Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
61
अध्याय 61 / 90

Adhyaya 61

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अध्याय ६१

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणेठकिंपुरुषादिवर्षवर्णनम् ऽ नाम षष्टितमो ऽध्यायः एकषष्टितमो ऽध्यायः- ६१ क्रौष्टुकिरुवाच कथितं भवता सम्यग् यत् पृष्टो ऽसि महामुने ।भूसमुद्रादिसंस्थानं प्रमाणानि तथा ग्रहाः

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇeṭhakiṃpuruṣādivarṣavarṇanam ' nāma ṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ ekaṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ- 61 krauṣṭukiruvāca kathitaṃ bhavatā samyag yat pṛṣṭo 'si mahāmune / bhūsamudrādisaṃsthānaṃ pramāṇāni tathā grahāḥ

हिन्दी अर्थ

इति मत्वा समस्तेषु भो लोका: कृतबुद्धय: । सन्तु मा लौकिकं पापं लोकान प्राप्स्यथ वै

English

Now as the young brdhman thus spoke, the Garhapatj^

अध्याय ६१

श्लोक 2

तेषाञ्चैव प्रमाणञ्च नक्षत्राणाञ्च संस्थितिः ।भूरादयस्तथा लोकाः पातालान्यखिलान्यपि

teṣāñcaiva pramāṇañca nakṣatrāṇāñca saṃsthitiḥ / bhūrādayastathā lokāḥ pātālānyakhilānyapi

हिन्दी अर्थ

यो मेज्द्य स्निहाते तस्य शिवमस्तु सदा भुवि यश्न मां द्वेष्टि लोके5स्मिन् सो5पि भद्राणि

English

Fire in sooth appeared at hand upon his tody; ^

अध्याय ६१

श्लोक 3

स्वायम्भुवं तथा ख्यातं मुने ! मन्वन्तरं मम ।तदन्तराण्यहं श्रोतुमिच्छे मन्वन्तराणि वै ।मन्वन्तराधिपान् देवानृषींस्तत्तनयान्नृपान्

svāyambhuvaṃ tathā khyātaṃ mune ! manvantaraṃ mama / tadantarāṇyahaṃ śrotumicche manvantarāṇi vai / manvantarādhipān devānṛṣīṃstattanayānnṛpān

हिन्दी अर्थ

क्षुप, विविंश, खनीनेत्र, करन्धम, अवीक्षित तथा मरुत्तके

English

mined th*iidace tt if he were Agni in bodily form. Now vehement love aeized: upon the heavenly maiden aa she beheld

अध्याय ६१

श्लोक 4

मार्कण्डेय उवाच मन्वन्तरं मयाख्यातं तव स्वायम्भुवं च यत् ।स्वारोचिषाख्यमन्यत् तु शृणु तस्मादनन्तरम्

mārkaṇḍeya uvāca manvantaraṃ mayākhyātaṃ tava svāyambhuvaṃ ca yat / svārociṣākhyamanyat tu śṛṇu tasmādanantaram

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी कहते हैं--राजा खनित्रके पुत्र क्षुपने भी राज्य पानेके बाद पिताकी ही भाँति धर्मपूर्वक प्रजाजनोंका पालन किया। वे दानशील तथा अनेक यज्ञोंके अनुष्ठान करनेवाले थे। उन्होंने व्यवहार आदिके मार्ममें शत्रु और मित्र दोनोंके प्रति समान भाव रखा।

English

the brdhman, who stood there in so glorious a fonn. Then Iheyonngbrdhman,* surmounted by that Fire, immediately

अध्याय ६१

श्लोक 5

कश्चिद् द्विजातिप्रवरः पुरे ऽभूदरुणास्पदे ।वरुणायास्तटे विप्रो रूपेणात्यश्विनावपि

kaścid dvijātipravaraḥ pure 'bhūdaruṇāspade / varuṇāyāstaṭe vipro rūpeṇātyaśvināvapi

हिन्दी अर्थ

कहा--“महाराज! पूर्वकालमें जैसे क्षुप नामके राजा हुए थे, वैसे ही आप भी हैं। प्राचीन राजा क्षुप ब्रह्माजीके पुत्र थे। उनका चरित्र जैसा था, वैसा ही वर्तमान महाराजका भी है। पहलेके महाराज क्षुप गौ और ब्राह्मणोंसे कर नहीं लेते थे तथा उन महात्माने प्रजासे प्राप्त हुए छठे भागके द्वारा इस पृथ्वीपर अनेक यज्ञ किये थे।”

English

started to go as before; and he departed in haste while the slender-shaped heavenly maiden gazed after him as far as

अध्याय ६१

श्लोक 6

मृदुस्वभावः सद्वृत्तो वेदवेदाङ्गपारगः ।सदातिथिप्रियो रात्रावागतानां समाश्रयः

mṛdusvabhāvaḥ sadvṛtto vedavedāṅgapāragaḥ / sadātithipriyo rātrāvāgatānāṃ samāśrayaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा बोले--'मेरे-जैसा कौन मनुष्य उन महात्मा राजाओंका पूर्णरूपसे अनुसरण कर सकेगा, तथापि उत्तम आचरणवाले पुरुषोंके समान कार्य करनेके लिये उद्योग अवश्य करना चाहिए। अतः: इस समय मैं जो प्रतिज्ञा करता हूँ, उसे सुनो--मैं महाराज क्षुपके चरित्रका अनुसरण करूँगा तथा खेतीका अभाव होने या उसका अभाव दूर होनेपर तीन-

English

her eye could reach, her throat quivering with sighs. Then

अध्याय ६१

श्लोक 7

तस्य बुद्धिरियं त्वासीदहं पश्ये वसुन्धराम् ।अतिरम्यवनोद्यानां नानानगरशोभिताम्

tasya buddhiriyaṃ tvāsīdahaṃ paśye vasundharām / atiramyavanodyānāṃ nānānagaraśobhitām

हिन्दी अर्थ

तीन यज्ञोंका अनुष्ठान करूँगा। मेरी यह प्रतिज्ञा सम्पूर्ण भूमण्डलके लिये है। आजके पहले गौ और ब्राह्मणोंने जो राजकर दिया है, वह सब उन्हींकी सेवामें लौटा दूँगा।

English

Now she, the beauteous in every limb, remained with soul and mind clinging fast to him, and passed the remainder of the

अध्याय ६१

श्लोक 8

अथागतो।ञतिथिः कश्चित् कदाचित्तस्य वेश्मनि ।नानौषधिप्रभावज्ञो मन्त्रविद्याविशारदः

athāgato/ñatithiḥ kaścit kadācittasya veśmani / nānauṣadhiprabhāvajño mantravidyāviśāradaḥ

हिन्दी अर्थ

ऐसी प्रतिज्ञा करके राजा क्षुपने सब कुछ वैसा ही किया। वे खेती मारी जानेपर तीन- तीन यज्ञोंका अनुष्ठान करते थे। पहले गौ-ब्राह्मणोंने पूर्वके राजाओंको जितना कर दिया था, उतना धन उन्होंने उन्हें लौटा दिया। उनकी पत्नी प्रमथाके गर्भसे वीर नामक उत्तम पुत्र हुआ। उसने अपने प्रताप और पराक्रमसे पृथ्वीके समस्त राजाओंको अपने वशमें कर लिया

English

day and also the night in almost ceaseless sighing. And

अध्याय ६१

श्लोक 9

अभ्यर्थितस्तु तेनासौ श्रद्धापूतेन चेतसा ।तस्याचख्यौ स देशांश्च रम्याणि नगराणि च

abhyarthitastu tenāsau śraddhāpūtena cetasā / tasyācakhyau sa deśāṃśca ramyāṇi nagarāṇi ca

हिन्दी अर्थ

था। विदर्भराजकुमारी नन्दिनी उसकी प्रियतमा पत्नी थी, जिसके गर्भसे उसने विविंश नामक पुत्रको जन्म दिया। विविंश भी महाबलवान् राजा हुआ। उसके शासनकालमें आबादी अधिक हो जानेसे समूची पृथ्वी मनुष्योंस भर गयी थी। समयपर वर्षा होती, पृथ्वीपर खेती लहराया करती, खेतीमें अच्छे दाने लगते और दानोंमें पूर्ण रस भरे रहते थे।

English

Be kind! What thou sayest, that I will do for thee without falsehood— I say this without fear— whatever I must do now for thy sake.

