Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
62
अध्याय 62 / 90

Adhyaya 62

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अध्याय ६२

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणेठब्राह्मणवाक्यम्ऽ नामैकषष्टितमो ऽध्यायः द्विषष्टितमो ऽध्यायः- ६२ मार्कण्डेय उवाच एवन्तु वदतस्तस्य द्विजपुत्रस्य पावकः ।गार्हपत्यः शरीरे तु सन्निधानमथाकरोत्

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇeṭhabrāhmaṇavākyam' nāmaikaṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ dviṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ- 62 mārkaṇḍeya uvāca evantu vadatastasya dvijaputrasya pāvakaḥ / gārhapatyaḥ śarīre tu sannidhānamathākarot

हिन्दी अर्थ

उस दानवसे कहा--'ओ दुष्ट! अब तू मारा जायगा। भूमण्डलके समस्त राजा जिनके प्रतापके सामने मस्तक झुकाते हैं, उन महाराज करन्धमके राज्यमें कौन दुष्ट जीवित रह सकता है।” राजकुमारको श्रेष्ठ धनुष लिये आया देख वह कृशाड़ी युवती बार-बार कहने लगी, “आप मुझे बचाइये। यह दुष्ट मुझे हरकर लिये जाता है। मैं महाराज करन्धमकी

English

have ’ T dictionary,

अध्याय ६२

श्लोक 2

तेन चाधिष्ठितः सो ऽथ प्रभामण्डलमध्यगः ।व्यदीपयत तं देशं मूर्तिमानिव हव्यवाट्

tena cādhiṣṭhitaḥ so 'tha prabhāmaṇḍalamadhyagaḥ / vyadīpayata taṃ deśaṃ mūrtimāniva havyavāṭ

हिन्दी अर्थ

पुत्रवधू और अवीक्षितकी पत्नी हूँ। सनाथ हूँ तो भी इस वनमें यह दुष्ट मुझे अनाथकी भाँति हरकर लिये जाता है।'

English

lord. I am the daughter of the Vidya-dhara Mandara,’ famed by name as Vibha-vari.t 0 my benefactor, I offer thee

अध्याय ६२

श्लोक 3

तस्यास्तु सुतरां तत्र तादृग्रूपे द्विजन्मनि ।अनुरागो ऽभवद्विप्रं पश्यन्त्या देवयोषितः

tasyāstu sutarāṃ tatra tādṛgrūpe dvijanmani / anurāgo 'bhavadvipraṃ paśyantyā devayoṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

यह सुनकर अवीक्षित उसकी बातपर विचार करने लगे--“यह किस प्रकार मेरी भार्या तथा पिताजीकी पुत्रवधू हुई? अथवा इस समय तो इसे छुड़ाऊँ, फिर समझ लूँगा। पीड़ितोंकी रक्षा करनेके लिये ही क्षत्रिय हथियार धारण करते हैं।” ऐसा निश्चय करके वीर अवीक्षितने उस खोटी बुद्धिवाले दानवसे कुपित होकर कहा--पापी! यदि जीवित रहना

English

my very self, do thou accept me. And I will give thee knowledge, by which the utterances of all created things shall become manifest to thee. Be thou favourably inclined! "

अध्याय ६२

श्लोक 4

ततः सो ऽधिष्ठितस्तेन हव्यवाहेन तत्क्षणात् ।यथापूर्वं तथा गन्तुं प्रवृत्तो द्विजनन्दनः

tataḥ so 'dhiṣṭhitastena havyavāhena tatkṣaṇāt / yathāpūrvaṃ tathā gantuṃ pravṛtto dvijanandanaḥ

हिन्दी अर्थ

चाहता है तो इसे छोड़कर चला जा; अन्यथा तेरे प्राण नहीं बचेंगे।! इतना सुनते ही वह दानव उस कन्याको छोड़कर डंडेको ऊपर उठा अवीक्षितकी ओर दौड़ा। तब उन्होंने भी बाणोंकी वर्षासे उसे ढँक दिया। दानव दृढ़केश अत्यन्त मदसे मतवाला हो रहा था। राजकुमारके बाणोंसे रोके जानेपर भी उसने सौ कीलोंसे युक्त वह डंडा उनपर दे मारा;

