Matsya Purana· Matsya Purāṇa
103
अध्याय 103 / 176

Adhyaya 103

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अध्याय १०३

श्लोक 1

मत्स्य-पुराण १०३ अतः परं प्रवक्ष्यामि प्रयागस्योपवर्णनम् मार्कण्डेयेन कथितं यत्पुरा पाण्डुसूनवे

matsya-purāṇa 103 ataḥ paraṃ pravakṣyāmi prayāgasyopavarṇanam mārkaṇḍeyena kathitaṃ yatpurā pāṇḍusūnave

हिन्दी अर्थ

उदिते तु सहस्त्रांशो मेरौ भासाकरे रवौ। नदद्देव बलं कृत्स्नं युगान्त इव सागराः सहस्त्रनयनो देवस्ततः शक्रः पुरन्दरः। सवित्तदः सवरुणस्त्रिपुरं प्रययौ हरः ययुः सिंहरवै्घोरैर्वादित्रनिनहैरपि

English

Brail madatta.

अध्याय १०३

श्लोक 2

भारते तु यदा वृत्ते प्राप्तराज्ये पृथासुते एतस्मिन्नन्तरे राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः

bhārate tu yadā vṛtte prāptarājye pṛthāsute etasminnantare rājā kuntīputro yudhiṣṭhiraḥ

हिन्दी अर्थ

सूतजी कहते हैं-ऋषियो ! प्रकाश बिखेरनेवाले सहस्रांशुमाली सूर्यके मेरुगिरिपर उदित होते ही सारी- को-सारी देवसेना प्रलयकालीन सागरकी तरह उच्च स्वरसे गर्जना करने लगी। तब भगवान् शङ्कर सहस्रनेत्रधारी पुरन्दर इन्द्र, कुबेर और वरुणको साथ लेकर त्रिपुरकी ओर प्रस्थित हुए। उनके पीछे विभिन्न रूपधारी शत्रुविनाशक प्रमथगण भीषण सिंहनाद करते और बाजा बजाते हुए चले। उस समय बजते हुए बाजों, छत्रों और विशाल

English

Yugadatta or Visyaksena (Vibhrftja).

अध्याय १०३

श्लोक 3

भ्रातृशोकेन संतप्तश् चिन्तयन्स पुनः पुनः आसीत्सुयोधनो राजा एकादशचमूपतिः

bhrātṛśokena saṃtaptaś cintayansa punaḥ punaḥ āsītsuyodhano rājā ekādaśacamūpatiḥ

हिन्दी अर्थ

वृक्षॉसे युक्त होनेके कारण वह देवसेना ऐसी लग रही थी, मानो चलता-फिरता वन हो। तत्पश्चात् शङ्करजीकी उस विशाल भयंकर सेनाको आक्रमण करते देखकर संक्षोभो दानवेन्द्राणां समुद्रप्रतिमो बभौ॥ ५ दानवेन्द्रोंका समूह सागरकी तरह संक्षुब्ध हो उठा। प्रगृह्य कोपरक्ताक्षाः सपक्षा इव पर्वताः। निजघ्नुः पर्वतघ्नाय घना इव तपात्यये

English

Ddakena.

अध्याय १०३

श्लोक 4

अस्मान्संताप्य बहुशः सर्वे ते निधनं गताः वासुदेवं समाश्रित्य पञ्च शेषास्तु पाण्डवाः

asmānsaṃtāpya bahuśaḥ sarve te nidhanaṃ gatāḥ vāsudevaṃ samāśritya pañca śeṣāstu pāṇḍavāḥ

हिन्दी अर्थ

मोदमानाः समासेदुर्देवदेवैः सुरारयः कोपाद् वा युद्धलुब्धाश्च कुट्टयन्ते परस्परम्

English

Bhallftta.

