Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
59
अध्याय 59 / 90

Adhyaya 59

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पूर्ण अध्याय पाठ29 श्लोक

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अध्याय ५९

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे कूर्मनिवेशो नामाष्टपञ्चाशो ऽध्यायः ऊनषष्टितमो ऽध्यायः- ५९ मार्कण्डेय उवाच एवन्तु भारतं वर्षं यथावत् कथितं मुने ।कृतं त्रेता द्वापरञ्च तथाथिष्यं चतुष्टयम्

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe kūrmaniveśo nāmāṣṭapañcāśo 'dhyāyaḥ ūnaṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ- 59 mārkaṇḍeya uvāca evantu bhārataṃ varṣaṃ yathāvat kathitaṃ mune / kṛtaṃ tretā dvāparañca tathāthiṣyaṃ catuṣṭayam

हिन्दी अर्थ

बना रखा है, उसीके मार्गसे रसातलमें जाकर मुदावतीका अपहरण करनेवाले उस दुष्टको

English

I will toll thee, 0 brahman, what the continent Kim- purusha is; where men with real bodies live ten thousand

अध्याय ५९

श्लोक 2

अत्रैवैतद्युगानान्तु चातुर्वर्ण्यो ऽत्र वै द्विज ।चत्वारि त्रीणि द्वे चैव तथैकञ्च शरच्छतम्

atraivaitadyugānāntu cāturvarṇyo 'tra vai dvija / catvāri trīṇi dve caiva tathaikañca śaracchatam

हिन्दी अर्थ

तब अत्यन्त क्रोधमें भरे हुए दोनों राजकुमार उस गर्तके मार्गसे सेनासहित रसातलमें जा पहुँचे और कुजृम्भसे युद्ध करने लगे। उनमें परिघ, खड्ग, शक्ति, शूल, फरसे तथा बाणोंकी मारसे निरन्तर अत्यन्त भयानक संग्राम होता रहा। फिर मायाके बली हैत्यने युद्धमें उन दोनों राजकुमारोंको बाँध लिया और उनके समस्त सैनिकोंका संहार कर डाला। यह

English

years; where men and women are indeed free from sickness and free from sorrow, and there the fig-tree* is called shanda;

अध्याय ५९

श्लोक 3

जीवन्त्यत्र नरा ब्रह्मन् ! कृतत्रेतादिके क्रमात् ।देवकूटस्य पूर्वस्य शैलेन्द्रस्य महात्मनः

jīvantyatra narā brahman ! kṛtatretādike kramāt / devakūṭasya pūrvasya śailendrasya mahātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

समाचार पाकर राजाको बहुत दुःख हुआ। उन्होंने अपने सभी योद्धाओंसे कहा--“जो इस हैत्यका वध करके मेरे दोनों पुत्रोंकोी छुड़ा लायेगा, उसको मैं अपनी कन्या ब्याह दूँगा।' भनन्दनके पुत्र वत्सप्रीने भी यह घोषणा सुनी। वह बलवान, अस्त्र-शस्त्रोंका ज्ञाता तथा शूरवीर था। उसने अपने पिताके प्रिय मित्र राजा विदूरथके पास आकर उन्हें प्रणाम किया

English

it grows very high, it is like a grove.f Those men are always drinking the juice of its fruit; and the women are horn with lasting youthfulness and are fragrant as the lotus.J

अध्याय ५९

श्लोक 4

पूर्वेण यत् स्थितं वर्षं भद्राश्वं तन्निबोध मे ।श्वेतपर्णश्च नीलश्च शैवालश्चाचलोत्तमः

pūrveṇa yat sthitaṃ varṣaṃ bhadrāśvaṃ tannibodha me / śvetaparṇaśca nīlaśca śaivālaścācalottamaḥ

हिन्दी अर्थ

और विनीत भावसे कहा--“महाराज! मुझे आज्ञा दीजिये, मैं आपके ही तेजसे उस हैत्यको

English

mankind are born of the appearance of gold; they all de- scend there from the world of the gods, and are shaped like

अध्याय ५९

श्लोक 5

कौरञ्जः पर्णशालाग्रः पञ्चैते तु कुलाचलाः ।तेषां प्रसूतिरन्ये ये बहवः क्षुद्रपर्वताः

kaurañjaḥ parṇaśālāgraḥ pañcaite tu kulācalāḥ / teṣāṃ prasūtiranye ye bahavaḥ kṣudraparvatāḥ

