Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
63
अध्याय 63 / 90

Adhyaya 63

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अध्याय ६३

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे स्वारोचिषे मन्वन्तरे द्विषष्टितमो ऽध्यायः ।त्रिषष्टितमो ऽध्यायः- ६३ मार्कण्डेय उवाच ततः सह तथा सो ऽथ रराम गिरिसानुषु ।फुल्लकाननहृद्येषु मनोज्ञेषु सरः सु च

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe svārociṣe manvantare dviṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ / triṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ- 63 mārkaṇḍeya uvāca tataḥ saha tathā so 'tha rarāma girisānuṣu / phullakānanahṛdyeṣu manojñeṣu saraḥ su ca

हिन्दी अर्थ

--बेटा! मैं बूढ़ा हो गया, अब वनमें तपस्याके लिये जाऊँगा। तुम मुझसे यह राज्य ले लो। मैं कृतकृत्य हूँ। तुम्हारा राजतिलक करनेके अतिरिक्त दूसरा कोई कार्य शेष नहीं है।” यह सुनकर राजकुमार अवीक्षितने बड़ी नम्नताके साथ पितासे कहा--“तात! मैं पृथ्वीका पालन नहीं कर सकूँगा। मेरे मनसे लज्जा अभी दूर नहीं होती। आप इस राज्यपर किसी औरको

English

Then he, lustrous as the immortals, accompanied by wives, lived in pleasure on that high mountain whei’e were

अध्याय ६३

श्लोक 2

कन्दरेषु च रम्येषु निम्नगापुलिनेषु च ।मनोज्ञेषु तथान्येषु देशेषु मुदितो द्विज

kandareṣu ca ramyeṣu nimnagāpulineṣu ca / manojñeṣu tathānyeṣu deśeṣu mudito dvija

हिन्दी अर्थ

नियुक्त कीजिये। मैं बन्धनमें पड़नेपर पिताके हाथों मुक्त हुआ हूँ, अपने बलसे नहीं। अतः मुझमें क्या पौरुष है। जिनमें पौरुष हो, वे ही इस पृथ्वीका पालन कर सकते हैं। जब मैं अपनी भी रक्षा करनेमें समर्थ नहीं हूँ, तब इस पृथ्वीकी रक्षा कैसे कर सकूँगा। इसलिये राज्य किसी औरको दे दीजिये।'

English

charming woods and cascades. The Nidhis * being snbject through th9 knowledge Padmini, brought gems for every kind

अध्याय ६३

श्लोक 3

वह्निनाधिष्ठितस्यासीद् यद्रूपन्तस्य तेजसा ।अचिन्तयद्भोगकाले निमीलितविलोचना

vahninādhiṣṭhitasyāsīd yadrūpantasya tejasā / acintayadbhogakāle nimīlitavilocanā

हिन्दी अर्थ

पिता बोले--बेटा! पुत्रके लिये पिता और पिताके लिये पुत्र भिन्न नहीं है। यदि पिताने तुम्हें बन्धनसे छुड़ाया तो यही मानना चाहिए कि किसी दूसरेने नहीं छुड़ाया है।

English

of enjoyment, sweets and melodies, garlands, raiment, omaraonts, richly scented unguent, most brilliant golden

अध्याय ६३

श्लोक 4

ततः कालेन सा गर्भमवाप मुनिसत्तम ।गन्धर्ववीर्यतो रूपचिन्तनाच्च द्विजन्मनः

tataḥ kālena sā garbhamavāpa munisattama / gandharvavīryato rūpacintanācca dvijanmanaḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्रने कहा--महाराज! मेरे हृदयका भाव बदल नहीं सकता। जो पिताकी कमायी हुई सम्पत्ति भोगता है, जो पिताके बलसे ही संकटसे उद्धार पाता है तथा पिताके नामपर ही जिसकी ख्याति होती है, अपने गुणोंसे नहीं--ऐसा मनुष्य कभी कुलमें उत्पन्न न हो। जो स्वयं ही धनका उपार्जन करते, स्वयं ख्याति पाते और स्वयं ही संकटोंसे मुक्त होते हैं, ऐसे

English

seats according to his desire, golden things (illustrious Sir!),

अध्याय ६३

श्लोक 5

तां गर्भधारिणीं सो ऽथ सान्त्वयित्वा वरूथिनीम् ।विप्ररूपधरो यातस्तया प्रीत्या विसर्जितः

tāṃ garbhadhāriṇīṃ so 'tha sāntvayitvā varūthinīm / viprarūpadharo yātastayā prītyā visarjitaḥ

हिन्दी अर्थ

पुरुषोंकी जो गति होती है, वही मेरी भी हो।

English

aV.'** beloved by them; these women are only just

अध्याय ६३

श्लोक 6

जज्ञे स बालो द्युतिमान ज्वलन्निव विभावसुः ।स्वरोचिभैर्यथा सूर्यो भासयन् सकला दिशः

jajñe sa bālo dyutimāna jvalanniva vibhāvasuḥ / svarocibhairyathā sūryo bhāsayan sakalā diśaḥ

हिन्दी अर्थ

पिताके बहुत कहनेपर भी जब अवीक्षित पूर्वोक्त उत्तर ही देते चले गये, तब महाराज करन्धमने उनके पुत्र मरुत्तको ही राजा बना दिया। पिताकी आज्ञाके अनुसार पितामहसे

English

with Im lustre. And they enjoyed supreme delight, for that ilmjwere with him, sporting on that high mountain even as in Svarga.

अध्याय ६३

श्लोक 7

स्वरोचिभिर्यतो भाति भास्वानिव स बालकः ।ततः स्वरोचिरित्येवं नाम्ना ख्यातो बभूत सः

svarocibhiryato bhāti bhāsvāniva sa bālakaḥ / tataḥ svarocirityevaṃ nāmnā khyāto babhūta saḥ

हिन्दी अर्थ

राज्य पाकर मरुत्त अपने सुहृदोंका आनन्द बढ़ाते हुए उसका भलीभाँति पालन करने लगे। राजा करन्धम अपनी पत्नी वीराको साथ ले वनमें तपस्याके लिये चले गये। वहाँ मन, वाणी और शरीरको संयममें रखकर उन्होंने एक हजार वर्षोतक दुष्कर तपस्या की और अन्तमें शरीर त्यागकर वे इन्द्रलोकमें चले गये। उनकी पत्नी वीराने सौ वर्ष बादतक कठोर तप

English

A grey lag-goose t said to a hen-dakra-vdka who was in some water, being moved to desire at the dalliance and union

अध्याय ६३

श्लोक 8

ववृधे च महाभागो वयसानुदिनन्तथा ।गुणौघैश्च यथा बालः कलाभिः शशलाञ्छनः

vavṛdhe ca mahābhāgo vayasānudinantathā / guṇaughaiśca yathā bālaḥ kalābhiḥ śaśalāñchanaḥ