English

" So be it! " said S v^a-rodis, wise in righteousness. And then

अध्याय ६२

श्लोक 5

जगाम च त्वरायुक्तस्तया देव्या निरीक्षितः ।आदृष्टिपातात्तन्वङ्ग्या निश्वासोत्कम्पिकन्धरम्

jagāma ca tvarāyuktastayā devyā nirīkṣitaḥ / ādṛṣṭipātāttanvaṅgyā niśvāsotkampikandharam

हिन्दी अर्थ

किन्तु राजकुमारने अपनी ओर आते हुए उस डंडेके बाण मारकर टुकड़े-टुकड़े कर दिये। फिर दानवने कुपित होकर राजकुमारपर जो-जो हथियार चलाया, वह सब उन्होंने अपने बाणोंसे काट गिराया। डंडे और हथियारोंके कट जानेपर उसे बड़ा क्रोध हुआ और वह मुक्का तानकर राजकुमारकी ओर दौड़ा। पास आते ही राजकुमारने वेतसपत्र नामक

English

the Vedas and VedAiigas. Formerly in a spring-time, which was charming by reason of the songs of the male koils, an Apsaras known as Punjika-stana approached near him.

अध्याय ६२

श्लोक 6

ततः क्षणेनैव तदा निजगेहमवाप्य सः ।यथाप्रोक्तं द्विजश्रेष्ठश्चकार सकलाः क्रियाः

tataḥ kṣaṇenaiva tadā nijagehamavāpya saḥ / yathāproktaṃ dvijaśreṣṭhaścakāra sakalāḥ kriyāḥ

हिन्दी अर्थ

बाणसे उसका मस्तक काट गिराया। इस प्रकार उस दुराचारी दानवके मारे जानेपर समस्त

English

the Vedas and VedAiigas. Formerly in a spring-time, which was charming by reason of the songs of the male koils, an Apsaras known as Punjika-stana approached near him.

अध्याय ६२

श्लोक 7

अथ सा चारुसर्वाङ्गी तत्रासक्तात्ममानसा ।निश्वासपरमा निन्ये दिनशेषं तथा निशाम्

atha sā cārusarvāṅgī tatrāsaktātmamānasā / niśvāsaparamā ninye dinaśeṣaṃ tathā niśām

हिन्दी अर्थ

पिताका प्रिय करनेकी इच्छासे एक महापराक्रमी पुत्र माँगा।

English

Then the noble muni was moved so that he could not but speak of love. By their union I was born of her on this great

अध्याय ६२

श्लोक 8

निश्वसन्त्यनवद्याङ्गी हाहेति रुदती मुहुः ।मन्दभाग्येति चात्मानं निनिन्द मदिरेक्षणा

niśvasantyanavadyāṅgī hāheti rudatī muhuḥ / mandabhāgyeti cātmānaṃ nininda madirekṣaṇā

हिन्दी अर्थ

तुम्हें महाबली चक्रवर्ती पुत्रकी प्राप्ति होगी।

English

mountain. My mother abandoned mo, a girl, all alone, in this desolate forest on the earth’s surface, which swarms with

अध्याय ६२

श्लोक 9

न विहारे न चाहारे रमणीये न वा वने ।न कन्दरेषु रम्येषु सा बबन्ध तदा रतिम्

na vihāre na cāhāre ramaṇīye na vā vane / na kandareṣu ramyeṣu sā babandha tadā ratim

हिन्दी अर्थ

राजकुमारने कहा--देवगण! राजाओंसे परास्त होनेपर मैंने विवाहका विचार छोड़ दिया था, किन्तु पिताद्वारा सत्यके बन्धनमें बाँधे जानेपर मैं अब पुत्रकी अभिलाषा करता हूँ। पहले राजा विशालकी कन्याको मैंने त्याग दिया था, किन्तु उसने मेरे ही लिये दूसरे किसी पुरुषको पति बनानेका विचार छोड़ रखा है। अतः उस त्यागमयी देवीको छोड़कर

