अध्याय १७२
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण १७२ विष्णुत्वं शृणु विष्णोश्च हरित्वं च कृते युगे वैकुण्ठत्वं च देवेषु कृष्णत्वं मानुषेषु च
matsya-purāṇa 172 viṣṇutvaṃ śṛṇu viṣṇośca haritvaṃ ca kṛte yuge vaikuṇṭhatvaṃ ca deveṣu kṛṣṇatvaṃ mānuṣeṣu ca
हिन्दी अर्थ
चाहिए। उनके ऊपर वितान भी लगाया जाय। उनके चारों ओर अठारह प्रकारके धान्य रखे जायँ। इस प्रकार हवन एवं अधिवासनको समाप्ति होनेपर वेदज्ञ ब्राह्मणोंद्वारा स्नान कराये जानेपर यजमान तीन प्रदक्षिणा करके इस “आप अभिलषित पदार्थको प्रदान करनेवाले कल्पवृक्ष हैं, आपको नमस्कार है। देव! आप विश्वका भरण-पोषण करनेवाले विश्वमूर्ति हैं, आपको प्रणाम है। सनातन! चूँकि आप विश्वात्मा, ब्रह्मा, शिव, दिवाकर, मूर्त-अमूर्त तथा इस चराचर विश्वके परम कारणरूप हैं, अतः मेरी रक्षा कीजिये। आप ही अमृतसर्वस्व, अनन्त, अव्यय, पुरुषोत्तम और संतान आदि दिव्य वृक्षॉंसे युक्त हैं, अत: आप इस संसार-सागरसे मेरी रक्षा कीजिये।'
English
„ 13l.- The groat pOAver of the three cities. Maya dreams a bad dream.