Matsya Purana· Matsya Purāṇa
172
अध्याय 172 / 176

Adhyaya 172

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अध्याय १७२

श्लोक 1

मत्स्य-पुराण १७२ विष्णुत्वं शृणु विष्णोश्च हरित्वं च कृते युगे वैकुण्ठत्वं च देवेषु कृष्णत्वं मानुषेषु च

matsya-purāṇa 172 viṣṇutvaṃ śṛṇu viṣṇośca haritvaṃ ca kṛte yuge vaikuṇṭhatvaṃ ca deveṣu kṛṣṇatvaṃ mānuṣeṣu ca

हिन्दी अर्थ

चाहिए। उनके ऊपर वितान भी लगाया जाय। उनके चारों ओर अठारह प्रकारके धान्य रखे जायँ। इस प्रकार हवन एवं अधिवासनको समाप्ति होनेपर वेदज्ञ ब्राह्मणोंद्वारा स्नान कराये जानेपर यजमान तीन प्रदक्षिणा करके इस “आप अभिलषित पदार्थको प्रदान करनेवाले कल्पवृक्ष हैं, आपको नमस्कार है। देव! आप विश्वका भरण-पोषण करनेवाले विश्वमूर्ति हैं, आपको प्रणाम है। सनातन! चूँकि आप विश्वात्मा, ब्रह्मा, शिव, दिवाकर, मूर्त-अमूर्त तथा इस चराचर विश्वके परम कारणरूप हैं, अतः मेरी रक्षा कीजिये। आप ही अमृतसर्वस्व, अनन्त, अव्यय, पुरुषोत्तम और संतान आदि दिव्य वृक्षॉंसे युक्त हैं, अत: आप इस संसार-सागरसे मेरी रक्षा कीजिये।'

English

„ 13l.- The groat pOAver of the three cities. Maya dreams a bad dream.

अध्याय १७२

श्लोक 2

ईश्वरस्य हि तस्यैषा कर्मणां गहना गतिः संप्रत्यतीतान्भव्यांश्च शृणु राजन्यथातथम्

īśvarasya hi tasyaiṣā karmaṇāṃ gahanā gatiḥ saṃpratyatītānbhavyāṃśca śṛṇu rājanyathātatham

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार आमन्त्रित कर उस कल्पवृक्षको गुरुको समर्पित कर दे और संतान आदि वृक्षोंको चार ऋत्विजोंको दे दे। स्वल्प सामग्रियोंके होनेपर एकाग्निपूजनकी भाँति एक गुरुकी ही पूजा करनी चाहिए। इस दानमें न तो कृपणता करनी चाहिए और न विस्मय ही करना चाहिए। जो मनुष्य इस विधिसे कल्पपादपका दान करता है, वह सभी पापोंसे मुक्त होकर अश्वमेधयज्ञका फल प्राप्त करता है। वह सिद्ध, चारण,

English

Alaliiui enters tho city. Tho Danavas vanquished by thi' gods give up truth and virtue and take to vicious courses...... 4-6

अध्याय १७२

श्लोक 3

अव्यक्तो व्यक्तलिङ्गस्थो य एष भगवान्प्रभुः नारायणो ह्यनन्तात्मा प्रभवो ऽव्यय एव च

avyakto vyaktaliṅgastho ya eṣa bhagavānprabhuḥ nārāyaṇo hyanantātmā prabhavo 'vyaya eva ca

हिन्दी अर्थ

किन्नर और अप्सराओंसे घिरा हुआ अपने सगोत्रीय भूत भूतान् भव्यांश्च मनुजांस्तारयेद् गोत्रसंयुतान्॥ १९ तथा भविष्यकालमें होनेवाले पुरुषोंको तार देता है। विमानेनार्कवर्णेन विष्णुलोकं स गच्छति

English

— Tho gods eulogise Hiva. Aditya and others take refuge in

अध्याय १७२

श्लोक 4

एष नारायणो भूत्वा हरिरासीत्सनातनः ब्रह्मा वायुश्च सोमश्च धर्मः शक्रो बृहस्पतिः

eṣa nārāyaṇo bhūtvā harirāsītsanātanaḥ brahmā vāyuśca somaśca dharmaḥ śakro bṛhaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

सोऽपीन्द्रलोकमधिगम्य सहाप्सरोभि- वह स्वर्गलोकमें पुत्र, पौत्र और प्रपौत्रंद्दारा स्तुति किया जाता हुआ सूर्यके समान तेजस्वी विमानपर . चढ़कर विष्णुलोकको जाता है और वहाँ सौ कल्पोंतक निवास करता है। तदनन्तर वह पुनः मृत्युलोकमें राजाधिराज होता

English

Brahma, The gods go to tho place of Bhava (Wiva) in company with Urahraa............... 7-8

अध्याय १७२

श्लोक 5

अदितेरपि पुत्रत्वम् एव याति युगे युगे एष विष्णुरिति ख्यात इन्द्रस्यावरजो विभुः

aditerapi putratvam eva yāti yuge yuge eṣa viṣṇuriti khyāta indrasyāvarajo vibhuḥ

हिन्दी अर्थ

है। यहाँ वह नारायणके पराक्रमसे संयुक्त हो नारायणकी भक्तिमें निरत और उन्हींकी कथाओंमें आसक्त रहता है, जिससे पुन: वैकुण्ठलोकको प्राप्त करता है। जो मनुष्य इस कल्पपादप-दानकी समग्र विधिको पढ़ता या सुनता है अथवा जो अल्पवित्तशाली पुरुष केवल स्मरण करता है, वह भी पापमुक्त होकर इन्द्रलोकमें जाकर अप्सराओंके वसति पापविमुक्तदेहः॥ २२ साथ मन्वन्तरपर्यन्त निवास करता है

English

„ 183.— Building up of a strange chariot.,Brahml and other gods

अध्याय १७२

श्लोक 6

प्रसादजं ह्यस्य विभोर् अदित्याः पुत्रकारणम् वधार्थं सुरशत्रूणां दैत्यदानवरक्षसाम्

prasādajaṃ hyasya vibhor adityāḥ putrakāraṇam vadhārthaṃ suraśatrūṇāṃ daityadānavarakṣasām

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणे महादानानुकीर्तने कल्पपादपप्रदानविधिर्नाम सप्तसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणमें महादान-अनुकीर्तन-प्रसङ्गमें कल्पपादप-प्रदान-विधि नामक दो सौ सतहत्तरवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ

English

descrii)C tho.strength of tho Asuras, iSiva accfq)t.s the position of charioteer of tho gods. The horses unable to bear tho weight of Mahadeva fall on the ground. Eulogy of Kara by tho Risis... 8-tl

अध्याय १७२

श्लोक 7

प्रधानात्मा पुरा ह्येष ब्रह्माणमसृजत्प्रभुः सो ऽसृजत्पूर्वपुरुषः पुराकल्पे प्रजापतीन्

pradhānātmā purā hyeṣa brahmāṇamasṛjatprabhuḥ so 'sṛjatpūrvapuruṣaḥ purākalpe prajāpatīn

हिन्दी अर्थ

गोसहस्त्र-दानकी विधि अथातः सम्प्रवक्ष्यामि महादानमनुत्तमम्। गोसहस्त्रप्रदानाख्यं सर्वपापहरं परम् पुण्यां तिथिं समासाद्य युगमन्वन्तरादिकाम्। पयोव्रतं त्रिरात्रं स्यादेकरात्रमथापि वा

English

— Narada goe.s to Tripur.l and comes to Maya. Their discour.so.