English

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अध्याय ६२

श्लोक 10

चकार रममाणे च चक्रवाकयुगे स्पृहाम् ।मुक्ता तेन वरारोहा निनिन्द निजयौवनम्

cakāra ramamāṇe ca cakravākayuge spṛhām / muktā tena varārohā nininda nijayauvanam

हिन्दी अर्थ

क्रूरहृदय हो मैं दूसरी स्त्रीको कैसे अपनी पत्नी बना सकूँगा?

English

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अध्याय ६२

श्लोक 11

क्वागताहमिमं शैलं दुष्टदैवबलात्कृता ।क्व च प्राप्तः स मे दृष्टेर्गोचरं तादृशो नरः

kvāgatāhamimaṃ śailaṃ duṣṭadaivabalātkṛtā / kva ca prāptaḥ sa me dṛṣṭergocaraṃ tādṛśo naraḥ

हिन्दी अर्थ

प्रशंसा करते हो। यह सुन्दरी तुम्हारे लिये ही तप करती रही है। इसके गर्भसे तुम्हारे चक्रवर्ती एवं वीर पुत्र उत्पन्न होगा। वह सातों द्वीपोंका शासक तथा सहखौरों यज्ञोंका अनुष्ठान करनेवाला होगा।

English

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अध्याय ६२

श्लोक 12

यद्यद्य स महाभागो न मे सङ्गमुपैष्यति ।तत्कामाग्निरवश्यं मां क्षपयिष्यति दुः सहः

yadyadya sa mahābhāgo na me saṅgamupaiṣyati / tatkāmāgniravaśyaṃ māṃ kṣapayiṣyati duḥ sahaḥ

हिन्दी अर्थ

करन्धम-कुमार अवीक्षितसे यों कहकर समस्त देवता वहाँसे चले गये। तब उन्होंने उस सत्रीसे कहा--भीरु! कहो तो यह क्या बात है! तब वैशालिनीने अपना वृत्तान्त सुनाना आरम्भ किया--'नाथ! आपने जब मुझे त्याग दिया तो इस जीवनसे वैराग्य हो गया और मैं बन्धु-बान्धवोंको छोड़कर वनमें चली आयी। वीर! यहाँ तपस्या करते-करते मैंने अपना

English

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अध्याय ६२

श्लोक 13

रमणीयमभूद्यत्तत्पुंस्कोकिलनिनादितम् ।तेन हीनन्तदेवैतद्दहतीवाद्य मामलम्

ramaṇīyamabhūdyattatpuṃskokilanināditam / tena hīnantadevaitaddahatīvādya māmalam

हिन्दी अर्थ

शरीर सुखा दिया और तब इसे त्याग देनेको उद्यत हो गयी। इसी समय देवताओंके दूतने आकर मुझे रोका और कहा--तुम्हें महाबलवान् चक्रवर्ती पुत्र प्राप्त होगा, जो देवताओंको तृप्त करेगा और असुरोंका संहार करेगा।” इस प्रकार देवदूतने जब देवताओंकी आज्ञा सुनायी, तब आपके समागमकी आशासे मैंने इस देहका त्याग नहीं किया।'

English

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अध्याय ६२

श्लोक 14

मार्कण्डेय उवाच इत्थं सा मदनाविष्टा जगाम मुनिसत्तम ।ववृधे च तदा रागस्तस्यास्तस्मिन् प्रतिक्षणम्

mārkaṇḍeya uvāca itthaṃ sā madanāviṣṭā jagāma munisattama / vavṛdhe ca tadā rāgastasyāstasmin pratikṣaṇam

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी कहते हैं--वैशालिनीके ये वचन सुनकर तथा किमिच्छक व्रतमें की हुई प्रतिज्ञेक समय पिताके कहे हुए उत्तम वचनोंका स्मरण करके अवीक्षितने उस कन्यासे प्रेमपूर्वक कहा--“देवि! उस समय शत्रुओंसे पराजित होनेके कारण मैंने तुम्हारा त्याग किया था और अब फिर शत्रुओंको जीतकर ही तुम्हें पाया है। अब बताओ, क्या करूँ?!