अध्याय १०३

श्लोक 5

हत्वा भीष्मं च द्रोणं च कर्णं चैव महाबलम् दुर्योधनं च राजानं पुत्रभ्रातृसमन्वितम्

hatvā bhīṣmaṃ ca droṇaṃ ca karṇaṃ caiva mahābalam duryodhanaṃ ca rājānaṃ putrabhrātṛsamanvitam

हिन्दी अर्थ

प्रवृद्धवेगैस्तैस्तत्र सुरासुरकरेरितैः। आयुधैस्त्रस्तनक्षत्रः क्रियते संक्षयो महान् देवासुरगणैस्तद्ठत् तिमिनक्रक्षयोऽभवत् युद्धाकाङ्क्षी तु बलवान् विद्युन्माल्यहमागतः। यदि त्विदानीं मे जीवन्मुच्यसे नन्दिके श्वर।

English

Janamejaya.

अध्याय १०३

श्लोक 6

राजानो निहताः सर्वे ये चान्ये शूरमानिनः किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा

rājāno nihatāḥ sarve ye cānye śūramāninaḥ kiṃ no rājyena govinda kiṃ bhogairjīvitena vā

हिन्दी अर्थ

फिर तो पंखधारी पर्वतोंकी भाँति विशालकाय दानवोंके नेत्र क्रोधसे लाल हो गये। वे खड्ग, पट्टिश (पट्टे), मूसलोंको लेकर एक साथ ही इन्द्रपर इस प्रकार प्रहार करने लगे, जैसे ग्रीष्म-ऋहतुके बीत जानेपर बादल जलकी वृष्टि करते हैं ॥१--७॥

English

THE LINE OF PRITHU.

अध्याय १०३

श्लोक 7

धिक् कष्टमिति संचित्य राजा वैक्लव्यभागतः निर्विचेष्टो निरुत्साहः किंचित् तिष्ठत्यधोमुखः

dhik kaṣṭamiti saṃcitya rājā vaiklavyabhāgataḥ nirviceṣṭo nirutsāhaḥ kiṃcit tiṣṭhatyadhomukhaḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार मयसहित देवशत्रु हैत्यगण विद्युन्मालीके साथ होकर प्रसन्नतापूर्वक देवेश्वरोंसे टक्कर लेने लगे। उनके मनमें विजयकी आशा तो थी ही नहीं, अतः वे मरनेपर उतारू हो गये थे। उन बलहीनोंकी सेना स्त्रियोंके अवयवोंकी तरह दुर्बल थी। मेघकी-सी कान्तिवाले युद्धकुशल हैत्य परस्पर एक-दूसरेपर प्रहार करते हुए लड़ रहे थे और मेघके समान गरज रहे थे। युद्धलोभी सैनिक प्रज्चलित अग्नि एवं चन्द्रमाके समान तेजस्वी अस्त्रोंद्वारा क्रोधपूर्वक परस्पर एक-दूसरेको मार-पीट-कूट रहे थे। कुछ लोग वञ्रसे घायल होकर, कुछ लोग बाणोंसे विदीर्ण होकर और कुछ लोग चक्रोंसे छिन्न-भिन्न होकर समुद्रके जलमें गिर रहे थे। (हैत्योंकी मारसे) जिनकी मालाओंके सूत्र

English

Bhadr&.Tu (Uve «oo», foau(l«r8 of PaAobAla lino).

अध्याय १०३

श्लोक 8

लब्धसंज्ञो यदा राजा चिन्तयन्स पुनः पुनः कतरो विनियोगो वा नियमं तीर्थमेव च

labdhasaṃjño yadā rājā cintayansa punaḥ punaḥ kataro viniyogo vā niyamaṃ tīrthameva ca

हिन्दी अर्थ

और हार टूट गये थे तथा जिनके वस्त्र और आभूषण नष्ट- भ्रष्ट हो गये थे, वे देवता और गणेश्वर समुद्रमें मगरमच्छों एवं नाकोंके मध्यमें गिर रहे थे। धूमयुक्त सूर्यको-सी कान्तिवाले वेगशाली दानवोंद्वारा क्रोधपूर्वक चलाये गये पर्वतशिखर और शिलाखण्ड आदि आयुधोंका महान् समूह सागरमें गिर रहा था। देवताओं और असुरोंके हाथोंसे वेगपूर्वक चलाये गये आयुधोंसे नक्षत्रगण

English

TABLE Eo. II.