अध्याय १७२

श्लोक 8

असृजन्मानवांस्तत्र ब्रह्मवंशाननुत्तमान् तेभ्यो ऽभवन्महात्मभ्यो बहुधा ब्रह्म शाश्वतम्

asṛjanmānavāṃstatra brahmavaṃśānanuttamān tebhyo 'bhavanmahātmabhyo bahudhā brahma śāśvatam

हिन्दी अर्थ

लोकेशावाहनं कुर्यात् तुलापुरुषदानवत्। पुण्याहवाचनं कुर्याद्धोमः कार्यस्तथैव च सुवर्णघंटिकायुक्तं कांस्यदोहनकान्वितम्

English

Maa in.striiets tlui Daityas how to fight Mahadova...... 11-13

अध्याय १७२

श्लोक 9

एतदाश्चर्यभूतस्य विष्णोः कर्मानुकीर्तनम् कीर्तनीयस्य लोकेषु कीर्त्यमानं निबोध मे

etadāścaryabhūtasya viṣṇoḥ karmānukīrtanam kīrtanīyasya lokeṣu kīrtyamānaṃ nibodha me

हिन्दी अर्थ

सुवर्णतिलकोपेतं हेमपट्ैरलङ्कतम्। मत्स्यभगवान्ने कहा--इसके बाद मैं सभी पापोंको दूर करनेवाले अत्युत्तम गोसहस्र-दान नामक महादानकी विधि बता रहा हूँ। किसी युगादि या मन्वादि पुण्य तिथिके आनेपर त्रिरात्र अथवा एकरात्र पयोव्रत करे। फिर तुलापुरुष-दानकी तरह लोकपालोंका आवाहन, पुण्याहवाचन तथा हवन करना चाहिए। पुनः उसी प्रकार ऋत्विज, मण्डप, पूजन-सामग्री, भूषण, आच्छादन आदिको भी एकत्र करे। तत्पश्चात्

English

„ 135. — Eight between the gods and Asuras. The leadens of the army

अध्याय १७२

श्लोक 10

वृते वृत्रवधे तत्र वर्तमाने कृते युगे आसीत्त्रैलोक्यविख्यातः सङ्ग्रामस्तारकामयः

vṛte vṛtravadhe tatra vartamāne kṛte yuge āsīttrailokyavikhyātaḥ saṅgrāmastārakāmayaḥ

हिन्दी अर्थ

पूर्वनिर्दिष्ट लक्षणोंसे संयुक्त नन्दिकेश्वर (एक वृषभ)- को वेदीके मध्यभागमें स्थापित करे। वेदीके बाहर चारों ओर एक हजार गौओंको, जिनके सींग सोनेसे और खुर चाँदीसे मढ़े गये हों तथा जो वस्त्र और पुष्पमालासे विभूषित हों, स्थापित करे। पुनः वेदीके भीतर ऐसी दस गौओंको प्रविष्ट करे, जिनके गलेमें सोनेकी घंटी पड़ी हो, जो कांसदोहनीसे युक्त, स्वर्णमय तिलकसे सुशोभित, स्वर्णपत्रोंसे अलंकृत,

English

aro stupefied bj Maya's euohaatment. Maya strikes KumAra... 13-17

अध्याय १७२

श्लोक 11

यत्र ते दानवा घोराः सर्वे सङ्ग्रामदुर्जयाः घ्नन्ति देवगणान्सर्वान् सयक्षोरगराक्षसान्

yatra te dānavā ghorāḥ sarve saṅgrāmadurjayāḥ ghnanti devagaṇānsarvān sayakṣoragarākṣasān

हिन्दी अर्थ

माल्यगन्धसमन्वितम्॥ ७ रेशमी वस्त्रसे आच्छादित, पुष्पमाला और चन्दनसे १०६० मत्स्यपुराण हेमरत्नमयैः शृङ्ग श्रामरैरु पशोभितम्। युक्त, स्वर्ण एवं रत्नमय शिखरोंवाले चामरोंसे सुशोभित पादुकोपानहच्छत्रभाजनासनसंयुतम् ॥ ८ तथा पादुका, जूता, पात्र और आसनीसे संयुक्त हों। प्रति गवां दशकमध्ये स्यात् काञ्चनो नन्दिकेश्वरः। 'कौशेयवस्त्रसंवीतो नानाभरणभूषितः

English

First tho itia.ssacpo of the demons, tho dwellers of Tripura by

अध्याय १७२

श्लोक 12

ते वध्यमाना विमुखाः क्षीणप्रहरणा रणे त्रातारं मनसा जग्मुर् देवं नारायणं प्रभुम्

te vadhyamānā vimukhāḥ kṣīṇapraharaṇā raṇe trātāraṃ manasā jagmur devaṃ nārāyaṇaṃ prabhum

हिन्दी अर्थ

शक्तितः पलसाहस्त्रत्रितयं यावदेव तु। गोशतेऽपि दशांशेन सर्वमेतत् समाचरेत् पुण्यकालं समासाद्य गीतमङ्गलनिःस्वनैः।

English

tlie lirst army. The death of Vidyutaumali. Maya through magic enates a lake. fc>ankukara»ia says to tSankara that the lake revives the dead. NAnlyaua taking the form of a bull drinks up the water of the lake reated by Maya......... 17-20

अध्याय १७२

श्लोक 13

एतस्मिन्नन्तरे मेघा निर्वाणाङ्गारवर्चसः सार्कचन्द्रग्रहगणं छादयन्तो नभस्तलम्

etasminnantare meghā nirvāṇāṅgāravarcasaḥ sārkacandragrahagaṇaṃ chādayanto nabhastalam

