Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
65
अध्याय 65 / 90

Adhyaya 65

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अध्याय ६५

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्जडेयपुराणेठस्वारोचिषे मन्वन्तरेऽ चतुः षष्टितमो ऽध्यायः पञ्चषष्टितमो ऽध्यायः- ६५ मार्कण्डेय उवाच ततः स ताभिः सहितः पत्नीभिरमरद्युतिः ।रराम तस्मिन् शैलेन्द्रे रम्यकानननिर्झरे

iti śrīmārkaṇjaḍeyapurāṇeṭhasvārociṣe manvantare' catuḥ ṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ pañcaṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ- 65 mārkaṇḍeya uvāca tataḥ sa tābhiḥ sahitaḥ patnībhiramaradyutiḥ / rarāma tasmin śailendre ramyakānananirjhare

हिन्दी अर्थ

था, इसलिये उन्होंने कुछ उत्तर नहीं दिया; किन्तु उनकी पत्नी इन्द्रसेनाने सब बातें सच-सच बता दीं। परिचय पाकर वपुष्मानने सोचा, अब तो मैं अपने शत्रुके पिताको पा गया हूँ। यह विचारकर उसने कुपित हो नरिष्यन्तकी जटा पकड़ ली। इन्द्रसेना आँसू बहाती हुई गद्गदकण्ठसे रोने और हाहाकार करने लगी। वपुष्मानने म्यानसे तलवार निकाल ली और

English

ask thee!

अध्याय ६५

श्लोक 2

सर्वोपभोगरत्नानि मधूनि मधुराणि च ।निधयः समुपाजह्रुः पद्मिन्या वशवर्तिनः

sarvopabhogaratnāni madhūni madhurāṇi ca / nidhayaḥ samupājahruḥ padminyā vaśavartinaḥ

हिन्दी अर्थ

यह बात कही, “जिसने युद्धमें मुझे परास्त किया और मेरी सुमनाको हर लिया, उस दमके पिताको आज मैं मार डालूँगा। अब वह आकर इनकी रक्षा करे।'

English

While I slept just as I was, with the door fastened, 0 ki why and by whom my wife was carried off— this thou, Sir*

अध्याय ६५

श्लोक 3

स्त्रजो वस्त्राण्यलङ्कारान् गन्धाढ्यमनुलेपनम् ।आसनान्यतिशुभ्राणि काञ्चनानि यथेच्छया

strajo vastrāṇyalaṅkārān gandhāḍhyamanulepanam / āsanānyatiśubhrāṇi kāñcanāni yathecchayā

हिन्दी अर्थ

यों कहकर उस दुराचारीने इन्द्रसेनाको रोती-बिलखती छोड़ नरिष्यन्तका मस्तक काट डाला, तब समस्त मुनि तथा अन्य वनवासी भी उसे धिककारने लगे। वपुष्मान् अपने नगरको लौट गया। उसके चले जानेपर इन्द्रसेनाने एक शूद्र तपस्वीको अपने पुत्रके पास भेजा और कहा--'तुम शीघ्र जाकर मेरे पुत्रसे यह सब हाल कहो। मेरा सन्देश इस प्रकार

English

I have not seen thy wife. Tell mo what is she like in body, and what is her age; and of what disposition is the brdhman lady?

अध्याय ६५

श्लोक 4

सौवर्णानि महाभाग ! करकान् भाजनानि च ।तथा शय्याश्च विविधा दिव्यैरास्तरणैर्युताः

sauvarṇāni mahābhāga ! karakān bhājanāni ca / tathā śayyāśca vividhā divyairāstaraṇairyutāḥ

हिन्दी अर्थ

कहना--“महाराजकी इस प्रकार तिरस्कारपूर्ण हिंसा देखकर मैं बहुत दुःखी हूँ। राजा होनेका अधिकार उसीको है, जो चारों वर्णों और आश्रमोंकी रक्षा करे। तुम जो तपस्वियोंकी रक्षा नहीं करते, क्या यही तुम्हारे लिये उचित है? तुम्हारे महाराज नरिष्यन्तके विषयमें यह बात प्रसिद्ध हो गयी कि बिना किसी अपराधके उनके केश पकड़कर वपुष्मानने उनकी

English

Sharp-eyed is she, very tall, short-armed, thin-faced, ungainly in form, 0 king. I defame her not by this description;