हिन्दी अर्थ

किया। उसके सिरपर जटाएँ बढ़ी हुई थीं, शरीरपर मैल जम गयी थी। वह स्वर्गमें गये हुए अपने महात्मा पतिका सालोक्य चाहती हुई फल-मूलका आहार करके भार्गवके आश्रमपर तपस्या करती थी। ब्राह्मणोंकी स्त्रियोंमें रहकर उनकी सेवामें तत्पर रहती थी।

English

between him and those two mres— "Happy is this man, exceeding merit has he, who in the heyday of youth enjoys’

अध्याय ६३

श्लोक 9

स जग्राह धनुर्वेदं वेदांश्चैव यथाक्रमम् ।विद्याश्चैव महाभागस्तदा यौवनगोचरः

sa jagrāha dhanurvedaṃ vedāṃścaiva yathākramam / vidyāścaiva mahābhāgastadā yauvanagocaraḥ

हिन्दी अर्थ

क्रौष्टकि बोले--भगवन्! आपने करन्धम और अवीक्षितके चरित्रका मुझसे विस्तारपूर्वक वर्णन किया। अब मैं अवीक्षितकुमार महात्मा मरुत्तका चरित्र सुनना चाहता हूँ। सुना जाता है, उनका चरित्र अलौकिक था। वे चक्रवर्ती, महान् सौभाग्यशाली, शूरवीर, सुन्दर, परम बुद्धिमान, धर्मज्ञ, धर्मात्मा तथा पृथ्वीका धर्मपूर्वक पालन करनेवाले थे।

English

eagerly-dosired delights with these darling wives. Young men are worthy of praise, their wives are not of exceeding beauty; few are the wives and husbands of exceeding beauty

अध्याय ६३

श्लोक 10

मन्दराद्रौ कदाचित् स विचरंश्चारुचेष्टितः ।ददर्शैकां तदा कन्यां गिरिप्रस्थे भयातुराम्

mandarādrau kadācit sa vicaraṃścāruceṣṭitaḥ / dadarśaikāṃ tadā kanyāṃ giriprasthe bhayāturām

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजीने कहा--पिताके आदेशसे पितामहका राज्य पाकर मरुत्त जिस प्रकार पिता अपने औरस पुत्रोंकी रक्षा करता है, उसी प्रकार प्रजाजनोंका धर्मपूर्वक पालन करने लगे। ऋत्विजों और पुरोहितके आदेशसे प्रसन्न होकर बहुत-से यज्ञोंका विधिपूर्वक अनुष्ठान किया और उनमें प्रचुर दक्षिणाएँ दीं। उनका शासन-चक्र सातों द्वीपोंमें अबाधरूपसे फैला

English

the gods and perished*. I was about to destroy myself tte from excessive despair. S'ambhu’s wife Sati who is true

अध्याय ६३

श्लोक 11

त्रायस्वेति निरीक्ष्यैनं सा तदा वाक्यमब्रवीत् ।मा भैषीरिति स प्राह भयविप्लुतलोचनाम्

trāyasveti nirīkṣyainaṃ sā tadā vākyamabravīt / mā bhaiṣīriti sa prāha bhayaviplutalocanām

हिन्दी अर्थ

हुआ था। आकाश, पाताल और जल आदियमें भी उनकी गति कुण्ठित नहीं होती थी। राजा तो यज्ञ करते ही थे, चारों वर्णोंके अन्य लोग भी अपने-अपने कर्ममें आलस्य छोड़कर संलग्न रहते और महाराजसे धन प्राप्त कर इष्टापूर्त आदि पुण्य क्रियाएँ करते थे। राजा मरुत्तने सौ यज्ञ करके देवराज इन्द्रको भी मात कर दिया। उनके पुरोहित अड्डिरानन्दन

English

her promises prevented me, by saying ^ ‘ Grieve not, beauteous browed maiden; thou shalt have an illustrious husband by

अध्याय ६३

श्लोक 12

किमेतदिति तेनोक्ते वीरवाक्ये महात्मना ।ततः सा कथयामास श्वासाक्षेपप्लुताक्षरम्

kimetaditi tenokte vīravākye mahātmanā / tataḥ sā kathayāmāsa śvāsākṣepaplutākṣaram

हिन्दी अर्थ

संवर्तजी थे, जो बृहस्पतिजीके भाई एवं तपस्याके भण्डार थे। मुञ्जवान् नामसे प्रसिद्ध एक सोनेका पर्वत था, जहाँ देवता निवास करते थे। महाराज मरुत्तने उसका शिखर तोड़कर गिरा दिया और उसे अपने यहाँ मँगा लिया। उसके द्वारा उन्होंने यज्ञकी सब सामग्री--भू- विभाग और महल आदि सोनेके ही बनवाये। सदा स्वाध्याय करनेवाले महर्षि मरुत्तके

English

the gods and perished*. I was about to destroy myself tte from excessive despair. S'ambhu’s wife Sati who is true

अध्याय ६३

श्लोक 13

कन्योवाच अहमिन्दीवराख्यस्य सुता विद्याधरस्य वै ।नाम्ना मनोरमा जाता सुतायां मरुधन्वनः

kanyovāca ahamindīvarākhyasya sutā vidyādharasya vai / nāmnā manoramā jātā sutāyāṃ marudhanvanaḥ

हिन्दी अर्थ

चरित्रके विषयमें सदा यह गाथा गाते रहते हैं--“महाराज मरुत्तके समान यजमान इस भूतलपर दूसरा कोई नहीं हुआ, जिनके यज्ञमें समस्त यज्ञमण्डप और महल सुवर्णके ही बने थे; उसमें ब्राह्मण पर्याप्त दक्षिणा पाकर तृप्त हो गये। इन्द्र आदि श्रेष्ठ देवता उसमें ब्राह्मगोंको भोजन परोसनेका काम करते थे। राजा मरुत्तके यज्ञमें जैसा समारोह था, वैसा

English

her promises prevented me, by saying ^ ‘ Grieve not, beauteous browed maiden; thou shalt have an illustrious husband by

अध्याय ६३

श्लोक 14

मन्दारविद्याधरजा सखी मम विभावरी ।कलावती चाप्यपरा सुता पारस्य वै मुनेः

mandāravidyādharajā sakhī mama vibhāvarī / kalāvatī cāpyaparā sutā pārasya vai muneḥ

हिन्दी अर्थ

किस राजाके यज्ञमें हुआ है, जहाँ रत्नोंसे घर भरा रहनेके कारण ब्राह्मणोंने दक्षिणामें मिला हुआ सारा सुवर्ण त्याग दिया। उस छोड़े हुए धनको पाकर कितने ही लोगोंका मनोरथ पूरा हो गया और वे भी उसी धनसे अपने-अपने देशमें पृथक्ू-पृथक् अनेक यज्ञ करने लगे।'

English

name ^va-rodis, and thy son by him shall be a Manu

अध्याय ६३

श्लोक 15

ताभ्यां सह मया यातं कैलासतटमुत्तमम् ।तत्र दृष्टो मुनिः कश्चित्तपसातिकृशाकृतिः

tābhyāṃ saha mayā yātaṃ kailāsataṭamuttamam / tatra dṛṣṭo muniḥ kaścittapasātikṛśākṛtiḥ