हिन्दी अर्थ

मारकर आपके दोनों पुत्रों तथा कन्याको छुड़ा लाऊँगा।” यह सुनकर राजाने अपने प्यारे मित्रके उस पुत्रको प्रसन्नतापूर्वक छातीसे लगा लिया और कहा--“वत्स! जाओ, तुम्हें अपने कार्यमें सफलता प्राप्त हो।'

English

mankind are born of the appearance of gold; they all de- scend there from the world of the gods, and are shaped like

अध्याय ५९

श्लोक 6

तैर्विशिष्टा जनपदा नानारूपाः सहस्रशः ।ततः कुमुदसंकाशाः शुद्धसानुसुमङ्गलाः

tairviśiṣṭā janapadā nānārūpāḥ sahasraśaḥ / tataḥ kumudasaṃkāśāḥ śuddhasānusumaṅgalāḥ

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर वीर वत्सप्री खड्ग और धनुष ले, अँगुलियोंमें गोधाके चर्मसे बने हुए दस्ताने पहनकर पूर्वोक्त गढ़ेके मार्गसे तुरंत पातालमें गया। वहाँ उसने अपने धनुषकी भयंकर टड्कार सुनायी, जिससे सारा पाताल गूँज उठा। वह टड़कार सुनकर दानवराज कुजृम्भ अपनी सेना साथ ले बड़े क्रोधके साथ वहाँ आया और राजकुमारके साथ युद्ध करने लगा।

English

fine sugar-cane juice j neither old ago afflicts them there, nor do they suffer from decay at all; and they live in truth for

अध्याय ५९

श्लोक 7

इत्येवमादयो ऽन्ये ऽपि शतशो ऽथ सहस्रशः ।सीता शङ्खावती भद्रा चक्रावर्तादिकास्तथा

ityevamādayo 'nye 'pi śataśo 'tha sahasraśaḥ / sītā śaṅkhāvatī bhadrā cakrāvartādikāstathā

हिन्दी अर्थ

दोनोंके पास अपनी-अपनी सेनाएँ थीं, एक बलवान्का दूसरे बलवान् वीरके साथ युद्ध हो रहा था। लगातार तीन दिनोंतक घमासान युद्ध होता रहा, तब वह दानव अत्यन्त क्रोधमें भरकर मूसल लानेके लिये दौड़ा। प्रजापति विश्वकर्माका बनाया हुआ वह मूसल सदा अन्तः-पुरमें रहता था और गन्ध, माला तथा धूप आदिसे प्रतिदिन उसकी पूजा होती थी।

English

I have mentioned Ilavfita, which is in the middle, the continent of Meru. The sun does not burn there, nor do men

अध्याय ५९

श्लोक 8

नद्यो ऽथ बह्व्यो विस्तीर्णाः शीततोयौघवाहिकाः ।अत्र वर्षे नराः शङ्खशुद्धहेमसमप्रभाः

nadyo 'tha bahvyo vistīrṇāḥ śītatoyaughavāhikāḥ / atra varṣe narāḥ śaṅkhaśuddhahemasamaprabhāḥ

हिन्दी अर्थ

राजकुमारी मुदावती उस मूसलके प्रभावको जानती थी। अतः उसने अत्यन्त नम्रतासे मस्तक झुकाकर उस श्रेष्ठ मूसलका स्पर्श किया। वह महान् हैत्य जबतक उस मूसलको हाथमें ले, तबतक ही उसने नमस्कारके बहाने अनेक बार उसका स्पर्श कर लिया; फिर उस हैत्यराजने युद्धभूमिमें जाकर मूसलसे युद्ध आरम्भ किया; किन्तु उसके शत्रुओंपर मूसलके

English

suffer from decay; and they do not grasp at selfish gamfl‘5

अध्याय ५९

श्लोक 9

दिव्यसङ्गमिनः पुण्या दशवर्षशतायुषः ।मन्दोत्तमौ न तेषु स्तः सर्वे ते समदर्शनाः

divyasaṅgaminaḥ puṇyā daśavarṣaśatāyuṣaḥ / mandottamau na teṣu staḥ sarve te samadarśanāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रहार व्यर्थ सिद्ध होने लगे। उस दिव्य अस्त्रके निर्बल पड़ जानेपर हैत्यने दूसरे अस्त्र- शस्त्रोंद्वारा शत्रुका सामना किया। राजकुमारने उसे रथहीन कर दिया। तब वह ढाल-तलवार लेकर उसकी ओर दौड़ा। उसे क्रोधमें भरकर वेगसे आते देख राजकुमारने कालाग्निके समान प्रज्वलित आग्नेय-अस्त्रसे उसपर प्रहार किया। उससे हैत्यकी छातीमें गहरी चोट

