Matsya Purana· Matsya Purāṇa
168
अध्याय 168 / 176

Adhyaya 168

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अध्याय १६८

श्लोक 1

मत्स्य-पुराण १६८ आपवः स विभुर्भूत्वा चारयामास वै तपः छादयित्वात्मनो देहं यादसां कुलसंभवम्

matsya-purāṇa 168 āpavaḥ sa vibhurbhūtvā cārayāmāsa vai tapaḥ chādayitvātmano dehaṃ yādasāṃ kulasaṃbhavam

हिन्दी अर्थ

उसके बाद पुरीन्द्रसेन राजा होगा। फिर इसके बाद सौम्य एवं सुन्दर स्वभाववाला शान्तिकर्ण नामक राजा होगा, जो मात्र एक वर्षतक राज्य करेगा। फिर चकोरस्वातिकर्ण चकोरः स्वातिकर्णस्तु षण्मासान् वै भविष्यति॥ ११ नामक राजा होगा, जो मात्र छः मास ही शासन करेगा।

English

„ 34— Puru installed on the throne. YayAti rules tho country righteously

अध्याय १६८

श्लोक 2

ततो महात्मातिबलो मतिं लोकस्य सर्जने महतां पञ्चभूतानां विश्वो विश्वमचिन्तयत्

tato mahātmātibalo matiṃ lokasya sarjane mahatāṃ pañcabhūtānāṃ viśvo viśvamacintayat

हिन्दी अर्थ

मत्स्यमहापुराणका यह तथा गत २७२ वाँ अध्याय सभी भारतीय इतिहासोंके लिये अत्यन्त प्रामाणिक माने गये हैं। क्रेम्ब्रिज इतिहासके प्रथम भाग, “स्मिथ'के भारतके प्राचीन इतिहासमें तथा भारतीय विद्याभवनके बृहद् इतिहासके दूसरे भागमें इसका विस्तृत विवरण इसी पुराणके आधारपर विवेचित है। पार्जीटर आदिने अनेक अभिलेखोंसे भी इसकी परीक्षा कर शुद्धता और परम प्रामाणिकता स्वीकार कर ली है। राजा च गौतमीपुत्रो होकविंशत्यतो नृपः

English

on tho removal of his old age. The endowment, of youth fro»ii Puru. Yayfiti transfers the kingdom to Puru and goes out to tlio forest ill the company of Brahmauas......... 90-100

अध्याय १६८

श्लोक 3

तस्य चिन्तयमानस्य निर्वाते संस्थिते ऽर्णवे निराकाशे तोयमये सूक्ष्मे जगति गह्वरे

tasya cintayamānasya nirvāte saṃsthite 'rṇave nirākāśe toyamaye sūkṣme jagati gahvare

हिन्दी अर्थ

शिवस्कन्धः शान्तिकर्णाद् भविता ह्यात्मजः समाः । नवविंशतिवर्षाणि यज्ञश्रीः शान्तिकर्णिकः चण्डश्रीः शान्तिकर्णिस्तु तस्य पुत्रः समा दश

English

„ 35,— Ysiy&ti ascends heaven. Uis fall. His return to Hoavon in company

अध्याय १६८

श्लोक 4

ईषत्संक्षोभयामास सो ऽर्णवं सलिलाश्रयः अनन्तरोर्मिभिः सूक्ष्मम् अथ छिद्रमभूत्पुरा

īṣatsaṃkṣobhayāmāsa so 'rṇavaṃ salilāśrayaḥ anantarormibhiḥ sūkṣmam atha chidramabhūtpurā

हिन्दी अर्थ

एकोनत्रिंशति होते आन्धा भोक्ष्यन्ति वै महीम् सप्त गर्दभिलाश्चापि शकाश्चाष्टादशैव तु त्रयोदश गुरुण्डाश्च हूणा ह्योकोनविंशतिः

English

with King Vasiimat............... 100401

अध्याय १६८

श्लोक 5

शब्दं प्रति तदोद्भूतो मारुतश्छिद्रसंभवः स लब्ध्वान्तरमक्षोभ्यो व्यवर्धत समीरणः

śabdaṃ prati tadodbhūto mārutaśchidrasaṃbhavaḥ sa labdhvāntaramakṣobhyo vyavardhata samīraṇaḥ