अध्याय ६५

श्लोक 5

एवं स ताभिः सहितो दिव्यगन्धाधिवासिते ।रराम स्वरुचिर्भाभिर्भासिते वरपर्वते

evaṃ sa tābhiḥ sahito divyagandhādhivāsite / rarāma svarucirbhābhirbhāsite varaparvate

हिन्दी अर्थ

हत्या की; ऐसी स्थितिमें तुम वही कार्य करो, जिससे तुम्हारे धर्मका लोप न हो। इससे आगे मुझे कुछ नहीं कहना है, क्योंकि मैं तपस्विनी हूँ। तुम्हारे मन्‍्त्री वीर तथा सब शास्त्रोंके ज्ञाता हैं; उन सबके साथ विचार करके इस समय जो करना उचित हो, वह करो। अपने पिता

English

very harsh in speech, and ungentle is she in disposition,

अध्याय ६५

श्लोक 6

ताश्चापि सह तेनेति लेभिरे मुदमुत्तमाम् ।रममाणा यथा स्वर्गे तथा तत्र शिलोच्चये

tāścāpi saha teneti lebhire mudamuttamām / ramamāṇā yathā svarge tathā tatra śiloccaye

हिन्दी अर्थ

शक्तिको राक्षसके हाथसे मारा गया सुनकर महर्षि पराशरने समस्त राक्षस-कुलको अग्निकुण्डमें होमकर भस्म कर दिया था। मैं तो ऐसा मानती हूँ कि तुम्हारे पिता नहीं, तुम मारे गये; उनके ऊपर नहीं, तुम्हारे ऊपर वह तलवार गिरी है। यह तुम्हारी ही मर्यादाका उल्लड्घन किया गया है। अब तुम्हें भृत्य, कुटुम्ब और बन्धु-बान्धवोंसहित वपुष्मानके प्रति

English

unpleasant in look, and she has slightly passed early woman- hood, 0 king. Such is my wife in form; true is this I have spoken.

अध्याय ६५

श्लोक 7

कलहंसी जगादैकां चक्रवाकीं जले सतीम् ।तस्य तासाञ्च ललिते सम्बन्धे च स्पृहावती

kalahaṃsī jagādaikāṃ cakravākīṃ jale satīm / tasya tāsāñca lalite sambandhe ca spṛhāvatī

हिन्दी अर्थ

जो बर्ताव करना उचित हो, वह करो।'

English

"A wife must be guarded," 0 king — such is our highest divine teaching. When a wife is guarded, the offspring is gnai’*

अध्याय ६५

श्लोक 8

धन्यो ऽयमतिपुण्यो ऽयं यो ऽय यौवनगोचरः ।दयिताभिः सहैताभिर्भुङ्क्ते भोगानभीप्सितान्

dhanyo 'yamatipuṇyo 'yaṃ yo 'ya yauvanagocaraḥ / dayitābhiḥ sahaitābhirbhuṅkte bhogānabhīpsitān

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार संदेश दे इन्द्रसेनाने शूद्र तपस्वीको विदा किया और स्वयं पतिके शरीरको गोदमें ले वे अग्निमें प्रवेश कर गयीं। इन्द्रसेनाकी आज्ञाके अनुसार शूद्र तापसने वहाँ जाकर दमसे उनके पिताके मारे जानेका सब समाचार कहा। यह सुनकर दम क्रोधसे जल उठा। जैसे घी डालनेपर आग प्रज्वलित हो उठती है, उसी प्रकार दम क्रोधाग्निसे जलते हुए हाथ-

English

ded. For the Soul is born in her, hence she must be guarded,

अध्याय ६५

श्लोक 9

सन्ति यौवनिनः श्लाघ्यास्तत्पत्न्यो नातिशोभनाः ।जगत्यामल्पकाः पत्न्यः पतयश्चातिशोभनाः

santi yauvaninaḥ ślāghyāstatpatnyo nātiśobhanāḥ / jagatyāmalpakāḥ patnyaḥ patayaścātiśobhanāḥ

हिन्दी अर्थ

से-हाथ मलने लगे और इस प्रकार बोले--“ओह! मुझ पुत्रके जीतेजी उस नृशंस वपुष्मानने मेरे पिताको अनाथकी भाँति मार डाला और इस प्रकार मेरे कुलका अपमान किया। यदि मैं बैठकर शोक मनाऊँ या क्षमा कर दूँ तो यह मेरी नपुंसकता है। दुष्टोंका दमन और साधु पुरुषोंका पालन--यही मेरा कर्तव्य है। मेरे पिताको मारा गया देखकर भी यदि शत्रु जीवित