अध्याय ६१

श्लोक 10

वनानि नद्यः शैलांश्च पुण्यान्यायतनानि च ।स ततो विस्मयाविष्टः प्राह तं द्विजसत्तमम्

vanāni nadyaḥ śailāṃśca puṇyānyāyatanāni ca / sa tato vismayāviṣṭaḥ prāha taṃ dvijasattamam

हिन्दी अर्थ

वे रस मनुष्योंके लिये पुष्टिकारक होते; किन्तु वह पुष्टि उन्‍्माद पैदा करनेवाली नहीं होती थी। लोगोंके पास जो धनका संग्रह होता, वह उनके मदका कारण नहीं बनता था। विविंशके प्रतापसे शत्रु सदा भयभीत रहते थे। प्रजा स्वस्थ थी और सुहृदवर्ग भलीभाँति पूजित हो प्रसन्नता प्राप्त करता था। राजा विविंश बहुत-से यज्ञोंका अनुष्ठान तथा पृथ्वीका

English

hood, " How happened it t that I came to this mountain, forcibly attracted by evil fate? And how happened it that

अध्याय ६१

श्लोक 11

अनेकदेशदर्शित्वेनातिश्रमसमन्वितः ।त्वं नातिवृद्धो वयसा नातिवृत्तश्च यौवनात् ।कथमल्पेन कालेन पृथिवीमटसि द्विज

anekadeśadarśitvenātiśramasamanvitaḥ / tvaṃ nātivṛddho vayasā nātivṛttaśca yauvanāt / kathamalpena kālena pṛthivīmaṭasi dvija

हिन्दी अर्थ

भलीभाँति पालन करके संग्राममें मृत्यु पाकर यहाँसे इन्द्रलोकमें चला गया।

English

hood, " How happened it t that I came to this mountain, forcibly attracted by evil fate? And how happened it that

अध्याय ६१

श्लोक 12

ब्राह्मण उवाच मन्त्रौषधिप्रभावेण विप्राप्रतिहता गतिः ।योजनानां सहस्रं हि दिनार्धेन व्रजाम्यम्

brāhmaṇa uvāca mantrauṣadhiprabhāveṇa viprāpratihatā gatiḥ / yojanānāṃ sahasraṃ hi dinārdhena vrajāmyam

हिन्दी अर्थ

विविंशका पुत्र खनीनेत्र हुआ, जो महाबलवान् और पराक्रमी था। उसके यज्ञोंमें गन्धर्वगण विस्मित हो यह गाथा गाया करते थे--'खनीनेत्रके समान दूसरा राजा इस

English

he, such a man as that, crossed the range of my eye P If that grand man shall not come to mo to-day, verily the intoler-

अध्याय ६१

श्लोक 13

मार्कण्डेय उवाच ततः स विप्रस्तं भूयः प्रत्युवाचेदमादरात् ।श्रद्धधानो वचस्तस्य ब्राह्मणस्य विपश्चितः

mārkaṇḍeya uvāca tataḥ sa viprastaṃ bhūyaḥ pratyuvācedamādarāt / śraddhadhāno vacastasya brāhmaṇasya vipaścitaḥ

हिन्दी अर्थ

पृथ्वीपर नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने दस हजार यज्ञ पूर्ण करके समुद्रसहित यह सारी पृथ्वी दान कर दी थी।” महात्मा ब्राह्मणोंको समूची पृथ्वीका दान दे उन्होंने तपस्यासे द्रव्य संग्रह किया और उसके द्वारा पृथ्वीको छुड़ाया। राजा खनीनेत्रने सरसठ हजार सरसठ सौ सरसठ यज्ञ किये थे और सबमें प्रचुर दक्षिणा दी थी। राजाको कोई पुत्र नहीं था; इसलिये वे

English

blast of sighing on this mountain? Has she been woonded by some muni’s curse, or has any one treated her with dis. honour, since she keeps on bedewing her face copiously with

अध्याय ६१

श्लोक 14

मम प्रसादं भगवन् ! कुरु मन्त्रप्रभावजम् ।द्रष्टुमेतां मम महीमतीवेच्छा प्रवर्तते

mama prasādaṃ bhagavan ! kuru mantraprabhāvajam / draṣṭumetāṃ mama mahīmatīvecchā pravartate

हिन्दी अर्थ

पापनाशिनी गोमतीके तटपर गये और वहाँ मन, वाणी एवं शरीरको संयममें रखकर घोर तपस्या करने लगे। सन्तानके लिये उन्होंने इन्द्रका स्तवन किया। उनके स्तोत्र, तपस्या और भक्तिसे सन्तुष्ट होकर इन्द्रने कहा--'राजन्! मैं तुमपर बहुत प्रसन्न हूँ, कोई वर माँगो।'

English

tears?" Then Kali through curiosity meditated on that matter full long, and perceived the truth by the power of

अध्याय ६१

श्लोक 15

प्रादात् स ब्राह्मणश्चास्मै पादलेपमुदारधीः ।अभिमन्त्रयामास दिशं तेनाख्याताञ्च यत्नतः

prādāt sa brāhmaṇaścāsmai pādalepamudāradhīḥ / abhimantrayāmāsa diśaṃ tenākhyātāñca yatnataḥ

हिन्दी अर्थ

राजा बोले--देवेश्वर! मुझे कोई पुत्र नहीं है, अतः आपकी कृपासे मुझे पुत्र प्राप्त हो। वह पुत्र समस्त शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ, अक्षय ऐश्वर्यसे युक्त, धर्मपालक तथा धर्मज्ञ हो।

English

concentrated thought. Comprehending that matter of the muni,* Kali pondered again, " I have well accomplished this,

अध्याय ६१

श्लोक 16

तेनानुलिप्तपादो ऽथ स द्विजो द्विजसत्तम ।हिमवन्तमगाद् द्रष्टुं नानाप्रस्त्रवणान्वितम्

tenānuliptapādo 'tha sa dvijo dvijasattama / himavantamagād draṣṭuṃ nānāprastravaṇānvitam

हिन्दी अर्थ

इन्द्रने 'एवमस्तु” कहकर आशीर्वाद दिया। राजाका मनोरथ पूर्ण हो गया, अब वे प्रजाका पालन करनेके लिये अपने नगरमें आये। वहाँ वे विधिपूर्वक यज्ञका अनुष्ठान तथा धर्मपूर्वक प्रजाका पालन करने लगे। उस समय इन्द्रकी कृपासे उन्हें एक पुत्र हुआ, जिसका नाम उसके पिताने बलाश्व रखा। फिर राजाने पुत्रको सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रोंकी शिक्षा दी।

English

had been rejected by her before. He beheld her in that condition. Then he pondered, " Why now is this Vartithini who moves as gracefully as an elephant, faded by the kt

अध्याय ६१

श्लोक 17

सहस्रं योजनानां हि दिनार्धेन व्रजामि यत् ।आयास्यामीति सञ्चिन्त्य तदर्धेनापरेण हि

sahasraṃ yojanānāṃ hi dinārdhena vrajāmi yat / āyāsyāmīti sañcintya tadardhenāpareṇa hi

हिन्दी अर्थ

पिताके मरनेके बाद जब बलाश्व राज्यसिंहासनपर आसीन हुए, तब उन्होंने पृथ्वीके सम्पूर्ण राजाओंको अपने वशमें कर लिया। परन्तु बहुत-से महापराक्रमी राजा, जो सब प्रकारके साधन और धनसे सम्पन्न थे, एक साथ मिल गये और उन्होंने राजा बलाश्वको उनकी राजधानीमें ही घेर लिया। नगरपर घेरा पड़ जानेसे राजा बलाश्वको बड़ा क्रोध हुआ, परन्तु

English

blast of sighing on this mountain? Has she been woonded by some muni’s curse, or has any one treated her with dis. honour, since she keeps on bedewing her face copiously with