हिन्दी अर्थ

मुनिश्रेष्ठ! इस प्रकार न्यायपूर्वक प्रजाका पालन करनेवाले राजा मरुत्तके पास एक दिन कोई तपस्वी आया और इस प्रकार कहने लगा--“महाराज! आपकी पितामही वीरा देवीने तपस्वियोंको मदोन्मत्त सर्पोके विषसे पीड़ित देख आपके पास यह सन्देश दिया है

English

one! Take, my child, the knowledge by the power of which thou shalt succeed; this knowledge is called Padmini, it jg

अध्याय ६३

श्लोक 16

क्षुत्क्षामकण्ठो निस्तेजा दूरपाताक्षितारकः ।मयावहसितः क्रुद्धः स तदा मां शशाप ह

kṣutkṣāmakaṇṭho nistejā dūrapātākṣitārakaḥ / mayāvahasitaḥ kruddhaḥ sa tadā māṃ śaśāpa ha

हिन्दी अर्थ

--'राजन! तुम्हारे पितामह स्वर्गवासी हो गये। मैं और्व मुनिके आश्रमपर रहकर तपस्या करती हूँ। मुझे तुम्हारे राज्य-शासनमें बहुत बड़ी त्रुटि दिखायी देती है। पातालसे सर्पोने आकर यहाँ दस मुनिकुमारोंको डँस लिया है तथा जलाशयोंके जलको भी दूषित कर दिया है। ये पसीने, मूत्र और विषछ्ठासे हविष्यको दूषित कर देते हैं। यहाँके महर्षि इन सबको भस्म

English

greatly worshipped by Maha-padma.* So spake to me Daksha’s daughter Sati, who is devoted to truth. Thou art

अध्याय ६३

श्लोक 17

क्षामक्षामस्वरः किञ्चित्कल्पिताधरपल्लवः ।त्वयावहसितो यस्मादनार्ये दुष्टतापसि

kṣāmakṣāmasvaraḥ kiñcitkalpitādharapallavaḥ / tvayāvahasito yasmādanārye duṣṭatāpasi

हिन्दी अर्थ

कर डालनेकी शक्ति रखते हैं, किन्तु किसीको दण्ड देनेका अधिकार इनका नहीं है। इसके अधिकारी तो तुम्हीं हो। राजकुमारोंको तभीतक भोगजनित सुखकी प्राप्ति होती है, जबतक उनके मस्तकपर राज्याभिषेकका जल नहीं पड़ता। कौन मित्र हैं, कौन शत्रु हैं, मेरे शत्रुका बल कितना है, मैं कौन हूँ? मेरे मन्त्री कौन हैं, मेरे पक्षमें कौन-कौन-से राजा हैं, वे

English

Sva-rodis in sooth — the goddess will not speak amiss. I now offer that knowledge and myself in my true form to thee who hast given me life; do thou receive them with favour beaming from tliy face on mo.’’

अध्याय ६३

श्लोक 18

तस्मात् त्वामचिरेणैव राक्षसो ऽभिभविष्यसि ।दत्ते शापे मत्सखीभ्यां स तु निर्भत्सितो मुनिः

tasmāt tvāmacireṇaiva rākṣaso 'bhibhaviṣyasi / datte śāpe matsakhībhyāṃ sa tu nirbhatsito muniḥ

हिन्दी अर्थ

मुझसे विरक्त हैं या अनुरक्त? शत्रुओंने उन्हें फोड़ तो नहीं लिया है? शत्रुपक्षके लोगोंकी भी क्या स्थिति है, मेरे इस नगर अथवा राज्यमें कौन मनुष्य श्रेष्ठ है, कौन धर्म-कर्मका आश्रय लेता है, कौन मूढ़ है तथा किसका बर्ताव उत्तम है, किसको दण्ड देना चाहिए, कौन पालन करने योग्य है, किन मनुष्योंपर सदा मुझे दृष्टि रखनी चाहिए--इन सब बातोंपर सदा विचार

English

" So be it! " said he to the maiden KaU-vati. The loving glances of Vibha-vari and Kald-vati urged him on to joy,

अध्याय ६३

श्लोक 19

धिक् ते ब्राह्मण्यमक्षान्त्या हृतन्ते निखिलन्तपः ।अमर्षणैर्धर्षितो ऽसि तपसा नातिकर्षितः

dhik te brāhmaṇyamakṣāntyā hṛtante nikhilantapaḥ / amarṣaṇairdharṣito 'si tapasā nātikarṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

करते रहना राजाका कर्तव्य है। देश-कालकी अवस्थापर दृष्टि रखनेवाले राजाको उचित है कि वह सब ओर कई गुप्तचर लगाये रखे। वे गुप्तचर परस्पर एक-दूसरेसे परिचित न हों। उनके द्वारा यह जाननेकी चेष्टा करे कि कोई राजा अपने साथ की हुई सन्धिको भंग तो नहीं करता। राजा अपने समस्त मन्त्रियोंपर भी गुप्तचर लगा दे। इन सब कार्योमें सदा मन

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 20

क्षान्त्यास्पदं वै ब्राह्मण्यं क्रोधसंयमनन्तपः ।एतच्छ्रुत्वा ददौ शापं तयोरप्यमितद्युतिः

kṣāntyāspadaṃ vai brāhmaṇyaṃ krodhasaṃyamanantapaḥ / etacchrutvā dadau śāpaṃ tayorapyamitadyutiḥ

हिन्दी अर्थ

लगाते हुए राजा अपना समय व्यतीत करे। उसे दिन-रात भोगासक्त नहीं होना चाहिए। भूपाल! राजाओंका शरीर भोग भोगनेके लिये नहीं होता, वह तो पृथ्वी और स्वधर्मके पालनपूर्वक भारी क्लेश सहन करनेके लिये मिलता है। राजन! पृथ्वी और स्वधर्मका भलीभाँति पालन करते समय जो इस लोकमें महान् कष्ट होता है, वही स्वर्गमें अक्षय एवं

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 21

एकस्याः कुष्ठमङ्गेषु भाव्यन्यस्यास्तथा क्षयः ।तयोस्तथैव तज्जातं यथोक्तं तेन तत्क्षणात्

ekasyāḥ kuṣṭhamaṅgeṣu bhāvyanyasyāstathā kṣayaḥ / tayostathaiva tajjātaṃ yathoktaṃ tena tatkṣaṇāt

हिन्दी अर्थ

महान् सुखकी प्राप्ति करानेवाला होता है। अतः नरेश्वर! तुम इस बातको समझो और भोगोंका त्याग करके पृथ्वीका पालन करनेके लिये कष्ट उठाना स्वीकार करो। तुम्हारे शासन-कालमें ऋषियोंको सर्पोकी ओरसे जो भारी संकट प्राप्त हुआ है, उसे तुम नहीं जानते। मालूम होता है तुम गुप्तचररूपी नेत्रसे अन्धे हो। अधिक कहनेसे क्या लाभ, तुम