हिन्दी अर्थ

लोकाधिवासिनीभ्यश्च रोहिणीभ्यो नमो नम: । ब्रह्मादयस्तथा देवा रोहिण्यः पान्तु मातरः। गावः शिरसि मे नित्यं गवां मध्ये वसाम्यहम्। यस्मात् त्वं वृषरूपेण धर्म एव सनातनः

English

— The siego of Tripura. The g.iartl of the lake.s.ny.s to Maya

अध्याय १७२

श्लोक 14

चण्डा विद्युद्गणोपेता घोरनिर्ह्रादकारिणः अन्योन्यवेगाभिहताः प्रववुः सह मारुताः

caṇḍā vidyudgaṇopetā ghoranirhrādakāriṇaḥ anyonyavegābhihatāḥ pravavuḥ saha mārutāḥ

हिन्दी अर्थ

इत्यामन्त्र्य ततो दद्याद् गुरवे नन्दिकेश्वरम् सर्वोपकरणोपेतं गोयुतं च विचक्षणः। ऋत्विग्भ्यो धेनुमेकैकां दशैकाद् विनिवेदयेत्

English

that the,.lake has been d.-uok up bv.some in the form of a bull, Maya goes to The.sea wiih Tripura. Indra eoines there

अध्याय १७२

श्लोक 15

दीप्ततोयाशनिपनैर् वज्रवेगानलानिलैः रवैः सुघोरैरुत्पातैर् दह्यमानम् इवाम्बरम्

dīptatoyāśanipanair vajravegānalānilaiḥ ravaiḥ sughorairutpātair dahyamānam ivāmbaram

हिन्दी अर्थ

नैका बहुभ्यो दातव्या यतो दोषकरी भवेत्। बह्वधश्चैकस्य दातव्या धीमताऽऽरोग्यवृद्धये पुनस्तिष्ठेदेकाहं गोसहस्त्रदः। दस गौओंके बीच रेशमी वस्त्रसे परिवेष्टित, विविध अलंकारोंसे विभूषित तथा पुष्पमाला, ईख और फलोंसे संयुक्त सुवर्णमय साँड़को नन्दीके रूपमें एक द्रोण लवणके ऊपर स्थापित करना चाहिए। इन सब सामग्रियोंका निर्माण

English

to destroy Tripura.............. 20-22

अध्याय १७२

श्लोक 16

तत उल्कासहस्राणि निपेतुः खगतान्यपि दिव्यानि च विमानानि प्रपतन्त्युत्पतन्ति च

tata ulkāsahasrāṇi nipetuḥ khagatānyapi divyāni ca vimānāni prapatantyutpatanti ca

हिन्दी अर्थ

सौ पल सुवर्णसे ऊपर तीन हजार पलतक अपनी आर्थिक शक्तिके अनुसार करना चाहिए। सौ गौओंके दानमें भी इन सबका दशांशरूपसे व्यय करना चाहिए॥ १--११॥ तदनन्तर पुण्यकाल आनेपर गीत एवं माङ्गलिक शब्दोंके साथ वेदज्ञ ब्राह्मणोंद्वारा सर्वौषधिमिश्रित जलसे स्नान कराया हुआ यजमान अझ्जलिमें पुष्प लेकर इस

English

„ 138. — Slaughter of Tsiraka. Description i»f tho war between the

अध्याय १७२

श्लोक 17

चतुर्युगान्तपर्याये लोकानां यद्भयं भवेत् अरूपवन्ति रूपाणि तस्मिन्नुत्पातलक्षणे

caturyugāntaparyāye lokānāṃ yadbhayaṃ bhavet arūpavanti rūpāṇi tasminnutpātalakṣaṇe

हिन्दी अर्थ

नमस्कार है। लोकोंको धारण करनेवाली रोहिणीरूपा गौओंको बारम्बार प्रणाम है। गौओंके अङ्गोंमें इक्कीसों भुवन तथा ब्रह्मादि देवताओंका निवास है, वे रोहिणीस्वरूपा माताएँ मेरी रक्षा करें। गौएँ मेरे अग्रभागमें रहें, गौएँ मेरे पृष्ठभागमें रहें, गौएँ नित्य मेरे सिरपर वर्तमान रहें और मैं गौओंके मध्यमें निवास करूँ। सनातन! चूँकि तुम्हीं वृषरूपसे सनातन धर्म और भगवान् शिवके वाहन हो, अतः मेरी रक्षा करो!' इस प्रकार आमन्त्रित कर बुद्धिमान् यजमान सभी सामग्रियोंके साथ एक गौ और नन्दिकेश्वरको गुरुको दान कर दे तथा उन दसों गायोंमेंसे एक-एक तथा हजार गौओंमेंसे एक-एक सौ, पचास-पचास अथवा बीस-बीस गायें प्रत्येक ऋत्विजूको

English

gods and demon.s. \ hen Sankara wa.s fighting placing one foot on the uack ot a bull and the oth<'r on that of a horso from his tromendoii.s weight, tlio bull and the horse lost their tooth and breast.s. Since tlien bulls and horses have no breasts and teeth. Vidyumu All's words to tho gods............ 22-25

अध्याय १७२

श्लोक 18

जातं च निष्प्रभं सर्वं न प्राज्ञायत किंचन तिमिरौघपरिक्षिप्ता न रेजुश्च दिशो दश

jātaṃ ca niṣprabhaṃ sarvaṃ na prājñāyata kiṃcana timiraughaparikṣiptā na rejuśca diśo daśa

हिन्दी अर्थ

समर्पित कर दे। तत्पश्चात् उनकी आज्ञासे अन्य ब्राह्मणोंको दस-दस या पाँच-पाँच गौएँ देनी चाहिए। एक ही गाय बहुतोंको नहीं देनी चाहिए; क्योंकि वह दोष-प्रदायिनी हो जाती है। बुद्धिमान् यजमानको आरोग्यवृद्धिके लिये एक-एकको अनेक गौएँ देनी चाहिए। इस प्रकार एक हजार गोदान करनेवाला यजमान एक दिनके लिये पुनः पयोत्रत करे और इस महादानका अनुकीर्तन स्वयं

English

I3!j. ' Discourse bctwcou tho demons and Maya. Ratr entered the

अध्याय १७२

श्लोक 19

विवेश रूपिणी काली कालमेघावगुण्ठिता द्यौर्न भात्यभिभूतार्का घोरेण तमसावृता

viveśa rūpiṇī kālī kālameghāvaguṇṭhitā dyaurna bhātyabhibhūtārkā ghoreṇa tamasāvṛtā