English

planets there are the sublime lustre of Meru. Mankind are bom there bright as the lotus flower, fragrant as the lotus Bower; they feed on the juice of the jambu fruit; and

अध्याय ५९

श्लोक 10

तितिक्षादिभिरष्टाभैः प्रकृत्या ते गुणैर्युताः ।तत्राप्यश्वशिरा देवश्चतुर्बाहुर्जनार्दनः

titikṣādibhiraṣṭābhaiḥ prakṛtyā te guṇairyutāḥ / tatrāpyaśvaśirā devaścaturbāhurjanārdanaḥ

हिन्दी अर्थ

पहुँची और उसके प्राणपखेरू उड़ गये। उसके मारे जानेपर रसातलनिवासी बड़े-बड़े नागोंने महान् उत्सव मनाया। राजकुमारपर फूलोंकी वर्षा होने लगी। गन्धर्वराज गाने लगे और देवताओंके बाजे बज उठे। राजकुमार वत्सप्रीने उस हैत्यको मारकर राजा विदूरथके दोनों पुत्रों तथा कृशाज्री कन्या मुदावतीको भी बन्धनसे मुक्त किया। कुजृम्भके मारे जानेपर

English

And there the green-leaved Indian fig-treof is the lofty tree. And the people there pass their time drinking the juice of its

अध्याय ५९

श्लोक 11

शिरोहृदयोमेढ्राङ्घ्रिहस्तैश्चाक्षित्रयान्वितः ।तस्याप्यथैवं विषया विज्ञेया जगतः प्रभोः

śirohṛdayomeḍhrāṅghrihastaiścākṣitrayānvitaḥ / tasyāpyathaivaṃ viṣayā vijñeyā jagataḥ prabhoḥ

हिन्दी अर्थ

नागोंके अधिपति शेषसंज्ञक भगवान् अनन्तने उस मूसलको ले लिया। मुदावतीने सुनन्द नामक मूसलके गुणको जानकर उसका बारंबार स्पर्श किया था, इसलिये नागराज अनन्तने उसका नाम सुनन्दा रख दिया। तत्पश्चात् राजकुमारने भाइयोंसहित उस कन्याको शीघ्र ही पिताके पास पहुँचाया और प्रणाम करके कहा--'तात! आपकी आज्ञाके अनुसार मैं

English

shaped expanse in tho middle of Meru* in Ilavrita; therein is the great mountain Meru; thus is made known Ildvrita.

अध्याय ५९

श्लोक 12

केतुमालमतो वर्षं निबोध मम पश्चिमम् ।विशालः कम्बलः कृष्णो जयन्तो हरिपर्वतः

ketumālamato varṣaṃ nibodha mama paścimam / viśālaḥ kambalaḥ kṛṣṇo jayanto hariparvataḥ

हिन्दी अर्थ

आपके दोनों पुत्रों और इस मुदावतीको भी छुड़ा लाया। अब मुझसे और भी जो कार्य लेना हो, उसके लिये आज्ञा कीजिये।'

English

And there the green-leaved Indian fig-treof is the lofty tree. And the people there pass their time drinking the juice of its

अध्याय ५९

श्लोक 13

विशोको वर्धमानश्च सप्तैते कुलपर्वताः ।अन्ये सहस्रशः शैला येषु लोकगणः स्थितः

viśoko vardhamānaśca saptaite kulaparvatāḥ / anye sahasraśaḥ śailā yeṣu lokagaṇaḥ sthitaḥ

हिन्दी अर्थ

इसपर महाराज विदूरथके मनमें बड़ी प्रसन्नता हुई। वे उच्चस्वरसे बोले--“बेटा! बेटा!! तूने बहुत अच्छा किया, बहुत अच्छा किया। आज देवताओंने तीन कारणोंसे मेरा सम्मान बढ़ाया है--एक तो तुम जामाताके रूपमें मुझे प्राप्त हुए, दूसरे मेरा शत्रु मारा गया तथा तीसरे मेरी सन्तानें कुशलपूर्वक लौट आयीं; अतः आज शुभ मुहूर्त्तमें तुम मेरी इस कन्याका

