Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
64
अध्याय 64 / 90

Adhyaya 64

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अध्याय ६४

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे स्वारोचिषे मन्वन्तरे त्रिषष्टितमो ऽध्यायः चतुः षष्टितमो ऽध्यायः- ६४ मार्कण्डेय उवाच एवं विमुक्तरोगा तु कन्यका तं मुदान्विता ।स्वरोचिषमुवाचेदं शृणुष्व वचनं प्रभो

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe svārociṣe manvantare triṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ catuḥ ṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ- 64 mārkaṇḍeya uvāca evaṃ vimuktarogā tu kanyakā taṃ mudānvitā / svarociṣamuvācedaṃ śṛṇuṣva vacanaṃ prabho

हिन्दी अर्थ

त्रिकालवेत्ता पुरोहितने उसका नाम “दम” रखा। राजकुमार दमने हैत्यराज वृषपर्वासे सम्पूर्ण धनुर्वेदकी शिक्षा पायी। तपोवननिवासी हैत्यराज दुन्दुभिसे सम्पूर्ण अस्त्र प्राप्त किये। महर्षि शक्तिसे वेदों तथा समस्त वेदाड़ोंका अध्ययन किया और राजर्षि आर्टिषेणसे योगविद्या प्राप्त की। वे सुन्दर रूपवान्, महात्मा, अस्त्रविद्याके ज्ञाता और महान् बलवान् थे; अतः

English

Then the adorable god made the Prajdpati named Svaro- cisha D)’uti-mat a Manu. Listen to his Manv-antara; who

अध्याय ६४

श्लोक 2

मन्दारविद्याधरजा नाम्ना ख्याता विभावरी ।उपकारिन् ! स्वमात्मानं प्रयच्छामि प्रतीच्छ माम्

mandāravidyādharajā nāmnā khyātā vibhāvarī / upakārin ! svamātmānaṃ prayacchāmi pratīccha mām

हिन्दी अर्थ

राजकुमारी सुमनाने पिताद्वारा आयोजित स्वयंवरमें उन्हें अपना पति चुन लिया। वह दशार्ण देशके बलवान् राजा चारुवर्माकी पुत्री थी। उसकी प्राप्तिके लिये वहाँ जितने राजा आये थे, सब देखते ही रह गये और उसने दमका वरण कर लिया। मद्रराजकुमार महानन्द, जो बड़ा बलवान् और पराक्रमी था, सुमनाके प्रति अनुरक्त हो गया था; इसी प्रकार विदर्भ देशके

English

were the gods during that period, who were the munis and their sons, who were the princes, listen while I tell of them^

अध्याय ६४

श्लोक 3

विद्याञ्च तुभ्यं दास्यामि सर्वबूतरुतानि ते ।ययाभिव्यक्तिमेष्यन्ति प्रसादपुरगो भव

vidyāñca tubhyaṃ dāsyāmi sarvabūtarutāni te / yayābhivyaktimeṣyanti prasādapurago bhava

हिन्दी अर्थ

राजा संक्रन्दनका राजकुमार वपुष्मान् तथा उदारबुद्धि महाधनु भी सुमनाकी ओर आकृष्ट थे। उन सबने देखा, सुमनाने दुष्ट शत्रुओंका दमन करनेवाले दमका वरण कर लिया; तब कामसे मोहित होकर आपसमें सलाह की--“'हमलोग इस सुन्दरी कन्याको बलपूर्वक पकड़कर घर ले चलें। वहाँ यह स्वयंवरकी विधिसे हममेंसे जिसको वरण करेगी, उसीकी

English

The gods in that period were the Paravatas and also the Tnshitas. 0 brahman; and in Svarocisha’s period the

अध्याय ६४

श्लोक 4

मार्कण्डेय उवाच एवमस्त्विति तेनोक्ते धर्मज्ञेन स्वरोचिषा ।द्वितीया तु तदा कन्या इदं वचनमब्रवीत्

mārkaṇḍeya uvāca evamastviti tenokte dharmajñena svarociṣā / dvitīyā tu tadā kanyā idaṃ vacanamabravīt

हिन्दी अर्थ

ऐसा निश्चय करके उन तीनों राजकुमारोंने दमके पास खड़ी हुई उस सुन्दरी कन्याको पकड़ लिया। उस समय जो राजा दमके पक्षमें थे, उन्होंने बड़ा कोलाहल मचाया। कुछ लोग कुपित होकर रह गये और कुछ लोग मध्यस्थ बन गये। इस घटनासे दमके चित्तमें तनिक भी घबराहट नहीं हुई। उन्होंने चारों ओर खड़े हुए राजाओंको देखकर कहा