अध्याय ६१

श्लोक 18

सम्प्राप्तो हिमवत्पृष्ठं नातिश्रान्ततनुर्द्विज ।विचचार ततस्तत्र तुहिनाचलभूतले

samprāpto himavatpṛṣṭhaṃ nātiśrāntatanurdvija / vicacāra tatastatra tuhinācalabhūtale

हिन्दी अर्थ

उनका खजाना बहुत थोड़ा रह गया था; इसलिये सैनिक बलकी कमी हो जानेसे वे अत्यन्त विकल हो गये। जब उन्हें और कोई शरण नहीं दिखायी दी, तब वे आर्त हो दोनों हाथ मुँहके आगे करके जोर-जोरसे साँस लेने लगे; फिर तो उनके हाथकी अँगुलियोंके छिद्रसे, मुखकी वायुसे प्रेरित हो सैकड़ों योद्धा, रथ, हाथी और घोड़े निकलने लगे। क्षणभरमें राजाका सारा

English

tears?" Then Kali through curiosity meditated on that matter full long, and perceived the truth by the power of

अध्याय ६१

श्लोक 19

पादाक्रान्तेन तस्याथ तुहिनेन विलीयता ।प्रक्षालितः पादलेपः परमौषधिसम्भः

pādākrāntena tasyātha tuhinena vilīyatā / prakṣālitaḥ pādalepaḥ paramauṣadhisambhaḥ

हिन्दी अर्थ

नगर बहुत बड़ी सेनासे भर गया। तब उस विशाल सेनाके साथ नगरसे बाहर निकलकर उन्होंने उन शत्रु राजाओंको परास्त किया और सबको अपने अधीन करके उनपर कर लगा दिया। करका धमन करने (हाथोंको फूँकने)-से उन्होंने शत्रुओंका दाह करनेवाली सेना उत्पन्न की थी, इसलिये वे राजा बलाश्व करन्धम कहलाने लगे। करन्धम धर्मात्मा, सब

English

concentrated thought. Comprehending that matter of the muni,* Kali pondered again, " I have well accomplished this,

अध्याय ६१

श्लोक 20

ततो जडगतिः सो ऽथ इतश्चेतश्च पर्यटन् ।ददर्शातिमनोज्ञानि सानूनि हिमभूभृतः

tato jaḍagatiḥ so 'tha itaścetaśca paryaṭan / dadarśātimanojñāni sānūni himabhūbhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणियोंके मित्र तथा तीनों लोकोंमें विख्यात थे। जब राजा सड्कटमें पड़े थे, तब साक्षात् उनके धर्मने उनके पास पहुँचकर शत्रुनाशक सेना प्रदान की थी और फिर स्वयं ही उसे अदृश्य कर दिया।

English

by reason of fortunate actions done before. Though often entreated by me who love her, she, this very maiden^ rejected

अध्याय ६१

श्लोक 21

सिद्धगन्धर्वजुष्टानि किन्नराभिरतानि च ।क्रीडाविहाररम्याणि देवादीनामितस्ततः

siddhagandharvajuṣṭāni kinnarābhiratāni ca / krīḍāvihāraramyāṇi devādīnāmitastataḥ

हिन्दी अर्थ

राजा वीर्यचन्द्रकी सुन्दरी कन्या वीराने, जो उत्तम व्रतोंका पालन करनेवाली थी, स्वयंवरमें महाराज करन्धमका वरण किया था। उसके गर्भसे महाराजने अवीक्षित नामक पुत्र उत्पन्न किया। उसके इस नामका प्रसड़ सुनो। पुत्र उत्पन्न होनेपर राजा करन्धमने उसके ग्रह आदिके विषयमें ज्योतिषियोंसे पूछा। तब ज्योतिषियोंने कहा--“महाराज!

English

me \ to-day I shall gain her. She is in love with a human being; by virtue of that fact she shall all-unsuspectingly bestow her love on me while I assume his shape. Why then do I delay? "

अध्याय ६१

श्लोक 22

दिव्याप्सरोगणशतैराकीर्णान्यवलोकयन् ।नातृप्यत द्विजश्रेष्ठः प्रोद्भूतपुलको मुने

divyāpsarogaṇaśatairākīrṇānyavalokayan / nātṛpyata dvijaśreṣṭhaḥ prodbhūtapulako mune

हिन्दी अर्थ

आपका पुत्र उत्तम मुहूर्तत, श्रेष्ठ नक्षत्र और शुभ लग्नमें उत्पन्न हुआ है; अतः यह महान्

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 23

क्वचित् प्रस्त्रवणाद् भ्रष्टजलपातमनोरमम् ।प्रनृत्यच्छिखिकेकाभिरन्यतश्च निनादितम्

kvacit prastravaṇād bhraṣṭajalapātamanoramam / pranṛtyacchikhikekābhiranyataśca nināditam

हिन्दी अर्थ

स्थानमें तथा चन्द्रमा चौथे स्थानमें रहकर इस बालकको देखते हैं। ग्यारहवें स्थानमें स्थित बुध भी इसको देखते हैं। सूर्य, मड़ल और शनैश्वरकी इसपर दृष्टि नहीं है; अत: यह सब प्रकारकी सम्पत्तियोंसे युक्त होगा।” ज्योतिषियोंकी बात सुनकर राजा करन्धमके मनमें बड़ी प्रसन्नता हुई। वे बोले--“इसे बृहस्पति और बुध देखते हैं और सूर्य, शनैश्वर एवं मड़लसे यह

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 24

दात्यूहकोयष्टिकाद्यैः क्वचिच्चातिमनोहरैः ।पुंस्कोकिलकलालापैः श्रुतिहारिभिरन्वितम्

dātyūhakoyaṣṭikādyaiḥ kvaciccātimanoharaiḥ / puṃskokilakalālāpaiḥ śrutihāribhiranvitam

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित (अदृष्ट) है; इसलिये इसका नाम “अवीक्षित' होगा।”

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 25

प्रफुल्लतरुगन्धेन वासितानिलवीजितम् ।मुदा युक्तः स ददृशे हिमवन्तं महागिरिम्

praphullatarugandhena vāsitānilavījitam / mudā yuktaḥ sa dadṛśe himavantaṃ mahāgirim

हिन्दी अर्थ

करन्धमके पुत्र अवीक्षित वेद-वेदाड़ोंके पारड्गत विद्वान् हुए। उन्होंने मुनिवर कण्वके पुत्रसे सम्पूर्ण अस्त्रविद्याकी शिक्षा ग्रहण की। वे रूपमें अश्विनीकुमार, बुद्धिमें बृहस्पति, कान्तिमें चन्द्रमा, तेजमें सूर्य, धैर्यमें समुद्र और क्षमामें पृथ्वीके समान थे। वीरतामें तो उनकी समानता करनेवाला कोई था ही नहीं। एक समयकी बात है, वे वैदिशके राजा विशालकी

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 26

दृष्ट्वा चैतं द्विजसुतो हिमवन्तं महाचलम् ।श्वो द्रक्ष्यामीति संचिन्त्य मतिञ्चक्रे गृहं प्रति

dṛṣṭvā caitaṃ dvijasuto himavantaṃ mahācalam / śvo drakṣyāmīti saṃcintya matiñcakre gṛhaṃ prati

हिन्दी अर्थ

कन्या वैशालिनीको प्राप्त करनेके लिये उसके स्वयंवरमें गये। वह सुन्दर दाँतोंवाली सुन्दरी समस्त राजाओंकी उपेक्षा करके चली जा रही थी, इतनेमें ही अवीक्षितने उसे बलपूर्वक पकड़ लिया। उन्हें अपने बलका बहुत अभिमान था। उनके इस कार्यसे अन्य समस्त राजाओंका, जो बहुत बड़ी संख्यामें एकत्रित थे, अपमान हुआ; अतः वे खिन्न होकर एक-

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 27

विभ्रष्टपादलेपो ऽथ चिरेण जडितक्रमः ।चिन्तयामास किमिदं मयाज्ञानादनुष्ठितम्

vibhraṣṭapādalepo 'tha cireṇa jaḍitakramaḥ / cintayāmāsa kimidaṃ mayājñānādanuṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