English

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अध्याय ६२

श्लोक 15

कलिर्नाम्ना तु गन्धर्वः सानुरागो निराकृतः ।तया पूर्वमभूत्सो ऽथ तदवस्थां ददर्श ताम्

kalirnāmnā tu gandharvaḥ sānurāgo nirākṛtaḥ / tayā pūrvamabhūtso 'tha tadavasthāṃ dadarśa tām

हिन्दी अर्थ

इसी अवसरपर मय नामक गन्धर्व श्रेष्ठ अप्सराओं तथा अन्य गन्धर्वोके साथ वहाँ आया।

English

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अध्याय ६२

श्लोक 16

स चिन्तयामास तदा किं न्वेषा गजगामिनी ।निश्वासपवनम्लाना गिरावत्र वरूथिनी

sa cintayāmāsa tadā kiṃ nveṣā gajagāminī / niśvāsapavanamlānā girāvatra varūthinī

हिन्दी अर्थ

गन्धर्व बोला--राजकुमार! यह कन्या वास्तवमें मेरी पुत्री भामिनी है। महर्षि अगस्त्यके शापसे यह राजा विशालकी पुत्री हुई थी। बचपनमें खेलते समय इसने अगस्त्य मुनिको कुपित कर दिया था। तब उन्होंने शाप देते हुए कहा--'जा, तू मनुष्य-योनिमें उत्पन्न होगी।' तब हमलोगोंने मुनिको प्रसन्न करते हुए कहा--“ब्रह्मर्ष! अभी यह निरी बालिका है,

English

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अध्याय ६२

श्लोक 17

मुनिशापक्षता किंनु केनचित् किं विमानिता ।वाष्पवारिपरिक्लिन्नमियन्धत्ते यतो मुखम्

muniśāpakṣatā kiṃnu kenacit kiṃ vimānitā / vāṣpavāripariklinnamiyandhatte yato mukham

हिन्दी अर्थ

इसे भले-बुरेका विवेक नहीं है, तभी इसके द्वारा आपका अपराध बन गया है। अत: इसके ऊपर कृपा कीजिये।” तब उन महामुनिने कहा--“बालिका समझकर ही मैंने इसे बहुत थोड़ा शाप दिया है। अब यह टल नहीं सकता।” यही महर्षिका शाप था, जिससे यह मेरी पुत्री भामिनी राजा विशालके भवनमें उत्पन्न हुई। इसके लिये ही मैं यहाँ उपस्थित हुआ हूँ।

English

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अध्याय ६२

श्लोक 18

ततः स दध्यौ सुचिरं तमर्थं कौतुकात् कलिः ।ज्ञातवांश्च प्रभावेण समाधेः स यथातथम्

tataḥ sa dadhyau suciraṃ tamarthaṃ kautukāt kaliḥ / jñātavāṃśca prabhāveṇa samādheḥ sa yathātatham

हिन्दी अर्थ

आप मेरी इस कन्याको ग्रहण कीजिये। इससे आपको चक्रवर्ती पुत्रकी प्राप्ति होगी।

English

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अध्याय ६२

श्लोक 19

पुनः स चिन्तयामास तद्विज्ञाय मुनेः कलिः ।ममोपपादितं साधु भाग्यैरेतत्पुराकृतैः

punaḥ sa cintayāmāsa tadvijñāya muneḥ kaliḥ / mamopapāditaṃ sādhu bhāgyairetatpurākṛtaiḥ