अध्याय १०३

श्लोक 9

येनाहं शीघ्रम् आमुञ्चे महापातकिकिल्बिषात् यत्र स्थित्वा नरो याति विष्णुलोकमनुत्तमम्

yenāhaṃ śīghram āmuñce mahāpātakikilbiṣāt yatra sthitvā naro yāti viṣṇulokamanuttamam

हिन्दी अर्थ

जैसे दो हाथियोंके लड़ते समय क्षुद्र जीवोंका विनाश हो जाता है, उसी तरह देवताओं और असुरोंके संग्रामसे मगरमच्छ और नाकोंका संहार होने लगा तत्पश्चात् विद्युत्समूहोंसे युक्त मेघकी तरह कान्तिमान् विद्युन्मालीने बिजलीसे युक्त बादलकी तरह गरजते हुए नन्दीश्वरपर वेगपूर्वक धावा किया। उस समय वक्ताओंमें रेष्ठ दानव विद्युन्माली बादलकी तरह गरजता हुआ युद्धस्थलमें सूर्यके समान तेजस्वी मुखवाले नन्दीश्वरसे बोला-' नन्दिकेश्वर! मैं बलवान् विद्युन्माली हूँ और युद्ध करनेकी इच्छासे तुम्हारे सम्मुख खड़ा हूँ। अब तुम्हार मेरे हाथोंसे जीवित बच पाना असम्भव है। युद्धस्थलमें वचनोंद्वाग

English

Mudgalo.

अध्याय १०३

श्लोक 10

कथं पृच्छामि वै कृष्णं येनेदं कारितो ऽस्म्यहम् धृतराष्ट्रं कथं पृच्छे यस्य पुत्रशतं हतम्

kathaṃ pṛcchāmi vai kṛṣṇaṃ yenedaṃ kārito 'smyaham dhṛtarāṣṭraṃ kathaṃ pṛcche yasya putraśataṃ hatam

हिन्दी अर्थ

न विद्युन्मालिहननं वचोभिर्युधि दानवम्॥ २० दानव विद्युन्मालीका हनन नहीं किया जा सकता।' तमेवंवादिनं हैत्यं नन्दीशस्तपतां वरः। उवाच प्रहरंस्तत्र वाक्यालङ्कारकोविदः

English

(3) (4) (5)

अध्याय १०३

श्लोक 11

व्यासं कथमहं पृच्छे यस्य गोत्रक्षयः कृतः एवं वैक्लव्यमापन्नो धर्मराजो युधिष्ठिरः रुदन्ति पाण्डवाः सर्वे भ्रातृशोकपरिप्लुताः

vyāsaṃ kathamahaṃ pṛcche yasya gotrakṣayaḥ kṛtaḥ evaṃ vaiklavyamāpanno dharmarājo yudhiṣṭhiraḥ rudanti pāṇḍavāḥ sarve bhrātṛśokapariplutāḥ

हिन्दी अर्थ

दानवाधम कामानां नैषोऽवसर इत्युत। शक्तो हन्तुं किमात्मानं जातिदोषाद् विबृंहसि सागरं तरते दोर्भ्यां पातयेद् यो दिवाकरम्। सोऽपि मां शक्नुयान्नैव चक्षुर्भ्यां समवीक्षितुम् बिभेहैकेषुणा हैत्यः करेणार्क इवाम्बुदम् २५

English

Bribadiu. Jabiuara. Kapila.