दूसरेसे कहने लगे--'“अनेक बलशाली राजाओंके होते हुए किसी एकके द्वारा नारीका अपहरण हो और आपलोग उसे क्षमा कर दें तो यह धिक्कार देनेयोग्य बात है। क्षत्रिय वह है, जो दुष्ट पुरुषोंसे सताये जानेवालेकी रक्षा करे, उसकी क्षति न होने दे। जो ऐसा नहीं करते, वे लोग इस नामको व्यर्थ ही धारण करते हैं। संसारमें कौन मनुष्य मृत्युसे नहीं डरता,

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 28

यदि प्रलेपो नष्टो मे विलीनो हिमवारिणा ।शैलो ऽतिदुर्गमश्चायं दूरञ्चाहमिहागतः

yadi pralepo naṣṭo me vilīno himavāriṇā / śailo 'tidurgamaścāyaṃ dūrañcāhamihāgataḥ

हिन्दी अर्थ

किन्तु युद्ध न करके भी कौन अमर रह गया है। यह विचारकर शस्त्रधारी क्षत्रियोंको पुरुषार्थका त्याग नहीं करना चाहिए।”'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 29

प्रयास्यामि क्रियाहानिमग्निशुश्रूषणादिकम् ।कथमत्र करिष्यामि सङ्कटं महदागतम्

prayāsyāmi kriyāhānimagniśuśrūṣaṇādikam / kathamatra kariṣyāmi saṅkaṭaṃ mahadāgatam

हिन्दी अर्थ

यह सुनकर सब राजा अमर्षमें भर गये और परस्पर सलाह करके सभी हथियार ले उठ खड़े हुए। कुछ रथोंपर जा बैठे। कुछ हाथियों और घोड़ोंपर सवार हुए तथा दूसरे कितने ही राजा कुपित हो पैदल ही अवीक्षितसे लोहा लेनेको जा पहुँचे। अवीक्षित अकेले थे। उनके विरोधमें बहुत-से राजा और राजकुमार थे। उनमें बड़ा भयड्भकर संग्राम हुआ। तलवार,

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 30

इदं रम्यमिदं रम्यमित्यस्मिन् वरपर्वते ।शक्तदृष्टिरहं तृप्तिं न यास्ये ऽब्दशतैरपि

idaṃ ramyamidaṃ ramyamityasmin varaparvate / śaktadṛṣṭirahaṃ tṛptiṃ na yāsye 'bdaśatairapi

हिन्दी अर्थ

शक्ति, गदा और धनुष-बाण लिये हुए समस्त राजा अवीक्षितपर प्रहार करने लगे तथा राजकुमार अवीक्षित भी अकेले ही उन सभी राजाओंसे भिड़ गये और सैकड़ों बाणोंसे मारकर उन्हें घायल करने लगे। अवीक्षितने किसीकी बाँह काट डाली, किसीकी गर्दन उड़ा दी, किसीकी छाती छेद डाली और किसीके वक्षमें प्रहार किया। शत्रुओंके आते हुए

English

Thou must not gaze on me wliilo we meet in union in the wood to-day; thou must close thhio eyes, 0 lady with beauti- ful brows, the while thou dost unite with me.

अध्याय ६१

श्लोक 31

किन्नराणां कलालापाः समन्ताच्छ्रोत्रहारिणः ।प्रफुल्लतरुगन्धांश्च घ्राणमत्यन्तमृच्छति

kinnarāṇāṃ kalālāpāḥ samantācchrotrahāriṇaḥ / praphullatarugandhāṃśca ghrāṇamatyantamṛcchati

हिन्दी अर्थ

बाणोंको वे बाण मारकर दो टुकड़े कर देते थे। किसीकी तलवार काट देते और किसीका धनुष खण्डित कर देते थे। कोई राजकुमार अपना कवच कट जानेके कारण पलायन कर गया। दूसरा अवीक्षितके बाणोंसे घायल होकर पैदल ही रणभूमिसे भाग गया। इस प्रकार जब राजाओंकी सारी मण्डली व्याकुल हो गयी, तब सात सौ वीर मरनेका निश्चय करके

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 32

सुखस्पर्शस्तथा वायुः फलानि रसवन्ति च ।हरन्ति प्रसभं चेतो मनोज्ञानि सरांसि च

sukhasparśastathā vāyuḥ phalāni rasavanti ca / haranti prasabhaṃ ceto manojñāni sarāṃsi ca

हिन्दी अर्थ

युद्धके लिये डट गये। उन सबको अपने उत्तम कुल, युवावस्था तथा शौर्यकी लाज रखनी

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 33

एवं गते तु पश्येयं यदि कञ्चित् तपोनिधिम् ।स ममोपदिशेन्मार्गं गमनाय गृहं प्रति

evaṃ gate tu paśyeyaṃ yadi kañcit taponidhim / sa mamopadiśenmārgaṃ gamanāya gṛhaṃ prati

हिन्दी अर्थ

थी। जब सारी सेना परास्त होकर भागने लगी तब वे ही सात सौ राजा एक साथ मिलकर अवीक्षितसे युद्ध करने लगे। अवीक्षित अत्यन्त क्रोधमें भरकर धर्मयुद्धके नियमसे लड़ने लगे। उन्होंने उन सबके हथियारों और कवचोंको काट गिराया। तब उन राजाओंने धर्मसे विमुख हो चारों ओरसे अवीक्षितको घेर लिया और सब ओरसे उन्हें हजारों बाणोंसे बींधने

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 34

मार्कण्डेय उवाच स एवं चिन्तयन् विप्रो बभ्राम च हिमाचले ।भ्रष्टपादौषधिबलो वैक्लवं परमं गतः

mārkaṇḍeya uvāca sa evaṃ cintayan vipro babhrāma ca himācale / bhraṣṭapādauṣadhibalo vaiklavaṃ paramaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

लगे। बहुतोंके प्रहारसे पीड़ित हो वे अत्यन्त व्याकुल हो उठे और अत्यन्त विह्वल होकर पृथ्वीपर गिर पड़े। इस अवस्थामें उन सबने मिलकर धर्मपूर्वक उन्हें बाँध लिया और राजा विशालके साथ वैदिश नगरमें प्रवेश किया।

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 35

तं ददर्श भ्रमन्तञ्च मुनिश्रेष्ठं वरूथिनी ।वराप्सरा महाभागा मौलेया रूपशालिनी

taṃ dadarśa bhramantañca muniśreṣṭhaṃ varūthinī / varāpsarā mahābhāgā mauleyā rūpaśālinī

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर राजा करन्धम, उनकी पत्नी वीरा तथा अन्य राजाओंने अवीक्षितके बाँधे जानेका समाचार सुना। कुछ लोगोंने करन्धमसे कहा--“महाराज! वे सभी राजा वध करनेके योग्य हैं, जिन्होंने अधिक संख्यामें सम्मिलित होकर अकेले राजकुमारको अधर्मपूर्वक बाँधा है।' दूसरे बोले--'आप चुपचाप बैठे क्‍यों हैं, शीघ्र ही सेना तैयार

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 36

तस्मिन् दृष्टे ततः साभूद् द्विजवर्ये वरूथिनी ।मदनाकृष्टहृदया सानुरागा हि तत्क्षणात्

tasmin dṛṣṭe tataḥ sābhūd dvijavarye varūthinī / madanākṛṣṭahṛdayā sānurāgā hi tatkṣaṇāt

हिन्दी अर्थ

कीजिये। दुष्ट विशालको तथा वहाँ आये हुए अन्य समस्त राजाओंको भी बाँध लीजिये।' उन सबकी यह बात सुनकर वीरपुत्रा वीराने, जो वीरवंशमें उत्पन्न एवं वीर पतिकी पत्नी थी, हर्षमें भरकर कहा--“राजाओ! मेरे पुत्रने समस्त राजाओंको जीतकर जो बलपूर्वक कन्याको अपने अधिकारमें कर लिया है, यह ठीक ही किया है। इसके लिये मनमें चिन्ता

