अध्याय ६२
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणेठब्राह्मणवाक्यम्ऽ नामैकषष्टितमो ऽध्यायः द्विषष्टितमो ऽध्यायः- ६२ मार्कण्डेय उवाच एवन्तु वदतस्तस्य द्विजपुत्रस्य पावकः ।गार्हपत्यः शरीरे तु सन्निधानमथाकरोत्
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇeṭhabrāhmaṇavākyam' nāmaikaṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ dviṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ- 62 mārkaṇḍeya uvāca evantu vadatastasya dvijaputrasya pāvakaḥ / gārhapatyaḥ śarīre tu sannidhānamathākarot
हिन्दी अर्थ
उस दानवसे कहा--'ओ दुष्ट! अब तू मारा जायगा। भूमण्डलके समस्त राजा जिनके प्रतापके सामने मस्तक झुकाते हैं, उन महाराज करन्धमके राज्यमें कौन दुष्ट जीवित रह सकता है।” राजकुमारको श्रेष्ठ धनुष लिये आया देख वह कृशाड़ी युवती बार-बार कहने लगी, “आप मुझे बचाइये। यह दुष्ट मुझे हरकर लिये जाता है। मैं महाराज करन्धमकी
English
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