हिन्दी अर्थ

तब “बहुत अच्छा” कहकर राजकुमारने विधिपूर्वक उसका पाणिग्रहण किया। उस समय वहाँ तुम्बुरु मुनिने हवन किया। देवता और गन्धर्व गीत गाते रहे। मेघोंने फूलोंकी वर्षा की और देवताओंके बाजे बजते रहे। विवाहके पश्चात् दोनों दम्पति महात्मा मयके साथ गन्धर्वलोकमें गये। अवीक्षित अपनी पत्नीके साथ कभी अत्यन्त रमणीय नगरोद्यानमें और

English

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अध्याय ६२

श्लोक 20

मयैषा सानुरागेण बहुशः प्रार्थिता सती ।निराकृतवती सेयमद्य प्राप्या भविष्यति

mayaiṣā sānurāgeṇa bahuśaḥ prārthitā satī / nirākṛtavatī seyamadya prāpyā bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

कभी पर्वतकी उपत्यकामें विहार करने लगे। वहाँ मुनि, गन्धर्व और किन्नरलोग उन दोनोंके लिये भोजनकी सामग्री, चन्दन, वस्त्र, माला तथा पीनेयोग्य पदार्थ आदि उत्तम वस्तुएँ प्रस्तुत किया करते थे। मनुष्योंके लिये दुर्लभ गन्धर्वलोकमें अवीक्षित इस प्रकार भामिनीके साथ विहार करते रहे। कुछ समयके बाद भामिनीने वीर अवीक्षितके पुत्रको जन्म दिया।

English

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अध्याय ६२

श्लोक 21

मानुषे सानुरागेयं तत्र तद्रूपधारिणि ।रंस्यते मय्यसन्दिग्धं किं कालेन करोमि तत्

mānuṣe sānurāgeyaṃ tatra tadrūpadhāriṇi / raṃsyate mayyasandigdhaṃ kiṃ kālena karomi tat

हिन्दी अर्थ

उस महापराक्रमी पुत्रका जन्म होनेपर उससे कार्यसिद्धिकी अपेक्षा रखनेवाले गन्धर्वोंके यहाँ बड़ा भारी उत्सव हुआ। उसमें सब देवता तथा निर्मल देवर्षि भी पधारे। पातालसे नागराज शेष, वासुकि और तक्षक भी आये। देवता, असुर, यक्ष और गुह्यकोंमें जो-जो प्रधान थे, वे सब उपस्थित हुए। सभी मरुठ्वण भी पधारे थे। तुम्बुस़ने उस बालकका

English

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अध्याय ६२

श्लोक 22

मार्कण्डेय उवाच आत्मप्रभावेण ततस्तस्य रूपं द्विजन्मनः ।कृत्वा चचार यत्रास्ते निषण्णा सा वरूथिनी

mārkaṇḍeya uvāca ātmaprabhāveṇa tatastasya rūpaṃ dvijanmanaḥ / kṛtvā cacāra yatrāste niṣaṇṇā sā varūthinī

हिन्दी अर्थ

जातकर्म आदि करके स्तुतिपूर्वक स्वस्तिवाचन किया और कहा--'आयुष्मन्! तुम चक्रवर्ती, महापराक्रमी, महाबाहु एवं महाबलवान् होकर समस्त पृथ्वीका शासन करो। वीर! ये इन्द्र आदि लोकपाल तथा महर्षि तुम्हारा कल्याण करें और तुम्हें शत्रुनाशक शक्ति प्रदान करें। पूर्व दिशामें बहनेवाले मरुतू, जिनमें धूलका समावेश नहीं होता, तुम्हारा

English

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अध्याय ६२

श्लोक 23

सा तं दृष्ट्वा वरारोहा किञ्चिदुत्फुल्ललोचना ।समेत्य प्राह तन्वङ्गी प्रसीदेति पुनः पुनः

sā taṃ dṛṣṭvā varārohā kiñcidutphullalocanā / sametya prāha tanvaṅgī prasīdeti punaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