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 37

चिन्तयामास को न्वेष रमणीयतमाकृतिः ।सफलं मे भवेज्जन्म यदि मां नावमन्यते

cintayāmāsa ko nveṣa ramaṇīyatamākṛtiḥ / saphalaṃ me bhavejjanma yadi māṃ nāvamanyate

हिन्दी अर्थ

करनेकी आवश्यकता नहीं है। उसका युद्धमें बन्दी होना प्रशंशाकी ही बात है। अब तुमलोगोंके मस्तकपर भी अस्त्र-शस्त्रोंके गिरनेका समय आ पहुँचा है। युद्धके लिये शीघ्रता करो। अपने-अपने रथोंपर सवार हो जाओ। हाथी, घोड़े और सारथियोंको भी जल्दी तैयार करो। विलम्ब नहीं होना चाहिए। जो सबको परास्त करके शोभा पाता है, वही शूर है। जैसे

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 38

अहो ऽस्य रूपमाधुर्यमहो ऽस्य ललिता गतिः ।अहो गम्भीरता दृष्टेः कुतो ऽस्य सदृशो भुवि

aho 'sya rūpamādhuryamaho 'sya lalitā gatiḥ / aho gambhīratā dṛṣṭeḥ kuto 'sya sadṛśo bhuvi

हिन्दी अर्थ

सूर्य अन्धकारको दूर करके प्रकाशित होता है, उसी प्रकार शूरवीर शत्रुओंको हराकर यशस्वी होता है।'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 39

दृष्टा देवास्तथा दैत्याः सिद्धगन्धर्वपन्नगाः ।कथमेको ऽपि नास्त्यस्य तुल्यरूपो महात्मनः

dṛṣṭā devāstathā daityāḥ siddhagandharvapannagāḥ / kathameko 'pi nāstyasya tulyarūpo mahātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार पत्नीके उत्साहित करनेपर राजा करन्धमने पुत्रके शत्रुओंका वध करनेके लिये सेनाको तैयार होनेकी आज्ञा दी। तदनन्तर उनका विशाल और उनके साथियोंके साथ घोर युद्ध हुआ। तीन दिनतक युद्ध होनेके पश्चात् विशाल और उनके सहायक राजाओंका मण्डल जब प्राय: पराजित हो गये, तब राजा विशाल हाथमें अर्घ्य लेकर महाराज

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 40

यथाहमस्मिन्मय्येष सानुरागस्तथा यदि ।भवेदत्र मया कार्यस्तत्कृतः पुण्यसञ्चयः

yathāhamasminmayyeṣa sānurāgastathā yadi / bhavedatra mayā kāryastatkṛtaḥ puṇyasañcayaḥ

हिन्दी अर्थ

करन्धमके पास आये। उन्होंने बड़े प्रेमसे करन्धमका पूजन किया। उनका पुत्र अवीक्षित बन्धनसे मुक्त कर दिया गया। राजाने एक रात वहाँ बड़े सुखसे व्यतीत की। दूसरे दिन राजा विशाल अपनी कन्याको साथ लेकर महाराज करन्धमके पास उपस्थित हुए। उस समय अवीक्षितने अपने पिताके सामने ही कहा--'मैं इसको तथा दूसरी किसी युवतीको भी अब

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 41

यद्येष मयि सुस्त्रिग्धां दृष्टिमद्य निपातयेत् ।कृतपुण्या न मत्तो ऽन्या त्रैलोक्ये वनिता ततः

yadyeṣa mayi sustrigdhāṃ dṛṣṭimadya nipātayet / kṛtapuṇyā na matto 'nyā trailokye vanitā tataḥ

हिन्दी अर्थ

नहीं ग्रहण करूँगा, क्योंकि इसके देखते-देखते शत्रुओंद्वारा युद्धमें परास्त हो गया। अब आप किसी औरके साथ इसका विवाह कर दें अथवा यह उस पुरुषका वरण करे, जिसका यश और पराक्रम अखण्डित हो तथा जिसे शत्रुओंके हाथसे अपमानित न होना पड़ा हो। पुरुष सबल होनेके कारण स्वतन्त्र होता है और स्त्रियाँ अबला होनेके कारण सदा परतलन्त्र

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 42

मार्कण्डेय उवाच एवं सञ्चिन्तयन्ती सा दिव्ययोषित् स्मरातुरा ।आत्मानं दर्शयामास कमनीयतराकृतिम्

mārkaṇḍeya uvāca evaṃ sañcintayantī sā divyayoṣit smarāturā / ātmānaṃ darśayāmāsa kamanīyatarākṛtim

हिन्दी अर्थ

रहती हैं। परन्तु जहाँ पुरुष भी दूसरेके परतन्त्र हो गया, वहाँ उसमें मनुष्यता ही क्या रह गयी। जब इसके सामने ही राजाओंने मुझे पृथ्वीपर गिरा दिया, तब अब मैं इसे अपना मुँह कैसे दिखाऊँगा?' अवीक्षितके ऐसा कहनेपर राजा विशालने अपनी पुत्रीसे कहा--“बेटी! इन महात्माकी बात तुमने सुनी है न? शुभे! जिसमें तुम्हारी रुचि हो, ऐसे किसी दूसरे

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 43

तान्तु दृष्ट्वा द्विजसुतश्चारुरूपां वरूथिनीम् ।सोपचारं समागम्य वाक्यमेतदुवाच ह

tāntu dṛṣṭvā dvijasutaścārurūpāṃ varūthinīm / sopacāraṃ samāgamya vākyametaduvāca ha

हिन्दी अर्थ

पुरुषको पतिरूपमें वरण करो अथवा हम जिसे तुम्हें दे दें, उसीका तुम आदर करो।'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 44

का त्वं कमलगर्भाभे कस्य किं वानुतिष्ठसि ।ब्राह्मणो ऽहमिहायातो नगरादरुणास्पदात्

kā tvaṃ kamalagarbhābhe kasya kiṃ vānutiṣṭhasi / brāhmaṇo 'hamihāyāto nagarādaruṇāspadāt

हिन्दी अर्थ

कन्या बोली--पिताजी! यद्यपि संग्राममें इनके यश और पराक्रमकी हानि हुई है, तथापि ये उसमें धर्मानुकूल बर्ताव करते रहे हैं। ये अकेले थे तो भी बहुतोंने मिलकर इन्हें परास्त किया है; अतः वास्तवमें इनकी पराजय हुई, यह कहना ठीक नहीं है। युद्धके लिये जब बहुत-से राजा आये, तब ये उनमें सिंहकी भाँति अकेले घुस गये और निरन्तर डटकर

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 45

पादलेपो ऽत्र मे ध्वस्तो विलीनो हिमवारिणा ।यस्यानुभावादत्राहमागतो मदिरेक्षणे

pādalepo 'tra me dhvasto vilīno himavāriṇā / yasyānubhāvādatrāhamāgato madirekṣaṇe

हिन्दी अर्थ

सामना करते रहे। इससे इनका महान् शौर्य प्रकट हुआ है। ये वीरता और पराक्रमसे युक्त होकर धर्मयुद्धमें संलग्न थे। ऐसे समयमें समस्त राजाओंने मिलकर इनपर अधर्मपूर्वक विजय पायी है। अतः इसमें इनके लिये लज्जाकी कौन-सी बात है। तात! मैं इनके रूप मात्रपर लुभा गयी हूँ, ऐसी बात नहीं है, इनकी वीरता, पराक्रम और धीरता आदि सह्गुण मेरे

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 46

वरूथिन्युवाच मौलेयाहं महाभागा नाम्ना ख्याता वरूथिनी ।विचरामि सदैवात्र रमणीये महाचले

varūthinyuvāca mauleyāhaṃ mahābhāgā nāmnā khyātā varūthinī / vicarāmi sadaivātra ramaṇīye mahācale

हिन्दी अर्थ

चित्तको चुराये लेते हैं। अतः अब अधिक कहनेकी क्या आवश्यकता है। आप मेरे लिये महाराजसे इन्हीं महानुभावकी याचना कीजिये। इनके सिवा दूसरा कोई पुरुष मेरा पति नहीं