हिन्दी अर्थ

श्रावयेच्छृणुयाद वापि महादानानुकीर्तनम्॥ २९ सुनाये अथवा सुने + वाजसने० ८। ४१ आदिमें बार-बार रोहिणीरूपा गौओंको कामधेनु एवं सुरभिरूपा कहा गया है। रोहिणी गौ प्रायः लाल तददिने ब्रह्मचारी स्याद् विदीच्छेद्विपुलां श्रियम्।

English

body of Parvati. Tho amorous pastime of tho Danavas... 25-27

अध्याय १७२

श्लोक 20

तान्घनौघान्स तिमिरान् दोर्भ्यामाक्षिप्य स प्रभुः वपुः संदर्शयामास दिव्यं कृष्णवपुर्हरिः

tānghanaughānsa timirān dorbhyāmākṣipya sa prabhuḥ vapuḥ saṃdarśayāmāsa divyaṃ kṛṣṇavapurhariḥ

हिन्दी अर्थ

सर्वपापविनिर्मुक्तः सिद्धचारणसेवितः सर्वेषां लोकपालानां लोके सम्पूज्यतेऽमरैः

English

„ MO.—Burning of TripurA, Nandi kills Vidyunmali, Nandi says to Maya

अध्याय १७२

श्लोक 21

बलाहकाञ्जननिभं बलाहकतनूरुहम् तेजसा वपुषा चैव कृष्णं कृष्णमिवाचलम्

balāhakāñjananibhaṃ balāhakatanūruham tejasā vapuṣā caiva kṛṣṇaṃ kṛṣṇamivācalam

हिन्दी अर्थ

सप्त लोकानतिक्रम्य ततः शिवपुरं व्रजेत् शतमेकोत्तरं तद्वत् पितृणां तारयेद् बुधः। गोसहस्त्रप्रदो भूत्वा नरकादुद्धरिष्यति

English

".since TripiirA has met with such destruction you should leave tho city. " Tho sorrow of tho wives and children. Tho fruit of reading and listening to this chapter...... 28-32

अध्याय १७२

श्लोक 22

दीप्तपीताम्बरधरं तप्तकाञ्चनभूषणम् धूमान्धकारवपुषं युगान्ताग्निमिवोत्थितम्

dīptapītāmbaradharaṃ taptakāñcanabhūṣaṇam dhūmāndhakāravapuṣaṃ yugāntāgnimivotthitam

हिन्दी अर्थ

तस्य कर्मकरो वा स्यादपि द्रष्टा तथैव च। संसारसागरादस्माद् योऽस्मान् सन्तारयिष्यति अनुभवति मुदं वा मुच्यमानो निकामं

English

„ 141.— Tho group of Pitris who take part in SrAddha when VailA and

अध्याय १७२

श्लोक 23

चतुर्द्विगुणपीनांसं किरीटच्छन्नमूर्धजम् बभौ चामीकरप्रख्यैर् आयुधैरुपशोभितम्

caturdviguṇapīnāṃsaṃ kirīṭacchannamūrdhajam babhau cāmīkaraprakhyair āyudhairupaśobhitam

हिन्दी अर्थ

यदि उसे विपुल समृद्धिकी इच्छा हो तो उस दिन ब्रह्मचर्य-व्रतका पालन करना चाहिए। इस विधिसे जो मनुष्य एक हजार गौओंका दान करता है, वह सभी पापोंसे मुक्त होकर सिंद्धों एवं चारणोंद्वारा सेवित होता है। वह क्षुद्र घंटियोंसे सुशोभित सूर्यके समान तेजस्वी विमानपर आरूढ़ होकर सभी लोकपालोंके लोकोंमें अमरोंद्वारा पूजित होता है एवं वहाँ प्रत्येक मन्वन्तरमें पुत्र-पौत्रसहित निवास: करता है। पुन: सातों लोकोंका अतिक्रमण कर शिवपुरको चला जाता है। वह बुद्धिमान् दाता अपने पितृपक्ष तथा मातृपक्षके पितरोंके एक सौ एक पीढ़ियोंको तार देता है। वह वहाँ पुत्र-पौत्रसे युक्त होकर सौ कल्पोंतक निवास करता है तथा वहाँसे

English

Soma moot. The definition of Sinivali and Kuhfi. Praise of SrAddha 33-36

अध्याय १७२

श्लोक 24

चन्द्रार्ककिरणोद्द्योतं गिरिकूटमिवोच्छ्रितम् नन्दकानन्दितकरं शराशीविषधारिणम्

candrārkakiraṇoddyotaṃ girikūṭamivocchritam nandakānanditakaraṃ śarāśīviṣadhāriṇam

हिन्दी अर्थ

लौटनेपर भूतलपर राजाधिराज होता है। यहाँ वह शिवके ध्यानमें परायण हो सैकड़ों अश्वमेध-यज्ञोंका अनुष्ठान करता है। पुनः वैष्णवयोगको धारणकर बन्धनसे मुक्त हो जाता है। पितर भी हजार गोदान करनेवाले पुत्रका अभिनन्दन करते हैं। (वे अपने हृदयमें सर्वदा यह आकाङ्क्षा करते रहते हैं कि) क्या हमारे कुलमें कोई पुत्र अथवा दौहित्र (कन्याका पुत्र) ऐसा होगा जो हजार गौओंका दान कर हमलोगोंका नरकसे उद्धार करेगा

English

„ 142 — Tho shorter period of a manvantara, Tho measure of time from

अध्याय १७२

श्लोक 25

शक्तिचित्रबलोदग्रं शङ्खचक्रगदाधरम् विष्णुशैलं क्षमामूलं श्रीवृक्षं शार्ङ्गशृङ्गिणम्

śakticitrabalodagraṃ śaṅkhacakragadādharam viṣṇuśailaṃ kṣamāmūlaṃ śrīvṛkṣaṃ śārṅgaśṛṅgiṇam

हिन्दी अर्थ

अथवा इस महादानका कर्मचारी या इसका दर्शक होगा जिससे इस संसारसागरसे हमलोगोंको पार कर देगा। इस प्रकार इस गोसहस्रदानको जो पढ़ता, स्मरण करता अथवा देखता है, वह देवलोकको प्राप्त होता है अथवा जो दान देते समय अत्यन्त हर्षका अनुभव करता है उसका शरीर पापसे मुक्त हो जाता है और वह इन्द्रलोकको प्रहतकलुषदेहः सोऽपि यातीन्द्रलोकम्॥ २९ चला जाता है॥ २२--२९॥

English

the shortest to tho longest. The number of tho rptgas and the number of tho religions based on tho Vedas and tho 7 precious gems. Tho duties of Treta............ 36-39