अध्याय १०३

श्लोक 12

ये च तत्र महात्मानः समेताः पाण्डवाः स्मृताः कुन्ती च द्रौपदी चैव ये च तत्र समागताः भूमौ निपतिताः सर्वे रुदन्तस्तु समन्ततः

ye ca tatra mahātmānaḥ sametāḥ pāṇḍavāḥ smṛtāḥ kuntī ca draupadī caiva ye ca tatra samāgatāḥ bhūmau nipatitāḥ sarve rudantastu samantataḥ

हिन्दी अर्थ

वृक्षमालोक्य तं छिन्नं दानवेन वरेषुभिः। रोषमाहारयत् तीव्रं नन्दीश्वरः सुविग्रहः सोद्यम्य करमारावे रविशक्रकरप्रभम्। दुद्राव हन्तुं स क्रूरं महिषं गजराडिव

English

Maudgalftyanas, booamc Brahmanas.

अध्याय १०३

श्लोक 13

वाराणस्यां मार्कण्डेयस् तेन ज्ञातो युधिष्ठिरः यथा वैक्लव्यमापन्नो रुदमानस्तु दुःखितः

vārāṇasyāṃ mārkaṇḍeyas tena jñāto yudhiṣṭhiraḥ yathā vaiklavyamāpanno rudamānastu duḥkhitaḥ

हिन्दी अर्थ

शरकण्टकिताङ्को वै शैलादिः सोऽभवत् पुनः। अरेगृहा रथं तस्य महतः प्रययौ जवात् पपात मुनिशापेन सादित्योऽर्करथो यथा तब वाक्यके अलंकारोंके ज्ञाता एवं श्रेष्ठ तेजस्वी नन्दीश्वरने ऐसा कहनेवाले हैत्य विद्युन्मालीपर प्रहार करते हुए कहा-'दानवाधम! तुमलोग इस समय कामासक्त ही हो, जिसका यह अवसर नहीं है। तुम मुझे मारनेमें समर्थ

English

Krahmistha or VasiAtba,

अध्याय १०३

श्लोक 14

अचिरेणैव कालेन मार्कण्डेयो महातपाः सम्प्राप्तो हास्तिनपुरं राजद्वारे ह्यतिष्ठत

acireṇaiva kālena mārkaṇḍeyo mahātapāḥ samprāpto hāstinapuraṃ rājadvāre hyatiṣṭhata

हिन्दी अर्थ

हो तो उसे कर दिखाओ, किंतु जाति-दोषके कारण तुम अपने प्रति ऐसी डींग क्यों मार रहे हो। यदि इससे भी पहले मैंने तुम्हें पशुकी तरह बहुत मारा है तो इस समय तुझ यज्ञविध्वंसीका हनन कैसे नहीं करूँगा ? (तुम समझ लो) जो हाथॉंसे सागरको तैरनेकी तथा सूर्यको आकाशसे गिरा देनेकी शक्ति रखता हो, वह भी मेरी ओर आँख उठाकर नहीं देख सकता।' तब नन्दीश्वरके समान ही बलशाली विद्युन्मालीने इस प्रकार कहते हुए नन्दीश्वरको

English

Indrasona. Bindhyasva {married Menakft).

अध्याय १०३

श्लोक 15

द्वारपालो ऽपि तं दृष्ट्वा राज्ञः कथितवान्द्रुतम् त्वां द्रष्टुकामो मार्कण्डेयो द्वारि तिष्ठत्यसौ मुनिः त्वरितो धर्मपुत्रस्तु द्वारमागादतः परम्

dvārapālo 'pi taṃ dṛṣṭvā rājñaḥ kathitavāndrutam tvāṃ draṣṭukāmo mārkaṇḍeyo dvāri tiṣṭhatyasau muniḥ tvarito dharmaputrastu dvāramāgādataḥ param

