अध्याय ३२
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण ३२ श्रुत्वा कुमारं जातं सा देवयानी शुचिस्मिता चिन्तयाविष्टदुःखार्ता शर्मिष्ठां प्रति भारत
matsya-purāṇa 32 śrutvā kumāraṃ jātaṃ sā devayānī śucismitā cintayāviṣṭaduḥkhārtā śarmiṣṭhāṃ prati bhārata
हिन्दी अर्थ
अन्धकानामिमं वंशं यः कीर्तयति नित्यशः । आत्मनो विपुलं वंशं प्रजावानाप्नुते नरः शमीका पुत्र प्रतिक्षत्र, प्रतिक्षत्रका पुत्र प्रतिक्षेत्र, उसका पुत्र भोज और उसका पुत्र हृदीक हुआ। हृदीकके दस अनृपम पराक्रमी पुत्र उत्पन्न हुए, उनमें कृतवर्मा ज्येष्ठ और शतधन्वा मँझला था। शेषके नाम (इस प्रकार) हैं-देवार्ह, नाभ, धिषण, महाबल, अजात, वनजात, कनीयक और करम्भक । देवाहके कम्बलनर्हिष नामक विद्वान् पुत्र हुआ । उसका पुत्र असोमजा और असोमजाका पुत्र तमोजा हुआ। इसके बाद सुद, सुनाभ और कृष्ण नामके तीन राजा और हुए जो परम
English
Salnirak$a Agni resides in tiie houses of the people, and fulfils their <Iesijm Kravyada Agni, the sou of Saharak§a. devours the dead the funeral fire). — 31.