakośaṭhajambūdvīpavarṇanaṃ' nāma catuḥ pañcāśo 'dhyāya pañcapañcāśo 'dhyāyaḥ- 55 mārkaṇḍeya uvāca śaileṣu mandārādyeṣu caturṣvapi dvijottama / vānani yāni catvāri sarāṃsi ca nibodha me
हिन्दी अर्थ
अवसरपर यदि इसका पाठ हो तो यह हमें पंद्रह वर्षोतकके लिये तृप्ति प्रदान करता है। जिस घरमें यह स्तोत्र सदा लिखकर रखा जाता है, वहाँ श्राद्ध करनेपर हमारी निश्चय ही उपस्थिति होती है; अतः महाभाग! श्राद्धमें भोजन करनेवाले ब्राह्मणोंके सामने तुम्हें यह स्तोत्र अवश्य सुनाना चाहिए; क्योंकि यह हमारी
English
Or A'kaniii. Neither is in the dictionary, and I have not found them