English

When she is not guarded, there will arise confusion among

अध्याय ६५

श्लोक 10

अभीष्टा कस्यचित् कान्ता कान्तः कस्याश्चिदीप्सितः ।परस्परानुरागाढ्यं दाम्पत्यमतिदुर्लभम्

abhīṣṭā kasyacit kāntā kāntaḥ kasyāścidīpsitaḥ / parasparānurāgāḍhyaṃ dāmpatyamatidurlabham

हिन्दी अर्थ

है तो अब 'हा तात! हा तात!” कहकर बहुत अधिक विलाप करनेसे क्या होगा। इस समय जो करना आवश्यक है, वही मैं करूँगा। उस कायर, पापी एवं दुष्ट दक्षिण-देशनिवासी शत्रुको युद्धमें मारकर सम्पूर्ण पृथ्वीका राज्य भोगूँगा। यदि उसे न मार सका तो स्वयं ही अग्निमें प्रवेश कर जाऊँगा। यदि देवराज इन्द्र हाथमें वज्र लिये स्वयं ही इस युद्धमें पधारें,

English

Svarga, 0 king. And I may have loss of righteousness fro®

अध्याय ६५

श्लोक 11

धन्यो ऽयं दयिताभीष्टो ह्येताश्चास्यातिवल्लभाः ।परस्परानुरागो हि धन्यानामेव जायते

dhanyo 'yaṃ dayitābhīṣṭo hyetāścāsyātivallabhāḥ / parasparānurāgo hi dhanyānāmeva jāyate

हिन्दी अर्थ

भयड्कर दण्ड लिये साक्षात् यमराज भी कुपित होकर आ जाये, कुबेर, वरुण और सूर्य भी वपुष्मानकी रक्षाका यत्न करें तो भी मैं अपने तीखे बाणोंसे उसका वध कर डालूँगा। जो नियतात्मा, निर्दोष, वनवासी, अपने-आप गिरे हुए फलका आहार करनेवाले तथा सब प्राणियोंके मित्र थे--ऐसे मेरे पिताकी जिसने मुझ-जैसे शक्तिशाली पुत्रके रहते हुए हिंसा

English

fall. And in her will be my ofPspring, 0 king. She will give thee the sixth part; she will be a cause of righteousness.

अध्याय ६५

श्लोक 12

एतन्निशम्यवचनं कलहंसीसमीरितम् ।उवाच चक्रवाकी तां नातिविस्मितमानसा

etanniśamyavacanaṃ kalahaṃsīsamīritam / uvāca cakravākī tāṃ nātivismitamānasā

हिन्दी अर्थ

की है, उसके मांस और रक्तसे आज गृध्र तृप्त हों।'

English

For that reason I have declared this to thee. Bring back my wife who has been carried off, my lord, since your honour is placed supreme for our protection.

अध्याय ६५

श्लोक 13

नायं धन्यो यतो लज्जा नान्यस्त्रीसन्निकर्षतः ।अन्यां स्त्रियमयं भुङ्क्ते न सर्वास्वस्य मानसम्

nāyaṃ dhanyo yato lajjā nānyastrīsannikarṣataḥ / anyāṃ striyamayaṃ bhuṅkte na sarvāsvasya mānasam

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार प्रतिज्ञा करके नरिष्यन्तकुमार दमने मन्त्रियों तथा पुरोहितको बुलाकर कहा --'शूद्र तपस्वीने जो समाचार कहा है, उसे आपलोगोंने सुन लिया होगा। पिताजी तो स्वर्गधाममें जा पहुँचे। अब मेरे लिये जो उचित हो, सो बताओ। आज मैं वही करूँगा, जिसके लिये मेरी माताने आज्ञा दी है। हाथी, घोड़े, रथ और पैदलसे युक्त चतुरड्धिणी सेना

English

The king, on hearing him so speak, took thought, and mounted his great chariot which was furnished with every

अध्याय ६५

श्लोक 14

चित्तानुराग एकस्मिन्नधिष्ठाने यतः सखि ।ततो हि प्रीतिमानेष भार्यासु भविता कथम्

cittānurāga ekasminnadhiṣṭhāne yataḥ sakhi / tato hi prītimāneṣa bhāryāsu bhavitā katham