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 47

साहं त्वद्दर्शनाद्विप्र ! कामवक्तव्यताङ्गता ।प्रशाधि यन्मया कार्यं त्वदधीनास्मि साम्प्रतम्

sāhaṃ tvaddarśanādvipra ! kāmavaktavyatāṅgatā / praśādhi yanmayā kāryaṃ tvadadhīnāsmi sāmpratam

हिन्दी अर्थ

विशालने कहा--राजकुमार! मेरी पुत्रीने बहुत अच्छी बातें कही हैं। इसमें सन्देह नहीं कि तुम्हारे-जैसा वीर कुमार इस भूतलपर दूसरा कोई नहीं है। तुम्हारे शौर्यकी कहीं समता नहीं है। तुम्हारा पराक्रम अनन्त है। वीर! तुम मेरी कन्याका पाणिग्रहण करके मेरे कुलको

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 48

ब्राह्मण उवाच येनोपायेन गच्छेयं निजगेहं शुचिस्मिते ।तन्ममाचक्ष्व कल्याणि हानिर्नो ऽखिलकर्मणाम्

brāhmaṇa uvāca yenopāyena gaccheyaṃ nijagehaṃ śucismite / tanmamācakṣva kalyāṇi hānirno 'khilakarmaṇām

हिन्दी अर्थ

तब महाराज करन्धमने अपने पुत्रको समझाते हुए कहा--“बेटा! तुम राजा विशालकी कन्याको स्वीकार करो। इस सुन्दरीका तुम्हारे प्रति अत्यन्त दृढ़ अनुराग है।'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 49

नित्यनैमित्तिकानान्तु महाहानिर्द्विजन्मनः ।भवत्यतस्त्वं हे भद्रे ! मामुद्धर हिमालयात्

nityanaimittikānāntu mahāhānirdvijanmanaḥ / bhavatyatastvaṃ he bhadre ! māmuddhara himālayāt

हिन्दी अर्थ

राजकुमारने कहा--पिताजी! मैंने पहले कभी आपकी आज्ञाका उलल्‍लड्घन नहीं किया है; अतः ऐसी आज्ञा दीजिये, जिसका मैं पालन कर सकूँ।

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 50

प्रशस्यते न प्रवासो ब्राह्मणानां कदाचम ।अपराद्धं न मे भीरु देशदर्शनकौतुकम्

praśasyate na pravāso brāhmaṇānāṃ kadācama / aparāddhaṃ na me bhīru deśadarśanakautukam

हिन्दी अर्थ

उस राजकुमारका अत्यन्त निश्चित विचार देख विशालने व्याकुल होकर अपनी कन्यासे कहा--'बेटी! अब तुम इनकी ओरसे अपना मन हटा लो और दूसरेको पतिरूपमें वरण करो। यहाँ बहुत-से राजकुमार हैं।'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 51

सतो गृहे द्विजाग्र्यस्य निष्पत्तिः सर्वकर्मणाम् ।नित्यनैमित्तिकानाञ्च हानिरेवं प्रवासिनः

sato gṛhe dvijāgryasya niṣpattiḥ sarvakarmaṇām / nityanaimittikānāñca hānirevaṃ pravāsinaḥ

हिन्दी अर्थ

कन्या बोली--पिताजी! यदि ये मुझको नहीं ग्रहण करना चाहते तो मैं तपस्या करके इन्हें अपना पति बनाऊँगी। इस जन्ममें इनके सिवा दूसरा कोई मेरा पति नहीं होगा।

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 52

सा त्वं किं बहुनोक्तेन तथा कुरु यशस्विनि ।यथा नास्तं गेत सूर्ये पश्यामि निजमालयम्

sā tvaṃ kiṃ bahunoktena tathā kuru yaśasvini / yathā nāstaṃ geta sūrye paśyāmi nijamālayam

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर राजा करन्धम राजा विशालके साथ प्रसन्नतापूर्वक तीन दिनोंतक टिके रहे, फिर अपने नगरको लौट आये। अवीक्षितको उनके पिता तथा अन्य राजाओंने प्राचीन दृष्टान्तोंके द्वारा बहुत कुछ समझाया। इससे वे भी उनके साथ नगरमें लौट आये। राजकन्या वैशालिनी अपने बन्धु-बान्धवोंसे विदा ले वनमें चली गयी और वहाँ दृढ़ वैराग्यमें स्थित हो

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 53

वरूथिन्युवाच मैवं ब्रूहि महाभाग ! मा भूत्स दिवसो मम ।मां परित्यज्य यत्र त्वं निजगेहमुपैष्यसि

varūthinyuvāca maivaṃ brūhi mahābhāga ! mā bhūtsa divaso mama / māṃ parityajya yatra tvaṃ nijagehamupaiṣyasi

हिन्दी अर्थ

निराहार रहकर तपस्या करने लगी। तीन महीनोंतक उपवास करनेके बाद उसको बड़ी पीड़ा हुई। वह अत्यन्त दुबली हो गयी और उसके शरीरकी एक-एक नाड़ी दिखायी देने लगी। उसका उत्साह मन्द पड़ गया। वह मरणासन्न हो चली। तब उस राजकुमारीने शरीर त्याग देनेका विचार किया। उसका अभिप्राय जानकर देवताओंने उसके पास एक दूत

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 54

अहो रम्यतरः स्वर्गो न यतो द्विजनन्दन ।अतो वयं परित्यज्य तिष्ठामो ऽत्र सुरालयम्

aho ramyataraḥ svargo na yato dvijanandana / ato vayaṃ parityajya tiṣṭhāmo 'tra surālayam

हिन्दी अर्थ

भेजा। दूतने वहाँ आकर कहा--'राजकुमारी! मैं देवताओंका दूत हूँ। देवताओंने तुम्हारे पास मुझे जिस कार्यके लिये भेजा है, उसे सुनो। यह मानव-शरीर अत्यन्त दुर्लभ है। तुम अकारण इसका परित्याग न करो। कल्याणी! तुम चक्रवर्ती राजाकी जननी होओगी। तुम्हारा पुत्र अपने शत्रुओंका संहार करके सात द्वीपोंसे युक्त पृथ्वीका अखण्ड राज्य

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 55

स त्वं सह मया कान्त ! कान्ते ऽत्र तुहिनाचले ।रममाणो न मर्त्यानां बान्धवानां स्मरिष्यसि

sa tvaṃ saha mayā kānta ! kānte 'tra tuhinācale / ramamāṇo na martyānāṃ bāndhavānāṃ smariṣyasi

हिन्दी अर्थ

भोगेगा। कहीं भी उसकी आज्ञाका उललड्घन न होगा। वह चारों वर्णोकी अपने-अपने धर्ममें स्थापित करके उन सबका पालन करेगा। लुटेरों, म्लेच्छों और दुष्टोंका वध करेगा। उत्तम दक्षिणाओंसे पूर्ण नाना प्रकारके यज्ञ करेगा। उसके द्वारा अश्वमेध आदि यज्ञोंका छः

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 56

स्त्रजो वस्त्राण्यलङ्कारान् भोगभोज्यानुलेपनम् ।दास्याम्यत्र तथाहन्ते स्मरेण वशगा हृता

strajo vastrāṇyalaṅkārān bhogabhojyānulepanam / dāsyāmyatra tathāhante smareṇa vaśagā hṛtā

हिन्दी अर्थ

वह दूत आकाशगमें ही खड़ा था। उसके शरीरपर दिव्य हार और चन्दन शोभा पा रहे थे। उसे इस रूपमें देख राजकन्याने कोमल वाणीमें कहा--“तुम देवताओंके दूत हो, इसमें तनिक भी सन्देह नहीं। सचमुच ही तुम स्वर्गसे यहाँ आये हो; किन्तु तुम्हीं बताओ, पतिके बिना मुझे पुत्र कैसे होगा? मैंने पिताके समीप यह प्रतिज्ञा कर ली है कि इस जन्ममें

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 57

वीणावेणुस्वनं गीतं किन्नराणां मनोरमम् ।अङ्गाह्लादकरो वायुरुष्णान्नमुदकं शुचि

vīṇāveṇusvanaṃ gītaṃ kinnarāṇāṃ manoramam / aṅgāhlādakaro vāyuruṣṇānnamudakaṃ śuci