अध्याय १७२

श्लोक 26

त्रिदशोदारफलदं स्वर्गस्त्रीचारुपल्लवम् सर्वलोकमनःकान्तं सर्वसत्त्वमनोहरम्

tridaśodāraphaladaṃ svargastrīcārupallavam sarvalokamanaḥkāntaṃ sarvasattvamanoharam

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणे महादानानुकीर्तने गोसहस्रप्रदानविधिर्नामाष्टसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणमें महादान-वर्णन-प्रसंगमें गौ-सहस्र प्रदान-विधि नामक दो सौ अठहत्तरवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ

English

„ 143,—The dawn of sacrifice. Vasfi's partiality to the gods in tho

अध्याय १७२

श्लोक 27

नानविमानविटपं तोयदाम्बुमधुस्रवम् विद्याहंकारसाराढ्यं महाभूतप्ररोहणम्

nānavimānaviṭapaṃ toyadāmbumadhusravam vidyāhaṃkārasārāḍhyaṃ mahābhūtaprarohaṇam

हिन्दी अर्थ

कामधेनु-दानकी विधि अथातः सम्प्रवक्ष्यामि कामधेनुविधिं परम्। सर्वकामप्रदं नृणां महापातकनाशनम्॥ लोकेशावाहनं तद्वद्धोमः कार्योऽधिवासनम्।

English

discourse on tho and the gods, Tho rtffis curse him. The source of the oiernal religion......... 39'4l

अध्याय १७२

श्लोक 28

विशेषपत्रैर्निचितं ग्रहनक्षत्रपुष्पितम् दैत्यलोकमहास्कन्धं मर्त्यलोकप्रकाशितम्

viśeṣapatrairnicitaṃ grahanakṣatrapuṣpitam daityalokamahāskandhaṃ martyalokaprakāśitam

हिन्दी अर्थ

स्वल्पे त्वेकाग्निवत्कुर्याद् गुरुरेकः समाहितः। काञ्चनस्यातिशुद्धस्य धेनुं वत्सं च कारयेत्॥ कनीयसी तदर्धेन कामधेनुः प्रकीर्तिता॥

English

Chapter 144. — The duties of the ytigaa — Dwpara, etc.. The profesions of people. The duration of their lives. Departure from the path of virtue of the future people in Unit......... 42-46

अध्याय १७२

श्लोक 29

सागराकारनिर्ह्रादं रसातलमहाश्रयम् मृगेन्द्रपाशैर्विततं पक्षजन्तुनिषेवितम्

sāgarākāranirhrādaṃ rasātalamahāśrayam mṛgendrapāśairvitataṃ pakṣajantuniṣevitam

हिन्दी अर्थ

शक्तितस्त्रिपलादूर्ध्वमशक्तोऽपीह कारयेत्। न्यसेदुपरि तां धेनुं महारत्नैरलङ्कृताम्। मत्स्यभगवानूने कहा--- अब इसके बाद मैं मनुष्योंके महापातकोंको नाश करनेवाले तथा सभी मनोरथोंको पूर्ण करनेवाले कामधेनुके दानकी विधि बतला रहा हूँ। इसमें भी तुलापुरुष-दानकी तरह लोकपालोंका आवाहन, हवन

English

V 146.— The moasuro o| the body altering with the different i/Wis. *

अध्याय १७२

श्लोक 30

शीलार्थचारुगन्धाढ्यं सर्वलोकमहाद्रुमम् अव्यक्तानन्तसलिलं व्यक्ताहंकारफेनिलम्

śīlārthacārugandhāḍhyaṃ sarvalokamahādrumam avyaktānantasalilaṃ vyaktāhaṃkāraphenilam

हिन्दी अर्थ

और स्थापन-कार्य करना चाहिए तथा उसी प्रकार कुण्ड, मण्डप और वेदीकी रचना करनी चाहिए स्वल्प वित्तवाला व्यक्ति एककुण्डीयज्ञाग्निकी विधिसे ऋत्विज्रूपमें समाहित चित्तवाले एकमात्र अपने गुरुका ही वरण करे। इसके लिये वह अत्यन्त शुद्ध सोनेकी कामधेनु और वत्स बनवाये। वह कामधेनु एक हजार पलकी उत्तम, पाँच सौ पलको मध्यम और ढाई सौ पलकी कनिष्ठ कही गयी है। असमर्थ व्यक्तिको भी अपनी शक्तिके अनुसार तीन पलसे

English

Different duties in the different yugns. The height of animals., '(.g, cows, etc. Definition of Achdrya* and others. Definition of Yajria.s. Definition of Ksettra and Ksottrajna. The names of rtflts... 46-61 „ 146. — The killing of T4raka described in brief. In course of describing

अध्याय १७२

श्लोक 31

महाभूततरङ्गौघं ग्रहनक्षत्रबुद्बुदम् विमानविहगव्यातं तोयदाडम्बराकुलम्

mahābhūtataraṅgaughaṃ grahanakṣatrabudbudam vimānavihagavyātaṃ toyadāḍambarākulam

हिन्दी अर्थ

ऊपरको ही कामधेनु बनवानी चाहिए । उसके बाद वेदीपर काले मृगचर्मको फैलाकर उसपर एक प्रस्थ गुड़ रखे। उसीके ऊपर बहुमूल्य रत्नोंसे अलंकृत उस धेनुको स्थापित करे। उस गौके साथ आठ कुम्भ तथा विविध प्रकारके फल हों। फिर वेदीके चारों ओर अठारह प्रकारके अन्न, ईखके आठ टुकड़े, विविध प्रकारके पात्र, आसन तथा ताँबेकी दोहनीको रखना चाहिए॥ १--७॥ उसके बाद दो रेशमी वस्त्रोंसे आच्छादित, दीप, छत्र और आभरणोंसे सुशोभित, चामरयुक्त, कुण्डलधारिणी, घण्टीसे युक्त, सुवर्णजटित सींगों और चाँदीजटित पैरोंवाली गौके सम्पूर्ण शरीरको सभी प्रकारके

English

that in detail description of Vajra. Birth of Guha in the clumps of reeds. Discourse between his mother and Indra. Indra divides the worab of Diti into seven parts and hence the birfh of Maruta. Vajranga captures Indra and releases Jiim at the request of BruhmA. VajrAhga's penance......... 51-54

अध्याय १७२

श्लोक 32

जन्तुमत्स्यगणाकीर्णं शैलशङ्खकुलैर्युतम् त्रैगुण्यविषयावर्तं सर्वलोकतिमिङ्गिलम्

jantumatsyagaṇākīrṇaṃ śailaśaṅkhakulairyutam traiguṇyaviṣayāvartaṃ sarvalokatimiṅgilam