हिन्दी अर्थ

एक बाणसे वैसे ही बींध दिया, जैसे सूर्य अपनी किरणसे बादलका भेदन करते हैं। बह बाण नन्दीश्वरके वक्षःस्थलपर जा लगा और उनका शुद्ध रक्त इस प्रकार पीने लगा जैसे सूर्य अपने प्रभावसे नदी और समुद्रके जलको पीते हैं। उस प्रथम प्रहारसे अत्यन्त क्रुद्ध हुए नन्दीश्वरने अपने हाथसे एक वृक्ष उखाड़कर गजराजकी भाँति विद्युन्मालीके ऊपर फेंका। वायुसे प्रेरित हुआ वह वृक्ष घोर शब्द करता और पुष्पोंको बिखेरता हुआ आगे बढ़ा, किंतु विद्युन्मालीके बाणोंसे छिन्न-भिन्न होकर एक बड़े पक्षीकी तरह भूतलपर बिखर गया

English

(1). (2)

अध्याय १०३

श्लोक 16

स्वागतं ते महाभाग स्वागतं ते महामुने अद्य मे सफलं जन्म अद्य मे तारितं कुलम्

svāgataṃ te mahābhāga svāgataṃ te mahāmune adya me saphalaṃ janma adya me tāritaṃ kulam

हिन्दी अर्थ

विद्युन्मालीद्वारा श्रेष्ठ बाणोंके प्रहारसे उस वृक्षको छिन्न-भिन्न हुआ देखकर महाबली नन्दीश्वर अत्यन्त क्रुद्ध हो उठे। फिर तो वे सूर्य और इन्द्रके हाथके समान प्रभावशाली अपने हाथको उठाकर सिंहनाद करते हुए उस क्रूर राक्षसका वध करनेके लिये इस प्रकार झपटे, जैसे गजराज भैंसेपर टूट पड़ता है। नन्दीश्वरको वेगपूर्वक आक्रमण करते देखकर वेगशाली विद्युन्मालीने बलपूर्वक नन्दीश्वरके शरीरको सैकड़ों बाणोंसे व्याप्त कर दिया। उस

English

Divoddsa. d. AhalydSaradvata (Gautama). 1 Gautama clan of Brdhinanas,

अध्याय १०३

श्लोक 17

अद्य मे पितरस्तुष्टास् त्वयि दृष्टे महामुने अद्याहं पूतदेहो ऽस्मि यत्त्वया सह दर्शनम्

adya me pitarastuṣṭās tvayi dṛṣṭe mahāmune adyāhaṃ pūtadeho 'smi yattvayā saha darśanam

हिन्दी अर्थ

समय नन्दीश्वरका शरीर बाणरूपी काँटॉसे भरा हुआ दिखायी पड़ने लगा; तब उन्होंने अपने शत्रु विद्युन्मालीके रथको पकड़कर बड़े वेगसे दूर फेंक दिया। उस समय उस रथके घोड़े उसमें लटके हुए थे और उसका अग्रभाग टूट गया था तथा वह चक्कर काटता हुआ रणभूमिमें उसी प्रकार गिर पड़ा, जैसे मुनिके शापसे सूर्यसहित सूर्यका रथ गिर पड़ा था। तब दितिपुत्र विद्युन्माली मायाके बलसे अपनेको सुरक्षित रखकर रथके भीतरसे निकल पड़ा और आजघान तदा शक्त्या शैलादिं समवस्थितम्॥ ३४ उसने सामने खड़े हुए नन्दीश्वरपर शक्तिसे प्रहार किया।

English

Mitrdyu (married Maitrdyand.)

अध्याय १०३

श्लोक 18

सिंहासने समास्थाप्य पादशौचार्चनादिभिः युधिष्ठिरो महात्मा वै पूजयामास तं मुनिम्

siṃhāsane samāsthāpya pādaśaucārcanādibhiḥ yudhiṣṭhiro mahātmā vai pūjayāmāsa taṃ munim

हिन्दी अर्थ

नन्दिना सादिते हैत्ये विद्युन्मालौ हते मयः। ददाह प्रमथानीकं वनमग्निरिवोद्धतः शूलनिर्दारितोरस्का गदाचूर्णितमस्तकाः। इषुभिर्गाढविद्धाश्च पतन्ति प्रमथार्णवे

English

Satdnanda (a Risi). Maitroya (founder of Bhdrgava Brdhinanas).