हिन्दी अर्थ

अवीक्षितके सिवा दूसरा कोई पुरुष मेरा पति नहीं होगा; किन्तु वे अवीक्षित मेरे पिताके, अपने पिताके तथा स्वयं मेरे कहनेपर भी मुझे नहीं ग्रहण करना चाहते।'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 58

मनोभिलषिता शय्या सुगन्धमनुलेपनम् ।इहासतो महाभाग गृहे किन्ते निजे ऽधिकम्

manobhilaṣitā śayyā sugandhamanulepanam / ihāsato mahābhāga gṛhe kinte nije 'dhikam

हिन्दी अर्थ

देवदूतने कहा--'महाभागे! बहुत कहनेसे क्या लाभ है। तुम्हें पुत्र अवश्य होगा। तुम अधर्मपूर्वक इस शरीरका त्याग न करो। इसी वनमें रहो और अपने दुर्बल शरीरका पोषण करो। तपस्याके प्रभावसे तुम्हारा सब कुछ भला ही होगा।

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 59

इहासतो नैव जरा कदाचित्ते भविष्यति ।त्रिदशानामियं भूमिर्यौवनोपचयप्रदा

ihāsato naiva jarā kadācitte bhaviṣyati / tridaśānāmiyaṃ bhūmiryauvanopacayapradā

हिन्दी अर्थ

यों कहकर देवदूत जैसे आया था, लौट गया तथा वह सुन्दरी प्रतिदिन अपने शरीरका पोषण करने लगी।

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 60

इत्युक्त्वा सानुरागा सा सहसा कमलेक्षणा ।आलिलिङ्ग प्रसीदेति वदन्ती कलमुन्मनाः

ityuktvā sānurāgā sā sahasā kamalekṣaṇā / āliliṅga prasīdeti vadantī kalamunmanāḥ

हिन्दी अर्थ

उधर अवीक्षितकी वीरप्रसविनी माता वीराने किसी शुभ दिनको अपने पुत्र अवीक्षितको पास बुलाया और इस प्रकार कहा--बेटा! मैं तुम्हारे पिताकी आज्ञासे एक व्रत करूँगी। उसका नाम किमिच्छक व्रत है, किन्तु वह है बहुत दुष्कर। फिर भी उसके करनेसे कल्याण ही होगा। यदि तुम कुछ बल और पराक्रम दिखाओ तो वह अवश्य साध्य

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 61

ब्राह्मण उवाच मा मां स्प्राक्षीर्व्रजान्यत्र दुष्टे यः सदृशस्तव ।मयान्यथा याचिता त्वमन्यथैवाप्युपैषि माम्

brāhmaṇa uvāca mā māṃ sprākṣīrvrajānyatra duṣṭe yaḥ sadṛśastava / mayānyathā yācitā tvamanyathaivāpyupaiṣi mām

हिन्दी अर्थ

हो जायगा। तुम्हारे लिये वह असाध्य हो या दुःसाध्य, यदि तुम उसके लिये प्रतिज्ञा कर लोगे तो मैं उसका अनुष्ठान आरम्भ कर दूँगी। अब तुम्हारा जो विचार हो, सो कहो।'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 62

सायं प्रातर्हुतं हव्यं लोकान् यच्छति शाश्वतान् ।त्रैलोक्यमेतदखिलं मूढे इव्ये प्रतिष्ठितम्

sāyaṃ prātarhutaṃ havyaṃ lokān yacchati śāśvatān / trailokyametadakhilaṃ mūḍhe ivye pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित बोले--माँ! यदि पिताजीने तुम्हें आज्ञा दे दी है तो तुम निश्चिन्त होकर किमिच्छक व्रतका अनुष्ठान करो। मनमें किसी प्रकारकी चिन्ता न करो।

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 63

वरूथिन्युवाच किं ते नाहं प्रिया विप्र ! रमणीयो न किं गिरिः ।गन्धर्वान् किन्नरादींश्च त्यक्त्वाभीष्टो हि कस्तव

varūthinyuvāca kiṃ te nāhaṃ priyā vipra ! ramaṇīyo na kiṃ giriḥ / gandharvān kinnarādīṃśca tyaktvābhīṣṭo hi kastava

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर महारानी वीराने उपवासपूर्वक उस व्रतका आरम्भ किया तथा शास्त्रोंमें बताये अनुसार कुबेरकी, सम्पूर्ण निधियोंकी, निधिपालगणकी और लक्ष्मीजीकी बड़ी भक्तिके

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 64

निजमालयमप्यस्माद्भवान् यास्यत्यसंशयम् ।स्वल्पकालं मया सार्धं भुङ्क्षव भोगान् सुदुर्लभान्

nijamālayamapyasmādbhavān yāsyatyasaṃśayam / svalpakālaṃ mayā sārdhaṃ bhuṅkṣava bhogān sudurlabhān

हिन्दी अर्थ

साथ पूजा की। उन्होंने अपने मन, वाणी और शरीरको काबूमें कर लिया था। इधर महाराज करन्धम जब एकान्त घरमें बैठे हुए थे, उस समय नीति-शास्त्र-विशारद मन्त्रियोंने उनके पास जाकर कहा--'राजन्! इस पृथ्वीका शासन करते हुए आपकी वृद्धावस्था आ गयी। आपके एक ही पुत्र हैं अवीक्षित, जिन्होंने स्त्रीका सम्पर्क ही छोड़ दिया है; इससे आपका

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 66

ब्राह्मण उवाच अष्टावात्मगुणा ये हि तेषामादौ दया द्विज ।तां करोषि कथं न त्वं मयि सद्धर्मपालक

brāhmaṇa uvāca aṣṭāvātmaguṇā ye hi teṣāmādau dayā dvija / tāṃ karoṣi kathaṃ na tvaṃ mayi saddharmapālaka

हिन्दी अर्थ

वंश अब लुप्त हो जायगा। पितरोंको पिण्ड और पानी देनेवाला कोई नहीं रहेगा। अतः आप ऐसा कोई यत्न कीजिये, जिससे आपका पुत्र पितरोंका उपकार करनेवाली बुद्धि ग्रहण करे --विवाह करनेपर राजी हो जाय।!

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 67

त्वद्विमुक्ता न जीवामि तथा प्रीतिमती त्वयि ।नैतद्वदाम्यहं मिथ्या प्रसीद कुलनन्दन

tvadvimuktā na jīvāmi tathā prītimatī tvayi / naitadvadāmyahaṃ mithyā prasīda kulanandana

हिन्दी अर्थ

इसी समय राजा करन्धमके कानोंमें एक आवाज आयी। रानी वीराके पुरोहित याचकोंसे कह रहे थे, “कौन कया चाहता है? किसके लिये कौन-सी वस्तु दुःसाध्य है, जिसका साधन किया जाय? महाराज करन्धमकी रानी किमिच्छक व्रतका अनुष्ठान करती हैं; अत: जिसकी जो इच्छा हो, वह पूर्ण की जायगी।” पुरोहितकी बात सुनकर राजकुमार

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 68

ब्राह्मण उवाच यदि प्रीतिमती सत्यं नोपचाराद्ब्रवीषि माम् ।तदुपायं समाचक्ष्व येन यामि स्वमालयम्

brāhmaṇa uvāca yadi prītimatī satyaṃ nopacārādbravīṣi mām / tadupāyaṃ samācakṣva yena yāmi svamālayam

हिन्दी अर्थ

अवीक्षितने भी राजद्वारपर आये हुए समस्त याचकोंसे कहा--“मेरी परम सौभाग्यवती माता किमिच्छक-व्रत कर रही हैं; अतः मेरे शरीरसे किसीका कोई कार्य सिद्ध होनेवाला हो तो वह बतलावे। सब याचक सुन लें, मैं प्रतिज्ञापूर्वक कहता हूँ। इस किमिच्छक-व्रतके अनुष्ठानके अवसरपर तुमलोग क्या चाहते हो, बताओ! उसे मैं दूँगा।'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 69

