अध्याय १६
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण १६ श्रुत्वैतत् सर्वम् अखिलं मनुः पप्रच्छ केशवम् श्राद्धकालं च विविधं श्राद्धभेदं तथैव च
matsya-purāṇa 16 śrutvaitat sarvam akhilaṃ manuḥ papraccha keśavam śrāddhakālaṃ ca vividhaṃ śrāddhabhedaṃ tathaiva ca
हिन्दी अर्थ
सुन्दर कपिला गौका दान करे। नरश्रेष्ठ! पुन: अनेक प्रकारके भक्ष्य-भोज्य पदार्थासे युक्त एक जलपात्र, जो तिल और जलसे परिपूर्ण हो, दान करे। इस प्रकारके जलपात्रका दान वर्षपर्यन्त करना चाहिए। इस तरह एक वर्ष पूर्ण होनेपर सपिण्डीकरण श्राद्ध किया जाता है । सपिण्डीकरण श्राद्धके पश्चात् प्रेतात्मा पार्वणश्राद्धका भागी हो जाता है तथा पूर्वकथित आभ्युदयिक आदि वृद्धि श्राद्धोंमें भाग पानेके योग्य एवं गृहस्थ हो जाता है
English
cook rice (charu), and after offering with equal handfuls and saying f" 1 am offering to the Pitfis)," shoxild place everything toward the south. — 22-23.