हिन्दी अर्थ

रस, हल्दी, जीरा, धनिया और शक्करसे लेपन करके उसके निकट अनेकों प्रकारके पुष्प और फल रखे। उसके ऊपर पँँचरंगा चँँदोवा ताने। तदनन्तर यजमान माङ्गलिक वेदध्वनिके साथ स्नान कर पुष्प और कुश हाथोंमें लेकर प्रदक्षिणा करके ब्राह्मणको दान दे, फिर

English

„ 147.— Origin of Traka. Discourse between Vajra hga and VarSngi... 65-56 „ 148. — TAraka obtains the boon. Preparation of the war between the gods

अध्याय १७२

श्लोक 33

वीरवृक्षलतागुल्मं भुजगोत्कृष्टशैवलम् द्वादशार्कमहाद्वीपं रुद्रैकादशपत्तनम्

vīravṛkṣalatāgulmaṃ bhujagotkṛṣṭaśaivalam dvādaśārkamahādvīpaṃ rudraikādaśapattanam

हिन्दी अर्थ

हविजाय दद्यादथ दर्भपाणिः ॥ १० गुरुद्वारा उच्चारित मन्त्रोंसे कामधेनुका आवाहन करे। त्वं सर्वदेवगणमन्दिरमड्रभूता लोके यथेप्सितफलार्थविधायिनीं त्वां

English

and demons. Discourse between Brahma and Taraka. BrahmA offers a boon to TAraka. Brihaspatl advises Indra on the tactics of warfare, such as conciliation, etc. It is decided to punish the Daitms. The army of the gods ready to fight...... 66-60

अध्याय १७२

श्लोक 34

वस्वष्टपर्वतोपेतं त्रैलोक्याम्भोमहोदधिम् संध्यासंख्योर्मिसलिलं सुपर्णानिलसेवितम्

vasvaṣṭaparvatopetaṃ trailokyāmbhomahodadhim saṃdhyāsaṃkhyormisalilaṃ suparṇānilasevitam

हिन्दी अर्थ

आसाद्य को हि भवदुःखमुपैति मर्त्यः । संसारदुःखशमनाय यतस्व कामं त्वां कामधेनुमिति वेदविदो वदन्ति

English

„ 149.— Hand to hand fight between gods and demons...... 60-61 „ 150.— KAlnerai defeated in tho groat fight. Visnu gives up yoga-nidrA

अध्याय १७२

श्लोक 35

दैत्यरक्षोगणग्राहं यक्षोरगझषाकुलम् पितामहमहावीर्यं सर्वस्त्रीरत्नशोभितम्

daityarakṣogaṇagrāhaṃ yakṣoragajhaṣākulam pitāmahamahāvīryaṃ sarvastrīratnaśobhitam

हिन्दी अर्थ

प्राप्नोति धाम स पुरन्दरदेवजुष्टं तत्पश्चात् इस प्रकार प्रार्थना करे--' विश्वेधवरि! तुम सभी अङ्गभूता हो । मेरे पापसमूह तुम्हारे दानरूप शस्त्रसे टुकड़े- टुकड़े हो गये हैं, इस कारण मैं परम संतुष्ट हो गया हूँ, अत: तुम्हें नमस्कार करता हूँ। संसारमें यथाभिलषित 'फल प्रदान करनेवाली तुम्हें प्राप्तकर भला कौन मनुष्य

English

and comos to the fight......... 61-70

अध्याय १७२

श्लोक 36

श्रीकीर्तिकान्तिलक्ष्मीभिर् नदीभिर् उपशोभितम् कालयोगिमहापर्वप्रलयोत्पत्तिवेगिनम्

śrīkīrtikāntilakṣmībhir nadībhir upaśobhitam kālayogimahāparvapralayotpattiveginam

हिन्दी अर्थ

सांसारिक दु:खोंमें पड़ सकेगा। तुम सांसारिक दुंःखोंको शान्त करनेके लिये पूर्णरूपसे यत्नशील होओ। इसीलिये वेदवेत्तागण तुम्हें कामधेनु कहते हैं।' इस प्रकार आमन्त्रित कर जो व्यक्ति उत्तम कुल, शील, रूप और गुणसे युक्त ब्राह्मणको इस सुवर्णनिर्मित कामधेनुको दान करता है, वह कन्यासमूहोंसे घिरा हुआ इन्द्रदेवसे सेवित स्वर्ग तथा

English

„ 151.— The wheel killing tho Grasana demon comes to the hand of Visnu... 70-71 „ 152. — Fight with Mathana and others. Ourntman sent to kill Mathana.

अध्याय १७२

श्लोक 37

तं तु योगमहापारं नारायणमहार्णवम् देवाधिदेवं वरदं भक्तानां भक्तिवत्सलम्

taṃ tu yogamahāpāraṃ nārāyaṇamahārṇavam devādhidevaṃ varadaṃ bhaktānāṃ bhaktivatsalam

हिन्दी अर्थ

कन्यागणैः परिवृतः पदमिन्दुमौलेः॥ १३ शंकरके लोकको प्राप्त करता है इति श्रीमत्स्ये महापुराणे महादानानुकीर्तने हिरण्यकामधेनृप्रदानविधिर्नामैकोनाशीत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणमें महादानवर्णन-प्रसङ्गमें हिरण्यकामधेनु-दान-विधि नामक दो सौ उन्यासीवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ

English

Guruda (Garutmaiia) files away with Visun....... 72-73

अध्याय १७२

श्लोक 38

अनुग्रहकरं देवं प्रशान्तिकरणं शुभम् हर्यश्वरथसंयुक्ते सुपर्णध्वजसेविते

anugrahakaraṃ devaṃ praśāntikaraṇaṃ śubham haryaśvarathasaṃyukte suparṇadhvajasevite

हिन्दी अर्थ

हिरण्याश्व-दानकी विधि लोकेशावाहनं कुर्यात् तुलापुरुषदानवत्

English

„ 163.— Taraka wins. Slaughter of Jambha. Visnu slaughters the Daltya named Indra VAhaaa. Indra and others* are captured...... 73-82

अध्याय १७२

श्लोक 39

ग्रहचन्द्रार्करचिते मन्दराक्षवरावृते अनन्तरश्मिभिर्युक्ते विस्तीर्णे मेरुगह्वरे

grahacandrārkaracite mandarākṣavarāvṛte anantaraśmibhiryukte vistīrṇe merugahvare

हिन्दी अर्थ

स्वल्पे त्वेकाग्निवत्कुर्याद्धेमवाजिमखं बुधः कौशेयवस्त्रसंवीतं कारयेद्धेमवाजिनम् पादुकोपानहच्छत्रचामरासनभाजनैः