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 14

मौलयस्ते महाकायाः शाकपोतकम्भकाः ।अङ्गुलप्रमुखाश्चापि वसन्ति शतशो जनाः

maulayaste mahākāyāḥ śākapotakambhakāḥ / aṅgulapramukhāścāpi vasanti śataśo janāḥ

हिन्दी अर्थ

पाणिग्रहण करो।” यों कहकर राजाने उन दोनोंका विधिपूर्वक विवाह कर दिया। नवयुवक वत्सप्री मुदावतीके साथ रमणीय प्रदेशों तथा महलोंमें विहार करने लगा। कुछ कालके बाद उसके वृद्ध पिता भनन्दन वनमें चले गये और वत्सप्री राजा हुआ। उसने सदा ही प्रजाका धर्मपूर्वक पालन करते हुए अनेक यज्ञ किये। वह प्रजाको पुत्रकी भाँति मानकर उसकी रक्षा

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 15

ये पिबन्ति महानद्यो वङ्क्षुं श्यामां सकम्बलाम् ।अमोघां कामिनीं श्यामां तथैवान्याः सहस्रशः

ye pibanti mahānadyo vaṅkṣuṃ śyāmāṃ sakambalām / amoghāṃ kāminīṃ śyāmāṃ tathaivānyāḥ sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

करता था। उसके राज्यमें वर्णसड्कर सन्तानकी उत्पत्ति नहीं हुई। कभी किसीको लुटेरों, सर्पों तथा दुष्टोंका भय नहीं हुआ। इसके शासनकालमें किसी प्रकारके उत्पातका भी भय

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 16

अत्राप्यायुः समं पूर्वैरत्रापि भगवान् हरिः ।वराहरूपी पादास्यहृत्पृष्ठपार्श्वतस्तथा

atrāpyāyuḥ samaṃ pūrvairatrāpi bhagavān hariḥ / varāharūpī pādāsyahṛtpṛṣṭhapārśvatastathā

हिन्दी अर्थ

राजा खनित्रकी कथा

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 17

त्रिनक्षत्रयुते देशे नक्षत्राणि शुभानि च ।इत्येतत् केतुमालन्ते कथितं मुनिसत्तम

trinakṣatrayute deśe nakṣatrāṇi śubhāni ca / ityetat ketumālante kathitaṃ munisattama

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी कहते हैं--सुनन्दाके गर्भसे वत्सप्रीके बारह पुत्र हुए, जिनके नाम इस प्रकार हैं--प्रांशु, प्रवीर, शूर, सुचक्र, विक्रम, क्रम, बली, बलाक, चण्ड, प्रचण्ड, सुविक्रम और स्वरूप। ये सभी महाभाग संग्रामविजयी थे। इनमें महापराक्रमी प्रांशु ज्येष्ठ थे, अतः वे ही राजा हुए। शेष भाई सेवककी भाँति

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 18

अतः परं कुरून् वक्ष्ये निबोधेह ममोत्तरान् ।तत्र वृक्षा मधुफला नित्यपुष्पफलोपगाः

ataḥ paraṃ kurūn vakṣye nibodheha mamottarān / tatra vṛkṣā madhuphalā nityapuṣpaphalopagāḥ

हिन्दी अर्थ

उनकी आज्ञाके अधीन रहते थे। उनके यज्ञमें इतना धन दान दिया गया कि ब्राह्मणों तथा निम्नवर्णके लोगोंने भी राशि-राशि द्रव्य छोड़ दिया। अधिक होनेके कारण साथ न ले जा सके। वह सभी द्रव्य पृथ्वीपर पड़ा रह गया, जिससे इस पृथ्वीका “'वसुन्धरा” (धन धारण करनेवाली) नाम सार्थक हुआ। वे