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 22

ममाप्येवं महद्रक्षः समुपैति पदानुगम् ।न शृणोषि महानादं तस्यादूरे ऽपि गर्जतः

mamāpyevaṃ mahadrakṣaḥ samupaiti padānugam / na śṛṇoṣi mahānādaṃ tasyādūre 'pi garjataḥ

हिन्दी अर्थ

दुष्टोंको दण्ड दो और सज्जन पुरुषोंका पालन करो। इससे तुम प्रजाके धर्मके छठे अंशके भागी हो सकोगे। यदि तुम प्रजाजनोंकी रक्षा नहीं करोगे तो दुष्टलोग उद्ण्डतावश जो कुछ भी पाप करेंगे, वह सब तुम्हींको भोगना पड़ेगा--इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है। अब तुम्हारी जैसी इच्छा हो वह करो।” महाराज! आपकी पितामहीने जो कुछ कहा था, वह सब

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 23

तृतीयमद्य दिवसं यन्मे पृष्ठन्न मुञ्चति ।अस्त्रग्रामस्य सर्वस्य हृदज्ञाहमद्य ते

tṛtīyamadya divasaṃ yanme pṛṣṭhanna muñcati / astragrāmasya sarvasya hṛdajñāhamadya te

हिन्दी अर्थ

मैंने सुना दिया। अब आपकी जैसी रुचि हो, वैसा करें।”

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 24

ते प्रयच्छामि मां रक्ष रक्षसो ऽस्मान्महामते ।प्रादात् स्वायम्भुवस्यादौ स्वयं रुद्रः पिनाकधृक्

te prayacchāmi māṃ rakṣa rakṣaso 'smānmahāmate / prādāt svāyambhuvasyādau svayaṃ rudraḥ pinākadhṛk

हिन्दी अर्थ

तपस्वीकी यह बात सुनकर राजा मरुत्तको बड़ी लज्जा हुई, “सचमुच ही मैं गुप्तचररूपी नेत्रसे अन्धा हूँ। मुझे धिक्‍्कार है"--यों कहकर लंबी साँस ले उन्होंने धनुष उठाया और तुरंत ही और्वके आश्रमपर पहुँचकर अपनी पितामही वीराको तथा अन्यान्य तपस्वी महात्माओंको प्रणाम किया। उन सबने आशीर्वाद देकर राजाका अभिनन्दन किया।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 25

स्वायम्भुवो वसिष्ठाय सिद्धवर्याय दत्तवान् ।तेनापि दत्तं मन्मातुः पित्रे चित्रायुधाय वै

svāyambhuvo vasiṣṭhāya siddhavaryāya dattavān / tenāpi dattaṃ manmātuḥ pitre citrāyudhāya vai

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् सर्पोंके काटनेसे मरकर पृथ्वीपर पड़े हुए सात तपस्वियोंको देख उन सबके सामने मरुत्तने बारंबार अपनी निन्‍्दा की और कहा--'मेरे पराक्रमकी अवहेलना करके ब्राह्मणोंके साथ द्वेष करनेवाले दुष्ट सर्पोंकी मैं जो दुर्दशशा करूँगा, उसे देवता, असुर और

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 26

प्रादादौद्वाहिकं सो ऽपि मत्पित्रे श्वशुरः स्वयम् ।मयापि शिक्षितं वीर ! सकाशाद् बालया पितुः

prādādaudvāhikaṃ so 'pi matpitre śvaśuraḥ svayam / mayāpi śikṣitaṃ vīra ! sakāśād bālayā pituḥ

हिन्दी अर्थ

यों कहकर राजाने कुपित हो पाताललोक-निवासी सम्पूर्ण नागोंका संहार करनेके लिये संवर्तक नामक अस्त्र उठाया। तब उस महान् अस्त्रके तेजसे सारा नागलोक सब ओरसे सहसा जल उठा। उस समय जो घबराहट हुई, उसमें नागोंके मुखसे “हा तात! हा माता! हा वत्स!” की पुकार सुनायी देती थी। किन्हींके पूँछ जलने लगे और किन्हींके फण। कुछ सर्प

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 27

हृदयं सकलास्त्राणामशेषरिपुनाशनम् ।तदिदं गृह्यतां शीघ्रमशेषास्त्रपरायणम्

hṛdayaṃ sakalāstrāṇāmaśeṣaripunāśanam / tadidaṃ gṛhyatāṃ śīghramaśeṣāstraparāyaṇam

हिन्दी अर्थ

अपने वस्त्र और आभूषण छोड़कर स्त्री-पुत्रोंकोी साथ ले पाताल त्यागकर मरुत्तकी माता भामिनीकी शरणमें गये, जिसने पूर्वकालमें उन्हें अभय दान दे रखा था। भामिनीके पास पहुँचकर भयसे व्याकुल हुए समस्त सर्पोने प्रणामपूर्वक गद्गदवाणीमें कहा--“वीरजननी! आजसे पहले रसातलमें हमलोंगोंने जो आपका सत्कार किया था और आपने हमें अभय-

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 28

ततो जहि दुरात्मानमेनं राक्षसमागतम्

tato jahi durātmānamenaṃ rākṣasamāgatam

हिन्दी अर्थ

दान दिया, उसके पालनका यह समय आ पहुँचा है। हमारी रक्षा कीजिये। यशस्विनि! आपके पुत्र मरुत्त अपने अस्त्रके तेजसे हमलोगोंको दग्ध कर रहे हैं। इस समय आपके सिवा और कोई हमें शरण देनेवाला नहीं है। आप हमपर कृपा कीजिये।'

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 29

मार्कण्डेय उवाच तथैत्युक्ते ततस्तेन वार्युपस्पृश्य तस्य तत् ।अस्त्राणां हृदयं प्रादात् सरहस्यनिवर्तनम्

mārkaṇḍeya uvāca tathaityukte tatastena vāryupaspṛśya tasya tat / astrāṇāṃ hṛdayaṃ prādāt sarahasyanivartanam

हिन्दी अर्थ

सर्पोंकी यह बात सुनकर और पहले अपने दिये हुए वचनको याद करके साध्वी भामिनीने तुरंत ही अपने पतिसे कहा--“नाथ! मैं पहले ही आपको यह बात बता चुकी हूँ कि नागोंने पातालमें मेरा सत्कार करके मेरे पुत्रसे प्राप्त होनेवाले भयकी चर्चा की थी और मैंने इनकी रक्षाका वचन दिया था। आज ये भयभीत होकर मेरी शरणमें आये हैं। मरुत्तके

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 30

एतस्मिन्नन्तरे रक्षस्तत्तदा भीषणाकृति ।नर्दमानं महानादमाजगाम त्वरान्वितम्

etasminnantare rakṣastattadā bhīṣaṇākṛti / nardamānaṃ mahānādamājagāma tvarānvitam

हिन्दी अर्थ

अस्त्रसे ये सब लोग दग्ध हो रहे हैं। जो मेरे शरणागत हैं, वे आपके भी हैं; क्योंकि मेरा धर्मांचरण आपसे पृथक् नहीं है तथा मैं स्वयं भी आपकी शरणमें हूँ। अत: आप अपने पुत्र मरुत्तको आदेश देकर रोकिये, मैं भी उससे अनुरोध करूँगी। मेरा विश्वास है, वह अवश्य