English

„ 154,— Indra and tho other gods praiso BrahmA. BralimA's discourse with

अध्याय १७२

श्लोक 40

तारकाचित्रकुसुमे ग्रहनक्षत्रबन्धुरे भयेष्वभयदं व्योम्नि देवा दैत्यपराजिताः

tārakācitrakusume grahanakṣatrabandhure bhayeṣvabhayadaṃ vyomni devā daityaparājitāḥ

हिन्दी अर्थ

पूर्णकुम्भाष्टकोपेतं माल्येक्षुफलसंयुतम्। शय्यां सोपस्करां तद्वद्धेममार्तण्डसंयुताम् मत्स्यभगवानूने कहा--अब मैं परम श्रेष्ठ सुवर्णमय अश्वके दानकी विधि बतला रहा हूँ, जिसके प्रदानसे मनुष्य भुवनमें अनन्त फलको प्राप्त करता है। किसी पुण्यतिथिके आनेपर तुलापुरुष-दानकी तरह पुण्याहवाचन

English

VAyfi. Night engaged to carry on tho work of the gods. Indra says to NArada: ** Try to unite MahAdova with tho daughter of tho mountain./' Conversation between Himalaya and Narada. The counsel of tho gods and burning ol Madan. Rati praises Siva and Siva's marriago. Viraka accepted as a son. PArvati practises penance.................. 82-107 „ 165.— KAlikA goes to the place of Gauri's penance for becoming Qauri.

अध्याय १७२

श्लोक 41

ददृशुस्ते स्थितं देवं दिव्ये लोकमये रथे ते कृताञ्जलयः सर्वे देवाः शक्रपुरोगमाः

dadṛśuste sthitaṃ devaṃ divye lokamaye rathe te kṛtāñjalayaḥ sarve devāḥ śakrapurogamāḥ

हिन्दी अर्थ

कर लोकपालोंका आवाहन करे। फिर ऋत्विज्, मण्डप, पूजन-सामग्री, भूषण, आच्छादन आदिका संग्रह करे। बुद्धिमान् यजमान यदि स्वल्पवित्तवाला हो तो उसे यह हिरण्याश्व-यज्ञ एकाग्नि-विधिकी तरह करना चाहिए। उसे अपनी शक्तिके अनुरूप तीन पलसे ऊपर एक हजार पलतकके सोनेका अश्व बनवाना चाहिए और उसे रेशमी वस्त्रसे आच्छादितकर वेदीके ऊपर फैलाये गये काले मृगचर्मपर रखी हुई तिल-राशिपर स्थापित करना चाहिए। उसके निकट पादुका, जूता, छाता, चमर, आसन और पात्र तथा जलसे भरे हुए आठ कलश, पुष्प-माला, ईख और फल भी रखनेका विधान

English

The mutual censure of UmA and Maheswar...... 108-109 %

अध्याय १७२

श्लोक 42

जयशब्दं पुरस्कृत्य शरण्यं शरणं गताः स तेषां तां गिरं श्रुत्वा विष्णुर्दैवतदैवतम्

jayaśabdaṃ puraskṛtya śaraṇyaṃ śaraṇaṃ gatāḥ sa teṣāṃ tāṃ giraṃ śrutvā viṣṇurdaivatadaivatam

हिन्दी अर्थ

नमस्ते सर्वदेवेश वेदाहरणलम्पट। वाजिरूपेण मामस्मात् पाहि संसारसागरात् त्वमेव सप्तधा भूत्वा छन्दोरूपेण भास्कर। यस्माद् भासयसे लोकानतः पाहि सनातन

English

„ 156.— The death of Adi. BrahmA gives a boon to Adi. GirijA's discourse Avith Eusumaraodini, tho presiding deity of the mountain. Adi

अध्याय १७२

श्लोक 43

मनश्चक्रे विनाशाय दानवानां महामृधे आकाशे तु स्थितो विष्णुर् उत्तमं वपुरास्थितः

manaścakre vināśāya dānavānāṃ mahāmṛdhe ākāśe tu sthito viṣṇur uttamaṃ vapurāsthitaḥ

हिन्दी अर्थ

दत्त्वा पापक्षयाद् भानोर्लोकमभ्येति शाश्वतम् सर्वधान्योपकरणं गुरवे विनिवेदयेत् पुराणश्रवणं तद्वत् कारयेद् भोजनादनु

English

adopts the form of UmA to deceive Siva. Sankara's discourse with the demon in tho form of UmA......... 109-111

अध्याय १७२

श्लोक 44

उवाच देवताः सर्वाः सप्रतिज्ञमिदं वचः शान्तिं व्रजत भद्रं वो मा भैष्ट मरुतां गणाः

uvāca devatāḥ sarvāḥ sapratijñamidaṃ vacaḥ śāntiṃ vrajata bhadraṃ vo mā bhaiṣṭa marutāṃ gaṇāḥ

हिन्दी अर्थ

इमं हिरण्याश्वविधिं करोति यः विमुक्तपापप स पुरं मुरारेः प्राप्नोति सिद्धैरभिपूजितः सन्

English

— Curse on Viraka. Origin of the Lion from Devi's wrath, BrahmA gives boon to UmA Devi............111-112

अध्याय १७२

श्लोक 45

जिता मे दानवाः सर्वे त्रैलोक्यं परिगृह्यताम् ते तस्य सत्यसंधस्य विष्णोर्वाक्येन तोषिताः

jitā me dānavāḥ sarve trailokyaṃ parigṛhyatām te tasya satyasaṃdhasya viṣṇorvākyena toṣitāḥ

हिन्दी अर्थ

कनकमयविमानेनार्कलोकं प्रयाति त्रिदशपतिवधूभिः पूज्यते योऽभिपश्येत् हेमाश्वदानमभिनन्दयतीह लोके। स्थानं पुरन्दरमहेश्वरदेवजुष्टम्

English

„ 158.— The brith of Kartikeya. Discourse between Viraka and PArvati.

