अध्याय ३०
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण ३० अथ दीर्घेण कालेन देवयानी नृपोत्तम वनं तदैव निर्याता क्रीडार्थं वरवर्णिनी
matsya-purāṇa 30 atha dīrgheṇa kālena devayānī nṛpottama vanaṃ tadaiva niryātā krīḍārthaṃ varavarṇinī
हिन्दी अर्थ
देवोंद्वारा सुशोभित थे। गन्धर्व और अप्सराएँ भी नित्य आकर उनकी शोभा बढ़ाती थीं। राजर्षि कार्तवीर्यके महत्त्वको देखकर नारदनामक गन्धर्वने उनके यज्ञमें ऐसी गाथा गायी थी-- भावी क्षत्रिय नरेश निश्चय ही यज्ञ, दान, तप, पराक्रम और शास्त्रज्ञानके द्वारा कार्तवीर्यकी समकक्षताको नहीं प्राप्त होंगे।' योगी अर्जुन रथपर आरूढ़ हो हाथमें खङ्ग, चक्र और धनुष धारण करके सातों द्वीपोंमें भ्रमण करता हुआ चोरों-डाकुओंपर कड़ी दृष्टि रखता था। राजा अर्जुन पचासी हजार वर्षोतक भूतलपर शासन करके समस्त रत्रोंसे परिपूर्ण हो चक्रवर्ती सम्राट् बना रहा। राजा अर्जुन ही अपने योगबलसे पशुओंका पालक था, वही खेतोंका भी रक्षक था और वही समयानुसार
English
aunaka.said: 0 king! Long after that, DevayAni again went to