हिन्दी अर्थ

शतान्यर्ध चतुष्काणि भवितव्यास्त्रयोदश। गुरुण्डा वृषलैः सार्ध भोक्ष्यन्ते म्लेच्छसम्भवाः शतानि त्रीणि भोक्ष्यन्ते वर्षाण्येकादशैव तु। आन्धाः श्रीपार्वतीयाश्च ते द्विपञ्चाशतं समाः

English

„ 8C.— Convorsation between Indra and YayiUi. Narration to liidra of tho

अध्याय १६८

श्लोक 6

विवर्धता बलवता वेगाद्विक्षोभितो ऽर्णवः तस्यार्णवस्य क्षुब्धस्य तस्मिन्नम्भसि मन्थिते कृष्णवर्त्मा समभवत् प्रभुर्वैश्वानरो महान्

vivardhatā balavatā vegādvikṣobhito 'rṇavaḥ tasyārṇavasya kṣubdhasya tasminnambhasi manthite kṛṣṇavartmā samabhavat prabhurvaiśvānaro mahān

हिन्दी अर्थ

तेषूत्सन्नेषु कालेन ततः किलकिला नृपाः भविष्यन्तीह यवना धर्मतः कामतोऽर्थतः। तैर्विमिश्रा जनपदा आर्या म्लेच्छाश्च सर्वशः महाराज विक्रमादित्यको ऐतिहासिक विद्वान् गर्दभिलका ही पुत्र मानते हँ । उन्हींके बाद शकॉका राज्य हुआ था M55

English

instructions imparted to Puru............ tOl

अध्याय १६८

श्लोक 7

ततः संशोषयामास पावकः सलिलं बहु क्षयाज्जलनिधेश्छिद्रम् अभवद्विस्तृतं नभः

tataḥ saṃśoṣayāmāsa pāvakaḥ salilaṃ bahu kṣayājjalanidheśchidram abhavadvistṛtaṃ nabhaḥ

हिन्दी अर्थ

उसके बाद शिवस्वातिनामक राजा होगा, जो अट्टाईस वर्षतक राज्य करेगा। उसके बाद गौतमीपुत्र शातकर्णि राजा होगा, जो इक्कीस वर्षोतक राज्य करेगा। उसका पुत्र पुलोमा अट्टाईस वर्षतक राज्य करेगा। उसके बाद शिवश्री पुलोमा नामक राजा सात वर्षतक राज्य करेगा। इसके बाद शान्तिकर्णका पुत्र शिवस्कन्ध उन्तीस वर्षोतक राज्य करेगा। फिर यज्ञश्री शान्तिकर्णिक नामक राजा उन्तीस वर्षतक राज्य करेगा। उसका पुत्र विजय छः

English

„ 37. Aaika siieaks to Yayfiti wlien ho drops from hoavon on tho

अध्याय १६८

श्लोक 8

आत्मतेजोद्भवाः पुण्या आपो ऽमृतरसोपमाः आकाशं छिद्रसम्भूतं वायुराकाशसंभवः

ātmatejodbhavāḥ puṇyā āpo 'mṛtarasopamāḥ ākāśaṃ chidrasambhūtaṃ vāyurākāśasaṃbhavaḥ

हिन्दी अर्थ

वर्षतक राजा होगा। उसका पुत्र चण्डश्री शान्तिकर्ण दस वर्षतक राज्य करेगा तदनन्तर उसके बाद दूसरा पुलोमा नामक राजा होगा, जो सात वर्षतक राज्य करेगा। इस प्रकार ये उन्तीस (मतान्तरसे ३० या ३१) आन्ध्रवंशी राजा पृथ्वीका उपभोग करेंगे, इनका राज्यकाल चार सौ आठ वर्षाका होगा, भृत्योपनामधारी उन आन्श्रवंशीय राजाओंके वंशज राज्यके अधिकारी होंगे। उनमें सात आन्भ्रवंशीय,

English

Verniinatiou of his merits. Dialogue between Indra and Yayfiti and description of master............... 102

अध्याय १६८

श्लोक 9

आभ्यां संघर्षणोद्भूतं पावकं वायुसंभवम् दृष्ट्वा प्रीतो महादेवो महाभूतविभावनः

ābhyāṃ saṃgharṣaṇodbhūtaṃ pāvakaṃ vāyusaṃbhavam dṛṣṭvā prīto mahādevo mahābhūtavibhāvanaḥ