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 31

मयाभिभूता किं त्राणमुपैषि द्रुतमेहि मे ।भक्षामि किञ्चिरेणेति ब्रुवाणं तं ददर्श सः

mayābhibhūtā kiṃ trāṇamupaiṣi drutamehi me / bhakṣāmi kiñcireṇeti bruvāṇaṃ taṃ dadarśa saḥ

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित बोले--देवि! निश्चय ही किसी भारी अपराधके कारण मरुत्त कुपित हुआ है, अतः मैं तुम्हारे पुत्रका क्रोध शान्त करना कठिन मानता हूँ।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 32

स्वरोचिश्चिन्तयामास दृष्ट्वा तं समुपागतम् ।गृह्णात्वेष वचः सत्यं तस्यास्त्विति महामुनेः

svarociścintayāmāsa dṛṣṭvā taṃ samupāgatam / gṛhṇātveṣa vacaḥ satyaṃ tasyāstviti mahāmuneḥ

हिन्दी अर्थ

नागोंने कहा--राजन्! हम आपकी शरणमें आये हैं। आप हमपर कृपा करें। पीड़ितोंकी रक्षा करनेके लिये ही क्षत्रियलोग शस्त्र धारण करते हैं।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 33

जग्राह समुपेत्यैनां त्वरया सो ऽपि राक्षसः ।त्राहि त्राहीति करुणं विलपन्तीं सुमध्यमाम्

jagrāha samupetyaināṃ tvarayā so 'pi rākṣasaḥ / trāhi trāhīti karuṇaṃ vilapantīṃ sumadhyamām

हिन्दी अर्थ

शरण चाहनेवाले नागोंकी यह बात सुनकर तथा पत्नीके प्रार्थना करनेपर महायशस्वी अवीक्षितने कहा--'मैं तुरंत चलकर नागोंकी रक्षाके लिये तुम्हारे पुत्रसे कहता हूँ, क्योंकि शरणागतोंका त्याग करना उचित नहीं है। यदि राजा मरुत्त मेरे कहनेसे अपने शस्त्रको नहीं लौटायेगा तो मैं अपने अस्त्रोंसे उसके अस्त्रका निवारण करूँगा।” यह कहकर क्षत्रियोंमें श्रेष्ठ

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 34

ततः स्वरोचिः संक्रुद्धश्चण्डास्त्रमतिभैरवम् ।दृष्ट्यां निवेश्य तद्रक्षो ददर्शानिमिषेक्षणः

tataḥ svarociḥ saṃkruddhaścaṇḍāstramatibhairavam / dṛṣṭyāṃ niveśya tadrakṣo dadarśānimiṣekṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित धनुष ले अपनी स्त्रीके साथ तुरंत ही और्व मुनिके आश्रमपर गये।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 35

तदाभिभूतः स तदा तामुत्सृज्य निशाचरः ।प्रसीद शाम्यतामस्त्रं श्रूयताञ्चेत्यभाषत

tadābhibhūtaḥ sa tadā tāmutsṛjya niśācaraḥ / prasīda śāmyatāmastraṃ śrūyatāñcetyabhāṣata

हिन्दी अर्थ

वहाँ पहुँचकर अवीक्षितने देखा, भामिनीका पुत्र अपने हाथमें एक श्रेष्ठ धनुष लिये हुए है, उसका अस्त्र बड़ा ही भयानक है, उसकी ज्वालासे समस्त दिशाएँ व्याप्त हो रही हैं। वह अपने अस्त्रसे आग उगल रहा है, जो समस्त भूमण्डलको जलाती हुई पातालके भीतर पहुँच गयी है। वह अग्नि अत्यन्त भयानक और असहा है। राजा मरुत्तको भौंहें टेढ़ी किये

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 36

मोक्षितोषऽहं त्वया शापादतिघोरान्महाद्युते ।प्रदत्तादतितीव्रेण ब्रह्ममित्रेण धीमता

mokṣitoṣa'haṃ tvayā śāpādatighorānmahādyute / pradattādatitīvreṇa brahmamitreṇa dhīmatā

हिन्दी अर्थ

खड़ा देख अवीक्षितने कहा--“मरुत्त! क्रोध न करो, अपने अस्त्रको लौटा लो।' यह बात उन्होंने बार-बार कही और इतनी शीघ्रतासे कही कि उतावलीके कारण कितने ही अक्षरोंका उच्चारण नहीं हो पाता था।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 37

उपकारी न मे त्वत्तो महाभागाधिको ऽपरः ।येनाहं सुमहाकष्टान्महाशापाद्विमोक्षितः

upakārī na me tvatto mahābhāgādhiko 'paraḥ / yenāhaṃ sumahākaṣṭānmahāśāpādvimokṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

पिताकी बात सुनकर और बारंबार उन्हें देखकर हाथमें धनुष लिये हुए मरुत्तने माता और पिता दोनोंको प्रणाम किया और इस प्रकार उत्तर दिया--'पिताजी! मेरा शासन होते हुए भी सर्पोने मेरे बलकी अवहेलना करके भारी अपराध किया है। इन महर्षियोंके आश्रममें घुसकर नागोंने दस मुनिकुमारोंको डँस लिया है। इतना ही नहीं, इन दुराचारियोंने

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 38

स्वरोचिरुवाच ब्रह्ममित्रेण मुनिना किन्निमित्तं महात्मना ।शप्तस्त्वं कीदृशश्चैव शापो दत्तो ऽभवत् पुरा

svarociruvāca brahmamitreṇa muninā kinnimittaṃ mahātmanā / śaptastvaṃ kīdṛśaścaiva śāpo datto 'bhavat purā

हिन्दी अर्थ

हविष्योंको भी दूषित किया है तथा यहाँ जितने जलाशय हैं, उन सबको विष मिलाकर खराब कर दिया है। ये सभी सर्प ब्रह्महत्यारे हैं, अत: इनका वध करनेसे आप हमें न रोकें।”

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 39

राक्षसा उवाच ब्रह्ममित्रो ऽष्टधा भिन्नमायुर्वेदमधीतवान् ।त्रयोदशाधिकारञ्च प्रगृह्याथर्वणो द्विजः

rākṣasā uvāca brahmamitro 'ṣṭadhā bhinnamāyurvedamadhītavān / trayodaśādhikārañca pragṛhyātharvaṇo dvijaḥ

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित बोले--'राजन! ये सर्प मेरी शरणमें आ गये हैं, अतः मेरे गौरवका ध्यान रखते हुए ही तुम इस अस्त्रको लौटा लो। क्रोध करनेकी आवश्यकता नहीं है।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 40

अहञ्चेन्दीवराख्येति ख्यातो ऽस्या जनको ऽभवम् ।विद्याधरपतेः पुत्रो नलनाभस्य खङ्गिनः

ahañcendīvarākhyeti khyāto 'syā janako 'bhavam / vidyādharapateḥ putro nalanābhasya khaṅginaḥ