वरूथिन्युवाच निजमालयमप्यस्माद्भवान् यास्यत्यसंशयम् ।स्वल्पकालं मया सार्धं भुङ्क्ष्व भोगान् सुदुर्लभान्

varūthinyuvāca nijamālayamapyasmādbhavān yāsyatyasaṃśayam / svalpakālaṃ mayā sārdhaṃ bhuṅkṣva bhogān sudurlabhān

हिन्दी अर्थ

अपने बेटेके मुखसे यह बात सुनकर महाराज करन्धम तुरंत सामने आये और बोले

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 70

ब्राह्मण उवाच न भोगार्थाय विप्राणां शस्यते हि वरूथिनी ।इह क्लेशाय विप्राणां चेष्टा प्रेत्याफलप्रदा

brāhmaṇa uvāca na bhogārthāya viprāṇāṃ śasyate hi varūthinī / iha kleśāya viprāṇāṃ ceṣṭā pretyāphalapradā

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित बोले--तात! आपको क्‍या देना है? बतलाइये। मेरा कर्तव्य दुष्कर हो, साध्य हो अथवा अत्यन्त दुःसाध्य हो; बताइये मैं उसे पूर्ण करूँगा।

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 71

वरूथिन्युवाच सन्त्राणं म्रियमाणाया मम कृत्वा परत्र ते ।पुण्यस्यैव फलं भावि भोगाश्चान्यत्र जन्मनि

varūthinyuvāca santrāṇaṃ mriyamāṇāyā mama kṛtvā paratra te / puṇyasyaiva phalaṃ bhāvi bhogāścānyatra janmani

हिन्दी अर्थ

राजाने कहा--यदि तुम सत्यप्रतिज्ञ हो और सबको इच्छानुसार दान देते हो तो मेरी गोदमें पौत्रका मुँह दिखाओ।

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 72

एवं च द्वयमप्यत्र तवोपचयकारणम् ।प्रत्याख्यानादहं मृत्युं त्वञ्च पापमवाप्स्यसि

evaṃ ca dvayamapyatra tavopacayakāraṇam / pratyākhyānādahaṃ mṛtyuṃ tvañca pāpamavāpsyasi

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित बोले--महाराज! मैं आपका एक ही पुत्र हूँ और ब्रह्मचर्यका पालन मेरा व्रत है। मेरे कोई पुत्र है ही नहीं, फिर आपको पौत्रका मुख कैसे दिखाऊँ?

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 73

ब्राह्मण उवाच परस्त्रियं नाभिलषेदित्युचुर्गुरवो मम ।तेन त्वां नाभिवाञ्छामि कामं विलप शुष्य वा

brāhmaṇa uvāca parastriyaṃ nābhilaṣedityucurguravo mama / tena tvāṃ nābhivāñchāmi kāmaṃ vilapa śuṣya vā

हिन्दी अर्थ

राजाने कहा--बहुत कहनेसे क्‍या लाभ, तुम ब्रह्मचर्यको छोड़ो और अपनी माताके इच्छानुसार मुझे पौत्रका मुख दिखाओ।

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 74

मार्कण्डेय उवाच इत्युक्त्वा स महाभागः स्पृष्ट्वापः प्रयतः शुचिः ।प्राहेदं प्रणिपत्याग्निं गार्हपत्यमुपांशुना

mārkaṇḍeya uvāca ityuktvā sa mahābhāgaḥ spṛṣṭvāpaḥ prayataḥ śuciḥ / prāhedaṃ praṇipatyāgniṃ gārhapatyamupāṃśunā

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी कहते हैं--जब पुत्रके बहुत कहनेपर भी राजाने दूसरी कोई वस्तु नहीं माँगी, तब उन्होंने कहा--'पिताजी! मैं आपको किमिच्छक दान देकर बड़े सड़कटमें पड़ गया। अब निर्लज्ज होकर फिर विवाह करूँगा। स्त्रीके सामने परास्त हुआ और पृथ्वीपर गिराया गया; फिर भी मुझे स्त्रीका स्वामी बनना पड़ेगा, यह बड़ा ही दुष्कर कर्म है। तथापि

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 75

भगवन् ! गार्हपत्याग्ने योनिस्त्वं सर्वकर्मणाम् ।त्वत्त आहवनीयो ऽग्निर्दक्षिणाग्निश्च नान्यतः

bhagavan ! gārhapatyāgne yonistvaṃ sarvakarmaṇām / tvatta āhavanīyo 'gnirdakṣiṇāgniśca nānyataḥ

हिन्दी अर्थ

मैं क्या करूँ, सत्यके बन्धनमें बँधा हूँ। आपने जो आज्ञा दी है, वह करूँगा।'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 76

युष्मदाप्यायनाद् देवा वृष्टिशस्यादिहेतवः ।भवन्ति शस्यादखिलं जगद्भवति नान्यतः

yuṣmadāpyāyanād devā vṛṣṭiśasyādihetavaḥ / bhavanti śasyādakhilaṃ jagadbhavati nānyataḥ

हिन्दी अर्थ

एक दिन राजकुमार अवीक्षित शिकार खेलनेके लिये वनमें गये। वहाँ वे हरिण, वराह तथा व्याप्र आदि जन्तुओंको अपने बाणोंका निशाना बनाने लगे। इतनेमें ही उन्हें सहसा किसी स्त्रीके रोनेका शब्द सुनायी दिया। वह भयसे गद्गदवाणीमें उच्चस्वरसे बार-बार क्रन्दन

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 77

एवं त्वत्तो भवत्येतद्येन सत्येन वै जगत् ।तथाहमद्य स्वं गेहं पश्येयं सति भास्करे

evaṃ tvatto bhavatyetadyena satyena vai jagat / tathāhamadya svaṃ gehaṃ paśyeyaṃ sati bhāskare

हिन्दी अर्थ

करती हुई त्राहि-त्राहिकी रट लगा रही थी। राजकुमार अवीक्षितने “मत डरो, मत डरो' ऐसा कहते हुए अपने घोड़ेको उसी ओर बढ़ाया, जिधरसे वह शब्द आ रहा था। उस निर्जन वनमें दनुके पुत्र दृढ़केशके द्वारा पकड़ी गयी वह कन्या विलाप करती हुई कह रही थी, “मैं महाराज करन्धमके पुत्र अवीक्षितकी पत्नी हूँ, किन्तु यह नीच दानव मुझे हरकर लिये

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 78

यथा वै वैदिकं कर्म स्वकाले नोज्झितं मया ।तेन सत्येन पश्येयं गृहस्थो ऽद्य दिवाकरम्

yathā vai vaidikaṃ karma svakāle nojjhitaṃ mayā / tena satyena paśyeyaṃ gṛhastho 'dya divākaram

हिन्दी अर्थ

जाता है। जिन महाराजके समक्ष समस्त राजा, गन्धर्व तथा गुह्मक भी खड़े होनेकी शक्ति नहीं रखते, जिनका क्रोध मृत्यु और पराक्रम इन्द्रके समान है, उन्हींकी पुत्रवधू होकर आज मैं एक दानवके द्वारा हरी जा रही हूँ।'

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

अध्याय ६१

श्लोक 79

यथा च न परद्रव्ये परदारे च मे मतिः ।कदाचित् साभिलाषाभूत्तथैतत् सिद्धिमेतु मे

yathā ca na paradravye paradāre ca me matiḥ / kadācit sābhilāṣābhūttathaitat siddhimetu me

हिन्दी अर्थ

वह इस प्रकार कह-कहकर रो ही रही थी कि राजकुमार अवीक्षित तुरंत वहाँ जा पहुँचे। उन्होंने देखा, एक अत्यन्त मनोहर कन्या है, जो सब प्रकारके आभूषणोंसे शोभा पा रही है और हाथमें डंडा लिये दनु-पुत्र दृढ़केशने उसे पकड़ रखा है तथा वह करुण स्वरमें “त्राहि-त्राहि' पुकार रही है। यह देखकर अवीक्षितने उससे कहा--“तुम भय न करो।” फिर

English

So be it as t is good to thee! As thou wishest, so let it be! Truly I must remain submissive to thee now in every way,

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 61
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.