अध्याय ५७
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे गङ्गावतारो नाम षट्पञ्चाशो ऽध्यायः सप्तपञ्चाशो ऽध्यायः- ५७ क्रौष्टुकिरुवाच भगवन् ! कथितन्त्वेतज्जम्बूद्वीपं समासतः ।यदेतद्भवता प्रोक्तं कर्म नान्यत्र पुण्यदम्
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe gaṅgāvatāro nāma ṣaṭpañcāśo 'dhyāyaḥ saptapañcāśo 'dhyāyaḥ- 57 krauṣṭukiruvāca bhagavan ! kathitantvetajjambūdvīpaṃ samāsataḥ / yadetadbhavatā proktaṃ karma nānyatra puṇyadam
हिन्दी अर्थ
द्वारा मेरी स्तुति करेगा, उसकी समस्त अभिलाषाएँ पूर्ण होंगी तथा उसे पुण्यकी भी प्राप्ति होगी। यज्ञोंमें, पर्वके समय, तीर्थोमें और होमकर्ममें जो धर्मके लिये मेरे इस स्तोत्रका पाठ करेगा, उसके लिये यह अत्यन्त पुष्टिकारक होगा। होम न करने तथा अयोग्य समयमें होम करने आदिके जो दोष हैं और अयोग्य पुरुषोंद्वारा हवन करनेसे जो दोष उत्पन्न होते हैं, उन
English
have nob met with these elsewhere. The Ohosha-aankhyas are men- in vorso 6 above.