हिन्दी अर्थ

मरुत्तने कहा--'पिताजी! ये दुष्ट और अपराधी हैं। इन्हें क्षमा नहीं करूँगा। जो राजा दण्डनीय पुरुषोंको दण्ड देता और साधु पुरुषोंका पालन करता है, वह पुण्यलोकोंमें जाता है तथा जो अपने कर्तव्यकी उपेक्षा करता है, वह नरकोंमें पड़ता है।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 41

मया च याचितः पुर्वं ब्रह्ममित्रो ऽभवन्मुनिः ।आयुर्वेदमशेषं मे भगवन् ! दातुमर्हसि

mayā ca yācitaḥ purvaṃ brahmamitro 'bhavanmuniḥ / āyurvedamaśeṣaṃ me bhagavan ! dātumarhasi

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित बोले--राजन्! ये सर्प भयभीत होकर मेरी शरणमें आये हैं और मैं तुम्हें मना करता हूँ; फिर भी इन नागोंकी हिंसा करते हो तो मैं तुम्हारे अस्त्रका प्रतिकार करता हूँ। मैंने भी अस्त्र-विद्या सीखी है। पृथ्वीपर केवल तुम्हीं अस्त्रवेत्ता नहीं हो। भला, मेरे आगे तुम्हारा पुरुषार्थ क्या है।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 42

यदा तु बहुशो वीर ! प्रश्रयावनतस्य मे ।न प्रादाद्याचितो विद्यामायुर्वेदात्मिकां मम

yadā tu bahuśo vīra ! praśrayāvanatasya me / na prādādyācito vidyāmāyurvedātmikāṃ mama

हिन्दी अर्थ

यह कहकर क्रोधसे लाल आँखें किये अवीक्षितने धनुष चढ़ाया और उसपर कालास्त्रका सन्धान किया; फिर तो समुद्र और पर्वतोंसहित समूची पृथ्वी, जो संवर्तस्त्रिसे सन्तप्त हो रही थी, कालास्त्रका सन्धान होते ही काँप उठी। मरुत्तने भी पिताद्वारा उठाये हुए कालास्त्रको देखकर कहा--“तात! मैंने तो दुष्टोंको दण्ड देनेके लिये यह अस्त्र उठाया

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 43

शिष्येभ्यो ददतस्तस्य मयान्तर्धानगेन हि ।आयुर्वेदात्मिका विद्या गृहीताभूत्तदानघ

śiṣyebhyo dadatastasya mayāntardhānagena hi / āyurvedātmikā vidyā gṛhītābhūttadānagha

हिन्दी अर्थ

है, आपका वध करनेके लिये नहीं। फिर आप मुझपर कालास्त्रका प्रयोग क्‍यों करते हैं? महाभाग! मुझे प्रजाजनोंका पालन करना है। आप क्‍यों मेरा वध करनेके लिये अस्त्र उठाते

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 44

गृहीतायान्तु विद्यायां मासैरष्टाभिरन्तरात् ।ममातिहर्षादभवद्धासो ऽतीव पुनः पुनः

gṛhītāyāntu vidyāyāṃ māsairaṣṭābhirantarāt / mamātiharṣādabhavaddhāso 'tīva punaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित बोले--हम शरणागतोंकी रक्षा करनेपर तुल गये हैं और तुम इसमें विघ्न डालनेवाले हो; अतः मैं तुम्हें जीवित नहीं छोड७ूँगा। जो शरणमें आये हुए पीड़ित मनुष्यपर, वह शत्रुपक्षका ही क्‍यों न हो, दया नहीं दिखाता, उस पुरुषके जीवनको धिक्‍कार है। मैं

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 45

प्रत्यभिज्ञाय मां हासान्मुनिः कोपसमन्वितः ।विकम्पिकन्धरः प्राह मामिदं परुषाक्षरम्

pratyabhijñāya māṃ hāsānmuniḥ kopasamanvitaḥ / vikampikandharaḥ prāha māmidaṃ paruṣākṣaram

हिन्दी अर्थ

क्षत्रिय हूँ। ये भयभीत होकर मेरी शरणमें आये हैं और तुम्हीं इनके अपकारी हो। फिर

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 46

राक्षसेनैव यस्मान्मे त्वयादृश्येन दुर्मते ।हृता विद्यावहासश्च मामवज्ञाय वै कृतः

rākṣasenaiva yasmānme tvayādṛśyena durmate / hṛtā vidyāvahāsaśca māmavajñāya vai kṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

मरुत्तने कहा--ित्र, बान्धव, पिता अथवा गुरु भी यदि प्रजा-पालनमें विघ्न डाले तो राजाके द्वारा वह मार डालने योग्य है। अत: पिताजी! मैं आपपर प्रहार करूँगा। आप मुझपर क्रोध न कीजियेगा। मुझे अपने धर्मका पालनमात्र करना है। आपपर मेरा रत्तीभर भी क्रोध नहीं है।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 47

तस्मात्त्वं राक्षसः पाप ! मच्छापेन निराकृतः ।भविष्यसि न सन्देहः सप्तरात्रेण दारुणः

tasmāttvaṃ rākṣasaḥ pāpa ! macchāpena nirākṛtaḥ / bhaviṣyasi na sandehaḥ saptarātreṇa dāruṇaḥ

हिन्दी अर्थ

उन दोनोंको एक-दूसरेका वध करनेके लिये दृढ़संकल्प देख भार्गव आदि मुनि बीचमें आ पड़े और मरुत्तसे बोले--'तुम्हें अपने पितापर हथियार चलाना उचित नहीं है।” फिर अवीक्षितसे बोले--“आपको भी अपने विख्यात पुत्रका वध नहीं करना चाहिए।”'

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 48

इत्युक्ते प्रणिपाताद्यैरुपचारैः प्रसादितः ।स मामाह पुनर्विप्रस्तत्क्षणान्मृदुमानसः

ityukte praṇipātādyairupacāraiḥ prasāditaḥ / sa māmāha punarviprastatkṣaṇānmṛdumānasaḥ

हिन्दी अर्थ

मरुत्तने कहा--ब्राह्मणो! मैं राजा हूँ, मुझे दुष्टोंका वध और साधु पुरुषोंकी रक्षा करनी है। ये सर्पलोग दुष्ट हैं। अत: मेरा इसमें क्या अपराध है?