हिन्दी अर्थ

तैयार करो। पिताके वैरका बदला लिये बिना, पिताके हत्यारेका प्राण लिये बिना तथा माताजीकी आज्ञाका पालन किये बिना मुझे जीवित रहनेका उत्साह नहीं है।” राजाकी यह बात सुनकर खिन्नचित्त हुए मन्त्रियोंने सेवकों और वाहनोंसहित सेनाको कूचके लिये तैयार किया और त्रिकालवैत्ता पुरोहितसे आशीर्वाद ले सब लोग तलवार, शक्ति और ऋष्टि आदि

English

useful requisite. Hither and thither he wandered over the earth with that brahman, and saw a fine hermitage of ascetics

अध्याय ६५

श्लोक 15

एता न दयिताः पत्युर्नैतासां दयितः पतिः ।विनोदमात्रमेवैता यथा परिजनो ऽपरः

etā na dayitāḥ patyurnaitāsāṃ dayitaḥ patiḥ / vinodamātramevaitā yathā parijano 'paraḥ

हिन्दी अर्थ

आयुध लिये नगरसे बाहर निकले। महाराज दम नागराजकी भाँति फुफकारते हुए वपुष्मानूकी ओर चले। उन्होंने वपुष्मानके सीमारक्षकों तथा सामन्तोंका वध करते हुए बड़े वेगसे दक्षिण दिशामें चढ़ाई की। संक्रन्दनकुमार वपुष्मान््को यह पता लग गया कि दम

English

in a large forest; and alighting there he entered and saw a muni, seated on a silken cushion, and blazing as it were with

अध्याय ६५

श्लोक 16

एतासाञ्च यदिष्टो ऽयं तत् किं प्राणान्न मुञ्चति ।आलिङ्गत्यपरां कान्तां ध्यातो वै कान्तयान्यया

etāsāñca yadiṣṭo 'yaṃ tat kiṃ prāṇānna muñcati / āliṅgatyaparāṃ kāntāṃ dhyāto vai kāntayānyayā

हिन्दी अर्थ

दल-बलसहित आ रहा है। इससे उसके मनमें तनिक भी भय या कम्प नहीं हुआ। उसने भी अपनी सेनाको युद्धके लिये तैयार होनेका आदेश दिया और नगरसे बाहर निकलकर दमके पास दूत भेजा। दूतने वहाँ जाकर कहा--'क्षत्रियाधम! तू शीघ्रतापूर्वक मेरे समीप आ। नरिष्यन्त अपनी स्त्रीके साथ तेरी प्रतीक्षा करते हैं। मेरी भुजाओंसे छूटे हुए बाण, जो

English

splendour. Seeing the king arrived, he rose in haste, and welcoming him with full respect commanded his disciple to

अध्याय ६५

श्लोक 17

विद्याप्रदानमूल्येन विक्रीतो ह्येष भृत्यवत् ।प्रवर्तते न हि प्रेम समं बह्वीषु तिष्ठति

vidyāpradānamūlyena vikrīto hyeṣa bhṛtyavat / pravartate na hi prema samaṃ bahvīṣu tiṣṭhati

हिन्दी अर्थ

शानपर चढ़ाकर तीक्ष्ण किये गये हैं, तेरे शरीरमें घुसकर युद्धमें तेरा रक्तपान करेंगे।'

English

bring the arghya offering. His disciple said to him quietly -"Why should the arghya be given to him, 0 muni? Think well of it and command me, for I carry out thy command.’*

अध्याय ६५

श्लोक 18

कलहंसि ! पतिर्धन्यो मम धन्याहमेव च ।यस्यैकस्याञ्चिरं चित्तं यस्याश्चैकत्र संस्थितम्

kalahaṃsi ! patirdhanyo mama dhanyāhameva ca / yasyaikasyāñciraṃ cittaṃ yasyāścaikatra saṃsthitam

हिन्दी अर्थ

दूतकी कही हुई सारी बातें सुनकर दमने अपनी पूर्वोक्त प्रतिज्ञाका पुनः: स्मरण किया और सर्पकी भाँति फुफकारते हुए वेगसे पैर बढ़ाया। कुण्डिनपुरके पास पहुँचकर दमने वपुष्मानको युद्धके लिये ललकारा। फिर तो दोनोंमें भयड्कर संग्राम छिड़ गया। रथी रथसवारके साथ, हाथीसवार हाथीसवारके साथ और घुड़सवार घुड़सवारके साथ भिड़

English

Then the brahman being acquainted with the king’s history, with self-possession did him respect in conversation and by giving him a seat.

