अध्याय ६३
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे स्वारोचिषे मन्वन्तरे द्विषष्टितमो ऽध्यायः ।त्रिषष्टितमो ऽध्यायः- ६३ मार्कण्डेय उवाच ततः सह तथा सो ऽथ रराम गिरिसानुषु ।फुल्लकाननहृद्येषु मनोज्ञेषु सरः सु च
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe svārociṣe manvantare dviṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ / triṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ- 63 mārkaṇḍeya uvāca tataḥ saha tathā so 'tha rarāma girisānuṣu / phullakānanahṛdyeṣu manojñeṣu saraḥ su ca
हिन्दी अर्थ
--बेटा! मैं बूढ़ा हो गया, अब वनमें तपस्याके लिये जाऊँगा। तुम मुझसे यह राज्य ले लो। मैं कृतकृत्य हूँ। तुम्हारा राजतिलक करनेके अतिरिक्त दूसरा कोई कार्य शेष नहीं है।” यह सुनकर राजकुमार अवीक्षितने बड़ी नम्नताके साथ पितासे कहा--“तात! मैं पृथ्वीका पालन नहीं कर सकूँगा। मेरे मनसे लज्जा अभी दूर नहीं होती। आप इस राज्यपर किसी औरको
English
Then he, lustrous as the immortals, accompanied by wives, lived in pleasure on that high mountain whei’e were