हिन्दी अर्थ

हूणवंशीय राजा होंगे। फिर सात गर्दभिलवंशीय राजा इस पृथ्वीका उपभोग करेंगे। आठ यवन राजा सत्तासी वर्षतक राज्य करेंगे। सात सहस्र वर्षोतक यह पृथ्वी तुषारोंके अधीन रहेगी। फिर एक तौ तिरासी वर्ष, एक सौ अठारह वर्ष तथा चार सौ पचास वर्षतक अर्थात्

English

„ 38.— Dialogue between AsUka and Yay&ti. Yay.fiti speaks to Astaka about Vedfiiita. Descriptions of tho enjoyments ho had '...103404

अध्याय १६८

श्लोक 10

दृष्ट्वा भूतानि भगवांल् लोकसृष्ट्यर्थमुत्तमम् ब्रह्मणो जन्मसहितं बहुरूपो व्यचिन्तयत्

dṛṣṭvā bhūtāni bhagavāṃl lokasṛṣṭyarthamuttamam brahmaṇo janmasahitaṃ bahurūpo vyacintayat

हिन्दी अर्थ

राजा शूद्रोंके साथ पृथ्वीका उपभोग करेंगे। तीन सौ ग्यारह वर्षतक आग्भ्रवंशीय राजा राज्य करेंगे तथा श्रीपर्वतीयोंका राज्य बावन वर्षतक रहेगा। उसी प्रकार दस आभीर राजा सड़सठ वर्षतक राज्य करेंगे। कालवश उनके विनष्ट हो जानेपर किलकिला नामक राजा होंगे, जो यवन-जातिके होंगे। धर्म, काम, अर्थ-तीनों दृष्टियोंसे आर्य लोग उनकी संस्कृतिसे विमिश्रित हो म्लेच्छ हो जायँगे और आश्रमधर्मका विपर्यय करने लगेंगे। परिणामतः प्रजा नष्ट हो जायगी तथा राजालोग लोभी और असत्यवादी हो जायँगे।

English

„ 39.- Advice to Yayfiti, Astaka asks Yayfiti why did ho como to enjoy

अध्याय १६८

श्लोक 11

चतुर्युगाभिसंख्याते सहस्रयुगपर्यये बहुजन्मा हि विश्वात्मा ब्रह्मणो हविरुच्यते

caturyugābhisaṃkhyāte sahasrayugaparyaye bahujanmā hi viśvātmā brahmaṇo havirucyate

हिन्दी अर्थ

अधार्मिकाश्च येऽत्यर्थं पाषण्डाश्चैव सर्वशः किंचिच्छिष्टाः प्रजास्ता वै धर्मे नष्टे परिग्रहाः

English

the world while he was living in Paradise. Yayfiti's reply. Account of th<i origin of body. Getting a meritorious life througli merits and a sinful life through sins. Account of penance and charity as means of attaining heaven...............104 106 „ 40. Yayfiti's account of different Asramas. Distinctive features of

अध्याय १६८

श्लोक 12

यत्पृथिव्यां द्विजेन्द्राणां तपसा भावितात्मनाम् ज्ञानं वृष्टं तु विश्वार्थे योगिनां याति मुख्यताम्

yatpṛthivyāṃ dvijendrāṇāṃ tapasā bhāvitātmanām jñānaṃ vṛṣṭaṃ tu viśvārthe yogināṃ yāti mukhyatām

हिन्दी अर्थ

असाधवो ह्यसत्त्वाश्च व्याधिशोकेन पीडिता: । अनावृष्टिहताश्चैव परस्परवधेप्सवः वर्णाश्रमपरिश्रष्ठा अधर्मनिरताश्च ताः एवं कष्टमनृप्राप्ता: प्रजा: काले युगान्तके । निःशेषास्तु भविष्यन्ति सार्धं कलियुगेन तु

English

Munis..................100 108

अध्याय १६८

श्लोक 13

तं योगवन्तं विज्ञाय सम्पूर्णैश्वर्यमुत्तमम् पदे ब्रह्मणि विश्वेशं न्ययोजयत योगवित्

taṃ yogavantaṃ vijñāya sampūrṇaiśvaryamuttamam pade brahmaṇi viśveśaṃ nyayojayata yogavit