कल्याण करें। दक्षिण दिशाके निर्मल मस्त् तुम्हें स्वस्थ रखें। पश्चिमके मरुत् उत्तम पराक्रम दें तथा उत्तरके मस्त् तुम्हें उत्कृष्ट बल प्रदान करें।'

English

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अध्याय ६२

श्लोक 24

त्वया त्यक्ता न सन्देहः परित्यक्ष्यामि जीवितम् ।तत्राधर्मः कष्टतरः क्रियालोपो भविष्यति

tvayā tyaktā na sandehaḥ parityakṣyāmi jīvitam / tatrādharmaḥ kaṣṭataraḥ kriyālopo bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार स्वस्त्ययनके पश्चात् आकाशवाणी हुई, “पुरोहितने “मरुत् तव” (मरुत् तुम्हारा कल्याण करें)-का अनेक बार प्रयोग किया है, इसलिये यह बालक पृथ्वीपर “मरुत्त' के नामसे विख्यात होगा। भूमण्डलके सभी राजा इसकी आज्ञाके अधीन रहेंगे और यह वीर सब राजाओंका सिरमौर बना रहेगा। अन्य भूपालोंको जीतकर यह महापराक्रमी चक्रवर्ती

English

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अध्याय ६२

श्लोक 25

मया समेत्य रम्ये ऽस्मिन् महाकन्दरकन्दरे ।मत्परित्राणजं धर्ममवश्यं प्रतिपत्स्यसे

mayā sametya ramye 'smin mahākandarakandare / matparitrāṇajaṃ dharmamavaśyaṃ pratipatsyase

हिन्दी अर्थ

होगा और सात द्वीपोंवाली समूची पृथ्वीका उपभोग करेगा। यज्ञ करनेवाले राजाओंमें यह प्रधान होगा तथा समस्त नरेशोंमें इसका शौर्य और पराक्रम सबसे अधिक होगा।'

English

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अध्याय ६२

श्लोक 26

आयुषः सावशेषं मे नृनमस्ति महामते ।निवृत्तस्तेन नूनं त्वं हृदयाह्लादकारकः

āyuṣaḥ sāvaśeṣaṃ me nṛnamasti mahāmate / nivṛttastena nūnaṃ tvaṃ hṛdayāhlādakārakaḥ

हिन्दी अर्थ

बालकके माता-पिता बहुत प्रसन्न हुए। तदनन्तर राजकुमार अवीक्षित अपने प्रिय पुत्रको गोदमें ले गन्धवोके साथ ही अपने पिताके नगरमें आये। पिताके घरमें पहुँचकर उन्होंने उनके चरणोंमें आदरपूर्वक मस्तक झुकाया तथा लज्जावती भागिनीने भी श्वशुरके चरणोंमें प्रणाम किया। उस समय राजा करन्धम धर्मासनपर विराजमान थे। अवीक्षितने पुत्रको

English

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अध्याय ६२

श्लोक 27

कलिरुवाच किं करोमि क्रियाहानिर्भवत्यत्र सतो मम ।त्वमप्येवंविधं वाक्यं ब्रवीषि तनुमध्यमे

kaliruvāca kiṃ karomi kriyāhānirbhavatyatra sato mama / tvamapyevaṃvidhaṃ vākyaṃ bravīṣi tanumadhyame

हिन्दी अर्थ

लेकर कहा--'पिताजी! माताके किमिच्छक-त्रतमें मैंने जो प्रतिज्ञा की थी, उसके अनुसार अब आप गोदमें लेकर इस पौत्रका मुख देखिये।” यों कहकर उन्होंने पिताकी गोदमें बालकको रख दिया और उसके जन्मका सारा वृत्तान्त ठीक-ठीक कह सुनाया। राजा करन्धमके नेत्रोंमें आनन्दके आँसू छलक आये। उन्होंने पौत्रको छातीसे लगाकर अपने