अध्याय ६५

श्लोक 19

सर्वसत्त्वरुतज्ञो ऽसौ स्वरोचिरपराजितः ।निशम्य लज्जितो दध्यौ सत्यमेव हि नानृतम्

sarvasattvarutajño 'sau svarociraparājitaḥ / niśamya lajjito dadhyau satyameva hi nānṛtam

हिन्दी अर्थ

गये। इस प्रकार समस्त देवताओं, सिद्धों और गन्धर्व आदिके देखते-देखते दोनों दलोंमें घमासान युद्ध हुआ। जब दम क्रोधपूर्वक युद्ध करने लगे, उस समय पृथ्वी काँप उठी। कोई हाथीसवार, रथी या घुड़सवार ऐसा नहीं मिला, जो उनका बाण सह सके। तदनन्तर वपुष्मान्का सेनापति दमके साथ युद्ध करने लगा। दमने अपने बाणसे उसकी छातीमें गहरी

English

Why hast thou come here, Sir; and what dost thou wish lo do? I know thee, 0 king, to be IJttana-pdda’s son Uttama.

अध्याय ६५

श्लोक 20

ततो वर्षशते याते रममाणो महागिरौ ।रममाणः समं ताभिर्ददर्श पुरतो मृगम्

tato varṣaśate yāte ramamāṇo mahāgirau / ramamāṇaḥ samaṃ tābhirdadarśa purato mṛgam

हिन्दी अर्थ

चोट पहुँचायी, जिससे वह गिरकर प्राणोंसे हाथ धो बैठा। सेनाध्यक्षके गिरते ही राजासहित सारी सेनामें भगदड़ पड़ गयी। तब दमने कहा--'ओ दुष्ट! तू मेरे तपस्वी पिताका, जिनके हाथमें कोई शस्त्र नहीं था, अकारण वध करके कहाँ भागा जाता है। यदि क्षत्रिय है तो लौट आ।' तब वपुष्मान् अपने छोटे भाईके साथ लौट आया। साथमें उसके पुत्र, सम्बन्धी तथा

English

Enough hast thou had of her, 0 brAhman. I toill give thee another wife. An excellent wife tends to one’s happiness,

अध्याय ६५

श्लोक 21

सुस्निग्धपीनावयवं मृगयूथविहारिणम् ।वासिताभिः सुरूपाभिर्मृगीभिः परिवारितम्

susnigdhapīnāvayavaṃ mṛgayūthavihāriṇam / vāsitābhiḥ surūpābhirmṛgībhiḥ parivāritam

हिन्दी अर्थ

बन्धु-बान्धव भी थे। वह रथपर आरूढ़ हो दमके साथ युद्ध करने लगा। दम अपने पिताके वधसे कुपित हो रहे थे। उन्होंने वपुष्मानके चलाये हुए समस्त बाणोंको काट डाला और उसके अड्ज-प्रत्यड्षको बींध डाला। फिर एक-एक बाण मारकर उसके सात पुत्रों, भाइयों, सम्बन्धियों तथा मित्रोंको यमराजके घर भेज दिया। पुत्रों और भाइयोंके मारे जानेपर

English

such a one as that is verily a source of pain. Bodily beauty consists in healthfalncss,t 0 brahman, its cause is a noble disposition. She who has neither beauty nor good disposition should bo abandoned for that very reason.

अध्याय ६५

श्लोक 22

आकृष्टघ्राणपुटका जिघ्रन्तीस्तास्ततो मृगीः ।उवाच स मृगो रामा लज्जात्यागेन गम्यताम्

ākṛṣṭaghrāṇapuṭakā jighrantīstāstato mṛgīḥ / uvāca sa mṛgo rāmā lajjātyāgena gamyatām

हिन्दी अर्थ

वपुष्मान्को बड़ा क्रोध हुआ और वह सर्पोके समान विषैले बाणोंसे दमके साथ युद्ध करने लगा। दमने उसके बाणोंको काट डाला और उसने भी दमके बाण टुकड़े-टुकड़े कर डाले। दोनों ही अत्यन्त क्रोधमें भरकर एक-दूसरेको मार डालनेकी इच्छासे लड़ रहे थे। परस्परके बाणोंकी चोटसे दोनोंके धनुष कट गये, फिर दोनों तलवार हाथमें लेकर पैंतरे बदलने लगे।

English

such a one as that is verily a source of pain. Bodily beauty consists in healthfalncss,t 0 brahman, its cause is a noble disposition. She who has neither beauty nor good disposition should bo abandoned for that very reason.