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 19

वस्त्राणि च प्रसूयन्ते फलेष्वाभरणानि च ।सर्वकामप्रदास्ते हि सर्वकामफलप्रदाः

vastrāṇi ca prasūyante phaleṣvābharaṇāni ca / sarvakāmapradāste hi sarvakāmaphalapradāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रजाका औरस पुत्रोंकी भाँति पालन करते थे। उनके खजानेमें जो धन एकत्रित होता था, उसके द्वारा उन्होंने जो लाखों यज्ञ सम्पन्न किये, उनकी कोई संख्या नहीं है। प्रांशुके पुत्र प्रजाति थे। प्रजातिके खनित्र आदि पाँच पुत्र हुए। उनमें सबसे बड़े खनित्र राजा हुए। वे अपने पराक्रमके लिये विख्यात थे। खनित्र बड़े

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 20

भूमिर्मणिमयी वायुः सुगन्धः सर्वदा सुखः ।जायन्ते मानवास्तत्र देवलोकपरिच्युताः

bhūmirmaṇimayī vāyuḥ sugandhaḥ sarvadā sukhaḥ / jāyante mānavāstatra devalokaparicyutāḥ

हिन्दी अर्थ

ही शान्त, सत्यवादी, शूरवीर, समस्त प्राणियोंके हितमें लगे रहनेवाले, स्वधर्मपरायण, वृद्ध पुरुषोंके सेवक, अनेक शास्त्रोंके विद्वान, वक्ता, विनयशील, अस्त्र-शस्त्रोंके ज्ञाता, डींग न हाँकनेवाले और सब लोगोंके प्रिय थे। वे दिन-रात यही कामना किया करते थे--“समस्त प्राणी प्रसन्न रहें। दूसरोंपर भी स्नेह रखें।

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 21

मिथुनानि प्रसूयन्ते समकालस्थितानि वै ।अन्योन्यमनुरक्तानि चक्रवाकोपमानि च

mithunāni prasūyante samakālasthitāni vai / anyonyamanuraktāni cakravākopamāni ca

हिन्दी अर्थ

सब जीवोंका कल्याण हो। सभी निर्भय हों। किसी भी प्राणीको कोई व्याधि एवं मानसिक व्यथा न हो। समस्त प्राणी सबके प्रति मित्रभावके पोषक हों। ब्राह्मणोंका कल्याण हो। सबमें परस्पर प्रेम रहे। सब वर्णोकी उन्नति हो। समस्त कर्मोमें सिद्धि प्राप्त हो। लोगो! सब भूतोंके प्रति तुम्हारी बुद्धि कल्याणमयी हो।

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 22

चतुर्दशसहस्राणि तेषां सार्धानि वै स्थितिः ।चन्द्रकान्तश्च शैलेन्द्रः सूर्यकान्तस्तथापरः

caturdaśasahasrāṇi teṣāṃ sārdhāni vai sthitiḥ / candrakāntaśca śailendraḥ sūryakāntastathāparaḥ

हिन्दी अर्थ

तुमलोग जिस प्रकार अपना तथा अपने पुत्रोंका सर्वदा हित चाहते हो, उसी प्रकार सब प्राणियोंके प्रति हित-बुद्धि रखते हुए बर्ताव करो। यह तुम्हारे लिये अत्यन्त हितकी बात है। कौन किसका अपराध करता है। यदि कोई मूढ किसीका थोड़ा भी अहित करता है तो वह निश्चय ही उसका फल भोगता है;

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 23

तस्मिन् कुलाचलौ वर्षे तन्मध्ये च महानदी ।भद्रसोमा प्रयात्युर्व्यां पुण्यामलजलौघिनी

tasmin kulācalau varṣe tanmadhye ca mahānadī / bhadrasomā prayātyurvyāṃ puṇyāmalajalaughinī

हिन्दी अर्थ

क्योंकि फल सदा कर्ताको ही मिलता है। लोगो! यह विचारकर सबके प्रति पवित्र भाव रखो। इससे इस लोकमें पाप नहीं बनेगा और तुम्हें उत्तम लोकोंकी प्राप्ति होगी। बुद्धिमानो! मैं तो यह चाहता हूँ कि आज जो मुझसे स्नेह रखता है, उसका इस पृथ्वीपर सदा ही कल्याण हो तथा जो इस लोकमें मेरे साथ द्वेष

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 24

सहस्रशस्तथैवान्या नद्यो वर्षे ऽपि चोत्तरे ।तथान्याः क्षीरवाहिन्यो घृतवाहिन्य एव च

sahasraśastathaivānyā nadyo varṣe 'pi cottare / tathānyāḥ kṣīravāhinyo ghṛtavāhinya eva ca