English

Inclra was famed as Yipad-cit. l/rja, Tamba and Prana, Dattoli and Rishabha, Ni^cara and Carva-virat were the seven

अध्याय ६४

श्लोक 5

कुमारब्रह्मचार्यासीत् पारो नाम पिता मम ।ब्रह्मर्षिः सुमहाभागो वेदवेदाङ्गपारगः

kumārabrahmacāryāsīt pāro nāma pitā mama / brahmarṣiḥ sumahābhāgo vedavedāṅgapāragaḥ

हिन्दी अर्थ

--'भूपालगण! स्वयंवरकी धार्मिक कार्योंमें गणना है, किन्तु वह वास्तवमें अधर्म है या धर्म? इस कन्याको इन लोगोंने जो बलपूर्वक पकड़ लिया है--यह उचित है या अनुचित? यदि स्वयंवर अधर्म है, तब तो मुझे इससे कोई मतलब नहीं है; यह भले ही दूसरेकी पत्नी हो जाय। किन्तु यदि वह धर्म है, तब तो यह मेरी पत्नी हो चुकी; उस दशामें इन प्राणोंको

English

rishis in that 'period. And seven sons had that high souled

अध्याय ६४

श्लोक 6

तस्य पुंस्कोकिलालापरमणीये मधौ पुरा ।आजगामाप्सराभ्यासं प्रख्याता पुञ्जिकास्तना

tasya puṃskokilālāparamaṇīye madhau purā / ājagāmāpsarābhyāsaṃ prakhyātā puñjikāstanā

हिन्दी अर्थ

धारण करके क्‍या होगा, जो शत्रुकी उपेक्षा करके बचाये जाते हैं।! तब दशार्णनरेश चारुवर्माने कोलाहल शान्त कराकर सभासदोंसे पूछा--'राजाओ! दमने जो यह धर्म और अधर्मसे सम्बन्ध रखनेवाली बात पूछी है, इसका उत्तर आपलोग दें, जिससे इनके और मेरे धर्मका लोप न हो।'

English

the earth. So long as his Manv-antara lasted, all this earth was enjoyed among the outspreadings of his family. That was the second Ifawr-antara.

अध्याय ६४

श्लोक 7

कामवक्तव्यतां नीतः स तदा मुनिपुङ्गवः ।तत्संयोगे ऽहमुत्पन्ना तस्यामत्र महाचले

kāmavaktavyatāṃ nītaḥ sa tadā munipuṅgavaḥ / tatsaṃyoge 'hamutpannā tasyāmatra mahācale

हिन्दी अर्थ

तब कुछ राजाओंने कहा--'परस्पर अनुराग होनेपर गान्धर्व-विवाहका विधान है। परन्तु यह क्षत्रियोंके लिये ही विहित है; वैश्य, शूद्र और ब्राह्मणोंके लिये नहीं। दमका वरण कर लेनेसे आपकी इस कन्याका गान्धर्व-विवाह सम्पन्न हो गया। इस प्रकार धर्मकी दृष्टिसे आपकी पुत्री दमकी पत्नी हो चुकी। जो मोहवश इसके विपरीत आचरण करता है, वह

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 8

विहाय मां गता सा च मातास्मिन्निर्जने वने ।बालामेकां महीपृष्ठे व्यालश्वापदसंकुले

vihāya māṃ gatā sā ca mātāsminnirjane vane / bālāmekāṃ mahīpṛṣṭhe vyālaśvāpadasaṃkule

हिन्दी अर्थ

कामासक्त है।' यह सुनकर दमके नेत्र क्रोधसे लाल हो गये। उन्होंने धनुषको चढ़ाया और यह वचन कहा--'यदि मेरी पत्नी मेरे देखते-देखते बलवान् राजाओंके द्वारा हर ली जाय तो मुझ-जैसे नपुंसकके उत्तम कुलसे तथा इन दोनों भुजाओंसे क्या लाभ हुआ। उस दशामें तो मेरे अस्त्रोंकोी, शौर्यको, बाणोंको, धनुषको तथा महात्मा मरुत्तके कुलमें प्राप्त हुए

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 9

ततः कलाभिः सोमस्य वर्धन्तीभिरहः क्षये ।आप्याय्यमानाहरहो वृद्धिं यातास्मि सत्तम

tataḥ kalābhiḥ somasya vardhantībhirahaḥ kṣaye / āpyāyyamānāharaho vṛddhiṃ yātāsmi sattama