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 49

यन्मयोक्तमवश्यन्तद्भावि गन्धर्व ! नान्यथा ।किन्तु त्वं राक्षसो भूत्वा पुनः स्वं प्राप्स्यसे वपुः

yanmayoktamavaśyantadbhāvi gandharva ! nānyathā / kintu tvaṃ rākṣaso bhūtvā punaḥ svaṃ prāpsyase vapuḥ

हिन्दी अर्थ

अवीक्षित बोले--मुझे शरणागतोंकी रक्षा करनी है और यह उन्हीं शरणागतोंका वध करता है; अतः मेरा पुत्र होनेपर भी अपराधी है।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 50

नष्टस्मृतिर्यदा क्रुद्धः स्वमपत्यञ्चिखादिषुः ।निशाचरत्वं गन्तासि तदस्त्रानलतापितः

naṣṭasmṛtiryadā kruddhaḥ svamapatyañcikhādiṣuḥ / niśācaratvaṃ gantāsi tadastrānalatāpitaḥ

हिन्दी अर्थ

ऋषियोंने कहा--से नाग कह रहे हैं कि दुष्ट सर्पोने जिन ब्राह्मणोंको काट खाया है, उन्हें हम जीवित किये देते हैं। अत: युद्ध करनेकी आवश्यकता नहीं है। आप दोनों श्रेष्ठ राजा प्रसन्न हों।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 51

पुनः संज्ञामवाप्य स्वामवाप्स्यसि निजं वपुः ।तथैव स्वमधिष्ठानं लोके गन्धर्वसंज्ञिते

punaḥ saṃjñāmavāpya svāmavāpsyasi nijaṃ vapuḥ / tathaiva svamadhiṣṭhānaṃ loke gandharvasaṃjñite

हिन्दी अर्थ

इसी समय वीराने आकर अपने पुत्र अवीक्षितसे कहा--“वत्स! मेरे कहनेसे ही तुम्हारा पुत्र इन नागोंका वध करनेके लिये उद्यत हुआ है। यदि मरे हुए ब्राह्मण जीवित हो जाते हैं तो अपना कार्य सिद्ध हो जायगा और तुम्हारे शरणागत सर्प जीवित छूट जायँगे।' तब नागोंने विष खींचकर दिव्य ओषधियोंके प्रयोगसे उन ब्राह्मणोंको जीवित कर दिया।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 52

सो ऽहं त्वया महाभाग ! मोक्षितो ऽस्मान्महाभयात् ।निशाचरत्वाद् यद्वीर ! तेन मे प्रार्थनां कुरु

so 'haṃ tvayā mahābhāga ! mokṣito 'smānmahābhayāt / niśācaratvād yadvīra ! tena me prārthanāṃ kuru

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर राजा मरुत्तने पुनः अपने माता-पिताके चरणोंमें प्रणाम किया। अवीक्षितने भी मरुत्तको प्रेमपूर्वक हृदयसे लगा लिया और कहा--“वत्स! तुम शत्रुओंका मान मर्दन करो, चिरकालतक पृथ्वीका पालन करते रहो। पुत्र और पौत्रोंक साथ आनन्द भोगो तथा तुम्हारे कोई शत्रु न हों।'

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 53

इमान्ते तनयां भार्यां प्रयच्छामि प्रतीच्छ ताम् ।आयुर्वेदश्च सकलस्त्वष्टाङ्गो यो मया ततः ।मुनेः सकाशात् संप्राप्तस्तं गृह्णीष्व महामते

imānte tanayāṃ bhāryāṃ prayacchāmi pratīccha tām / āyurvedaśca sakalastvaṣṭāṅgo yo mayā tataḥ / muneḥ sakāśāt saṃprāptastaṃ gṛhṇīṣva mahāmate

हिन्दी अर्थ

इसके बाद ब्राह्मणों और वीराकी आज्ञा ले अवीक्षित, मरुत्त और भामिनी रथपर आरूढ़ हो अपनी राजधानीको चले गये। धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ महाभागा पतिव्रता वीरा भी भारी तपस्या करके पतिके लोकमें चली गयीं। राजा मरुत्तने भी काम, क्रोध आदि छः शत्रुओंको जीतकर धर्मपूर्वक पृथ्वीका पालन किया। महाबली महाराज मरुत्तका ऐसा ही

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 54

मार्कण्डेय उवाच इत्युक्त्वा प्रददौ विद्यां स च दिव्याम्बरोज्जवलः ।स्त्रग्भूषणधरो दिव्यं पुराणं वपुरास्थितः

mārkaṇḍeya uvāca ityuktvā pradadau vidyāṃ sa ca divyāmbarojjavalaḥ / stragbhūṣaṇadharo divyaṃ purāṇaṃ vapurāsthitaḥ

हिन्दी अर्थ

पराक्रम था। सातों द्वीपोंमें कहीं भी उनकी आज्ञाका उल्‍लड्घन नहीं होता था। उनके समान दूसरा कोई राजा न हुआ है, न होगा। वे सत्त्व तथा पराक्रमसे युक्त और महान् तेजस्वी थे। द्विजश्रेष्ठ! महात्मा मरुत्तके उत्तम जन्म एवं चरित्रकी यह कथा सुननेसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 55

दत्त्वा विद्यां ततः कन्यां स दातुमुपचक्रमे ।तमाह सा तदा कन्या जनितारं स्वरूपिणम्

dattvā vidyāṃ tataḥ kanyāṃ sa dātumupacakrame / tamāha sā tadā kanyā janitāraṃ svarūpiṇam

हिन्दी अर्थ

राजा नरिष्यन्त और दमका चरित्र

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 56

अनुरागो ममाप्यत्र तातातीव महात्मनि ।दर्शनादेव संजातो विशेषेणोपकारिणि

anurāgo mamāpyatra tātātīva mahātmani / darśanādeva saṃjāto viśeṣeṇopakāriṇi

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी कहते हैं--मरुत्तके अठारह पुत्रोंमें नरिष्यन्त सबसे ज्येष्ठ और श्रेष्ठ थे। क्षत्रियोंमें श्रेष्ठ महाराज मरुत्तने पचासी हजार वर्षोतक समूची पृथ्वीका राज्य किया। धर्मपूर्वक राज्यका पालन और उत्तमोत्तम यज्ञोंका अनुष्ठान करके मरुत्तने अपने ज्येष्ठ पुत्र नरिष्यन्तको राजपदपर अभिषिक्त कर दिया और स्वयं वनमें चले गये। वहाँ एकाग्रचित्त

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 57

किन्त्वेषा मे सखी सा च मत्कृते दुः खपीडिते ।अतो नाभिलषे भोगान् भोक्तुमेतेन वै समम्

kintveṣā me sakhī sā ca matkṛte duḥ khapīḍite / ato nābhilaṣe bhogān bhoktumetena vai samam

हिन्दी अर्थ

होकर उन्होंने बड़ी भारी तपस्या की और अपने सुयशसे पृथ्वी एवं आकाशको व्याप्त करके वे स्वर्गलोकमें चले गये। तदनन्तर उनके बुद्धिमान् पुत्र नरिष्यन्तने अपने पिता तथा अन्य पूर्वजोंके चरित्रकी आलोचना करके मन-ही-मन सोचा--वंशकी मान-मर्यादाका पालन, लज्जाकी रक्षा, शत्रुओंपर क्रोध, सबको अपने-अपने धर्ममें लगाना और युद्धसे

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 58

पुरुषैरपि नो शक्या कर्तुमित्थं नृशंसता ।स्वभावरुचिरैर्मादृक् कथं योषित् करिष्यति

puruṣairapi no śakyā kartumitthaṃ nṛśaṃsatā / svabhāvarucirairmādṛk kathaṃ yoṣit kariṣyati