अध्याय १०३

श्लोक 19

ततः स तुष्टो मार्कण्डः पूजितश्चाह तं नृपम् आख्याहि त्वरितं राजन् किमर्थं रुदितं त्वया केन वा विक्लवीभूतः का बाधा ते किमप्रियम्

tataḥ sa tuṣṭo mārkaṇḍaḥ pūjitaścāha taṃ nṛpam ākhyāhi tvaritaṃ rājan kimarthaṃ ruditaṃ tvayā kena vā viklavībhūtaḥ kā bādhā te kimapriyam

हिन्दी अर्थ

अथ हैत्यपुराभावे पुष्ययोगो बभूव ह। बभूव चापि संयुक्तं तद्योगेन पुरत्रयम् ततो बाणं त्रिधा देवस्त्रिहैवतमयं हरः। मुमोच त्रिपुरे तूर्ण त्रिनेत्रस्त्रिपथाधिपः आकाशं स्वर्णसंकाशं कृतं सूर्येण रञ्जितम्

English

Satyadhriti,

अध्याय १०३

श्लोक 20

अस्माकं चैव यद्वृत्तं राज्यस्यार्थे महामुने एतत्सर्वं विदित्वा तु चिन्तावशमुपागतः

asmākaṃ caiva yadvṛttaṃ rājyasyārthe mahāmune etatsarvaṃ viditvā tu cintāvaśamupāgataḥ

हिन्दी अर्थ

मुक्त्वा त्रिहैवतमयं त्रिपुरे त्रिदशः शरम्। धिग्धिड्मामेति चक्रन्द कष्टं कष्टमिति ब्रुवन् प्रमथगणोंके नायक नन्दीश्वरने रक्तसे लथपथ हुई उस शक्तिको हाथमें लेकर विद्युन्मालीको लक्ष्य करके फेंक दिया। फिर तो उस शक्तिने विद्युन्मालीके कवचको फाड़कर उसके हृदयको भी विदीर्ण कर दिया, जिससे वह वत्रसे

English

Chaidyavara. Two twins (adopted by bantu),

अध्याय १०३

श्लोक 21

शृणु राजन्महाबाहो क्षत्रधर्मव्यवस्थितम् नैव दृष्टं रणे पापं युध्यमानस्य धीमतः

śṛṇu rājanmahābāho kṣatradharmavyavasthitam naiva dṛṣṭaṃ raṇe pāpaṃ yudhyamānasya dhīmataḥ

हिन्दी अर्थ

मारे गये पर्वतकी तरह धराशायी हो गया इस प्रकार विद्युन्मालीके मारे जानेपर सिद्ध,चारण और किन्नरोंके समूह 'ठीक है, ठीक है' ऐसा कहते हुए शंकरजीकी पूजा करने लगे। इधर नन्दीश्वरद्वारा हैत्य विद्युन्मालीके मारे जानेपर मयने प्रमथोंकी सेनाको उसी प्रकार जलाना आरम्भ किया, जैसे उद्दीप्त दावाग्नि वनको जला डालती है। उस समय शूलके आघातसे जिनके वक्षःस्थल फट गये थे एवं गदाके प्रहारसे मस्तक चूर्ण हो गये थे और जो बाणोंकी मारसे अत्यन्त घायल हो गये थे,

English

Nabadeva].

