अध्याय ६५
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्जडेयपुराणेठस्वारोचिषे मन्वन्तरेऽ चतुः षष्टितमो ऽध्यायः पञ्चषष्टितमो ऽध्यायः- ६५ मार्कण्डेय उवाच ततः स ताभिः सहितः पत्नीभिरमरद्युतिः ।रराम तस्मिन् शैलेन्द्रे रम्यकानननिर्झरे
iti śrīmārkaṇjaḍeyapurāṇeṭhasvārociṣe manvantare' catuḥ ṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ pañcaṣaṣṭitamo 'dhyāyaḥ- 65 mārkaṇḍeya uvāca tataḥ sa tābhiḥ sahitaḥ patnībhiramaradyutiḥ / rarāma tasmin śailendre ramyakānananirjhare
हिन्दी अर्थ
था, इसलिये उन्होंने कुछ उत्तर नहीं दिया; किन्तु उनकी पत्नी इन्द्रसेनाने सब बातें सच-सच बता दीं। परिचय पाकर वपुष्मानने सोचा, अब तो मैं अपने शत्रुके पिताको पा गया हूँ। यह विचारकर उसने कुपित हो नरिष्यन्तकी जटा पकड़ ली। इन्द्रसेना आँसू बहाती हुई गद्गदकण्ठसे रोने और हाहाकार करने लगी। वपुष्मानने म्यानसे तलवार निकाल ली और
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