अध्याय १७२

श्लोक 46

देवाः प्रीतिं समाजग्मुः प्राश्यामृतमिवोत्तमम् ततस्तमः संहृतं तद् विनेशुश्च बलाहकाः

devāḥ prītiṃ samājagmuḥ prāśyāmṛtamivottamam tatastamaḥ saṃhṛtaṃ tad vineśuśca balāhakāḥ

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर वेदज्ञ ब्राह्मणोंद्वारा सर्वौषधिमिश्रित जलसे स्नान कराये जानेके बाद यजमान अज्ञलिमें पुष्प लेकर इस मन्त्रका उच्चारण करे--' सभी देवोंके स्वामी! आपको नमस्कार है। वेदोंके लानेके लिये इच्छुक देव! आप अश्वरूपसे इस संसार-सागरसे मेरी रक्षा कीजिये। भास्कर! चूँकि आप ही छन्दोरूपसे सात भागोंमें विभक्त होकर सभी लोकोंको उद्धासित करते हैं, अतः सनातन! मेरी रक्षा कीजिये'

English

Praise of Viraka................112-114 „ 169.— Tho gods prepare for tho fight. They eulogizo KArtikoya. Mes- senger sent to Taraka. fiAraka sees ill omcMis...... 114-116

अध्याय १७२

श्लोक 47

प्रववुश्च शिवा वाताः प्रशान्ताश्च दिशो दश शुद्धप्रभाणि ज्योतींषि सोमश्चक्रुः प्रदक्षिणाम्

pravavuśca śivā vātāḥ praśāntāśca diśo daśa śuddhaprabhāṇi jyotīṃṣi somaścakruḥ pradakṣiṇām

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार कहकर उस अश्वको गुरुको दान कर दे। इस दानको देनेसे पापके नष्ट हो जानेके कारण वह मनुष्य भगवान् सूर्यके अक्षयलोकको प्राप्त करता है। पुनः अपनी आर्थिक शक्तिके अनुकूल गौओंद्वारा सभी ऋत्विजोंकी भी पूजा करे। तत्पश्चात् धान्यसहित समस्त सामग्रियोंको तथा सम्पूर्ण सामग्रीसहित शय्याको गुरुको निवेदित कर दे। तदुपरान्त वह तैलरहित अन्नका भोजन करे और भोजनके बाद पुराणोंका श्रवण करे। नरेन्द्र! जो मनुष्य पुण्यदिन आनेपर इस हिरण्याश्व-विधिको सम्पन्न करता है वह पापोंसे मुक्त हो सिद्धोंद्वारा पूजित होता हुआ मुरारिके पुर--वैकुण्ठको प्राप्त करता है। जो मनुष्य इस सुवर्णाश्वके दानकी विधिको पढ़ता है, वह

English

„ 160.— KumAra deals the (loath blow to TAraka. The fruit of reading and

अध्याय १७२

श्लोक 48

न विग्रहं ग्रहाश्चक्रुः प्रशान्ताश्चापि सिन्धवः विरजस्काभवन्मार्गा नाकवर्गादयस्त्रयः

na vigrahaṃ grahāścakruḥ praśāntāścāpi sindhavaḥ virajaskābhavanmārgā nākavargādayastrayaḥ

हिन्दी अर्थ

सभी पापोंसे मुक्त होकर अश्वमेध-यज्ञके फलका भागी होता है और सुवर्णमय विमानद्वारा सूर्यके लोकको जाता है तथा जो इस दानको देखता है, वह देवाङ्गनाओंद्वारा पूजित होता है। जो अल्पवित्त पुरुष हिरण्याश्व-दानकी इस विधिको सुनता या स्मरण करता है अथवा लोकमें इसका अभिनन्दन करता है, वह भी पापोंके नष्ट हो जानेसे विशुद्ध शरीरवाला हो पुरन्दर एवं महेश्वरसेवित स्थानको जाता है

English

teaching this chapter................116-117 „ 161,— Hiranyakasyapa practisos penances aud obtains many boons from

अध्याय १७२

श्लोक 49

यथार्थमूहुः सरितो नापि चुक्षुभिरे ऽर्णवाः आसञ्छुभानीन्द्रियाणि नराणामन्तरात्मसु

yathārthamūhuḥ sarito nāpi cukṣubhire 'rṇavāḥ āsañchubhānīndriyāṇi narāṇāmantarātmasu

हिन्दी अर्थ

इति श्रीमत्स्ये महापुराणे महादानानुकीर्तने हिरण्याश्वप्रदानविधिर्नामाशीत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः इस प्रकार श्रीमत्स्यमहापुराणमें महादानवर्णनप्रसङ्गमें हिरण्याश्व-प्रदान-विधि नामक दो सौ असीवाँ अध्याय सम्पूर्ण हुआ हिरण्याश्वरथ-दानकी विधि

English

BrahmA. Tho gods como to Brahma hearing tho terrific boons ac- quired by Hiranyakasyapa. Brahma says that Hiranyakasyapa will be killed by Visnu at tho end of tho penances. Hiranyakasyapa growing haughty by his boons oppressed the gods who approach Visnu. Visnu comforts them saying " I will kill him." Visnu adopts the form of a man-lion and goes to the metropolis of Hiranya- kas'yapa whoso court is described at length, Visnu sees Uiran- yaknsyapa on the lap of Luxury... *'......118-121

अध्याय १७२

श्लोक 50

महर्षयो वीतशोका वेदान् उच्चैरधीयत यज्ञेषु च हविः पाकं शिवमाप च पावकः

maharṣayo vītaśokā vedān uccairadhīyata yajñeṣu ca haviḥ pākaṃ śivamāpa ca pāvakaḥ

हिन्दी अर्थ

अथातः सम्प्रवक्ष्यामि महादानमनुत्तमम्। लोकेशावाहनं कुर्यात् तुलापुरुषदानवत्॥

English

— PrahlAda describes the lion as tho source of tho universe to Hiriiyakasyapu. Hearing that Hiranyakasypa orders the Daityas to capture the lion. Accordingly all those demons struck the lion with various weapons. Then Lord visnu in tho form Of that lion scared those warriors and demons in a trice...... 121-123

अध्याय १७२

श्लोक 51

प्रवृत्तधर्माः संवृत्ता लोका मुदितमानसाः विष्णोर्दत्तप्रतिज्ञस्य श्रुत्वारिनिधने गिरम्

pravṛttadharmāḥ saṃvṛttā lokā muditamānasāḥ viṣṇordattapratijñasya śrutvārinidhane giram

हिन्दी अर्थ

कृष्णाजिने तिलान् कृत्वा काञ्जनं स्थापयेद् रथम् ॥ लोकपालाष्टकोपेतं पद्ारागदलान्वितम्। काल्येक्षुफलसंयुक्तं पुरुषेण समन्वितम्॥

English

CiupTK 108,— The DaLtyas make fraitloss attempts to kill tho lion. Hiranyakasyapu, too, made like wiso futile attempts. Site ominous to*Daityas and propitious to the gods. Hiranyaksyapu armed with all sorts of weapons. Tho lion simply by means of his Claws tore him to pieces,

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_matsyapurANa1-176.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Matsya Purana — Chapter 172
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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