हिन्दी अर्थ

रखता है, वह भी कल्याणका ही भागी बने।'-

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 25

दध्नो ह्रदास्तथा तत्र तथान्ये चानुपर्वताः ।अमृतास्वादकल्पानि फलानि विविधानि च

dadhno hradāstathā tatra tathānye cānuparvatāḥ / amṛtāsvādakalpāni phalāni vividhāni ca

हिन्दी अर्थ

राजा प्रजातिके पुत्र ऐसे थे। वे समस्त गुणोंसे सम्पन्न और सुन्दर थे। उनके नेत्र पद्मपत्रके समान सुशोभित थे। उन्होंने अपने भाइयोंको प्रेमपूर्वक पृथक्- पृथक् राज्योंमें अभिषिक्त कर दिया और स्वयं समुद्रवसना पृथ्वीका उपभोग करने लगे। उन्होंने पूर्व दिशामें अपने भाई शौरिको, दक्षिण दिशामें उदावसुको,

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 26

वनेषु तेषु वर्षेषु शतशो ऽथ सहस्रशः ।तत्रापि भगवान् विष्णुः प्राक्शिरा मत्स्यरूपवान्

vaneṣu teṣu varṣeṣu śataśo 'tha sahasraśaḥ / tatrāpi bhagavān viṣṇuḥ prākśirā matsyarūpavān

हिन्दी अर्थ

पश्चिममें सुनयको और उत्तरमें महारथको अभिषिक्त किया। उन चारों भाइयोंके तथा स्वयं राजा खनित्रके भिन्न-भिन्न गोत्रवाले मुनि पुरोहित हुए और वे ही वंशपरम्पराके क्रमसे मन्त्री भी होते आये। उक्त चारों राजा अपने-अपने राज्यका उपभोग करने लगे। खनित्र उन सबके सम्राट् थे। वे सारी पृथ्वीके

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 27

विभक्तो नवधा विप्र ! नक्षत्राणां त्रयं त्रयम् ।दिशस्तथापि नवधा विभक्ता मुनिसत्तम

vibhakto navadhā vipra ! nakṣatrāṇāṃ trayaṃ trayam / diśastathāpi navadhā vibhaktā munisattama

हिन्दी अर्थ

स्वामी थे। महाराज खनित्र उन चारों भाइयों तथा समस्त प्रजापर सदा पुत्रोंकी भाँति स्नेह रखते थे। एक दिन राजा शौरिसे उनके मन्त्री विश्ववेदीने एकान्तमें कहा--'राजन्! मुझे आपसे कुछ कहना है। जिसके अधिकारमें यह सारी पृथ्वी रहती है, उसीके वशमें अन्य सब राजा भी रहते हैं। वह तो राजा होता ही है,

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 28

चन्द्रद्वीपः समुद्रे च भद्रद्वीपस्तथापरः ।तत्रापि पुण्यो विख्यातः समुद्रान्तर्महामुने

candradvīpaḥ samudre ca bhadradvīpastathāparaḥ / tatrāpi puṇyo vikhyātaḥ samudrāntarmahāmune

हिन्दी अर्थ

उसके पुत्र-पौत्र तथा वंशके लोग भी क्रमश: राजा होते हैं। इसलिये आप हमलोगोंको साधन बनाकर अपने बाप-दादोंके राज्यपर अधिकार कर लीजिये। हम इस लोकमें ही आपको लाभ पहुँचा सकते हैं, परलोकमें नहीं।'

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

अध्याय ५९

श्लोक 29

इत्येतत् कथितं ब्रह्मन् ! कुरुवर्षं मयोत्तरम् ।शृणु किंपुरुषादीनि वर्षाणि गदतो मम

ityetat kathitaṃ brahman ! kuruvarṣaṃ mayottaram / śṛṇu kiṃpuruṣādīni varṣāṇi gadato mama

हिन्दी अर्थ

राजाने कहा--हमारे ज्येष्ठ भाई राजा हैं और हमलोगोंको पुत्रकी भाँति प्रेमसे अपनाये रखते हैं; फिर हम उनके राज्यपर किस प्रकार अधिकार जमायें।

English

dant lotuses. Mankind there are born with great strength, full of vigour, with large bodies, eminently good, wealthy and benign of look.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 59
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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