हिन्दी अर्थ

कभी पीठ न दिखाना--इन सब बातोंका मेरे पूर्वपुरुषोंने तथा पिताजीने जैसा पालन किया है, वैसा दूसरा कौन कर सकता है। मेरे पूर्वजोंने कौन ऐसा शुभ कर्म नहीं किया है, जिसको मैं करूँ। वे बड़े-बड़े यज्ञ करनेवाले जितेन्द्रिय, संग्रामसे पीछे न हटनेवाले, बड़े-बड़े युद्धोंमें भाग लेनेवाले तथा अनृपम पुरुषार्थी थे; मैं निष्काम कर्मका अनुष्ठान करूँगा। मेरे पहलेके

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 59

साहं यथा ते दुः खार्ते मत्कृते कन्यके पितः ।तथा स्थास्यामि तद्दुः खे तच्छोकानलतापिता

sāhaṃ yathā te duḥ khārte matkṛte kanyake pitaḥ / tathā sthāsyāmi tadduḥ khe tacchokānalatāpitā

हिन्दी अर्थ

राजाओंने स्वयं ही निरन्तर यज्ञोंका अनुष्ठान किया है, दूसरोंसे नहीं कराया है; मैं ऐसा करूँगा, जिससे दूसरे भी यज्ञ करें।

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 60

स्वरोचिरुवाच आयुर्वेदप्रसादेन ते करिष्ये पुनर्नवे ।सख्यौ तव महाशोकं समुत्सृज सुमध्यमे

svarociruvāca āyurvedaprasādena te kariṣye punarnave / sakhyau tava mahāśokaṃ samutsṛja sumadhyame

हिन्दी अर्थ

यों विचारकर महाराज नरिष्यन्तने धन-दानसे सुशोभित एक ऐसा यज्ञ किया, जिसके समान यज्ञ दूसरे किसीने नहीं किया था। उन्होंने ब्राह्मणोंके जीवन-निर्वाहके लिये बहुत बड़ी सम्पत्ति देकर उसकी अपेक्षा सौगुना अन्न दान किया। इस भूमिपर रहनेवाले प्रत्येक ब्राह्यणको धन और अन्न देनेके अतिरिक्त गौ, वस्त्र, आभूषण तथा धान्य भण्डार आदि भी

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 61

मार्कण्डेय उवाच ततः पित्रा स्वयं दत्तां तां कन्यां स विधानतः ।उपयेमे गिरौ तस्मिन् स्वरोचिश्चारुलोचवनाम्

mārkaṇḍeya uvāca tataḥ pitrā svayaṃ dattāṃ tāṃ kanyāṃ sa vidhānataḥ / upayeme girau tasmin svarociścārulocavanām

हिन्दी अर्थ

दिये। इसके बाद जब राजाने दूसरा यज्ञ आरम्भ करना चाहा, तब इसके लिये उन्हें कहीं ब्राह्मण ही नहीं मिले। वे जिस-जिस ब्राह्मणका वरण करते, वही उत्तर देता, “हम तो स्वयं ही यज्ञ कर रहे हैं। आप दूसरे किसी ब्राह्मणका वरण कीजिये। आपने पहले ही यज्ञमें हमें इतना धन दे दिया है, जो अनेक यज्ञ करनेपर भी समाप्त नहीं होगा। अब हमें और धनकी

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 62

दत्तान्तु तां तदा कन्यामभिशान्त्य च भामिनीम् ।जगाम दिव्यया गत्यागन्धर्वः स्वपुरन्ततः

dattāntu tāṃ tadā kanyāmabhiśāntya ca bhāminīm / jagāma divyayā gatyāgandharvaḥ svapurantataḥ

हिन्दी अर्थ

जब एक भी ऋत्विज् ब्राह्मण नहीं मिला, तब महाराजने बहिर्वेदीमें दान देनेका आयोजन किया तथापि धनसे घर भरा रहनेके कारण ब्राह्मणोंने वह दान नहीं ग्रहण किया। उस समय राजाने यह उद्घार प्रकट किया--“अहो! इस पृथ्वीपर कहीं एक भी निर्धन ब्राह्मण नहीं है, यह कितनी सुन्दर बात है!” तदनन्तर उन्होंने भक्तिपूर्वक बारंबार प्रणाम करके कुछ

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 63

स चापि सहितस्तन्व्या सदुद्यानन्तदा ययौ ।कन्यकायुगलं यत्र तच्छापोत्थगदातुरम्

sa cāpi sahitastanvyā sadudyānantadā yayau / kanyakāyugalaṃ yatra tacchāpotthagadāturam

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मणोंको ऋत्विज् बनाया और बहुत बड़ा यज्ञ आरम्भ किया। उस समय बड़े आश्वर्यकी बात यह हुई कि भूमण्डलके सभी ब्राह्मण यज्ञ करने लगे, इसलिये राजाके यज्ञ-मण्डपमें कोई सदस्य न बन सका। कुछ ब्राह्मण यजमान थे और कुछ यज्ञ करानेवाले पुरोहित बन गये। राजा नरिष्यन्तने जिस समय यज्ञ आरम्भ किया, उस समय पृथ्वीके समस्त ब्राह्मण

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 64

ततस्तयोः स तत्त्वज्ञो रोगघ्नैरौषधै रसैः ।चकार नीरुजौ देहौ स्वरोचिरपराजितः

tatastayoḥ sa tattvajño rogaghnairauṣadhai rasaiḥ / cakāra nīrujau dehau svarociraparājitaḥ

हिन्दी अर्थ

उन्हींके दिये हुए धनसे यज्ञ करने लगे। पूर्व दिशामें अठारह करोड़, पश्चिममें सात करोड़, दक्षिणमें चौदह करोड़ और उत्तरमें पंद्रह करोड़ यज्ञ एक ही समय आरम्भ हुए। इस प्रकार मरुत्तनन्दन राजा नरिष्यन्त बड़े धर्मात्मा हुए। वे अपने बल और पुरुषार्थके लिये सर्वत्र

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

अध्याय ६३

श्लोक 65

ततो ऽतिशोभने कन्ये विमुक्ते व्याधितः शुभे ।स्वकान्त्योद्योति दिग्भागं चक्राते तन्महीधरम्

tato 'tiśobhane kanye vimukte vyādhitaḥ śubhe / svakāntyodyoti digbhāgaṃ cakrāte tanmahīdharam

हिन्दी अर्थ

नरिष्यन्तके दम नामक पुत्र हुआ, जो दुष्ट शत्रुओंका दमन करनेवाला था। उसमें इन्द्रके समान बल और मुनियोंके समान दया एवं शील था। बश्रुकी कन्या इन्द्रसेना नरिष्यन्तकी पत्नी थी। उसीके गर्भसे दमका जन्म हुआ था। उस महायशस्वी पुत्रने नौ वर्षोतक माताके गर्भमें रहकर उसके द्वारा दमका पालन कराया, तथा स्वयं भी दमनशील था। इसीलिये

English

and he, lustrous as the immortals, then took the hands of both in marriage, while heavenly musical instruments sounded out and the Apsarases danced.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

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६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 63
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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