अध्याय १०३

श्लोक 22

किं पुना राजधर्मेण क्षत्रियस्य विशेषतः तदेवं हृदयं कृत्वा तस्मात्पापं न चिन्तयेत्

kiṃ punā rājadharmeṇa kṣatriyasya viśeṣataḥ tadevaṃ hṛdayaṃ kṛtvā tasmātpāpaṃ na cintayet

हिन्दी अर्थ

ऐसे प्रमथगण समुद्रमें गिर रहे थे। तदनन्तर शत्रुओंके मुखवाले स्वामिकार्तिक-ये सभी असुर-वीरोंसे घिरे हुए मयको श्रेष्ठ अस्त्रोंद्रारा बींधने लगे। उस समय मयने शीघ्र ही एक श्रेष्ठ बाणसे गजारूढ सौ नेत्रोंवाले इन्द्रको तथा ऐरावत नागको विदीर्ण कर यमराज और कुबेरको भी

English

Founders of LINE OF YADAVAS.

अध्याय १०३

श्लोक 23

ततो युधिष्ठिरो राजा प्रणम्य शिरसा मुनिम् पप्रच्छ विनयोपेतः सर्वपातकनाशनम्

tato yudhiṣṭhiro rājā praṇamya śirasā munim papraccha vinayopetaḥ sarvapātakanāśanam

हिन्दी अर्थ

बींध दिया। फिर वह घुमड़ते हुए बादलकी तरह गर्जना करने लगा। इधर प्रमथगणोंद्वारा छोड़े गये बाणोंसे उत्तम वे अत्यन्त घायल होनेके कारण भागकर त्रिपुरमें उसी प्रकार घुस रहे थे, जैसे युद्धस्थलमें चक्रपाणि विष्णुके प्रहारसे असुर। तत्पश्चात् रणभूमिमें शंकरजीकी सेनामें वीरोंका सिंहनाद वञ्रकी गड्गड़ाहटकी भाँति गूँज उठा, जो दानवोंकी पराजयको सूचित कर रहा था। इसी समय उस हैत्यपुरका विनाशक पुष्ययोग आ गया। उस योगके प्रभावसे तीनों पुर संयुक्त हो गये॥ ३७--४४॥

English

*. Yadu (son of Yay&ti).

अध्याय १०३

श्लोक 24

पृच्छामि त्वां महाप्राज्ञ नित्यं त्रैलोक्यदर्शिनम् कथय त्वं समासेन येन मुच्येत किल्बिषात्

pṛcchāmi tvāṃ mahāprājña nityaṃ trailokyadarśinam kathaya tvaṃ samāsena yena mucyeta kilbiṣāt

हिन्दी अर्थ

तब त्रैलोक्याधिपति त्रिनेत्रधारी भगवान् शंकरने शीघ्र ही अपने त्रिदेवमय बाणको तीन भागोंमें विभक्त कर त्रिपुरपर छोड़ दिया। उस छूटे हुए बाणने (तीनों

English

I I I I I Sahasraji, Krostu. Nila. Antika. Laghu,

अध्याय १०३

श्लोक 25

शृणु राजन्महाबाहो सर्वपातकनाशनम् प्रयागगमनं श्रेष्ठं नराणां पुण्यकर्मणाम्

śṛṇu rājanmahābāho sarvapātakanāśanam prayāgagamanaṃ śreṣṭhaṃ narāṇāṃ puṇyakarmaṇām

हिन्दी अर्थ

बाण वृक्षके पुष्पके समान नीले आकाशको स्वर्ण-सदृश प्रभाशाली और सूर्यकी किरणोंसे उद्दत कर दिया। देवेश्वर शम्भु त्रिपुरपर त्रिदेवमय बाण छोड़कर--“ मुझे धिक्कार वैधुर्यं हैवतं दृष्टा शैलादिर्गजवद्गतिः। किमिदं त्विति पप्रच्छ शूलपाणिं महेश्वरम् स मयं प्रेक्ष्य गणपः प्राह काञ्चनसंनिभः । विनाशस्त्रिपुरस्यास्य प्रासो मय सुदारुणः

English

t Haibaya. Haya* Venuha.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_matsyapurANa1-176.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Matsya Purana — Chapter 103
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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