अध्याय ६५

श्लोक 23

नाहं स्वरोचिस्तच्छीलो न चैवाहं सुलोचनाः ।निर्लज्जा बहवः सन्ति तादृशास्तत्र गच्छतः

nāhaṃ svarocistacchīlo na caivāhaṃ sulocanāḥ / nirlajjā bahavaḥ santi tādṛśāstatra gacchataḥ

हिन्दी अर्थ

दमने क्षणभर अपने मरे हुए पिताका ध्यान किया, फिर दौड़कर वपुष्मान्की चोटी पकड़ ली। तत्पश्चात् उसे धरतीपर पटककर एक पैरसे उसका गला दबा दिया और अपनी भुजा उठाकर कहा--'समस्त देवता, मनुष्य, सिद्ध और नाग देखें, मैं इस नीच क्षत्रिय वपुष्मान्की छाती चीरे डालता हूँ।'

English

such a one as that is verily a source of pain. Bodily beauty consists in healthfalncss,t 0 brahman, its cause is a noble disposition. She who has neither beauty nor good disposition should bo abandoned for that very reason.

अध्याय ६५

श्लोक 24

एका त्वनेकानुगता यथा हासास्पदं जने ।अनेकाभिस्तथैवैको बोगदृष्ट्या निरीक्षितः

ekā tvanekānugatā yathā hāsāspadaṃ jane / anekābhistathaivaiko bogadṛṣṭyā nirīkṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

यों कहकर दमने अपनी तलवारसे उसकी छाती चीर डाली। इस प्रकार अपने पिताके वैरका बदला लेकर वे पुनः अपने नगरको लौट आये। सूर्यवंशके राजा ऐसे ही पराक्रमी हुए। इनके अतिरिक्त भी बहुत-से शूरवीर, विद्वान, यज्ञकर्ता और धर्मज्ञ राजा हो गये हैं। वे

English

such a one as that is verily a source of pain. Bodily beauty consists in healthfalncss,t 0 brahman, its cause is a noble disposition. She who has neither beauty nor good disposition should bo abandoned for that very reason.

अध्याय ६५

श्लोक 25

तस्य धर्मक्रियाहानिरहन्यहनि जायते ।सक्तो ऽन्यभार्यया चान्यकामासक्तः सदैव सः

tasya dharmakriyāhānirahanyahani jāyate / sakto 'nyabhāryayā cānyakāmāsaktaḥ sadaiva saḥ

हिन्दी अर्थ

सभी वेदान्तके पारजड्गत पण्डित थे। मैं उनकी संख्या बतलानेमें असमर्थ हूँ। इन सब राजाओंका चरित्र श्रवण करके मनुष्य पापसे मुक्त हो जाता है।

English

such a one as that is verily a source of pain. Bodily beauty consists in healthfalncss,t 0 brahman, its cause is a noble disposition. She who has neither beauty nor good disposition should bo abandoned for that very reason.

अध्याय ६५

श्लोक 26

यस्तादृशो ऽन्यस्तच्छीलः परलोकपराङ्मुखः ।तं कामयत भद्रं वो नाहं तुल्यः स्वरोचिषा

yastādṛśo 'nyastacchīlaḥ paralokaparāṅmukhaḥ / taṃ kāmayata bhadraṃ vo nāhaṃ tulyaḥ svarociṣā

हिन्दी अर्थ

पक्षी कहते हैं--जैमिनिजी! महातपस्वी मार्कण्डेय मुनिने यह सब कथा सुनाकर क्रौष्टकिजीको विदा कर दिया। उसके बाद मध्याह्नकालकी क्रिया सम्पन्न की। महामुने! हमने भी उनसे जो कुछ सुना था, वह सब आपको कह सुनाया। यह अनादिसिद्ध पुराण ब्रह्माजीने पहले मार्कण्डेय मुनिको सुनाया था।

English

such a one as that is verily a source of pain. Bodily beauty consists in healthfalncss,t 0 brahman, its cause is a noble disposition. She who has neither beauty nor good disposition should bo abandoned for that very reason.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 65
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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