हिन्दी अर्थ

जन्मको भी धिक्‍कार है।” यों कहकर दमने महानन्द आदि समस्त शत्रुओंसे कहा --'भूपालो! यह बाला अत्यन्त सुन्दरी और कुलीन है। यह जिसकी पत्नी नहीं हुई, उसका जन्म लेना व्यर्थ है--यह विचारकर तुमलोग युद्धमें इस प्रकार यत्न करो, जिससे युद्धमें मुझे परास्त करके इसे अपनी पत्नी बना सको।'

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 10

ततः कलावतीत्येतन्मम नाम महात्मना ।गृहीतायः कृतं पित्रा गन्धर्वेण शुभानना

tataḥ kalāvatītyetanmama nāma mahātmanā / gṛhītāyaḥ kṛtaṃ pitrā gandharveṇa śubhānanā

हिन्दी अर्थ

यह कहकर राजकुमार दमने वहाँ बाणोंकी बौछार आरम्भ की। जैसे अन्धकार वृक्षोंको ढक देता है, उसी प्रकार दमने उन राजाओंको बाणोंसे आच्छादित कर दिया। वे भी वीर थे; अतः बाण, शक्ति, ऋष्टि तथा मुद्गरोंकी वर्षा करने लगे। किन्तु दमने उनके चलाये हुए सब हथियारोंको खेल-खेलमें ही काट डाला। तब महापराक्रमी महानन्द वहाँ आ पहुँचा और

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 11

न दत्ताहं तदा तेन याचितेन महात्मना ।देवारिणालिना सुप्तस्ततो मे घातितः पिता

na dattāhaṃ tadā tena yācitena mahātmanā / devāriṇālinā suptastato me ghātitaḥ pitā

हिन्दी अर्थ

उनके साथ युद्ध करने लगा। तब दमने उसकी छातीमें एक कालाग्निके समान भयड्कर बाण मारा। उससे उसकी छाती विदीर्ण हो गयी; तो भी उसने उस बाणको खींचकर निकाल दिया और दमके ऊपर चमचमाती हुई तलवार फेंकी। उसे उल्काके समान अपनी ओर आते देख दमने शक्तिके प्रहारसे काट डाला और वेतसपत्र नामक बाणसे महानन्दका

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 12

ततो ऽहमतिनिर्वेदादात्मव्यापादनोद्यता ।निवारिता शम्भुपत्न्या सत्या सत्यप्रतिश्रवा

tato 'hamatinirvedādātmavyāpādanodyatā / nivāritā śambhupatnyā satyā satyapratiśravā

हिन्दी अर्थ

मस्तक धड़से अलग कर दिया। महानन्दके मारे जानेपर अधिकांश राजा पीठ दिखाकर भाग गये; केवल कुण्डिनपुरका स्वामी वपुष्मान् डटा रहा और दमके साथ युद्ध करने लगा। युद्ध करते समय उसकी भयड्कर तलवारको दमने बड़ी फुर्तीसे काट दिया तथा उसके सारथिके मस्तक और ध्वजाको भी काट गिराया। तलवार कट जानेपर वपुष्मानने एक गदा

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 13

मा शुचः सुभ्रु ! भर्ता ते महाभागो भविष्यति ।स्वरोचिर्नाम पुत्रश्च मनुस्तस्य भविष्यति

mā śucaḥ subhru ! bhartā te mahābhāgo bhaviṣyati / svarocirnāma putraśca manustasya bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

उठायी, जिसमें बहुत-सी काँटियाँ गड़ी हुई थीं; किन्तु दमने उसको भी उसके हाथमें ही काट डाला। फिर वषुष्मान् ज्यों ही कोई श्रेष्ठ आयुध हाथमें लेने लगा, त्यों ही दमने उसे बाणोंसे बींधकर पृथ्वीपर गिरा दिया। पृथ्वीपर गिरते ही उसका सारा शरीर व्याकुल हो गया। वह थर-थर काँपने लगा। अब युद्ध करनेका उसका विचार न रहा। उसको इस

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 14

आज्ञाञ्च निधयः सर्वे करिष्यन्ति तवादृताः ।यथाभिलषितं वित्तं प्रदास्यन्ति च ते शुभे

ājñāñca nidhayaḥ sarve kariṣyanti tavādṛtāḥ / yathābhilaṣitaṃ vittaṃ pradāsyanti ca te śubhe

