अध्याय ७७
श्लोक 1
मत्स्य-पुराण ७७ शर्करासप्तमीं वक्ष्ये तद्वत्कल्मषनाशिनीम् आयुरारोग्यमैश्वर्यं ययानन्तं प्रजायते
matsya-purāṇa 77 śarkarāsaptamīṃ vakṣye tadvatkalmaṣanāśinīm āyurārogyamaiśvaryaṃ yayānantaṃ prajāyate
हिन्दी अर्थ
बारम्बार उनकी प्रदक्षिणा की । पुन: उस रमणीय देवमन्दिरको देखकर उसी आश्रममें निवास करनेका निश्चय किया । तत्पश्चात् उस बिलसे बाहर निकलकर वे किसी अतिशय मनोहारिणी गुफाका आश्रय लेकर नाना प्रकारके पुष्पों, फलों, मूलों तथा गोरसोंद्वारा भगवान् मधुसूदनकी पूजा करते हुए वहीं तपस्यामें संलग्न हो गये। वे नित्य त्रिकाल स्नान तथा अग्निहोत्र करते थे। वे नरेश सभी प्रकारके आहारका परित्याग कर सदा उस देववापी (पोखरी)-
English
iva saiJ, — " 1 shall now explain to you something about the Sarkara Saptaml, (gift ot sugar) the flestroyor of sin, by the observance of which one gets longevity, prosperity and liealtln—l.