English

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अध्याय ६२

श्लोक 28

तदहं सङ्कटं प्राप्तो यद्ब्रवीमि करोषि तत् ।यदि स्यात् सङ्गमो मे ऽद्य भवत्या सह नान्यथा

tadahaṃ saṅkaṭaṃ prāpto yadbravīmi karoṣi tat / yadi syāt saṅgamo me 'dya bhavatyā saha nānyathā

हिन्दी अर्थ

भाग्यकी प्रशंसा करते हुए कहा--'मैं बड़ा ही सौभाग्यशाली हूँ।” इसके बाद उन्होंने वहाँ आये हुए गन्धर्वोका अर्घ्य आदिके द्वारा सत्कार किया। उस समय उनको और किसी बातकी याद नहीं रही! उस नगरमें, पुरवासियोंके घर-घरमें महान् आनन्द छा गया। सब प्रसन्न होकर कहते थे--“हमारे महाराजके पोता हुआ है।” राजा करन्धमने हर्षमग्न होकर

English

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अध्याय ६२

श्लोक 29

वरूथिनी उवाच प्रसीद यद्ब्रवीषि त्वं तत्करोमि न ते मृषा ।ब्रवीम्येतदनाशङ्कं यत्ते कार्यं मयाधुना

varūthinī uvāca prasīda yadbravīṣi tvaṃ tatkaromi na te mṛṣā / bravīmyetadanāśaṅkaṃ yatte kāryaṃ mayādhunā

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणोंको रत्न, धन, गौ, वस्त्र और आभूषण दान किये। वह बालक शुक्ल पक्षके चन्द्रमाकी भाँति प्रतिदिन बढ़ने लगा। उसे देखकर पिता आदिको बड़ी प्रसन्नता होती थी। वह सब लोगोंका प्यारा था। कुछ बड़ा होनेपर उपनयनके बाद उसने आचार्योंके पास रहकर पहले वेदोंकी, फिर समस्त शास्त्रोंकी तथा अन्तमें धनुर्वेदकी शिक्षा ग्रहण की।

English

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अध्याय ६२

श्लोक 30

कलिरुवाच नाद्य संभोगसमये द्रष्टव्यो ऽहं त्वया वने ।निमीलिताक्ष्याः संसर्गस्तव सुभ्रु मया सह

kaliruvāca nādya saṃbhogasamaye draṣṭavyo 'haṃ tvayā vane / nimīlitākṣyāḥ saṃsargastava subhru mayā saha

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् भृगुपुत्र शुक्राचार्यसे अन्यान्य अस्त्रविद्याओंका ज्ञान प्राप्त किया। वह गुरुके समक्ष विनीतभावसे मस्तक झुकाता तथा सदा उन्हें प्रसन्न रखनेकी चेष्टामें संलग्न रहता था। वह अस्त्रविद्याका ज्ञाता, वेदका विद्वान, थनुर्वेदमें पारड़त तथा सब विद्याओंमें निष्णात था। उस समय मरुत्तसे बढ़कर दूसरा कोई नहीं था।

English

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अध्याय ६२

श्लोक 31

वरूथिन्युवाच एवं भवतु भद्रन्ते यथेच्छसि तथास्तु तत् ।मया सर्वप्रकारं हि वशे स्थेयं तवाधुना

varūthinyuvāca evaṃ bhavatu bhadrante yathecchasi tathāstu tat / mayā sarvaprakāraṃ hi vaśe stheyaṃ tavādhunā

हिन्दी अर्थ

राजा विशालको भी जब अपनी पुत्रीका सारा समाचार ज्ञात हुआ तथा दौहित्रकी उत्तम योग्यता सुनायी पड़ी, तब उनका मन आनन्दमें निमग्न हो गया। पौत्रको देखनेसे महाराज करन्धमका मनोरथ पूर्ण हो गया। उन्होंने अनेक यज्ञ किये और याचकोंको बहुत दान दिये। तदनन्तर वन जानेके लिये उत्सुक होकर उन्होंने अपने पुत्र अवीक्षितसे कहा

English

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स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 62
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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