हिन्दी अर्थ

अवस्थामें देखकर दमने जीवित छोड़ दिया और प्रसन्नचित्त हो सुमनाको साथ ले वहाँसे चल दिया। तब दशार्ण देशके राजा चारुवर्मने प्रसन्न होकर दम और सुमनाका विधिपूर्वक विवाह कर दिया। तदनन्तर कुछ काल ठहरनेके पश्चात् दम अपनी स्त्रीसहित अपने घरको चले गये। दशार्णराजने भी बहुत-से हाथी, घोड़े, रथ, गौ, खच्चर, ऊँट, दास-दासियाँ, वस्त्र,

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 15

यस्या वत्से प्रभावेण विद्यायास्तां गृहाण मे ।पद्मिनी नाम विद्येयं महापद्माभिपूजिता

yasyā vatse prabhāveṇa vidyāyāstāṃ gṛhāṇa me / padminī nāma vidyeyaṃ mahāpadmābhipūjitā

हिन्दी अर्थ

आभूषण और धनुष आदि श्रेष्ठ सामग्री तथा बहुत-से बर्तन दहेजमें देकर वर-वधूको विदा

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 16

इत्याह मां दक्षसुता सती सत्यपरायणा ।स्वरोचिस्त्वं ध्रुवं देवी नान्यथा सा वदिष्यति

ityāha māṃ dakṣasutā satī satyaparāyaṇā / svarocistvaṃ dhruvaṃ devī nānyathā sā vadiṣyati

हिन्दी अर्थ

महामुने! दम सुमनाको पत्नीरूपमें पाकर बड़े प्रसन्न थे। घर आकर उन्होंने माता- पिताके चरणोंमें प्रणाम किया। सुमनाने भी सास-ससुरके चरणोंमें मस्तक झुकाया। तब उन दोनोंने भी आशीर्वाद देकर नव-दम्पतिका अभिनन्दन किया। फिर तो नरिष्यन्तके नगरमें बड़ा भारी उत्सव मनाया गया। दशार्णराज सम्बन्धी हुए और बहुत-से राजा पुत्रके हाथों

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 17

साहं प्राणप्रदायाद्य तां विद्यां स्वं तथा वपुः ।प्रयच्छामि प्रतीच्छ त्वं प्रसादसुमुखो मम

sāhaṃ prāṇapradāyādya tāṃ vidyāṃ svaṃ tathā vapuḥ / prayacchāmi pratīccha tvaṃ prasādasumukho mama

हिन्दी अर्थ

युद्धमें परास्त हो गये, यह सुनकर महाराज नरिष्यन्त बहुत प्रसन्न हुए। दशार्णराजकुमारी सुमना दमके साथ बहुत समयतक विहार करती रही। फिर उसने गर्भ धारण किया। राजा नरिष्यन्त भी सब भोगोंको भोगकर वृद्धावस्थामें पहुँच चुके थे, इसलिये वे दमको राजपदपर अभिषिक्त करके स्वयं वनमें चले गये। उनकी यशस्विनी पत्नी इन्द्रसेनाने भी

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 18

मार्कण्डेय उवाच एवमस्त्विति तामाह स तु कन्यां कलावतीम् ।विभावर्याः कलावत्याः स्निग्धदृष्ट्यानुमोदितः

mārkaṇḍeya uvāca evamastviti tāmāha sa tu kanyāṃ kalāvatīm / vibhāvaryāḥ kalāvatyāḥ snigdhadṛṣṭyānumoditaḥ

हिन्दी अर्थ

उनका ही अनुसरण किया, नरिष्यन्त वहाँ वानप्रस्थके नियमोंका पालन करते हुए रहने

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

अध्याय ६४

श्लोक 19

जग्राह च ततः पाणी स तयोरमरद्युतिः ।नदत्सु देवतूर्येषु नृत्यन्तीष्वप्सरः सु च

jagrāha ca tataḥ pāṇī sa tayoramaradyutiḥ / nadatsu devatūryeṣu nṛtyantīṣvapsaraḥ su ca

हिन्दी अर्थ

एक दिन दक्षिण देशका दुराचारी राजकुमार वषुष्मान्, जो संक्रन्दनका पुत्र था, थोड़ी सी सेना साथ ले वनमें शिकार खेलनेके लिये गया। उसने तपस्वी नरिष्यन्त तथा उनकी पत्नी इन्द्रसेनाको तपस्यासे अत्यन्त दुर्बल देखकर पूछा--'“आप वानप्रस्थ-आश्रममें स्थित ब्राह्मण, क्षत्रिय अथवा वैश्य हैं? मुझे बताइये।” राजा नरिष्यन्तने मौन-व्रत धारण कर लिया

English

Now the man who hears of Sva-rodis’ deeds and Svdro- cisha’s birth, and believes them, is delivered from his sins.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 64
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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