हिन्दी अर्थ

क्षीणे कलियुगे तस्मिन् दिव्ये वर्षसहस्त्रके । ससन्ध्यांशे सुनिःशेषे कृतं तु प्रतिपत्स्यते एवं वंशक्रमः कृत्स्नः कीर्त्तितो यो मया क्रमात्। अतीता वर्तमानाश्च तथैवानागताश्च ये

English

„ 41. - Yayfiti's refusal to ascend heaven through tho merits of others. Account of tho various regions of heaven. Dialogue between Pratardana and Yayfiti............108-110

अध्याय १६८

श्लोक 14

ततस्तस्मिन्महातोये महीशो हरिरच्युतः जले क्रीडंश्च विधिवन् मोदते सर्वलोककृत्

tatastasminmahātoye mahīśo hariracyutaḥ jale krīḍaṃśca vidhivan modate sarvalokakṛt

हिन्दी अर्थ

महापद्माभिषेकात् तु यावज्जन्म परीक्षित: । एवं वर्षसहस्त्रं तु ज्ञेयं पञ्जाशदुत्तरम् तावत्कालान्तरं भाव्यमान्धान्तादापरीक्षितः। भविष्ये ते प्रसंख्याताः पुराणज्ञैः श्रुतर्षिभिः दम्भ-पाखण्डसे सभी आर्य तथा म्लेच्छ लोग प्रभावहत हो जायँगे। अधार्मिकोंकी वृद्धि होगी, पाखंड बढ़ जायगा। इस प्रकार सन्ध्यामात्र शेष रह जानेपर कलियुगमें जब सभी

English

„ 42. Salvation of Yayfiti. Dialogue between Yayfiti, Vasnm ala and others 110-U2

अध्याय १६८

श्लोक 15

पद्मं नाभ्युद्भवं चैकं समुत्पादितवांस्तदा सहस्रपर्णं विरजं भास्कराभं हिरण्मयम्

padmaṃ nābhyudbhavaṃ caikaṃ samutpāditavāṃstadā sahasraparṇaṃ virajaṃ bhāskarābhaṃ hiraṇmayam

हिन्दी अर्थ

धर्मके विनष्ट हो जानेसे विश्वंखलित रहेगी उस समय सारी प्रजा असत्कर्मपरायण, निर्बल,

English

„ 43. -Description of tho glory of Yadii. Kfirtavirya asks four boons from Datta. Pacifying tho ocean by his thousand arms. Conflnemont of Rfivapa in Mahismati. Curse against Arjuna. Description of 100 sons of Kartavirya of whom five were warriors. Tho fruit of uttering the birth of Kfirtavirya......... 112-115

अध्याय १६८

श्लोक 16

हुताशनज्वलितशिखोज्ज्वलत्प्रभम् उपस्थितं शरदमलार्कतेजसम् विराजते कमलमुदारवर्चसं महात्मनस्तनुरुहचारुदर्शनम्

hutāśanajvalitaśikhojjvalatprabham upasthitaṃ śaradamalārkatejasam virājate kamalamudāravarcasaṃ mahātmanastanuruhacārudarśanam

हिन्दी अर्थ

व्याधि और शोकसे जर्जरित, अनावृष्टिसे पीड़ित, परस्पर एक-दूसरेके संहारके इच्छुक, आश्रयहीन, भयभीत, घोर संकटसे ग्रस्त होकर नदियोंके तटों तथा पर्वतोंपर निवास करेंगी। राजवंशोंके नष्ट हो जानेपर सारी प्रजा घर-द्वारसे विहीन, स्नेहरहित, निर्लज्ज, भाई-मित्र आदिका त्याग कर देनेवाली, वर्णाश्रमधर्मसे भ्रष्ट, अधर्ममें लीन, पत्ते, मूल और फलोंका आहार करनेवाली, पत्तों और मृगचर्मको वस्त्ररूपमें धारण करनेवाली तथा जीविकाके लोभमें सारी पृथ्वीका चक्कर लगाने लगेगी। इस प्रकार कलियुगके अवसानके समय प्रजाएँ कष्ट झेलेंगी। वे कलियुगके साथ ही समाप्त हो जायँगी। तब संध्यासहित कलियुगके एक हजार दिव्य वर्ष बीत जानेपर कृतयुगकी

English

„ 44 - The story of Kfirtavirya and others. Adilya comes to Kfirtavirya in

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_matsyapurANa1-176.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Matsya Purana — Chapter 168
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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